
भाग 1: पहली मुलाकात और बातचीत का आगाज
मेरा नाम अनिरुद्ध है और मैं उस समय 22 साल का था। मैंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली थी और नौकरी की तलाश में था। मेरे पिता ने मुझे सलाह दी कि मैं कुछ दिनों के लिए अपनी बुआ के यहाँ रहकर आऊं, क्योंकि वह शहर में ही रहती थीं और मेरे लिए वहाँ नौकरी के बेहतर अवसर हो सकते थे।
मेरी बुआ मीनाक्षी, मेरे पिता की बहन थीं। उनकी उम्र उस समय लगभग 38 साल थी। उनकी शादी काफी छोटी उम्र में हो गई थी, लेकिन कुछ सालों बाद ही उनके पति का देहांत हो गया। तब से वह अपनी एक बेटी के साथ रह रही थीं। उनकी बेटी कृति, मेरी कजिन, उस समय 19 साल की थी और कॉलेज में पढ़ती थी।
जब मैं पहली बार बुआ के घर पहुंचा, तो वह दरवाजा खोलकर मुझे देखती रहीं। उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। मीनाक्षी बुआ बहुत ही खूबसूरत महिला थीं। उनकी लंबी काली जुल्फें, गोरा रंग, और वो करवटदार शरीर… उन्होंने हल्के गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था जो उन पर बेहद खूबसूरत लग रहा था।
“आ जाओ अनिरुद्ध बेटा… कितना बड़ा हो गया है तू!” बुआ ने मुझे गले लगाया।
उनके बदन की गर्मी और वो महक… मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ। मैंने खुद को संभाला और अंदर आ गया।
कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीक चला। मैं सुबह नौकरी के लिए बाहर जाता, शाम को लौटता। बुआ घर संभालतीं, खाना बनातीं। कृति कॉलेज जाती और शाम को दोस्तों के साथ घूमने निकल जाती।
एक शाम, जब मैं जल्दी लौट आया, तो बु�ा अकेले घर पर थीं। कृति अपनी सहेली के यहाँ रुक गई थी। बुआ ने मेरे लिए चाय बनाई और हम बैठकर बातें करने लगे।
“अनिरुद्ध… तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?” बुआ ने अचानक पूछा।
मैं चौंक गया। “नहीं बुआ… अभी तो नहीं।”
“अरे वाह… इतना हैंडसम लड़का और कोई गर्लफ्रेंड नहीं?” बुआ ने मुस्कुराते हुए कहा, “शर्माते क्यों हो? मैं तुम्हारी बुआ हूं, कोई अजनबी थोड़े ही हूं।”
धीरे-धीरे हमारी बातें और गहरी होने लगीं। बुआ ने अपनी जिंदगी के बारे में बताया… कैसे उनकी शादी के कुछ ही सालों में विधवा हो गईं, कैसे उन्होंने अकेले ही कृति को पाला, और कैसे उन्हें कई बार अपनी जरूरतों का एहसास हुआ लेकिन किसी के सामने बोल नहीं पाईं।
“तुम्हें पता है अनिरुद्ध… औरत की कुछ जरूरतें होती हैं जो…” बुआ ने अधूरी बात छोड़ दी।
मैं समझ गया था कि वो क्या कहना चाह रही थीं, लेकिन मैंने अपनी नजरें झुका लीं।
भाग 2: सेक्सी बातचीत की शुरुआत
अगले कुछ दिनों में बुआ का व्यवहार बदलने लगा। वो मेरे सामने और खुलकर रहने लगीं। एक दिन, जब मैं बाथरूम से नहाकर निकला, तो बु�ा सामने खड़ी थीं। मैंने सिर्फ तौलिया पहना हुआ था और मेरे शरीर पर पानी की बूंदें टपक रही थीं।
“अरे वाह… कितना बड़ा हो गया है मेरा भतीजा,” बुआ ने मेरे सीने पर हाथ फेरते हुए कहा।
मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया। मेरा लंड अनायास ही खड़ा होने लगा।
“बुआ…” मैंने हिचकिचाते हुए कहा।
“क्या हुआ? शर्मा क्यों रहे हो? तुम्हारे चाचा भी ऐसे ही मजबूत थे,” बुआ ने आंखें मारते हुए कहा।
वो दिन बदल गया था। अब बुआ मेरे साथ खुलकर बातें करतीं। रात के खाने के बाद, जब कृति अपने कमरे में चली जाती, तो बुआ मेरे कमरे में आकर बैठ जातीं और हम घंटों बातें करते।
“अनिरुद्ध… कभी किसी लड़की को छुआ है?” एक रात बुआ ने पूछा।
मैंने मना किया तो बुआ हंस पड़ीं। “अब तो मर्द बन गए हो… क्या करोगे कुंवारे मरकर?”
धीरे-धीरे बुआ की बातें और बिंदास होती गईं। वो मुझे अपने पति के बारे में बतातीं, उनकी सेक्स लाइफ के बारे में, और कैसे वो सालों से तड़प रही थीं।
“एक औरत को चाहिए होता है अनिरुद्ध… कोई जो उसकी जरूरतों को समझे,” बुआ ने मेरे हाथ को अपने हाथ में लेते हुए कहा।
मैंने उनका हाथ सहलाया और उनकी आंखों में देखा। उनमें वो तड़प साफ दिख रही थी।
“क्या तुम मेरी मदद करोगे अनिरुद्ध?” बुआ ने धीमी आवाज में पूछा।
मैं समझ गया था कि वो क्या कह रही थीं। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। मैंने हामी भर दी।
भाग 3: बुआ की चाल और मम्मी-पापा की शिकायत
लेकिन यह कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। अगले ही दिन, जब मैं ऑफिस से लौटा, तो मैंने देखा कि मेरे माता-पिता बुआ के घर पर बैठे थे। मेरे पिता का चेहरा गुस्से से लाल था और मेरी मां रो रही थीं।
“क्या हुआ?” मैंने घबराकर पूछा।
“क्या हुआ? ये पूछो कि तुमने क्या किया?” पिता ने चिल्लाते हुए कहा।
तभी बुआ बाहर आईं। उनका चेहरा बदला हुआ था। वो रोने का नाटक कर रही थीं।
“भैया… मैंने सोचा था कि यहाँ रहेगा तो संभल जाएगा, लेकिन यह तो…” बुआ ने रोते हुए कहा।
“क्या किया मैंने?” मैं हैरान था।
“क्या किया? मेरी बहन को परेशान कर रहा था तू! उसे गलत तरीके से छूने की कोशिश कर रहा था!” पिता ने मुझे थप्पड़ मारते हुए कहा।
मैं समझ गया। बुआ ने पलटी मारी थी। उन्होंने मेरे माता-पिता को फोन करके यह कहा था कि मैं उन्हें परेशान कर रहा हूं, उनसे गंदी बातें कर रहा हूं।
“नहीं पापा… ऐसा कुछ नहीं है… बुआ ही तो…” मैंने समझाने की कोशिश की।
“चुप! अपनी बुआ के बारे में गंदी बातें करेगा? तेरी तो…” पिता ने मुझे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया।
मेरे माता-पिता मुझे वहीं से ले गए। घर जाकर भी मेरी पिटाई हुई। मैं रोता रहा, समझाता रहा, लेकिन किसी ने नहीं सुना। मेरी मां भी मुझे गंदा लड़का कहकर रो रही थीं।
भाग 4: कृति की खुशी और धोखे से लंड का दर्शन
कुछ दिनों बाद, जब मामला थोड़ा शांत हुआ, तो मेरी कजिन कृति हमारे घर आई। वो मुझे मिलने आई थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।
“क्या हुआ कृति? तुम खुश क्यों लग रही हो?” मैंने पूछा।
“कुछ नहीं… बस ऐसे ही,” कृति ने मुस्कुराते हुए कहा।
कृति ने बताया कि बुआ ने उसे सब कुछ बता दिया था… कैसे वो मुझे फंसाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन जब मैंने हामी भर दी तो उन्हें डर लग गया कि कहीं यह बात खुल न जाए, इसलिए उन्होंने ही मेरे माता-पिता को फोन करके उल्टा मुझ पर आरोप लगा दिया।
“मुझे पता है कि तुमने कुछ नहीं किया… मम्मी तुम्हें फंसाना चाहती थीं,” कृति ने कहा।
लेकिन कृति की नजरें मुझे अजीब तरह से देख रही थीं। वो मेरे शरीर को घूर रही थी।
“तुम सच में बहुत हैंडसम हो अनिरुद्ध भैया,” कृति ने कहा।
उस दिन शाम को, जब मैं बाथरूम में नहा रहा था, तो मुझे लगा कि दरवाजे के पास कोई है। मैंने झांककर देखा तो कृति वहाँ से भागती हुई दिखी। लेकिन मुझे पता था कि वो क्या कर रही थी।
अगले दिन, कृति ने मुझसे कहा, “कल तुम्हारा तौलिया खुला हुआ था… मैंने सब कुछ देख लिया।”
मैं शर्मिंदा हो गया।
“क्या बात है भैया… तुम तो काफी बड़े हो,” कृति ने शरारत से कहा।
भाग 5: बुआ का रिझाना और झूठ
कुछ महीनों बाद, बुआ ने फिर से संपर्क किया। उन्होंने मुझे फोन करके माफी मांगी और कहा कि वो मुझसे मिलना चाहती हैं।
मैं उनके घर गया। बुआ ने मुझे गले लगाया और रोने लगीं।
“मुझे माफ कर दो अनिरुद्ध… मैंने गलती की। मुझे डर लग गया था। लेकिन अब मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती,” बुआ ने कहा।
वो मुझे रिझाने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने मेरे लिए खाना बनाया, मेरे पैर दबाए, और फिर…
“आज रात को रुक जाओ अनिरुद्ध… कृति अपनी नानी के यहाँ गई है। हम अकेले हैं,” बुआ ने कहा।
रात को, बुआ ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। वो एक सेक्सी नाइटी में थीं। उनके बदन की खुशबू कमरे में भर गई थी।
“आज मैं तुम्हें वो सिखाऊंगी जो स्कूल में नहीं सिखाया जाता,” बुआ ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।
वो मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे ऊपर आ गईं। उन्होंने मेरे होठों पर चूमा, मेरे गालों को सहलाया, और धीरे-धीरे नीचे बढ़ती गईं।
“बुआ… यह ठीक नहीं है,” मैंने कहा।
“शhhh… आज कोई नहीं है। बस तुम और मैं,” बुआ ने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा।
उन्होंने मेरे कपड़े उतार दिए। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था। बुआ उसे देखकर मुस्कुराईं।
“कितना बड़ा है तुम्हारा… यह तो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी खोज है,” बुआ ने कहा।
वो मेरे लंड को चूसने लगीं। मैं सातवें आसमान पर था। उनकी गर्म गर्म जीभ मेरे लंड पर घूम रही थी।
फिर बुआ ने अपनी नाइटी उतार दी। उनके गोल-गोल बूब्स मेरे सामने थे। मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया।
“आहhh… हां… ऐसे ही…” बुआ कराहने लगीं।
मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटाया और उनके पैर फैलाए। उनकी चूत पूरी तरह से गीली थी। मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाया।
“आहhh… धीरे… बहुत बड़ा है तुम्हारा…” बुआ चीखीं।
मैंने उन्हें धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। उनकी चूत बहुत टाइट थी, लेकिन गीली होने की वजह से मेरा लंड आसानी से अंदर जा रहा था।
“चोदो मुझे… हां… और जोर से…” बुआ चिल्लाने लगीं।
मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। बुआ की चूत से पानी निकलने लगा था।
“मैं झड़ने वाली हूं… हां… और तेज…” बुआ ने कहा।
मैंने स्पीड बढ़ा दी। बुआ की कमर हवा में उठने लगी और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगीं।
“आहhh… मैं झड़ गई… तुम भी निकाल दो…” बुआ ने कहा।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उनके मुंह में दे दिया। बुआ ने मेरा सारा माल पी लिया।
भाग 6: झूठ की परतें और नई शुरुआत
लेकिन यह सब एक झूठ था। अगले दिन, जब मैं जागा, तो बु�ा मेरे बगल में नहीं थीं। मुझे एक चिट्ठी मिली जिसमें लिखा था: “अनिरुद्ध, यह सब एक खेल था। मैंने तुम्हें फंसाया। अब मेरे पास सबूत हैं। अगर तुमने किसी को कुछ बताया तो मैं यह सब तुम्हारे माता-पिता को दिखा दूंगी।”
मैं समझ गया। बुआ ने मुझे फिर से फंसाया था। उन्होंने मेरे साथ सोने का नाटक किया था, लेकिन असल में वो मुझे ब्लैकमेल करना चाहती थीं।
लेकिन इस बार मैंने हार नहीं मानी। मैंने कृति को सब कुछ बताया। कृति ने मुझे बुआ के पुराने फोन से कुछ वीडियो दिखाए जिसमें बुआ कुछ और लड़कों के साथ थीं।
हमने मिलकर एक प्लान बनाया। मैंने बुआ को कहा कि मैं उनकी बात मानने को तैयार हूं, लेकिन एक शर्त पर – कि वो मुझे अपने सभी सबूत देंगी।
जब बुआ मुझे मिलीं, तो कृति छिपकर वीडियो बना रही थी। इस बार बुआ ने जो कुछ भी कहा, वो सब रिकॉर्ड हो गया।
“तुम मुझे ब्लैकमेल कर रही थीं बुआ… यह सब झूठ था,” मैंने कहा।
बुआ के पैरों तले जमीन खिसक गई। कृति बाहर आ गई।
“मम्मी… अब क्या करोगी? अगर यह सब पापा के दोस्तों को पता चल गया तो?” कृति ने कहा।
बुआ रोने लगीं। उन्होंने माफी मांगी।
लेकिन अब मैंने फैसला किया था। मैंने बुआ को कहा कि अगर वो चाहती हैं कि यह सब छुपा रहे तो उन्हें मेरी हर बात माननी होगी।
उस रात, जब कृति सो गई, मैंने बुआ को उनके कमरे में बुलाया। वो डरी हुई थीं।
“क्या चाहते हो तुम?” बुआ ने पूछा।
“वही जो तुम मुझसे चाहती थीं… लेकिन इस बार असली,” मैंने कहा।
मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटाया। इस बार कोई नाटक नहीं था, कोई झूठ नहीं था। बुआ ने खुद अपने कपड़े उतारे। उनकी आंखों में वो तड़प फिर से आ गई थी, लेकिन इस बार यह असली थी।
मैंने उन्हें धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। बुआ की सिसकियां असली थीं। उनकी चूत पहले से भी ज्यादा गीली थी।
“मुझे माफ कर दो… मैंने तुम्हें बहुत तकलीफ दी…” बुआ ने कहा।
“शhhh… अब बस चुपचाप चुदो,” मैंने कहा।
मैंने उन्हें पूरी रात चोदा। कभी मिशनरी पोजीशन में, कभी डॉगी स्टाइल में, कभी उनके ऊपर लेटकर।
बुआ झड़ चुकी थीं कई बार, लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उनके हर छेद का इस्तेमाल किया। उनका मुंह, उनकी चूत, और फिर…
“प्लीज… वहाँ मत…” बुआ ने कहा जब मैंने उनकी गांड के पास अपना लंड रखा।
“आज तुम मना नहीं कर सकतीं,” मैंने कहा और एक जोरदार धक्का लगाया।
बुआ चीख उठीं। मेरा पूरा लंड उनकी गांड में घुस गया था।
“आहhh… बहुत दर्द हो रहा है…”
“बस थोड़ी देर में मजा आएगा,” मैंने कहा और धक्के लगाने शुरू कर दिए।
धीरे-धीरे बुआ को भी मजा आने लगा। वो अपनी गांड उछालने लगीं।
“हां… और तेज… चोदो मेरी गांड…”
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाए और फिर अपना माल उनकी गांड में ही छोड़ दिया।
अंत: नई शुरुआत
उस रात के बाद बुआ बदल गईं। उन्होंने मुझसे सच्ची माफी मांगी और हमारे बीच एक अजीब सा रिश्ता बन गया। वो मेरी प्यारी बुआ थीं, लेकिन रात को वो मेरी रांड बन जाती थीं।
कृति भी इस सब से वाकिफ थी। कभी-कभी वो भी हमारे साथ शामिल हो जाती। लेकिन यह एक अलग कहानी है…
बुआ ने मुझे सिखाया कि औरत की तड़प क्या होती है। और मैंने उन्हें सिखाया कि एक मर्द का लंड कैसे संभाला जाता है।
यह थी वो कहानी जो स्कूल में नहीं पढ़ाई जाती… बुआ ने जो सिखाया, वो जिंदगी भर याद रहेगा।