मेरा नाम राधे है मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा मोका मिलेगा कि मुझे मेरे ऑफिस की भाभीजी और वो शाम आज भी याद है जिसके बारे में तुम सबको बताने जा रहे हो
दफ्तर की शाम – एक खतरनाक खेल
ऑफिस का महौल वहीं था, लेकिन ज्योति जी के लिए हर शाम एक चुनौती बन चुकी थी। उनका पति, रमेश, एक बेहद शक्की और गुस्से वाला इंसान था। वो अक्सर ऑफिस के बाहर अपनी गाड़ी लेकर ज्योति जी को लेने आ जाता था, ताकि वो यह देख सके कि वो किसके साथ उठ-बैठ रही हैं और कहां जा रही हैं। रमेश की इस हरकत की वजह से ज्योति जी हमेशा एक अजीब सा डर और दबाव में रहती थीं। अगर ऑफिस से निकलने में थोड़ी सी भी देर हो जाती, तो रमेश का शक और गुस्सा और बढ़ जाता था।
राधे यह सब पास से देख रहा था। वो जानता था कि ज्योति जी के घर का माहौल कितना घुटन भरा और परेशानियों से भरा हुआ है। रमेश का हर बात पर शक करना और बिना वजह तोकना ज्योति जी को अंदर से तोड़ रहा था, लेकिन वो एक पारंपरिक औरत थीं – पति को छोड़ने का सोच भी नहीं सकती थीं।
एक दिन, ऐसी ही एक शाम थी। ज्योति जी ऑफिस से निकलने ही वाली थीं कि रमेश की गाड़ी का हॉर्न सुनाई दिया। ज्योति जी का चेहरा फीका पड़ गया क्योंकि आज उन्हें एक अर्जेंट फाइल राधे को देनी थी, और इस वजह से उन्हें बस पांच मिनट की देर हो गई थी। ज्योति जी घबराई हुई जल्दी से नीचे गईं, लेकिन रमेश पहले ही गाड़ी से उतरकर गेट पर खड़ा था।
रमेश ने गुस्से में आकर सबके सामने कहा, “इतनी देर क्यों लग गई? किसके साथ बैठ कर बातें चल रही थीं अंदर? आजकल तुम्हारा ध्यान काम पर कम और दूसरी जगह ज्यादा रहता है!”
ज्योति जी की आंखों में आंसू आ गए, लेकिन डर की वजह से वो कुछ बोल नहीं पाईं और चुपचाप गाड़ी में बैठ गईं। राधे यह सब अपने केबिन की खिड़की से देख रहा था। उसे ज्योति जी पर बहुत तरस आया और साथ ही रमेश की इस घटिया हरकत पर गुस्सा भी आया। उसने सोच लिया कि ज्योति को हासिल करना है, लेकिन यह आसान नहीं होगा।
पहली चाल – नजदीकियां बढ़ाना
अगले कुछ हफ्तों में राधे ने धीरे-धीरे ज्योति के करीब आने की कोशिश की। वो उनकी मदद करता, उनके लिए चाय लाता, और कभी-कभी उनकी तारीफ करता। लेकिन ज्योति हमेशा दूर रहतीं – वो एक विवाहिता थीं और अपने पति के प्रति वफादार रहना चाहती थीं, भले ही वो कितना भी गलत क्यों न हो।
एक दिन शाम को ऑफिस में बिजली चली गई। सिर्फ इमरजेंसी लाइट्स जल रही थीं। ज्योति अपनी सीट पर बैठी फाइलें ठीक कर रही थीं जब राधे अंधेरे में उनके पास आया।
“ज्योति जी, मैं आपको घर छोड़ दूं? रमेश जी को फोन करके बोल दीजिए कि आप मेरे साथ हैं,” राधे ने कहा।
“नहीं… नहीं, वो नाराज हो जाएंगे। मैं बस आती हूं,” ज्योति ने मना किया।
लेकिन राधे ने जिद की। अंधेरे में उसका हाथ ज्योति के हाथ से टच हुआ, और ज्योति ने तुरंत हाथ खींच लिया। उनका दिल तेज धड़क रहा था, लेकिन वो खुद को समझा रही थीं कि यह गलत है।
“प्लीज, मुझ पर भरोसा कीजिए। मैं सिर्फ आपकी मदद करना चाहता हूं,” राधे ने कहा।
आखिरकार ज्योति मान गईं। राधे ने उन्हें अपनी कार में बिठाया और घर की तरफ चल दिया। रास्ते में राधे ने बातें करनी शुरू की – रमेश के बर्ताव के बारे में, ज्योति की खुशियों के बारे में।
“आप इतनी खूबसूरत हैं, इतनी समझदार हैं… आपको यह सब सहना नहीं चाहिए,” राधे ने कहा।
“मजबूरी है… मैं क्या करूं?” ज्योति ने कहा।
“कुछ नहीं… बस खुद को खुश रखने का हक मांगिए,” राधे ने कहा और उनका हाथ सहलाया।
इस बार ज्योति ने हाथ नहीं खींचा, लेकिन उनका चेहरा गंभीर था। वो जानती थीं कि यह सब गलत दिशा में जा रहा है।
ऑफिस में भाभीजी और वो शाम : दूसरा दौर – मजबूरी का फायदा
कुछ दिनों बाद एक बड़ी परेशानी आई। रमेश को काम से दो हफ्ते के लिए दूसरे शहर जाना पड़ा। ज्योति अकेली घर में थीं, और उन्हें डर लग रहा था। राधे को यह बात पता चली तो उसने मौका देखकर चौका मारने का सोचा।
वो शाम को ज्योति के घर के पास गया और उन्हें फोन किया। “ज्योति जी, एक जरूरी फाइल है जो आपके साइन चाहिए। क्या मैं आ सकता हूं?”
ज्योति ने मना किया, लेकिन राधे ने कहा कि यह कल सुबह की मीटिंग के लिए जरूरी है। आखिरकार ज्योति ने कहा, “ठीक है, आ जाइए, लेकिन जल्दी चले जाइएगा।”
राधे घर पहुंचा। ज्योति ने साड़ी पहनी हुई थी, और उनके बाल गीले थे – शायद अभी-अभी नहा कर आई थीं। राधे का दिल तेज धड़कने लगा।
वो ड्राइंग रूम में बैठे। राधे ने फाइल निकाली, लेकिन उसका ध्यान ज्योति पर था। उन्होंने साड़ी का पल्लू कंधे पर रखा था, और उनकी गर्दन गीली थी। राधे ने खुद को रोका, लेकिन नहीं रुक पाया।
“ज्योति जी, आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं,” उसने कहा।
“राधे, प्लीज… यह सब मत कहिए,” ज्योति ने कहा।
“क्यों? सच है। मैं हर रोज सोचता हूं कि काश आप मेरी होतीं,” राधे ने कहा और उनके करीब बैठ गया।
ज्योति उठकर दूर जाने लगीं, लेकिन राधे ने उनका हाथ पकड़ लिया। “मत जाइए… बस एक बार मुझे अपना दिल बताने दीजिए।”
“यह गलत है… मैं शादीशुदा हूं,” ज्योति ने कहा।
“मैं जानता हूं… लेकिन क्या आप खुश हैं? क्या वो आपको वो प्यार देता है जो आप deserve करती हैं?” राधे ने पूछा।
ज्योति की आंखों में आंसू आ गए। वो रोने लगीं। राधे ने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया, और इस बार ज्योति ने विरोध नहीं किया। वो कमजोर पड़ चुकी थीं।
राधे ने उनके आंसू पोंछे, फिर उनके गाल पर चूमा। ज्योति ने सिर हिलाया, “नहीं… प्लीज…”
“शांत रहिए… बस एक चुंबन,” राधे ने कहा और उनके होठों पर हल्का सा चुंबन किया।
ज्योति ने होंठ सिकोड़े, लेकिन फिर धीरे से खोल दिए। राधे ने गहरा चुंबन किया, और ज्योति की सांसें तेज हो गईं। उन्होंने राधे का विरोध करने की कोशिश की, लेकिन उनका शरीर कमजोर पड़ रहा था।
राधे ने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा, और वो नीचे गिर गया। फिर उसने उनकी कमर पकड़ी और अपने करीब खींचा। ज्योति के स्तन उसकी छाती से टकरा रहे थे।
“प्लीज… रुक जाइए… मैं… मैं नहीं कर सकती,” ज्योति ने कहा।
राधे ने रुककर उन्हें देखा। “ठीक है… मैं रुक जाता हूं। लेकिन बताइए, क्या आप सच में चाहती हैं कि मैं रुक जाऊं?”
ज्योति चुप रहीं। उनका मन कह रहा था हां, लेकिन दिमाग मना कर रहा था।
राधे ने उन्हें छोड़ दिया। “मैं चलता हूं… अगर आप कभी मुझे चाहें, तो मुझे बुलाइएगा।”
वो चला गया, और ज्योति अकेली खड़ी रहीं, उनका दिल दो टुकड़ों में बंटा हुआ।
तीसरा हमला – बेकाबू होती इच्छाएं
रमेश वापस आ गया था, और सब पहले जैसा हो गया था। लेकिन ज्योति बदल गई थीं। वो राधे से बचती थीं, लेकिन रात को सोते वक्त उनके दिमाग में राधे का चेहरा आता था। उनका चुंबन, उसकी बांहें, उसकी गर्म सांसें।
एक दिन ऑफिस में लेट नाइट काम था। रमेश को पता था कि ज्योति देर से आएगी, इसलिए उसने कहा कि वो खा कर सो जाएगा। ज्योति रात के साढ़े ग्यारह बजे तक ऑफिस में थीं, और राधे भी।
सब चले गए थे। सिर्फ ज्योति और राधे थे। ज्योति ने उठकर लाइट बंद की और जाने लगीं, लेकिन अंधेरे में राधे ने उनका रास्ता रोका।
“आज मत जाइए… प्लीज,” राधे ने कहा।
“राधे… मैं… मैं नहीं कर सकती यह सब,” ज्योति ने कहा, लेकिन उनकी आवाज कांप रही थी।
“एक रात… बस एक रात मुझे दीजिए। फिर अगर आप चाहें तो मैं हमेशा के लिए चला जाऊंगा,” राधे ने कहा।
ज्योति ने सिर झुकाया। उनका शरीर कांप रहा था। राधे ने उनका चेहरा उठाया और उनकी आंखों में देखा। उनमें आंसू थे, लेकिन साथ ही एक अजीब सी लालसा भी थी।
राधे ने उन्हें किस किया, और इस बार ज्योति ने विरोध नहीं किया। उन्होंने होंठ खोले और राधे की जीभ को अपने मुंह में आने दिया। राधे ने उन्हें कसकर पकड़ा और अपने केबिन की तरफ ले जाने लगा।
वहां एक सोफा था। राधे ने ज्योति को वहां बिठाया और उनके ऊपर आ गया। उसने उनकी साड़ी खोलनी शुरू की, और ज्योति ने हाथ उठाकर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन फिर हाथ नीचे कर लिए।
“क्या आप सच में यह चाहती हैं?” राधे ने पूछा।
ज्योति ने धीरे से सिर हिलाया। हां।
राधे ने उनकी साड़ी उतार दी। अंदर वो हल्के गुलाबी रंग के ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। राधे ने उनका ब्लाउज खोला, और उनके बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए। उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी।
राधे उन्हें देखता रहा, फिर एक स्तन को अपने मुंह में भर लिया। उसने चूसना शुरू किया, जीभ से निप्पल को सहलाया। ज्योति की सांसें तेज हो गईं, उन्होंने राधे के सिर को अपने स्तनों पर दबा लिया।
“आह… राधे… यह गलत है… फिर भी… आह…” ज्योति ने कराहते हुए कहा।
राधे ने दूसरे स्तन को भी चूसा, फिर नीचे बढ़ा। उसने उनका पेटीकोट खोला और अंदर हाथ डाला। ज्योति की योनि गीली थी, बहुत ज्यादा गीली।
“देखिए… आपका शरीर सच बोल रहा है। आप मुझे चाहती हैं,” राधे ने कहा।
ज्योति ने शर्माते हुए अपनी आंखें बंद कर लीं। राधे ने उनके पैर फैलाए और अपनी उंगली उनकी योनि में डाल दी। ज्योति ने एक तेज सांस ली, उनका शरीर कांप उठा।
“ओह… धीरे… प्लीज,” ज्योति ने कहा।
राधे ने उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की। ज्योति की कराहें बढ़ने लगीं। वो अपनी कमर हिलाने लगीं, राधे की उंगली का साथ देने लगीं।
फिर राधे ने अपना मुंह उनकी योनि पर रख दिया और चाटना शुरू कर दिया। ज्योति पागल होने लगीं, उन्होंने अपने हाथों से सोफे को कसकर पकड़ लिया।
“आह… बस… बस… मैं… आह!” ज्योति ने चीखते हुए कहा और झड़ गईं।
राधे ने उनका सारा रस पी लिया, फिर ऊपर आया और अपने कपड़े उतारने लगा। उसका लिंग कड़ा और मोटा था। ज्योति ने उसे देखा और डर गईं।
“यह… यह बहुत बड़ा है,” उन्होंने कहा।
“डरिए मत… मैं धीरे-धीरे करूंगा,” राधे ने कहा।
उसने ज्योति के पैर फैलाए और अपने लिंग को उनकी योनि के मुहाने पर रखा। धीरे से दबाया, और अंदर घुसने लगा। ज्योति की योनि टाइट थी, और राधे को मजा आ रहा था।
“कैसा लग रहा है?” राधे ने पूछा।
“बहुत… बहुत अच्छा… और अंदर… प्लीज,” ज्योति ने कहा।
राधे ने पूरा लिंग अंदर डाल दिया और धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे, फिर तेज। ऑफिस का सोफा हिलने लगा, ज्योति की सिसकियां कमरे में गूंजने लगीं।
राधे ने उनके स्तनों को भी सहलाया, कभी-कभी झुक कर चूस भी लेता। ज्योति ने अपने पैर उसकी कमर के चारों ओर लपेट लिए और उसे और करीब खींच लिया।
“और तेज… मारो मुझे… आह… राधे… मैं तुम्हारी हूं… आज रात सिर्फ तुम्हारी,” ज्योति ने पागल होकर कहा।
राधे ने अपनी गति तेज कर दी। वो ज्योति को पूरी तरह से अपना बना रहा था। उसने उनके होठों पर किस किया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
करीब पंद्रह मिनट तक वो इसी तरह ज्योति भाभी जी की चुदाई करते रहे। फिर राधे ने ज्योति को घोड़ी बनने को कहा। ज्योति सोफे पर घुटनों के बल आ गईं, और राधे ने पीछे से अपना लिंग उनकी योनि में डाल दिया।
इस पोजीशन में लिंग और भी गहरा जा रहा था। राधे ने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। ज्योति की चूचियां आगे-पीछे हिल रही थीं, और राधे ने एक हाथ आगे बढ़ा कर उन्हें पकड़ लिया।
“कितनी मस्त है तुम्हारी चूत… मजा आ गया,” राधे ने कहा।
“तुम्हारा लंड भी… बहुत… बहुत मस्त है… और तेज करो… मुझे… मुझे फिर से झड़ना है,” ज्योति ने जवाब दिया।
राधे ने अपनी गति और तेज कर दी। वो ज्योति के पीछे-पीछे धक्के मार रहा था, और ज्योति का शरीर आगे की तरफ झुक रहा था। उनके स्तन सोफे पर रगड़ खा रहे थे, और यही उन्हें और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था।
अचानक ज्योति का शरीर कांपने लगा, उन्हें दूसरा ऑर्गेज्म आने वाला था। राधे ने भी अपनी गति तेज कर दी।
“आह… मैं आ रही हूं… राधे… तुम भी… साथ में,” ज्योति ने कहा।
दोनों एक साथ झड़े। राधे ने अपना सारा वीर्य ज्योति की योनि के अंदर ही छोड़ दिया, और ज्योति ने उसे अपने अंदर महसूस किया।
दोनों थक कर सोफे पर गिर पड़े। राधे ने ज्योति को अपनी बांहों में भर लिया।
“क्या अब तुम मुझसे दूर जाओगी?” राधे ने पूछा।
ज्योति ने धीरे से सिर हिलाया। “नहीं… लेकिन हमें सावधान रहना होगा। रमेश को कुछ पता नहीं चलना चाहिए।”
“वादा है… यह सिर्फ हम दोनों का राज रहेगा,” राधे ने कहा और उन्हें फिर से किस किया।
राज़ की दुनिया
उस रात के बाद ज्योति और राधे के बीच एक गुप्त रिश्ता शुरू हो गया। वो ऑफिस में तो पेशकश करते थे कि कुछ भी नहीं है, लेकिन जब भी मौका मिलता, वो एक-दूसरे के प्यासे शरीर को शांत करते।
कभी-कभी रमेश के ऑफिस जाने के बाद राधे ज्योति के घर आ जाता। वो दोपहर के वक्त जब घर खाली होता, वहां घंटों तक चुदाई करते। राधे ने ज्योति को हर तरह से चोदना सिखाया – कभी बाथरूम में, कभी किचन में, कभी बेडरूम में।
एक दिन राधे ने एक नया खेल सोचा। उसने ज्योति को ऑफिस के स्टोर रूम में बुलाया। वहां वो दोनों एक कोने में खड़े होकर चुदाई करते थे, जबकि बाहर बाकी लोग काम कर रहे होते थे। ज्योति को इस खतरे में मजा आता था – पकड़े जाने का डर, और चुपके से चुदाने का मजा।
“आज मैं तुम्हें एक नया मजा देता हूं,” राधे ने कहा और ज्योति को दीवार से सटा दिया।
उसने उनकी साड़ी उठाई और पेटीकोट खींचा। ज्योति ने कुछ नहीं पहना था नीचे – यह राधे की ही शर्त थी। राधे ने अपना लिंग बाहर निकाला और सीधे उनकी योनि में घुसा दिया।
“आह… धीरे… कोई आ जाएगा,” ज्योति ने धीमी आवाज में कहा।
“तो आने दो… सबको पता चल जाए कि तुम मेरी हो,” राधे ने कहा और धक्के लगाने शुरू कर दिए।
वो दोनों स्टोर रूम में खड़े-खड़े चुदाई कर रहे थे। ज्योति ने अपने होंठ कसकर बंद कर लिए ताकि उनकी आवाज बाहर न जाए, लेकिन राधे के तेज धक्कों से वो कराह ही रही थीं।
“तुम्हारी चूत बहुत टाइट है… मजा आ गया,” राधे ने फुसफुसाते हुए कहा।
“तुम भी… बहुत अच्छा चोदते हो… आह… और तेज,” ज्योति ने कहा।
राधे ने उनके स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया। ज्योति की योनि और भी गीली हो गई, और राधे का लिंग आसानी से अंदर-बाहर होने लगा।
कुछ ही मिनटों में दोनों झड़ गए। राधे ने अपना वीर्य ज्योति की योनि में ही छोड़ दिया, और फिर तुरंत अपने कपड़े ठीक किए। ज्योति ने भी साड़ी ठीक की, और दोनों अलग-अलग वक्त पर बाहर निकले – जैसे कुछ हुआ ही न हो।
पति की नजरों में धोखा
रमेश को कभी शक नहीं हुआ। वो अपनी दिनचर्या में इतना व्यस्त था कि ज्योति के बदले हुए बर्ताव पर ध्यान ही नहीं दिया। ज्योति अब ज्यादा खुश रहने लगी थीं, ज्यादा तरोताजा दिखती थीं। जब रमेश उनसे सेक्स करता भी, तो वो राधे का चेहरा सोचकर उत्तेजित हो जातीं।
एक दिन रमेश ने शाम को ज्योति को ऑफिस से लेने आने का फैसला किया। वो बिना बताए आया, और ज्योति को राधे के साथ केबिन में देखा। वो दोनों कुछ फाइलें देख रहे थे, लेकिन रमेश का शक जाग उठा।
“यह कौन है?” रमेश ने गुस्से में पूछा।
“यह… यह मेरे साथी हैं, राधे जी। हम काम की बात कर रहे थे,” ज्योति ने घबराते हुए कहा।
राधे ने शांति से कहा, “जी हां, हम एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।”
रमेश ने उन्हें घूरकर देखा, लेकिन कुछ गलत नहीं मिला। “चलो ज्योति, घर चलो।”
ज्योति ने राधे की तरफ देखा, और उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। राधे ने हल्की सी मुस्कान दी, जो सिर्फ ज्योति को ही समझ आई।
उस रात रमेश ने ज्योति से पूछा, “क्या चल रहा है तुम्हारे और उस राधे के बीच में?”
“कुछ नहीं… बस ऑफिस का काम,” ज्योति ने कहा।
रमेश ने शक भरी नजरों से उन्हें देखा, लेकिन कुछ साबित नहीं कर पाया। ज्योति ने अपनी शक्ति दिखाई – वो शांत रहीं, और रमेश का शक दूर कर दिया।
अगले दिन ज्योति ने राधे को मैसेज किया: “कल रात बहुत डर लगा… लेकिन मजा भी आया।”
राधे ने जवाब दिया: “खतरे में मजा ही कुछ और होता है। आज फिर मिलेंगे?”
“हां… लेकिन और सावधानी से।”
अंतिम मिलन – सीमा से आगे
समय बीतता गया और उनका राज़ी रिश्ता गहरा होता गया। ज्योति अब पूरी तरह से राधे की हो चुकी थीं – शरीर से, दिल से, और रूह से। वो रमेश के साथ रहती थीं, लेकिन उनका दिल राधे के साथ धड़कता था।
एक दिन राधे ने एक और खतरनाक खेल सोचा। उसने ज्योति को अपने घर बुलाया, और इस बार उसने एक औरत को भी बुलाया – उसकी दोस्त प्रिया को। ज्योति को यह पता नहीं था।
जब ज्योति पहुंचीं तो प्रिया वहां थी। ज्योति ने राधे से सवालिया नजरों से देखा।
“आज मैं तुम्हें एक नया अनुभव देना चाहता हूं,” राधे ने कहा।
“यह… यह कौन है?” ज्योति ने पूछा।
“मेरी दोस्त… और आज हम तीनों मजे करेंगे,” राधे ने कहा।
ज्योति ने मना किया, लेकिन राधे ने उन्हें मनाया। “बस एक बार… तुम्हें मजा आएगा।”
प्रिया ने ज्योति का हाथ पकड़ा और उन्हें बेडरूम में ले गई। उसने ज्योति के कपड़े उतारने शुरू किए, और ज्योति ने विरोध किया, लेकिन कमजोर पड़ गईं। प्रिया ने उनके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया, और ज्योति को अजीब सा मजा आने लगा।
फिर राधे आया और तीनों ने मिलकर सेक्स किया। राधे एक-एक करके दोनों औरतों को चोदता रहा, और ज्योति ने पहली बार एक औरत को भी छुआ। यह अनुभव उनके लिए नया था, और उन्हें अजीब सा मजा आ रहा था।
लेकिन यह सब एक सीमा थी जिसे पार नहीं करना चाहिए था। ज्योति ने राधे से कहा, “यह आखिरी बार था… अब हम सिर्फ दो लोग ही रहेंगे।”
राधे ने मान लिया। उसे भी पता था कि यह खतरनाक हो सकता है।
अंत – एक अधूरी कहानी
आज भी ज्योति रमेश के साथ रहती हैं, और राधे उनका राज़ी प्रेमी है। कोई तलाक नहीं हुआ, कोई पति को पता नहीं चला। यह एक गुप्त रिश्ता है जो सालों से चल रहा है।
रमेश अपनी शक्की नजरों से ज्योति को देखता है, लेकिन कभी कुछ साबित नहीं कर पाता। ज्योति एक समझदार औरत बन गई हैं – वो अपने पति को खुश रखती हैं, और अपने प्रेमी को भी।
रात को जब रमेश सो जाता है, ज्योति कभी-कभी बालकनी में खड़ी होकर राधे का इंतजार करती हैं। वो दोनों चुपके से मिलते हैं, एक-दूसरे को चूमते हैं, और फिर वापस अपनी जिंदगी में लौट आते हैं।
यह एक ऐसा रिश्ता है जो कभी पूरा नहीं होगा, लेकिन कभी खत्म भी नहीं होगा। ज्योति दो दुनिया में जीती हैं – एक जहां वो रमेश की पत्नी हैं, और दूसरी जहां वो राधे की प्रेमिका।
और इसी तरह यह खेल चलता रहता है… एक रात, एक चुंबन, एक गुप्त मुलाकात… और सब कुछ वैसा ही रहता है जैसा था। कोई तलाक, कोई खुलासा, सिर्फ एक अधूरी, लेकिन मजेदार कहानी।
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