
नई पड़ोसन का आगमन
मेरा नाम रोहित है और मैं लखनऊ के एक पॉश इलाके में रहता हूँ। मेरी उम्र २८ साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर हूँ। मेरे परिवार में मेरे माता-पिता और एक बहन है जो शादीशुदा है और अपने ससुराल में रहती है। हमारा परिवार बहुत ही साधारण और सभ्य है, लेकिन मेरी जिंदगी में एक दिन ऐसा आया जब सब कुछ बदल गया। मुझे अपनी पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी लिखने को मिलेगी ।
वह मंगलवार की सुबह थी जब मैं ऑफिस जाने की तैयारी कर रहा था। मैंने खिड़की से देखा कि एक ट्रक सामने वाले घर के सामने रुका है जो काफी दिनों से खाली पड़ा था। कुछ लोग सामान उतार रहे थे, और तभी मेरी नजर एक औरत पर पड़ी जो साड़ी पहने हुए थी और उनके हाथ में एक छोटा बच्चा था।
वह औरत लगभग ३०-३२ साल की होगी, गोरी, भरी हुई हुई फिगर, और बहुत ही खूबसूरत। उन्होंने हल्की गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी जो उनके गोरे बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी। मैं उन्हें देखता ही रह गया। वहीं से शुरू हुई मेरी पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी जो आज भी मेरे दिलो-दिमाग में ताजा है।
मैंने अपनी माँ से पूछा, “माँ, सामने वाले घर में कौन आया है?” माँ ने बताया, “बेटा, एक नया परिवार आया है। पति का नाम विकास है, वो एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करता है और अक्सर टूर पर रहता है। उसकी पत्नी का नाम नेहा है, और उनका एक छोटा बेटा भी है। तुम्हें उनका ख्याल रखना चाहिए, वो तुम्हारी पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी की नायिका बनने वाली हैं।”
मैंने ध्यान से सुना और फिर से खिड़की से झाँका। नेहा भाभी अपने बच्चे को गोद में लिए खड़ी थीं और किसी से बात कर रही थीं। उनकी मुस्कान बहुत प्यारी थी, और उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। मैंने सोचा, “क्या यही वो दिन है जब मेरी जिंदगी बदलेगी?”
शाम को जब मैं ऑफिस से लौटा, तो देखा कि नेहा भाभी अपने गेट पर खड़ी थीं। मैंने हिम्मत करके उनसे बात करने की कोशिश की। “नमस्ते, मैं रोहित हूँ, सामने वाले घर में रहता हूँ। आप नए आए हैं?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हां, मैं नेहा हूँ, कल ही शिफ्ट हुए हैं। आपके पड़ोस में रहेंगे, उम्मीद है आपसे अच्छी दोस्ती होगी।”
मैंने कहा, “जरूर भाभी, आप मेरी पड़ोसन हैं, मेरे लिए तो आप परिवार जैसी हैं। अगर कभी कुछ चाहिए हो तो बेझिझक कहिएगा।” उन्होंने धन्यवाद कहा और अंदर चली गईं। लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सिर्फ प्रारंभ है।
पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी : पहली गहरी मुलाकात
कुछ दिन बीत गए और मैं अक्सर नेहा भाभी को देखता रहता। वह अक्सर अकेली रहती थीं क्योंकि उनके पति विकास भैया महीने में सिर्फ एक बार आते थे। उनका बेटा रोहन स्कूल जाता था, इसलिए दिन में वह घर पर अकेली रहती थीं।
एक शनिवार की सुबह, मैं अपनी बालकनी में चाय पी रहा था कि नेहा भाभी अपनी बालकनी में आईं। उन्होंने हल्की पीली साड़ी पहनी थी और उनके बाल गीले थे, शायद अभी-अभी नहाकर आई थीं। मैंने उन्हें देखा और मुस्कुराया। उन्होंने भी जवाब में मुस्कुराया और कहा, “रोहित जी, सुबह-सुबह चाय पी रहे हैं?”
मैंने कहा, “हां भाभी, आप भी आ जाइए, साथ में पीते हैं।” उन्होंने कहा, “अभी तो नहीं, लेकिन शाम को अगर फ्री हों तो आ जाइएगा, चाय बनाऊंगी।” मैंने खुशी से हां कह दी। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का पहला मोड़ था जो मेरी जिंदगी को बदलने वाला था।
शाम को मैं उनके घर गया। उनका घर बहुत सुंदर सजा हुआ था, हर कोने में फूलों की सुगंध थी। नेहा भाभी ने मुझे बैठने को कहा और रसोई में चली गईं। कुछ देर में वह दो कप चाय लेकर आईं। उन्होंने हल्का गुलाबी रंग का सूट पहना था जो उन पर बहुत खूबसूरत लग रहा था।
हम बातें करने लगे। उन्होंने मुझे बताया कि वह एम.ए. इंग्लिश हैं और उन्हें शायरी और कहानियां पढ़ना बहुत पसंद है। मैंने भी बताया कि मुझे हिंदी में सेक्स कहानियां पढ़ना पसंद है, हालांकि मैंने यह नहीं बताया कि किस तरह की कहानियां। उन्होंने कहा, “रोहित जी, आप बहुत अच्छे इंसान लगते हो, मुझे यहां एक दोस्त की जरूरत थी।”
मैंने कहा, “भाभी, आप चिंता मत करिए, मैं हमेशा आपके साथ हूँ।” हम दोनों की बातचीत बढ़ती गई और हम एक-दूसरे के करीब आते गए। यह देसी भाभी सेक्स कहानी की शुरुआत थी जो आगे चलकर बहुत रोमांटिक होने वाली थी।
बारिश की शाम और करीबियां
एक शाम अचानक मौसम बदल गया और बारिश शुरू हो गई। मैं अपने घर पर था कि दरवाजे की घंटी बजी। मैंने दरवाजा खोला तो देखा नेहा भाभी खड़ी थीं, पूरी तरह भीगी हुईं। उनकी साड़ी उनके शरीर से चिपक गई थी और उनका बदन साफ दिख रहा था।
“रोहित जी, माफ कीजिएगा, मेरे घर की बिजली चली गई है और मेरा फोन भी डेड हो गया है, क्या मैं थोड़ी देर यहां रुक सकती हूँ?” उन्होंने कहा। मैंने तुरंत हां कहा और उन्हें अंदर बुलाया। मैंने उन्हें तौलिया दिया और कहा, “भाभी, आप पहले कपड़े बदल लीजिए, वरना ठंड लग जाएगी।”
उन्होंने कहा, “रोहित जी, मेरे पास तो एक्स्ट्रा कपड़े नहीं हैं, मैं ऐसे ही ठीक हूँ।” मैंने अपनी माँ से पूछा और माँ ने अपनी एक साड़ी नेहा भाभी को दी। वह बाथरूम में चेंज करने गईं और कुछ देर बाद बाहर आईं। माँ की साड़ी उनपर थोड़ी ढीली थी, लेकिन फिर भी वह बहुत खूबसूरत लग रही थीं।
मैंने उनके लिए गर्म चाय बनाई और हम दोनों बैठकर बातें करने लगे। बाहर बारिश हो रही थी और अंदर हम दोनों अकेले थे। मेरे माता-पिता अपने कमरे में थे। नेहा भाभी ने कहा, “रोहित जी, आपका बहुत शुक्रिया, आपने आज मेरी मदद की।” मैंने कहा, “भाभी, यह तो मेरा फर्ज है, आप मेरी पड़ोसन हैं।”
हम दोनों की आंखें मिलीं और एक अजीब सा सन्नाटा छा गया। मैंने धीरे से अपना हाथ उनके हाथ पर रखा और कहा, “भाभी, मैं आपको बहुत पसंद करने लगा हूँ।” उन्होंने अपना हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन फिर रुक गईं। उनकी आंखें नम हो गईं और उन्होंने कहा, “रोहित जी, यह सब ठीक नहीं है, मैं शादीशुदा हूँ।”
मैंने कहा, “भाभी, मैं जानता हूँ, लेकिन मैं आपसे सिर्फ प्यार करता हूँ। आप अकेली रहती हैं, आपको साथ की जरूरत है।” वह कुछ देर चुप रहीं, फिर उठकर खिड़की के पास खड़ी हो गईं। मैं भी उठकर उनके पास गया। हम दोनों चुपचाप बाहर की बारिश देख रहे थे।
अचानक नेहा भाभी ने मेरी तरफ मुड़ते हुए कहा, “रोहित जी, क्या आप मुझे गले लगा सकते हैं? मुझे गर्माहट चाहिए।” मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। उनका बदन मेरे बदन से सटा हुआ था और मैं उनकी धड़कन महसूस कर सकता था। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सबसे रोमांटिक पल था।
पहला चुंबन और शर्मिंदगी
मैंने धीरे से अपने होंठ उनके होंठों के पास लाए। नेहा भाभी ने आंखें बंद कर लीं और मैंने उन्हें एक हल्का सा चुंबन दिया। वह पहली बार किसी अजनबी मर्द से चूमी जा रही थीं और मैं उनका पहला प्यार बनने जा रहा था। उनके होंठ बहुत नरम थे और उनकी सांसों में गुलाब की खुशबू आ रही थी।
चुंबन के बाद नेहा भाभी शर्मा गईं और अपना चेहरा छुपाने लगीं। मैंने उनके हाथ पकड़े और कहा, “भाभी, क्या हुआ? क्या मैंने कुछ गलत किया?” उन्होंने कहा, “नहीं रोहित जी, बस मुझे अजीब सा लग रहा है। मैं किसी और मर्द को चूम रही हूँ, यह सोचकर ही मेरा दिल धड़क रहा है।”
मैंने कहा, “भाभी, यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी है और इसमें सब कुछ खूबसूरत होगा। मैं आपको कभी दुखी नहीं करूंगा।” हम फिर से बैठ गए, लेकिन इस बार हमारे बीच की दूरी कम थी। नेहा भाभी ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और मैंने उनके बालों में हाथ फेरना शुरू कर दिया।
कुछ देर बाद नेहा भाभी ने कहा, “रोहित जी, मुझे नींद आ रही है, क्या मैं यहीं सो सकती हूँ? बारिश भी तेज हो गई है।” मैंने कहा, “जरूर भाभी, आप मेरे कमरे में सो जाइए, मैं बाहर सोफे पर सो जाऊंगा।” उन्होंने कहा, “नहीं रोहित जी, आप भी अपने कमरे में ही सोइए, मैं एक तरफ, आप एक तरफ।”
मैं मान गया। हम दोनों मेरे कमरे में गए। मैंने उन्हें अपना बिस्तर दिया और खुद फर्श पर बैठने लगा। उन्होंने कहा, “रोहित जी, आप भी बिस्तर पर आ जाइए, फर्श पर ठंड लग जाएगी।” मैंने हिचकिचाते हुए हां कह दी और बिस्तर पर आ गया।
हम दोनों बिस्तर पर लेटे, लेकिन दोनों के दिल तेज धड़क रहे थे। मैंने कहा, “भाभी, क्या मैं आपका हाथ पकड़कर सोऊं?” उन्होंने हां कहा और मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। उनका हाथ बहुत नरम था और उनकी उंगलियां मेरी उंगलियों में फंस गईं। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सबसे रोमांटिक क्षण था।
रात के करीब दो बजे, नेहा भाभी ने अचानक मेरी तरफ मुड़ते हुए कहा, “रोहित जी, मुझे नींद नहीं आ रही है, क्या आप मुझे प्यार करेंगे?” मैं समझ गया कि वह क्या चाहती हैं। मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और उनकी आंखों में देखने लगा।
“भाभी, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ,” मैंने कहा और फिर उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। इस बार का चुंबन पहले से ज्यादा गहरा और जुनूनी था। मैंने अपने हाथ उनकी पीठ पर फेरने शुरू कर दिए और वह भी पूरी तरह से मेरे साथ थीं।
मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी साड़ी के अंदर डाला और उनकी पीठ को सहलाने लगा। उनकी त्वचा बहुत मुलायम थी और मेरे हाथ उनके शरीर की गर्माहट महसूस कर रहे थे। नेहा भाभी ने एक हल्की सी सिसकी निकाली और मुझे और करीब खींच लिया।
मैंने उनके होंठों से अपने होंठ हटाए और उनके गालों पर चुंबन करना शुरू कर दिया। फिर मैं उनके गले पर उतरा और उनकी गर्दन पर किस करने लगा। नेहा भाभी ने अपना सिर पीछे कर दिया और उनकी सांसें तेज हो गईं। वह कह रही थीं, “रोहित जी, धीरे, यह सब बहुत तेजी से हो रहा है।”
मैंने उनकी साड़ी के ब्लाउस के बटन खोलने शुरू किए, एक-एक करके। जैसे ही मैंने उनका ब्लाउस खोला, मेरी सांसें थम गईं। उन्होंने नीचे काले रंग की ब्रा पहनी थी और उनके स्तन बहुत सुंदर थे, गोल और उठे हुए। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सबसे खूबसूरत नजारा था।
मैंने धीरे से अपने हाथ उनके स्तनों पर रखे और उन्हें सहलाने लगा। नेहा भाभी ने आंखें बंद कर लीं और मुझे अपने ऊपर महसूस करने दिया। मैंने उनके स्तनों को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया और वह सिसकियां लेने लगीं। फिर मैंने एक स्तन को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा।
नेहा भाभी ने मेरे सिर को अपने स्तनों पर दबा रखा था और वह कह रही थीं, “रोहित जी, और करो, मुझे बहुत मजा आ रहा है। यह पडोसन के साथ सेक्स स्टोरी है जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था।” मैंने दूसरे स्तन को भी वैसे ही चूसा और उनकी सिसकियां और तेज हो गईं।
जुनून की रात और पहली बार
मैंने अपना हाथ नीचे की तरफ बढ़ाया और उनके पेट को सहलाता हुआ उनकी साड़ी के नीचे गया। उनकी जांघें बहुत मुलायम थीं और मैंने उन्हें सहलाना शुरू कर दिया। नेहा भाभी ने अपने पैर थोड़ा खोल दिए और मैं समझ गया कि वह चाहती क्या हैं।
मैंने अपनी उंगली उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी योनि पर रखा और हल्का सा दबाव डाला। वह पहले से ही गीली थीं और मेरी उंगली पर उनकी गर्माहट महसूस हो रही थी। नेहा भाभी ने एक लंबी सांस ली और कहा, “रोहित जी, यह बहुत अच्छा लग रहा है, प्लीज रुकना मत।”
मैंने उनकी पैंटी के अंदर उंगली डाली और उनकी योनि में उंगली करनी शुरू कर दी। वह मेरे साथ तालमेल बिठाते हुए अपनी कमर उठाने लगीं। यह देसी भाभी की चोदाई का सबसे रोमांटिक हिस्सा था। मैं एक तरफ उनके स्तन चूस रहा था और दूसरी तरफ उनकी योनि में उंगली कर रहा था।
कुछ देर बाद मैंने अपनी उंगली बाहर निकाली और उनके ऊपर आ गया। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। नेहा भाभी ने मेरे लिंग को देखा और कहा, “रोहित जी, आपका बहुत बड़ा और सुंदर है।” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “यह सब आपके लिए है भाभी।”
मैंने अपने लिंग को उनकी योनि के मुहाने पर रखा और धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया। नेहा भाभी ने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए और वह कह रही थीं, “रोहित जी, धीरे-धीरे, थोड़ा दर्द हो रहा है।” मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लिंग उनके अंदर डाल दिया और फिर रुक गया ताकि वह इस स्थिति को महसूस कर सकें।
कुछ पल बाद, जब वह ठीक हो गईं, तो मैंने अपनी गति शुरू की। धीरे-धीरे मैं अपनी कमर आगे-पीछे करने लगा और नेहा भाभी भी मेरे साथ तालमेल बिठा रही थीं। हम दोनों एक रिदम में थे और कमरे में हमारी सांसों की आवाज गूंज रही थी। यह हिंदी सेक्स स्टोरी का सबसे रोमांचक हिस्सा था।
हमारा संबंध बनता जा रहा था और नेहा भाभी पूरी तरह से इस क्षण में खो चुकी थीं। उनकी आंखें बंद थीं और वह मेरे हर धक्के का आनंद ले रही थीं। मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रख दिए ताकि और गहराई तक जा सकूं।
“रोहित जी, और तेज करो, मुझे बहुत मजा आ रहा है,” नेहा भाभी कह रही थीं। मैंने अपनी गति तेज कर दी और अब मैं उन्हें तेजी से चोद रहा था। बिस्तर की चरमराहट की आवाज और हमारी सांसों की आवाज मिलकर एक संगीत बन रही थी। यह भाभी और देवर की सेक्स कहानी का सबसे जोशीला हिस्सा था, भले ही मैं उनका देवर नहीं था, लेकिन हमारा रिश्ता उससे भी गहरा था।
करीब बीस मिनट तक मैं उन्हें इसी तरह चोदता रहा, फिर मैंने अपनी पोजीशन बदली। मैंने नेहा भाभी को घोड़ी बनने को कहा और वह मान गईं। वह अपने हाथों और घुटनों के बल बिस्तर पर थीं और उनकी पीठ का नजारा बहुत खूबसूरत था।
मैंने पीछे से अपना लिंग उनकी योनि में डाला और फिर से चोदना शुरू कर दिया। इस एंगल से मैं और गहराई तक जा पा रहा था और नेहा भाभी कह रही थीं, “रोहित जी, यह बहुत गहरा जा रहा है, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। ओह, रोहित जी, और जोर से करो।”
मैंने उनकी कमर पकड़ी हुई थी और तेजी से अपने लिंग को अंदर-बाहर कर रहा था। हर धक्के पर नेहा भाभी आगे की तरफ बढ़ जातीं और फिर वापस आतीं। उनके स्तन हिल रहे थे और मैं उन्हें देखकर और उत्तेजित हो रहा था। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाया और उनके स्तनों को पकड़ लिया।
“रोहित जी, मैं झड़ने वाली हूँ, और थोड़ी देर रुको,” नेहा भाभी कह रही थीं। मैंने अपनी गति और तेज कर दी और कुछ ही पलों में वह झड़ गईं। उनका शरीर कांपने लगा और उनकी योनि ने मेरे लिंग को कसकर पकड़ लिया। वह कह रही थीं, “ओह माय गॉड, रोहित जी, यह क्या हो रहा है, मैं उड़ रही हूँ।”
मैंने उन्हें झड़ने दिया और फिर मैंने भी अपना लिंग बाहर निकाल लिया। नेहा भाभी थककर बिस्तर पर लेट गईं और मैं भी उनके बगल में आकर लेट गया। हम दोनों हांफ रहे थे और हमारे शरीर पसीने से लथपथ थे। यह दिल को छू लेने वाली सेक्स कहानी का सबसे खूबसूरत क्षण था।
जब सुबह हुई, तो मैंने देखा कि नेहा भाभी मेरी बाहों में सो रही थीं। उनका चेहरा बहुत शांत और खूबसूरत लग रहा था। मैंने धीरे से उनके माथे पर चुंबन किया और वह जाग गईं।
“सुप्रभात रोहित जी,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। मैंने भी कहा, “सुप्रभात भाभी, आप कैसी हैं?” उन्होंने कहा, “बहुत अच्छी रोहित जी, आपकी वजह से मेरी रात बहुत खूबसूरत गुजरी है।” मैंने कहा, “भाभी, यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी हम दोनों की है और मैं चाहता हूँ कि यह कभी खत्म न हो।”
हम दोनों बिस्तर में ही लेटे रहे और एक-दूसरे को देखते रहे। नेहा भाभी ने कहा, “रोहित जी, क्या आप मुझे फिर से प्यार करेंगे?” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “क्यों नहीं भाभी, मैं तो हमेशा आपके लिए तैयार हूँ।” उन्होंने अपना हाथ मेरे लिंग की तरफ बढ़ाया और वह पहले से ही खड़ा था।
“रोहित जी, आप तो सुबह-सुबह ही तैयार हो गए,” उन्होंने हंसते हुए कहा। मैंने कहा, “भाभी, आपके सामने कैसे नहीं होंगा।” हम दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब आए और इस बार नेहा भाभी मेरे ऊपर आ गईं। उन्होंने मेरे लिंग को अपने हाथ में लिया और उसे अपनी योनि पर रखा, फिर धीरे से अंदर बैठ गईं।
यह काउगर्ल पोजीशन थी और नेहा भाभी मेरे ऊपर बैठकर अपनी कमर आगे-पीछे करने लगीं। मैं नीचे से उन्हें देख रहा था और उनके स्तन मेरे सामने हिल रहे थे। मैंने उनके स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें दबाते हुए उनकी सवारी का मजा लेने लगा। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सबसे रोमांचक हिस्सा था।
नेहा भाभी तेजी से अपनी कमर हिला रही थीं और वह कह रही थीं, “रोहित जी, यह पोजीशन बहुत अच्छी है, मुझे बहुत मजा आ रहा है।” मैंने भी अपनी कमर उठाकर उनके साथ तालमेल बिठाया और हम दोनों एक साथ आगे-पीछे हो रहे थे। कमरे में हमारी सांसों की आवाज गूंज रही थी।
करीब पंद्रह मिनट तक हम इसी पोजीशन में रहे, फिर नेहा भाभी थककर मेरे ऊपर ही गिर पड़ीं। उनके स्तन मेरे सीने से सटे हुए थे और मैंने उन्हें गले लगा लिया। हम दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे और यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सबसे प्यारा पल था।
नहाने का मजा और नए अनुभव
थोड़ी देर बाद नेहा भाभी उठीं और कहा, “रोहित जी, अब मुझे नहाना है, आप भी आइए, साथ में नहाते हैं।” मैंने खुशी से हां कह दी और हम दोनों बाथरूम में चले गए। बाथरूम में गर्म पानी की व्यवस्था थी और एक बड़ा शावर भी था।
नेहा भाभी ने शावर खोला और गर्म पानी की बौछार हम दोनों पर पड़ने लगी। उन्होंने एक साबुन उठाया और मेरे शरीर पर मलना शुरू कर दिया। वह मेरे सीने, मेरे हाथों और फिर नीचे की तरफ गईं। उन्होंने मेरे लिंग को साबुन से सहलाया और वह फिर से खड़ा हो गया।
“रोहित जी, आपका तो कभी मानता ही नहीं,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। मैंने भी साबुन लिया और उनके शरीर पर मलना शुरू किया। मैंने उनके स्तनों पर साबुन लगाया और उन्हें सहलाया, फिर उनकी पीठ, उनके पेट और फिर उनकी जांघों पर साबुन लगाया। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सबसे सेन्सुअल हिस्सा था।
हम दोनों साबुन से लथपथ थे और नेहा भाभी ने मेरे लिंग को अपनी योनि पर रखा। वह मुझे शावर के नीचे ही चोदने लगीं और पानी की बौछार हम दोनों पर पड़ रही थी। यह एक अलग ही अनुभव था और हम दोनों इसका पूरा आनंद ले रहे थे।
69 की पोजीशन और ओरल प्लेजर
शावर में संबंध बनाने के बाद, हम दोनों साफ हो गए और बाहर आए। नेहा भाभी ने मुझे तौलिया दिया और हम दोनों ने अपने-अपने शरीर सुखाए। फिर उन्होंने कहा, “रोहित जी, अगर आपको कोई नई चीज़ ट्राई करनी है तो बताइए, मैं आपके लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ।”
मैंने सोचा और कहा, “भाभी, क्या हम ६९ की पोजीशन ट्राई कर सकते हैं?” उन्होंने थोड़ा शर्माते हुए कहा, “रोहित जी, मैंने कभी नहीं किया, लेकिन आपके साथ करना चाहूंगी।” मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और उनके ऊपर इस तरह से आ गया कि मेरा मुंह उनकी योनि के पास था और उनका मुंह मेरे लिंग के पास।
यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सबसे अंतरंग हिस्सा था। मैंने अपनी जीभ से उनकी योनि को चाटना शुरू किया और वह नीचे से मेरा लिंग चूसने लगीं। हम दोनों एक-दूसरे को ओरल प्लेजर दे रहे थे और यह बहुत अच्छा लग रहा था।
नेहा भाभी की योनि बहुत स्वादिष्ट थी और मैं उसे चाटते हुए उनकी क्लाइटोरिस को भी चूस रहा था। वह नीचे से मेरे लिंग को पूरा अपने मुंह में ले लेती थीं और फिर जीभ से चाटती थीं। हम दोनों एक-दूसरे की सिसकियां सुन रहे थे और यह एक बहुत ही अनुभव था।
एनल सेक्स का प्रयास और नई ऊंचाइयां
कुछ देर बाद नेहा भाभी ने कहा, “रोहित जी, मैंने सुना है कि एनल सेक्स भी बहुत मजेदार होता है, क्या हम वो भी ट्राई कर सकते हैं?” मैं थोड़ा हैरान हुआ, लेकिन खुशी से मान गया। मैंने कहा, “भाभी, लेकिन यह थोड़ा दर्दनाक हो सकता है पहली बार, हमें धीरे-धीरे करना होगा।”
मैंने उनके नितंबों पर ऑयल लगाया और धीरे से अपनी उंगली उनके एनस में डाली। वह पहले तो चींखीं, लेकिन फिर ठीक हो गईं। मैंने धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर की और फिर अपने लिंग पर ऑयल लगाया। मैंने धीरे से अपना लिंग उनके एनस में डालना शुरू किया।
“रोहित जी, धीरे करो, बहुत दर्द हो रहा है,” वह कह रही थीं। मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लिंग उनके अंदर डाल दिया और फिर रुक गया। कुछ देर बाद जब वह ठीक हो गईं, तो मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सबसे एडवेंचरस हिस्सा था।
नेहा भाभी को भी धीरे-धीरे मजा आने लगा और वह कह रही थीं, “रोहित जी, यह बहुत अलग अनुभव है, मुझे अच्छा लग रहा है।” मैंने अपनी गति बढ़ा दी और कुछ ही देर में हम दोनों झड़ गए। यह एक नई ऊंचाई थी जो हमने एक साथ हासिल की।
दोपहर का आराम और फिर से प्यार
दोपहर को हम दोनों थककर सो गए। जब जागे, तो नेहा भाभी ने कहा, “रोहित जी, मुझे भूख लगी है, कुछ खाते हैं।” मैंने कहा, “भाभी, मैं भी भूखा हूँ, लेकिन मुझे आपका खाना खाना है।” उन्होंने मुझे चंचलता से देखते हुए कहा, “रोहित जी, आप भी ना, चलो पहले असली खाना खाते हैं।”
हम दोनों किचन में गए और नेहा भाभी ने पराठे और सब्जी बनाई। हम दोनों ने साथ में खाना खाया और खाते समय भी हम एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे। खाना खत्म करने के बाद, मैंने उन्हें किचन में ही पीछे से पकड़ लिया।
“रोहित जी, यहां क्या कर रहे हो, कोई देख लेगा,” उन्होंने कहा, लेकिन वह मना नहीं कर रही थीं। मैंने उनकी साड़ी उठाई और उनकी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने पैर थोड़ा खोल दिए और मैंने अपना हाथ उनकी पैंटी में डाल दिया। वह पहले से ही गीली थीं।
“रोहित जी, प्लीज, यहां मत करो, बेडरूम में चलो,” वह कह रही थीं, लेकिन मैंने उन्हें वहीं किचन के प्लेटफॉर्म पर बैठा दिया। मैंने उनकी पैंटी उतारी और अपना लिंग बाहर निकाला। फिर मैंने उनके पैर खोले और उन्हें वहीं चोदना शुरू कर दिया। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी का सबसे रोमांचक हिस्सा था।
शाम होने को आई थी और मुझे अपने घर जाना था। नेहा भाभी ने मुझे गले लगाया और रोने लगीं। मैंने भी उन्हें गले लगाया और कहा, “भाभी, रोना मत, हम फिर मिलेंगे। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह तो शुरुआत है।”
उन्होंने कहा, “रोहित जी, मैं आपके बिना कैसे रहूंगी?” मैंने कहा, “भाभी, हम रोज मिलेंगे और फोन पर बात करेंगे। मैं हमेशा आपके करीब हूँ।” हम दोनों ने एक-दूसरे को चुंबन किया और फिर मैं अपने घर चला आया।
रोजाना मुलाकातें और गहराता प्यार
अगले कुछ महीनों में मैं और नेहा भाभी लगभग रोज मिलते थे। जब उनका बेटा स्कूल जाता था, तो मैं उनके घर चला जाता था और हम दोनों दिन भर एक-दूसरे के साथ रहते थे। हमने बहुत सारी नई-नई चीजें ट्राई कीं और हमारा प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता गया।
एक दिन नेहा भाभी ने मुझे बताया कि उनके पति को विदेश में एक नौकरी का ऑफर आया है और वह तीन साल के लिए विदेश जा रहे हैं। मैं पहले तो उदास हुआ, लेकिन फिर खुशी से झूम उठा। अब नेहा भाभी पूरी तरह से मेरी हो गईं और हम दोनों एक साथ रहने लगे।
मैंने अपने माता-पिता से कहा कि मुझे जॉब के सिलसिले में अक्सर बाहर रहना पड़ता है और मैंने एक अपार्टमेंट किराए पर ले लिया जहां मैं और नेहा भाभी साथ रहने लगे। यह देसी भाभी सेक्स स्टोरी हिंदी में का सबसे खुशहाल हिस्सा था।
एक साथ रहते हुए हम दोनों ने बहुत खुशियां मनाईं। सुबह उठकर हम एक साथ नाश्ता करते, फिर मैं ऑफिस जाता और नेहा भाभी घर का काम करतीं। शाम को मैं जल्दी घर आता और हम दोनों साथ में समय बिताते।
कभी-कभी हम बाहर डिनर करने जाते, कभी मूवी देखने जाते और कभी घर पर ही एक-दूसरे के साथ रोमांस करते। यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी अब एक नए मोड़ पर थी जहां हम दोनों पति-पत्नी की तरह रह रहे थे।
एक दिन नेहा भाभी ने मुझे बताया कि वह माँ बनने वाली हैं। मैं पहले तो घबरा गया, लेकिन फिर उन्होंने कहा कि बच्चा उनके पति का है क्योंकि वह विदेश जाने से पहले आए थे। मैंने समझदारी दिखाते हुए कहा, “भाभी, कोई बात नहीं, मैं इस बच्चे को अपना ही मानूंगा और हम दोनों मिलकर इसकी परवरिश करेंगे।”
नौ महीने बाद नेहा भाभी ने एक बेटी को जन्म दिया। हमने उसका नाम प्रिया रखा और मैं उसे बहुत प्यार करता था। हम तीनों एक छोटे से परिवार की तरह रहने लगे और हमारी खुशियां दिन-ब-दिन बढ़ती गईं।
नेहा भाभी के पति विदेश से वापस आए, लेकिन वह देखकर खुश थे कि उनकी पत्नी और बच्ची खुश हैं। उन्हें पता नहीं था कि मैं और नेहा भाभी क्या रिश्ता रखते हैं, लेकिन वह मुझे एक अच्छा पड़ोसी और दोस्त मानते थे।
यह पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी यहीं समाप्त होती है, लेकिन हमारा प्यार कभी खत्म नहीं होगा। नेहा भाभी और मैं आज भी एक-दूसरे से प्यार करते हैं और हमारी पड़ोसन भाभी की सेक्स स्टोरी हमेशा जिंदा रहेगी।
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