
भाग 1: पहली नजर और दिल की धड़कन
कहानी की शुरुआत ऐसे हुई थी, मैंने उनको शादी में देखा था। वो बहुत खूबसूरत लग रही थीं पर ऐसा कभी नहीं सोचा था कि वो अपने पति से पहले मेरे लंड की सवारी करेगी।
मेरा नाम अर्जुन है, उम्र 26 साल, बदन एथलेटिक और हाइट 6 फीट। मैं एक आईटी कंपनी में काम करता हूँ और अकेले रहता हूँ। मेरे घर के बगल वाले फ्लैट में शर्मा परिवार रहता था। उनके बेटे रोहित की शादी तय हुई थी।
शादी के दिन जब मैं बारात में गया, तो मेरी नजर दुल्हन पर पड़ी। प्रियंका नाम था उनका। वो लगभग 24-25 साल की होंगी, रंग गोरा, बदन भरा हुआ, आँखें काजल से काली और होठ गुलाबी। वो sexy bhabhi in saree में इतनी खूबसूरत लग रही थीं कि मेरा दिल धड़कने लगा। लाल रंग की साड़ी में उनका बदन किसी अप्सरा से कम नहीं था।
मैंने सोचा भी नहीं था कि यही hot sexy bhabhi आगे चलकर मेरी हो जाएगी और मैं उनकी Bhabhi suhagraat मनाऊंगा उनके पति से पहले।
शादी के बाद जब वो घर आईं, मैंने बहाने से उनसे मुलाकात की। मैंने अपने घर के दरवाजे पर खड़े होकर उन्हें देखा। वो अपने सास-ससुर के साथ घर में प्रवेश कर रही थीं। उनके कदम इतने नाजुक थे, जैसे कोई हिरण चल रहा हो।
“नमस्ते, मैं अर्जुन हूँ, आपका पड़ोसी,” मैंने हाथ जोड़े।
वो शर्माते हुए बोलीं, “नमस्ते, मैं प्रियंका।”
उनकी आवाज इतनी मीठी थी कि मेरे रोंगटे खड़े हो गए। वो एक असली Desi bhabi थीं – पारंपरिक और संस्कारी दिखने वाली लेकिन अंदर से कामुकता की खान।
भाग 2: पति की अनुपस्थिति और मौका
शादी के तीन दिन बाद ही उनके पति रोहित को अचानक ऑफिस से फोन आया। उन्हें तुरंत सिंगापुर जाना था एक प्रोजेक्ट के लिए। यह सुनकर पूरे घर में मातम छा गया। प्रियंका भाभी रो रही थीं क्योंकि उनकी Bhabhi suhagraat अभी तक नहीं हुई थी और पति जा रहे थे।
मैंने यह बात अपने घर की खिड़की से सुन ली। मेरे मन में एक शैतानी ख्याल आया। मैंने सोचा, यही मौका है पड़ोस वाली भाभी के साथ सुहागरात मनाने का।
रोहित के जाने के अगले दिन, मैंने बहाना बनाया। मैंने प्रियंका भाभी के घर जाकर चीनी मांगी। उनकी सास ने मुझे अंदर बुलाया।
प्रियंका भाभी रसोई में काम कर रही थीं। उन्होंने सफेद रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गोरे बदन पर किसी दूध की तरह चमक रही थी। वो bhabhi sexy लग रही थीं।
“अर्जुन जी, बैठिए,” उनकी सास ने कहा।
प्रियंका भाभी चाय लेकर आईं। जब वो झुककर चाय रखने लगीं, तो उनके ब्लाउज से उनके बूब्स का कुछ हिस्सा दिखाई दिया। मेरी साँसें थम सी गईं। वो इतनी nude bhabhi जैसी दिख रही थीं कि मेरा लंड अपने आप खड़ा हो गया।
मैंने चाय पी और बातचीत शुरू की। पता चला कि रोहित एक महीने बाद आएंगे। मेरे मन में लालच की आग और तेज हो गई।
भाग 3: पहली बार अकेले में
अगले दिन शाम को, मैंने देखा कि प्रियंका भाभी अकेली छत पर कपड़े सुखा रही थीं। उनके सास-ससुर कहीं गए हुए थे। मैं भी छत पर गया।
“नमस्ते भाभी,” मैंने कहा।
वो मुड़ीं और मुस्कुराईं, “अर्जुन जी, आप भी यहाँ?”
“हाँ, हवा खाने आया था। आप अकेली हैं?” मैंने पूछा।
“हाँ, मम्मी-पापा किसी रिश्तेदारी में गए हैं। मैं अकेली हूँ घर पर,” वो बोलीं।
यह सुनकर मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मौका बिल्कुल सही था।
हम छत पर बातें करने लगे। धीरे-धीरे बातें पर्सनल होने लगीं।
“भाभी, आप उदास क्यों लग रही हैं?” मैंने पूछा।
वो नीचे देखने लगीं, “कुछ नहीं… बस…”
“क्या रोहित भाई से दूर रहने का गम है?” मैंने शरारत से पूछा।
वो शर्मा गईं, “वो… हाँ… मतलब… शादी हुई है और वो चले गए।”
मैंने समझा कि वो अपनी Bhabhi suhagraat के लिए तरस रही हैं। मैंने हिम्मत की और उनके कंधे पर हाथ रखा।
“भाभी, मैं समझ सकता हूँ। आपकी तकलीफ मुझे महसूस होती है,” मैंने कहा।
वो मेरी तरफ देखीं। हमारी आँखें मिलीं। उनमें एक अजीब सी कामुकता थी। मैंने अपना हाथ उनके गाल पर रखा। वो नहीं हटीं।
“अर्जुन… यह ठीक नहीं है,” वो धीमी आवाज में बोलीं।
“प्यार कभी गलत नहीं होता भाभी,” मैंने कहा और उनके होठों पर अपने होठ रख दिए।
वो पहले तो कुछ पल के लिए रुकीं, फिर जवाब देने लगीं। हम एक-दूसरे को किस करने लगे। उनके होठ इतने रसीले थे कि मैं पागल हो रहा था।
भाग 4: रात का आगाज़
किस करते-करते मैंने उन्हें अपनी बाहों में उठाया और अपने घर की तरफ ले जाने लगा। वो कुछ नहीं बोलीं, बस मेरी बाहों में समा गईं।
मैंने अपने घर का दरवाजा खोला और उन्हें अंदर ले गया। मेरा बेडरूम साफ-सुथरा था। मैंने उन्हें बेड पर बिठाया।
वो शर्म से लाल हो रही थीं। Desi bhabhi chudai का यह पहला पल था और वो घबरा रही थीं।
“डरो मत भाभी, मैं हूँ ना,” मैंने कहा।
मैंने उनके पल्लू को हटाया। वो nude bhabhi नहीं थीं लेकिन उनका ब्लाउज और पेटीकोट उनके बदन को और भी सेक्सी बना रहा था।
मैंने उनके बालों को खोला। लंबे काले बाल उनके चेहरे पर गिरे। मैंने उनके माथे पर किस किया। फिर आँखों पर, फिर गालों पर, और फिर होठों पर।
“ऊह्ह्ह… अर्जुन…” वो सिसकीं।
मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे हुक खुले। अंदर वो सफेद रंग की ब्रा पहने हुई थीं जो उनके गोरे बूब्स को और भी उभार रही थी।
मैंने ब्रा को भी हटाया। वो bhabhi sexy अवस्था में मेरे सामने थीं। उनके बूब्स इतने सुंदर थे – गोल, मोटे और गुलाबी निप्पल वाले।
मैंने एक बूब्स को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। वो मेरे सिर को अपने बूब्स पर दबाने लगीं।
“आह्ह्ह… हाँ… और जोर से…”
मैंने दूसरा बूब्स हाथ से दबाया। वो कसने लगीं मुझे।
भाग 5: पूरी रात का खेल
मैंने उन्हें पूरी तरह nude bhabhi बना दिया। उनका पेटीकोट और पैंटी भी उतार दी। वो पूरी नंगी मेरे सामने थीं। उनकी चूत बिल्कुल साफ थी, एक भी बाल नहीं था। शायद शादी से पहले से ही वो तैयार थीं bhabhi ka sex के लिए।
मैंने उन्हें बेड पर लिटाया और उनके पैर फैलाए। उनकी चूत गुलाबी और गीली हो चुकी थी। मैंने उस पर अपनी जीभ रखी।
“ओह्ह्ह… माँ… क्या कर रहे हो?” वो चीखीं।
मैंने चूत चाटनी शुरू की। ऊपर से नीचे तक, फिर अंदर की तरफ। उनकी चूत का रस मीठा था। वो पागल हो रही थीं।
“चाटो… और गहरा चाटो… आह्ह्ह…”
मैंने उनकी चूत में उंगली डाली। वो टाइट थी। मैंने धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की। वो hot sexy bhabhi की तरह चिल्ला रही थीं।
“फाड़ दो मेरी चूत… आओ अब…”
मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा 8 इंच का मोटा काला लंड देखकर वो डर गईं।
“इतना बड़ा? यह तो मेरी चूत फाड़ देगा,” वो घबराईं।
“डरो मत भाभी, धीरे-धीरे अंदर जाएगा और बहुत मजा आएगा,” मैंने कहा।
मैंने उनके पैर अपने कंधों पर रखे और लंड को चूत के मुँह पर रखा। थोड़ा सा थूक लगाया और एक हल्का धक्का दिया।
“ऊऊऊईईई… दर्द हो रहा है… रुक जाओ…” वो चीखीं।
मैंने रुककर उनके बूब्स चूसे। फिर से धक्का दिया। इस बार आधा लंड अंदर चला गया।
“आह्ह्ह… बहुत दर्द हो रहा है…”
“थोड़ी देर में मजा आएगा,” मैंने कहा और एक जोर का धक्का मारा।
पूरा लंड अंदर समा गया। वो चीख पड़ीं लेकिन मैंने रुकना नहीं चाहा। मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। 5 मिनट बाद वो भी मजे लेने लगीं।
“हाँ… अब अच्छा लग रहा है… और तेज करो…”
यह थी पड़ोस वाली भाभी के साथ सुहागरात। उनका पति विदेश में था और यहाँ उनकी पत्नी मेरे लंड की सवारी कर रही थी। मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और पीछे से चोदने लगा।
“ओह्ह्ह… मारो… और जोर से मारो…”
मैंने उनकी गांड थपथपाई और चोदना जारी रखा। 20 मिनट तक लगातार चोदने के बाद मैंने अपना माल उनकी चूत में ही छोड़ दिया।
वो थककर मेरी बाहों में गिर गईं।
भाग 6: रात भर का दौर
पहला राउंड खत्म होने के बाद हम एक घंटे तक एक-दूसरे की बाहों में पड़े रहे। मैंने उनके बदन को सहलाया, उनके बूब्स दबाए, उनकी चूत सहलाई।
“तुम बहुत अच्छे हो अर्जुन,” प्रियंका भाभी बोलीं, “मुझे पता नहीं था कि bhabhi ka sex इतना मजेदार होता है।”
“अभी तो रात बाकी है भाभी,” मैंने कहा।
रात के 2 बजे थे। मैंने फिर से उनके ऊपर चढ़ना शुरू किया। इस बार वो पूरी तरह तैयार थीं। उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में लिया और चूसना शुरू किया।
“ऊह्ह्ह… भाभी… क्या कर रही हो…”
वो bhabhi sexy अंदाज़ में मेरा लंड चूस रही थीं। ऊपर-नीचे कर रही थीं, जीभ से चाट रही थीं। मुझे बहुत मजा आ रहा था।
“तुम्हारा लंड बहुत स्वादिष्ट है,” वो बोलीं।
मैंने उन्हें 69 की पोजीशन में लिटाया। मैं नीचे था और वो मेरे ऊपर। मैं उनकी चूत चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थीं। हम दोनों मजे में थे।
“आह्ह्ह… और गहरा चाटो…”
मैंने उनकी चूत में जीभ डाली और अंदर-बाहर करने लगा। वो पागल हो रही थीं। 10 मिनट बाद वो झड़ गईं और उनका रस मेरे मुँह में आ गया।
मैंने उन्हें फिर से घोड़ी बनाया और पीछे से लंड डाला। इस बार वो और जोर-जोर से चिल्ला रही थीं।
“फाड़ दो… मेरी चूत फाड़ दो… और तेज…”
मैंने पूरी रात उन्हें चोदा। सुबह 5 बजे तक हम तीन बार और कर चुके थे। हर बार नई पोजीशन में – कभी घोड़ी बनाकर, कभी उनके पैर उठाकर, कभी उनको ऊपर बिठाकर।
भाग 7: सुबह का मंजर
सुबह 7 बजे जब आँख खुली, तो देखा कि प्रियंका भाभी मेरे बगल में nude bhabhi की तरह सो रही थीं। उनके बदन पर कई लाल निशान थे जो मैंने रात को चूसते और काटते समय बनाए थे।
मैंने उन्हें जगाया। वो आँखें मलते हुए बोलीं, “कितना समय हो गया?”
“सुबह के 7 बजे हैं,” मैंने कहा।
वो चौंकीं, “ओह माई गॉड! मुझे घर जाना होगा। मम्मी-पापा आ गए होंगे।”
वो जल्दी से कपड़े पहनने लगीं। मैंने उन्हें रोका और एक लंबा किस किया।
“रात कैसी रही?” मैंने पूछा।
वो शर्माते हुए बोलीं, “अद्भुत। मैंने कभी नहीं सोचा था कि पड़ोस वाली भाभी के साथ सुहागरात इतनी यादगार होगी।”
“क्या तुम्हें पछतावा है?” मैंने पूछा।
“बिल्कुल नहीं। मैं तो खुश हूँ कि तुमने मेरी Bhabhi suhagraat मनाई। वरना मैं तो अपने पति का इंतजार करती रह जाती,” वो बोलीं।
मैंने उन्हें एक और बार चूमा और उनके बूब्स दबाए। वो मुस्कुराईं और चली गईं।
भाग 8: पति का आगमन
ऐसे ही 10 दिन बीत गए। हर रात प्रियंका भाभी मेरे घर आतीं और हम Desi bhabhi chudai का खेल खेलते। वो sexy bhabhi in saree में मुझे बहुत मादक लगती थीं और मैं उन्हें देखते ही उनके कपड़े उतार देता।
लेकिन 11वें दिन उनके पति रोहित का फोन आया। वो अगले दिन वापस आ रहे थे।
प्रियंका भाभी उदास थीं। वो मेरे घर आईं और मेरी बाहों में रोने लगीं।
“अर्जुन, अब क्या होगा? रोहित आ रहे हैं। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती,” वो रो रही थीं।
“डरो मत भाभी, हम मौका देखकर मिलते रहेंगे,” मैंने उन्हें चुप कराया।
“लेकिन वो रोज घर पर रहेंगे तो?” वो पूछीं।
“तुम्हें बहाने बनाने होंगे। कभी किराने का सामान, कभी डॉक्टर, कभी कुछ तो कुछ,” मैंने कहा।
उस रात हमने बहुत जोश से सेक्स किया। जैसे यह आखिरी रात हो। मैंने उन्हें पूरी रात नहीं सोने दिया। बार-बार चोदा, हर जगह – बेड पर, बाथरूम में, सोफे पर, फर्श पर।
“आज मेरी गांड भी मार लो,” उन्होंने कहा।
मैंने उनकी गांड में तेल लगाया और धीरे से लंड डाला। वो दर्द से चीखीं लेकिन फिर मजा आने लगा।
“ओह्ह्ह… गांड में भी मजा आता है… और तेज करो…”
मैंने उनकी गांड 15 मिनट तक मारी और फिर अपना माल उनकी गांड में ही छोड़ दिया।
अगले दिन रोहित आ गए। वो एक साधारण दिखने वाले इंसान थे। मैंने उन्हें देखा और सोचा कि यही वो आदमी है जिसकी पत्नी मेरी हो चुकी है।
प्रियंका भाभी ने मुझे देखा और शर्मा गईं। वो अपने पति के साथ थीं लेकिन उनकी नजरें मुझ पर ही थीं।
रात को जब रोहित और प्रियंका अपने कमरे में थे, तो मुझे एक मैसेज आया प्रियंका भाभी का: “वो सो गए हैं। मैं तुम्हारे पास आ रही हूँ।”
5 मिनट बाद वो मेरे घर आईं। वो रात के कपड़ों में थीं – एक हल्की सी नाइटी।
“मैं उनके साथ सो नहीं सकती। मुझे तुम्हारी याद आ रही थी,” वो बोलीं।
मैंने उन्हें तुरंत अपनी बाहों में भर लिया और किस करने लगा। हम फर्श पर ही एक-दूसरे को चूमने लगे।
“जल्दी करो, ज्यादा समय नहीं है,” वो बोलीं।
“मैं जा रही हूँ। रोहित जाग न जाएं,” वो कहकर चली गईं।