फ्रेंड्स, मेरा नाम आर्यन है. मेरी उम्र 25 साल है. मेरी हाइट 5’8 है गोरा-सा रंग, क्यूट-सा चेहरा और क्लीन शेव रहता हूँ.
अपनी नौकरी की थकान से दूर अक्सर सोशल मीडिया की दुनिया में सुकून तलाशता था। एक दिन फेसबुक के एक ग्रुप पर मुलाकात माया से हुई। बातों-बातों में पता चला कि माया रिश्ते में उसकी दूर की ‘भाभी’ लगती थीं, लेकिन परिवार के बीच लंबे समय से कोई संपर्क नहीं था। माया की हाइट 5’3 है और वो सुंदर हुसैन की मालकिन है जिसका फिगर 36-28-34 है
शुरुआत में बातें बहुत सामान्य थीं—मौसम, पुरानी यादें और शहर का हाल। मुझे माया की बातों में एक ऐसी परिपक्वता और गहराई महसूस हुई जो उसे अपने हमउम्र दोस्तों में नहीं मिलती थी। माया ने उसे बताया कि कैसे गाँव में अकेले रहकर उन्होंने पूरे परिवार को संभाला, जबकि उनके पति (आर्यन के चचेरे भाई) व्यापार के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते थे।
धीरे-धीरे उनकी बातचीत गहरी होने लगी। मुझे अपने ऑफिस के तनाव और अपनी तन्हाई के बारे में उनसे बातें साझा करने लगा। माया एक ऐसी ‘भाभी’ की भूमिका में थीं, जो न केवल उसे सलाह देती थीं, कुछ महीनों बाद, मेरे परिवार में एक शादी तय हुई। वहाँ माया भी आने वाली थीं। मेरे मन में थोड़ी घबराहट थी—क्या फोन वाली बातें और असलियत एक जैसी होंगी?
शादी के शोर-शराबे के बीच, आर्यन और माया को एक-दूसरे के करीब आने का मौका मिला। उस रात छत पर सन्नाटा था, सिर्फ ठंडी हवाएँ चल रही थीं। आर्यन वहाँ अकेला खड़ा था, तभी माया वहाँ आईं।
छत पर उस रात जब मैं और माया एक-दूसरे की साँसों के बेहद करीब थे, तभी अचानक नीचे आँगन में किसी के चलने की आहट सुनाई दी।माया ने रेशमी साड़ी पहनी थी, जिसकी सरसराहट आर्यन के कानों में एक संगीत की तरह गूँज रही थी। जैसे ही वह आर्यन के पास आकर खड़ी हुईं, उनके इत्र की धीमी खुशबू ने आर्यन के होश उड़ा दिए। आर्यन ने उनकी ओर देखा, और उस पल उनकी आँखें आपस में उलझ गईं।
माया की आँखों में एक अजीब सी चमक थी—एक ऐसी कशिश जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था। आर्यन ने धीमे से कहा, “आप हकीकत में उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत हैं जितना मैंने सोचा था।” माया मुस्कुराईं और एक कदम और करीब आईं। उनके बीच की दूरी अब खत्म हो रही थी। आर्यन महसूस कर सकता था कि उसकी धड़कनें तेज़ हो रही हैं। माया ने धीरे से अपना हाथ आर्यन के हाथ पर रखा। वह स्पर्श बिजली की तरह आर्यन के पूरे शरीर में दौड़ गया।
माया ने फुसफुसाते हुए कहा, “ऑनलाइन बातों में जो सुकून था, क्या वह इस वक्त यहाँ महसूस हो रहा है?”
आर्यन ने हिम्मत जुटाकर उनके हाथ को अपनी उंगलियों में जकड़ लिया। उस ठंडी रात में, उन दोनों के बीच की गर्माहट बढ़ती जा रही थी। वे इतने करीब थे कि एक-दूसरे की सांसों की आवाज़ सुन सकते थे। आर्यन का झुकाव उनकी ओर होने लगा, वह उनके चेहरे के और करीब गया। माया ने अपनी आँखें मूँद लीं, जैसे वह भी उस पल को पूरी तरह जीना चाहती हो।
मैं झटके से पीछे हटा और माया ने अपनी साड़ी का पल्लू संभाला। वह पल जो पूरी तरह उनका होने वाला था, एक डर में बदल गया।
आर्यन के चचेरे भाई (माया के पति) भी वहीं पहुँच चुके थे। आर्यन जब भी माया को देखता, उसे एक अजीब सी कसक महसूस होती। वह उनसे अकेले में मिलना चाहता था, उन्हें छूना चाहता था, लेकिन हर बार कोई न कोई बीच में आ जाता।
माया की आँखों में भी वही तड़प थी। एक बार रसोई में जब माया अकेले काम कर रही थीं, आर्यन पीछे से जाकर उनके पास खड़ा हो गया। उसने धीरे से उनके हाथ को छूने की कोशिश की, लेकिन तभी आर्यन की माँ की आवाज़ आई, “माया, ज़रा इधर आना!”
माया ने एक बेबस निगाह आर्यन पर डाली और वहाँ से चली गईं। वह अधूरा स्पर्श आर्यन को बेचैन कर गया।
रात को जब सब सो जाते, तो वे फिर से फोन पर बात करते। कमरे की दीवारें बीच में थीं, लेकिन दिल एक-दूसरे के पास थे। आर्यन ने मैसेज किया:
“इतने करीब होकर भी मैं आपको अपना नहीं कह पा रहा, यह दूरी जान ले लेगी।”
माया का जवाब आया:
“आर्यन, आग दोनों तरफ लगी है। पर याद रखो, हम जिस आग से खेल रहे हैं, वह हमें जला भी सकती है। पर फिर भी… मेरा मन तुम्हारे पास ही खिंचा चला आता है।”
शादी के अगले दिन तेज़ बारिश होने लगी। घर के सभी लोग हॉल में जमा थे, लेकिन लाइट चली गई। अँधेरे का फायदा उठाकर आर्यन ने माया का हाथ पकड़ा और उन्हें कोने वाले एक छोटे से स्टोर रूम की तरफ ले गया।
वहाँ पुरानी यादों और धूल के बीच, वे एक-दूसरे के बिल्कुल आमने-सामने थे। बाहर बारिश की आवाज़ तेज़ थी और अंदर उनकी धड़कनें। आर्यन ने माया को दीवार से सटा दिया। वह उनके इतना करीब था कि उनकी आँखों की पुतलियाँ साफ देख सकता था।
माया ने कांपती आवाज़ में कहा, “आर्यन… कोई देख लेगा।” आर्यन ने उनके होठों पर उंगली रख दी और कहा, “इस पल को मत टोको। यह मुश्किल से मिला है।”
आर्यन ने बिना कुछ कहे उनका हाथ थाम लिया और उन्हें अपनी ओर खींचा। इस बार कोई डर नहीं था, कोई आहट नहीं थी। माया का शरीर आर्यन के मजबूत सीने से टकराया। दोनों की साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर महसूस हो रही थीं।
आर्यन ने बहुत ही कोमलता से माया के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया और उनकी आँखों में झाँका। उन आँखों में समर्पण था, प्यार था और बरसों की तन्हाई का अंत था। आर्यन ने फुसफुसाते हुए कहा:
“आज कोई दीवार नहीं है हमारे बीच। सिर्फ तुम हो और मैं हूँ।”
माई उसे अपनी बाहो में पकड़ के होठों पे चूमना शुरू कर दिया
मैंने माया भाभी को अपने सामने लाकर उन्हें फ्रेंच किस करना शुरू किया।
मुझे फ्रेंच किस जोर से करना पसंद है क्योंकि इससे सामने वाले की वासना भड़क उठती है और सब्र का बांध टूट जाता है।
मैंने उनकी गर्दन और कान की लौ पर चूमना शुरू किया तो वह पिघल सी गईं और जोर-जोर से आहें भरने लगीं।थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझसे अपने रूम में चलने को कहा क्योंकि वह ज्यादा सेफ था।
कमरे में जाते ही माया भाभी भूखी शेरनी की तरह मुझ पर टूट पड़ीं और झट से मेरे लगभग सारे कपड़े उतार कर फेंक दिए।उन्होंने लोअर और टॉप पहन रखा था।
मैंने जैसे ही उनका टॉप उतारा तो काली ब्रा में 36 के आकार के अमृत कलश दिखाई दिए।
यकीन मानिए, मैंने इतने सुंदर वक्ष कभी नहीं देखे थे!
मैंने ब्रा के ऊपर से ही उन्हें चूमना शुरू किया, तो माया भाभी पागल होने लगीं।
उन्होंने तुरंत अपनी ब्रा खुद खोल दी और अपना बायां कलश मेरे मुंह में दे दिया।
मैंने उनके गुलाबी निप्पल पर जीभ फेरकर उन्हें चूसना शुरू किया।
कभी दायां, कभी बायां… चूस-चूस कर मैंने उन्हें मदहोश कर दिया था।मैं पहले से ही लगभग निर्वस्त्र था, अब बारी मेरे अंडरवियर की थी।
माया भाभी उसे उतारने की कोशिश करने लगीं।आपको पता ही है, जब लिंग पूरी तरह टाइट होता है तो अंडरवियर उतारने में दिक्कत होती है।
जैसे ही उन्होंने उसे उतारा और मेरा लहराता हुआ 6 इंच का लौड़ा देखा, उनकी आंखों में चमक आ गई।“वाह! इतना प्यारा सामान! यह तो मेरे लिए ही बना है!” भाभी बोलीं और उसे गप से मुंह में लेने का प्रयास करने लगीं।
जैसे ही उन्होंने उसे मुंह में लिया, मैं सातवें आसमान पर था!
यह मेरा पहला ब्लोजॉब का अनुभव था, और यह सुख वही जानता है जिसने इसे भोगा हो!अगले ही पल मैंने माया भाभी के बचे हुए कपड़े भी उतार दिए।
मैंने देखा कि उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था।उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मौके के लिए हर दूसरे दिन सफाई की है।
मुझे हमेशा से चिकनी चूत पसंद है।मैंने उन्हें बेड पर सीधा लिटाकर उनकी टांगें उठाईं और चूत चाटना शुरू किया।
माया भाभी को इतना आनंद आ रहा था कि उन्होंने अपनी दोनों टांगें मेरी गर्दन में लपेट लीं।मैंने तब तक चूत चाटना बंद नहीं किया, जब तक वह जल बिन मछली की तरह तड़पने नहीं लगीं!
अब वे मिन्नतों पर उतर आई थीं।
“कैसे भी करके इसे अंदर कर दो!” वह तड़पकर बोलीं।मैंने देर न करते हुए उनके नीचे दो तकिया रखे और अंदर करने की सोची।
पर यह क्या! माया भाभी की चूत इतनी कसी हुई थी जैसे किसी नई नवेली दुल्हन की हो।“जिसे इसका ख्याल रखना चाहिए था, उसने ध्यान नहीं दिया! अब तुम्हें ही यह सब देखना है!” उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा।
मैंने हल्का सा धक्का लगाया और लण्ड का टोपा अंदर सरक गया।
वे ‘आह-आह’ करने लगीं।
मैंने प्यार से उनके सिर पर हाथ फेरा।
“यह दर्द भी यादगार रहेगा!” मैंने मुस्कुराकर कहा।उन्होंने अनुमति दे दी।
अगले ही पल मैंने बिना ढील दिए दूसरा झटका दिया, जिससे काफी हद तक लण्ड अंदर चला गया।तीसरे झटके में पूरा का पूरा अंदर था!
माया भाभी की आंखों में आंसू थे पर उन्होंने धीरे से मुझे ‘थैंक यू’ कहा।
मैंने उनकी प्रतिक्रिया देखी और धक्कों की गति बढ़ा दी।हमने करीब 7 मिनट तक इसी पोज में किया, फिर डॉगी स्टाइल और अन्य अलग-अलग पोज में लगभग 20 मिनट तक चुदाई की।
माया भाभी हर झटके पर मजे से चिल्ला रही थीं!
जब मेरे निकलने का समय आया, तो मैंने माया भाभी को बताया।
“बिना एक बूंद खोए, मैं इसे अपने अंदर ही लेना चाहूंगी!” उन्होंने कहा।
अगले ही पल माया भाभी की चूत मेरे वीर्य से भर गई।
मैं उनके ऊपर ही लेट गया और जब हटा, तो वीर्य उनकी चूत से रिस रहा था।माया भाभी ने मुझे फिर से गले लगा लिया।
“आज तुमने मुझे वो दिया, जिसके लिए मैं महीनों से तड़प रही थी!” उन्होंने सुकून से कहा।उस रात मैंने माया भाभी की जमकर 3 बार चुदाई की, हर उस कामसूत्र के 64 आसन में जो संभव था!
बाद में उन्होंने अपनी एक सहेली से भी मेरा परिचय कराया।
वह कहानी फिर कभी!इस हॉट भाभी वासना कहानी पर आप अपने विचार लिखें.
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