
आधी रात ढलते ही पुरानी दिल्ली की तंग गलियां खामोश हो चुकी थीं। सुनसान अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में आरव खिड़की के पास बैठा काम कर रहा था। तभी सामने वाली बालकनी में उसे अपनी पड़ोसन मीरा दिखाई दी। पड़ोसन की तन्हाई और रात का सन्नाटा
मीरा शादीशुदा थी, लेकिन उसका पति काम के सिलसिले में महीनों शहर से बाहर रहता था। आलीशान घर और तमाम सहूलियतों के बावजूद, मीरा के हिस्से सिर्फ़ लंबी, अकेली रातें आती थीं। दिन में तो वह मुस्कुराकर खुद को व्यस्त रख लेती, लेकिन रात का सन्नाटा उसकी तन्हाई को बेपर्द कर देता था।
उस रात सन्नाटा कुछ ज़्यादा ही भारी था। हवा के तेज़ झोंके से बालकनी का दरवाज़ा टकराया और एक कप टूटने की आवाज़ आई। आरव ने देखा कि मीरा बालकनी के कोने में बैठी अपना चेहरा छिपाकर रो रही थी। आरव से रहा नहीं गया; वह नीचे गया और मीरा का दरवाज़ा खटखटाया।
जब मीरा ने दरवाज़ा खोला, तो उसकी आँखों में अपनों के बीच भी अकेले रह जाने का दर्द साफ़ झलक रहा था। उसने गहरे नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उसके सांवले बदन पर चाँदी की तरह चमक रही थी। उसका बदन – ओह, वो बदन जो साड़ी में लिपटा हुआ था, उसकी गोलाइयाँ ऐसी थीं जो किसी भी मर्द का दिल धड़का सकती थीं। उसके स्तन भरे हुए थे, साड़ी के ब्लाउज में कसे हुए, और उसकी कमर इतनी पतली कि हाथ रखते ही उंगलियाँ आपस में मिल जातीं।
“आइए,” मीरा ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ में काँपने के साथ-साथ एक अजीब सी बेचैनी भी थी।
आरव अंदर आया। कमरे में गुलाबी रोशनी थी, सोफे पर बैठे तो मीरा उनके बगल में आ बैठी। आरव ने देखा कि मीरा का बदन काँप रहा था, न सिर्फ़ ठंड से, बल्कि किसी अंदरूनी ज्वाला से।
“मैं… मैं चाय बनाती हूँ,” मीरा ने कहा और उठने लगी।
जैसे ही वो उठी, उसका पल्लू फिसलकर कंधे से नीचे गिर गया। आरव की नज़र उसके गले पर टिक गई – वो गहरा गड्ढा, वो मोहक गर्त जहाँ पसीने की एक बूंद चमक रही थी। मीरा ने शर्माते हुए पल्लू ठीक किया, लेकिन उसकी आँखों में कुछ और ही था – एक चाहत, एक प्यास।
चाय बनने के बाद, वो दोनों सोफे पर बैठे। मीरा ने अपनी साड़ी का पल्लू कंधे पर रखा, लेकिन जानबूझकर थोड़ा नीचे खिसका दिया था ताकि उसका पेट दिखे – वो गहरा नाभि गड्ढा, वो सांवली त्वचा जो चमक रही थी।
“आरव,” मीरा ने धीरे से कहा, “क्या तुम… क्या तुम मुझे छू सकते हो? बस एक बार? मुझे… मुझे किसी की छुअन चाहिए।”
आरव ने उसे देखा। उसकी आँखों में वो पागलपन था जो रात के अँधेरे में अकेलापन पैदा करता है। वो धीरे से मीरा की ओर बढ़ा और उसके हाथ को छुआ। मीरा का हाथ गरम था, पसीने से तर।
“और करीब आओ,” मीरा ने फुसफुसाते हुए कहा।
आरव ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। मीरा का सर उसके कंधे पर आ गया। वो दोनों ऐसे ही बैठे रहे, फिर धीरे-धीरे आरव ने मीरा का चेहरा उठाया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
वो पहला चुंबन था – हल्का, शर्मीला, लेकिन फिर गहरा होता गया। मीरा ने आरव के बालों में हाथ फेरा और उसे और करीब खींच लिया। उसके मुँह से निकली हल्की सी आवाज़ आरव को और उत्तेजित कर रही थी।
“मुझे… मुझे अपने कमरे में ले चलो,” मीरा ने कहा, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
आरव ने उसे गोद में उठाया। मीरा का बदन इतना हल्का नहीं था, लेकिन उसकी गोलाइयाँ आरव के सीने से चिपक रही थीं। वो उसे बेडरूम में ले गया जहाँ हल्की सी रोशनी थी।
आरव ने मीरा को बिस्तर पर बिठाया। मीरा ने शर्माते हुए अपनी साड़ी का पल्लू खोला और धीरे-धीरे उसे खींचना शुरू किया। वो साड़ी का पल्लू जो उसके बदन पर लिपटा हुआ था, वो अब फिसलता जा रहा था – पहले कंधे से, फिर सीने से, फिर कमर से। उसने साड़ी को इतने धीरे खोला जैसे कोई पौधा अपनी पत्तियाँ खोलता है।
अब मीरा सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसका ब्लाउज गहरे नीले रंग का था, गहरी गोलाई वाला, और उसके स्तन ऐसे भरे हुए थे कि ब्लाउज की हुक तनकर बाहर आ रही थी।
“तुम… तुम मुझे नंगी कर दो,” मीरा ने कहा, उसकी आँखें नीचे झुकी हुई थीं।
आरव ने उसके सामने घुटने टेक दिए। उसने धीरे से मीरा के पैर छुए, फिर उसके पेटीकोट का नाड़ा खोलना शुरू किया। नाड़ा खुला और पेटीकोट नीचे गिर गया। अब मीरा सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में थी – नीचे उसकी जाँघें, वो गोल, माँसल जाँघें जो सांवली त्वचा में चमक रही थीं।
आरव ने धीरे से उसके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक हुक, फिर दूसरा, फिर तीसरा। जैसे ही ब्लाउज खुला, मीरा के स्तन बाहर आ गए – वो बड़े, गोल स्तन जो अब ब्रा में कसे हुए थे। उसकी ब्रा भी नीले रंग की थी, लेस वाली, और उसके स्तन ऐसे भरे हुए थे कि ब्रा की कप ऊपर से नीचे तक तनी हुई थी।
“क्या… क्या तुम मुझे पसंद करते हो?” मीरा ने पूछा।
“बहुत ज़्यादा,” आरव ने कहा और उसे बिस्तर पर लिटा दिया।
आरव ने मीरा के ब्लाउज को पूरी तरह से खोल दिया। अब मीरा सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी। उसका बदन – ओह वो बदन! उसकी सांवली त्वचा चमक रही थी, उसकी नाभि गहरी थी, और उसके स्तन जो ब्रा में कसे हुए थे, वो इतने मुलायम और भरे हुए थे कि आरव का हाथ स्वतः ही उनकी ओर बढ़ गया।
आरव ने धीरे से मीरा की ब्रा के हुक खोले। जैसे ही ब्रा खुली, मीरा के स्तन बाहर आ गए – वो गोल, भारी स्तन जिनके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे और इतने कड़े हो चुके थे कि ऊपर से ही दिख रहे थे। उसके स्तनों का आकार इतना सुंदर था, इतना परिपक्व कि आरव का मुँह उन पर टिक गया।
“चूसो… प्लीज़,” मीरा ने कहा, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
आरव ने एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया। वो उसे चूसने लगा, काटने लगा, और मीरा की आवाज़ निकलने लगी – “आह… हाँ… और ज़ोर से…”
आरव ने दूसरे हाथ से दूसरा स्तन दबाना शुरू किया। वो दोनों स्तनों के बीच बदलता रहा, कभी एक को चूसता, कभी दूसरे को। मीरा का बदन काँप रहा था, उसकी जाँघें आपस में रगड़ रही थीं।
“और नीचे… प्लीज़,” मीरा ने कहा।
आरव ने धीरे से उसकी पेंटी खींची। मीरा ने अपनी कमर उठाई और पेंटी नीचे खिसक गई। अब मीरा पूरी तरह से नंगी थी – उसका सांवला बदन, उसकी भरी हुई जाँघें, और उसकी योनि जो अब गीली हो चुकी थी और चमक रही थी।
आरव ने उसकी जाँघों पर चूमना शुरू किया। ऊपर से नीचे की ओर, धीरे-धीरे, किस करते हुए। मीरा की जाँघें काँप रही थीं और उसके मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं – “हाँ… वहीं… और करीब…”
जब आरव ने उसकी योनि को छुआ, तो मीरा एकदम से काँप उठी। वो इतनी गीली थी कि आरव की उंगलियाँ आसानी से अंदर चली गईं।
“अंदर डालो… प्लीज़,” मीरा ने कहा।
आरव ने अपनी उंगली अंदर डाली और बाहर निकाली। मीरा की आवाज़ें तेज़ हो गईं। वो अपनी कमर हिला रही थी, आरव की उंगली के साथ ताल मिला रही थी।
“अब… अब तुम्हारा,” मीरा ने कहा।
आरव ने अपने कपड़े उतारे। उसका लिंग पूरी तरह से तन चुका था, मोटा और लंबा। मीरा ने उसे देखा और उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।
“इतना बड़ा?” उसने कहा।
“क्या तुम तैयार हो?” आरव ने पूछा।
“हाँ… धीरे से… प्लीज़,” मीरा ने कहा।
आरव ने मीरा की जाँघें फैलाईं और धीरे से अपने लिंग को उसकी योनि पर रखा। मीरा की योनि गीली थी, गरम थी, और आरव का लिंग उसमें घुसने लगा।
“आह… धीरे… धीरे,” मीरा ने कहा, उसकी आँखें बंद थीं।
आरव ने धीरे से धक्का लगाया। उसका लिंग आधा अंदर चला गया। मीरा की साँसें रुक गईं, फिर उसने कहा – “और… पूरा अंदर…”
आरव ने एक और धक्का लगाया और उसका पूरा लिंग मीरा की योनि में समा गया। मीरा की आवाज़ निकली – “ओह गॉड… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है…”
आरव ने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। मीरा की योनि इतनी टाइट थी कि उसे हर बार पूरा आनंद मिल रहा था। मीरा अपनी कमर हिला रही थी, आरव के साथ ताल मिला रही थी।
“और तेज़… हाँ… और तेज़,” मीरा ने कहा।
आरव ने गति तेज़ कर दी। वो अब पूरी तरह से मीरा में घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। मीरा के स्तन हर धक्के के साथ हिल रहे थे, और आरव ने उन्हें पकड़कर दबाना शुरू कर दिया।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूँ,” मीरा ने कहा, उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“मैं भी,” आरव ने कहा।
“अंदर… अंदर ही छोड़ दो,” मीरा ने कहा।
आरव ने कुछ और तेज़ धक्के लगाए और फिर मीरा की योनि में ही अपना वीर्य छोड़ दिया। मीरा भी उसी पल झड़ गई, उसकी योनि ने आरव के लिंग को कस लिया और वो दोनों एक-दूसरे में समा गए।
वो दोनों एक-दूसरे से लिपटकर लेटे रहे। आरव का लिंग अभी भी मीरा के अंदर था, और मीरा उसे कसे हुए थी।
“यह… यह पहली बार था जब मुझे असली आनंद मिला,” मीरा ने धीरे से कहा।
आरव ने उसे चूमा। “यह तो सिर्फ़ शुरुआत है,” उसने कहा।
पड़ोसन की तन्हाई और रात का सन्नाटा : रात भर की अग्नि
वो दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे रहे। आरव का हाथ मीरा के स्तनों पर था, उसके निप्पलों को सहला रहा था। मीरा की आँखें बंद थीं, लेकिन उसके मुँह से हल्की-हल्की आवाज़ें निकल रही थीं।
कुछ देर बाद, आरव का लिंग फिर से तनने लगा। मीरा ने उसे महसूस किया और मुस्कुराई।
“फिर से?” उसने पूछा।
“तुम्हारे साथ कभी कम नहीं,” आरव ने कहा।
इस बार मीरा ने आरव को लिटाया और खुद उसके ऊपर आ गई। वो आरव के लिंग को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी, फिर धीरे से उसे अपनी योनि पर रखा और बैठना शुरू किया।
“ओह… यह अलग एंगल है,” मीरा ने कहा, उसकी आँखें बंद थीं।
वो धीरे-धीरे आरव के लिंग पर बैठती गई। उसकी योनि फिर से भरने लगी, लेकिन इस बार वो खुद नियंत्रण में थी। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी, आरव के लिंग को अपनी योनि में पूरा ले रही थी।
आरव ने उसकी कमर पकड़ी और उसे ऊपर-नीचे करने में मदद की। मीरा के स्तन हर हरकत के साथ हिल रहे थे, और आरव ने उन्हें पकड़कर चूसना शुरू कर दिया।
“हाँ… वहीं… और ज़ोर से,” मीरा ने कहा।
वो अब तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। उसकी कमर हिल रही थी, उसकी योनि आरव के लिंग को पूरी तरह से निगल रही थी। आरव को ऐसा लग रहा था जैसे वो स्वर्ग में हो।
“मीरा… तुम बहुत अच्छी हो,” आरव ने कहा।
मीरा ने उसे मुस्कुराते हुए देखा और और तेज़ हो गई। उसकी जाँघें आरव की जाँघों से टकरा रही थीं, और उसकी योनि से निकल रही चिकनाहट से आरव का लिंग और भी आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
“मैं फिर से झड़ने वाली हूँ,” मीरा ने कहा।
“रुको… अभी नहीं,” आरव ने कहा।
वो मीरा को पलटकर अपने ऊपर ले आया। अब मीरा नीचे थी और आरव ऊपर। आरव ने मीरा के पैर अपने कंधों पर रखे और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू किए।
“आह… हाँ… मारो… और ज़ोर से,” मीरा चीख रही थी।
आरव ने पूरी गति से मीरा को चोदना शुरू कर दिया। उसका लिंग अब पूरी तरह से मीरा की योनि में जा रहा था और बाहर आ रहा था। मीरा के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं – “फाड़ दो… फाड़ दो मुझे…”
आरव ने मीरा के स्तनों को ज़ोर से दबाया और फिर एक लंबा धक्का लगाया। मीरा उसी पल झड़ गई, उसकी पूरी बॉडी काँप उठी, और उसकी योनि ने आरव के लिंग को इतनी ज़ोर से कसा कि आरव भी रोक नहीं पाया और फिर से मीरा के अंदर ही झड़ गया।
वो दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे रहे। मीरा का बदन पसीने से लथपथ था, उसकी सांवली त्वचा चमक रही थी।
“मुझे… मुझे पानी चाहिए,” मीरा ने कहा।
आरव उठा और उसके लिए पानी लाया। मीरा ने पानी पिया और फिर आरव को भी पिलाया। वो दोनों फिर से बिस्तर पर आ गए, लेकिन इस बार एक-दूसरे से दूर नहीं, बल्कि और करीब।
“क्या… क्या हम फिर से कर सकते हैं?” मीरा ने शर्माते हुए पूछा।
“क्या तुम थकी नहीं?” आरव ने पूछा।
“नहीं… मैंने इतने सालों में यह सब कुछ नहीं किया… मुझे और चाहिए,” मीरा ने कहा।
आरव ने उसे देखा। उसका लिंग फिर से तनने लगा था। मीरा ने उसे देखा और मुस्कुराई।
“इस बार… क्या हम कुछ अलग कर सकते हैं?” मीरा ने पूछा।
“जैसे?” आरव ने पूछा।
मीरा ने शर्माते हुए कहा, “मैंने सुना है… पीछे से भी कर सकते हैं…”
आरव चौंक गया, लेकिन फिर उसे खुशी हुई। “क्या तुमने कभी किया है?”
“नहीं… मेरे पति ने कभी… वो तो बस ऊपर से ही करते थे और जल्दी में निकल जाते थे,” मीरा ने कहा, “लेकिन मैं सोच रही थी… क्या तुम मुझे वो भी दिखाओगे?”
आरव ने उसे चूमा। “अगर तुम चाहो तो… लेकिन पहली बार दर्द हो सकता है।”
“मैं सहन कर लूँगी… तुम्हारे लिए,” मीरा ने कहा।
पीछे से दरिया
आरव ने मीरा को पेट के बल लिटाया। उसने मीरा के नितंबों को देखा – वो गोल, माँसल नितंब जो अब हवा में उठे हुए थे। उसने धीरे से उन पर हाथ फेरा।
“क्या तुम तैयार हो?” आरव ने पूछा।
“हाँ… लेकिन धीरे से,” मीरा ने कहा।
आरव ने अपनी उंगली पर थूक लगाया और मीरा के गुदा द्वार पर लगाया। मीरा काँपी, लेकिन रुकी नहीं। आरव ने धीरे से एक उंगली अंदर डाली।
“आह… यह अजीब लग रहा है,” मीरा ने कहा।
“दर्द तो नहीं हो रहा?” आरव ने पूछा।
“नहीं… बस अजीब… और आगे करो,” मीरा ने कहा।
आरव ने एक और उंगली अंदर डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। मीरा की आवाज़ें निकलने लगीं – वो आवाज़ें जो पीड़ा और आनंद दोनों को दर्शा रही थीं।
फिर आरव ने अपने लिंग पर थूक लगाया और मीरा के गुदा द्वार पर रखा। वो धीरे से आगे बढ़ा।
“आह… धीरे… धीरे,” मीरा ने कहा।
आरव ने धीरे से धक्का लगाया। उसका लिंग का सिरा अंदर चला गया। मीरा की साँसें तेज़ हो गईं, उसने तकिया मुँह में दबा लिया।
“रुको… थोड़ा रुको,” मीरा ने कहा।
आरव रुक गया। कुछ देर बाद मीरा ने कहा, “अब… अब आगे बढ़ो।”
आरव ने धीरे-धीरे और अंदर किया। उसका लिंग अब आधा अंदर था, और मीरा की गांड इतनी टाइट थी कि उसे बहुत मज़ा आ रहा था।
“पूरा अंदर… प्लीज़,” मीरा ने कहा।
आरव ने एक और धक्का लगाया और उसका पूरा लिंग मीरा की गांड में समा गया। मीरा की आवाज़ निकली – “ओह माई गॉड… यह… यह बहुत गहरा है…”
आरव ने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। मीरा को पहले तो दर्द हो रहा था, लेकिन फिर वो दर्द आनंद में बदलने लगा। उसकी आवाज़ें बदल गईं – अब वो “हाँ… हाँ… और ज़ोर से” कह रही थी।
आरव ने गति बढ़ा दी। वो अब पूरी तरह से मीरा की गांड मार रहा था। मीरा के नितंब हर धक्के के साथ हिल रहे थे, और आरव ने उन्हें पकड़कर और ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
“मारो… मारो मेरी गांड… फाड़ दो उसे,” मीरा चीख रही थी।
आरव ने पूरी ताकत से मीरा को चोदना शुरू कर दिया। उसका लिंग अब पूरी तरह से मीरा की गांड में जा रहा था और बाहर आ रहा था। मीरा का मुँह तकिये में दबा हुआ था, लेकिन उसकी आवाज़ें तकिये से भी बाहर आ रही थीं।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूँ,” मीरा ने कहा।
“मैं भी,” आरव ने कहा।
“अंदर… अंदर ही छोड़ दो… मेरी गांड में ही,” मीरा ने कहा।
आरव ने कुछ और ज़ोरदार धक्के लगाए और फिर मीरा की गांड में ही अपना वीर्य छोड़ दिया। मीरा भी उसी पल झड़ गई, उसकी योनि से तरल पदार्थ निकलकर बिस्तर पर गिर गया।
वो दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे रहे। आरव का लिंग अभी भी मीरा की गांड में था, और वो उसे कसे हुए थी।
“यह… यह बहुत अच्छा था,” मीरा ने धीरे से कहा, “मुझे पता नहीं था कि यह इना मज़ेदार हो सकता है।”
आरव ने उसे चूमा। “तुम बहादुर हो,” उसने कहा।
“तुम्हारे लिए,” मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा।
सुबह की चाहत
सुबह होने पर, आरव और मीरा अभी भी एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। मीरा की पीठ आरव की छाती से सटी हुई थी, और आरव का हाथ उसके स्तनों पर था।
मीरा जागी और पीछे मुड़कर आरव को देखा। “गुड मॉर्निंग,” उसने कहा।
“गुड मॉर्निंग,” आरव ने कहा और उसके होंठों पर चुंबन किया।
मीरा ने महसूस किया कि आरव का लिंग फिर से तन रहा था और उसकी पीठ पर दब रहा था।
“फिर से?” मीरा ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“तुम्हारे साथ हमेशा,” आरव ने कहा।
मीरा ने अपना एक पैर उठाया और आरव के लिंग को अपनी योनि पर रखने दिया। आरव ने पीछे से ही धक्का लगाया और उसका लिंग मीरा की योनि में चला गया।
“ओह… यह अचानक था,” मीरा ने कहा।
आरव ने उसकी कमर पकड़ी और पीछे से ही उसे चोदना शुरू कर दिया। मीरा ने अपना सिर तकिये पर टिकाया और आरव के धक्कों का आनंद लेने लगी।
“हाँ… ऐसे ही… सुबह-सुबह यह बहुत अच्छा लगता है,” मीरा ने कहा।
आरव ने एक हाथ से उसके स्तन पकड़े और दूसरे हाथ से उसकी योनि को सहलाना शुरू कर दिया। मीरा अब पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी।
“और तेज़… प्लीज़… और तेज़,” मीरा ने कहा।
आरव ने गति बढ़ा दी। वो अब पूरी तरह से मीरा को पीछे से चोद रहा था, और मीरा के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं – “मारो… मारो मुझे… मैं तुम्हारी हूँ…”
आरव ने मीरा को पलटकर अपने ऊपर ले आया। अब मीरा उसके ऊपर थी, और आरव नीचे। मीरा ने आरव के लिंग को अपने हाथ में लिया और अपनी योनि में डाल लिया। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी, अपने स्तन आरव के मुँह के पास ला रही थी।
आरव ने एक स्तन को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। मीरा और तेज़ हो गई, वो अब पूरी तरह से आरव के ऊपर उछल रही थी।
“मैं झड़ने वाली हूँ… तुम भी आओ मेरे साथ,” मीरा ने कहा।
आरव ने मीरा की कमर पकड़ी और नीचे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। मीरा चीख उठी और उसी पल झड़ गई। आरव भी उसके साथ ही झड़ गया, उसका वीर्य मीरा की योनि में भर गया।
मीरा थककर आरव के ऊपर ही गिर गई। उसके स्तन आरव की छाती पर दबे हुए थे, और दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं।
“मुझे… मुझे नहाना होगा,” मीरा ने धीरे से कहा।
“साथ में चलें?” आरव ने पूछा।
“हाँ,” मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा।
वो दोनों बाथरूम में गए। मीरा ने शावर चालू किया और पानी नीचे बहने लगा। उसकी सांवली त्वचा पानी से भीगकर और भी चमकदार लग रही थी।
आरव ने उसे पीछे से गले लगाया और उसके स्तनों को पकड़ लिया। मीरा ने अपना सिर पीछे किया और आरव के कंधे पर रख दिया।
“तुम… तुम मुझे फिर से चाहते हो?” मीरा ने पूछा।
“हमेशा,” आरव ने कहा और अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी योनि पर रख दिया।
मीरा ने महसूस किया कि आरव का लिंग फिर से तन रहा था और उसकी पीठ पर दब रहा था।
“यहाँ… यहाँ नहीं,” मीरा ने कहा, “चलो बाहर… बिस्तर पर।”
वो दोनों भीगे हुए बाहर आए और फिर से बिस्तर पर गिर पड़े। इस बार आरव ने मीरा को अपने ऊपर लिटाया और 69 की पोज़िशन में आ गया।
“क्या… क्या यह?” मीरा ने पूछा।
“बस मुझे चूसो और मैं तुम्हें चूसता हूँ,” आरव ने कहा।
मीरा ने आरव का लिंग अपने हाथ में लिया और उसे अपने मुँह में ले लिया। वो उसे चूसने लगी, जीभ से सहलाने लगी। साथ ही आरव ने भी मीरा की योनि को चाटना शुरू कर दिया।
“ओह… यह… यह बहुत अच्छा है,” मीरा ने कहा, उसका मुँह आरव के लिंग से भरा हुआ था।
दोनों एक-दूसरे को चूस रहे थे। मीरा का शरीर काँप रहा था, और आरव भी उत्तेजित हो रहा था। कुछ देर बाद आरव ने कहा, “रुको… मैं तुम्हारे अंदर जाना चाहता हूँ।”
मीरा ने उसे छोड़ा और पलट गई। आरव ने उसके पैर फैलाए और धीरे से अपना लिंग अंदर डाला।
“हाँ… यह… यह सही जगह है,” मीरा ने कहा।
आरव ने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। पानी से भीगे बिस्तर पर दोनों के बदन फिसल रहे थे, और आरव के धक्के और भी गहरे हो रहे थे।
“और ज़ोर से… मारो मुझे,” मीरा ने कहा।
आरव ने पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए। बिस्तर की चरपराहट और मीरा की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थीं।
“मैं… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ,” मीरा ने कहा।
“इस बार बाहर… मैं तुम्हारे ऊपर छोड़ना चाहता हूँ,” आरव ने कहा।
“हाँ… छोड़ दो मेरे ऊपर… मेरे स्तनों पर,” मीरा ने कहा।
आरव ने कुछ और धक्के लगाए और फिर मीरा के बाहर निकलकर उसके स्तनों पर अपना वीर्य छोड़ दिया। मीरा ने अपने हाथों से उसे अपने स्तनों पर फैलाया और मुस्कुराई।
“यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है,” उसने कहा।
पूरा दिन वो दोनों बिस्तर पर ही रहे। कभी चुदाई, कभी चूसना, कभी एक-दूसरे को सहलाना। मीरा ने आरव को अपनी हर जगह छूने दिया, अपनी हर इच्छा बताई।
दोपहर को, जब वो दोनों थोड़ा आराम कर रहे थे, मीरा ने कहा, “क्या… क्या हम एक बार और कर सकते हैं? लेकिन इस बार… इस बार मैं तुम्हें कुछ दिखाना चाहती हूँ।”
“क्या?” आरव ने पूछा।
मीरा ने शर्माते हुए कहा, “मैंने एक वीडियो देखा था… जिसमें औरत कुत्ते की तरह बन जाती है और आदमी पीछे से…”
“डॉगी स्टाइल?” आरव ने पूछा।
“हाँ… लेकिन वो औरत अपने स्तनों को खुद दबा रही थी और बहुत मज़े ले रही थी,” मीरा ने कहा।
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, “आओ फिर करके देखते हैं।”
मीरा ने अपने हाथों और घुटनों के बल बिस्तर पर आ गई। उसने अपने नितंब हवा में उठाए और आरव को इशारा किया। आरव ने उसके पीछे आकर अपना लिंग उसकी योनि पर रखा।
“पहले… पहले मेरी गांड चाटो,” मीरा ने कहा।
आरव ने झुककर उसकी गांड को चाटना शुरू कर दिया। मीरा की आवाज़ निकली – “ओह… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है…”
आरव ने उसकी गांड को अच्छी तरह चाटा, फिर धीरे से एक उंगली अंदर डाली। मीरा काँपी, लेकिन रुकी नहीं।
“अब… अब डालो,” उसने कहा।
आरव ने अपना लिंग उसकी योनि में डाला और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। मीरा ने अपने हाथों से अपने स्तन पकड़े और उन्हें दबाना शुरू कर दिया।
“हाँ… ऐसे ही… और ज़ोर से… मारो मुझे,” मीरा चीख रही थी।
आरव ने उसकी कमर पकड़ी और पूरी ताकत से उसे चोदने लगा। मीरा का सर तकिये में दबा हुआ था, लेकिन उसकी आवाज़ें पूरी कमरे में गूंज रही थीं।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूँ… और ज़ोर से मारो,” मीरा ने कहा।
आरव ने अपनी गति और तेज़ कर दी। उसका लिंग अब पूरी तरह से मीरा की योनि में जा रहा था और बाहर आ रहा था। मीरा की योनि इतनी गीली थी कि आवाज़ें आ रही थीं – “पच… पच… पच…”
“आह… मैं झड़ गई,” मीरा चीखी और उसकी योनि ने आरव के लिंग को कस लिया।
आरव भी रोक नहीं पाया और मीरा की योनि में ही झड़ गया।
वो दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। मीरा ने अपना सिर आरव की छाती पर रखा और उसके बालों में हाथ फेरने लगी।
“मैं… मैं कभी नहीं भूलूँगी यह दिन,” मीरा ने कहा।
“मैं भी नहीं,” आरव ने कहा।
भाग छह: रात का अंत और नई शुरुआत
शाम होने पर, आरव को जाना था। मीरा ने उसे रोका नहीं, लेकिन उसकी आँखों में आँसू थे।
“क्या… क्या हम फिर से मिलेंगे?” मीरा ने पूछा।
“हमेशा,” आरव ने कहा।
आरव चला गया, लेकिन उस रात के बाद, मीरा की ज़िंदगी बदल गई।
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