पड़ोसन भाभी की चुदाई: बाथरूम से बेड तक
मेरा नाम नमित है और मैं दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय कॉलोनी में अपने माता-पिता के साथ रहता हूं। हमारे पड़ोस में एक नई फैमिली शिफ्ट हुई थी। उनके घर में राहुल, उनकी पत्नी प्रिया और उनकी छोटी बेटी थी। जब पहली बार मैंने प्रिया भाभी को देखा, तो मेरे होश उड़ गए। तब भी मेरा मान में पड़ोसन भाभी की चुदाई ख्याल आया । वो लगभग 28-29 साल की, गोरी, 36-28-38 फिगर वाली एकदम माल जैसी औरत थीं। उनके बड़े-बड़े गोल गाल, मोटे होंठ और खासकर उनकी कमर से नीचे का भारी उभार मेरे दिमाग में बस गया।
मैं रोज सुबह अपनी छत पर योगा करने का बहाना बनाकर उनके बाथरूम की खिड़की की तरफ देखता था। उनका बाथरूम हमारी छत के बिल्कुल सामने था और अक्सर वो खिड़की थोड़ी खुली रखती थीं। मैंने नोटिस किया कि सुबह 8 बजे के आसपास वो नहाने जाती थीं और यही वो वक्त था जब मैं पड़ोसन भाभी की चुदाई के ख्यालों में खो जाता था।
एक दिन मेरी किस्मत चमकी। मैं छत पर था और भाभी का बाथरूम की खिड़की से धुआं निकल रहा था – शायद गीजर ऑन था। अचानक मेरी नजर उन पर पड़ी। वो सफेद ट्रांसपेरेंट ब्रा और पैंटी में थीं और आईने के सामने खड़ी होकर अपने बालों में तेल लगा रही थीं। उनकी पीठ पूरी तरह से नंगी थी और उनकी गांड का आकार साफ दिख रहा था। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने सोचा, आज तो पड़ोसन भाभी की चुदाई का सपना सच होने वाला है।
बाथरूम में पहली बार
अगले दिन मैंने एक प्लान बनाया। मैंने जानबूझकर अपनी छत पर पानी की टंकी का मोटर खराब कर दिया। शाम को जब पानी नहीं आया, तो मैंने मम्मी से कहा कि मैं पड़ोस से पानी ले आता हूं। मम्मी ने हां कह दी।
मैंने अपनी सबसे अच्छी बॉडी-हगिंग टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहनी। मेरे बाइसेप्स और छाती का आकार साफ दिख रहा था। मैंने जिम में काफी मेहनत की थी और मेरे बदन पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। मैं उनके दरवाजे पर गया और घंटी बजाई।
दरवाजा खुला और वहीं खड़ी थीं मेरी प्रिया भाभी। उन्होंने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो गीली थी और उनकी नाभि पूरी तरह से दिख रही थी। शायद वो बाथरूम से ही आ रही थीं। उनके बाल भीगे हुए थे और एक-एक बूंद उनके गाल से होते हुए उनके गहरे क्लीवेज में जा रही थी।
“हां नमित, क्या हुआ?” उन्होंने पूछा।
पड़ोसन भाभी की चुदाई / हिंदी सेक्स कहानियाँ
“भाभी, हमारी मोटर खराब हो गई है। क्या मैं थोड़ा पानी भर लूं?” मैंने कहा, अपनी आंखें उनके बदन से हटाने की कोशिश करते हुए।
“अरे हां, आओ ना। राहुल तो ऑफिस गए हैं और मैं अकेली हूं। आ जाओ, बाथरूम में बाल्टी रखी है, भर लो,” वो मुस्कुराईं।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। यही मौका था पड़ोसन भाभी की चुदाई शुरू करने का। मैं अंदर गया और उनके बाथरूम की तरफ बढ़ा। वो भी मेरे पीछे-पीछे आईं।
बाथरूम छोटा सा था। जैसे ही मैंने बाल्टी उठाई, मेरी पीठ उनकी छाती से टच हो गई। मुझे महसूस हुआ कि उनकी साड़ी पूरी तरह गीली थी और उनकी ब्रा की पट्टी मेरी पीठ पर महसूस हो रही थी।
“सॉरी भाभी,” मैंने कहा।
“कोई बात नहीं नमित,” वो थोड़ा सा आगे हो गईं, लेकिन इतना कि अब उनकी चूचियां मेरी पीठ पर टिक गईं।
मैंने पानी भरना शुरू किया। बाथरूम का दरवाजा बंद था और अंदर सिर्फ हम दोनों थे। मैंने आईने में देखा – भाभी मेरे पीछे खड़ी थीं और मेरे बदन को घूर रही थीं। जब उन्होंने पाया कि मैं उन्हें देख रहा हूं, तो उन्होंने शर्माते हुए अपनी आंखें नीचे कर लीं, लेकिन उनकी सांसें तेज हो गई थीं।
“नमित, तुम बहुत मेहनती लगते हो। जिम जाते हो?” उन्होंने पूछा, अपना हाथ मेरी पीठ पर रखते हुए।
“हां भाभी, रोज जाता हूं,” मैंने कहा, उनके हाथ के स्पर्श से कांपते हुए।
“तुम्हारी बॉडी बहुत अच्छी है,” वो फुसफुसाईं, अपने होंठ मेरे कान के पास लाते हुए।
मैंने बाल्टी नीचे रखी और पीछे मुड़ा। अब हम आमने-सामने थे। उनकी गीली साड़ी से उनकी नाभि और पेट का हिस्सा साफ दिख रहा था। मेरा लंड शॉर्ट्स में तम्बू बना चुका था और वो उसे देख रही थीं।
“भाभी…” मैंने कहा, लेकिन वो मेरे होठों पर अपनी उंगली रख दी।
“चुप रहो नमित। मुझे पता है तुम रोज मुझे देखते हो छत से। मुझे अच्छा लगता है,” वो मुस्कुराईं।
मैंने हिम्मत की और अपने हाथ उनकी कमर पर रख दिए। वो कांप उठीं लेकिन मना नहीं किया। मैंने धीरे से अपने होंठ उनके गाल पर रखे और चूमा। वो आह भरने लगीं।
“नमित, यह गलत है…” वो कहने लगीं लेकिन मैंने उनके होठों पर अपने होठ रख दिए।
यह पहला चुंबन था पड़ोसन भाभी की चुदाई की शुरुआत का। मैंने उनके होंठों को चूसना शुरू किया और वो भी मेरा साथ देने लगीं। उनकी जीभ मेरी जीभ से मिली और हम एक-दूसरे को चूमने लगे। बाथरूम में हमारी सांसें गूंज रही थीं।
मैंने धीरे से उनकी साड़ी का पल्लू खींचा और वो उनके शरीर से फिसलकर नीचे गिर गया। अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके तीनों बटन खुले और उनकी सफेद ब्रा सामने आ गई। मैंने पीछे से हुक खोला और उनकी चूचियां आजाद हो गईं।
“ओह नमित…” वो सिसकीं।
उनकी चूचियां बड़ी-बड़ी और गोल थीं। गुलाबी निप्पल खड़े हो चुके थे। मैंने एक हाथ से एक चूची को पकड़ा और दूसरी को मुंह में ले लिया। मैंने चूसना शुरू किया और वो मेरे बालों में हाथ फेरने लगीं।
“हां नमित, और चूसो… बहुत मजा आ रहा है,” वो कराहने लगीं।
मैंने दूसरी चूची को भी वैसे ही चूसा। फिर मैं नीचे बैठ गया और उनका पेटीकोट खोलने लगा। नाड़ा खुला और पेटीकोट नीचे गिर गया। अब वो सिर्फ सफेद पैंटी में थीं और उनकी जांघें मेरे सामने थीं।
मैंने उनकी जांघों पर चूमना शुरू किया। ऊपर से नीचे की तरफ। जैसे ही मैं उनकी पैंटी के पास पहुंचा, मुझे उनकी चूत की खुशबू आने लगी। गीली, गर्म और मादक खुशबू।
मैंने उनकी पैंटी को एक तरफ खींचा और उनकी चूत देखी। पूरी तरह से साफ शेव्ड, गुलाबी और पानी से तर। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उनकी चूत पर रख दी।
“आह्ह्ह… नमित…” वो चीख उठीं और दीवार से सटकर खड़ी हो गईं।
मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया। ऊपर से नीचे, फिर नीचे से ऊपर। मेरी जीभ उनकी चूत की दरार में घुस रही थी। वो पागल हो रही थीं और मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा रही थीं।
पड़ोसन भाभी की चुदाई / हिंदी सेक्स कहानियाँ
“हां नमित, और अंदर डालो… जीभ अंदर डालो… ओहhhh…” वो चिल्लाने लगीं।
मैंने अपनी जीभ उनकी चूत के अंदर डाल दी और चाटने लगा। उनका पानी निकलने वाला था। मैंने महसूस किया कि उनकी चूत सिकुड़ रही है और फिर एक पोटी सी गर्म तरल पदार्थ मेरे मुंह में आ गया। भाभी झड़ चुकी थीं और मैंने उनका सारा रस पी लिया।
यह थी पड़ोसन भाभी की चुदाई की पहली झलक।
बाथरूम से बेडरूम की ओर
मैं खड़ा हो गया। मेरा लंड शॉर्ट्स में तड़प रहा था। भाभी ने मेरी शॉर्ट्स को नीचे खींचा और मेरा 7 इंच का लंड बाहर आ गया। वो हैरान रह गईं।
“वाह नमित, कितना बड़ा है तुम्हारा,” वो कहने लगीं और उसे अपने हाथ में पकड़ लिया।
उनके हाथ गर्म और नरम थे। उन्होंने मेरे लंड को आगे-पीछे करना शुरू किया। फिर वो नीचे बैठ गईं और उसे अपने मुंह में ले लिया।
“उम्म्म्म…” वो चूसने लगीं।
मुझे स्वर्ग जैसा मजा आ रहा था। उनकी गर्म जीभ मेरे लंड के सुपारे पर घूम रही थी और वो गहराई तक ले रही थीं। मैं उनके मुंह को चोदने लगा।
“भाभी, और अंदर लो… पूरी ले लो…” मैंने कहा।
वो पूरी तरह से मेरे लंड को अपने मुंह में ले रही थीं और चूस रही थीं। मुझे लगा कि मैं अभी झड़ जाऊंगा, तो मैंने उनका मुंह पकड़ा और उन्हें खड़ा किया।
“भाभी, अब नहीं रुक सकता। मुझे आपकी चूत चाहिए,” मैंने कहा।
“तो आओ ना नमित, ले लो मुझे। आज पूरी तरह से पड़ोसन भाभी की चुदाई करो,” वो शर्माते हुए बोलीं।
मैंने उन्हें गोद में उठाया। वो हल्की थीं। मैं बाथरूम से बाहर निकला और उनके बेडरूम की तरफ बढ़ा। रास्ते में हम किचन से गुजरे और मैंने उन्हें किचन के काउंटर पर बिठा लिया।
“यहां भी ले लो मुझे नमित,” वो चिल्लाईं।
मैंने उनकी टांगें फैलाईं और अपने लंड को उनकी चूत के मुंह पर रखा। एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लंड अंदर चला गया।
“आह्ह्ह्ह… मर गई…” वो चीखीं।
मैंने उन्हें किचन में ही चोदना शुरू कर दिया। धक्के पर धक्के लगा रहा था। उनकी चूत बहुत टाइट थी और मेरे लंड को पूरी तरह से चूस रही थी। हम दोनों की आवाजें पूरे घर में गूंज रही थीं।
पड़ोसन भाभी की चुदाई / हिंदी सेक्स कहानियाँ
“नमित… और जोर से… पड़ोसन भाभी की चुदाई करो… मुझे अपनी रंडी बना लो…” वो बकवास कर रही थीं।
मैं और तेज हो गया। किचन के काउंटर पर उनकी गांड टकरा रही थी और आवाजें आ रही थीं – थप… थप… थप…
लगभग दस मिनट तक मैंने उन्हें किचन में चोदा। फिर मैंने उन्हें उठाया और बेडरूम में ले गया।
बेड पर पड़ोसन भाभी की चुदाई
बेडरूम में पहुंचते ही मैंने उन्हें बेड पर पटक दिया। वो चौंक गईं लेकिन मुस्कुरा रही थीं। मैंने उनके पैर पकड़े और अपने कंधों पर रख लिए। अब उनकी चूत पूरी तरह से खुली थी और मैं उसे घूर रहा था।
“क्या देख रहे हो नमित? आओ ना अंदर,” वो ललचा रही थीं।
मैंने अपने लंड को फिर से उनकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटके से अंदर कर दिया। इस बार और गहराई तक।
“ओह मां… नमित… तुम्हारा बहुत मोटा है…” वो कराहने लगीं।
मैंने उनकी चूचियों को पकड़ा और उन्हें दबाते हुए चोदना शुरू किया। मिशनरी पोजिशन में हम एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। मैं ऊपर-नीचे हो रहा था और वो नीचे से अपनी कमर उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थीं।
“नमित… और तेज… मुझे पूरा अंदर तक चोदो…” वो चिल्ला रही थीं।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब मैं पूरी ताकत से उन्हें चोद रहा था। बेड की चारपाई की आवाजें आ रही थीं – क्रींच… क्रींच… और हमारी सांसों की आवाजें मिल रही थीं।
“भाभी, आपकी चूत बहुत मस्त है… बहुत टाइट है…” मैंने कहा।
“हां नमित, यह सिर्फ तुम्हारी है… रोज आओ और पड़ोसन भाभी की चुदाई करो…” वो बोलीं।
पड़ोसन भाभी की चुदाई / हिंदी सेक्स कहानियाँ
मैंने उनकी टांगें और ऊपर उठाईं और अपने कंधों पर रख लीं। अब मैं और गहराई तक जा रहा था। मेरा लंड उनकी चूत की गहराइयों को छू रहा था।
“नमित… मैं फिर से झड़ने वाली हूं… और तेज करो…” वो चिल्लाईं।
मैंने पूरी ताकत लगा दी। थप… थप… थप… की आवाजें तेज हो गईं। और फिर भाभी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और कांपने लगीं। उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से पकड़ लिया और फिर मुझे महसूस हुआ कि गर्म पानी मेरे लंड पर गिर रहा है। वो झड़ चुकी थीं।
लेकिन मैं अभी नहीं रुका। मैंने उन्हें पलट दिया। अब वो डॉगी स्टाइल में थीं – घुटनों और हाथों के बल बेड पर। उनकी गोल गांड मेरे सामने थी और मैं उसे देख रहा था।
“नमित, पीछे से भी ले लो मुझे… पूरी पड़ोसन भाभी की चुदाई करो…” वो पीछे मुड़कर कहने लगीं।
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारा। वो आह भरने लगीं। फिर दूसरा थप्पड़। उनकी गांड लाल हो गई। मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर रखा और पीछे से एक जोरदार धक्का दिया।
“आह्ह्ह्ह… मर गई…” वो चीखीं।
मैंने उनकी कमर पकड़ी और पीछे से चोदना शुरू किया। यह पोजिशन बहुत गहरी थी। मेरा लंड पूरी तरह से अंदर जा रहा था और बाहर आ रहा था। उनकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी और आवाजें आ रही थीं।
पड़ोसन भाभी की चुदाई / हिंदी सेक्स कहानियाँ
“थप… थप… थप…”
“नमित… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… आज तुम ही मेरे पति हो…” वो बकवास कर रही थीं।
मैंने उनके बाल पकड़े और पीछे की तरफ खींचा। उनका सिर पीछे आ गया और मैंने उनके गले को चूमना शुरू किया। एक हाथ से मैं उनकी चूचियां दबा रहा था और दूसरे से उनकी कमर पकड़े हुए था।
“भाभी, आप बहुत मस्त हो… रोज चोदूंगा आपको…” मैंने कहा।
“हां नमित, रोज आना… सुबह-शाम… जब भी राहुल न हो… पड़ोसन भाभी की चुदाई करते रहना…” वो बोलीं।
मैंने लगभग बीस मिनट तक उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदा। फिर मैंने उन्हें लेटा दिया और खुद भी बेड पर लेट गया। उन्होंने मुझ पर चढ़कर मेरा लंड अपनी चूत में ले लिया।
“अब मैं चलूंगी नमित,” वो मुस्कुराईं और ऊपर-नीचे होने लगीं।
वो काउगर्ल पोजिशन में थीं और मैं नीचे लेटा हुआ था। वो झूल रही थीं और मेरा लंड उनकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। मैंने उनकी चूचियों को पकड़ा और उन्हें दबाया।
“नमित… मजा आ रहा है?” वो पूछने लगीं।
“बहुत मजा आ रहा है भाभी… और तेज करो…” मैंने कहा।
पड़ोसन भाभी की चुदाई / हिंदी सेक्स कहानियाँ
वो और तेज हो गईं। उनकी कमर ऐसे घूम रही थी जैसे कोई पेशेवर रंडी हो। मैं समझ गया कि यह औरत बहुत भुखी है और उसे चुदाई की बहुत जरूरत है।
“नमित… मैं फिर से झड़ने वाली हूं… तुम भी अपना पानी निकाल दो मेरी चूत में…” वो चिल्लाने लगीं।
“हां भाभी, मैं भी झड़ने वाला हूं… लो लो पूरा…” मैंने कहा।
हम दोनों एक साथ झड़े। मैंने अपना गरम गरम वीर्य उनकी चूत में भर दिया और वो भी कांपते हुए मेरे ऊपर गिर पड़ीं। हम दोनों हांफ रहे थे और पसीने से तर थे।
यह थी असली पड़ोसन भाभी की चुदाई।
दूसरा राउंड और नए तरीके
थोड़ी देर आराम करने के बाद भाभी उठीं और बाथरूम गईं। वो वापस आईं तो एक तौलिये में लिपटी हुई थीं।
“नमित, तुमने तो मेरी जान ही ले ली,” वो मुस्कुराते हुए बोलीं।
“भाभी, अभी तो शुरुआत है। अभी तो पड़ोसन भाभी की चुदाई का दूसरा राउंड बाकी है,” मैंने कहा।
मैं भी उठा और उन्हें पकड़ लिया। तौलिया खुल गया और वो फिर से नंगी हो गईं। मैंने उन्हें बेड पर बिठाया और खुद खड़ा हो गया। मेरा लंड फिर से खड़ा हो रहा था।
“अब मुझे अपने मुंह से चोदो भाभी,” मैंने कहा।
वो बेड के किनारे बैठीं और मैंने अपना लंड उनके मुंह में दे दिया। वो चूसने लगीं। इस बार वो और भी जोर से चूस रही थीं। मैंने उनका सिर पकड़ा और उनके मुंह को चोदने लगा।
“उम्म्म… अम्म्म… उम्म्म…” की आवाजें आ रही थीं।
मैंने उनके मुंह में पूरा लंड डाल दिया और उनका गला चोदने लगा। वो उलटी करने लगीं लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। थोड़ी देर बाद मैंने लंड बाहर निकाला और उन्हें बेड पर लेटा दिया।
इस बार मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और उनकी चूत को चाटना शुरू किया। वो फिर से गर्म होने लगीं। मैंने अपनी दो उंगलियां उनकी चूत में डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा।
“ओह नमित… और अंदर डालो… पूरी हथेली डाल दो…” वो चिल्लाने लगीं।
मैंने और उंगलियां डाल दीं। अब मेरी चार उंगलियां उनकी चूत में थीं और मैं उन्हें अंदर-बाहर कर रहा था। वो पागल हो रही थीं।
“हां नमित… फिस्टिंग करो मेरी चूत की… पूरी पड़ोसन भाभी की चुदाई करो…” वो चिल्ला रही थीं।
मैंने धीरे-धीरे अपनी पूरी मुट्ठी उनकी चूत में डाल दी। वो चीखने लगीं लेकिन मजा भी आ रहा था। मैंने अपनी मुट्ठी अंदर-बाहर करनी शुरू की। यह एक अलग ही अनुभव था।
पड़ोसन भाभी की चुदाई / हिंदी सेक्स कहानियाँ
लगभग पांच मिनट तक फिस्टिंग के बाद मैंने अपना लंड फिर से उनकी चूत में डाल दिया। इस बार वो और भी ढीली हो चुकी थी और मैं और भी तेजी से चोद पा रहा था।
“नमित… मेरी गांड भी मारो…” वो अचानक बोलीं।
मैंने उन्हें पलटा और उनकी गांड पर थूक लगाया। फिर अपने लंड को उनकी गांड के छेद पर रखा और धीरे से अंदर करने की कोशिश की।
“आह्ह्ह… धीरे नमित… बहुत दर्द हो रहा है…” वो चीखीं।
मैंने धीरे-धीरे आधा लंड अंदर किया और फिर रुक गया। उन्हें दर्द कम होने का मौका दिया। फिर मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया।
“ओह… अब मजा आ रहा है… और तेज करो…” वो बोलीं।
मैंने गांड मारनी शुरू की। पीछे से धक्के लगा रहा था और वो आगे की तरफ झुकी हुई थीं। उनकी गांड बहुत टाइट थी और मुझे बहुत मजा आ रहा था।
“नमित… पड़ोसन भाभी की चुदाई करो… मेरी गांड फाड़ दो…” वो चिल्ला रही थीं।
मैंने और तेज कर दिया। थप… थप… थप… की आवाजें तेज हो गईं। मैं उनकी गांड को चोद रहा था और वो अपनी चूत में उंगली कर रही थीं।
“नमित… मैं झड़ने वाली हूं… तुम भी अपना पानी मेरी गांड में निकाल दो…” वो चिल्लाईं।
मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू किए और फिर मैंने अपना गरम वीर्य उनकी गांड में भर दिया। वो भी कांपते हुए झड़ गईं।
अंतिम राउंड और वादा
हम दोनों थक चुके थे लेकिन अभी भी मजा लेना चाहते थे। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और उनके होठों को चूमने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थीं।
“नमित, तुम बहुत अच्छे हो। राहुल कभी इतना मजा नहीं देते,” वो बोलीं।
“भाभी, आप भी बहुत मस्त हो। मैं तो रोज आऊंगा आपके यहां,” मैंने कहा।
“हां नमित, रोज आना। सुबह जब राहुल ऑफिस चले जाएं, तब आ जाया करना। मैं रोज तुम्हारा इंतजार करूंगी,” वो बोलीं।
मैंने उन्हें फिर से चूमना शुरू किया। इस बार मैं धीरे-धीरे उनके पूरे बदन को चूम रहा था। उनके गाल, गर्दन, कंधे, चूचियां, पेट, नाभि, जांघें और फिर चूत।
“नमित, एक बार और कर लो… अंतिम पड़ोसन भाभी की चुदाई…” वो बोलीं।
मैंने उन्हें बेड पर लेटाया और खुद उनके ऊपर आ गया। इस बार मैं बहुत धीरे-धीरे उनमें घुसा। एक-एक इंच करके अपना लंड अंदर डाला। वो मुझे कसके पकड़े हुए थीं।
“नमित… मुझे तुमसे प्यार हो गया है…” वो फुसफुसाईं।
“मुझे भी भाभी…” मैंने कहा और उन्हें चूमते हुए धीरे-धीरे चोदना शुरू किया।
यह बहुत रोमांटिक था। हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे और धीरे-धीरे चुदाई कर रहे थे। मैं उनके अंदर घुस रहा था और फिर बाहर आ रहा था। हमारी सांसें मिल रही थीं।
“नमित… और तेज करो… आखिरी बार…” वो बोलीं।
मैंने स्पीड बढ़ा दी। अब मैं पूरी तरह से उन्हें चोद रहा था। उनकी चूचियां मेरे सीने से रगड़ खा रही थीं और हम दोनों पसीने से तर थे।
“नमित… मैं झड़ रही हूं… तुम भी…” वो चिल्लाईं।
“हां भाभी… मैं भी…” मैंने कहा और हम दोनों एक साथ झड़ गए।
मैंने अपना पूरा वीर्य उनकी चूत में भर दिया और वो मेरे ऊपर गिर पड़ीं। हम दोनों कुछ देर तक वैसे ही पड़े रहे।
अलविदा और भविष्य की योजना
थोड़ी देर बाद हम उठे। भाभी ने मुझे कसकर गले लगाया।
“नमित, यह हमारा राज रहेगा। किसी को मत बताना,” वो बोलीं।
“जरूर भाभी, यह सिर्फ हम दोनों का राज है,” मैंने कहा।
मैंने अपने कपड़े पहने और बाथरूम से अपनी बाल्टी उठाई। भाभी ने मुझे दरवाजे तक छोड़ा और चुपके से मुझे चूमा।
“कल मिलेंगे नमित,” वो मुस्कुराईं।
“हां भाभी, कल फिर पड़ोसन भाभी की चुदाई होगी,” मैंने कहा और वहां से निकल आया।
अगले दिन से मेरी और भाभी की रोज मुलाकात होने लगी। कभी बाथरूम में, कभी बेडरूम में, कभी किचन में। हर जगह हम पड़ोसन भाभी की चुदाई करते थे। यह हमारा रोज का काम बन गया।
राहुल भैया को कभी पता नहीं चला कि उनकी प्यारी पत्नी प्रिया, जो दिन में उनके जाने के बाद क्या करती थी। वो हर रोज नमित से चुदवाती थीं और पूरी तरह से संतुष्ट रहती थीं।
और नमित? वो तो बस पड़ोसन भाभी की चुदाई का मजा लेता रहा, बाथरूम से बेड तक, और कभी-कभी सोफे पर, किचन में, या बालकनी में भी।
यह थी नमित और प्रिया भाभी की कहानी, जो आज भी जारी है। हर दिन नई जगह, नई पोजिशन, और नए तरीके से पड़ोसन भाभी की चुदाई होती रहती है।
Bhabhi Sex Story :- विधवा भाभी की चुदाई