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वासना का असली मज़ा, सिर्फ 'हिंदी सेक्स स्टोरी' के साथ।

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वासना का असली मज़ा, सिर्फ 'हिंदी सेक्स स्टोरी' के साथ।

मालिक ने कुंवारी कामवाली को चोदा

Hindi sex stories, June 10, 2026June 10, 2026

मेरा नाम अर्जुन है और मैं दिल्ली के एक अमीर इलाके में रहता हूं। मेरी उम्र 28 साल है और मैं एक सफल बिजनेसमैन हूं। मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं लेकिन मेरी पत्नी राधा अक्सर अपने मायके जाती रहती है। हमारे बच्चे नहीं हैं और इस वजह से हमारे बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। जानिए कैसे मालिक ने कुंवारी कामवाली को चोदा ।

पिछले महीने मेरी पुरानी कामवाली बीमार होकर गांव चली गई। मुझे एक नई कामवाली की जरूरत थी जो घर का सारा काम कर सके और साथ ही मेरी देखभाल भी। मेरे ड्राइवर रामू ने बताया कि उसके गांव से एक लड़की आई है जो काम करना चाहती है।

एक सुबह रामू उस लड़की को लेकर आया। जब मैंने उसे पहली बार देखा तो मेरा दिल रुक सा गया। उसका नाम अशा था। वह करीब 18-19 साल की सुंदर लड़की थी। उसकी त्वचा गेहुआं रंग की थी और गालों पर गहरी डिंपल पड़ते थे। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी और काली थीं, जैसे कोहरे में डूबी हुई रात। उसने साधारण सूती सलवार-कमीज पहनी थी लेकिन उसके कपड़ों में भी उसके गोल-गोल बदन की आकृति साफ दिखाई दे रही थी।

“नमस्ते मालिक,” उसने शर्माते हुए अपनी आंखें नीचे झुकाते हुए कहा। उसकी आवाज इतनी मधुर थी कि मेरे कानों में गूंजती रही।

“नमस्ते अशा,” मैंने कहा, “तुम्हें कौन-कौन से काम आते हैं?”

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“मालिक, मैं सफाई कर लेती हूं, बर्तन मांज लेती हूं, कपड़े धो लेती हूं और खाना भी बना लेती हूं,” उसने जवाब दिया।

मैंने उसे नौकरी पर रख लिया। मेरे मन में उसे देखते ही एक अजीब सी लालसा जागी थी। मेरी पत्नी महीनों से नहीं आई थी और मैं एक पुरुष हूं, मेरे भी जरूरतें हैं।

पहले दिन की घटना

अशा को मैंने बाहर छोटे से कमरे में रखा जो पहले कामवाली के लिए बना था। लेकिन मेरा मन अब उसी पर टिक गया था। मैंने उसे घर के सारे काम समझाए। वह बहुत मेहनती थी। सुबह चार बजे उठकर वह सफाई शुरू कर देती और रात तक घर चमकाती रहती।

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पहले ही दिन जब वह झाड़ू लगा रही थी तो मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। उसकी कमर बहुत पतली थी और हिप्स गोल। जब वह झुककर झाड़ू लगाती तो उसकी कमर से सलवार नीचे खिसक जाती और उसकी गोरी पीठ की ऊपरी हिस्सा दिखने लगता। मेरा लंड उसे देखते ही खड़ा होने लगा।

शाम को जब वह रसोई में खाना बना रही थी तो मैं वहां गया। गर्मी में उसने दुपट्टा हटा दिया था और उसकी गर्दन पसीने से तर थी। उसकी कमीज पीछे से थोड़ी ऊपर उठी हुई थी और उसकी कमर का नरम गोश्त दिख रहा था।

“अशा, तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं हो रही?” मैंने पीछे से आवाज लगाई।

वह चौंककर मुड़ी। उसके हाथ में आटे की कटोरी थी। “नहीं मालिक, सब ठीक है,” वह बोली।

उसके मुंह पर आटा लगा हुआ था। मेरे हाथ ने खुद-ब-खुद आगे बढ़कर उसके गाल को छू लिया। वह सिहर उठी। मैंने उसके गाल से आटा साफ किया। उसकी त्वचा इतनी नरम थी कि मेरे उंगलियां वहीं रुक गईं।

“मालिक…” उसने धीमी आवाज में कहा।

“क्या तुम मुझे अर्जुन कहकर बुला सकती हो?” मैंने कहा।

“यह कैसे हो सकता है? आप मालिक हैं और मैं…” वह रुक गई।

“और तुम क्या? तुम भी तो इंसान हो। रात को यहां कोई नहीं रहता। हम दोनों ही हैं,” मैंने कहते हुए उसकी कमर पर हाथ रख दिया।

वह कांपने लगी। “मालिक, प्लीज… मैं…”

“डरो मत अशा। मैं तुम्हें कुछ नहीं करूंगा जब तक तुम न चाहो,” मैंने कहा लेकिन मेरा हाथ उसकी कमर पर ही रहा।

उसने नीचे देखा। मैंने उसका चेहरा ऊपर उठाया। उसकी आंखों में डर और शर्मिंदगी थी। वह कुंवारी थी, यह मैं उसकी मासूमियत से समझ गया था।

रात का इंतजार

मेरी पत्नी राधा उस समय अपने मायके गई हुई थी। घर में सिर्फ मैं और अशा थे। रात के खाने के बाद अशा अपने कमरे में चली गई। मैं अपने बेडरूम में लेटा हुआ था लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मेरे दिमाग में सिर्फ अशा का चेहरा था। उसकी गोल-गोल गांड, उसकी तनी हुई चूचियां, उसकी मासूम आंखें।

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मैं उठकर बालकनी में आ गया। अशा का कमरा बालकनी से सटा हुआ था। उसके कमरे की खिड़की से हल्की सी रोशनी आ रही थी। मेरे पैर खुद-ब-खुद उस कमरे की तरफ बढ़ गए।

खिड़की के पास जाकर मैंने झांका। अशा अपने बिस्तर पर बैठी थी। उसने अपने कपड़े बदले थे। अब उसने एक पुरानी नाइटी पहनी थी जो रामू लाया था। नाइटी बहुत पुरानी और पतली थी। उसके अंदर का बदन साफ दिख रहा था।

वह अपने बालों में तेल लगा रही थी। उसने अपने बाल खोले और कंघी करने लगी। जब उसने अपने हाथ ऊपर उठाए तो उसकी नाइटी भी ऊपर उठ गई। उसकी गोरी जांघें दिखने लगीं। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

अचानक उसने खिड़की की तरफ देखा। मैं छिप नहीं पाया। हमारी आंखें मिलीं। वह चौंकी और फुरन अपने बालों से चेहरा ढक लिया। मैंने उसे इशारा किया कि दरवाजा खोलो। वह कांपते हुए उठी और दरवाजे की तरफ आई।

“मालिक, आप यहां?” उसने दरवाजा खोलते हुए पूछा।

“मुझे नींद नहीं आ रही थी अशा,” मैंने अंदर आते हुए कहा।

उसका कमरा बहुत छोटा था। एक छोटा बिस्तर, एक पुराना अलमारी और एक कुर्सी। अशा कुर्सी पर बैठी और मुझे बिस्तर पर बैठने का इशारा किया।

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“अशा, तुम मुझे अच्छी लगती हो,” मैंने सीधे कह दिया।

वह चौंकी। “मालिक, मैं तो एक गरीब लड़की हूं। मेरे पिता कर्ज में डूबे हैं। मैंने यह नौकरी इसलिए ली कि घर की मदद कर सकूं,” उसकी आंखों में आंसू आ गए।

मैं उठकर उसके पास गया। उसके कंधे पर हाथ रखा। “मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं अशा। तुम्हें पैसे चाहिए न? मैं तुम्हें दोगुनी तनख्वाह दूंगा। बस तुम मेरी एक शर्त मान लो,” मैंने कहा।

“क्या शर्त मालिक?” उसने पूछा।

“आज रात मेरे साथ रुको,” मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा।

वह उठकर दूर चली गई। “मालिक, यह गलत है। मैं कुंवारी हूं। मेरे गांव में मेरी शादी तय हो चुकी है। अगर किसी को पता चला तो मेरी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी,” वह रोने लगी।

मैं उसके पास गया। उसके गालों पर आंसू थे। मैंने अपने हाथ से उसके आंसू पोंछे। “कोई नहीं जानेगा अशा। यह हमारे बीच का राज रहेगा। मैं तुम्हें इतने पैसे दूंगा कि तुम्हारे पिता का सारा कर्ज उतर जाएगा। तुम्हारे लिए सोने के गहने ले आऊंगा। बस एक रात मुझे अपना साथ दो,” मैंने उसे समझाया।

वह चुप रही। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। पहले तो वह कांपती रही लेकिन फिर धीरे-धीरे शांत हो गई। मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूमने लगे। उसकी नाइटी के ऊपर से ही मैंने उसकी पीठ को सहलाना शुरू किया।

पहली चुंबन

मैंने अशा का चेहरा ऊपर उठाया। उसकी आंखें बंद थीं। उसके होंथ कांप रहे थे। मैंने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रखे। वह सिहर उठी लेकिन विरोध नहीं किया। मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया। वह पहली बार किसी को चूम रही थी, यह मैं उसकी अनुभवहीनता से समझ गया।

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मैंने उसके होंठों को धीरे-धीरे खोला और अपनी जीभ अंदर डाली। उसके मुंह का स्वाद बहुत अच्छा था। वह मेरी जीभ को अपनी जीभ से छूने की कोशिश कर रही थी। मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और गहरा चुंबन दिया।

करीब दस मिनट तक मैंने उसके होंठ चूसे। फिर मैंने अपने होंठ उसकी गर्दन पर ले गया। उसकी गर्दन बहुत कोमल थी। मैंने वहां चूमना शुरू किया। वह सिसकियां लेने लगी।

“मालिक… प्लीज…” वह कह रही थी लेकिन मुझे रोक नहीं रही थी।

मैंने उसकी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके तीनों बटन खोल दिए। उसके अंदर ब्रा नहीं थी। उसकी चूचियां गोल और तनी हुई थीं। उसके निप्पल गुलाबी रंग के थे और अभी छोटे-छोटे कड़क रहे थे।

मैंने अपना मुंह उसकी चूचियों पर रखा और एक निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगा। वह आह्ह्ह्ह… की आवाज निकाली। मैंने दूसरी चूची को हाथ से दबाना शुरू किया। उसकी चूचियां इतनी नरम थीं कि मेरे हाथ उसमें धंस रहे थे।

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“मालिक, यह क्या हो रहा है मुझे? मेरा दिल बहुत तेज धड़क रहा है,” अशा ने कहा।

“यह मोहब्बत है अशा। तुम्हें मजा आ रहा है न?” मैंने पूछा।

वह शर्म से नीचे देखने लगी। मैं समझ गया कि उसे मजा आ रहा है। मैंने उसकी दूसरी चूची भी चूसी। दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूसता रहा। उसकी सिसकियां बढ़ती जा रही थीं।

कुंवारी जिस्म की खोज

मैंने अशा को बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी नाइटी पूरी खुली हुई थी। मैंने उसे पूरी नंगी करने का फैसला किया। मैंने उसकी नाइटी उतार दी। अब वह सिर्फ पैंटी में थी।

उसका जिस्म देखकर मैं हैरान रह गया। उसकी कमर बहुत पतली थी और हिप्स बहुत गोल। उसकी जांघें गोरी और मुलायम थीं। मैंने उसके पैरों को चूमना शुरू किया। पैरों से ऊपर आता हुआ मैं उसकी जांघों पर आ गया।

उसकी जांघें कांप रही थीं। मैंने उसकी जांघों को चूमा। फिर मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाया। वह कसमसाने लगी।

“मालिक, वहां मत छुओ… बहुत शर्म आ रही है,” वह बोली।

“अशा, मैं तुम्हें सबसे खूबसूरत जगह छू रहा हूं। डरो मत,” मैंने कहा।

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मैंने उसकी पैंटी खींचकर उतार दी। उसकी चूत बिल्कुल साफ थी। उसने कभी बाल नहीं काटे थे। हल्के-हल्के बाल उगे हुए थे। उसकी चूत की दरार गुलाबी रंग की थी।

मैंने अपनी उंगली उसकी चूत पर रखी। वह गीली हो चुकी थी। मैंने उंगली थोड़ा अंदर डाली। वह तड़प उठी। उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैं समझ गया कि यह सच में कुंवारी है।

“अशा, तुम्हें दर्द होगा थोड़ा। लेकिन फिर मजा आएगा,” मैंने कहा।

मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था। करीब ७ इंच लंबा और मोटा। अशा ने मेरा लंड देखकर डर गई।

“मालिक, यह तो बहुत बड़ा है। यह अंदर जाएगा तो मैं मर जाऊंगी,” वह डर के मारे बोली।

“नहीं अशा, तुम मरोगी नहीं। तुम्हें बहुत मजा आएगा,” मैंने उसे समझाया।

मैं उसके ऊपर आ गया। उसके होंठों पर चुंबन किया। एक हाथ से मैंने अपना लंड पकड़ा और उसकी चूत के मुहाने पर रखा। वह कांप रही थी। मैंने धीरे से एक धक्का लगाया।

लंड का सुपाड़ा अंदर घुसा। अशा चीखने लगी। “उह्ह्ह्ह… मालिक… बहुत दर्द हो रहा है… निकाल लो प्लीज…”

मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा। “शhhh… थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा।”

मैंने एक और जोरदार धक्का लगाया। मेरा आधा लंड अंदर घुस गया। अशा की आंखों से आंसू निकलने लगे। उसकी कुंवारी चूत फट रही थी। खून निकलने लगा।

मैंने रुककर उसके होंठ चूसे। फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज-तेज।

चुदाई का असली मजा मालिक के साथ

पांच मिनट बाद अशा का दर्द कम होने लगा। वह अब आह्ह्ह्ह… उह्ह्ह्ह… की आवाजें निकालने लगी। मैंने उसके पैरों को ऊपर उठाकर अपने कंधों पर रख लिया। इससे उसकी चूत और भी खुल गई।

मैंने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। मेरा लंड पूरी तरह उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। चप-चप-चप की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

“कैसा लग रहा है अशा?” मैंने पूछा।

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“अहहह… बहुत अच्छा मालिक… और तेज करो…” वह बोली।

यह सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया। मैंने उसे कुतिया बनने के लिए कहा। वह उठकर चारों खुटनों पर आ गई। मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला। इस पोजीशन में उसकी गांड और भी उभरकर सामने आ गई थी।

मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। मेरे अंडे उसकी जांघों से टकरा रहे थे। अशा चीख-चीखकर मजा ले रही थी।

“मालिक… मैं झड़ने वाली हूं… बहुत मजा आ रहा है…” वह चिल्लाई।

मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। अशा का जिस्म कांपने लगा। उसने अपनी चूत को कस लिया और मेरा लंड जकड़ लिया। फिर वह झड़ गई। उसकी चूत का पानी मेरे लंड पर गिरा।

लेकिन मैं अभी नहीं झड़ा था। मैंने उसे फिर पीठ के बल लिटाया और चूत में लंड डालकर चोदने लगा। इस बार मैंने उसकी दोनों टांगें ऊपर उठाकर अपने हाथों में पकड़ ली।

“मालिक… फिर से मजा आ रहा है…” अशा बोली।

मैंने ताबड़तोड़ धक्के लगाए। करीब पंद्रह मिनट तक मैंने उसे इसी तरह चोदा। फिर मैं झड़ने वाला हुआ। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुंह के पास ले आया।

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“खोलो अपना मुंह,” मैंने कहा।

अशा ने अपना मुंह खोला। मैंने अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया और वहीं झड़ गया। मेरा गाढ़ा वीर्य उसके मुंह में भर गया। वह पहले तो घुरकने लगी लेकिन फिर धीरे-धीरे सब निगल गई।

रात भर चुदाई मालिक के साथ

पहली बार तो मैं झड़ गया था लेकिन मेरा मन नहीं भरा था। मैंने अशा को अपने साथ अपने बेडरूम में ले गया। वह अब शर्मा नहीं रही थी। उसे भी मजा आ रहा था।

मेरे बड़े बिस्तर पर मैंने उसे फिर से नंगा किया। इस बार मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। वह पहली बार किसी के मुंह को अपनी चूत पर महसूस कर रही थी।

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“उह्ह्ह… मालिक… यह क्या कर रहे हो… बहुत गंदा है वहां…” वह शर्मा रही थी।

“चुप रहो और मजा लो,” मैंने कहा और उसकी चूत में जीभ डाल दी।

मैंने उसकी चूत को अच्छी तरह चाटा। उसकी क्लिटoris को मुंह में लेकर चूसा। वह बुरी तरह कांपने लगी। फिर मैंने उसकी चूत में दो उंगलियां डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा।

“मालिक… मैं फिर झड़ने वाली हूं… उह्ह्ह… आह्ह्ह…” वह चिल्लाई और झड़ गई।

अब मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था। मैंने उसे उल्टा लिटाया और उसकी गांड के नीचे तकिया रख दिया। इससे उसकी चूत ऊपर उठ गई। मैंने लंड पर थूक लगाया और उसकी चूत में एक ही धक्के में पूरा लंड डाल दिया।

“आह्ह्ह… मालिक… मर गई…” वह चीखी।

मैंने उसे जोर-जोर से चोदना शुरू किया। उसकी चूत अब पूरी तरह खुल चुकी थी। मेरा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। मैंने उसकी चूचियों को भी कसकर दबाया।

“कहो अशा, तुम किसकी हो?” मैंने पूछा।

“मैं आपकी हूं मालिक… सिर्फ आपकी…” वह बोली।

“कहो कि मालिक ने कुंवारी कामवाली को चोदा,” मैंने कहा।

“हां… मालिक ने कुंवारी कामवाली अशा को चोदा… मेरी कुंवारी चूत फाड़ दी आपने…” वह कहने लगी।

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यह सुनकर मेरा जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से चोदने लगा। फिर उसे उठाकर दीवार से सटाया और खड़े-खड़े चोदा।

रात भर मैंने उसे तीन बार चोदा। हर बार नई पोजीशन में। कभी बाथरूम में, कभी सोफे पर, कभी फर्श पर। उसकी कुंवारी चूत को मैंने पूरी तरह से चोदकर भोंडा बना दिया।

सुबह का मंजर

सुबह जब मेरी आंख खुली तो अशा मेरे बगल में सो रही थी। उसके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी। उसकी चूत से खून और मेरे वीर्य का मिश्रण निकल रहा था। मैंने उसे जगाया।

“कैसा लगा अशा?” मैंने पूछा।

वह शर्माते हुए बोली, “मालिक, पहले तो बहुत दर्द हुआ लेकिन फिर बहुत मजा आया। मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह इतना अच्छा होता है।”

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मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। “तुम रोज मेरे साथ सोओगी। मैं तुम्हें बहुत पैसे दूंगा। तुम्हारे पिता का कर्ज मैं उतार दूंगा।”

अशा की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। वह मुझे कसकर लिपट गई।

उस दिन के बाद से अशा मेरी हो गई। रोज रात मैं उसे अपने कमरे में बुलाता और पूरी रात चोदता। वह भी अब चुदाई में एक्सपर्ट हो गई थी। वह खुद मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसती और अपनी चूत में डालवाती।

नए प्रयोग

कुछ दिनों बाद मैंने अशा से कहा, “आज मैं तुम्हारी गांड मारूंगा।”

वह डर गई। “मालिक, वहां तो बहुत दर्द होगा। वो जगह तो…”

“डरो मत। मैं धीरे-धीरे करूंगा,” मैंने कहा।

मैंने उसे घोड़ी बनाया। उसकी गांड पर तेल लगाया। फिर धीरे से एक उंगली अंदर डाली। वह तड़पी लेकिन मैंने उसे शांत रहने को कहा। धीरे-धीरे मैंने दो उंगलियां डाल दीं। उसकी गांड बहुत टाइट थी।

फिर मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और उसकी गांड के छेद पर रखा। धीरे से एक धक्का लगाया। सुपाड़ा अंदर घुसा। अशा चीखने लगी।

“सहलो अशा, थोड़ी देर में मजा आएगा,” मैंने कहा।

धीरे-धीरे मैंने पूरा लंड अंदर डाल दिया। उसकी गांड बहुत गरम और टाइट थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पांच मिनट बाद अशा को भी मजा आने लगा।

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“मालिक… अहहह… अच्छा लग रहा है…” वह बोली।

मैंने स्पीड बढ़ा दी। उसकी गांड में जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। करीब बीस मिनट बाद मैं उसकी गांड में ही झड़ गया।

मालिक के दोस्तों के साथ सेक्स

कुछ महीनों बाद मेरे दो दोस्त घर आए। राहुल और विकास। दोनों शराब पीकर आए थे। हम तीनों बैठकर शराब पी रहे थे। अशा खाना परोस रही थी।

राहुल ने मुझसे कहा, “यार अर्जुन, तेरी कामवाली तो बहुत माल है। क्या तूने इसे…”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हां यार, यह तो मेरी रखैल बन चुकी है।”

विकास बोला, “यार एक बार हमें भी मजा लेने दो।”

पहले तो मैंने मना किया लेकिन फिर शराब के नशे में मैं मान गया। मैंने अशा को बुलाया।

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“अशा, आज तुम मेरे दोस्तों की भी खातिरदारी करोगी। तुम्हें उन्हें भी खुश करना होगा,” मैंने कहा।

अशा ने मना किया लेकिन मैंने समझाया कि मैं उसे और पैसे दूंगा। आखिर वह मान गई।

मैंने उसे कमरे में ले गया। तीनों मिलकर हमने उसे नंगा किया। राहुल ने उसकी चूचियां चूसनी शुरू की, विकास ने उसकी चूत चाटनी शुरू की और मैंने उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया।

तीनों ने उसे बारी-बारी से चोदा। राहुल ने उसकी चूत में, विकास ने उसकी गांड में और मैंने उसके मुंह में। अशा चीख-चीखकर मजा ले रही थी। पूरी रात तीनों ने मिलकर उसे चोदा। उसकी चूत और गांड दोनों फट गई थीं।

राधा की वापसी

कुछ हफ्तों बाद मेरी पत्नी राधा वापस आ गई। अब मुझे सावधानी से रहना पड़ता था। लेकिन मैं अशा को रोज चोदता रहता। जब राधा सो जाती तो मैं अशा के कमरे में चला जाता।

एक दिन राधा ने अशा को मेरे कमरे से निकलते देख लिया। उसे शक हुआ। उसने मुझसे पूछा तो मैंने कहा कि मैं अशा से काम के बारे में बात कर रहा था।

राधा ने अशा को घर से निकालने की धमकी दी। मैंने उसे समझाया और कहा कि अशा बहुत मेहनती है। लेकिन राधा नहीं मानी।

अगले दिन जब राधा बाजार गई तो मैंने अशा को अपने कमरे में बुलाया। मैंने उसे कसकर चोदा। उसे समझाया कि थोड़े दिनों बाद मैं उसे दूसरे घर में शिफ्ट कर दूंगा जहां हम आराम से मिल सकेंगे।

नया घर और नई शुरुआत

मैंने अशा के लिए पास की गली में एक छोटा सा फ्लैट किराए पर ले लिया। अब वह वहीं रहती थी लेकिन रोज मेरे घर आती थी। राधा को पता नहीं चलता था कि हमारे बीच क्या चल रहा है।

शाम को जब राधा सो जाती तो मैं अशा के फ्लैट पर चला जाता। वहां हम दोनों खुलकर चुदाई करते। कभी-कभी मैं उसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करता।

अशा अब पूरी तरह से मेरी हो चुकी थी। उसने अपने पिता का कर्ज चुका दिया था। मैंने उसके लिए सोने के गहने भी खरीद दिए थे। वह मुझसे प्यार करने लगी थी।

एक साल बाद अशा गर्भवती हो गई। मैंने उसे समझाया कि बच्चा गिरा दे। लेकिन वह मानी नहीं। उसने कहा कि वह यह बच्चा जन्म देगी चाहे कुछ भी हो जाए।

मैंने उसे दूसरे शहर भेज दिया। वहां उसने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चे की शक्ल मुझसे मिलती थी। मैंने अशा और बच्चे के लिए अच्छे इंतजाम किए।

आज की स्थिति

आज पांच साल हो गए हैं। अशा अब भी मेरी मिस्ट्रेस है। उसका बेटा स्कूल जाता है। मैं हफ्ते में दो-तीन बार उससे मिलने जाता हूं और पूरी रात उसे चोदता हूं।

राधा को अब भी पता नहीं है। वह अपनी दुनिया में मस्त है। मैं दोनों को संभालता हूं।

अशा अब चुदाई में बहुत एक्सपर्ट हो गई है। वह हर तरह की पोजीशन में मुझे खुश कर सकती है। उसकी चूत अब थोड़ी ढीली हो गई है लेकिन फिर भी मजा देती है।

कभी-कभी मुझे अपने गुनाहों का एहसास होता है। लेकिन फिर मैं सोचता हूं कि मैंने अशा की मदद की है। उसके परिवार को बर्बाद होने से बचाया है। और वह भी खुश है।

दोस्त अगर आपको मेरी कहानी जो मैंने इतना समय लगा के आपके लिए लिखी है अगर आपको पसंद आ रही है तो मुझे मेल vikasgoel4952@gmail.com जरूर करें इसे मेरी कहानी लिखने की हिम्मत बढ़ती है

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