
दिल्ली की गर्मी। वो भी अगस्त की वो भीड़ भाड़ वाली गर्मी जहाँ आसमान में धूल के गुबार उड़ते हैं और हर कोई अपनी-अपनी तरह से राहत ढूंढता है। मेरा नाम रोहित है और यह कहानी उस वक्त की है जब मैं दिल्ली के लाजपत नगर इलाके में एक किराए के कमरे में रहता था। उस समय मेरे मन में सिर्फ bhabhi k sath sex का ख्याल ही घूमता रहता था।
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से आया था पढ़ाई के बाद नौकरी की तलाश में। मेरी उम्र उस वक्त 24 साल थी, हाइट 5’10”, रंग गेहुआं और बॉडी एथलेटिक बनी हुई थी जिम जाने की वजह से। लेकिन मेरी सबसे बड़ी कमजोरी थी पतंगबाज़ी। बचपन से ही मुझे पतंग उड़ाने का शौक था, वो लहराती हुई पतंग, वो धागे की कशमकश, और फिर वो पल जब कटी हुई पतंग के पीछे दौड़ना पड़ता था – यह सब मेरे खून में था।
लेकिन किराए के मकान में रहने की वजह से मैं यह शौक नहीं जमा पा रहा था। मकान मालिक बुरी नज़र से देखते, पड़ोसी शिकायत करते। फिर आया 15 अगस्त का महीना और मेरे अंदर का पतंगबाज़ फिर जाग उठा। साथ ही bhabhi k sath sex की चाहत भी और तेज़ हो गई।
Bhabhi K Sath Sex Ka Pehla Sapna – छत पर प्रिया भाभी का दीदार
मेरे सामने वाले फ्लैट में रहते थे राजेश भैया और उनकी पत्नी प्रिया भाभी। राजेश भैया एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर थे और अक्सर टूर पर रहते थे। भाभी घर संभालती थीं। उनकी शादी को दो साल हुए थे और अभी तक कोई बच्चा नहीं था।
मैं अक्सर सीढ़ियों पर या गली में भैया से मिल लेता था, कभी-कभी चाय पी लेते थे साथ में। एक दिन मैंने हिम्मत करके पूछ ही लिया, “भैया, 15 अगस्त आ रहा है, मुझे पतंग उड़ाने का बहुत शौक है। क्या मैं छत पर पतंग उड़ा सकता हूं? आपकी इजाज़त हो तो?”
राजेश भैया ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे यार रोहित, क्या पूछना! छत तो साझा ही है, जाओ आराम से उड़ाओ। वैसे भी मुझे पतंगबाज़ी का शौक नहीं, तुम्हारा मन बहल जाएगा। बस एक बात का ध्यान रखना, प्रिया को परेशान मत करना, वो थोड़ी शर्माती है नए लोगों से।”
मैं खुशी से झूम उठा। अब मुझे अपने शौक को पूरा करने का मौका मिल गया था। लेकिन मैं यह नहीं जानता था कि इस पतंग के साथ-साथ मुझे bhabhi k sath sex का अनुभव भी मिलने वाला है जो मेरी ज़िंदगी ही बदल देगा।
गलतफहमी में शुरू हुआ Bhabhi K Sath Sex का सफर
15 अगस्त से पहले की शाम थी। मैं छत पर पतंग की डोरी चढ़ा रहा था कि तभी छत का दरवाज़ा खुला और वो आईं। प्रिया भाभी। उन्होंने सूट पहना हुआ था – हल्के गुलाबी रंग का सलवार कमीज़, दुपट्टे में लिपटी हुईं। उनकी उम्र करीब 26-27 साल की होगी, रंग गोरा, आंखें बड़ी-बड़ी और वो फिगर… ओह माय गॉड! वो फिगर किसी भी जवान मर्द का दिल बेगाना कर सकता था। कमर पतली, हिप्स फुलावदार और ऊपर से वो सूट उन पर इतना फिटिंग में था कि हर एहसास साफ झलक रहा था। वो एक hot bhabi लग रही थीं।
मैं तो उन्हें देखता ही रह गया। उन्होंने मुझे देखा और शर्माते हुए नीचे सिर झुका लिया, “आप रोहित जी हैं ना? मेरे पति ने बताया था आपके बारे में।”
मैंने हकलाते हुए कहा, “जी हां भाभी जी, मैं ही हूं। आप प्रिया भाभी है ना?”
वो हल्की सी मुस्कुराई और बालों में हाथ फेरते हुए बोलीं, “हां, मैं सोच रही थी छत पर कुछ कपड़े सुखाने आई थी लेकिन आप यहां हैं तो मैं बाद में आ जाऊंगी।”
मैंने कहा, “नहीं नहीं भाभी जी, आप आराम से रख दीजिए। मैं तो बस पतंग की तैयारी कर रहा था।”
वो कपड़े डालने चली गईं और मैं उनकी पीठ को निहारता रहा। वो सलवार उनके हिप्स पर कसी हुई थी और चलते वक्त वो हिलाव जो आ रहा था… मेरे मुंह में पानी आ गया। मैंने सोचा, “यार यह तो बहुत ही खूबसूरत है। राजेश भैया कितने लकी हैं। काश कभी bhabhi k sath sex का मौका मिल जाए।”
Nude Bhabhi और रोहित – Bhabhi K Sath Sex की पहली रात
15 अगस्त का दिन। मैं सुबह से ही छत पर था। पतंगें उड़ रही थीं, मांझा कट रहा था, चिल्लाहट और हंसी-मज़ाक का माहौल था। शाम को जब राजेश भैया ऑफिस से आए तो मैं उनसे मिला।
“कैसा रहा मज़ा?” उन्होंने पूछा।
“भैया, बहुत मज़ा आया। आप भी आ जाते तो,” मैंने कहा।
राजेश भैया ने मुझे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “यार रोहित, मुझे एक ज़रूरी काम से बाहर जाना है। शाम को लौटूंगा। प्रिया घर पर अकेली है, अगर कोई काम हो तो उसकी मदद कर देना। वो थोड़ी डरी-सहमी सी रहती है अकेले में।”
मैंने हामी भर दी। रात के करीब 9 बजे थे। मैं अपने कमरे में था कि अचानक दरवाज़े पर दस्तक हुई। मैंने दरवाज़ा खोला तो प्रिया भाभी खड़ी थीं, उन्होंने अलग सूट पहना हुआ था – गहरे लाल रंग का, और यह सूट बहुत ही खास था। गले पर गहरा कट, कमर पर कसी हुई फिटिंग और वो कपड़ा इतना पतला कि अंदर की ब्रा की लाइनें साफ झलक रही थीं। वो उस पल bhabhi sexy लग रही थीं।
“रोहित जी, वो… बिजली चली गई है और मेरा फोन भी स्विच ऑफ हो गया है। क्या आप टॉर्च लेकर आ सकते हैं? मुझे कैंडल ढूंढनी है,” वो घबराई हुई सी लग रही थीं।
मैंने तुरंत टॉर्च उठाई और उनके साथ चल दिया। उनका फ्लैट अंधेरे में डूबा हुआ था। मैंने टॉर्च जलाई और उनके बेडरूम की ओर बढ़ा। अचानक मेरा पैर किसी चीज़ से टकराया और मैं अपना संतुलन खो बैठा। गिरते-गिरते मैंने भाभी को पकड़ लिया और हम दोनों बिस्तर पर गिर पड़े।
टॉर्च की रोशनी में मैंने देखा कि भाभी मुझे बड़ी अजीब नज़रों से देख रही थीं। उनकी सांसें तेज़ चल रही थीं और वो मुझे पहचानने की कोशिश कर रही थीं। अंधेरे में शायद उन्हें लगा कि मैं राजेश भैया हूं।
“राजेश…” वो धीमे से बोलीं और अचानक मेरे गले लग गईं।
मैं समझ गया कि गलतफहमी हो गई है। लेकिन उनके जिस्म की गर्माहट, उनकी सांसों की खुशबू, और वो कसकर चिपकी हुई बॉडी… मैं तो जैसे जादू में हो गया। मेरा शरीर प्रतिक्रिया देने लगा और मैं खुद को रोक नहीं पाया। उस पल मुझे लगा जैसे bhabhi k sath sex की शुरुआत हो रही हो।
मैंने भी हाथ उठाकर उन्हें कसकर पकड़ लिया। उनकी कमर इतनी नरम थी, उनके बालों में मैंने चेहरा छुपा लिया। वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और धीरे-धीरे मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
वो किस इतना प्यारा था, इतना नरम… मैं तो खो ही गया। लेकिन तभी बाहर से किसी गाड़ी की आवाज़ आई और भाभी चौंक गईं। उन्होंने मुझे धक्का देकर अलग किया और लाइट स्विच की ओर भागीं। जैसे ही बत्ती जली, उन्होंने मुझे देखा और उनकी आंखें हैरानी से बड़ी हो गईं।
“तुम… तुम रोहित हो?” उनकी आवाज़ कांप रही थी।
मैं खड़ा हो गया और शर्मिंदगी से बोला, “भाभी जी, मुझे माफ़ कर दीजिए। मैंने कुछ नहीं किया, आपने तो खुद मुझे…”
“चुप! बस चुप!” वो चिल्लाईं और रोने लगीं, “यह क्या हो गया? मैंने क्या कर दिया? मैं तो समझी थी…”
मैंने कहा, “भाभी जी प्लीज़, कोई बात नहीं। गलती हो गई। मैं चला जाता हूं।”
मैं वहां से भाग आया लेकिन वो पल मैं कभी नहीं भूल सकता। भाभी के होंठों का स्वाद, उनके जिस्म की महक, और वो पल जब उन्होंने मुझे अपने पति समझकर गले लगाया था। उस रात मैंने सिर्फ bhabhi k sath sex के बारे में ही सोचा।
दो दिन की आज़ादी में Bhabhi K Sath Sex का मज़ा
उस घटना के बाद भाभी मुझसे बचने लगीं। अगले कई दिनों तक वो छत पर नहीं आईं, सीढ़ियों पर मुझे देखकर वो पलट जातीं या सिर झुकाकर निकल जातीं। मैं भी शर्मिंदा था लेकिन मेरे मन में उनके लिए एक अजीब सी तड़प पैदा हो गई थी। bhabhi ka sex कैसा होता होगा, यही सवाल मुझे रात-रात भर जगाए रखता।
मैंने सोचा कि शायद यह सब खत्म हो गया है। लेकिन मेरा दिल मानने को तैयार नहीं था। मैं रात को सोते वक्त उनके बारे में सोचता, उनकी याद में हाथ का इस्तेमाल करता और फंतासीज़ में खो जाता। कभी-कभी bhabhi ki sex videos जैसी कल्पनाएं भी मन में आ जातीं।
एक हफ्ते बाद मैंने देखा कि भाभी फिर से छत पर आने लगी हैं लेकिन अब वो मुझसे बात नहीं करती थीं। एक दिन मैंने हिम्मत करके कहा, “भाभी जी, मुझे माफ़ कर दीजिए उस दिन के लिए। मैं वाकई में…”
“बस!” उन्होंने मुझे रोकते हुए कहा, “उस दिन की कोई बात मत करो। वो गलती थी मेरी। मैंने तुम्हें गलत समझ लिया था। अंधेरे में…”
मैंने कहा, “लेकिन भाभी जी, मैंने भी तो…”
“मैंने कहा ना चुप!” वो गुस्से में बोलीं, “और अगर किसी को पता चला इस बारे में तो…”
मैंने हाथ जोड़े, “भाभी जी मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा। यह हमारे बीच में ही रहेगा।”
वो मुझे घूरकर देखती रहीं और फिर नीचे चली गईं। लेकिन मैंने देखा कि उनकी आंखों में कुछ और भी था – एक अजीब सी उलझन, एक तड़प, शायद वो भी उस पल को भूल नहीं पा रही थीं। मैं जानता था कि जल्द ही bhabhi k sath sex का मौका आएगा।
Bhabhi Ki Chudai और आज़ादी का असली एहसास
15 अगस्त के एक महीने बाद का वाकया है। राजेश भैया को फिर से ऑफिस के काम से बाहर जाना था, इस बार दो दिन के लिए। मैंने सुबह ही देख लिया था कि भैया सूटकेस लेकर निकले हैं।
शाम को मैं छत पर था, पतंग उड़ा रहा था। अचानक मेरी पतंग कट गई और वो सीधे सामने वाले घर की छत पर जा गिरी। मैं नीचे उतरा और उनके घर की घंटी बजाई। भाभी ने दरवाज़ा खोला। उन्होंने नाइटी पहनी हुई थी – हल्के पीले रंग की, और बाल खुले हुए थे। वो देखने में इतनी खूबसूरत लग रही थीं कि मेरी सांसें थम सी गईं। उस नाइटी में वो एकदम nude Bhabhi जैसी लग रही थीं।
“क्या हुआ रोहित?” उन्होंने पूछा। यह पहली बार था जब उन्होंने मुझे अपने मुंह से नाम लेकर बुलाया था।
मैंने कहा, “वो भाभी जी, मेरी पतंग कटकर आपकी छत पर गिर गई है। क्या मैं ले आऊं?”
वो थोड़ा सोचती रहीं और फिर बोलीं, “आओ, ले आओ।”
मैं अंदर गया। घर में कोई नहीं था। मैं छत की ओर बढ़ा और पतंग लेकर नीचे आया। भाभी किचन में थीं, पानी का गिलास पी रही थीं। मैंने कहा, “थैंक यू भाभी जी।”
वो मुझे देखती रहीं और अचानक बोलीं, “रोहित, वो दिन… मैं…”
मैंने कहा, “भाभी जी प्लीज़, भूल जाइए।”
“नहीं,” वो अचानक जोश में आकर बोलीं, “मैं भूल नहीं पा रही हूं। मैंने कितनी कोशिश की लेकिन… वो पल मेरे सामने आ ही जाता है।”
मैं चुप खड़ा रहा। वो मेरे पास आईं और धीरे से बोलीं, “क्या तुम भी…”
मैंने सच कह दिया, “हां भाभी जी, मैं भी रोज़ उसी पल को याद करके सोता हूं। आपको देखकर मेरा दिल धड़कने लगता है। मुझे पता है यह गलत है लेकिन bhabhi k sath sex का ख्याल नहीं जाता।”
वो मेरी आंखों में देख रही थीं। फिर उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और मेरी ओर मुड़ीं, “राजेश दो दिन के लिए बाहर गए हैं।”
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। मैं समझ गया था कि यह इशारा है। वो मेरे पास आईं, इतने करीब कि मैं उनकी सांसें महसूस कर सकता था।
“मैंने एक नया सूट सिलवाया है,” वो धीरे से बोलीं, “राजेश के लिए… लेकिन उसका उद्घाटन…”
मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ लिया, “मैं करूंगा भाभी।”
वो शर्मा गईं और नीचे सिर झुका लिया। मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया और धीरे से उनके होंठों पर चूमा। वो पिघल गईं, मेरे गले लग गईं। वो रात अब शुरू होने वाली थी जो मेरी ज़िंदगी की सबसे यादगार रात बनने वाली थी। bhabhi k sath sex की असली शुरुआत यहीं से हुई।
आखिरी रात – Bhabhi K Sath Sex की यादें जो कभी नहीं भूलतीं
हम बेडरूम में गए। कमरे में हल्की सी रोशनी थी, बाहर से स्ट्रीट लाइट की रोशनी आ रही थी। भाभी ने मुझे बिस्तर पर बैठने का इशारा किया और वो अलमारी की ओर गईं।
“आंखें बंद करो,” उन्होंने कहा।
मैंने आंखें बंद कर लीं। कुछ देर बाद उन्होंने कहा, “अब खोलो।”
मैंने आंखें खोलीं तो मेरे होश उड़ गए। प्रिया भाभी ने एक ऐसा सूट पहना हुआ था जो शायद किसी फिल्म की हीरोइन पर भी इतना खूबसूरत नहीं लगता। गहरे नीले रंग का सूट, पूरी तरह से शीशे और काम से जड़ा हुआ, गहरा गला, पीछे से पूरी पीठ खुली, और वो फिटिंग… ओह भगवान! वो सूट उनके हर एहसास को उजागर कर रहा था। उनके ब्रेस्ट्स पूरी तरह से आकार में दिख रहे थे, कमर इतनी पतली और हिप्स… वो सूट उनके हिप्स पर चिपका हुआ था। उस लुक में वो पूरी तरह bhabhi sexy लग रही थीं।
“कैसा लग रहा है?” उन्होंने शर्माते हुए पूछा।
मैं उठ खड़ा हुआ और उनके पास गया। मैंने उनके कंधों पर हाथ रखा, “भाभी, आप तो परी लग रही हो।”
वो मुस्कुराईं और मेरे सीने से लग गईं, “तुम्हें पसंद आया?”
मैंने उनकी कमर पर हाथ रखा और उन्हें करीब खींचा, “सिर्फ पसंद? मैं तो पागल हो रहा हूं आपको देखकर। आज bhabhi k sath sex का सपना पूरा होने वाला है।”
मैंने उनके गले पर चूमा दिया। वो कांप उठीं, “धीरे… मुझे थोड़ा डर लग रहा है।”
मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया, “डरो मत भाभी। मैं हूं ना।”
मैंने धीरे-धीरे उनके होंठों को चूमना शुरू किया। पहले हल्का सा, फिर गहरा। वो भी प्रतिक्रिया देने लगीं। उनके हाथ मेरे बालों में घूमने लगे, मेरे पीठ पर सहलाने लगे।
मैंने उनके सूट की डोरी खोलनी शुरू की। एक-एक करके बटन खुले। वो सांसें ले रही थीं, उनका सीना उठ-गिर रहा था। जब सूट का ऊपरी हिस्सा खुला तो मैंने देखा कि उन्होंने अंदर काले रंग की लेस वाली ब्रा पहनी थी। उनका क्लीवेज़ इतना गहरा और खूबसूरत था कि मैं वहीं रुक गया।
“क्या हुआ?” भाभी ने पूछा।
“कुछ नहीं,” मैंने कहा, “बस देख रहा हूं। आप कितनी खूबसूरत हो।”
मैंने उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके ब्रेस्ट्स को चूमना शुरू किया। वो आहें भरने लगीं, “उम्म्ह… अह्ह… धीरे…”
मैंने एक हाथ उनकी कमर पर रखा और दूसरे से उनकी ब्रा का हुक खोल दिया। जैसे ही ब्रा खुली, वो आज़ाद हो गए। उनके ब्रेस्ट्स गोल, मुलायम और एकदम सही आकार में थे। निप्पल गुलाबी रंग के और थोड़े कड़क हो चुके थे।
मैंने एक को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा। भाभी ने मेरे सिर को पकड़ लिया और अपने से चिपका लिया, “अह्ह… हां… और चूसो… बहुत मज़ा आ रहा है…”
मैं एक के बाद दूसरा चूसता रहा, काटता रहा, चाटता रहा। भाभी की सांसें तेज़ हो गई थीं, वो बिस्तर पर लेट गईं और मैं उनके ऊपर आ गया। उस पल bhabhi k sath sex का मज़ा और बढ़ गया।
मैंने उनका सूट पूरी तरह उतार दिया। अब वो सिर्फ पैंटी में थीं – काले रंग की लेस वाली। मैंने उनके पैरों को चूमना शुरू किया, टखनों से लेकर जांघों तक। वो कांप रही थीं, उनके शरीर में एक अजीब सी हलचल हो रही थी।
“प्लीज़…” वो बड़बड़ाई।
“क्या प्लीज़ भाभी?” मैंने पूछा।
“ऊपर आओ… मुझे… मुझे तुम्हारा महसूस करना है…”
मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी। वो पूरी तरह से नंगी थीं, मेरे सामने, बिना किसी शर्म के। उनका बदन एकदम गोरा और चिकना था। जांघों के बीच वो जगह हल्की सी झांक रही थी, गुलाबी और आमंत्रित करती हुई। अब वो पूरी तरह nude Bhabhi थीं।
मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए। शर्ट, फिर पैंट। जब मैंने अंडरवियर उतारा तो भाभी की आंखें बड़ी हो गईं, “यह… यह इतना बड़ा है?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “क्या पसंद नहीं आया?”
“नहीं… मतलब हां… बहुत… बहुत बड़ा है…” वो शर्मा गईं।
मैं उनके ऊपर आ गया। हम दोनों नंगे थे, एक-दूसरे की गर्माहट महसूस कर रहे थे। मैंने उनके होंठों पर फिर से किस किया और धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ा। bhabhi k sath sex का असली खेल अब शुरू होने वाला था।
Bhabhi K Sath Sex Ka Pehla Sampark – दर्द से मज़े तक का सफर
मैंने अपने हाथ से अपने लिंग को पकड़ा और उनकी उस जगह पर रखा। वो गीली थी, बहुत ज़्यादा गीली। मैंने हल्का सा दबाव दिया। भाभी ने आंखें बंद कर लीं और काटने लगीं, “धीरे… धीरे करो…”
मैंने धीरे से एक धक्का दिया। आधा अंदर चला गया। भाभी ने चीखते हुए मुझे पकड़ लिया, “रुको… रुको… दर्द हो रहा है…”
मैं रुक गया। उनके चेहरे पर दर्द के भाव थे। मैंने उनके होंठों पर चूमा दिया और धीरे-धीरे उनके ब्रेस्ट्स को सहलाने लगा। कुछ देर बाद वो शांत हुईं।
“अब करो… धीरे-धीरे…” उन्होंने कहा।
मैंने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए। पहला पूरा अंदर गया। वो गर्म और तंग थी, इतनी कसी हुई कि मैं तो पागल हो गया। मैंने धक्कों की गति बढ़ा दी। bhabhi ki chudai का यह पहला अनुभव अद्भुत था।
“अह्ह… हां… और ज़ोर से… बहुत मज़ा आ रहा है…” भाभी चिल्लाने लगीं।
मैं पूरी तरह से उनके अंदर था। हर धक्के के साथ वो आगे-पीछे हो रही थीं। बिस्तर की चादरें क्रिंच हो रही थीं, कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज़ और वो आवाज़ें जो हर धक्के पर निकल रही थीं। bhabhi k sath sex का यह मज़ा मैं कभी नहीं भूल सकता।
“ओह गॉड… रोहित… तुम… तुम बहुत अच्छे हो…” भाभी बड़बड़ा रही थीं।
मैंने उनके पैरों को ऊपर उठाया और अपने कंधों पर रख लिया। अब और गहराई से जा रहा था। वो पागल हो रही थीं, सिर इधर-उधर घुमा रही थीं, बाल बिखरे हुए थे।
“मैं… मैं… आह्ह्ह… हो गया… मैं झड़ने वाली हूं…” वो चीखीं।
मैंने अपनी गति तेज़ कर दी। ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। और फिर वो एकदम कांप उठीं, उनका पूरा शरीर अकड़ गया, उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया और फिर एक लंबी सांस छोड़ी। वो झड़ चुकी थीं।
लेकिन मैं अभी तक नहीं झड़ा था। मैंने उन्हें घुमाया और पीछे से आने की कोशिश की।
“नहीं… वहां नहीं…” वो मना करने लगीं।
“प्लीज़ भाभी… एक बार…” मैंने कहा।
वो मान गईं। मैंने पीछे से धक्का दिया। वो और भी तंग थी यहां से। भाभी चिल्लाने लगीं, “आह्ह… बहुत गहरा है… धीरे…”
मैंने धीरे-धीरे शुरुआत की और फिर गति पकड़ ली। उनकी पीठ पर चूमा देते हुए, उनके बालों को खींचते हुए, मैं उन्हें पीछे से ले रहा था। यह एक अलग ही एहसास था, पूरी तरह से उन पर काबू पाने का। bhabhi k sath sex का यह अंदाज़ और भी मज़ेदार था।
“मैं झड़ने वाला हूं भाभी…” मैंने कहा।
“अंदर ही कर दो… कोई बात नहीं… सेफ है…” वो बोलीं।
मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे और फिर एक लंबा धक्का देकर ठहर गया। मैं झड़ गया, उनके अंदर ही, गहराई तक। हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। उस रात bhabhi ke sath sex का अनुभव पूरा हो चुका था।
Bhabhi K Sath Sex Ke Baad Azaadi Ka Ehsaas
कुछ देर बाद हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे। भाभी का सिर मेरे सीने पर था, मैं उनके बालों में हाथ फेर रहा था।
“कैसा लगा?” मैंने पूछा।
वो मुस्कुराईं, “पता नहीं कैसे बताऊं। राजेश के साथ कभी ऐसा नहीं हुआ। वो जल्दी खत्म कर देते हैं। लेकिन तुम… तुमने मुझे इतना मज़ा दिया कि मैं भूल नहीं सकती। bhabhi k sath sex का मतलब आज समझ आया।”
मैंने कहा, “भाभी, वो जो पहली बार हुआ था अंधेरे में…”
वो मेरी बात काटते हुए बोलीं, “उस दिन मैंने तुम्हें राजेश समझा था। लेकिन जब बत्ती जली तो मैं समझ गई थी कि तुम कोई और हो। लेकिन तब तक…”
“तब तक?” मैंने पूछा।
“तब तक मैं वो पल भूल चुकी थी। तुम्हारे होंठ, तुम्हारा कसना… मुझे अच्छा लगा था। इसीलिए मैंने शिकायत नहीं की। वरना मैं चिल्ला सकती थी,” वो शर्माते हुए बोलीं।
मैंने उनकी कमर सहलाई, “तो आज यह सब…”
“आज मैंने मौका देखकर तुम्हें बुलाया। मुझे पता था राजेश बाहर है। मैंने यह सूट इसीलिए पहना क्योंकि मैं चाहती थी कि तुम मुझे देखो, पहचानो, और bhabhi k sath sex का मज़ा लो।”
मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया, “भाभी, आपने मुझे भी आज़ाद कर दिया आज। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मुझे यह मौका मिलेगा।”
वो मेरे ऊपर आ गईं, “अभी तो रात बाकी है रोहित। दो दिन हैं हमारे पास। आज रात और bhabhi k sath sex करने हैं।”
Raat Bhar Chalta Raha Bhabhi K Sath Sex Ka Khel
वो रात हमने कई बार एक-दूसरे को पाया। हर बार नए अंदाज़ में, नई पोज़ीशन में। भाभी ने मुझे अपने ऊपर आने दिया, फिर खुद ऊपर होकर मुझे लेने लगीं। वो उछल-उछल कर मुझ पर बैठ रही थीं और मैं नीचे से धक्के दे रहा था।
“ओह येस… येस… और ज़ोर से…” वो चिल्ला रही थीं। bhabhi k sath sex का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था।
फिर हमने बाथरूम में किया, शावर के नीचे। पानी की बौछार में हम दोनों गीले हो रहे थे और मैं उन्हें दीवार से सटाकर ले रहा था। वो पागल हो रही थीं, पानी में ही चिल्ला रही थीं। उस वक्त bhabhi ki chudai का मज़ा और बढ़ गया।
रात के 2 बजे हम फिर से बिस्तर पर थे। इस बार धीरे-धीरे, रोमांस के साथ। मैंने उनके पूरे बदन पर चूमने के निशान बना दिए। उनके गले पर, ब्रेस्ट्स पर, कमर पर, जांघों पर। वो मेरे लिए खुश हो रही थीं, मुझे अपना बना रही थीं।
“तुम मेरे हो रोहित,” वो बड़बड़ा रही थीं, “सिर्फ मेरे…”
“हां भाभी, मैं सिर्फ आपका हूं,” मैंने जवाब दिया। bhabhi k sath sex ने हमें एक-दूसरे का बना दिया था।
सुबह जब हम उठे तो एक-दूसरे को देखकर शर्मा रहे थे। लेकिन वो खुशी थी, वो संतुष्टि थी जो हम दोनों के चेहरे पर थी।
Do Din Ki Azaadi Mein Har Jagah Bhabhi K Sath Sex
अगले दो दिन हमने एक-दूसरे को पूरी तरह से जाना। दिन में भी, रात में भी। जब भी मौका मिला, हम एक-दूसरे के शरीर को आज़ाद करते रहे। भाभी ने मुझे अपनी हर ख्वाहिश बताई, हर वो जगह दिखाई जहां उन्हें छूना पसंद था।
“यहां…” वो मेरा हाथ अपनी जांघों के बीच ले जातीं, “यहां बहुत सेंसिटिव हूं मैं…”
मैं वहां चूमता, चाटता, और वो कांप उठतीं। bhabhi k sath sex का यह तरीका उन्हें बहुत पसंद आ रहा था।
“और यहां…” वो अपने पीछे का हिस्सा दिखातीं।
मैंने वहां भी प्यार किया, हर जगह, हर कोने में।
एक बार हमने किचन में भी किया जब वो खाना बना रही थीं। मैंने पीछे से आकर उन्हें पकड़ लिया और उनकी साड़ी उठाकर…
“पागल हो गए हो?” वो हंसते हुए बोलीं, “यहां खाना जल जाएगा…”
“जलने दो,” मैंने कहा और उन्हें वहीं ले लिया।
वो स्टोव के सामने झुकी हुई थीं और मैं पीछे से उनमें था। यह एक अलग ही उत्तेजना थी, पकड़े जाने का डर, और वो मज़ा। bhabhi k sath sex का यह खतरनाक खेल हमें और जोश दे रहा था।
Alvida Ki Raat – Aakhri Baar Bhabhi K Sath Sex
दो दिन बाद राजेश भैया आने वाले थे। शाम को हमने आखिरी बार एक-दूसरे को पाया। इस बार बहुत धीरे-धीरे, बहुत प्यार से। हम दोनों को पता था कि अब यह रूटीन नहीं हो पाएगा, मौका कम मिलेगा।
“मैं तुम्हें भूल नहीं पाऊंगी रोहित,” भाभी रोते हुए बोलीं।
मैंने उनके आंसू पोंछे, “मैं भी नहीं भूल पाऊंगा भाभी। यह दो दिन मेरी ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत दिन हैं। bhabhi k sath sex की ये यादें हमेशा रहेंगी।”
“हम फिर मिलेंगे?” उन्होंने पूछा।
“जब भी मौका मिलेगा,” मैंने कहा, “लेकिन अब हमें सावधान रहना होगा।”
वो मेरे सीने से लग गईं, “वो जो सूट मैंने पहना था… मैंने उसे अपने लिए सिलवाया था। राजेश के लिए नहीं। मैं चाहती थी कि तुम ही उसका उद्घाटन करो। और तुमने किया… उससे भी खूबसूरत तरीके से। bhabhi k sath sex का असली मज़ा तुम्हारे साथ ही मिला।”
मैंने उनके होंठों पर आखिरी बार किस किया और अपने कमरे में चला आया।
Aaj Bhi Yaad Aati Hai Bhabhi K Sath Sex Ki Woh Azaadi
आज भी जब मैं 15 अगस्त या किसी भी तरह की आज़ादी का ज़िक्र सुनता हूं तो मुझे वो दिन याद आता है। प्रिया भाभी ने मुझे सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं, मानसिक रूप से भी आज़ाद किया था। उन्होंने मुझे प्यार करना सिखाया, एक औरत को संतुष्ट करना सिखाया, और खुद को पाने की ख्वाहिश दी। bhabhi k sath sex ने मेरी ज़िंदगी बदल दी।
हम अब भी मिलते हैं कभी-कभी, चुपके से, जब भी मौका मिलता है। वो अब भी वही सूट पहनती हैं जब हम अकेले होते हैं, और मैं उन्हें उसी तरह आज़ाद करता हूं जैसे उस पहली रात किया था। हर मिलन में bhabhi k sath sex का वही मज़ा मिलता है।
क्योंकि आज़ादी सिर्फ देश की ही नहीं होती, कभी-कभी दिल की भी होती है, जिस्म की भी होती है। और प्रिया भाभी ने उस आज़ादी के नाम पर मुझे अपने अंदर सचमुच आज़ाद कर दिया था – एक ऐसी आज़ादी जो कभी कैद नहीं हो सकती, कभी खत्म नहीं हो सकती। bhabhi k sath sex की ये यादें हमेशा ताज़ा रहेंगी।
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