गांव की विधवा भाभी की चुदाई
आप सभी लोगो का बहुत बहुत शुक्रिया जो आपने मेरी पहली कहानी को इतना प्यार दिया मुझे इसी से प्रेरणा मिली है जिसकी वजह से मैं दूसरा पार्ट लिख रहा हूं| गांव की विधवा भाभी की चुदाई | ये मेरी पहली कहानी नीचे पिन कर देता हूँ
गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई –1
रेखा भाभी रसोई से निकलीं। साड़ी पहने थीं, लेकिन ब्लाउज बहुत टाइट था। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ ब्लाउज के कपड़े को धकेल रही थीं। निप्पल्स के उभार साफ दिख रहे थे। पीछे से साड़ी उनकी गंड पर चिपककर दो गोल-गोल मुलायम गोले बना रही थी। हर कदम पर उनकी गंड हल्के से कांप रही थी। उन्होंने मेरी तरफ देखा और आँख मार दी। फिर धीरे से बोलीं, “आज खेत जाओगे तो शाम को जल्दी लौटना। रात लंबी करनी है।”
मेरा लंड तुरंत तन गया।
चाचा जी खेत ले गए। दिन भर मैं खेत में काम करता रहा, लेकिन दिमाग में सिर्फ रेखा भाभी की नंगी बॉडी घूम रही थी। उनकी चूचियों का वजन, गंड की मुलायमता, चूत की गर्माहट… सब याद आ-आकर लंड को खड़ा कर रहा था। दोपहर को जब छाया में बैठकर पानी पी रहा था तो अचानक रेखा भाभी खेत की ओर आती नजर आईं। हाथ में लंच बॉक्स था। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
वे पास आईं। चारों तरफ कोई नहीं था। सिर्फ दूर खेत में चाचा जी दिख रहे थे। रेखा भाभी ने लंच बॉक्स रखा और मेरे पास बैठ गईं। साड़ी की पल्लू हटाई तो उनकी ब्लाउज की गहरी गर्दन से चूचियों का ऊपरी नरम हिस्सा साफ झलकने लगा। उन्होंने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और अपनी जांघ पर रख दिया।
“रात को मजा आया ना?” उन्होंने हल्के स्वर में पूछा।
मैंने सिर हिलाया। मेरा हाथ उनकी जांघ पर से सरकते हुए उनकी गंड तक पहुँच गया। साड़ी के ऊपर से ही उनकी गंड को मसलने लगा। रेखा भाभी की आँखें बंद हो गईं। “इतनी बेशर्मी… यहाँ?” लेकिन उन्होंने मेरा हाथ नहीं हटाया। बल्कि थोड़ा और पास खिसक आईं। मेरे हाथ को अपनी गंड पर और जोर से दबाने लगीं। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
मैंने उनकी साड़ी ऊपर की और उनकी नंगी गंड पकड़ ली। दो बड़े-बड़े नरम गोले। मैंने दोनों हाथों से मसलना शुरू कर दिया। रेखा भाभी हल्की सिसकारी भरने लगीं। “महेश… कोई देख लेगा…” लेकिन उनकी आवाज में मना नहीं था। मैंने एक उंगली उनकी गंड के बीच से सरकाकर उनकी चूत तक पहुँचाई। वहाँ पहले से गीलापन था।
“भाभी… दिन में भी भीग जाती हो?” मैंने पूछा।
वे मुस्कुराईं। “तेरे लंड की याद से… रात भर तेरी मोटी लौंडा मेरी चूत में रही, अभी भी महसूस हो रहा है।”
मैंने दो उंगलियाँ उनकी चूत में घुसेड़ दीं। रेखा भाभी ने अपना मुँह मेरे कंधे में दबा लिया। मैं उनकी चूत के अंदर उंगलियाँ चलाते हुए उनकी चूचियों को दूसरी हाथ से मसलने लगा। ब्लाउज के ऊपर से। उनकी चूचियाँ इतनी भारी थीं कि मेरी हथेली में पूरी नहीं समा रही थीं। निप्पल्स कड़े हो चुके थे।
थोड़ी देर बाद रेखा भाभी ने खुद साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर लिया। उनकी नंगी चूत और गंड धूप में चमक रही थीं। मैंने उन्हें घुटनों के बल कर दिया। उनकी गंड मेरे सामने आ गई। मैंने जीभ निकालकर उनकी गंड के छेद पर फेरा, फिर नीचे उनकी चूत पर। रेखा भाभी की कमर काँपने लगी। “आह्ह… चाट… मेरी गंदगी भरी चूत चाट…” गांव की विधवा भाभी की चुदाई
मैं उनकी चूत और गंड दोनों चाटने लगा। जीभ अंदर तक घुसेड़ता, फिर उनके गंड के छेद को भी गीला करता। रेखा भाभी दोनों हाथों से अपनी गंड फैलाए हुए थीं ताकि मैं और अंदर तक पहुँच सकूँ। उनकी चूचियाँ नीचे लटककर हिल रही थीं।
मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया। पैजामा नीचे किया और लंड उनकी चूत पर लगाकर एक झटके में अंदर घुसेड़ दिया। रेखा भाभी की चीख निकल गई। “आआह्ह… इतना जोर से… मेरी चूत फट जाएगी…” लेकिन उन्होंने पीछे की तरफ धक्का दिया ताकि लंड और गहराई तक जाए। मैं उनकी गंड पकड़कर जोर-जोर से चुदाई करने लगा। हर धक्के पर उनकी भारी चूचियाँ आगे-पीछे झूल रही थीं। गंड मेरे पेट से टकरा-टकराकर लाल हो रही थी। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
खेत की खुली हवा में उनकी चूत की थप-थप आवाज फैल रही थी। मैंने उनकी एक चूची पकड़कर मसलनी शुरू कर दी। निप्पल को उंगलियों के बीच दबा-दबाकर मरोड़ा। रेखा भाभी पागल हो रही थीं। “चोद… हरामी की तरह चोद… मेरी चूत में अपना पूरा पानी भर दे…”
मैंने दस-बारह जोरदार धक्के और मारे और फिर उनकी चूत के अंदर ही झड़ गया। लंड धड़क-धड़क कर वीर्य उड़ेल रहा था। रेखा भाभी भी काँपते हुए झड़ रही थीं। उनकी चूत मेरे लंड को चूस रही थी। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
जब हम अलग हुए तो उनकी चूत से मेरा गाढ़ा वीर्य बाहर निकलकर जांघों पर बह रहा था। उन्होंने पेटीकोट और साड़ी ठीक की, लेकिन उनकी आँखों में मजा और भूख दोनों साफ थे। “शाम को घर में… आज रात और गंदा करना है,” वे बोलीं और लंच बॉक्स छोड़कर चली गईं।
शाम को घर लौटा तो सुमन ने फिर से अजीब नजरों से देखा। “आज दिन में खेत में देर लगाई?” मैंने बस मुस्कुरा दिया। रात को खाना खाकर सब सो गए। सुमन अपने कमरे में चली गई। चाचा-चाची भी। रेखा भाभी ने मुझे इशारा किया।
कमरे में घुसते ही रेखा भाभी ने साड़ी खोल दी। ब्लाउज के हुक खोले। उनकी भारी चूचियाँ बाहर छलक आईं। काले बड़े निप्पल्स पहले से कड़े थे। उन्होंने पेटीकोट भी गिरा दिया। अब पूरी नंगी खड़ी थीं। गोल-गोल भारी चूचियाँ, पतली कमर, चौड़ी गंड और बीच में घनी चूत। मैंने उन्हें दीवार से लगा दिया और उनकी चूचियों को मुँह में भर लिया। जोर-जोर से चूसने लगा। दांत से हल्के काटे। रेखा भाभी मेरे बाल पकड़कर अपनी चूचियों में और धकेल रही थीं। “काट… मेरे निप्पल काट… चूसकर लाल कर दे…”
मैंने उन्हें चारपाई पर लिटाया। पैर फैला दिए। उनकी चूत अभी भी दोपहर के वीर्य से थोड़ी गीली थी। मैंने लंड अंदर डाला और चुदाई शुरू कर दी। इस बार और जोर से। उनकी गंड के नीचे हाथ लगाकर उठा-उठाकर धक्के मार रहा था। चूचियाँ मेरे चेहरे पर बार-बार लपट रही थीं। मैं एक चूची मुँह में लेता, दूसरी मसलता। रेखा भाभी की सिसकारियाँ बढ़ रही थीं। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
“महेश… आज मेरी गंद में भी डाल… पहली बार…” वे अचानक बोलीं।
मैं रुका। उन्होंने करवट बदली और घुटनों के बल हो गईं। गंड मेरे सामने उठी हुई। उन्होंने खुद दोनों हाथों से अपनी गंड के गोले फैला दिए। बीच में उनका छोटा सा गुलाबी गंद का छेद दिख रहा था। मैंने थूक लगाकर लंड का मुँह वहाँ टिकाया और धीरे-धीरे धक्का मारा। रेखा भाभी की आवाज निकल गई। “आआआह्ह्ह… दर्द हो रहा… लेकिन मत रुक… पूरा डाल…”
मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी गंद में घुसेड़ दिया। इतनी टाइट थी कि साँस फूल गई। फिर धक्के शुरू किए। उनकी गंद मेरे लंड को चूस रही थी। मैंने आगे झुककर उनकी चूचियाँ पकड़ लीं और मसलते हुए गंद की चुदाई करने लगा। रेखा भाभी का मुँह चादर में दबा था। वे जोर-जोर से कराह रही थीं। “फोड़ दे मेरी गंद… हरामी… पूरी तरह चोद…”
मैंने देर तक उनकी गंद मारी। फिर निकाला और उनकी चूत में डाल दिया। अब दोनों छेद इस्तेमाल हो चुके थे। रेखा भाभी पूरी तरह भीग चुकी थीं। मैंने उन्हें पलटा, पैर उनके कंधों तक उठाए और गहरी चुदाई करने लगा। उनकी चूचियाँ उछल-उछल रही थीं। गंड मेरे हाथों में दब रही थी। आखिर में मैंने उनकी चूत के अंदर ही तीसरी बार वीर्य भरा।
रात भर हम रुकने वाले नहीं थे। बीच में पानी पिया, फिर से शुरू। रेखा भाभी ने मेरे लंड को अपनी चूचियों के बीच रखा और मसल-मसल कर चुदाई की। लंड उनकी चूचियों की गर्माहट में छिप-छिपकर बाहर निकल रहा था। फिर उन्होंने मुँह में लिया और गलघोंटू चूसा। मैं उनके मुँह में झड़ गया। उन्होंने पूरा निगल लिया। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
सुबह होते-होते हम थक चुके थे। लेकिन मजा इतना आया था कि शरीर में दर्द भी मजा दे रहा था। रेखा भाभी की चूचियों पर दांतों के निशान थे। गंद लाल थी। चूत सूजी हुई। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तू मेरा लंड वाला आदमी बन गया है। हर रात यही होगा।” गांव की विधवा भाभी की चुदाई
अगले दिन फिर खेत। फिर दोपहर की चुदाई। इस बार पेड़ के पीछे। रेखा भाभी की साड़ी उठाकर खड़े-खड़े चोदा। उनकी चूचियाँ मेरे हाथों में थीं। गंड मेरे पेट से टकरा रही थी। शाम को घर आकर फिर रात।
लेकिन तीसरी रात को ट्विस्ट आया।
हम दोनों नंगे लेटे चुदाई कर रहे थे। रेखा भाभी मेरे ऊपर थीं। उनकी चूचियाँ मेरे मुँह में थीं और वे अपनी गंड हिला-हिलाकर लंड पर बैठ रही थीं। तभी अचानक दरवाजे पर हल्की सी आवाज हुई।
सुमन की आवाज। “भाभी… पानी चाहिए था…”
हम दोनों जम गए। रेखा भाभी जल्दी से मेरे ऊपर से उतरीं और चादर ओढ़ ली। मैंने भी चादर खींच ली। दरवाजा थोड़ा खुला। सुमन खड़ी थी। उसकी नजर अँधेरे में हमारी तरफ गई। थोड़ी देर वह खड़ी रही, फिर पानी लेकर चली गई। लेकिन जाने से पहले उसकी नजर मेरे खुले कंधे और रेखा भाभी के बिखरे बालों पर जरूर गई थी।
दरवाजा बंद होते ही रेखा भाभी फुसफुसाईं, “अब खतरा बढ़ गया है… लेकिन मैं रुकने वाली नहीं।”
उस रात हमने और जोर से चुदाई की। जैसे आखिरी रात हो। मैंने उनकी गंद में फिर डाला। चूचियाँ चूस-चूस कर सुजा दीं। चूत में इतना वीर्य भरा कि बाहर बहने लगा। रेखा भाभी रोते-रोते झड़ रही थीं मजे से। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
सुबह सुमन ने नाश्ते में अजीब सवाल पूछे। “कल रात भाभी के कमरे में कोई था क्या? आवाजें आ रही थीं।”
मैंने हँसकर टाल दिया। लेकिन रेखा भाभी की नजरों में नई चमक थी। जैसे अब और ज्यादा जोखिम लेने का मन हो।
गाँव की ये दिन और रातें अब सिर्फ चुदाई नहीं, खतरे और मजे का मिश्रण बन चुकी थीं। रेखा भाभी की भारी चूचियाँ, नरम गंड, रसीली चूत… सब कुछ अब मेरा हो चुका था। और मैं छोड़ने वाला नहीं था
सुमन का शक अब सिर्फ शक नहीं रह गया था। तीसरी सुबह नाश्ते के समय उसकी नजरें बार-बार मेरे और रेखा भाभी पर जा रही थीं। रेखा भाभी साड़ी में थीं, लेकिन ब्लाउज इतना टाइट था कि उनकी भारी चूचियाँ साफ उभरी हुई लग रही थीं। निप्पल्स के गोल निशान कपड़े के ऊपर से दिख रहे थे। पीछे से उनकी गंड साड़ी में गोल-गोल सिमटी हुई थी। मैं जानबूझकर नजरें चुरा रहा था, लेकिन लंड फिर भी हल्का तन चुका था।
सुमन बीस साल की थी। लंबी, गोरी, पतली कमर और भरपूर जांघें। उसके चूचे रेखा भाभी जितने भारी नहीं थे, लेकिन गोल और सख्त थे। ब्लाउज में कसे हुए। गंड छोटी लेकिन गोल और तनी हुई। वह कॉलेज जाती थी शहर, लेकिन छुट्टियों में गाँव रहती थी। उसकी आँखों में एक अजीब चमक थी उस सुबह। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
दोपहर को चाचा जी बाजार गए। चाची सोने चली गईं। सोनू बाहर खेल रहा था। घर में सिर्फ मैं, रेखा भाभी और सुमन थे। रेखा भाभी रसोई में थीं। मैं अपने कमरे में लेटा था कि अचानक दरवाजा खुला और सुमन अंदर आ गई। उसने दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ देखने लगी।
“कल रात मैंने सब सुन लिया,” वह सीधे बोली। आवाज में न गुस्सा था न डर। बस एक अजीब सा इरादा। “तुम रेखा भाभी को चोद रहे थे। उनकी सिसकारियाँ, चारपाई की आवाज… सब सुनाई दिया।” गांव की विधवा भाभी की चुदाई
मेरा चेहरा सुन्न पड़ गया। लंड तो अजीब तरह से तन भी गया। सुमन पास आई। उसकी साड़ी की पल्लू हल्की थी। ब्लाउज के गले से उसकी गोल चूचियों का ऊपरी हिस्सा झलक रहा था। वह बिस्तर पर बैठ गई। मेरी जांघ के बिल्कुल पास।
“मुझे भी चाहिए,” वह धीरे से बोली। “दो साल से रेखा भाभी अकेली सोती हैं। और तुम… तुम्हारा लंड रात भर उनकी चूत में रहा। मैंने दरवाजे की दरार से एक झलक भी देख ली थी। तुम्हारी नंगी गंड और भाभी की फैलाई हुई टाँगें।”
मैं कुछ बोल नहीं पाया। सुमन ने खुद अपना हाथ बढ़ाकर मेरे पैजामे पर रखा। लंड पूरी तरह तन चुका था। उसने हल्के से दबाया। “इतना मोटा… भाभी की चूत में कैसे समाता होगा?”
तभी रेखा भाभी कमरे में आ गईं। उन्होंने दरवाजा बंद किया। उनकी आँखों में गुस्सा नहीं, बल्कि एक अजीब सा उत्साह था। “सुमन… तुमने देख लिया?” रेखा भाभी ने पूछा।
सुमन ने सिर हिलाया। “हाँ। और अब मैं बाहर नहीं रहना चाहती।”
रेखा भाभी ने दरवाजे पर कुंडी लगा दी। फिर धीरे से अपनी साड़ी खोलने लगीं। ब्लाउज के हुक खोले। उनकी भारी चूचियाँ बाहर छलक आईं। काले निप्पल्स पहले से कड़े थे। उन्होंने पेटीकोट भी गिरा दिया। नंगी खड़ी हो गईं। गोल गंड, रसीली चूत, सब कुछ सुमन के सामने। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
सुमन की साँसें तेज हो गईं। रेखा भाभी ने सुमन के पास जाकर उसकी साड़ी खोलनी शुरू कर दी। सुमन ने मना नहीं किया। ब्लाउज खुला। उसकी गोल, सख्त चूचियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल्स। फिर पेटीकोट। उसकी चूत पर बाल पतले और साफ थे। गंड गोल और तनी हुई। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
मैं देखता रह गया। दो नंगी औरतें मेरे सामने। रेखा भाभी की भारी चूचियाँ और सुमन की सख्त गोल चूचियाँ। रेखा भाभी ने सुमन की एक चूची मुँह में ले ली और चूसने लगीं। सुमन की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… भाभी…”
मैंने पैजामा उतार दिया। लंड तना हुआ बाहर निकल आया। सुमन की नजर उस पर गई। वह रेखा भाभी के मुँह से अपनी चूची निकालकर मेरे पास आई और लंड पकड़ लिया। “इतना कठोर… इतना गर्म…” उसने लंड को अपने गाल से लगाया, फिर जीभ निकालकर मुँह के ऊपर फेरा। फिर पूरा मुँह में ले लिया।
रेखा भाभी पीछे से सुमन की गंड मसल रही थीं। उंगली उसकी चूत में डाल दी। “देखो महेश… हमारी सुमन कितनी भीगी है पहले ही।”
सुमन मेरे लंड को चूस रही थी। गहराई तक। लार टपकाते हुए। रेखा भाभी ने उसे चारपाई पर लिटा दिया। पैर फैला दिए। सुमन की गुलाबी चूत चमक रही थी। रेखा भाभी ने खुद अपना मुँह सुमन की चूत पर लगा दिया और चाटने लगीं। सुमन की कमर उछल गई। “आह्ह्ह… भाभी… जीभ और अंदर…”
मैंने सुमन के मुँह के पास लंड ले जाकर फिर से घुसेड़ दिया। वह दोनों तरफ से मजा ले रही थी। रेखा भाभी उसकी चूत चाट रही थीं, मैं मुँह चोद रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने लंड निकाला और सुमन की चूत पर लगा दिया। रेखा भाभी ने खुद लंड का मुँह सुमन की चूत के छेद पर रख दिया। “ डालो… पहली बार है इसकी…”
मैंने धीरे से धक्का मारा। सुमन की चूत बहुत टाइट थी। आधा भी मुश्किल से घुसा। वह चीख सि रही थी। “आआह्ह… दर्द… लेकिन मत निकलो…” रेखा भाभी उसकी चूचियाँ मसल रही थीं और चूस रही थीं। मैंने और धक्का मारा। धीरे-धीरे पूरा लंड सुमन की चूत में धंस गया।
फिर चुदाई शुरू हुई। सुमन की टight चूत मेरे लंड को चूस रही थी। उसकी गोल चूचियाँ उछल रही थीं। रेखा भाभी ने अपना मुँह सुमन की चूचियों पर लगा रखा था। कभी मैं सुमन को चोदता, कभी निकलकर रेखा भाभी की चूत में डाल देता। दोनों की चूतें बारी-बारी गीली हो रही थीं। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
फिर रेखा भाभी ने सुमन को घुटनों के बल कर दिया। “अब इसकी गंद भी लो,” रेखा भाभी बोलीं। उन्होंने सुमन की गंड फैला दी। मैंने थूक लगाकर लंड सुमन की गंद पर टिकाया और धीरे-धीरे अंदर किया। सुमन की आवाज निकल गई। “आआआह्ह्ह… फट रहा है… भाभी… महेश…” लेकिन वह पीछे की तरफ धक्का दे रही थी। मैंने उसकी गंद चोदनी शुरू कर दी। रेखा भाभी नीचे लेटकर सुमन की चूत चाट रही थीं।
रात भर यही सिलसिला चला। कभी मैं सुमन की चूत चोदता, कभी रेखा भाभी की। कभी दोनों की चूचियाँ एक साथ मुँह में लेता। सुमन ने पहली बार लंड मुँह में लेकर वीर्य निगला। रेखा भाभी ने सुमन की चूत से निकलता वीर्य चाटा। दोनों एक-दूसरे की चूत चाटने लगीं जबकि मैं बारी-बारी उनकी गंद मार रहा था। गांव की विधवा भाभी की चुदाई
सुमन की गंड लाल हो चुकी थी। चूचियाँ सुजी हुईं। चूत से वीर्य बाहर बह रहा था। रेखा भाभी की हालत भी वही थी। तीनों पसीने और वीर्य से लथपथ थे।
सुबह चार बजे सुमन अपने कमरे में चली गई। जाने से पहले बोली, “अब हर रात… तीनों। और कभी-कभी दिन में भी।” गांव की विधवा भाभी की चुदाई
रेखा भाभी मेरे सीने पर लेटी हुई थीं। उनकी भारी चूचियाँ मेरे मुँह के पास। “अब मजा दोगुना हो गया महेश… दो-दो चूत, दो-दो गंड, चार-चार चूचियाँ…”
मैंने उनकी चूची मुँह में ले ली। लंड फिर से तन रहा था।
गाँव की ये रातें अब सिर्फ दो लोगों की नहीं रह गई थीं। सुमन की टight चूत, उसकी गोल गंड और सख्त चूचियाँ भी मेरी हो चुकी थीं। और आने वाले दिनों में और भी गंदी घटनाएँ होने वाली थीं… खेत में, नदी किनारे, और यहाँ तक कि चाचा-चाची के सोते हुए घर में। लेकिन आपको इसी तरह से मालिश मिलती रहे तो जरूर में इसका तिसरा पार्ट भी लिख सकता हूं
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