दोस्तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक शादी में मुझे ऐसे भी चूत मिलेगी लेकिन शादी का महोल और अजनबी भाभी के साथ सुहागरात का वो दिन कभी भुला नहीं जाता इसलिए आज आपके साथ शेयर कर रहा हूं।
शादी का महोल और अजनबी भाभी का सुहागरात से भी ज्यादा गर्म किस्सा
भाग 1: शादी में पहुंचना और पहली नजर
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे चचेरे भाई की शादी मेरे लिए एक यादगार सेक्स अनुभव बन जाएगी। मेरा नाम राहुल है और मैं उस समय 26 साल का था। मेरे चचेरे भाई रोहित की शादी इंदौर में होने वाली थी और मैं दिल्ली से ट्रेन पकड़कर वहां पहुंचा।
शादी का घर एक बड़े फार्महाउस में था जो शहर के बाहर था। जब मैं वहां पहुंचा तो शाम हो चुकी थी। पूरा घर रोशनी से जगमगा रहा था और बारातियों का हुजुम उमड़ा हुआ था। मैंने अपना बैग कमरे में रखा और नीचे आया तो मेरी नजर एक औरत पर पड़ी जो गुलाबी साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही थी।
वो कोई और नहीं, मेरे दूर के रिश्ते में आने वाली भाभी थीं – प्रियंका भाभी। उनकी उम्र करीब 30-32 साल की होगी, गोरा रंग, भरे हुए बदन, और साड़ी में उनकी कमर का मोटापा बहुत सेक्सी लग रहा था। उनकी गांड बहुत बड़ी थी और चूचियां भी भरी हुई थीं। वो शायद किसी की पत्नी थीं लेकिन मुझे उनके बारे में कुछ नहीं पता था।
शादी का महोल और अजनबी भाभी के साथ सुहागरात / हिंदी सेक्स स्टोरी
मैं उन्हें देखता ही रह गया। उन्होंने मुझे देख लिया और मुस्कुरा दीं। वो मुस्कान में कुछ अलग सा था – एक अलग तरह की निमंत्रण भरी मुस्कान।
“तुम राहुल हो ना? रोहित का भाई?” उन्होंने पूछा।
“हां भाभी जी,” मैंने जवाब दिया।
“मैं प्रियंका हूं, तुम्हारे दूर के रिश्ते में आती हूं। आओ, खाना खा लो,” वो बोलीं और मेरे कंधे पर हाथ रख दिया।
उनका हाथ मेरे कंधे पर एक अजीब सा करंट दौड़ा गया। मैंने नोटिस किया कि उनकी साड़ी का पल्लू काफी नीचे गिरा हुआ था और उनकी चूचियों का क्लीवेज साफ दिख रहा था। वो जानबूझकर ऐसा कर रही थीं।
रात को जब सब सो गए तो मैं बाथरूम जा रहा था। गलती से मैं एक कमरे में घुस गया जो अंधेरा था। अचानक लाइट जल गई और मैंने देखा कि प्रियंका भाभी सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थीं। उनके बाल खुले हुए थे और वो अपनी साड़ी उतार रही थीं।
“ओह! राहुल… तुम यहां?” वो चौंकीं लेकिन शर्माई नहीं।
“सॉरी भाभी, मुझे पता नहीं था ये आपका कमरा है,” मैंने कहा और पीछे मुड़ने लगा।
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“रुको,” उन्होंने कहा, “कोई बात नहीं। रिश्तेदारी में आए हो, अपने ही घर जैसा समझो। वैसे भी, ये कमरा मेरा है लेकिन मेरे पति नहीं आए हैं। वो काम से नहीं आ पाए।”
मैंने पीछे मुड़कर देखा। वो मुस्कुरा रही थीं और उनके ब्लाउज के बटन खुले हुए थे जिससे उनकी चूचियों का हिस्सा दिख रहा था। वो जानबूझकर मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थीं।
“तुम्हारी आंखों में मुझे देखने की बहुत लालसा दिख रही है राहुल,” वो धीरे से बोलीं और मेरे पास आ गईं।
“भाभी जी, मैं…” मैं कुछ कहने वाला था।
“शhhh… चुप रहो,” उन्होंने मेरे होठों पर उंगली रखी, “मैं जानती हूं कि तुम्हें क्या चाहिए। और मुझे भी वही चाहिए जो एक औरत को चाहिए होता है – एक मर्द का साथ, एक मर्द का प्यार, और एक मर्द का वो हथियार जो मेरी भूख मिटा सके।”
वो सीधे बात पर आ गई थीं। मैं समझ गया कि ये भाभी बहुत ही कामुक हैं और उन्हें सेक्स की बहुत जरूरत है।
भाग 2: पहली चुदाई की शुरुआत
उन्होंने अपने हाथ से मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया जो पहले से ही खड़ा हो चुका था। “वाह, कितना मोटा और कड़ा है तुम्हारा,” वो फुसफुसाईं, “मुझे ऐसे ही लंड की तलाश थी। मेरे पति का बहुत छोटा है और वो महीने में एक बार भी नहीं करते।”
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मैंने भी हिम्मत करके उनकी चूचियों पर हाथ रख दिया। वो गरम और नरम थीं। मैंने ब्लाउज के ऊपर से ही उन्हें दबाना शुरू कर दिया। उनकी सांसें तेज हो गईं।
“आह्ह… हां… ऐसे ही दबाओ… बहुत दिनों से किसी ने नहीं छुआ,” वो कराहने लगीं।
मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे बटन खुले और उनकी सफेद ब्रा दिखने लगी जो उनकी भारी चूचियों को संभाले हुए थी। मैंने पीछे से हुक खोला और ब्रा हटा दी। उनकी चूचियां आजाद हो गईं – गोल, गुलाबी निप्पल वाली, और बिल्कुल तरोताजा।
मैंने एक चूची मुंह में ले ली और चूसने लगा। “ऊह्ह… हां… और जोर से… अह्ह…” वो सिसकने लगीं और मेरे सिर को अपनी चूची पर दबाने लगीं।
मेरे एक हाथ उनके पेटीकोट में घुस गया और उनकी चूत को सहलाने लगा। वो पहले से ही गीली थी। मैंने उंगली अंदर डाली तो वो चिल्लाईं, “ओह्ह… हां… और अंदर… अपनी उंगली अंदर बाहर करो…”
मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनका पेटीकोट ऊपर उठाया। उनकी सफेद पैंटी में से उनकी चूत का उभार साफ दिख रहा था। मैंने पैंटी एक तरफ की और चूत को चाटने लगा।
“ओह्ह राहुल… हां… चाटो मेरी चूत… बहुत गीली है… अह्ह… हां… जीभ अंदर डालो…” वो पागल हो रही थीं।
मैंने उनकी चूत को अच्छे से चाटा। उनकी चूत थोड़ी बड़ी थी, भाभी थी ना, अनुभवी औरत थीं। मैंने अपनी जीभ उनकी योनि में घुसा-घुसा कर चोदा। वो बुरी तरह तड़प रही थीं।
“अब डाल दो राहुल… अपना लंड डाल दो… मुझे और सहन नहीं हो रहा…” वो भीख मांगने लगीं।
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मैंने अपनी पैंट उतारी और लंड बाहर निकाला। मेरा लंड 7 इंच का था और काफी मोटा। उन्होंने देखते ही कहा, “वाह… कितना सुंदर लंड है… इतना बड़ा तो मैंने आज तक नहीं देखा…”
मैंने उनके पैर फैलाए और लंड को चूत के मुहाने पर रखा। एक जोर से धक्का दिया और पूरा लंड अंदर समा गया।
“उई मां… कितना मोटा है… अह्ह… धीरे… धीरे करो…” वो चीखीं लेकिन मुझे कसकर पकड़ लिया।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले तो वो दर्द से कराह रही थीं लेकिन फिर मजा आने लगा।
“हां… अब तेज करो… चोदो मुझे… अपनी भाभी को चोदो… बहुत दिनों से चूत नहीं चुदी… हरामी… और तेज…” वो अश्लील बोलने लगीं।
मैंने स्पीड बढ़ा दी। बिस्तर की कड़कड़ाहट गूंजने लगी। उनकी चूचियां उछल-उछल कर मुझे उत्तेजित कर रही थीं। मैंने एक चूची मुंह में ले ली और चूसते हुए चोदना जारी रखा।
“अह्ह… हां… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… ओह्ह… मैं गई… मैं झड़ने वाली हूं…” वो चिल्लाईं और उनका शरीर कांपने लगा।
उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया जो मेरे लंड को और चिकना बना रहा था। मैंने उन्हें झड़ने दिया और फिर से चोदना शुरू किया। इस बार और तेज़।
“अब मैं पीछे से चोदता हूं,” मैंने कहा और उन्हें घोड़ी बना दिया।
उनकी गांड बहुत बड़ी और मोटी थी। मैंने उनके कूल्हों को पकड़ा और लंड पीछे से चूत में घुसा दिया। इस एंगल से और ज्यादा गहराई तक जा रहा था।
“ओह्ह… हां… यही तो चाहिए था… गहराई तक… अह्ह… मेरी चूत का कचूमर निकाल दो…” वो चीख रही थीं।
मैंने लगभग 15 मिनट तक उन्हें इसी पोजीशन में चोदा। फिर मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं।
“भाभी… मैं झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।
“अंदर ही छोड़ दो… कोई बात नहीं… मैं गोली खा लूंगी… बस अंदर ही डालो अपना प्यार…” वो बोलीं।
मैंने जोर से धक्का दिया और अपना सारा वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया। गरम गरम माल उनकी चूत में भर गया। मैं उनके ऊपर गिर गया और दोनों हांफने लगे।
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“बहुत मजा आया राहुल… तुम बहुत अच्छा चोदते हो…” वो मुस्कुराईं और मेरे होठों पर किस कर ली।
भाग 3: शादी की रात का खास कार्यक्रम
अगले दिन शादी थी। पूरा घर रोशनी से जगमगा रहा था। मैं और प्रियंका भाभी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे। कोई नहीं जानता था कि रात को हम दोनों क्या कर रहे थे।
शादी की रात को जब दूल्हा-दुल्हन मंडप में बैठे थे तो मैंने देखा कि प्रियंका भाभी मुझे इशारा कर रही थीं। उन्होंने एक कमरे की तरफ इशारा किया। मैं समझ गया।
जब सब व्यस्त थे तो मैं चुपचाप उस कमरे में गया। थोड़ी देर में भाभी भी आ गईं। इस बार उन्होंने लाल रंग की साड़ी पहनी थी जो बहुत सेक्सी लग रही थी।
“क्या पहनकर आई हो भाभी… बहुत खूबसूरत लग रही हो,” मैंने कहा।
“तुम्हारे लिए ही तो पहना है,” वो मेरे पास आईं और मेरे लंड को सहलाने लगीं, “कल रात बहुत मजा आया। आज और मजा दोगे?”
“जरूर भाभी,” मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और किस करने लगा।
हम दोनों कमरे में बने सोफे पर बैठ गए। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा और उनके ब्लाउज को चूमने लगा। वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं।
“आज कुछ अलग करते हैं,” वो बोलीं, “आज मैं तुम्हें अपनी गांड चुदवाऊंगी। मेरे पति ने कभी नहीं की। मुझे हमेशा से करवाने का मन था।”
मैं थोड़ा चौंका लेकिन राजी हो गया। “ठीक है भाभी, लेकिन पहले तैयारी करनी होगी।”
मैंने उन्हें सोफे पर घुटनों के बल बैठने के लिए कहा। उनकी गांड हवा में थी। मैंने उनका पेटीकोट ऊपर उठाया और पैंटी नीचे की। उनकी गोरी गांड देखकर मेरा लंड और कड़क हो गया।
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मैंने पहले उनकी गांड को चाटना शुरू किया। जीभ से गोल-गोल घुमाकर चाट रहा था। “ओह्ह… हां… अजीब सा लग रहा है… मजा आ रहा है…” वो कराह रही थीं।
मैंने उंगली पर थूक लगाया और धीरे से गांड में डाली। वो तड़पीं लेकिन मुझे रोकने की बजाय और पीछे को दबाने लगीं। मैंने उंगली अंदर-बाहर करके उनकी गांड को ढीला किया।
फिर मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और उनकी गांड के छेद पर रखा। धीरे से दबाव डाला। लंड का सिरा अंदर घुस गया।
“आह्ह… धीरे… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है…” वो चीखीं।
मैंने रुककर उनकी कमर सहलाई और फिर धक्का दिया। आधा लंड अंदर चला गया।
“उई मां… क्या मोटाई है… मेरी गांड फट जाएगी…” वो सांसें तेज कर रही थीं।
मैंने थोड़ी देर रुककर उनकी चूत को सहलाया और फिर एक जोर का धक्का दिया। पूरा लंड अंदर समा गया।
“ओह्ह… हां… अब अच्छा लग रहा है… चोदो… अपनी भाभी की गांड चोदो…” वो अब मजे लेने लगी थीं।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। गांड बहुत टाइट थी और मजा बहुत आ रहा था। उनकी गांड की गर्मी मेरे लंड को और उत्तेजित कर रही थी।
“हां… और तेज… गांड मारो मेरी… हरामी… और जोर से…” वो अश्लील गालियां दे रही थीं।
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मैंने स्पीड बढ़ा दी। सोफे की कड़कड़ाहट और हमारी आवाजें मिलकर एक सेक्सी संगीत बना रही थीं। मैंने एक हाथ से उनकी चूचियां भी दबानी शुरू कर दीं।
“अह्ह… मैं झड़ने वाली हूं… तुम भी निकालो अपना माल…” वो चिल्लाईं।
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाए और फिर अपना वीर्य उनकी गांड में ही छोड़ दिया। गरम माल उनकी गांड को भर गया। हम दोनों थक कर सोफे पर गिर गए।
भाग 4: बारात में मस्ती
शादी के बाद बारात वापस आई। रात को जब सब सो गए तो मैं और प्रियंका भाभी छत पर मिले। छत पर ठंडी हवा चल रही थी और चांदनी रात थी।
“आज कुछ और करें?” भाभी ने पूछा।
“क्या?” मैंने पूछा।
“आज मैं तुम्हें अपना पूरा बदन दिखाना चाहती हूं। खुले आसमान के नीचे चुदवाऊंगी,” वो बोलीं और अपनी साड़ी उतारने लगीं।
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मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। हम दोनों नंगे छत पर खड़े थे। मैंने उन्हें अपनी बाहों में उठाया और एक कुर्सी पर बैठने के लिए कहा।
वो कुर्सी पर बैठ गईं और मैं उनके सामने खड़ा हो गया। उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और मुंह में ले लिया। “ओह्ह… क्या स्वाद है…” वो बोलीं और चूसने लगीं।
वो पूरा लंड मुंह में लेकर चूस रही थीं। जीभ से लंड को चाट रही थीं और फिर अंडकोष चूम रही थीं। मेरा लंड पूरी तरह कड़क था।
“अब तुम मेरी चूत चाटो,” वो उठकर कुर्सी पर लेट गईं और पैर फैला दिए।
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मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया। चांदनी में उनका बदन चांदी की तरह चमक रहा था। मैंने उनकी चूत में उंगली भी करनी शुरू कर दी।
“हां… और अंदर… अपनी उंगली अंदर डालो… अह्ह…” वो कराह रही थीं।
मैंने उन्हें कुर्सी पर ही घोड़ी बनाया और पीछे से लंड चूत में डाल दिया। “ओह्ह… हां… यही तो चाहिए था…” वो बोलीं।
मैंने उन्हें कुर्सी पर ही चोदना शुरू किया। हर धक्के पर कुर्सी थोड़ी आगे सरक रही थी। मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाए।
“और तेज… मेरी चूत को रगड़ो… अह्ह… हां…” वो चिल्ला रही थीं।
चांदनी रात में, खुले आसमान के नीचे, अपनी भाभी को चोदने का मजा ही कुछ और था। मैंने लगभग 20 मिनट तक उन्हें चोदा और फिर उनकी चूत में ही अपना माल छोड़ दिया।
भाग 5: सुबह का कार्यक्रम
अगली सुबह जब सब उठे तो हम दोनों एकदम नॉर्मल दिख रहे थे। लेकिन मेरे और प्रियंका भाभी के बीच एक अलग सी समझ बन चुकी थी।
सुबह नहाने के समय जब सब नहा चुके तो भाभी ने मुझे बाथरूम में बुलाया। वो पहले से ही नंगी थीं और शावर के नीचे खड़ी थीं।
“आजाओ, साथ में नहाते हैं,” वो बोलीं।
मैंने भी कपड़े उतारे और शावर में घुस गया। गरम पानी नीचे बह रहा था और हम दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे।
मैंने उनके बदन पर साबुन लगाया। पहले उनकी पीठ फिर चूचियां और फिर चूत। वो मेरे लंड पर साबुन लगा रही थीं।
“अब इसे अंदर डालो,” वो मुड़कर शावर की दीवार से सट गईं और अपनी गांड मेरे लंड की तरफ की।
मैंने लंड को चूत पर सेट किया और एक धक्का दिया। गीली चूत में लंड आसानी से घुस गया। गरम पानी के नीचे चोदने का अलग ही मजा था।
“ओह्ह… हां… गरम पानी में चुदवाने का मजा ही अलग है…” वो बोलीं।
मैंने उन्हें शावर में ही चोदा। पानी की आवाज और हमारी आवाजें मिलकर एक सेक्सी माहौल बना रही थीं। मैंने उनकी चूचियां कसकर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाए।
“मैं झड़ने वाली हूं… और तेज…” वो चिल्लाईं।
मैंने स्पीड और बढ़ा दी और उनके साथ ही झड़ गया। हम दोनों पानी में ही थक कर एक-दूसरे से लिपट गए।
भाग 6: दोपहर का खेल
दोपहर को जब सब आराम कर रहे थे तो भाभी ने मुझे एक कमरे में बुलाया जो घर के पीछे था। वहां कोई नहीं आता था।
“आज मैं तुम्हें अपनी एक और ख्वाहिश बताना चाहती हूं,” वो बोलीं।
“क्या?” मैंने पूछा। शादी का महोल और अजनबी भाभी के साथ सुहागरात / हिंदी सेक्स स्टोरी
“मैं चाहती हूं कि तुम मुझे बांध कर चोदो। मुझे बीडीएसएम का शौक है लेकिन मेरे पति ने कभी नहीं किया,” वो शर्माते हुए बोलीं।
मैंने आस-पास देखा और एक रस्सी मिल गई। मैंने उनके हाथ बांध दिए बिस्तर के सिरहाने से।
“अब मैं जो करूंगा वो सहन करना होगा,” मैंने कहा।
वो उत्तेजित होकर मुस्कुराईं। मैंने उनकी आंखों पर पट्टी भी बांध दी। अब वो मेरी कैदी थीं।
मैंने उनके कपड़े फाड़े। हां, सीधे फाड़ दिए। उनकी साड़ी, ब्लाउज, सब कुछ। वो नंगी बिस्तर पर बंधी हुई थीं।
मैंने उनके बदन पर धीरे-धीरे अपनी उंगलियां फेरनी शुरू की। गर्दन से लेकर चूचियों तक, फिर पेट से होते हुए चूत तक। वो कांप रही थीं। शादी का महोल और अजनबी भाभी के साथ सुहागरात / हिंदी सेक्स स्टोरी
“प्लीज… अब चोदो… मुझे और सहन नहीं हो रहा…” वो भीख मांग रही थीं।
मैंने उनकी चूत पर थप्पड़ मारा। “अभी नहीं, पहले मजा लेने दो,” मैंने कहा।
मैंने उनकी चूचियों पर थप्पड़ मारे। हल्के-हल्के। वो दर्द और मजे की कराहीं भर रही थीं।
फिर मैंने उनकी चूत चाटनी शुरू की। बंधी हुई औरत को चाटने का मजा ही कुछ और था। वो पागल हो रही थीं लेकिन कर भी कुछ नहीं सकती थीं।
“ओह्ह… हां… और जोर से… प्लीज… अब डाल दो…” वो रोने लगीं थीं।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उनके मुंह पर रगड़ा। “चूसो इसे,” मैंने आदेश दिया।
उन्होंने खुशी-खुशी मुंह खोला और लंड चूसना शुरू कर दिया। बंधी हुई हालत में वो और भी ज्यादा उत्तेजित लग रही थीं।
मैंने उनके पैर फैलाए और लंड चूत पर रखा। एक जोर से धक्का और पूरा अंदर।
“उई मां… हां… और तेज… मारो मुझे…” वो चिल्लाईं।
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाए। उनकी चूचियां इतनी तेज हिल रही थीं कि देखने में ही मजा आ रहा था। मैंने उनके निप्पल कसकर दबाए।
“दर्द हो रहा है… हां… और दबाओ… मजा आ रहा है…” वो पागल हो रही थीं।
मैंने लगभग आधे घंटे तक उन्हें बंधी हुई हालत में चोदा। फिर मैंने उनकी गांड में उंगली करनी शुरू कर दी।
“नहीं… गांड मत मारो… बहुत दर्द होगा…” वो डरी।
“चुप,” मैंने कहा और उंगली अंदर डाल दी।
थोड़ी देर उंगली करने के बाद मैंने लंड भी गांड में डाल दिया। वो चीखीं लेकिन पट्टी बंधी होने की वजह से कोई नहीं सुन पाया।
“ओह्ह… धीरे… मेरी गांड फट जाएगी…” वो रो रही थीं। शादी का महोल और अजनबी भाभी के साथ सुहागरात / हिंदी सेक्स स्टोरी
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए और फिर स्पीड बढ़ा दी। उनकी गांड अब ढीली हो चुकी थी और वो भी मजे लेने लगी थीं।
“हां… अब अच्छा लग रहा है… और तेज… गांड मारो…” वो बोलीं।
मैंने दोनों छेदों को बारी-बारी से चोदा। पहले चूत फिर गांड। वो पूरी तरह से मेरी हो चुकी थीं।
जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने उनके मुंह में ही अपना माल छोड़ दिया। वो सब पी गईं।
भाग 7: शाम का ड्रामा
शाम को जब सब तैयार हो रहे थे विदाई के लिए तो मैं और भाभी एक आखिरी बार मिले। हम दोनों जानते थे कि ये आखिरी मौका है।
हम घर के पिछवाड़े के बगीचे में मिले। वहां एक पुराना टूटा हुआ कमरा था जहां कोई नहीं जाता था।
“आज मैं तुम्हें कुछ खास देना चाहती हूं,” भाभी ने कहा।
“क्या?” मैंने पूछा।
“मैं तुम्हें अपनी सबसे गंदी ख्वाहिश बताती हूं। मैं चाहती हूं कि तुम मुझे गंदगी में चोदो। मुझे गंदी बातें करो, गालियां दो, और मुझे रंडी की तरह चोदो,” वो कहने लगीं। शादी में भाभी को चोदा / हिंदी सेक्स कहानियाँ
मैं समझ गया कि वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी हैं और कुछ भी करवाने को तैयार हैं।
“ठीक है रंडी,” मैंने उन्हें पकड़ा, “आज मैं तुम्हें वो मजा दूंगा जो तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा।”
मैंने उनके कपड़े फाड़े। हां, सच में फाड़ दिए। उनकी साड़ी, ब्लाउज, सब कुछ मैंने फाड़ दिया। वो नंगी खड़ी थीं और मुझे चाहने वाली नजरों से देख रही थीं।
“क्या देख रही है रंडी? आज मैं तेरी इतनी गांड मारूंगा कि तू चल भी नहीं पाएगी,” मैंने गंदी बातें करनी शुरू कर दीं।
“हां… मारो… मुझे अपनी रखैल बना लो… मैं तुम्हारी रंडी हूं…” वो भी वैसी ही बातें कर रही थीं।
मैंने उन्हें जमीन पर घोड़ी बनाया। जमीन पर गंदगी थी लेकिन उन्हें वही चाहिए था। मैंने उनकी चूत में लंड डाला और जोर-जोर से धक्के लगाए।
“ओह्ह… हां… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो… रंडी की तरह चोदो मुझे…” वो चिल्ला रही थीं।
मैंने उनके बाल खींचे और पीछे से धक्के लगाए। उनकी गर्दन पीछे खिंची हुई थी और मैं उन्हें जानवरों की तरह चोद रहा था।
“अह्ह… हां… मैं गई… मैं झड़ने वाली हूं…” वो चिल्लाईं। शादी का महोल और अजनबी भाभी के साथ सुहागरात / हिंदी सेक्स स्टोरी
मैंने उन्हें झड़ने दिया और फिर उनकी गांड में लंड डाल दिया। इस बार बिना किसी तैयारी के।
“ओह्ह… मेरी गांड… फट गई…” वो चीखीं लेकिन मैंने नहीं रुका।
मैंने उनकी गांड में जोर-जोर से धक्के लगाए। उनकी गांड लाल हो चुकी थी लेकिन वो मजे ले रही थीं।
“हां… और तेज… मारो… मुझे रंडी की तरह चोदो… अपनी गुलाम बना लो…” वो पागल हो रही थीं।
मैंने उनके मुंह में उंगली डाली और उन्हें चाटने के लिए कहा। वो मेरी उंगली चाट रही थीं और मैं उनकी गांड मार रहा था।
फिर मैंने उन्हें लिटाया और उनके ऊपर चढ़ गया। उनकी चूचियां कसकर दबाईं और चूत में लंड डालकर चोदने लगा।
“देख रही है रंडी? तेरी चूत कैसे मार रहा हूं मैं?” मैंने पूछा।
“हां… देख रही हूं… बहुत मजा आ रहा है… और तेज… मेरी जान निकाल दो…” वो बोलीं।
मैंने उनके होठों को काटा और उनकी चूचियों पर दांत गड़ाए। वो दर्द से चीखीं लेकिन मजे भी ले रही थीं।
“अब मैं तेरे मुंह में अपना माल छोड़ूंगा और तू सब पी जाएगी,” मैंने कहा।
“हां… पिलाओ… अपना सारा पानी मेरे मुंह में डाल दो…” वो बोलीं।
शादी का महोल और अजनबी भाभी के साथ सुहागरात / हिंदी सेक्स स्टोरी
मैंने उनके मुंह में अपना लंड डाला और झड़ गया। वो सब कुछ पी गईं और मेरे लंड को चाट-चाटकर साफ किया।
भाग 8: रात का अंतिम कार्यक्रम
रात को जब सब सो गए तो हम दोनों एक आखिरी बार मिले। इस बार हम छत पर गए जहां पूरा चांदनी रात का नजारा था।
“कल मैं चली जाऊंगी,” भाभी ने कहा, “आज रात हमारी आखिरी रात है।”
मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। “मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूंगा भाभी,” मैंने कहा।
“मैं भी नहीं भूलूंगी राहुल। तुमने मुझे वो मजा दिया जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था,” वो मेरे सीने से लगी बोलीं।
हम दोनों ने कपड़े उतारे और नंगे छत पर लेट गए। ठंडी हवा चल रही थी लेकिन हम दोनों गर्मी से तप रहे थे।
मैंने उनके बदन को चूमना शुरू किया। पैरों के अंगूठे से लेकर ऊपर तक। उनकी जांघें, उनकी चूत, उनका पेट, उनकी चूचियां, सब कुछ मैंने चूमा।
शादी का महोल और अजनबी भाभी के साथ सुहागरात / हिंदी सेक्स स्टोरी
फिर मैंने उन्हें अपने ऊपर बैठने दिया। वो मेरे लंड पर बैठ गईं और खुद ही अंदर ले लिया।
“ओह्ह… कितना अच्छा लग रहा है…” वो मेरी आंखों में देखते हुए बोलीं।
मैंने उनकी कमर पकड़ी और ऊपर-नीचे करने लगा। वो खुद भी हिल रही थीं। हम दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे।
“मैं तुमसे प्यार करती हूं राहुल,” भाभी ने कहा।
“मैं भी तुमसे प्यार करता हूं भाभी,” मैंने जवाब दिया।
ये सिर्फ शारीरिक प्यार नहीं था, ये दो आत्माओं का मिलन था। हम दोनों एक-दूसरे को समझते थे।
मैंने उन्हें घुमाया और अब मैं ऊपर आ गया। मैंने उनके पैर फैलाए और धीरे से लंड डाला। इस बार बहुत प्यार से, बहुत धीरे।
“ओह्ह… हां… ऐसे ही… बहुत मजा आ रहा है…” वो बोलीं।
शादी में भाभी को चोदा / हिंदी सेक्स कहानियाँ
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए। हर धक्के के साथ मैं उनके होठों को चूमता। वो मेरे पीठ पर नाखुन गड़ा रही थीं।
“तुम बहुत अच्छे हो राहुल… मुझे ऐसा मर्द चाहिए था…” वो बोलीं।
मैंने स्पीड थोड़ी बढ़ा दी। अब मेरे धक्के तेज हो रहे थे लेकिन फिर भी प्यार भरे थे।
“मैं झड़ने वाली हूं… राहुल… मेरे साथ झड़ो…” वो बोलीं।
मैंने और तेज धक्के लगाए और उनके साथ ही झड़ गया। हम दोनों एक-दूसरे में समाए हुए थे और एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे।
भाग 9: अलविदा
अगली सुबह जब मैं उठा तो भाभी जा चुकी थीं। उन्होंने एक चिट्ठी छोड़ी थी जिसमें लिखा था:
“प्यारे राहुल,
तुम्हें ये चिट्ठी मिलेगी तो मैं जा चुकी हूंगी। मैं तुम्हें बता नहीं सकती कि तुमने मुझे क्या दिया है। वो रातें, वो पल, वो मजे, वो सब कुछ मैं जिंदगी भर याद रखूंगी।
मैं जानती हूं कि हम एक नहीं हो सकते। मैं शादीशुदा हूं और तुम्हारी भाभी हूं। लेकिन जो कुछ भी हुआ, वो हमारे बीच रहेगा।
कभी भी तुम्हें मेरी याद आए, तो याद रखना कि कोई है जो तुमसे बहुत प्यार करती है।
शादी में भाभी को चोदा / हिंदी सेक्स कहानियाँ
तुम्हारी प्रियंका”
मैंने वो चिट्ठी पढ़ी और मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैंने उसे अपने पास रख लिया।
उस शादी ने मुझे कुछ यादगार पल दिए जो मैं कभी नहीं भूल सकता। प्रियंका भाभी ने मुझे सेक्स का असली मतलब समझाया और प्यार का भी।
आज भी जब कभी मैं किसी शादी में जाता हूं तो मुझे वो पल याद आते हैं। वो अजनबी भाभी जो मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गईं, कभी नहीं भूलूंगा मैं उन्हें।
दोस्त अगर आपको मेरी कहानी जो मैंने इतना समय लगा के आपके लिए लिखी है अगर आपको पसंद आ रही है तो मुझे मेल vikasgoel4952@gmail.com जरूर करें इसे मेरी कहानी लिखने की हिम्मत बढ़ती है
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