
लिफ्ट से बेडरूम तक लंड का रास्ता
गुड़गांव की एक बड़ी कॉर्पोरेट इमारत की 12वीं मंजिल पर रात के साढ़े आठ बजे का सन्नाटा धीरे-धीरे पसरने लगा था। पूरे दिन की भागादौड़ी, कंप्यूटर स्क्रीन की नीली रोशनी और क्लाइंट्स की लगातार कॉल के बाद पूजा का सिर भारी हो चुका था। उसने अपनी टेबल पर बिखरी फाइलों को समेटा, लैपटॉप बंद किया और अपना बैग कंधे पर टांग लिया। हर मंडे की तरह आज का दिन भी बेहद थकाऊ था। लिफ्ट से बेडरूम तक लंड का रास्ता
पूजा की उम्र करीब 26 साल की थी, गोरे रंग पर गुलाबी गाल, लंबे काले बाल जो कंधे से नीचे लहराते थे, और वो आंखें… भूरी आंखें जिनमें एक अजीब सी चमक थी। आज उसने हल्की सी पारदर्शी सफेद कमीज पहनी थी जिसके अंदर एक गहरे रंग की लेस वाली ब्रा की झलक मिल रही थी। नीचे उसने स्किन टाइट काली पेंट पहनी थी जो उसके गोल गोल चूतड़ों को बखूबी निचोड़ रही थी और उसकी चूत की फांकों का आकार साफ झलक रहा था। उसकी कमर इतनी पतली थी कि हाथ रखते ही उंगलियां उसे पूरी घेर लें, और ऊपर से उसके मोटे मोटे दूध जैसे स्तन कमीज के अंदर उभार ले रहे थे, निप्पल हल्के से खड़े होकर कपड़े को चुभो रहे थे।
उसी वक्त, फ्लोर के दूसरे कोने से कबीर भी अपने केबिन से बाहर निकला। कबीर आईटी डिपार्टमेंट में सीनियर कोडर था, 28 साल का, लंबा चौड़ा, रंग गेहरा, और उसके पैंट के अंदर एक ऐसा लंड था जिसकी साइज़ की अफवाह पूरी ऑफिस में थी। दोनों एक ही फ्लोर पर काम करते थे, लेकिन पिछले 6 महीनों में उनके बीच बातचीत सिर्फ एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराने या औपचारिक “हाय” तक सीमित थी, हालांकि कबीर हमेशा पूजा के उभरे हुए स्तनों और उसके चलते हुए चूतड़ों को घूरता था।
पूजा लिफ्ट का बटन दबाकर खड़ी थी। तभी कबीर भी आकर उसके बगल में खड़ा हो गया। उसकी आंखें पहले पूजा के चेहरे पर गईं, फिर धीरे से उसके गले के नीचे उतरकर उसके उभरे हुए बूब्स पर टिक गईं। वो सफेद कमीज के अंदर से ब्रा की लेस और स्तनों का गोल आकार साफ देख सकता था। लिफ्ट से बेडरूम तक लंड का रास्ता
“हाय पूजा, आज काफी लेट हो गया?” कबीर ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा, उसकी नजरें अब भी पूजा के उभार पर थीं।
“हां कबीर, आज मंडे था तो कॉल्स बहुत ज्यादा थीं,” पूजा ने अपनी थकी हुई आँखों से देखकर कहा, उसने नोटिस किया कि कबीर उसके बूब्स को घूर रहा है, और अंदर ही अंदर उसकी चूत में एक अजीब सी गर्माहट महसूस हुई।
लिफ्ट का दरवाज़ा खुला और दोनों अंदर चले गए। लिफ्ट 12वीं मंजिल से नीचे जाने लगी—10… 8… 6… और तभी एक जोरदार झटका लगा। गड़गड़ाहट की आवाज़ हुई और लिफ्ट बीच में ही रुक गई। अगले ही पल सीलिंग की लाइट झिलमिलाई और पूरी तरह बुझ गई।
अचानक हुए अंधेरे से पूजा घबरा गई। “यह क्या हुआ? कबीर?” उसकी आवाज़ में डर साफ़ था, और वो अनजाने में कबीर की तरफ मुड़ गई, उसका हाथ कबीर की छाती से टकराया।
“घबराओ मत पूजा, शायद लाइट चली गई है,” कबीर ने बहुत शांत आवाज़ में कहा और तुरंत अपने फोन की टॉर्च ऑन की। रोशनी सीधे पूजा के डरे हुए चेहरे पर पड़ी, और कबीर की नजरें नीचे उसकी कमीज के बटन के बीच से झांकती हुई उसकी गहरी क्लीवेज पर टिक गईं। वो गोरा गोरा मांस, थोड़ी सी पसीने से चमक रहा था। कबीर ने बहुत नरमी से कहा, “मैं यहीं हूँ, डरने की कोई बात नहीं,” और कहते ही उसका हाथ पूजा की कमर पर आकर रुक गया।
20 मिनट बीत गए, पर लिफ्ट नहीं हिली। गर्मी और उमस बढ़ने लगी थी। पूजा को घबराहट में पसीना आने लगा, उसकी कमीज गीली होकर और भी पारदर्शी हो गई, अब उसकी गुलाबी निप्पल साफ दिख रही थीं, ब्रा की लेस के ऊपर से भी उनका सख्त आकार झलक रहा था। कबीर ने बड़े प्यार से अपनी पानी की बोतल निकाली और ढक्कन खोलकर उसकी तरफ बढ़ा दी। जब पूजा ने बोतल ली, तो उसकी उंगलियाँ कबीर के हाथ से छू गईं। उस एक स्पर्श ने अंधेरे कमरे में दोनों के दिलों की धड़कनें तेज़ कर दीं।
“तुम्हें गर्मी लग रही है,” कबीर ने धीरे से कहा, उसकी आंखें अब पूजा की गीली कमीज और उसके अंदर चिपकी हुई ब्रा पर थीं।
“बहुत,” पूजा ने कांपती आवाज में कहा, “कपड़े बिल्कुल गीले हो गए हैं,” और वो शर्माते हुए अपनी बाहों से अपने स्तनों को ढंकने की कोशिश की, लेकिन वो और भी उभार दे रही थी। लिफ्ट से बेडरूम तक लंड का रास्ता
कबीर का हाथ धीरे से आगे बढ़ा और उसने पूजा की कमीज का एक बटन खोल दिया। “ऐसे रहो, थोड़ी हवा लगेगी,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। अब पूजा की गहरी क्लीवेज पूरी तरह दिख रही थी, दोनों स्तन एक-दूसरे से सटे हुए, बीच में वो गहरी लाइन जिसमें कबीर अपनी जीभ डालना चाहता था।
अगले आधे घंटे में, उस बंद लिफ्ट ने दोनों के बीच की झिझक मिटा दी। दोनों फर्श पर पास-पास बैठकर बातें करने लगे। पूजा के पैर थोड़े फैले हुए थे, और कबीर ने नोटिस किया कि उसकी पेंट की जिप के पास एक गीला धब्बा बन रहा था – वो चूत से पानी छोड़ रही थी, गरम हो चुकी थी।
कबीर ने अपना हाथ पूजा की जांघ पर रख दिया। “तुम्हारी जांघें बहुत नरम हैं,” उसने कहा और उसका हाथ धीरे-धीरे ऊपर बढ़ने लगा, पूजा की पेंट की जिप की तरफ।
पूजा ने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपने चूतड़ थोड़े उठा दिए, जैसे कबीर को आमंत्रित कर रही हो। कबीर ने बहुत धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाकर पूजा का हाथ थाम लिया और उसे अपने पैंट के ऊपर रख दिया। पूजा ने महसूस किया – एक मोटा, गर्म, सख्त लंड उसके हाथ के नीचे कांप रहा था, कम से कम 8 इंच लंबा और मोटाई में उसकी कलाई जितना।
“ओह…” पूजा की सांस फूल गई, उसकी चूत में पानी की धार बहने लगी।
पूजा ने भी अपनी उंगलियाँ कबीर की उंगलियों में फंसा दीं और उसके लंड को सहलाने लगी। कबीर ने उसकी ओर देखा, उसके चेहरे पर बिखरी बालों की लट को कान के पीछे किया और धीरे से आगे झुककर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वह पहला चुंबन बहुत ही धीमा था, लेकिन जल्दी ही कबीर ने अपनी जीभ पूजा के मुंह में डाल दी और उसके मसूड़ों, जीभ, और तालू को चाटने लगा। पूजा भी जवाब देने लगी, दोनों की लार एक-दूसरे में मिल रही थी। लिफ्ट से बेडरूम तक लंड का रास्ता
कबीर का हाथ अब पूजा की कमीज के अंदर था, उसने ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। वो मोटे मोटे गोलाइयां उसके हाथ में आ रही थीं, निप्पल सख्त होकर उंगलियों से टकरा रहे थे। “तुम्हारे बूब्स बहुत मस्त हैं, पूजा,” कबीर ने कहा और उसने एक हाथ से उसकी ब्रा नीचे कर दी, अब स्तन पूरी तरह बाहर थे, गोल, गोरे, और बीच में गुलाबी निप्पल खड़े हुए।
कबीर झुका और एक निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगा, दूसरे को उंगली और अंगूठे से मसल रहा था। पूजा की सिसकियां निकलने लगीं, “आह… कबीर… और जोर से…”
लगभग एक घंटे बाद जब मेंटेनेंस टीम ने लिफ्ट का दरवाज़ा खोला, तो दोनों बाहर आए। पूजा की कमीज के बटन ठीक से बंद थे लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी लाली थी, और कबीर का पैंट सामने से उभारा हुआ था। बाहर की ठंडी हवा ने उन्हें राहत दी। दोनों ने चाय की टपरी पर बैठकर चाय पी, लेकिन दोनों को ही अहसास था कि वे इस शाम को यहीं खत्म नहीं करना चाहते थे।
“पूजा, तुम काफी थकी हुई लग रही हो। मेरा फ्लैट पास ही में है, अगर तुम चाहो तो थोड़ी देर वहाँ चलकर आराम कर सकती हो,” कबीर ने हिचकिचाते हुए कहा, उसकी आंखों में वो हवस साफ झलक रही थी जो पूजा समझ गई।
पूजा ने कबीर की आँखों में देखा। वहाँ सिर्फ परवाह और सच्चाई नहीं, बल्कि एक लंड को चूत में घुसाने की बेकरारी थी। उसने मुस्कुराकर हाँ में सिर हिला दिया।
कबीर के फ्लैट में कदम रखते ही बाहर का सारा शोर गुम हो गया। कबीर ने हॉल की मद्धम पीली लाइट जलाई। माहौल में एक अजीब सा सुकून और गर्माहट थी। पूजा सोफे पर बैठ गई, अपने पैर क्रॉस करते हुए उसकी पेंट और उसके बीच की फांकों का आकार साफ दिख रहा था। कबीर उसके लिए पानी लेकर आया। पानी पीकर जब पूजा ने ग्लास साइड टेबल पर रखा, तो उसने कबीर की कलाई पकड़ ली और उसे अपनी तरफ खींचा, अपने बीच के पैर खोलते हुए। लिफ्ट से बेडरूम तक लंड का रास्ता
कबीर सोफे पर पूजा के ठीक बगल में बैठ गया। दोनों की निगाहें मिलीं। अब कोई लिफ्ट की मजबूरी नहीं थी, कोई अंधेरा नहीं था—वहाँ सिर्फ वे दोनों और उनके बीच की बेपनाह कशिश थी।
कबीर ने बहुत प्यार से पूजा के चेहरे को अपने हाथों के प्याले में भरा। “तुम बहुत खूबसूरत हो, पूजा,” उसने फुसफुसाते हुए कहा और उसका एक हाथ नीचे गया, पूजा की पेंट की जिप खोलने लगा।
पूजा ने मुस्कुराकर अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने चूतड़ उठाकर कबीर को अपनी पेंट उतारने में मदद की। अब वो सोफे पर सिर्फ एक सफेद लेस वाली पैंटी में बैठी थी, उसकी चूत की फांकों का आकार साफ झलक रहा था, पैंटी थोड़ी गीली हो चुकी थी। कबीर ने उसकी टांगें फैला दीं और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा।
“उफ… कबीर…” पूजा कराह उठी।
कबीर झुका और उसने पूजा के होंठों पर दोबारा अपने होंठ रख दिए। इस बार चुंबन में एक गहरा खिंचाव था। कबीर के होंठ पूजा के होंठों से होते हुए धीरे-धीरे उसकी ठुड्डी और गर्दन की तरफ बढ़ने लगे। पूजा की सांसें तेज़ होने लगीं और उसने कबीर के बालों में अपनी उंगलियाँ फंसा लीं। कबीर नीचे झुका, पूजा के कॉलर बोन को चूमा, फिर उसके स्तनों के बीच की लाइन में अपनी जीभ चलाने लगा।
पूजा ने कबीर की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। कबीर ने भी पूरी नज़ाकत और प्यार के साथ पूजा की कमीज उतार दी। अब पूजा सिर्फ एक लेस वाली ब्रा और पैंटी में थी, उसका गोरा बदन लाइट में चमक रहा था। कबीर ने उसकी ब्रा के हुक पीछे से खोल दिए और वो दोनों मोटे स्तन आजाद होकर बाहर आ गए, थोड़े नीचे झुके हुए लेकिन बहुत मोटे और नरम।
कबीर ने पूजा को अपनी बाहों में उठाया और बेडरूम की तरफ कदम बढ़ा दिए। बेडरूम में हल्की नीली नाइट लाइट जल रही थी। कबीर ने पूजा को बड़े प्यार से बेड पर लिटाया। अब पूजा पूरी तरह नंगी लेटी थी, उसके बाल बिखरे हुए, स्तन सांस लेते हुए ऊपर नीचे हो रहे थे, और उसकी चूत – गुलाबी, चिकनी, बिल्कुल साफ शेव की हुई, पैंटी उतारने के बाद वो खुलकर सामने थी, छोटी सी, लेकिन गहरी और पानी से तर। लिफ्ट से बेडरूम तक लंड का रास्ता
कबीर भी उसके पास ही लेट गया, अब वो भी सिर्फ अंडरवियर में था, उसका लंड पूरी तरह खड़ा होकर उसके अंडरवियर को एक तंबू की तरह खींच रहा था। कबीर का एक हाथ पूजा की कमर पर था और दूसरा उसके गालों को सहला रहा था, फिर नीचे उतरकर उसके स्तनों को मसलने लगा।
पूजा ने कबीर को अपने और करीब खींच लिया। दोनों फिर से एक-दूसरे को चूमने लगे। इस बार चुंबन और गहरा और उतावला था। कबीर के होंठ पूजा के होंठों, गालों और उसकी गर्दन पर अपनी मोहब्बत की छाप छोड़ रहे थे। पूजा के मुंह से एक हल्की सी सिहरन भरी आह निकली।
कबीर नीचे झुका और पूजा के स्तनों को चूसने लगा, एक-एक करके दोनों निप्पलों को मुंह में लेकर काटता, चूसता, और जीभ से चटाता। पूजा बुरी तरह गरम हो चुकी थी, उसकी चूत से पानी की धार बह रही थी, उसने कबीर का सिर अपने स्तनों पर दबा रखा था।
फिर कबीर और नीचे गया, पूजा की नाभि को चूमा, फिर उसकी चूत के पास आ गया। उसने पूजा की टांगें फैला दीं, वो दोनों गुलाबी फांके खुली हुई थीं, बीच में छोटी सी चूत का छेद जो पानी से तर था। कबीर ने अपनी जीभ निकाली और पूजा की चूत के छेद पर चाटना शुरू कर दिया, ऊपर से नीचे तक, क्लिटोरिस को मुंह में लेकर चूसना, फिर अंदर की तरफ जीभ डालकर चूत के अंदर की दीवारों को चाटना।
“आह… हां… और अंदर… ओह कबीर… मैं मर जाऊंगी…” पूजा चीखने लगी, उसने बेडशीट को मुट्ठी में पकड़ लिया, उसकी कमर हवा में उठने लगी।
कबीर ने अपनी एक उंगली पूजा की चूत में डाल दी, वो आसानी से अंदर चली गई क्योंकि पूजा बहुत गीली थी। फिर दूसरी उंगली, और फिर तीसरी। तीन उंगलियां अंदर-बाहर होने लगीं, जबकि कबीर की जीभ उसके क्लिटोरिस को चूस रही थी।
पूजा का शरीर कांपने लगा, उसे ऐसा लगा जैसे पूरे शरीर में बिजली दौड़ रही है, और फिर एक जोरदार झटके के साथ वो झड़ गई, उसकी चूत से पानी की धार निकलकर कबीर के मुंह और हाथ पर गिरी।
कबीर ऊपर आया, उसका चेहरा पूजा के पानी से तर था। उसने अपना अंडरवियर उतार दिया और पूजा के सामने आ गया। उसका लंड देखकर पूजा की सांस रुक गई – वो करीब 8 इंच लंबा था, मोटाई में उसकी कलाई जितना, गहरे भूरे रंग का, और अंडे बड़े-बड़े लटक रहे थे। सुपारा बैंगनी होकर फूला हुआ था, और एक बूंद पानी की नोक से टपक रही थी।
“इतना बड़ा…” पूजा ने घबराते हुए कहा।
“डरो मत, मैं धीरे-धीरे करूंगा,” कबीर ने कहा और वो पूजा के ऊपर आ गया।
उसने पूजा की टांगें अपने कंधों पर रख लीं, उसकी चूत का छेद खुला हुआ था, अभी भी पानी से तर। कबीर ने अपने लंड का सुपारा पूजा की चूत के छेद पर रखा और धीरे से धक्का देना शुरू किया। लिफ्ट से बेडरूम तक लंड का रास्ता
“आह… दर्द हो रहा है…” पूजा कराही।
“बस थोड़ी देर, फिर मजा आएगा,” कबीर ने कहा और एक जोरदार धक्का दिया।
आधा लंड अंदर चला गया, पूजा की चूत फटी जा रही थी, वो इतनी मोटी थी कि उसकी दीवारें फैल रही थीं। कबीर ने रुककर उसके स्तनों को चूसना शुरू किया, फिर दूसरा धक्का दिया।
“ओह… माँ…” पूजा चीखी, पूरा लंड अंदर घुस चुका था, कबीर के अंडे उसकी गांड से टकरा रहे थे।
कबीर ने थोड़ी देर रुककर पूजा को ढालने का मौका दिया, फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज, फिर बहुत तेज। पूजा की चूत से आवाजें आने लगीं – फच… फच… फच… – क्योंकि वो बहुत गीली थी।
“और तेज… कबीर… चोदो मुझे… हां…” पूजा चिल्लाने लगी, वो अब पूरी तरह मजे में थी।
कबीर ने उसकी टांगें और फैला दीं और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा, उसका लंड पूरी तरह बाहर निकलकर फिर अंदर घुसता, पूजा की चूत की दीवारों को चौड़ा करता। दोनों के शरीर पसीने से तर हो गए, कबीर की कमर तेजी से हिल रही थी।
10 मिनट तक लगातार चोदने के बाद, कबीर ने अपना लंड बाहर निकाला। पूजा की चूत लाल हो गई थी, और उसमें से पानी और खून का मिश्रण बह रहा था।
“अब एक और जगह चोदना चाहता हूँ,” कबीर ने कहा।
“कहाँ?” पूजा ने पूछा।
“तेरी गांड में,” कबीर ने कहा और उसने पूजा को पेट के बल लेटा दिया।
पूजा के दोनों गोल गोल चूतड़ हवा में उठे हुए थे, बीच में उसकी गांड का छोटा सा छेद जो कसा हुआ था। कबीर ने अपने थूक से उसे चिकना किया, फिर अपने लंड पर भी थूक लगाया।
“पहली बार है, बहुत दर्द होगा, लेकिन मजा आएगा,” कबीर ने कहा और उसने अपने लंड का सुपारा पूजा की गांड के छेद पर रखा।
“धीरे से… प्लीज…” पूजा ने कहा।
कबीर ने धीरे से धक्का दिया, लेकिन गांड बहुत कसी थी, सुपारा अंदर नहीं जा रहा था। उसने थोड़ा जोर लगाया।
“आह… बहुत दर्द हो रहा है…” पूजा रोने लगी।
“बस थोड़ा सा,” कबीर ने कहा और एक जोरदार धक्का दिया।
सुपारा अंदर घुस गया, पूजा की गांड की दीवारें फटी जा रही थीं, वो इतनी मोटी थी कि उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। कबीर ने रुककर उसकी कमर सहलाई, फिर और अंदर धकेलना शुरू किया।
धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया, कबीर के अंडे पूजा की गांड से सटे हुए थे। उसने पूजा के बाल पकड़े और उसका सिर पीछे खींचा, फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया।
पहले तो पूजा को दर्द हो रहा था, लेकिन फिर उसे एक अजीब सा मजा महसूस हुआ, उसकी गांड की दीवारें कबीर के लंड को कस रही थीं, और हर धक्के पर एक गहरा आनंद मिल रहा था।
“ओह… यह तो बहुत मस्त है… और तेज करो…” पूजा ने कहा।
कबीर ने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए, उसका लंड पूजा की गांड में पूरी तरह घुसकर बाहर निकलता, फिर वापस। आवाजें तेज हो गईं – फच… फच… फच… – और कबीर की सांसें भी तेज हो गईं।
“मैं झड़ने वाला हूँ…” कबीर ने कहा।
“मेरे अंदर ही डाल दो…” पूजा ने कहा।
कबीर ने कुछ और जोरदार धक्के लगाए और फिर एक लंबी आवाज के साथ उसने अपना गर्म गाढ़ा माल पूजा की गांड में छोड़ दिया। वो झटके से झटके देकर झड़ता रहा, पूजा की गांड भर गई उसके वीर्य से।
थोड़ी देर बाद कबीर ने अपना लंड बाहर निकाला, पूजा की गांड से सफेद गाढ़ा तरल बहकर बेडशीट पर गिरा। कबीर पूजा के बगल में लेट गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
पूजा ने अपना हाथ नीचे किया और अपनी चूत को सहलाया, वो अभी भी गीली थी। कबीर ने देखा और फिर से उसके ऊपर आ गया, इस बार उसने अपने लंड को पूजा की चूत में डाला जो अभी भी गीली थी।
दूसरे राउंड में कबीर ने पूजा को कई तरीकों से चोदा – पीछे से, उसके ऊपर आकर, पूजा को अपने ऊपर बिठाकर। हर बार उसका लंड पूरी तरह अंदर घुसता और पूजा की चूत से पानी निकलता।
आखिर में, रात के करीब दो बजे, दोनों थककर एक-दूसरे की बाहों में सो गए। पूजा की चूत और गांड दोनों लाल हो गई थीं, और कबीर का लंड भी थोड़ा सूजा हुआ था, लेकिन दोनों के चेहरों पर संतुष्टि की मुस्कान थी। उस रात, दोनों ने एक-दूसरे के स्पर्श, चुंबन, और गर्माहट में अपनी सारी थकान, तन्हाई और चाहत उंडेल दी। वह एक ऐसा खुशनुमा और बेहद अंतरंग पल था जहाँ दो रूहें और दो शरीर पूरी तरह एक-दूसरे में सिमट गए, और दोनों ने एक-दूसरे को हर छेद में अपनी मोहर लगा दी।
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