
कैब ड्राइवर और कुंवारी लड़की की यादगार रात:- परिचय
मेरा नाम सचिन है, और ये कहानी मेरी जिंदगी की सबसे यादगार रात की है, जो मैं आज तक नहीं भूल पाया हूं। मैं दिल्ली में रहता हूं, और कुछ महीनों पहले पैसों की तंगी के चलते मैंने कैब चलाना शुरू किया था। दिन भर गाड़ी चलाना, अजनबी लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाना, यही मेरी दिनचर्या बन गई थी। लेकिन उस खास दिन ने मेरी जिंदगी ही बदल दी। कैब ड्राइवर और कुंवारी लड़की की यादगार रात
अगस्त की एक गर्म दोपहर थी, आसमान में धूप तेज थी और सड़कें तप रही थीं। मैं करोल बाग के इलाके में अपनी गाड़ी लेकर घूम रहा था, जब अचानक फोन पर एक नोटिफिकेशन आया। दिल्ली से इटावा की एक लंबी राइड, और पैसे इतने कि मेरी आंखें चौड़ी हो गईं। बिना सोचे-समझे मैंने वो राइड एक्सेप्ट कर ली, ये सोचकर कि आज तो अच्छी कमाई हो जाएगी।
पिकअप लोकेशन एक अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स था। मैंने गाड़ी वहां लगाई और इंतजार करने लगा। कुछ ही देर में मैंने देखा कि एक लड़की बाहर निकली, और जैसे ही मेरी नजर उस पर पड़ी, मेरा दिल सचमुच रुक सा गया। वो लगभग बाईस या तेईस साल की होगी, लेकिन उसकी खूबसूरती ऐसी थी कि शब्द कम पड़ जाएं। उसका रंग दूध जैसा गोरा, बिल्कुल चमकदार, जैसे कोई परी हो। काले लंबे बाल कमर तक आते थे, घने और रेशमी, हवा में उड़ते हुए ऐसे लग रहे थे जैसे काला बादल हो। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी, भूरी रंग की, कातिलाना आकर्षण वाली, जब वो पलकें झपकाती तो ऐसा लगता जैसे दिल को छू रही हो। नाक बिल्कुल सीधी और नुकीली, गालों पर गहरे डिंपल जो जब वो मुस्कुराती तो और भी गहरे हो जाते। उसके होठ गुलाबी, मुलायम, नींबू जैसे रसदार लग रहे थे, काटने का मन कर रहा था।
लेकिन सबसे ज्यादा जो मेरा ध्यान खींचा वो था उसका फिगर। उसने टाइट ब्लू जींस पहनी थी जिसमें उसके हिप्स बिल्कुल साफ उभरे हुए दिख रहे थे, गोल और उठे हुए, जैसे दो आड़ू हों। कमर इतनी पतली कि हाथ से घेर लो, शायद 26 इंच की होगी। ऊपर एक सफेद टॉप था जिसमें उसके बूब्स बिल्कुल सही शेप में उभरे हुए थे, साइज लगभग 34B, नीचे की तरफ थोड़ा उठा हुआ जोन। उसकी हाइट लगभग 5 फुट 6 इंच होगी, पैर लंबे और जांघें भरी हुई लेकिन बिल्कुल टोन, ऐसी लग रही थीं जैसे रोज जिम जाती हो। उसकी चाल में एक अलग ही ग्रेस थी, कमर इधर-उधर हिलती, हिप्स साइड से हिलते, बहुत सेक्सी अंदाज में चल रही थी। जब वो करीब आई तो उसके बदन से हल्की सी महक आई, इत्र और शरीर की प्राकृतिक खुशबू का मिश्रण, दिमाग घुमा देने वाली।
वो गाड़ी के पास आई और मेरी खिड़की पर झुकी। उसकी आवाज बहुत प्यारी थी, मीठी सी, “हाय, आप सचिन हो? मैं दिशी हूं।” मैंने हां में सिर हिलाया, लेकिन मेरी नजरें उसके क्लीवेज पर टिकी हुई थीं जो झुकने से थोड़ा साफ दिख रहा था, गोरा और मुलायम। वो पीछे की सीट पर बैठी और मैंने गाड़ी चलानी शुरू की, लेकिन मेरा मन तो बार-बार रियर व्यू मिरर में उसे देखने पर लगा था। वो अपने फोन में कुछ देख रही थी, कभी-कभी बालों को कान के पीछे करती, और मैं उसकी हरकतों को देखता रहता।
रास्ते में हमने एक ढाबे पर चाय पी। जब वो गाड़ी से उतरी तो मैंने उसे पहली बार पूरी तरह देखा। उसकी जींस इतनी टाइट थी कि उसकी जांघों की आकृति बिल्कुल साफ दिख रही थी, गोरी और चिकनी, ऐसी लग रही थीं जैसे मक्खन से नहाई हों। उसकी कमर और हिप्स का अनुपात बिल्कुल परफेक्ट था, पतली कमर से गोल हिप्स में अचानक उछाल, बहुत ही आकर्षक। चाय पीते समय जब वो कप को अपने होठों से लगाती तो मुझे उसके गुलाबी होठों को देखने का मौका मिलता, नरम और मुलायम दिख रहे थे। उसके हाथ भी बहुत सुंदर थे, पतली उंगलियां, सफेद और नरम, नाखून गुलाबी रंग के लगे हुए थे।
शाम होने लगी थी और हम आगरा के पास पहुंच चुके थे। अभी भी दो घंटे का सफर बाकी था। अचानक उसने मुझसे कहा कि उसके पास पूरे पैसे नहीं हैं। मैंने गाड़ी साइड में लगाकर पूछा क्या मतलब है, और वो बताने लगी कि वो अकेली है, किसी को नहीं जानती, और पैसे नहीं हैं। मैं गुस्से में था, इतनी दूर आया हूं, इतना डीजल खर्च हुआ है। मैंने कहा कि मुझे पैसे चाहिए, कोई रास्ता निकालो। तभी उसने कुछ ऐसा कहा जो सुनकर मैं स्तब्ध रह गया। वो बोली कि कुछ और ले-देकर मामला खत्म करो, और जब मैंने पूछा क्या मतलब, तो वो सीधे बोली कि आज मेरी चूत तुम्हारी।
मैं पहले तो डर गया, लगा कहीं कोई जाल तो नहीं, लेकिन फिर देखा कि वो सच में परेशान लग रही थी और रात भी होने वाली थी। मैंने नजदीक एक सुनसान जगह ढूंढी, आगरा-इटावा हाइवे पर एक पुराना बंद पड़ा रेस्ट हाउस था, आसपास खेत, कोई नहीं था। मैंने गाड़ी वहां ले गया। वो समझ गई कि मैं मान गया। वो पीछे से आगे की सीट पर आ गई, मेरे बगल में।
मैंने पहले उसका चेहरा अपने हाथों में लिया, इतना नरम और मुलायम था, जैसे कोई गुलाब की पंखुड़ी हो। धीरे से मैंने उसके गालों पर चूमना शुरू किया, फिर गर्दन पर आया। उसकी गर्दन बहुत लंबी और मुलायम थी, मैंने वहां किस किया तो वो हल्की सी सिसकी। मैंने उसके टॉप को ऊपर उठाना शुरू किया, उसने हाथ उठाकर मदद की। जब टॉप हटा तो अंदर एक काले रंग की लेस वाली ब्रा थी जो उसके गोरे बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी। मैंने उसके पेट को देखा, बिल्कुल सपाट, नाभि गहरी और गोल, कमर पतली जैसे किसी मॉडल की हो। मैंने उसकी कमर पर हाथ फेरा, वो कांप उठी। फिर मैंने उसकी ब्रा के हुक खोले, और जब ब्रा हटी तो मेरी सांसें थम गईं।
उसके बूब्स बिल्कुल गोल और टाइट थे, जैसे दो गोरे आम हों, साइज लगभग 34B, बिल्कुल सही शेप में, कोई सैग नहीं, बिल्कुल जवान और तरोताजा। निप्पल गुलाबी रंग के, छोटे-छोटे, खड़े हुए थे। मैंने धीरे से एक बूब्स को हाथ में लिया, इतना नरम और गर्म था, मक्खन जैसा। मैंने निप्पल को उंगलियों से मसलना शुरू किया, वो सिसकने लगी। फिर मैंने झुककर उसके निप्पल को मुंह में लिया और चूसने लगा, एक हाथ से दूसरे बूब्स को दबाते हुए। वो अपने हाथों से मेरे सिर को अपने चेस्ट पर दबाए जा रही थी, आंखें बंद करके मजे ले रही थी।
मैंने उसकी जींस खोलने की कोशिश की, उसने अपनी कमर उठाकर मदद की। जींस उतारी तो अंदर लाल रंग की लेस वाली पैंटी थी जो उसके गोरे बदन पर बहुत सेक्सी लग रही थी। उसकी जांघें देखकर मेरा मुंह खुला रह गया, इतनी गोरी और मुलायम, बिल्कुल चिकनी, ऐसा लग रहा था जैसे दूध से नहाई हों, एक भी बाल नहीं, इतनी साफ। मैंने उसके पैरों को चूमना शुरू किया, पैर की उंगलियों से शुरू करके टखनों तक, फिर जांघों तक। जैसे-जैसे मैं ऊपर बढ़ रहा था वो कांपती जा रही थी, उसकी सांसें तेज हो गई थीं। मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाया, वो गीली हो चुकी थी, पैंटी पर नमी दिख रही थी।
मैंने उसकी पैंटी नीचे खींची और जब उसकी चूत देखी तो मैं हैरान रह गया। बिल्कुल साफ, एक भी बाल नहीं, गुलाबी रंग की, छोटी-छोटी चूत के होठ, बिल्कुल कसी हुई, जैसे किसी बच्ची की हो। ये तो कुंवारी चूत थी, मैं समझ गया। मैंने पूछा कि क्या तुमने पहले कभी किया है, तो वो शर्माते हुए बोली कि नहीं, आज पहली बार। ये सुनकर मेरा दिल जोर से धड़का, इतनी खूबसूरत लड़की, इतना बढ़िया फिगर, और कुंवारी चूत, मैं खुद को भाग्यशाली समझने लगा।
मैंने उसे गाड़ी की पिछली सीट पर लेटाया, टांगें फैलाईं। वो शर्म से अपना मुंह हाथ से ढकने लगी। मैंने उसकी चूत को देखा, इतनी प्यारी और मासूम लग रही थी, गुलाबी होठ, छोटी सी क्लिटोरिस ऊपर दिख रही थी। मैंने उसकी जांघों को चूमना शुरू किया, अंदर की तरफ, उसकी चूत के पास। फिर धीरे से मैंने उसकी चूत के होठों पर जीभ फेरनी शुरू की। वो पागल होने लगी, आंखें बंद करके सिर हिलाने लगी। मैंने उसकी क्लिटोरिस को जीभ से चूसना शुरू किया, वो अपनी कमर हवा में उठाने लगी। मैंने एक उंगली अंदर डालने की कोशिश की, बहुत टाइट थी, लेकिन गीली होने के कारण अंदर चली गई। वो दर्द से चीखी, उई माँ, दर्द हो रहा है। मैंने उंगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर करनी शुरू की, साथ में चूत चाटता रहा। उंगली करते समय मुझे एक रुकावट महसूस हुई, ये तो हymen था, ये सच में कुंवारी थी। मैंने उंगली से हल्के से उसे छुआ, वो और तेज चीखी। मैंने उसे चूत चाटते हुए और उंगली करते हुए कुछ देर तक किया, फिर वो झड़ गई, उसका पूरा बदन कांपने लगा, पैर सीधे हो गए, आंखें बंद करके वो सिसकती रही।
अब मेरी बारी थी। मैंने अपने कपड़े उतारे, मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था, लगभग सात इंच लंबा और काफी मोटा, नसें फूली हुई, लाल हो चुका था। जब उसने मेरा लंड देखा तो थोड़ा डर गई, इतना बड़ा, मुझे दर्द होगा। मैंने उसे समझाया कि डरो मत, धीरे-धीरे हो जाएगा, पहली बार थोड़ा दर्द होता है फिर मजा आता है। मैंने उसे बैठाया और अपना लंड उसके मुंह के पास किया। पहले तो वो हिचकिचाई, लेकिन फिर धीरे से मुंह में ले लिया। उसके मुंह की गर्मी महसूस हो रही थी, वो चूसने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अनुभव नहीं होने के कारण दांत लग रहे थे। मैंने उसे समझाया कि दांत मत लगाओ, होंठों से दबाकर चूसो। धीरे-धीरे वो सीख गई, उसने मेरे लंड को अपने मुंह में पूरा लेने की कोशिश की, लेकिन पूरा नहीं जा पा रहा था, आधा ही अंदर जा रहा था। वो जीभ से सुपाड़े को चाट रही थी, मजा आ रहा था, लेकिन मैंने उसे रोक दिया क्योंकि मुझे उसकी कुंवारी चूत चोदनी थी।
मैंने उसे गाड़ी की पिछली सीट पर लेटाया, नीचे कंबल बिछाया था। उसकी टांगें फैलाईं, वो पूरी तरह नंगी लेटी हुई थी, उसका गोरा बदन चांदनी में चमक रहा था। मैं उसके ऊपर आ गया, उसके बूब्स मेरे चेस्ट से टकरा रहे थे। मैंने उसके होठों पर किस किया, फिर उसके गालों पर, गर्दन पर, बूब्स पर। मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुहाने पर टिका, गीला और गरम। वो कांप रही थी, आंखों में डर और उत्सुकता दोनों थे। मैंने धीरे से धक्का लगाया, सुपाड़ा अंदर गया, इतनी टाइट थी कि लंड को जकड़े हुए थी, मजा आ रहा था। वो दर्द से चीखी, आह्ह्ह, धीरे, बहुत दर्द हो रहा है, निकालो। मैंने रुककर उसके बूब्स को सहलाया, चूमा, उसके निप्पलों को चूसा। कुछ देर बाद फिर से धक्का लगाया, थोड़ा और अंदर गया। वो रोने लगी, आंखों से आंसू आ गए, लेकिन मैंने उसे चुप किया, बस थोड़ी देर और, फिर मजा आएगा। मैंने उसके होठों को किस करते हुए धीरे-धीरे अंदर डालता रहा, थोड़ा-थोड़ा करके। जब आधा लंड अंदर गया तो मुझे एक रुकावट महसूस हुई, ये उसकी कुंवारी चूत की दीवार थी। मैंने एक जोरदार धक्का लगाया, वो जोर से चीखी, आह्ह्ह, मर गई, निकालो इसे, बहुत दर्द हो रहा है। लंड पूरी तरह अंदर घुस गया, और मुझे लगा कि कुछ गर्म-गर्म लिक्विड मेरे लंड पर लगा, ये उसका खून था, उसकी कुंवारी चूत का खून। मैंने रुककर उसे देखा, वो रो रही थी, आंखें बंद किए हुए, सांसें तेज चल रही थीं। मैंने उसके आंसू पोंछे, उसे चूमा, शांत किया। कुछ देर ऐसे ही रुका रहा, लंड पूरी तरह अंदर डाले हुए, उसकी टाइट चूत मेरे लंड को चिपटे हुए थी, बहुत मजा आ रहा था।
कुछ देर बाद जब वो शांत हुई तो मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। शुरू में वो दर्द से कराहती रही, आह्ह्ह, धीरे करो, बहुत दर्द है। लेकिन धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा और वो भी मजे लेने लगी। दस मिनट बाद वो बोली, अब अच्छा लग रहा है, और तेज करो। मैंने स्पीड बढ़ाई, अब पूरा लंड बाहर निकालकर फिर से जोर से अंदर मारता, थप-थप-थप की आवाज गाड़ी में गूंज रही थी। वो अपनी कमर उठाकर मेरा साथ दे रही थी, आंखें बंद करके मजे ले रही थी। मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और और गहराई से चोदना शुरू किया। उसकी कुंवारी चूत अब पूरी तरह खुल चुकी थी, लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था, खून और पानी का मिश्रण मेरे लंड पर लग रहा था, लेकिन ये और भी स्मूथ बना रहा था। वो अब पूरी तरह खुल चुकी थी, बोल रही थी, हां, हां, मारो, पूरा अंदर डालो, मेरी कुंवारी चूत फाड़ दो, और तेज। ये गंदी बातें सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया, मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए, उसकी चूत अब पूरी तरह लाल हो चुकी थी, लेकिन गीली होने के कारण लंड बड़े आराम से अंदर-बाहर हो रहा था। उसकी चूत की टाइटनेस इतनी अच्छी थी कि मुझे बहुत मजा आ रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे किसी गर्म और गीले कपड़े में लंड डाला हो जो पूरी तरह चिपक जाए।
मैंने उसे डॉगी स्टाइल में करने को कहा। वो घुटनों के बल हो गई, हाथ सीट पर टिकाए, उसकी गोरी गांड ऊपर उठी हुई थी, देखने में बहुत सेक्सी लग रही थी। मैंने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाला, इस पोजीशन में और भी गहराई तक जा रहा था। वो चीख रही थी, आह्ह्ह, बहुत अंदर जा रहा है, बस करो, नहीं, और तेज करो। मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा, उसके बूब्स हिल रहे थे, मैंने एक हाथ से उन्हें पकड़ लिया, निप्पलों को मसलते हुए चोदता रहा। उसकी कुंवारी चूत अब पूरी तरह से चुद चुकी थी, लेकिन अभी भी उतनी ही टाइट थी, मजा आ रहा था। फिर मैंने उसे उल्टा लेटाया, टांगें अपने कंधों पर रखीं, इस पोजीशन में उसकी चूत और भी खुली, मैं पूरा अंदर तक घुस रहा था। वो पागल हो चुकी थी, बस आह्ह्ह, ओह्ह्ह, हां, हां कर रही थी। मैंने उसकी टांगें चौड़ी कीं और जोर-जोर से धक्के मारने लगा, उसकी कुंवारी चूत से अवाजें आ रही थीं, चप-चप की, और वो और भी उत्तेजित कर रही थीं।
लगभग आधे घंटे की चूत चुदाई के बाद मैंने सोचा कि अब इसकी गांड भी मारी जाए। उसकी गांड बहुत गोल और टाइट लग रही थी, दोनों गाल बिल्कुल उभरे हुए, बीच में गहरी दरार। मैंने उसे कहा कि एक बार पीछे से भी करूं, वो समझ गई, नहीं, वहां मत डालो, बहुत दर्द होगा, मैंने कभी नहीं किया। मैंने उसे मनाया, बस एक बार ट्राई करो, अगर दर्द हो तो बंद कर दूंगा। उसे मुश्किल से मनाया, मैंने अपने लंड पर थूक लगाया, उसकी गांड के छेद पर भी थूक से गीला किया। धीरे से सुपाड़ा लगाया, वो चीख पड़ी, आह्ह्ह, नहीं, बहुत मोटा है, नहीं जाएगा। मैंने धीरे से दबाव डाला, थोड़ा सा अंदर गया, वो रोने लगी, लेकिन मैंने उसे चुप किया और धीरे-धीरे अंदर डालता रहा। आधा लंड अंदर गया तो रुक गया, उसकी गांड बहुत टाइट थी, चूत से भी ज्यादा, एकदम गर्म और सुखी। धीरे-धीरे मैंने हिलना शुरू किया, शुरू में वो दर्द से तड़पती रही, लेकिन दस मिनट बाद वो शांत हो गई। मैंने स्पीड बढ़ाई, अब पूरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था, उसकी गांड की गर्मी अलग ही थी। वो अब मजे ले रही थी, हाथ से अपनी चूत सहला रही थी। मैंने उसकी गांड जोर-जोर से मारी, थप-थप की आवाजें और तेज हो गईं।
रात हो चुकी थी, हम दोनों थके हुए थे, लेकिन मेरा मन नहीं भरा था। मैंने उसे गाड़ी से बाहर खेत की तरफ ले गया, खुले आसमान के नीचे, चांदनी रात में। वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी, उसका गोरा बदन चांदनी में चमक रहा था, बूब्स उभरे हुए, कमर पतली, हिप्स गोल, चूत पर खून के धब्बे लगे हुए थे, लेकिन फिर भी वो बहुत सेक्सी लग रही थी। मैंने उसे दीवार से सटाया और पीछे से चूत में लंड डाल दिया, ठंडी हवा में हम दोनों गर्म हो रहे थे।
वो चीख रही थी, ओह्ह्ह, सचिन, तुम बहुत अच्छा चोदते हो, और तेज, बस। मैंने उसे घुमाकर अपनी गोद में उठाया और लंड पर बैठाया, वो कूद-कूद कर चुदवा रही थी, उसके बूब्स मेरे मुंह के सामने थे, मैं बार-बार उन्हें चूस रहा था, निप्पलों को काट रहा था। फिर जमीन पर एक कंबल बिछाया,
उसे लेटाया और मिशनरी पोजीशन में फिर से चोदना शुरू किया। अब वो पूरी तरह खुल चुकी थी, बोल रही थी, हां, हां, मारो, पूरा अंदर डालो, मेरी चूत फाड़ दो, और तेज, मुझे और चोदो। मैंने उसकी टांगें चौड़ी कीं और जोर-जोर से धक्के मारने लगा, उसकी चूत अब पूरी तरह से चुद चुकी थी, लेकिन फिर भी उतनी ही टाइट थी, मजा आ रहा था।
रात के करीब दो बजे हमने तीसरा राउंड किया, इस बार मैंने उसे खड़ा करके पीछे से चोदा। वो दीवार से सटी हुई थी, मैं पीछे से उसकी चूत में लंड डाले हुए था, उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी, मजा आ रहा था। वो अब पूरी तरह से चुदक्कड़ बन चुकी थी, पूरी तरह से मजे ले रही थी।
लगभग एक घंटे की चुदाई के बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं, मैंने उसे कहा, वो बोली, मुंह में निकालो, मैं पी जाऊंगी। ये सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया, मैंने उसे घुटनों के बल किया और उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया, वो चूसने लगी, जीभ से सुपाड़े को चाट रही थी।
कुछ ही मिनटों में मैं झड़ गया, मोटा-मोटा वीर्य उसके मुंह में भर गया, वो सब पी गई, एक भी बूंद बाहर नहीं गिरने दी। ये देखकर मैं हैरान रह गया, इतनी साफ-सुथरी लड़की और ये सब।
सुबह के करीब पांच बजे हम थके हुए सो गए। जब आंख खुली तो सूरज निकल चुका था। वो मेरे बगल में लेटी हुई थी, बहुत प्यारी लग रही थी, उसके बाल बिखरे हुए थे, चेहरे पर थकान और संतुष्टि का मिला-जुला भाव था। हम दोनों ने कपड़े पहने, वो शीशे में अपने बाल सवार रही थी। मैंने उसे इटावा छोड़ा, उसके नानी के घर के बाहर गाड़ी रोकी।
वो उतरने लगी तो मैंने रोककर पूछा कि क्या मैं तुमसे फिर मिल सकता हूं, वो रुकी, पलटकर देखा, शायद, कभी दिल्ली आऊं तो। वो चली गई, मैं वहीं खड़ा रह गया। वो मेरी जिंदगी की सबसे यादगार रात थी, एक अजनबी लड़की जिसका नाम भी शायद असली नहीं था, लेकिन वो रात यादगार बन गई। उसकी खूबसूरती, उसका गोरा बदन, उसकी कुंवारी चूत की चुदाई, सब कुछ आज भी मेरी यादों में ताजा है, और शायद हमेशा रहेगा।
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