
Vidhwa Bhabhi Aur Divorce Bhabhi ki Chut Ka Jaal
मेरा नाम राहुल है और मैं 28 साल का एक सामान्य लड़का हूं। मेरी जिंदगी तब बदल गई जब मैं अपने मामा के घर उनकी बेटी की शादी में गया था। मामा का घर एक छोटे शहर में था जहां सब एक-दूसरे को जानते थे। मैं शादी में तीन दिन पहले पहुंच गया था ताकि मदद कर सकूं। Vidhwa Bhabhi Aur Divorce Bhabhi ki Chut Ka Jaal
शाम के वक्त जब मैं मामा के घर पहुंचा तो वहां पहले से ही कई रिश्तेदार मौजूद थे। मामा ने मुझे एक कमरा दिखाया जो ऊपरी मंजिल पर था। वो बोले, “राहुल बेटा, यहीं रुक जाओ। यहां शांति भी है और नीचे से अलग भी।” मैंने धन्यवाद किया और सामान रखने लगा।
शाम को जब मैं नीचे आया तो मैंने दो औरतों को देखा जो मेरे लिए अजनबी थीं। मामा ने परिचय कराया, “यह नित्या है, हमारी पड़ोसन। पति की मृत्यु के बाद अकेली रहती है। और यह प्रियंका है, मेरी भांजी, हाल ही में तलाक हो गया इसका। दोनों तुम्हारी मदद करेंगी शादी की तैयारियों में।”
मैंने दोनों को देखा। नित्या करीब 32-33 साल की, बेहद खूबसूरत औरत थी। उसकी त्वचा गेहुआं थी, आंखें बड़ी-बड़ी और आकर्षक, बाल लंबे काले और शरीर एकदम सही आकार में। उसके स्तन मध्यम आकार के थे लेकिन आकर्षक ढंग से उभरे हुए। उसकी कमर पतली थी और नितंबों का आकार गोल और सुडौल।
दूसरी ओर प्रियंका 35 साल की, थोड़ी मोटी लेकिन बेहद सुंदर औरत थी। उसका शरीर भरा-पूरा था, स्तन बड़े और भारी, कमर मोटी लेकिन नितंब बेहद बड़े और मांसल। उसकी मोटाई में एक अलग ही आकर्षण था, जैसे कोई परिपक्व फल हो जो खाने को बेकरार हो।
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दोनों ने मुझे देखा और मुस्कुरायीं। नित्या की मुस्कान में एक शरारत थी जो मुझे तुरंत महसूस हुई। प्रियंका की नजरों में एक अलग ही तरह की भूख थी, जैसे वह किसी को तलाश रही हो।
पहली रात कोई खास बात नहीं हुई। हम सबने मिलकर शादी की तैयारियों की बातचीत की और खाना खाया। लेकिन जब मैं रात को अपने कमरे में जा रहा था तो नित्या ने मुझे रोका।
“राहुल, एक बात कहूं?” उसकी आवाज में एक अजीब सी मधुरता थी।
“हां बोलिए नित्या भाभी,” मैंने कहा।
“वो… मेरा कमरा तुम्हारे बगल में ही है। और प्रियंका का भी पास में ही है। अगर कुछ चाहिए हो तो बता देना,” वह कहते हुए अपने होंठों को चाट गई।
मैंने सिर हिलाया और अपने कमरे में चला गया। दिमाग में कुछ ख्याल आए लेकिन मैंने उन्हें दबा दिया। मैं सोच रहा था कि यह मेरी कल्पना है।
दूसरे दिन सुबह मैं जल्दी उठ गया। नहाने के लिए मुझे नीचे जाना पड़ता था क्योंकि ऊपर बाथरूम में गर्म पानी की व्यवस्था नहीं थी। मैं तौलिया लेकर नीचे गया। बाथरूम खाली था और मैंने दरवाजा बंद करके नहाना शुरू किया।
कुछ देर बाद मुझे लगा कि बाहर कोई है। मैंने कान लगाया तो आवाजें आ रही थीं। नित्या और प्रियंका की आवाजें थीं। वे बातें कर रही थीं।
“अरे वो लड़का कहां गया?” प्रियंका की आवाज आई।
“शायद नहा रहा होगा,” नित्या ने कहा।
“काश हम झांक सकतीं,” प्रियंका ने शरारत से कहा।
“तू भी ना… लेकिन मुझे भी जिज्ञासा है। मामा ने कहा है वो कुंवारा है,” नित्या ने कहा।
मैं अंदर सुन रहा था और मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह सच है या मेरी कल्पना। तभी मुझे दरवाजे के नीचे से छाया महसूस हुई। मैंने नीचे देखा तो मेरी सांस रुक गई – दरवाजे के नीचे की दरार से कोई देख रहा था।
मैं जानबूझकर थोड़ा साइड हो गया ताकि देखने वाले को अच्छा नजारा मिले। मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो रहा था इस बात से कि कोई मुझे देख रहा है। मैंने नाटक किया कि मुझे पता नहीं और मैंने अपने शरीर पर साबुन लगाना शुरू किया।
मैंने अपने हाथ नीचे ले जाकर अपने लंड को सहलाया। वो 7 इंच का मोटा लंड था जो अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था। मैंने उसे साबुन से मला और फिर ऊपर उठाया। मुझे पता था कि बाहर कोई मुझे देख रहा है और यह विचार ही मुझे उत्तेजित कर रहा था।
कुछ देर बाद छाया हट गई। मैंने जल्दी से नहाया और बाहर आया। बाहर कोई नहीं था लेकिन मुझे लगा कि दोनों औरतें कहीं छिपकर मुझे देख रही हैं।
दिन भर की तैयारियों में व्यस्त रहा। शाम को जब सब थककर सो रहे थे तो मैं अपने कमरे में गया। मेरा कमरा एक पुराने हिस्से में था जहां दो कमरे एक-दूसरे से जुड़े हुए थे बस एक पतली दीवार से। दीवार में एक छोटी सी दरार थी जो पुराने समय से बनी हुई थी।
रात को मैं सो नहीं पा रहा था। करीब 12 बजे मुझे पास वाले कमरे से आवाजें आने लगीं। वह नित्या का कमरा था। मैंने कान लगाया तो समझ आया कि वह कोई फिल्म देख रही है। लेकिन जल्दी ही मुझे एहसास हुआ कि वह कोई सामान्य फिल्म नहीं थी।
आवाजें अश्लील थीं। नित्या सिसक रही थी, “आह… हां… और जोर से…” मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैं उत्सुकता से सुन रहा था। तभी मुझे दरार की ओर ध्यान गया। मैंने सोचा कि शायद वहां से कुछ दिखे।
मैंने आंख लगाई तो मेरा दिल जोर से धड़का। नित्या अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी और उसने अपने कपड़े उतार दिए थे। उसके स्तन बाहर थे, गोल, गुलाबी अग्रभाग के साथ। उसका एक हाथ अपनी योनि पर था और वह उसे सहला रही थी।
उसकी योनि पर हल्के बाल थे, गीली और चमकदार। उसकी उंगलियां अंदर-बाहर हो रही थीं और वह आंखें बंद करके सिसक रही थी। मैं देखता रहा और मेरा लंड पैंट में कसमसा रहा था।
तभी दरवाजा खुला और प्रियंका अंदर आई। वह भी केवल नाइटी में थी। नित्या ने हैरानी से देखा लेकिन हाथ नहीं रोका।
“क्या कर रही है तू?” प्रियंका ने पूछा।
“तू भी तो जानती है कि मुझे कितने दिन हो गए,” नित्या ने कहा, “मेरा बदन आग लगा रहा है।”
प्रियंका मुस्कुराई, “मैं भी यही सोच रही थी। वो लड़का… राहुल… कितना सुंदर है ना?”
“हां यार… उसका बदन… और वो लंड…” नित्या ने कहा।
मेरी सांस रुक गई। वे मेरे बारे में बात कर रही थीं।
“तूने देखा था आज?” प्रियंका ने पूछा।
“हां… वो नहा रहा था… मैं दरवाजे से झांक रही थी… उसका लंड…” नित्या ने हांफते हुए कहा, “इतना बड़ा और मोटा… मेरे पति का आधा था उससे।”
“मुझे भी देखना है,” प्रियंका ने कहा।
“कल सुबह मौका मिलेगा। वो फिर नहाने आएगा। हम दोनों झांकेंगी,” नित्या ने योजना बनाई।
मैं दरार से देख रहा था और सुन रहा था। मेरे दिमाग में ख्याल आया कि मुझे चल जाना चाहिए लेकिन मेरे पैर नहीं चल रहे थे। मैं देखना चाहता था कि ये दोनों औरतें आगे क्या करती हैं।
प्रियंका ने अपनी नाइटी उतार दी। उसका शरीर देखकर मेरा मुंह खुला रह गया। उसके स्तन बेहद बड़े थे, करीब 38 आकार के, भारी और लटकते हुए लेकिन बेहद आकर्षक। उसकी कमर मोटी थी और नितंब… ओह उसके नितंब… बेहद बड़े, मांसल, गोल और फैले हुए।
“आ जा,” नित्या ने कहा।
प्रियंका बिस्तर पर गई और दोनों एक-दूसरे को छूने लगीं। नित्या ने प्रियंका के स्तन पकड़े और उन्हें दबाया। प्रियंका ने नित्या के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। दोनों एक-दूसरे को चूमने लगीं, जीभें आपस में फंस रही थीं।
मैं देख रहा था और अपने लंड को सहला रहा था। यह दृश्य बेहद उत्तेजक था। दो परिपक्व औरतें, एक विधवा और एक तलाकशुदा, एक-दूसरे को संतुष्टि दे रही थीं।
नित्या नीचे गई और प्रियंका के स्तनों को चूसने लगी। वह एक स्तन को मुंह में लेकर चूस रही थी और दूसरे को हाथ से मसल रही थी। प्रियंका सिर पीछे करके आहें भर रही थी।
“और जोर से… हां… चूस… मेरे दूध पी ले…” प्रियंका कराह रही थी।
फिर नित्या नीचे गई। उसने प्रियंका की जांघों को फैलाया। प्रियंका की योनि पर घने काले बाल थे, गीली और भूखी। नित्या ने अपनी जीभ निकाली और चाटना शुरू कर दिया।
“उउउउह… हां… वहां… चाट… अपनी जीभ अंदर डाल…” प्रियंका चीख रही थी।
नित्या की जीभ प्रियंका की योनि में घुस-निकल रही थी। वह उसकी चूत को चाट रही थी, उसकी क्लिटोरिस को अपने होठों में लेकर चूस रही थी। प्रियंका का शरीर कांप रहा था।
मैं दरार से यह सब देख रहा था। मेरा लंड बेहद कड़ा हो चुका था। मैंने अपनी पैंट खोली और लंड बाहर निकाल लिया। मैं उसे हिला रहा था देखते हुए।
करीब दस मिनट बाद प्रियंका झड़ गई। उसका शरीर अकड़ा और वह नित्या के मुंह पर अपना रस छोड़ दिया। नित्या ने सब चाट लिया।
अब प्रियंका की बारी थी। वह नित्या को लेटा दिया और उसकी टांगें फैला दीं। नित्या की योनि पूरी तरह गीली थी, उसके अंदरूनी हिस्से गुलाबी और चमकदार। प्रियंका ने अपनी उंगली डाली और नित्या चीख उठी।
“आह… हां… उंगली अंदर कर… और जोर से…” नित्या कराह रही थी।
प्रियंका ने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगी। नित्या का शरीर उछल रहा था। फिर प्रियंका ने अपना मुंह लगा दिया और चूसने लगी।
दोनों औरतें एक-दूसरे को संतुष्टि दे रही थीं और मैं दरार से देख रहा था। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं लेकिन मैंने खुद को रोका। मैं और देखना चाहता था।
करीब आधे घंटे बाद दोनों थककर लेट गईं। वे एक-दूसरे को प्यार से सहला रही थीं।
“कल उस लड़के को पकड़ेंगी,” नित्या ने कहा।
“हां… उसका लंड मेरे अंदर चाहिए,” प्रियंका ने कहा।
मैं चुपचाप अपने बिस्तर पर वापस आ गया। मेरा दिमाग तेजी से काम कर रहा था। क्या यह सच था? क्या ये दोनों मुझे चाहती थीं? मैं उत्तेजित भी था और थोड़ा डरा हुआ भी। मैंने सोचा कि कल सावधान रहूंगा।
अगली सुबह मैं जानबूझकर देर से नहाने गया। मैं जानता था कि वे इंतजार कर रही होंगी। जब मैं बाथरूम में गया तो मैंने जानबूझकर दरवाजा पूरी तरह नहीं बंद किया, थोड़ा सा खुला छोड़ दिया।
मैंने कपड़े उतारे और नहाने लगा। कुछ ही देर में मुझे पता चला कि कोई आया है। मैंने आंखों को साइड किया और देखा – नित्या और प्रियंका दोनों दरवाजे से झांक रही थीं। उनकी आंखें मेरे लंड पर टिकी हुई थीं।
मैंने नाटक किया कि मुझे पता नहीं। मैंने अपने लंड पर साबुन लगाया और उसे हिलाया। वो पूरी तरह खड़ा था, 7 इंच का मोटा लाल लंड, नसों से भरा हुआ, टोपी बड़ी और गोल।
मैंने देखा कि नित्या का मुंह खुला हुआ था और वह अपने होठों को चाट रही थी। प्रियंका ने अपना हाथ अपनी साड़ी के नीचे डाल लिया था, वह अपनी चूत सहला रही थी।
मैंने और भी शरारत की। मैंने पीछे मुड़कर अपना चूतड़ उनकी तरफ किया। मेरा चूतड़ कसा हुआ था, गोल और मांसल। मैंने झुककर अपने पैरों के बीच से उन्हें देखने की कोशिश की। मुझे पता था कि वे मेरी गांड देख रही हैं।
फिर मैंने मुड़कर फिर से उन्हें अपना लंड दिखाया। मैंने साबुन को नीचे ले जाकर अपनी टोपी पर लगाया और फिर उसे हिलाया। प्रियंका की सांस तेज हो गई थी।
अचानक मेरा पैर फिसला और मैं गिरने वाला था। मैंने दरवाजे का सहारा लिया और दरवाजा खुल गया। मैं पूरी तरह नंगा था और दोनों औरतें मुझे देख रही थीं।
हम तीनों एक-दूसरे को देखते रहे। मुझे शर्म आ रही थी लेकिन मैं कुछ नहीं कर सका। नित्या की आंखें मेरे लंड पर टिकी थीं।
“वो… मुझे लगा कोई नहीं है…” मैंने कहा।
“कोई बात नहीं,” नित्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम तो देख ही रहे थे।”
मैं हैरान रह गया। प्रियंका ने कहा, “कितना सुंदर है तेरा लंड… इतना बड़ा…”
मैं कुछ बोल नहीं पाया। नित्या ने अंदर कदम रखा। मैं पीछे हट गया। वह मेरे पास आई और मेरे लंड को देखने लगी।
“क्या मैं छू सकती हूं?” उसने पूछा।
मैंने कुछ नहीं कहा। उसने अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को छू लिया। उसका स्पर्श गर्म था। वह मेरे लंड को सहला रही थी।
“इतना कड़ा… इतना गर्म…” वह बड़बड़ा रही थी।
प्रियंका भी अंदर आ गई। उसने दरवाजा बंद कर लिया। अब हम तीनों बाथरूम में थे, मैं नंगा और वे दोनों मुझे घेरे हुए।
“मुझे भी चखने दे,” प्रियंका ने कहा।
नित्या ने मेरा लंड छोड़ा और प्रियंका ने पकड़ लिया। उसके हाथ मोटे थे, नरम और गर्म। वह मेरे लंड को दबा रही थी।
“आज तक इतना बड़ा लंड नहीं देखा,” प्रियंका ने कहा।
नित्या ने मेरे सीने पर हाथ रखा। उसने मेरे निप्पों को सहलाया। मैं कांप उठा।
“तुम्हें अच्छा लग रहा है?” नित्या ने पूछा।
मैंने सिर हिलाया। मुझे अच्छा तो लग रहा था लेकिन मैं घबराया हुआ भी था। यह सब इतनी जल्दी हो रहा था।
“चलो ऊपर चलते हैं,” प्रियंका ने कहा, “यहां कोई आ सकता है।”
नित्या ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींचकर ऊपर ले गई। हम मेरे कमरे में आए। नित्या ने दरवाजा बंद किया और कुंडी लगा दी।
“अब कोई नहीं आएगा,” वह बोली।
मैंने कहा, “भाभी, यह ठीक नहीं है…”
“क्यों?” नित्या ने पूछा, “क्या तुम्हें हम पसंद नहीं?”
“नहीं, वो बात नहीं है… बस…” मैं हिचकिचा रहा था।
“बस क्या?” प्रियंका ने मेरे पीछे से आकर मुझे घेर लिया। उसके बड़े स्तन मेरी पीठ से लग रहे थे।
“तुम्हें पता है कितने दिन हो गए मुझे किसी पुरुष को छुए हुए?” नित्या ने कहा, “मेरे पति की मृत्यु को तीन साल हो गए। तीन साल से मैं अपनी चूत को ऊंगली से ही शांत कर रही हूं।”
“और मुझे तो तलाक हुए एक साल हुआ है,” प्रियंका ने कहा, “मेरा पति इतना बड़ा लंड नहीं था। वो कभी मुझे संतुष्ट नहीं कर सका।”
मैं समझ गया कि ये दोनों भूखी हैं। उन्हें मर्द की जरूरत थी और मैं वहां अकेला था।
“लेकिन अगर किसी को पता चल गया…” मैंने कहा।
“किसी को नहीं पता चलेगा,” नित्या ने कहा, “यह हमारी और तुम्हारी बीच की बात है।”
कहते हुए उसने अपनी साड़ी खोलनी शुरू कर दी। वह धीरे-धीरे कपड़े उतारने लगी। पहले साड़ी, फिर ब्लाउज, फिर पेटीकोट। कुछ ही पलों में वह मेरे सामने पूरी तरह नंगी खड़ी थी।
उसका शरीर बेहद खूबसूरत था। उसके स्तन मध्यम आकार के थे लेकिन बिल्कुल सीधे, गुलाबी अग्रभाग उभरे हुए। उसकी कमर पतली और नितंब गोल। उसकी योनि पर हल्के बाल थे और वह गीली दिख रही थी।
“कैसी लग रही हूं?” उसने पूछा।
“बहुत सुंदर,” मैंने कहा।
प्रियंका भी कपड़े उतारने लगी। उसने अपनी साड़ी खोली और फिर ब्लाउज। जब उसने ब्रा उतारी तो उसके बड़े भारी स्तन बाहर आ गए। वे इतने बड़े थे कि नीचे की तरफ थोड़े लटकते हुए लेकिन बेहद मादक। उसके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे, बड़े और उभरे हुए।
उसने पेटीकोट भी उतार दिया। उसकी जांघें मोटी और मांसल थीं, एक-दूसरे को छू रही थीं। उसकी योनि पर घने बाल थे और वह पूरी तरह गीली थी।
अब मेरे सामने दो नंगी औरतें खड़ी थीं। एक पतली और खूबसूरत, दूसरी मोटी और भरपूर। दोनों की आंखों में वासना की आग जल रही थी।
“अब तुम्हारी बारी,” नित्या ने कहा।
मैं खड़ा था, मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था। नित्या मेरे पास आई और मेरे होठों पर अपने होठ रख दिए। उसके होठ नरम थे, गीले और गर्म। वह मुझे चूम रही थी और मेरे लंड को सहला रही थी।
प्रियंका ने मेरे पीछे से मेरे चूतड़ों को पकड़ लिए। वह उन्हें दबा रही थी और मेरे गालों पर चूम रही थी।
नित्या ने मेरे मुंह से अपने होठ हटाए और नीचे झुक गई। उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसे देखने लगी।
“कितना सुंदर लंड है,” वह बोली।
फिर उसने अपनी जीभ निकाली और मेरी टोपी पर चाटा। मैं कांप उठा। उसने फिर चाटा, इस बार पूरे लंड को जीभ से सहलाया।
“उम्म्म… मजा आ रहा है?” उसने पूछा।
मैंने हां में सिर हिलाया। उसने मेरे लंड का अगला हिस्सा अपने मुंह में ले लिया। उसका मुंह गर्म और गीला था। वह चूसने लगी, धीरे-धीरे, फिर जोर से।
प्रियंका मेरे पीछे खड़ी होकर मेरे शरीर को सहला रही थी। उसके हाथ मेरे सीने पर घूम रहे थे, मेरे निप्पलों को मसल रहे थे।
नित्या मेरा लंड चूस रही थी। वह उसे गहले तक अपने गले में उतार रही थी और फिर बाहर निकाल रही थी। उसकी जीभ मेरी टोपी के चारों ओर घूम रही थी।
“मुझे भी चखने दो,” प्रियंका ने कहा।
नित्या ने मेरा लंड छोड़ा और प्रियंका झुक गई। उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया। उसके हाथ मोटे थे, नरम। उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया।
प्रियंका का मुंह और भी गहरा था। उसने मेरा पूरा लंड अपने गले तक उतार लिया। मैं उसके मुंह को महसूस कर रहा था, गीला, गर्म और तंग।
“उउउह… हां… चूसो…” मैंने कहा।
नित्या उठी और मेरे पास आकर खड़ी हो गई। उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने स्तन पर रख दिया। मैंने उसके स्तन को दबाया। वह नरम था लेकिन कसा हुआ। मैंने उसके निप्पल को मसला और वह कराह उठी।
“दर्द हो रहा है?” मैंने पूछा।
“नहीं… और जोर से दबाओ… मुझे पसंद है…” वह बोली।
मैंने जोर से दबाया। उसका निप्पल मेरी उंगलियों के बीच कस गया। वह आंखें बंद करके कराह रही थी।
प्रियंका अभी भी मेरा लंड चूस रही थी। वह उसे चूसने के साथ-साथ अपने हाथ से भी हिला रही थी। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूं।
“रुको… मैं झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।
“झड़ जाओ मेरे मुंह में,” प्रियंका ने कहा और और जोर से चूसने लगी।
मैं रोक नहीं सका। मेरा शरीर अकड़ा और मेरा वीर्य उसके मुंह में निकलने लगा। मैं झड़ता रहा, झड़ता रहा, करीब एक मिनट तक। प्रियंका ने सब पी लिया, एक भी बूंद बाहर नहीं जाने दी।
जब मैं झड़ गया तो प्रियंका ने मेरा लंड बाहर निकाला और चाटते हुए साफ कर दिया। नित्या ने उसे देखा और कहा, “कितना सारा वीर्य… मुझे भी चाहिए था।”
“अब तुम्हारी बारी,” प्रियंका ने कहा, “उसका लंड फिर से खड़ा हो जाएगा।”
सच में, कुछ ही देर में मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। दोनों औरतें मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं।
“अब मुझे चोदो,” नित्या ने कहा।
वह बिस्तर पर गई और पीठ के बल लेट गई। उसने अपनी टांगें फैला दीं। उसकी योनि गीली थी, गुलाबी होंठ खुले हुए।
मैं उसके ऊपर गया। प्रियंका ने मेरे लंड को पकड़ा और नित्या की योनि के मुंह पर रख दिया।
“धीरे से डालो,” प्रियंका ने कहा, “वो काफी दिनों से नहीं चुड़ी है।”
मैंने धीरे से दबाया। मेरी टोपी अंदर घुसी। नित्या की योनि तंग थी, गर्म और गीली। उसने कराहते हुए कहा, “आह… हां… और अंदर करो…”
मैंने एक धक्का दिया और आधा लंड अंदर चला गया। नित्या चीख उठी, “उउउह… बहुत मोटा है… धीरे…”
मैं रुक गया। प्रियंका ने मेरे चूतड़ों को सहलाया, “धीरे-धीरे करो… वो सह लेगी।”
मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। नित्या की योनि धीरे-धीरे ढीली होने लगी। वह कराह रही थी, “हां… अब ठीक है… और जोर से करो…”
मैंने गति बढ़ाई। अब मेरा पूरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था। नित्या की योनि का रस मेरे लंड पर लग रहा था, चिपचिपा और गर्म।
“उह… उह… हां… चोदो मुझे… इतने सालों बाद…” नित्या चिल्ला रही थी।
मैं उसे जोर-जोर से चोद रहा था। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने झुककर उसके एक स्तन को मुंह में ले लिया और चूसने लगा।
“आह… हां… चूसो भी… मेरे दूध पी लो…” नित्या बोली।
मैं चोदते और चूसते रहा। प्रियंका हमें देख रही थी और अपनी योनि सहला रही थी। उसकी आंखें वासना से लाल थीं।
करीब दस मिनट बाद नित्या झड़ गई। उसका शरीर अकड़ा, उसकी योनि ने मेरे लंड को कस लिया और वह झड़ने लगी। उसका रस मेरे लंड पर बह रहा था।
“उउउउह… हां… झड़ गई मैं…” वह चीख रही थी।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वह वीर्य और योनिरस से लथपथ था।
“अब मेरी बारी,” प्रियंका ने कहा।
वह बिस्तर पर गई और कुत्ते की तरह हो गई, अपने चूतड़ मेरी तरफ उठा दिए। उसके बड़े मांसल चूतड़ देखकर मेरा लंड फिर से कड़ा हो गया।
“आ जाओ पीछे से,” प्रियंका ने कहा।
मैं उसके पीछे गया। उसकी योनि पूरी तरह गीली थी, घने बालों के बीच से चमक रही थी। मैंने अपना लंड उसके मुंह पर रखा और धक्का दिया।
प्रियंका की योनि नित्या से ज्यादा ढीली थी लेकिन और भी गहरी। मेरा लंड पूरा अंदर चला गया बिना किसी रुकावट के।
“उउउह… हां… यही चाहिए था… इतना बड़ा लंड…” प्रियंका चीखी।
मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। उसके बड़े चूतड़ हर धक्के से थरथराते थे। मैंने उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मारा।
“आह… हां… मारो… और मारो… मुझे पसंद है…” प्रियंका चिल्ला रही थी।
मैं उसे जोर-जोर से चोद रहा था। उसकी योनि का आवाज आ रही थी, चपचप की आवाज। नित्या उठकर आई और प्रियंका के नीचे लेट गई। उसने प्रियंका के स्तन पकड़े और उन्हें चूसने लगी।
“हां… दोनों मिलकर…” प्रियंका बोली।
मैं प्रियंका को पीछे से चोद रहा था और नित्या उसके नीचे उसके स्तन चूस रही थी। यह दृश्य बेहद उत्तेजक था।
“और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” प्रियंका चिल्ला रही थी।
मैंने पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए। मेरे लंड से प्रियंका की योनि लाल हो रही थी। वह झड़ने वाली थी।
“आ रहा है… आ रहा है…” वह चीखी और फिर झड़ गई।
उसकी योनि ने मेरे लंड को कस लिया, पल्सेट करने लगी। मैं भी झड़ने वाला था।
“मैं भी झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।
“मेरे अंदर ही झड़ जाओ…” प्रियंका ने कहा।
मैंने एक आखिरी जोरदार धक्का दिया और मेरा वीर्य उसकी योनि में निकलने लगा। मैं झड़ता रहा, उसके अंदर ही, गहरे तक।
जब मैं झड़ गया तो मैं उसके ऊपर गिर गया। नित्या ने मुझे सहलाया, “कितना सारा वीर्य… तुम तो बहुत मजबूत हो।”
हम तीनों थककर बिस्तर पर पड़े रहे। प्रियंका ने मेरा लंड अपने हाथ में लिया और सहलाया, “यह लंड तो खजाना है।”
“हां,” नित्या ने कहा, “अब तो यह हमारा है।”
मैं सोच रहा था कि यह सब कैसे हुआ। कल तक मैं एक सामान्य लड़का था और आज दो भूखी औरतों ने मुझे अपना बना लिया था। लेकिन मुझे अच्छा लग रहा था। बहुत अच्छा।
थोड़ी देर बाद नित्या उठी और अपना फोन निकाला। मैंने देखा कि वह कुछ रिकॉर्ड कर रही थी।
“क्या कर रही हो?” मैंने पूछा।
“कुछ नहीं,” वह मुस्कुराई।
मुझे शक हुआ लेकिन मैंने ध्यान नहीं दिया। हम तीनों फिर से एक-दूसरे को छूने लगे। नित्या ने मेरे लंड को चाटना शुरू किया, वह फिर से खड़ा हो रहा था।
“तुम तो बहुत जल्दी जल्दी खड़ा हो जाता है,” प्रियंका ने कहा।
“तुम दोनों को देखकर कैसे नहीं होगा,” मैंने कहा।
नित्या ने मेरा लंड चूसना शुरू किया। वह इस बार और जोर से चूस रही थी। प्रियंका ने मेरे चूतड़ों को पकड़ा और उन्हें फैलाया। उसने मेरी गांड के छेद को देखा।
“यहां भी चाहिए तुझे?” उसने पूछा।
मैंने कहा, “अगर तुम दोनों को ठीक लगे तो…”
“पहले इसकी चूत ले ले,” नित्या ने कहा, “फिर हम तेरी गांड मारेंगी।”
मैं समझा नहीं। नित्या ने समझाया, “हमारे पास एक डिल्डो है। हम तुम्हें वो लगाएंगी अपनी चूत में और तुम्हारी गांड मारेंगी।”
मुझे थोड़ा डर लगा लेकिन मैंने हां कर दी। नित्या ने एक बड़ा डिल्डो निकाला। वह काला था, करीब 8 इंच का और मोटा।
“लेट जाओ,” नित्या ने कहा।
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मैं पीठ के बल लेट गया। नित्या ने डिल्डो अपनी योनि में डाला और मेरे ऊपर आ गई। उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और अपनी योनि में डालने लगी।
“धीरे से…” मैंने कहा।
वह धीरे-धीरे बैठी और मेरा पूरा लंड अपने अंदर ले लिया। फिर वह आगे की ओर झुक गई, अपने स्तन मेरे मुंह के पास ले आई।
मैंने उसके स्तन चूसने शुरू किए। प्रियंका ने मेरी टांगें उठाई और मेरी गांड के नीचे तकिया रख दिया। मेरी गांड अब हवा में थी, खुली हुई।
“अब तैयार हो जाओ,” प्रियंका ने कहा।
उसने डिल्डो पर थूक लगाया और मेरी गांड के छेद पर रगड़ा। मुझे झुनझुनी महसूस हुई। फिर उसने धीरे से दबाया।
“उउउह… धीरे…” मैंने कहा।
डिल्डो का अगला हिस्सा अंदर घुस गया। दर्द हुआ लेकिन अजीब सा मजा भी आ रहा था। नित्या ऊपर-नीचे हो रही थी, मेरे लंड पर सवारी कर रही थी।
प्रियंका ने और जोर से दबाया और आधा डिल्डो अंदर चला गया। मेरी गांड फैल रही थी, पूरी तरह भरी हुई।
“कैसा लग रहा है?” प्रियंका ने पूछा।
“अजीब सा… लेकिन अच्छा…” मैंने कहा।
प्रियंका ने डिल्डो को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। नित्या भी ऊपर-नीचे हो रही थी। मैं दोनों तरफ से चुद रहा था – नित्या की योनि में मेरा लंड और मेरी गांड में डिल्डो।
“उह… उह… हां… और जोर से…” मैंने कहा।
प्रियंका ने गति बढ़ा दी। वह मेरी गांड जोर-जोर से मार रही थी डिल्डो से। नित्या भी तेजी से कूद रही थी। मेरे स्तन उसके स्तनों से रगड़ रहे थे।
“मैं झड़ने वाली हूं…” नित्या ने कहा।
“मैं भी…” मैंने कहा।
“एक साथ झड़ो…” प्रियंका ने कहा।
तीनों ने गति तेज कर दी। नित्या ऊपर-नीचे, प्रियंका अंदर-बाहर, और मैं नीचे से धक्के दे रहा था।
“आह… हां… अब…” नित्या चीखी और झड़ गई।
उसकी योनि ने मेरे लंड को कसा और मैं भी झड़ गया। उसी वक्त प्रियंका ने डिल्डो पूरी तरह अंदर घुसा दिया।
हम तीनों एक साथ झड़े। नित्या मेरे ऊपर गिर गई, प्रियंका मेरी टांगों के बीच झुकी रही।
करीब पांच मिनट बाद हम अलग हुए। मेरा लंड निकला तो वीर्य बह रहा था। नित्या की योनि भी भरी हुई थी।
“क्या मजा आया,” प्रियंका ने कहा।
“हां,” मैंने कहा, “लेकिन थक गया हूं।”
“आराम करो,” नित्या ने कहा, “शाम को फिर करेंगे।”
मैंने कहा, “शाम को?”
“हां,” प्रियंका ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तो तुम हमारे हो। हम तुम्हें जाने नहीं देंगी।”
मैंने पूछा, “लेकिन यह सब कैसे शुरू हुआ? मतलब, तुम दोनों ने मुझे क्यों चुना?”
नित्या ने कहा, “हम दोनों पिछले दो सालों से एक-दूसरे को संतुष्टि दे रही हैं। लेकिन हमें मर्द की कमी महसूस होती थी। जब मामा ने बताया कि उनका भांजा आ रहा है, तो हमने तुम्हारे बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि तुम कुंवारे हो और अच्छे दिखते हो।”
“फिर हमने प्लान बनाया,” प्रियंका ने कहा, “पहले तुम्हें देखना, फिर तुम्हें फंसाना।”
“तुमने जानबूझकर बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ा था?” मैंने पूछा।
“हां,” नित्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम जानती थीं कि तुम झांकोगे। और तुमने झांका भी।”
“और कल रात?” मैंने पूछा।
“वो भी प्लान था,” प्रियंका ने कहा, “हम जानती थीं कि दीवार में दरार है। हमने जानबूझकर वो सब किया ताकि तुम देखो और उत्तेजित हो।”
मैं समझ गया। यह सब एक जाल था और मैं फंस गया था। लेकिन यह फंदा मुझे मजा दे रहा था।
“और वो वीडियो?” मैंने पूछा।
नित्या ने अपना फोन दिखाया। उसमें मैं उसे चोदता हुआ दिख रहा था।
“यह क्या है?” मैं चौंक गया।
“तुम्हारी वीडियो,” नित्या ने कहा, “अब अगर तुमने हमारी बात नहीं मानी तो यह वीडियो सबको दिखा देंगे।”
मुझे गुस्सा आया, “तुमने मुझे ब्लैकमेल करने की धमकी दी?”
“धमकी नहीं,” प्रियंका ने कहा, “बस यह कि अब तुम हमारे हो। जब तक तुम यहां हो, रोज हमें चोदोगे। और अगर बाद में भी चाहें तो आओगे।”
मैं सोच में पड़ गया। एक तरफ गुस्सा था कि मुझे फंसाया गया, दूसरी तरफ मजा भी आ रहा था।
“ठीक है,” मैंने कहा, “लेकिन वीडियो डिलीट करो।”
“बाद में,” नित्या ने कहा, “पहले तीन दिन तो हमारे साथ रहो। फिर डिलीट कर देंगे।”
मुझे कोई चारा नहीं था। मैंने हां कर दी।
उस दिन शाम को फिर हमने किया। इस बार प्रियंका ने मुझे अपने ऊपर बिठाया और मैंने उसे चोदा। नित्या ने मेरी गांड में उंगली की।
रात को भी हमने किया। नित्या ने मुझे अपने मुंह में झड़ाया और प्रियंका ने अपनी चूत चटवाई।
अगले दो दिन भी यही चलता रहा। हम तीनों हर मौके पर एक-दूसरे को संतुष्टि देते। बाथरूम में, कमरे में, रसोई में, हर जगह।
शादी के दिन भी हमने मौका निकाला। जब सब व्यस्त थे, हम ऊपर आए और जल्दी से किया। नित्या ने मुझे खड़ा होकर चोदा जबकि प्रियंका ने मेरी गांड में डिल्डो लगाया।
शादी के बाद जब मैं जाने वाला था, नित्या और प्रियंका दोनों रो रही थीं।
“कब आओगे?” नित्या ने पूछा।
“जल्दी ही,” मैंने कहा।
“वीडियो डिलीट कर दें?” प्रियंका ने पूछा।
“रख लो,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ताकि मुझे याद कर सको।”
वे दोनों मुस्कुराईं। मैंने उन्हें गले लगाया और चला आया।
घर आने के बाद भी मैं उनकी याद में हस्तमैथुन करता रहा। दो महीने बाद मैं फिर गया और हम तीनों ने मिलकर वही सब किया।
अब तो हमारा रिश्ता स्थायी हो गया है। हर तीन-चार महीने में मैं जाता हूं और ये दोनों भूखी शेरनियां मुझे चबा जाती हैं। और मैं भी खुशी-खुशी चबा जाता हूं।
क्योंकि यह फंदा मुझे मजा देता है। और शायद यही प्यार है, या वासना, या दोनों। जो भी हो, यह बेहद खूबसूरत है।
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