जन्माष्टमी की चुदाई – पड़ोसन और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई
मैं सुमित, 22 साल का जवान लड़का, अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से शहर में रहता था। हमारे पड़ोस में रहती थी सीमा, 32 साल की भरपूर जवानी वाली औरत, उसके पति अक्सर बाहर रहते थे। जन्माष्टमी की वो रात मेरी जिंदगी का सबसे यादगार पल बन गई। जन्माष्टमी की चुदाई – पड़ोसन और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई
सीमा के साथ पहली मुलाकात और उसकी मोहल्लत
उस रात मोहल्ले में झाँकी का आयोजन था। मैं अपने घर की छत पर बैठा था, नीचे सड़क पर झाँकी गुजर रही थी। गर्मी बहुत थी, इसलिए मैंने सिर्फ एक लूज शॉर्ट्स पहनी थी। तभी सीमा आई, वो सफेद साड़ी में थी, गीले बालों से उसकी साड़ी चिपकी हुई थी, उसके चूचे पूरी तरह से उभरे हुए थे।
“सुमित, तुम यहाँ अकेले बैठे हो?” सीमा ने कहा।
“हां दीदी, यहाँ हवा अच्छी है,” मैंने कहा।
वो मेरे पास आकर बैठ गई। उसकी जांघ मेरी जांघ से लगी। मेरा लंड अपने आप खड़ा हो गया। सीमा ने नोटिस किया, उसने देखा कि मेरी शॉर्ट्स में कुछ उभार है। जन्माष्टमी की चुदाई – पड़ोसन और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई
“सुमित, क्या तुम मुझे देखकर…” सीमा ने शरमा कर पूछा।
मैंने कुछ नहीं कहा, बस सिर झुका लिया। सीमा ने मेरा हाथ पकड़ा, “कोई बात नहीं, ये तो जवानी है,” वो मुस्कुराई।
फिर अचानक बिजली चली गई। अंधेरा हो गया। सीमा डर गई, वो मुझसे सट गई। मेरा लंड उसकी कमर से टकरा रहा था। “सुमित, मुझे डर लग रहा है,” सीमा ने कहा।
मैंने उसे गले लगाया, “डरो मत दीदी, मैं हूं ना।”
अंधेरे में मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूमने लगे। सीमा कांप रही थी। मेरा लंड उसकी कमर पर दबा हुआ था। धीरे धीरे मेरे हाथ उसकी कमर से नीचे उतरे, उसकी साड़ी के पल्लू को छूने लगे।
“सुमित, ये क्या कर रहे हो?” सीमा ने धीमी आवाज में कहा।
“कुछ नहीं दीदी, बस आपको सांत्वना दे रहा हूं,” मैंने कहा।
मेरे हाथ उसकी जांघों पर पड़े। सीमा ने मेरा हाथ हटाने की कोशिश की, “नहीं सुमित, ये गलत है, मैं शादीशुदा हूं।”
“पर दीदी, आप खुद तो मेरे पास आई हो,” मैंने कहा और मेरे हाथ उसकी जांघों को सहलाने लगे।
सीमा सिसकियां भरने लगी, “आह, सुमित, प्लीज रुको, मुझे शर्म आ रही है।”
मैंने उसे पीछे से पकड़ा, मेरा लंड उसकी गांड पर दबा हुआ था। मेरे हाथ उसके चूचों की ओर बढ़े, मैंने उसके चूचों को पकड़ लिया, वो ब्रा नहीं पहनी थी, मेरे हाथों में उसके गोल गोल चूचे आ गए।
“आह, सुमित, छोड़ो, ये बहुत गलत है,” सीमा कराह रही थी, पर वो मेरा विरोध नहीं कर रही थी। जन्माष्टमी की चुदाई – पड़ोसन और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई
मैंने उसके चूचों को मसलना शुरू किया, उसके निप्पल कड़े हो गए। सीमा की सांसें तेज हो गईं, “आह, आह, सुमित, प्लीज, मत करो, मैं रोक नहीं पा रही हूं अपने आपको।” जन्माष्टमी की चुदाई – पड़ोसन और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई
मैंने उसे घुमाया, अब वो मेरे सामने थी। अंधेरे में मैंने उसके चूचों को चूसना शुरू किया, एक चूचा मुंह में लिया, दूसरे को हाथ से मसला। सीमा मेरे सिर को अपने चूचों पर दबा रही थी, “आह, सुमित, बहुत मजा आ रहा है, पर रुको, ये गलत है।”
मैंने उसकी साड़ी खींची, वो खुल गई। अब वो सिर्फ पेटीकोट में थी। मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया, उसके पैर फैलाए, उसकी पैंटी दिख रही थी, गीली हो चुकी थी।
“सुमित, नहीं, प्लीज, मत देखो वहां,” सीमा ने शर्म से अपने हाथों से अपनी चूत छुपाने की कोशिश की।
मैंने उसके हाथ हटाए, उसकी पैंटी खींची, उसकी चूत दिखी, गुलाबी फांके, काले बाल, पानी से तर। मैंने अपनी उंगली उसकी चूत पर रखी, सहलाया, “आह, सुमित, नहीं, वहां मत छुओ,” सीमा चिल्लाई।
मैंने उंगली अंदर डाली, सीमा की चूत बहुत तंग थी, गरम गरम थी, चिपचिपी थी। “आह, दर्द हो रहा है, निकालो,” सीमा कराही।
मैंने उंगली अंदर बाहर करनी शुरू की, सीमा की कराहियां मदहोशी में बदल गईं, “आह, आह, अब अच्छा लग रहा है, और करो, और अंदर डालो।”
मैंने दो उंगलियां डाल दीं, सीमा की चूत फैलने लगी, पानी निकलने लगा। “आह, सुमित, बहुत मजा आ रहा है, मेरी चूत को और चोदो,” सीमा चिल्लाने लगी।
अब मैंने अपनी शॉर्ट्स उतारी, मेरा 9 इंच का लंड बाहर निकल आया, खड़ा, मोटा, नसें फूली हुई। सीमा ने देखा तो डर गई, “ये तो बहुत बड़ा है, मेरी चूत में नहीं जाएगा, प्लीज मत डालो, दर्द होगा।”
मैंने उसके पैर उठाए, उसकी चूत के मुंह पर लंड रखा, धीरे से धक्का दिया। मेरा लंड का सिरा अंदर गया, सीमा चीख पड़ी, “आह, बहुत दर्द हो रहा है, निकालो, मेरी चूत फट जाएगी।”
मैंने रुकने का नाम नहीं लिया, धीरे धीरे धक्के मारे, मेरा लंड अंदर जाता गया, सीमा की चूत फैलती गई, उसकी कराहियां तेज होती गईं। “आह, आह, बहुत मोटा है, मेरी चूत फट रही है,” सीमा रो रही थी।
आखिरकार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। मैंने रुककर उसे किस किया, “शांत हो जाओ दीदी, अब मजा आएगा।”
फिर मैंने धक्के मारने शुरू किए, धीरे धीरे, फिर तेजी से। सीमा की चूत से आवाजें आने लगीं चप चप की, पानी निकलने लगा। “आह, अब अच्छा लग रहा है, और तेज करो,” सीमा चिल्लाने लगी। जन्माष्टमी की चुदाई – पड़ोसन और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई
मैंने पूरी ताकत से धक्के मारे, उसकी चूत में पूरा लंड डालकर उसको पेल रहा था। सीमा के चूचे उछल रहे थे, मैंने उनको पकड़ लिया, निप्पलों को काट रहा था। “आह, सुमित, बहुत मजा आ रहा है, मेरी चूत को फाड़ दो, और तेज,” सीमा पागल होकर चिल्ला रही थी।
मैंने उसके पैर अपने कंधों पर रखे, और गहराई से धक्के मारने लगा। मेरा लंड उसकी चूत की सबसे गहरी जगह तक पहुंच रहा था, सीमा की आंखें बाहर निकलने को आ रही थीं। “आह, आह, मर गई, मेरी चूत फट गई, बहुत गहरा जा रहा है,” सीमा चीख रही थी।
फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया, पीछे से उसकी चूत में लंड डाला। सीमा की गांड मेरे सामने थी, मैंने उसकी गांड पर थपथपाया, फिर जोर से धक्का दिया। मेरा लंड पूरी तरह से अंदर चला गया, सीमा चीख पड़ी, “आह, पीछे से और भी गहरा जा रहा है, मेरी चूत की दीवारें चटक रही हैं।”
मैंने पीछे से जोर जोर से धक्के मारे, सीमा की चूत में पूरा लंड डालकर उसको पेल रहा था। उसकी चूत से पानी निकल रहा था, नीचे बिस्तर पर गिर रहा था, आवाजें आ रही थीं चप चप की। “आह, सुमित, मैं झड़ने वाली हूं, और तेज करो, मेरी चूत को फाड़ दो,” सीमा चिल्ला रही थी।
मैंने पूरी ताकत से धक्के मारे, सीमा की चूत कांपने लगी, वो झड़ गई, उसकी चूत से गरम गरम पानी निकलने लगा, मेरे लंड पर, मेरी जांघों पर। सीमा थककर बिस्तर पर गिर गई, उसकी सांसें तेज चल रही थीं, उसकी चूत लाल हो गई थी, फैल गई थी, पानी से तर थी।
“सुमित, मैंने कभी सोचा नहीं था कि इतना मजा आ सकता है, तुम्हारा लंड बहुत शानदार है,” सीमा ने कहा, उसे ये नहीं पता था कि मैंने औरों के साथ भी ये करने वाला हूं।
पायल के साथ दूसरी मुलाकात और उसकी जिद
अगले दिन पायल आई, वो सीमा की दोस्त थी, 28 साल की, पतली कमर, भारी चूचे। वो मुझसे मिलने आई थी क्योंकि सीमा ने उसे मेरे बारे में बताया था।
“सुमित, सीमा ने तुम्हारे बारे में बहुत कुछ बताया है, क्या सच में तुम्हारा इतना बड़ा है?” पायल ने सीधे सवाल पूछा।
मैंने शरमा कर कहा, “क्या बताऊं दीदी?”
“दिखाओ ना,” पायल ने कहा।
मैंने मना किया, “नहीं दीदी, ये गलत है।”
पायल ने जिद की, “प्लीज दिखाओ, मुझे देखना है।”
मैंने कहा, “ठीक है, पर पहले आप भी कुछ दिखाओ।”
पायल ने शरमा कर कहा, “मैं क्या दिखाऊं?”
“अपने चूचे दिखाओ,” मैंने कहा।
पायल ने मना किया, “नहीं, ये बहुत शर्म की बात है।”
मैंने कहा, “तो फिर मैं भी नहीं दिखाऊंगा।”
पायल सोचने लगी, फिर उसने अपना टॉप उतारा, अब वो सिर्फ ब्रा में थी। “अब तुम दिखाओ,” पायल ने कहा। जन्माष्टमी की चुदाई – पड़ोसन और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई
मैंने कहा, “पहले ब्रा भी उतारो।”
पायल ने शरमा कर अपनी ब्रा खोली, उसके चूचे बाहर आ गए, गोल गोल, गुलाबी निप्पल। मैंने उसके चूचों को देखा, मेरा लंड खड़ा हो गया।
“अब तुम दिखाओ,” पायल ने कहा।
मैंने अपनी पैंट खोली, मेरा लंड बाहर निकल आया, खड़ा, मोटा। पायल ने देखा तो उसकी आंखें खुली रह गईं, “ओह माय गॉड, ये तो बहुत बड़ा है, मुझे चखना है।”
पायल ने मेरे लंड को पकड़ा, सहलाया, फिर मुंह में ले लिया। वो चूस रही थी, चाट रही थी, मेरा लंड उसके मुंह में अंदर बाहर हो रहा था। “आह, पायल, बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
पायल ने मेरा लंड चूसते हुए अपनी सलवार उतार दी, अब वो सिर्फ पैंटी में थी। उसने मेरा लंड अपने हाथ में लिया, अपनी पैंटी पर रगड़ने लगी। “सुमित, मुझे ये अपनी चूत में चाहिए,” पायल ने कहा।
मैंने कहा, “पहले मुझे तुम्हारी चूत दिखाओ।”
पायल ने शरमा कर अपनी पैंटी उतारी, उसकी चूत दिखी, छोटी सी, गुलाबी, बिल्कुल साफ, एक भी बाल नहीं, पानी से तर। मैंने उसकी चूत को छुआ, वो कांप गई, “आह, हल्के से छुओ, मेरी चूत बहुत सेंसिटिव है।”
मैंने उंगली उसकी चूत पर रखी, धीरे से सहलाया, पायल सिसकियां भरने लगी, “आह, आह, बहुत मजा आ रहा है, और करो।”
मैंने उंगली अंदर डाली, पायल की चूत बहुत तंग थी, मेरी उंगली को कस रही थी। “आह, सुमित, मेरी चूत बहुत तंग है, तुम्हारा लंड नहीं जाएगा,” पायल ने कहा।
मैंने कहा, “एक बार कोशिश तो करो।”
पायल ने मना किया, “नहीं, बहुत दर्द होगा, मैं डर रही हूं।”
मैंने उसे समझाया, “डरो मत, धीरे से करूंगा।”
मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया, उसके पैर फैलाए, उसकी चूत के मुंह पर लंड रखा। पायल कांप रही थी, “प्लीज धीरे से डालना, मेरी चूत बहुत छोटी है,” पायल ने कहा।
मैंने धीरे से धक्का दिया, मेरा लंड का सिरा अंदर गया, पायल चीख पड़ी, “आह, बहुत दर्द हो रहा है, निकालो, मेरी चूत फट रही है।”
मैंने रुकने का नाम नहीं लिया, धीरे धीरे धक्के मारे, पायल की चूत फैलती गई, उसकी कराहियां तेज होती गईं। “आह, आह, बहुत मोटा है, मेरी चूत फट जाएगी,” पायल रो रही थी।
आखिरकार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। पायल की आंखों से आंसू निकल रहे थे, “आह, इतना गहरा, मेरी चूत की दीवारें टूट रही हैं,” पायल कराह रही थी।
मैंने रुककर उसे किस किया, फिर धीरे से धक्के मारने शुरू किए। पायल की चूत से पानी निकलने लगा, दर्द कम होने लगा, मजा आने लगा। “आह, अब अच्छा लग रहा है, और तेज करो,” पायल चिल्लाने लगी।
मैंने तेजी से धक्के मारे, पायल की चूत में पूरा लंड डालकर उसको पेल रहा था। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं चप चप की, पानी निकल रहा था। “आह, सुमित, बहुत मजा आ रहा है, मेरी चूत को और चोदो,” पायल पागल होकर चिल्ला रही थी।
मैंने उसे घोड़ी बनाया, पीछे से उसकी चूत में लंड डाला। पायल की गांड मेरे सामने थी, मैंने उसकी गांड पर थपथपाया, फिर जोर से धक्का दिया। पायल चीख पड़ी, “आह, पीछे से और भी गहरा जा रहा है, मेरी चूत फट गई।”
मैंने पीछे से जोर जोर से धक्के मारे, पायल की चूत में पूरा लंड डालकर उसको पेल रहा था। उसकी चूत से पानी निकल रहा था, नीचे बिस्तर पर गिर रहा था। “आह, मैं झड़ने वाली हूं, और तेज करो,” पायल चिल्ला रही थी।
मैंने पूरी ताकत से धक्के मारे, पायल की चूत कांपने लगी, वो झड़ गई, उसकी चूत से गरम गरम पानी निकलने लगा, मेरे लंड पर, मेरी जांघों पर। पायल थककर बिस्तर पर गिर गई, उसकी चूत लाल हो गई थी, फैल गई थी, पानी से तर थी।
“सुमित, मैंने कभी सोचा नहीं था कि इतना बड़ा लंड हो सकता है, मेरी चूत को तुमने पूरी तरह से फाड़ दिया,” पायल ने कहा, उसे ये नहीं पता था कि मैंने सीमा के साथ भी ये किया है।
मोनिका के साथ तीसरी मुलाकात और उसकी अनुभवी चूत
अगले दिन मोनिका आई, वो पायल की मां थी, 48 साल की, पर जवानी से भरपूर, गोरी गोरी, भारी भरकम चूचे। वो मुझसे शिकायत करने आई थी कि मैंने उसकी बेटी के साथ क्या किया।
“सुमित, तुमने मेरी बेटी के साथ क्या किया? वो रो रही थी, उसकी चूत लाल हो गई है,” मोनिका ने गुस्से में कहा।
“सॉरी आंटी, वो खुद आई थी,” मैंने कहा।
“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? मैं पुलिस में शिकायत करूंगी,” मोनिका ने धमकी दी।
मैंने कहा, “आंटी, प्लीज, मैं कुछ भी करने को तैयार हूं, बस शिकायत मत करो।”
मोनिका ने सोचा, फिर कहा, “ठीक है, पर पहले मुझे दिखाओ कि तुम्हारे पास ऐसा क्या है जो मेरी बेटी को इतना मजा आया।”
मैंने अपनी पैंट खोली, मेरा लंड बाहर निकल आया, खड़ा, मोटा। मोनिका ने देखा तो उसकी आंखें खुली रह गईं, “ओह, ये तो बहुत बड़ा है, कोई आश्चर्य नहीं कि मेरी बेटी को इतना मजा आया।”
मोनिका ने मेरे लंड को पकड़ा, सहलाया, “मुझे भी चखना है इसे,” मोनिका ने कहा और मुंह में ले लिया।
वो चूस रही थी, चाट रही थी, उसके अनुभवी हाथ मेरे लंड को अच्छे से चूस रहे थे। “आह, आंटी, बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
मोनिका ने मेरा लंड चूसते हुए अपनी साड़ी उतार दी, अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसने ब्लाउज भी खोल दिया, उसके बड़े बड़े चूचे बाहर आ गए, लटकते हुए, गहरे गुलाबी निप्पल।
“सुमित, मेरी चूत को भी चोदो, मुझे बहुत दिनों से इतना बड़ा लंड चाहिए था,” मोनिका ने कहा।
मैंने कहा, “पहले मुझे तुम्हारी चूत दिखाओ।”
मोनिका ने अपना पेटीकोट उठाया, उसकी चूत दिखी, बालों वाली, अनुभवी, थोड़ी ढीली, पर गरम गरम, पानी से तर। मैंने उसकी चूत को छुआ, वो कांप गई, “आह, हल्के से छुओ, मेरी चूत बहुत सेंसिटिव है।”
मैंने उंगली उसकी चूत पर रखी, धीरे से सहलाया, मोनिका सिसकियां भरने लगी, “आह, आह, बहुत मजा आ रहा है, और करो।”
मैंने उंगली अंदर डाली, मोनिका की चूत ढीली थी, पर गरम गरम थी, मेरी उंगली को चूस रही थी। “आह, सुमित, मेरी चूत को और चोदो,” मोनिका ने कहा।
मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया, उसके पैर फैलाए, उसकी चूत के मुंह पर लंड रखा। मोनिका कांप रही थी, “प्लीज धीरे से डालना, मेरी चूत बहुत भूखी है,” मोनिका ने कहा।
मैंने धीरे से धक्का दिया, मेरा लंड आसानी से अंदर चला गया, मोनिका की चूत ढीली थी, पर गरम गरम थी। “आह, बहुत मजा आ रहा है, और अंदर डालो,” मोनिका कराही।
मैंने पूरा लंड अंदर डाल दिया, मोनिका की चूत ने मेरे लंड को चूस लिया, “आह, इतना गहरा, मेरी चूत को पूरा भर दिया,” मोनिका चिल्लाई।
मैंने धक्के मारने शुरू किए, तेजी से, मोनिका की चूत में पूरा लंड डालकर उसको पेल रहा था। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं चप चप की, पानी निकल रहा था। “आह, सुमित, बहुत मजा आ रहा है, मेरी चूत को और चोदो,” मोनिका पागल होकर चिल्ला रही थी।
मैंने उसे घोड़ी बनाया, पीछे से उसकी चूत में लंड डाला। मोनिका की गांड मेरे सामने थी, मैंने उसकी गांड पर थपथपाया, फिर जोर से धक्का दिया। मोनिका चीख पड़ी, “आह, पीछे से और भी गहरा जा रहा है, मेरी चूत को पूरी तरह से फाड़ दो।”
मैंने पीछे से जोर जोर से धक्के मारे, मोनिका की चूत में पूरा लंड डालकर उसको पेल रहा था। उसकी चूत से पानी निकल रहा था, नीचे बिस्तर पर गिर रहा था। “आह, मैं झड़ने वाली हूं, और तेज करो,” मोनिका चिल्ला रही थी।
मैंने पूरी ताकत से धक्के मारे, मोनिका की चूत कांपने लगी, वो झड़ गई, उसकी चूत से गरम गरम पानी निकलने लगा, मेरे लंड पर, मेरी जांघों पर। मोनिका थककर बिस्तर पर गिर गई, उसकी चूत लाल हो गई थी, पानी से तर थी।
“सुमित, मैंने इतने सालों में इतना मजा कभी नहीं लिया, तुम्हारा लंड बहुत शानदार है,” मोनिका ने कहा, उसे ये नहीं पता था कि मैंने सीमा और पायल दोनों के साथ भी ये किया है।
नायरा के साथ चौथी मुलाकात और उसकी कुंवारी चूत
अगले दिन नायरा आई, वो 24 साल की, पड़ोस में नई आई थी, उसके पति सेना में थे, वो अक्सर अकेली रहती थी। वो मुझसे मिलने आई थी क्योंकि उसने सुना था कि मैंने मोहल्ले की औरतों को बहुत मजा दिया है।
“सुमित भैया, मुझे भी वो मजा चाहिए जो दूसरों को मिला है,” नायरा ने शरमा कर कहा।
“पर नायरा, तुम तो शादीशुदा हो,” मैंने कहा।
“मेरे पति तो महीनों में एक बार आते हैं, मुझे बहुत तड़पना पड़ता है,” नायरा ने कहा।
मैंने कहा, “ठीक है, पर पहले मुझे तुम्हारी चूत दिखाओ।”
नायरा ने शरमा कर अपनी साड़ी उतारी, फिर ब्लाउज, फिर पेटीकोट, अब वो बिल्कुल नंगी थी। उसकी चूत दिखी, गोरी गोरी, गुलाबी फांके, छोटी सी, बिल्कुल साफ, एक भी बाल नहीं, पानी से तर।
“सुमित भैया, मेरी चूत बहुत तंग है, मुझे डर लग रहा है,” नायरा ने कहा।
मैंने कहा, “डरो मत, धीरे से करूंगा।”
मैंने अपनी पैंट खोली, मेरा लंड बाहर निकल आया, खड़ा, मोटा। नायरा ने देखा तो डर गई, “ये तो बहुत बड़ा है, मेरी चूत में नहीं जाएगा, मेरी चूत अभी तक कुंवारी है जैसे, मेरे पति का छोटा है।”
मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया, उसके पैर फैलाए, उसकी चूत के मुंह पर लंड रखा। नायरा कांप रही थी, “प्लीज धीरे से डालना, मेरी चूत बहुत तंग है,” नायरा ने कहा। जन्माष्टमी की चुदाई – पड़ोसन और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई
मैंने धीरे से धक्का दिया, मेरा लंड का सिरा अंदर गया, नायरा चीख पड़ी, “आह, बहुत दर्द हो रहा है, निकालो, मेरी चूत फट रही है, खून निकल रहा है।”
मैंने रुकने का नाम नहीं लिया, धीरे धीरे धक्के मारे, नायरा की चूत फैलती गई, उसकी कराहियां तेज होती गईं। “आह, आह, बहुत मोटा है, मेरी चूत फट जाएगी,” नायरा रो रही थी।
आखिरकार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। नायरा की आंखों से आंसू निकल रहे थे, उसकी चूत से खून निकल रहा था, “आह, इतना गहरा, मेरी चूत की दीवारें टूट रही हैं,” नायरा कराह रही थी।
मैंने रुककर उसे किस किया, फिर धीरे से धक्के मारने शुरू किए। नायरा की चूत से पानी निकलने लगा, दर्द कम होने लगा, मजा आने लगा। “आह, अब अच्छा लग रहा है, और तेज करो,” नायरा चिल्लाने लगी।
मैंने तेजी से धक्के मारे, नायरा की चूत में पूरा लंड डालकर उसको पेल रहा था। उसकी चूत से आवाजें आ रही थीं चप चप की, पानी निकल रहा था। “आह, सुमित भैया, बहुत मजा आ रहा है, मेरी चूत को और चोदो,” नायरा पागल होकर चिल्ला रही थी।
मैंने उसे घोड़ी बनाया, पीछे से उसकी चूत में लंड डाला। नायरा की गांड मेरे सामने थी, मैंने उसकी गांड पर थपथपाया, फिर जोर से धक्का दिया। नायरा चीख पड़ी, “आह, पीछे से और भी गहरा जा रहा है, मेरी चूत फट गई।”
मैंने पीछे से जोर जोर से धक्के मारे, नायरा की चूत में पूरा लंड डालकर उसको पेल रहा था। उसकी चूत से पानी निकल रहा था, नीचे बिस्तर पर गिर रहा था। “आह, मैं झड़ने वाली हूं, और तेज करो,” नायरा चिल्ला रही थी।
मैंने पूरी ताकत से धक्के मारे, नायरा की चूत कांपने लगी, वो झड़ गई, उसकी चूत से गरम गरम पानी निकलने लगा, मेरे लंड पर, मेरी जांघों पर। नायरा थककर बिस्तर पर गिर गई, उसकी चूत लाल हो गई थी, खून और पानी से तर थी।
“सुमित भैया, मैंने कभी सोचा नहीं था कि इतना मजा आ सकता है, मेरी चूत को तुमने पूरी तरह से फाड़ दिया, मैं तो तुम्हारी हो गई,” नायरा ने कहा, उसे ये नहीं पता था कि मैंने सीमा, पायल और मोनिका तीनों के साथ भी ये किया है।
ये थी जन्माष्टमी की वो रात और उसके बाद की कहानियां, जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। चारों औरतें, चारों अलग अलग तरह से, चारों को नहीं पता था कि मैंने दूसरों के साथ भी ये किया है। हर एक को लगा कि वो पहली औरत है जो मेरे लंड को अपनी चूत में ले रही है, हर एक को लगा कि मैंने सिर्फ उसी के साथ सेक्स किया है। सीमा को नहीं पता था कि मैंने पायल, मोनिका और नायरा के साथ किया है। पायल को नहीं पता था कि मैंने सीमा, मोनिका और नायरा के साथ किया है। मोनिका को नहीं पता था कि मैंने सीमा, पायल और नायरा के साथ किया है। और नायरा को नहीं पता था कि मैंने सीमा, पायल और मोनिका के साथ किया है। हर एक को ये लगा कि मैंने सिर्फ उसी के साथ ये किया है, हर एक को ये लगा कि मैं उसी का हूं, हर एक को ये लगा कि मेरा लंड सिर्फ उसकी चूत के लिए है। सीमा की तंग चूत, पायल की सेंसिटिव चूत, मोनिका की अनुभवी चूत, और नायरा की कुंवारी चूत, चारों अलग अलग तरह की चूतें, चारों को अलग अलग तरह से चोदा, चारों को अलग अलग तरह से कराहाया, चारों से अलग अलग तरह का मजा लिया, ये थी मेरी जिंदगी की सबसे यादगार रातें।
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