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वासना का असली मज़ा, सिर्फ 'हिंदी सेक्स स्टोरी' के साथ।

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वासना का असली मज़ा, सिर्फ 'हिंदी सेक्स स्टोरी' के साथ।

फेल होने का डर: मेरी खड़ूस टीचर ने मुझे पास करने के लिए राखी शर्त

Hindi sex stories, June 16, 2026June 16, 2026

मैं राहुल। 21 साल का एक साधारण सा लड़का जो MCA सेकंड ईयर में पढ़ता था। मेरी जिंदगी में कभी कुछ खास नहीं हुआ… जब तक कि वो दिन न आया। फेल होने का डर: मेरी खड़ूस टीचर ने मुझे पास करने के लिए राखी शर्त

मार्च का महीना था। कॉलेज का आखिरी हफ्ता। नोटिस बोर्ड पर ‘मैथमेटिक्स-2’ के इंटरनल मार्क्स लगे थे। मैंने अपने नाम के आगे देखा—08/30।

मेरा दिल जैसे रुक सा गया।

पास होने के लिए कम से कम 12 नंबर चाहिए थे। इसका मतलब था कि मैं फाइनल एग्जाम में बैठने के लायक भी नहीं था। मेरा पूरा साल बर्बाद होने की कगार पर था।

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और इस तबाही की वजह थीं… अंजलि मैम।

अंजलि शर्मा। 32 साल की, गणित की प्रोफेसर। पूरे कॉलेज में उन्हें ‘खड़ूस’ कहा जाता था। कोई उनसे आंख मिलाकर बात नहीं कर सकता था। उनका चेहरा हमेशा गंभीर, आंखें चश्मे के पीछे से तीखी, और मिजाज… जैसे किसी ने उनसे उनकी खुशी छीन ली हो।

लेकिन मैंने कभी किसी से नहीं कहा… कि मैं रोजाना उनकी क्लास इसलिए नहीं छोड़ता था क्योंकि मुझे मैथ्स पसंद था। मैं जाता था क्योंकि… क्योंकि उनमें कुछ था।

जब वो बोर्ड पर समीकरण लिखती थीं, तो उनकी कमर का वो हल्का सा मोड़, उनके हाथों की वो नरम उंगलियां जो चॉक पकड़ती थीं, और उनकी आवाज… वो आवाज जो कड़क होने के बावजूद मधुर लगती थी।

मैं जानता था कि मैं गलत सोच रहा हूं। वो मेरी टीचर थीं। लेकिन दिल कहां सुनता है?

उस शाम का सन्नाटा

मैंने हिम्मत जुटाई। शाम के साढ़े पांच बजे थे। पूरा स्टाफ जा चुका था। मैंने उनके केबिन के दरवाजे पर दस्तक दी।

“May I come in, मैम?”

दरवाजा खुला। वो वहां बैठी थीं… अकेली। चश्मे के पीछे उनकी आंखें थकी हुई लग रही थीं। शायद वो भी किसी चीज से परेशान थीं।

“आओ, राहुल। मुझे पता था तुम आओगे,” उन्होंने कहा। उनकी आवाज में आज कोई कड़कपन नहीं था… बस थकान थी।

मैं अंदर गया। केबिन में हल्की सी शाम की धूप खिड़की से छनकर आ रही थी। हवा में उनके परफ्यूम की खुशबू थी… लेकिन आज वो खुशबू अलग लग रही थी। जैसे उनकी खुद की खुशबू हो।

“मैम, प्लीज मुझे 4 नंबर दे दीजिए,” मैंने हाथ जोड़े। मेरी आवाज कांप रही थी। “नहीं तो मेरा साल बर्बाद हो जाएगा। मेरे पापा ने मुझे बहार से पढ़ाया है… वो ये बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।”

मेरी आंखें नम हो गईं। मैं रोने लगा। हां, मैं एक 21 साल का लड़का था जो अपनी टीचर के सामने रो रहा था। लेकिन मुझे कोई शर्म नहीं आई। डर इतना बड़ा था।

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अंजलि मैम ने मुझे देखा। उनकी आंखों में कुछ बदला… वो सख्ती जो हमेशा रहती थी, वो कम हो गई।

“बैठो, राहुल,” उन्होंने कहा।

मैं बैठा। वो उठीं। उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा ढीला हुआ। वो मेरे पास आईं… इतने करीब कि मैं उनकी सांसें महसूस कर सकता था।

“तुम्हें पता है, मैंने तुम्हें हमेशा ध्यान से देखा है,” उन्होंने कहा।

मेरा दिल रुक सा गया।

“तुम हमेशा मेरी क्लास में ध्यान से नहीं सुनते थे। लेकिन मैंने देखा… तुम मुझे देखते थे।”

मैंने नीचे देखा। शर्म से मेरे कान लाल हो गए।

“मैम, मैं… मैं सॉरी,” मैंने कहा।

“शशश…,” उन्होंने मेरा चेहरा ऊपर उठाया। उनके हाथ… वो नरम, ठंडे हाथ जो मेरे गर्म चेहरे को छू रहे थे। “मैंने कहा कुछ गलत किया है तुमने?”

मैंने उनकी आंखों में देखा। वो आंखें आज अलग लग रही थीं। नरम, प्यारी… और कुछ और भी।

“राहुल, मैं भी इंसान हूं,” उन्होंने कहा। उनकी आवाज कांप रही थी। “मेरी भी अपनी कहानी है। मेरी शादी… वो तो बस एक समझौता था। पति से अलग रहती हूं पिछले 3 साल से। कॉलेज आना, पढ़ाना… यही मेरी जिंदगी है।”

मैंने कभी नहीं सोचा था कि वो इतना बताएंगी। खड़ूस अंजलि मैम… अकेली, दुखी, औरत।

“मैं जानती हूं तुम मुझे कैसे देखते हो,” उन्होंने कहा। “और मैंने भी… मैंने भी तुम्हें देखा है। तुम्हारी उम्र में क्या होता है, मैं जानती हूं।”

केबिन में सन्नाटा था। बाहर पक्षियों की आवाजें आ रही थीं।

“मैं तुम्हें पास कर सकती हूं, राहुल,” उन्होंने कहा। “लेकिन… मुझे भी कुछ चाहिए।”

“क्या मैम?” मैंने पूछा।

वो मुस्कुराईं। वो मुस्कान में दर्द था, अकेलापन था, और कुछ और भी।

“कंपनी चाहिए,” उन्होंने कहा। “एक रात की… बस एक रात की। जहां मैं वो अंजलि हूं जो कभी थी। न कि ये खड़ूस टीचर।”

मैं समझ गया। लेकिन इस बार कोई घिन नहीं हुई, कोई डर नहीं हुआ। बस एक तड़प हुई… उनके लिए। उनके दर्द को समझने की।

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“मैं… मैं कभी किसी के साथ…” मैंने शर्माते हुए कहा।

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा। “मैं जानती हूं। और मैं भी… बहुत समय से किसी के करीब नहीं आई।”

हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। दो अकेले लोग… दो भूखे दिल।

रात के ठीक नौ बजे मैं उनके बताए हुए अपार्टमेंट पर पहुंचा। ये एक पुरानी बिल्डिंग थी, शहर के एक शांत कोने में। मैंने लिफ्ट में “-fourth floor” का बटन दबाया। मेरा दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि मुझे लगा कोई मेरी धड़कनें सुन लेगा।

लिफ्ट खुली। सामने 402 नंबर का दरवाजा था। मैंने हाथ उठाया… रुका… फिर दस्तक दी।

कुछ पल की खामोशी। फिर दरवाजा खुला।

मैं हैरान रह गया।

वो साड़ी में नहीं थीं। एक साधारण सी सफेद कुर्ती और हल्की नीली पैंट में थीं। बाल खुले, गीले। शायद अभी-अभी नहाकर आई थीं। उनके चेहरे पर कोई मेकअप नहीं… बस वो काजल जो हमेशा लगाती थीं। और वो चश्मा… नहीं था।

बिना चश्मे के वो अलग लग रही थीं। ज्यादा नरम, ज्यादा असली। उनकी आंखें… वो आंखें जो हमेशा छुपी रहती थीं, अब साफ दिख रही थीं। भूरे रंग की, गहरी, प्यार भरी।

“अंदर आओ, राहुल,” उन्होंने कहा। उनकी आवाज आज अलग थी। नरम, प्यारी, थोड़ी कांपती हुई।

मैं अंदर गया। ये एक छोटा सा अपार्टमेंट था। लेकिन साफ-सुथरा, सजा हुआ। दीवारों पर पेंटिंग्स, बुकशेल्फ पर किताबें, और एक खिड़की से शहर की रोशनी आ रही थी।

“बैठो,” उन्होंने सोफे की तरफ इशारा किया।

मैं बैठा। वो किचन में गईं। “चाय पीओगे? या… कुछ और?”

“चाय ठीक है,” मैंने कहा।

मैंने कमरा देखा। यहां कोई पुरुषों की चीज नहीं थी। कोई जूते, कोई शर्ट, कुछ नहीं। ये उनका अकेलेपन का घर था।

वो चाय लेकर आईं। मेरे बगल में बैठीं… लेकिन थोड़ी दूर। हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। कोई बोल नहीं रहा था।

“मैं… मैंने कभी किसी को यहां नहीं बुलाया,” उन्होंने अचानक कहा। “3 साल में… तुम पहले हो।”

मैंने उनका हाथ पकड़ा। वो कांप रहा था। “मैं भी पहली बार किसी के लिए ऐसा महसूस कर रहा हूं,” मैंने कहा।

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“क्या महसूस कर रहे हो?” उन्होंने पूछा।

“डर,” मैंने कहा। “और… और कुछ और भी।”

“क्या?”

“प्यार,” मैंने कहा। “या शायद… शायद प्यार से भी ज्यादा।”

उनकी आंखें नम हो गईं। वो मेरे करीब आईं। अब हमारे कंधे एक-दूसरे से टच हो रहे थे।

“मैं डरती हूं, राहुल,” उन्होंने कहा। “बहुत डरती हूं।”

“किससे?”

“इस पल से। कि अगर ये खत्म हो गया तो? कल सुबह क्या होगा? क्या मैं फिर वही खड़ूस टीचर बन जाऊंगी जो सबसे नफरत करती है? क्या तुम मुझे वैसे ही देखोगे?”

मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया। “मैं वादा करता हूं। कल जो भी हो, आज रात… आज रात तुम मेरी अंजलि हो। और मैं तुम्हारा राहुल। बस।”

उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। वो मेरे करीब आईं। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। वो रो रही थीं… और मैं… मैं भी रोने लगा।

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हम दोनों एक-दूसरे को गले लगाए रो रहे थे। दो अकेले लोग… दो टूटे हुए दिल।

फिर मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया। उनकी आंखें… वो आंखें जो कभी डांटती थीं, आज वही आंखें मुझे प्यार से देख रही थीं।

मैंने धीरे से अपने होंठ उनके होंठों पर रखे।

वो पहला चुंबन…

वो डरा हुआ था, वो अनजान था, लेकिन वो सच्चा था। उनके होंठ कांप रहे थे। मैंने अपने हाथ उनके चेहरे पर रखे और धीरे से किस किया।

पहले हल्का-हल्का… फिर गहरा। उन्होंने अपने हाथ मेरे बालों में डाल दिए। मैंने उनकी कमर को पकड़ लिया।

हम एक-दूसरे में खो रहे थे। वो किस जो शुरू में धीमा था, अब गहरा होता जा रहा था। उनकी जीभ मेरे मुंह में आई। मैंने उसे अपनी जीभ से छुआ।

“आह्ह्ह…,” उनके मुंह से आवाज निकली।

मैंने उन्हें और करीब खींचा। अब वो मेरी गोद में थीं। मेरे हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे। उनकी कुर्ती के नीचे मैं उनकी गर्म त्वचा महसूस कर सकता था।

“राहुल…,” उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाया। “मैंने कभी… मैंने कभी किसी से प्यार का अहसास नहीं किया।”

“मैं भी,” मैंने कहा। “लेकिन अब… अब मुझे लग रहा है कि मैं…”

“क्या?”

“मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं,” मैंने कहा। “पागलों की तरह। बिना सोचे-समझे। बस… बस हो गया।”

वो रोने लगीं। लेकिन ये खुशी के आंसू थे। वो मेरे चेहरे पर किस करने लगीं। मेरे माथे पर, आंखों पर, नाक पर, गालों पर… और फिर होंठों पर।

“मैं भी,” उन्होंने कहा। “मैं भी तुमसे प्यार करती हूं। इतने दिनों से… जब से तुम मेरी क्लास में आते थे और मुझे घूरते थे, मैं जानती थी। लेकिन मैं… मैं टीचर थी।”

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“और अब?”

“अब मैं सिर्फ एक औरत हूं। जो प्यार चाहती है। जो छूना चाहती है। जो… जो तुम्हें चाहती है।”

मैंने उन्हें उठाया। वो हल्की थीं। मैंने पूछा, “बेडरूम कहां है?”

उन्होंने एक दरवाजे की तरफ इशारा किया।

मैं उन्हें गोद में उठाए उस कमरे में गया। एक छोटा सा बेडरूम। साफ-सुथरा। बेड पर सफेद चादरें बिछी थीं। एक साइड लैंप जल रहा था।

मैंने उन्हें बेड पर बैठाया। वो मुझे देख रही थीं। उनकी आंखों में वो नजर थी… जो किसी भी आदमी को पागल कर दे।

“धीरे-धीरे…,” उन्होंने कहा। “आज रात… आज रात हमारी है। कोई जल्दी नहीं।”

मैंने उनके सामने घुटनों के बल बैठ गया। उनके पैरों के पास। मैंने उनके पैरों को छुआ। वो कांप उठीं।

“क्या हो रहा है?” मैंने पूछा।

“कुछ नहीं… बस… बस अच्छा लग रहा है,” उन्होंने कहा।

मैंने धीरे से उनकी पैंटी के ऊपर से उनके पैरों को चूमा। फिर ऊपर बढ़ा। उनकी जांघें… वो गोरी, नरम जांघें।

“राहुल…,” उन्होंने मेरा नाम फुसफुसाया।

मैं उनके ऊपर आ गया। अब मैं उनके ऊपर था, लेकिन अपना वजन उन पर नहीं डाल रहा था। मैंने उनकी कुर्ती के बटन खोलने शुरू किए।

एक-एक करके। धीरे-धीरे।

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जब पहला बटन खुला, तो मैंने उनकी त्वचा को चूमा। गले के पास। फिर दूसरा बटन… और फिर तीसरा।

अब उनकी कुर्ती खुली थी। अंदर एक सफेद ब्रा थी। मैंने उसे भी खोल दिया।

और फिर… फिर मैंने उन्हें देखा।

पहली बार। उनके स्तन… वो गोरे, सुडौल स्तन। गुलाबी निप्पल्स जो खड़े हुए थे। मैं रुक गया। सांसें रुक सी गईं।

“क्या हुआ?” उन्होंने पूछा।

“तुम… तुम बहुत खूबसूरत हो,” मैंने कहा।

वो शर्मा गईं। अपने हाथों से अपने स्तनों को छुपाने की कोशिश की।

“मत छुपाओ,” मैंने कहा। “प्लीज। मैं देखना चाहता हूं। तुम्हें। सिर्फ तुम्हें।”

मैंने उनके हाथों को हटाया। और फिर… फिर मैंने उनके स्तनों को चूमा। पहले हल्के से। फिर अपने होंठों से। फिर अपनी जीभ से।

“आह्ह्ह… राहुल… धीरे…,” उन्होंने कहा।

मैं एक स्तन को मुंह में ले लिया। चूसने लगा। दूसरे को हाथ से दबाया। वो मेरे बालों में हाथ डालकर मुझे और करीब खींच रही थीं।

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“और… और नीचे…,” उन्होंने कहा।

मैं समझ गया। मैं नीचे बढ़ा। उनके पेट पर किस किया। उनकी नाभि पर। फिर… फिर उनकी पैंटी के ऊपर।

मैंने उनकी पैंटी नीचे की। धीरे से। वो उठकर मेरी मदद की।

और फिर… फिर वो खूबसूरत नजारा।

वो बिल्कुल साफ थीं। गोरी। प्यारी। मैंने उनकी चूत को देखा। वो गीली थी। तैयार थीं।

“प्लीज…,” उन्होंने कहा।

“ये… ये इतना बड़ा है,” उन्होंने फुसफुसाया। उनकी आंखों में आश्चर्य था, और कुछ और भी… कुछ डरा हुआ सा, लेकिन उत्साहित भी।

“क्या… क्या तुम ठीक हो?” मैंने पूछा, थोड़ा शर्मिंदा महसूस करते हुए।

वो मुस्कुराईं। वो मुस्कान जो किसी भी आदमी को पागल कर दे। “मैं ठीक हूं। बस… बहुत समय हो गया है। और तुम… तुम तो अभी शुरुआत में हो।”

“मैं डरा हुआ हूं,” मैंने कहा। “कहीं मैं… मैं तुम्हें दर्द ना दूं।”

वो उठीं। मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने मेरे लिंग को अपने हाथ में लिया। उनका स्पर्श… वो नरम, गर्म, प्यार भरा स्पर्श जो मेरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ गया।

“डरो मत,” उन्होंने कहा। “मैं हूं ना। हम साथ में सीखेंगे।”

उन्होंने मेरे लिंग को धीरे से सहलाया। ऊपर से नीचे तक। फिर उन्होंने उसे अपने गाल से छुआ। वो गर्मी, वो नरमाई…

“अंजलि…,” मैंने आह भरी।

“शशश…,” उन्होंने कहा। “बस महसूस करो।”

फिर उन्होंने अपनी जीभ निकाली। धीरे से, बहुत धीरे से, उन्होंने मेरे सुपाड़े को चाटा। वो एक झटका था जो मेरे पैरों से लेकर सिर तक गया।

मैंने अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। धीरे-धीरे। ऊपर से नीचे। उनकी क्लिटोरिस को चूमा।

“ओह्ह्ह… हां… राहुल… बहुत अच्छा…,” वो सिसक रही थीं।

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मैंने अपनी उंगली अंदर डाली। वो गर्म थीं। बहुत गर्म। वो कसने लगीं।

“राहुल… मैं… मैं आ गई…,” वो चिल्लाईं और झड़ गईं।

मैं ऊपर आया। उन्होंने मेरे कपड़े उतारे। जब मेरा लिंग बाहर आया, तो उनकी आंखें बड़ी हो गईं।

“तुम… तुमने कभी…?”

“नहीं,” मैंने कहा।

वो मुस्कुराईं। “तो आज मैं तुम्हें सिखाऊंगी। सब कुछ।”

उन्होंने मेरे लिंग को अपने हाथ में लिया। उनका स्पर्श… वो नरम, प्यार भरा स्पर्श। फिर उन्होंने उसे अपने मुंह में लिया।

“ओह्ह्ह… अंजलि…,” मैंने आह भरी।

वो धीरे-धीरे चूस रही थीं। मैं उनके बालों को सहला रहा था। ये पल… ये पल मैं कभी नहीं भूलूंगा।

फिर वो ऊपर आईं। “अब… अब मुझे चाहो,” उन्होंने कहा। “धीरे से… बहुत धीरे से।”

मैंने धीरे से अपना लिंग उनकी चूत पर रखा..

मैंने धीरे से अपना लिंग उनकी चूत पर रखा। वो गीली थीं, तैयार थीं, लेकिन मैं जानता था कि ये उनके लिए भी बहुत समय बाद था।

“धीरे से…,” उन्होंने फुसफुसाया। “बहुत धीरे से।”

मैंने धक्का दिया। सिर्फ सुपाड़ा अंदर गया। वो कसने लगीं। उनकी चूत बेहद टाइट थी, गर्म थी, और इतनी नरम कि मुझे लगा मैं पिघल जाऊंगा।

“आह्ह्ह… राहुल… और अंदर… धीरे से…,” उन्होंने कहा।

मैंने थोड़ा और धक्का दिया। आधा लिंग अंदर चला गया। वो मुझे कस के पकड़ लीं। उनके नाखुन मेरी पीठ में धंस गए।

“दर्द हो रहा है?” मैंने पूछा।

“नहीं… नहीं… बस… बस रुक जाओ थोड़ी देर…,” उन्होंने कहा।

मैं रुक गया। उनके ऊपर लेटा हुआ था। मैंने उनके चेहरे को देखा। उनकी आंखें बंद थीं, लेकिन मुस्कान थी। वो मुस्कान जो कह रही थी कि ये सही है, ये प्यार है।

फिर उन्होंने अपनी आंखें खोलीं। और मुझे देखा। वो नजर… वो प्यार भरी नजर।टीचर स्टूडेंट लव स्टोरी, फेल होने का डर, खड़ूस टीचर रोमांस, कॉलेज लव स्टोरी, भावनात्मक सेक्स स्टोरी, डर से प्यार तक, टीचर स्टूडेंट सेक्स, रोमांटिक टीचर स्टोरी, हिंदी लव स्टोरी, पास होने की शर्त

“आओ… पूरा आओ…,” उन्होंने कहा।

मैंने एक और धक्का दिया। पूरा लिंग अंदर चला गया। वो मुझे कस के पकड़ लीं। मेरे बालों में हाथ डाल दिए।

“तुम… तुम मेरे हो,” उन्होंने कहा। “आज रात… सिर्फ मेरे।”

मैंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। बाहर-अंदर, बाहर-अंदर। धीमी गति से। हर धक्के के साथ हम एक-दूसरे को और करीब आ रहे थे।

“कैसा लग रहा है?” मैंने पूझा।

“बहुत अच्छा… बहुत…,” उन्होंने कहा। “और तेज… थोड़ा तेज…”

मैंने गति बढ़ाई। अब मैं पूरी तेजी से उन्हें चोद रहा था। बेड की चरचराहट की आवाज, हमारी सांसों की आवाज, और उनकी सिसकारियां… सब मिलकर एक सुर बन गया था।

“राहुल… मैं… मैं फिर से आने वाली हूं…,” उन्होंने कहा।

“मैं भी… मैं भी…,” मैंने कहा।

हम दोनों एक साथ झड़े। मैंने अपना सारा वीर्य उनके अंदर छोड़ दिया। और वो… वो मुझे कस के पकड़े रहीं। उनका शरीर कांप रहा था, उनकी सांसें तेज थीं, और उनकी आंखों में आंसू थे।

मैं उनके ऊपर ही लेटा रहा। हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। बिना कुछ बोले। बस आंखों से बात कर रहे थे।

“मैंने कभी… कभी ऐसा महसूस नहीं किया,” उन्होंने कहा।

“मैं भी,” मैंने कहा।

“ये सिर्फ सेक्स नहीं था,” उन्होंने कहा।

“नहीं,” मैंने कहा। “ये प्यार था। सच्चा प्यार।”

वो मुस्कुराईं। फिर रोने लगीं। मैंने उनके आंसू पोंछे।

“क्यों रो रही हो?” मैंने पूछा।

“खुशी से,” उन्होंने कहा। “इतने सालों बाद… इतने सालों बाद मुझे किसी ने प्यार से छुआ है।”

मैंने उन्हें किस किया। हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में सो गए।

सुबह जब मेरी आंख खुली, तो धूप कमरे में आ चुकी थी। अंजलि मेरे बगल में लेटी थीं। उनका सिर मेरे सीने पर था। मैंने उनके बालों को सहलाया।

वो जागीं। उन्होंने मुझे देखा और मुस्कुराईं। वो मुस्कान… वो असली मुस्कान थी। बिना किसी मुखौटे के।

“गुड मॉर्निंग,” उन्होंने कहा।

“गुड मॉर्निंग, मेरी अंजलि,” मैंने कहा।

वो उठीं। मेज पर कागज था। उन्होंने उसे उठाया।

“तुम्हारे नंबर,” उन्होंने कहा और मुस्कुराईं। “28/30।”

मैंने हंसते हुए कहा, “मुझे पता था कि तुम करोगी।”

“नहीं,” उन्होंने कहा और मेरे करीब आईं। “ये नंबर तुम्हारे काम के हैं। कल रात… कल रात तो बस प्यार था।”

मैंने उन्हें किस किया। “तो क्या अब हम…?”

“अब हम कुछ नहीं,” उन्होंने कहा। “अब हम सब कुछ हैं।”

“लेकिन कॉलेज में…?”

“वहां मैं तुम्हारी टीचर हूं। और तुम मेरे स्टूडेंट। लेकिन यहां… यहां मैं तुम्हारी अंजलि हूं। और तुम मेरे राहुल।”

मैंने उन्हें फिर से अपनी बाहों में भर लिया।

“मैं जानता हूं कि ये आसान नहीं होगा,” मैंने कहा। “समाज, कॉलेज, सब कुछ।”

“पर जब प्यार सच्चा हो,” उन्होंने कहा, “तो रास्ते बन ही जाते हैं।”

मैंने उनके हाथ को किस किया। “मैं वादा करता हूं। मैं तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ूंगा।”

वो मेरी आंखों में देखीं। “मुझे पता है।”

हम दोनों फिर से एक-दूसरे में खो गए। सुबह की धूप में, एक नए प्यार की शुरुआत में।

Main apni diary aur kahani padhta hun aur us par pratikriya dene wale sabhi logon ko dhanyvad dena chahta hun. yadi aap apni kahaniyan ya tippaniyan sajha karna chahte han, to kripya vikasgoel4952@gmail.com par email karen ya sampark karen. main hamesha aapke mail ka intjaar karta hun.

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