गर्मियों की वो दोपहर थी जब आसमान पर बादल छाए हुए थे, लेकिन गर्मी अपने चरम पर थी। प्राची अपनी बड़ी बहन राधा के घर आई थी। राधा की शादी को दो साल हो चुके थे और प्राची कॉलेज की छुट्टियों में अपने मायके से यहाँ रुकी हुई थी। साली-जीजा की गर्म रात-एक अनकही चाहत
प्राची उस समय २२ साल की थी। उसकी उम्र के हिसाब से उसका बदन काफी विकसित हो चुका था। गोरा रंग, लंबे काले बाल, और वो नाजुक सी मुस्कान जो किसी भी पुरुष का ध्यान खींच ले। वो कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुकी थी और अब नौकरी की तलाश में थी।
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प्रफुल, उसके जीजाजी, ३० साल के थे। एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर थे। उनका रूप साधारण था, लेकिन उनकी बातचीत में एक अलग ही आकर्षण था। वो हमेशा प्राची से बहुत प्यार से बात करते थे, लेकिन आज कुछ अलग था।
राधा अपने मायके गई हुई थी कुछ दिनों के लिए। घर में सिर्फ प्रफुल और प्राची थे। यह पहला मौका था जब वे दोनों अकेले घर में थे।
शाम को जब प्रफुल ऑफिस से लौटे, तो प्राची ने दरवाजा खोला। उसने हल्की सी गुलाबी रंग की सलवार सूट पहना था, जो उसके गोरे बदन पर और भी खूबसूरत लग रहा था।
“अरे प्राची, तुमने दरवाजा खोला? राधा कहाँ है?” प्रफुल ने पूछा।
“जीजाजी, दीदी तो कल ही मायके चली गई थीं। आपको पता नहीं था?” प्राची ने मासूमियत से कहा।
प्रफुल के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आई। “अच्छा, मुझे तो लगा वो अगले हफ्ते जाएंगी।”
रात का खाना बनाने के लिए प्राची रसोई में लगी हुई थी। प्रफुल ने कमरे का कोट उतारा और सोफे पर बैठ गए। उनकी नजरें बार-बार रसोई की तरफ जा रही थीं जहाँ प्राची व्यस्त थी।
“प्राची, तुम इतनी मेहनत क्यों कर रही हो? आज बाहर से मंगा लेते,” प्रफुल ने आवाज लगाई।
“नहीं जीजाजी, मैंने सोचा आप थके हुए होंगे, इसलिए घर का बना खाना ही अच्छा रहेगा,” प्राची ने जवाब दिया।
रात के खाने में प्राची ने दाल, रोटी और सब्जी बनाई थी। दोनों डाइनिंग टेबल पर बैठे। प्रफुल बार-बार प्राची को देख रहे थे। उसकी मासूम आँखें, वो होंठ जो हल्की सी लाली लिए हुए थे, और वो गर्दन जो साड़ी के पल्ले से झाँक रही थी।
“तुम बहुत खूबसूरत हो गई हो प्राची,” प्रफुल ने अचानक कहा।
प्राची ने शर्माते हुए कहा, “जीजाजी, आप भी ना…”
“सच कह रहा हूँ। तुम्हारी दीदी भी कहती थी कि तुम्हारे रूप में कोई जादू है,” प्रफुल ने आँखों में एक अलग ही चमक के साथ कहा।
रात को सोने के समय प्राची अपने कमरे में चली गई। वो कमरा राधा-प्रफुल के बेडरूम के बगल में ही था। दीवारें पतली थीं, आवाज़ें आसानी से आती-जाती थीं।
रात के करीब ग्यारह बजे थे। प्राची को प्यास लगी तो वो पानी लेने किचन की तरफ गई। लौटते समय उसने देखा कि प्रफुल का कमरा अभी भी रोशन था। दरवाजा हल्का सा खुला था।
“जीजाजी, आप अभी तक सोए नहीं?” प्राची ने आवाज लगाई।
“अरे प्राची, अंदर आओ। बैठो थोड़ी देर,” प्रफुल ने बुलाया।
प्राची हिचकिचाते हुए अंदर गई। प्रफुल बेड पर बैठे हुए थे, उनके हाथ में एक किताब थी। लेकिन उनकी नजरें प्राची पर ही टिकी हुई थीं।
“क्या पढ़ रहे हैं जीजाजी?” प्राची ने पूछा।
“कुछ नहीं, बस यूं ही… प्राची, तुम यहाँ आकर बैठो ना, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है,” प्रफुल ने कहा।
प्राची बेड के किनारे बैठ गई। प्रफुल उसके बगल में आ गए। उनके बदन की गर्मी प्राची को महसूस हो रही थी।
“प्राची, तुम्हें पता है, मैं तुम्हें पहली बार जब देखा था, तब से ही… मतलब…” प्रफुल हकलाने लगे।
“क्या हुआ जीजाजी?” प्राची ने पूछा, उसकी साँसें तेज होने लगी थीं।
“मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूँ प्राची। बहुत ज्यादा,” प्रफुल ने उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा।
प्राची का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। वो जानती थी कि यह गलत है, लेकिन उसे भी प्रफुल में कुछ अलग ही आकर्षण महसूस होता था। उनकी परिपक्वता, उनका व्यवहार, सब कुछ।
“जीजाजी, यह ठीक नहीं है… आप मेरे जीजा हैं…” प्राची ने कम आवाज में कहा।
“मैं जानता हूँ। लेकिन दिल की बात कौन रोक सकता है प्राची? मैं तुम्हें देखकर खुद को रोक नहीं पाता,” प्रफुल ने उसका चेहरा अपने हाथों में लेते हुए कहा।
उनकी आँखों में वो चमक थी जो किसी भी लड़की को पिघला दे। प्राची नीचे देखने लगी। प्रफुल ने उसका चेहरा ऊपर उठाया।
“एक बार मुझे देखो तो सही,” प्रफुल ने कहा।
प्राची ने धीरे से आँखें उठाईं। उनकी आँखें मिलीं तो एक अजीब सा करंट सा दौड़ गया। प्रफुल ने धीरे से उसके गाल पर हाथ फेरा।
“कितनी नरम त्वचा है तुम्हारी,” प्रफुल ने फुसफुसाते हुए कहा।
प्राची शर्म से लाल हो गई। उसने कुछ नहीं कहा, बस वहीं बैठी रही। प्रफुल समझ गए कि वो मना नहीं कर रही है।
“क्या मैं तुम्हें छू सकता हूँ प्राची? बस एक बार?” प्रफुल ने पूछा।
प्राची ने धीरे से सिर हिलाया, शायद हाँ में, शायद ना में। लेकिन प्रफुल ने उसे हाँ समझा।
उन्होंने धीरे से उसके गाल को छुआ। फिर उँगली से उसके होंठों को सहलाया। प्राची की साँसें रुक सी गईं।
“जीजाजी…” वो हल्की सी आवाज में बोली।
“शhh… कुछ मत कहो,” प्रफुल ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया।
प्राची ने प्रतिरोध नहीं किया। वो उनकी बाँहों में पिघल सी गई। प्रफुल के बदन की गर्मी, उनकी मर्दाना खुशबू, सब कुछ उसे मदहोश कर रहा था।
प्रफुल ने धीरे से प्राची का चेहरा ऊपर उठाया। उनकी आँखों में वो लालसा थी जो किसी भी लड़की को घबरा दे। लेकिन प्राची घबराई नहीं, वो भी कुछ अनुभव करना चाहती थी।
“मैं तुम्हें चूम सकता हूँ?” प्रफुल ने पूछा।
प्राची ने आँखें बंद कर लीं। यह उसकी हाँ थी।
प्रफुल ने धीरे से उसके माथे पर चुंबन किया। फिर आँखों पर। फिर गालों पर। उनके होंठ प्राची की त्वचा को छू रहे थे और वो काँप उठी।
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फिर प्रफुल ने उसके होंठों को छुआ। हल्का सा, जैसे कोई पंख छू रहा हो। प्राची ने कसकर आँखें बंद कर लीं। प्रफुल ने फिर से चुंबन किया, इस बार थोड़ा जोर से।
धीरे-धीरे वो चुंबन गहरा होता गया। प्रफुल ने अपने होंठों से प्राची के होंठों को खोला और अपनी जीभ अंदर डालने की कोशिश की। प्राची पहले तो हिचकिचाई, लेकिन फिर वो भी उनका साथ देने लगी।
दोनों की जीभें एक-दूसरे से खेलने लगीं। प्रफुल ने प्राची को कसकर अपनी बाँहों में भर लिया। उनके हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे। प्राची भी उनके बालों में हाथ फेरने लगी।
करीब दस मिनट तक वो चुंबन चलता रहा। जब दोनों अलग हुए तो दोनों की साँसें फूल रही थीं।
“तुम बहुत मीठी हो प्राची,” प्रफुल ने कहा।
प्राची शर्म से उनकी छाती में मुँह छुपा ली। प्रफुल ने उसके बालों को सहलाया।
“क्या तुम मुझसे नफरत करती हो?” प्रफुल ने पूछा।
“नहीं जीजाजी… मैं… मुझे भी अच्छा लगा,” प्राची ने धीरे से कहा।
यह सुनकर प्रफुल के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आई। उन्होंने उसे और कसकर पकड़ लिया।
“मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ प्राची। रोज सोचता हूँ तुम्हारे बारे में,” प्रफुल ने कान में फुसफुसाते हुए कहा।
प्राची ने कुछ नहीं कहा, बस उनकी बाँहों में रही। उसे भी कुछ अलग सा महसूस हो रहा था। वो जानती थी कि यह सब गलत है, लेकिन फिर भी वो रोक नहीं पा रही थी।
अगली सुबह जब प्राची उठी तो उसे समझ नहीं आ रहा था कि रात को जो हुआ वो सपना था या हकीकत। लेकिन जब वो बाथरूम के पास से गुजरी तो प्रफुल वहाँ खड़े थे, केवल तौलिए में लिपटे हुए।
“गुड मॉर्निंग प्राची,” प्रफुल ने मुस्कुराते हुए कहा।
प्राची का चेहरा लाल हो गया। वो नीचे देखने लगी। प्रफुल के बदन की बनावट तौलिये से झाँक रही थी। उनकी छाती पर हल्के-हल्के बाल थे, और वो तंदुरुस्त दिख रहे थे।
“जीजाजी, आप… आप कपड़े पहन लीजिए,” प्राची ने शर्माते हुए कहा।
“अरे, तुम तो ऐसे शर्मा रही हो जैसे पहली बार देख रही हो। कल रात तो…” प्रफुल ने कहा।
“जीजाजी, प्लीज…” प्राची ने उन्हें रोकते हुए कहा।
प्रफुल ने उसका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा। “आओ ना, थोड़ी देर यहीं रुको।”
प्राची ने प्रतिरोध करने की कोशिश की लेकिन प्रफुल ने उसे कसकर पकड़ लिया। उनका तौलिया हटने लगा था और प्राची उनके बदन से सट गई थी।
“जीजाजी, कोई देख लेगा…” प्राची ने कहा।
“कौन देखेगा? घर में कोई नहीं है। सिर्फ हम दोनों हैं,” प्रफुल ने कहा और उसके गाल पर चुंबन कर दिया।
प्राची ने उन्हें धक्का देने की कोशिश की लेकिन प्रफुल मजबूत थे। उन्होंने उसे दीवार से सटा दिया और उसके गर्दन पर चुंबन करने लगे।
“आह… जीजाजी…” प्राची से हल्की सी आवाज निकल गई।
प्रफुल के हाथ उसकी कमर पर घूम रहे थे। वो उसके कानों को चूम रहे थे, और फिर गर्दन को। प्राची कमजोर पड़ती जा रही थी।
“चलो, नहा लेते हैं साथ में,” प्रफुल ने अचानक कहा।
“क्या? जीजाजी, आप पागल हो गए हैं?” प्राची ने हैरानी से कहा।
“नहीं, मैं तो बस… देखो, गर्मी भी बहुत है। एक साथ नहाएंगे तो मजा आएगा,” प्रफुल ने कहा।
प्राची ने मना किया लेकिन प्रफुल ने उसे मनाने की पूरी कोशिश की। आखिरकार प्राची ने हाँ कर दी, शायद वो भी यह अनुभव करना चाहती थी।
स्नान का आनंद
बाथरूम बड़ा था। एक बड़ा टब था जिसमें गर्म पानी भरा हुआ था। प्रफुल ने पहले तौलिया उतारा। प्राची ने आँखें बंद कर लीं लेकिन फिर भी उसने झाँककर देख लिया। प्रफुल का बदन तंदुरुस्त था, उनका लिंग खड़ा हो चुका था।
“अब तुम भी उतारो अपने कपड़े,” प्रफुल ने कहा।
प्राची काँप रही थी। उसने धीरे-धीरे अपना सलवार सूट उतारना शुरू किया। पहले दुपट्टा, फिर कुर्ता। वो केवल ब्रा और पैंटी में रह गई।
“सब उतारो प्राची,” प्रफुल ने कहा।
प्राची ने पीछे मुड़कर अपनी ब्रा खोली और पैंटी उतार दी। वो नंगी हो चुकी थी, लेकिन पीछे मुड़ी हुई थी।
प्रफुल उसके पास आए और उसे पीछे से गले लगा लिया। उनके हाथ उसके स्तनों पर चले गए। प्राची ने हल्की सी चीख भरी लेकिन प्रफुल ने उसके होंठों पर हाथ रख दिया।
“शांत रहो प्राची, मैं हूँ ना,” प्रफुल ने कहा।
उन्होंने उसे घुमाया और अब दोनों एक-दूसरे के सामने नंगे खड़े थे। प्रफुल की आँखें प्राची के बदन को देख रही थीं। उसके गोरे स्तन, पतली कमर, और वो जगह जो अभी छुपी हुई थी।
“तुम बहुत खूबसूरत हो,” प्रफुल ने फुसफुसाते हुए कहा।
उन्होंने उसे उठाया और टब में बैठा दिया। फिर वो भी उसके सामने बैठ गए। पानी गर्म था और दोनों के बदन पानी में डूबे हुए थे।
प्रफुल ने पानी से भरा हुआ एक मग उठाया और प्राची के बदन पर डालने लगे। पानी उसके स्तनों पर बह रहा था और वो और भी सुंदर लग रही थी।
“आओ, मैं तुम्हें नहलाता हूँ,” प्रफुल ने कहा।
उन्होंने साबुन लिया और प्राची के बदन पर लगाने लगे। पहले हाथ, फिर कंधे, और फिर धीरे-धीरे स्तनों की तरफ बढ़े।
प्राची ने आँखें बंद कर लीं। प्रफुल के हाथ उसके स्तनों पर घूम रहे थे। वो उन्हें सहला रहे थे, दबा रहे थे। साबुन की झाग उसके गोरे बदन पर लग रही थी।
“कैसा लग रहा है?” प्रफुल ने पूछा।
“अच्छा… बहुत अच्छा…” प्राची ने धीरे से कहा।
प्रफुल ने उसे अपनी तरफ खींचा और पानी में ही उसके होंठों को चूमने लगे। एक हाथ से वो उसके स्तनों को सहला रहे थे और दूसरे हाथ से उसकी पीठ को।
फिर वो नीचे की तरफ बढ़े। उन्होंने प्राची की जाँघों पर साबुन लगाया। धीरे-धीरे उनका हाथ अंदर की तरफ बढ़ने लगा।
“जीजाजी…” प्राची ने कहा।
“शांत रहो, मैं तुम्हें साफ कर रहा हूँ,” प्रफुल ने कहा।
उनकी उँगलियाँ प्राची की योनि के पास पहुँच गईं। वो धीरे-धीरे उसे छूने लगे। प्राची काँप उठी, उसे एक अजीब सा मजा सा महसूस हो रहा था।
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प्रफुल ने उसे टब के किनारे बैठने के लिए कहा। प्राची ने ऐसा ही किया। अब उसकी योनि पानी के ऊपर थी। प्रफुल ने उसे फैलाया और देखने लगे।
“कितनी सुंदर है तुम्हारी ये जगह,” प्रफुल ने कहा।
उन्होंने धीरे से अपनी उँगली अंदर डाली। प्राची ने तेज साँस ली। दर्द और मजे का मिश्रण था।
“दर्द हो रहा है?” प्रफुल ने पूछा।
“थोड़ा… लेकिन अच्छा लग रहा है,” प्राची ने कहा।
प्रफुल ने उँगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। प्राची की आँखें बंद थीं और वो मजे ले रही थी। पानी की आवाज़ और उसकी हल्की-हल्की साँसें बाथरूम में गूँज रही थीं।
नहाने के बाद दोनों तौलिये में लिपटे बेडरूम में आए। प्रफुल ने प्राची को बेड पर बैठाया और उसके बालों को सुखाने लगे।
“तुम्हारे बाल बहुत सुंदर हैं,” प्रफुल ने कहा।
फिर वो उसके पीछे बैठ गए और उसके कंधों पर चुंबन करने लगे। तौलिया हट गया और प्राची फिर से नंगी हो गई। प्रफुल ने भी अपना तौलिया हटा दिया।
उन्होंने प्राची को बेड पर लिटाया और उसके ऊपर आ गए। दोनों के नंगे बदन एक-दूसरे से सटे हुए थे। प्रफुल उसके चेहरे पर, गर्दन पर, स्तनों पर चुंबन कर रहे थे।
“जीजाजी… अब और मत तड़पाओ…” प्राची ने कहा।
प्रफुल समझ गए कि वो तैयार है। उन्होंने उसके पैर फैलाए और अपने लिंग को उसकी योनि के मुँह पर रखा।
“थोड़ा दर्द होगा पहली बार, लेकिन फिर मजा आएगा,” प्रफुल ने कहा।
प्राची ने सिर हिलाया। प्रफुल ने धीरे से धक्का लगाया। उनका लिंग अंदर जाने लगा। प्राची ने दर्द से आँखें बंद कर लीं।
“आह… जीजाजी… धीरे…” प्राची ने कहा।
प्रफुल ने रुककर उसके होंठों को चूमा। फिर थोड़ा और अंदर किया। प्राची की योनि तंग थी और प्रफुल को बहुत मजा आ रहा था।
थोड़ी देर में पूरा लिंग अंदर चला गया। प्रफुल रुके रहे ताकि प्राची को आदत हो जाए। फिर उन्होंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया।
“कैसा लग रहा है?” प्रफुल ने पूछा।
“बहुत अच्छा… और तेज कीजिए जीजाजी…” प्राची ने कहा।
प्रफुल ने गति बढ़ा दी। बेड की आवाज़ें तेज हो गईं। प्राची की साँसें तेज चल रही थीं और वो प्रफुल की पीठ पर नाखून गाड़ रही थी।
“ओह प्राची… तुम बहुत मस्त हो…” प्रफुल ने कहा।
वो उसके स्तनों को दबा रहे थे और उसकी योनि में अपना लिंग पेल रहे थे। प्राची की आँखों में आँसू आ गए थे लेकिन वो मजे में थी।
करीब बीस मिनट तक यह सिलसिला चला। प्रफुल ने प्राची को घोड़ी बनाकर भी चोदा। पीछे से उसकी योनि में अपना लिंग डाला। प्राची चीख रही थी लेकिन मना नहीं कर रही थी।
फिर प्रफुल ने उसे अपनी गोद में बिठाया और नीचे से ऊपर की तरफ धक्के लगाने लगे। प्राची उनके ऊपर उछल रही थी और उसके स्तन हिल रहे थे।
“आह… जीजाजी… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” प्राची ने कहा।
“रुको मेरे साथ…” प्रफुल ने कहा।
कुछ ही पलों में दोनों एक साथ झड़ गए। प्रफुल का वीर्य प्राची की योनि में भर गया और प्राची की योनि ने रस छोड़ दिया।
दोनों थककर बेड पर गिर पड़े। प्रफुल ने प्राची को अपनी बाँहों में भर लिया।
“मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ प्राची,” प्रफुल ने कहा।
“मैं भी जीजाजी…” प्राची ने कहा और उनकी छाती पर सिर रखकर सो गई।
अगली सुबह जब प्राची उठी तो प्रफुल उसके बगल में थे। उन्होंने उसे फिर से चूमा और उसके साथ सुबह का मजा लिया।
यह सिलसिला अगले कुछ दिनों तक चला। जब तक राधा वापस नहीं आई, प्रफुल और प्राची हर रात और कभी-कभी दिन में भी एक-दूसरे के शरीर का आनंद लेते।
उन्होंने बाथरूम में, रसोई में, ड्राइंग रूम में, हर जगह सेक्स किया। प्राची अब पूरी तरह से प्रफुल की हो चुकी थी।
जब राधा वापस आई तो प्राची थोड़ी उदास थी लेकिन वो जानती थी कि यह सिलसिला फिर से शुरू होगा जब भी उसे मौका मिलेगा।
प्रफुल ने उसे वादा किया कि वो उससे मिलने उसके घर भी आएंगे और वो अक्सर उसे फोन पर अपने प्यार की बातें करते।
इस तरह प्राची और प्रफुल की यह अनकही चाहत एक खूबसूरत याद बन गई जो दोनों हमेशा संजोए रखेंगे।
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