मुंबई की भीड़ भाड़ वाली सड़कों पर रात के ग्यारह बज चुके थे। तारा शर्मा अपनी लाल रंग की साड़ी में एक पांच सितारा होटल के बॉलरूम में खड़ी थी। उसके काले बालों में गजरे की खुशबू फैली हुई थी, लेकिन उसकी आंखों में वो खुशबू नहीं थी। वो खुशबू जो प्यार कहलाती है। मैंने Dushman Ki Beti Ko Chauda।
“तारा, तुम यहां?” एक आवाज़ पीछे से आई।
वो मुड़ी। उसका दिल एक पल के लिए रुक सा गया। सामने खड़ा था अर्जुन मेहता। वो शख्स जिसने उसके पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया था। वो शख्स जिसके खिलाफ उसने अपनी जवानी की हर सुबह और हर शाम सिर्फ बदले की आग में जलते हुए गुजारी थी।
“अर्जुन,” तारा ने अपनी आवाज़ को शांत रखने की कोशिश की, “तुम यहां क्या कर रहे हो?”
अर्जुन ने अपनी व्हिस्की का गिलास हाथ में घुमाया। उसकी काली आंखें वैसे ही गहरी थीं जैसे पहले थीं। वो काली आंखें जिन्होंने तारा के पिता को जेल भेजते हुए एक पल भी नहीं सोचा था।
“ये मेरी कंपनी का इवेंट है तारा,” अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा, “और तुम… तुम तो अपने बॉस के साथ आई हो ना? रोहित खanna? वो बूढ़ा जो आज भी अपनी जवानी की यादों में जीता है?”
तारा के चेहरे पर गुस्सा साफ झलक उठा। “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे बॉस के बारे में ऐसे बोलने की?”
“हिम्मत?” अर्जुन ने कदम बढ़ाए। वो अब उसके बेहद करीब था। उसकी सांसों की गर्मी तारा के गालों को छू रही थी। “मैंने तो वो किया जो मुझे करना था। जैसे तुमने किया जो तुम्हें करना था।”
तारा को वो दिन याद आ गया। पांच साल पहले। जब अर्जुन के पिता ने उसके पिता के बिजनेस पर कब्ज़ा किया था। जब तारा के पिता ने आत्महत्या कर ली थी। और जब तारा ने कसम खाई थी कि वो अर्जुन को ऐसा तबाह करेगी कि वो उठ नहीं पाएगा।
“मैं यहां सिर्फ इसलिए आई हूं क्योंकि मुझे तुमसे कुछ कहना है,” तारा ने अपनी आंखों में आंसुओं को रोकते हुए कहा।
“क्या कहना है?” अर्जुन ने उसके चेहरे को अपने हाथों में थाम लिया। उसकी उंगलियां तारा के गालों पर धीरे से फिसल रही थीं। “कि तुम मुझसे नफरत करती हो? कि तुम मुझे मारना चाहती हो? या फिर…” वो रुका, उसकी आंखें तारा की आंखों में घूर रही थीं, “कि तुम मुझसे प्यार करती हो?”
तारा ने उसका हाथ झटक दिया। “पागल हो गए हो तुम! मैं तुमसे नफरत करती हूं! मैं तुम्हें…”
“क्या?” अर्जुन ने फिर से कदम बढ़ाए। अब उनके बीच की दूरी सिर्फ एक सांस की थी। “मुझे क्या करोगी तारा? मारोगी? या फिर…” उसने अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया, “मुझे अपना गुलाम बनाओगी?”
तारा का दिल धड़क रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है। वो यहां अर्जुन को बर्बाद करने की योजना बनाने आई थी। लेकिन अब… अब वो कुछ और ही महसूस कर रही थी।
“मैं… मैं चलती हूं,” तारा ने पीछे हटने की कोशिश की।
लेकिन अर्जुन ने उसे रोक लिया। उसने अपना हाथ उसके पीछे के दरवाज़े की कुंडी पर रख दी। वो अब उसे किसी भी हालत में जाने नहीं देना चाहता था।
“नहीं जाओगी तुम,” अर्जुन ने धीरे से कहा। उसकी आवाज़ में वो दबाव था जो तारा को कमजोर कर रहा था। “आज रात… आज रात तुम मेरे साथ रहोगी।”
“तुम पागल हो,” तारा ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ कांप रही थी।
“हां, पागल हूं,” अर्जुन ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा। उसकी सांसें तारा के गले को छू रही थीं। “पागल हूं तुम्हारे लिए। हमेशा से था।”
तारा ने उसे धक्का देने की कोशिश की, लेकिन अर्जुन ने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और उन्हें उसके सिर के ऊपर कर दिया। अब वो बेहद कमजोर थी। वो एक ऐसे आदमी के सामने खड़ी थी जिसने उसके परिवार को तबाह किया था, और फिर भी… फिर भी उसका दिल उसके लिए धड़क रहा था।
“क्यों?” तारा ने आंखें बंद करते हुए पूछा। “क्यों किया तुमने मेरे साथ यह सब?”
अर्जुन ने उसके गाल पर एक हल्का सा चूमा लिया। “क्योंकि मैं तुम्हें चाहता था तारा। हमेशा से। लेकिन तुम… तुम मुझसे नफरत करती थीं। तुम्हारी नफरत ने मुझे वो करने पर मजबूर किया जो मैंने किया।”
“झूठ!” तारा ने कहा, लेकिन उसकी आंखें खुल गईं। “तुमने मेरे पापा को…”
“मैंने कुछ नहीं किया,” अर्जुन ने उसके होठों पर अपनी उंगली रखते हुए कहा। “मेरे पिता ने किया। और वो भी इसलिए क्योंकि तुम्हारे पिता ने उनसे पैसे लिए थे और वापस नहीं किए। ये बिजनेस था तारा। सिर्फ बिजनेस।”
तारा की आंखों में आंसू आ गए। वो जानती थी कि अर्जुन सच कह रहा था। उसके पिता ने उसे बताया था कि उन्होंने कर्ज लिया था। लेकिन नफरत इतनी गहरी हो चुकी थी कि वो सच नहीं देख पा रही थी।
“और अब?” तारा ने पूछा। “अब क्या चाहते हो तुम मुझसे?”
अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। “अब मैं चाहता हूं कि तुम मुझे माफ कर दो। और अगर माफी मुमकिन नहीं…” उसने उसके होठों की ओर झुकते हुए कहा, “तो मुझे वो दे दो जो मैं हमेशा से चाहता था।”
तारा ने उसे धक्का देने की कोशिश की, लेकिन इस बार वो कमजोर पड़ गई। अर्जुन के होठ उसके होठों से मिल गए। वो पहले तो कड़ा चुंबन था, गुस्से वाला, नफरत वाला। लेकिन फिर… फिर वो नरम हो गया। वो प्यार में बदल गया।
तारा ने अपने हाथ अर्जुन के बालों में फेर दिए। वो जानती थी कि ये गलत था। वो जानती थी कि वो अपने परिवार के साथ धोखा कर रही थी। लेकिन इस पल… इस पल वो सिर्फ अर्जुन को महसूस करना चाहती थी।
अर्जुन ने उसे पीछे की दीवार से सटा दिया। उसके हाथ तारा की साड़ी की प्लीट्स को खोलने लगे। वो धीरे-धीरे उसकी त्वचा को छू रहे थे, जैसे कोई कलाकार अपनी कलाकृति को छूता है।
“तुम… तुम यह नहीं कर सकते,” तारा ने कांपते हुए कहा, लेकिन उसका शरीर उसके खिलाफ था।
“मैं सब कुछ कर सकता हूं तारा,” अर्जुन ने उसके गले पर चूमते हुए कहा। “तुम्हारे लिए… तुम्हारे लिए मैं दुनिया जीत सकता हूं या दुनिया खो सकता हूं।”
उसने उसकी साड़ी की पल्लू को हटाया। अब तारा का ब्लाउज साफ दिखाई दे रहा था। वो गहरे लाल रंग का ब्लाउज था जो उसके गोरे बदन पर और भी सुंदर लग रहा था।
“कितनी खूबसूरत हो तुम,” अर्जुन ने फुसफुसाते हुए कहा। उसने अपने हाथों से उसके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए।
तारा ने अपनी आंखें बंद कर लीं। वो इस पल को रोक नहीं सकती थी। नहीं, वो रोकना नहीं चाहती थी। पांच साल की नफरत, पांच साल का इंतजार… सब कुछ इस एक पल में समा रहा था।
जब अर्जुन ने उसका ब्लाउज हटाया, तो तारा ने अपने हाथों से अपने स्तनों को ढकने की कोशिश की। लेकिन अर्जुन ने उसके हाथ हटा दिए।
“मत छिपाओ,” उसने कहा। “मुझे देखने दो। मुझे उस खूबसूरती को देखने दो जिसके लिए मैंने इतने सालों से तड़पा है।”
उसने अपने होंठ उसके स्तनों पर रख दिए। तारा की सांसें तेज हो गईं। उसने अर्जुन के सिर को अपने स्तनों पर दबा दिया। वो उसे महसूस करना चाहती थी, उसकी गर्मी, उसका प्यार, उसका पागलपन।
अर्जुन ने धीरे-धीरे उसकी साड़ी को पूरी तरह खोल दिया। अब तारा सिर्फ अपने पेटीकोट और ब्रा में थी। वो शर्म से लाल हो रही थी, लेकिन उसकी आंखों में वो आग थी जो अर्जुन को और पागल बना रही थी।
“मैं तुमसे प्यार करता हूं तारा,” अर्जुन ने उसके पेट पर चूमते हुए कहा। “हमेशा से किया है। जब तुम कॉलेज में थीं, जब तुम मुझसे नफरत करती थीं, जब तुम मुझे मारने की कोशिश करती थीं… हर पल, हर सेकंड।”
तारा ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “मैं भी,” उसने कांपते हुए कहा। “मैं भी तुमसे प्यार करती हूं अर्जुन। लेकिन मैं… मैं ये स्वीकार नहीं कर पा रही थी।”
अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया। वो उसे उस बॉलरूम से लेकर पास के एक कमरे में ले गया। वहां एक बड़ा सा बिस्तर था, सफेद चादरों से ढका हुआ।
उसने तारा को बिस्तर पर लिटाया। फिर वो खुद उसके ऊपर आ गया। उनके शरीर एक दूसरे से सटे हुए थे। तारा अर्जुन की धड़कन महसूस कर सकती थी। वो उसके साथ धड़क रही थी, जैसे दो दिल एक हो गए हों।
“आज रात,” अर्जुन ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, “आज रात तुम मेरी हो। पूरी तरह से मेरी।”
तारा ने अपने हाथ उसकी शर्ट के बटन पर रख दिए। “हां,” उसने कहा। “आज रात मैं सिर्फ तुम्हारी हूं।”
पहली बार – Dushman Ki Beti Ko Chauda
कमरे में सिर्फ एक मोमबत्ती जल रही थी। उसकी हल्की सी रोशनी तारा के शरीर पर पड़ रही थी, जिससे वो और भी सुंदर लग रही थी। अर्जुन उसके बगल में लेटा हुआ था, उसकी आंखें उसके चेहरे से लेकर उसके पैरों तक घूम रही थीं।
“तुम्हें पता है,” अर्जुन ने धीरे से कहा, “जब हम पहली बार मिले थे, तो मैं तुम्हें देखते ही समझ गया था कि तुम मेरी हो।”
तारा ने मुस्कुराते हुए कहा, “और मैं तुम्हें देखते ही समझ गई थी कि तुम मेरे दुश्मन हो।”
“दुश्मन?” अर्जुन ने हंसते हुए कहा। “क्या कोई दुश्मन इतनी खूबसूरत हो सकती है?”
उसने अपना हाथ तारा के पेट पर रखा। उसकी त्वचा इतनी नरम थी, इतनी गर्म, कि अर्जुन का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। वो इस पल को हमेशा के लिए याद रखना चाहता था।
“मैंने कभी सोचा नहीं था,” तारा ने कहा, उसकी आंखों में आंसू थे, “कि हम एक दिन ऐसे होंगे।”
“कैसे?” अर्जुन ने पूछा, उसका हाथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा था।
“इतने करीब। इतने…” तारा ने रुककर कहा, “नंगे।”
अर्जुन ने मुस्कुराते हुए उसके ब्रा के हुक खोल दिए। वो सफेद रंग की लेस वाली ब्रा थी जो अब हट चुकी थी। तारा के स्तन बाहर आ गए, गोल, सुडौल, और बेहद खूबसूरत।
“तुम परफेक्ट हो,” अर्जुन ने फुसफुसाते हुए कहा।
उसने अपने होंठ उसके स्तनों के बीच रख दिए। तारा की सांसें तेज हो गईं। उसने अपने हाथ अर्जुन के सिर पर रख दिए, उसे और करीब खींचने की कोशिश की।
अर्जुन ने धीरे-धीरे एक स्तन को अपने मुंह में ले लिया। उसकी जीभ उसके निप्पल को चारों ओर घूम रही थी, जिससे तारा के शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। वो पहले कभी ऐसा महसूस नहीं करी थी। ये पहली बार था जब कोई उसके शरीर को इस तरह पूजा कर रहा था।
“अर्जुन…” उसने कांपते हुए कहा।
“क्या हुआ?” अर्जुन ने पूछा, उसका मुंह अभी भी उसके स्तन पर था।
“मुझे… मुझे अच्छा लग रहा है,” तारा ने शर्माते हुए कहा।
“सिर्फ अच्छा?” अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा। “अभी तो शुरुआत है मेरी जान।”
उसने अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया। तारा का पेटीकोट अब बीच में आ रहा था। अर्जुन ने उसकी नाड़ी को खोला और धीरे-धीरे पेटीकोट को नीचे खींचने लगा।
तारा ने अपने पैर उठाए, जिससे अर्जुन को उसे पूरी तरह नंगा करने में आसानी हुई। अब वो सिर्फ अपनी पैंटी में थी। वो स्किन कलर की लेस वाली पैंटी थी जो उसकी योनि की आकृति साफ दिखा रही थी।
अर्जुन ने उसे देखा। वो उसे देखते ही रह गया। उसकी आंखें तारा के शरीर की हर एक इंच को याद कर रही थीं।
“क्या देख रहे हो?” तारा ने शर्माते हुए पूछा।
“अपनी दुनिया,” अर्जुन ने कहा। “तुम मेरी दुनिया हो तारा।”
उसने अपने हाथ उसकी पैंटी के किनारों पर रखे। धीरे-धीरे, बहुत धीरे, उसने उसे नीचे खींचना शुरू किया। तारा ने अपने पैर फिर से उठाए, और अब… अब वो पूरी तरह से नंगी थी।
अर्जुन ने सांस रोक ली। तारा का शरीर उसके सामने खुला था। उसके गोल स्तन, उसकी संकरी कमर, उसके चिकने जांघ, और उसके बीच वो खजाना जिसे वो हमेशा से चाहता था।
“तुम इतनी खूबसूरत हो,” अर्जुन ने फुसफुसाते हुए कहा।
उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए। पहले शर्ट, फिर पैंट। जब वो अंडरवियर में आया, तो तारा ने देखा कि उसका लिंग पहले से ही कड़ा हो चुका था। वो बहुत बड़ा था, मोटा, और तड़प रहा था।
“डर लग रहा है?” अर्जुन ने पूछा।
थोड़ा,” तारा ने कहा। “मैंने… मैंने कभी…”
“शांत रहो,” अर्जुन ने उसके माथे पर चूमा। “मैं तुम्हें दर्द नहीं दूंगा। सिर्फ प्यार दूंगा।”
वो उसके ऊपर आ गया। उनके शरीर एक दूसरे से सटे हुए थे। तारा अर्जुन की गर्मी महसूस कर सकती थी। उसका लिंग उसकी जांघों के बीच था, गर्म, कड़ा, और तड़प रहा था।
“मैं अंदर आ रहा हूं,” अर्जुन ने कहा।
“हां,” तारा ने कहा, उसकी आंखें बंद थीं। “आ जाओ। मैं तुम्हारी हूं।”
अर्जुन ने धीरे से अपना लिंग उसकी योनि के मुहाने पर रखा। वो गर्म थी, गीली थी, और तैयार थी। उसने एक हल्का सा धक्का दिया।
तारा ने एक हल्की सी आवाज़ निकाली। वो पहली बार थी, और वो जानती थी कि थोड़ा दर्द होगा। लेकिन अर्जुन ने उसे इतने प्यार से चूमा, इतने प्यार से सहलाया, कि दर्द जल्दी ही खत्म हो गया।
“ठीक हो?” अर्जुन ने पूछा।
“हां,” तारा ने कहा। “और अंदर आओ। पूरा अंदर।”
अर्जुन ने एक और धक्का दिया। इस बार वो पूरा अंदर चला गया। तारा ने महसूस किया कि वो भर गई थी, पूरी तरह से। अर्जुन का लिंग उसकी योनि में था, गर्म, कड़ा, और जीवित।
“कितना अच्छा लग रहा है,” अर्जुन ने कहा, उसकी सांसें तेज थीं।
“मुझे भी,” तारा ने कहा। “चलो अब। मुझे तुम्हें महसूस करना है।”
अर्जुन ने धीरे-धीरे अपने कूल्हे हिलाने शुरू किए। वो अंदर-बाहर हो रहा था, धीरे-धीरे, प्यार से। तारा के शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ रही थी। वो पहले कभी ऐसा महसूस नहीं करी थी।
“तेज़,” तारा ने कहा। “थोड़ा तेज़ करो।”
अर्जुन ने अपनी गति बढ़ा दी। वो अब तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था। तारा के स्तन उसकी हर धक्के के साथ हिल रहे थे। अर्जुन ने एक हाथ उन पर रख दिया, उन्हें सहलाते हुए अपनी गति जारी रखी।
“मैं… मैं आने वाली हूं,” तारा ने कांपते हुए कहा।
“मैं भी,” अर्जुन ने कहा। “एक साथ। आओ, एक साथ।”
उन्होंने एक साथ अपनी गति तेज़ की। तारा का शरीर कांपने लगा। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी ऊंचाई से गिर रही हो, लेकिन ये गिरावट अच्छी थी, ये प्यार थी।
और फिर… वो आ गई। तारा ने एक लंबी सी आवाज़ निकाली और अर्जुन को कसकर पकड़ लिया। उसकी योनि ने अर्जुन के लिंग को कस लिया, जिससे अर्जुन भी नहीं रुक सका।
“तारा!” उसने चिल्लाते हुए कहा और अपना सारा वीर्य उसके अंदर छोड़ दिया।
वो दोनों एक दूसरे में समा गए। सांसें तेज़ थीं, दिल धड़क रहे थे, और शरीर पसीने से लथपथ थे। लेकिन वो दोनों खुश थे। बेहद खुश।
अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। “मैं तुमसे प्यार करता हूं,” उसने कहा।
“मैं भी,” तारा ने कहा, उसकी आंखों में आंसू थे। “मैं भी बहुत प्यार करती हूं।”
सुबह की शर्मिंदगी और नई शुरुआत
सुबह की पहली किरण खिड़की से अंदर आई तो तारा अपनी आंखें खोली। वो एक पल के लिए भूल गई कि वो कहां है। लेकिन फिर उसे महसूस हुआ – एक गर्म शरीर उसके पीछे था, एक हाथ उसकी कमर पर था, और सांसें उसके गले को छू रही थीं।
वो मुड़ी। अर्जुन सो रहा था। उसका चेहरा इतना शांत था, इतना बेगुनाह लग रहा था, कि तारा को यकीन नहीं हो रहा था कि यही वो आदमी है जिसने उसके परिवार को तबाह किया था।
नहीं, उसने खुद को याद दिलाया। उसके पिता ने किया था। अर्जुन तो… अर्जुन तो सिर्फ उससे प्यार करता था।
लेकिन फिर भी, सुबह की रोशनी में तारा को शर्मिंदगी महसूस हुई। उसने क्या किया था? उसने अपने दुश्मन के साथ सोया था। उसने अपने परिवार के खातिर जिस आदमी को मारने की कसम खाई थी, उसी के साथ अपना शरीर साझा किया था।
वो धीरे से बिस्तर से उठने की कोशिश की, लेकिन अर्जुन का हाथ उसे रोक गया।
“कहां जा रही हो?” उसकी आवाज़ नींद भरी थी।
“मुझे… मुझे जाना होगा,” तारा ने कहा, उसकी आंखें नीचे थीं।
अर्जुन ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “मुझे देखो तारा।”
“नहीं,” उसने कहा। “मैं… मैं शर्मिंदा हूं।”
“क्यों?” अर्जुन ने पूछा। “क्योंकि हमने प्यार किया? क्योंकि हमने वो किया जो हम दोनों हमेशा से चाहते थे?”
“मैंने तुमसे नफरत की थी अर्जुन,” तारा ने कहा, उसकी आंखों में आंसू आ गए। “मैंने तुम्हें मारने की कसम खाई थी। और अब… अब मैं तुम्हारे बिस्तर से उठ रही हूं। मैं… मैं कितनी गिरी हुई हूं।”
अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। “तुम गिरी हुई नहीं हो तारा। तुम सिर्फ प्यार करती हो। और प्यार करना कोई गुनाह नहीं है।”
“लेकिन मेरे पापा…” तारा रोने लगी।
“तुम्हारे पापा ने गलती की थी,” अर्जुन ने धीरे से कहा। “मेरे पिता ने भी गलती की। लेकिन हम… हम दोनों बेकसूर हैं। हमारा प्यार बेकसूर है।”
तारा ने उसकी आंखों में देखा। वो सच कह रहा था। उनका प्यार सच था, भले ही उनकी दुश्मनी झूठी थी।
“मैं क्या करूं?” उसने पूछा।
“रुको,” अर्जुन ने कहा। “मेरे साथ रुको।”
उसने उसे फिर से बिस्तर पर लिटाया। इस बार उसकी नीयत में कोई हड़बड़ी नहीं थी, कोई जल्दबाजी नहीं थी। वो धीरे-धीरे उसके शरीर को चूमने लगा, जैसे कोई भक्त अपनी देवी को प्रणाम करता है।
“तुम बहुत खूबसूरत हो,” उसने कहा, उसके गालों पर चूमते हुए।
“अर्जुन…” तारा ने कहा, लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में वो कांपन नहीं थी जो पहले थी। इस बार उसकी आवाज़ में प्यार था, विश्वास था।
अर्जुन ने उसके होठों को चूमा। ये सुबह का चुंबन था, ताज़ा, मीठा, और प्यार भरा। उनकी जीभें एक दूसरे से मिलीं, एक दूसरे को चखीं, एक दूसरे को अपना बनाया।
“मैं तुम्हें फिर से चाहता हूं,” अर्जुन ने कहा।
“लेकिन अभी तो…” तारा ने शर्माते हुए कहा।
“मैं तुमसे कभी नहीं थकूंगा,” अर्जुन ने कहा। “तुम मेरी हो, और मैं तुम्हें बार-बार अपना बनाना चाहता हूं।”
इस बार वो और धीमा था, और प्यार भरा। अर्जुन ने तारा के शरीर को अपने हाथों में लिया और धीरे-धीरे उसमें प्रवेश किया। तारा ने महसूस किया कि वो फिर से भर गई थी, लेकिन इस बार कोई दर्द नहीं था, सिर्फ सुकून था, सिर्फ प्यार था।
वो दोनों एक दूसरे में खो गए। सुबह की रोशनी में, उनका प्यार और भी सुंदर लग रहा था। ये वो प्यार था जो नफरत से पैदा हुआ था, लेकिन अब ये पूरी तरह से नफरत से आज़ाद था।
बदले की योजना या प्यार का इज़हार?
दोपहर के दो बजे थे। तारा अर्जुन के पेंटहाउस में खड़ी थी, उसकी शर्ट पहने हुए। अर्जुन का शर्ट उसके घुटनों तक आ रहा था, और वो उसमें और भी सेक्सी लग रही थी।
अर्जुन किचन में खड़ा था, कॉफी बना रहा था। वो सिर्फ अपने पैंट में था, उसका बायां हाथ जो कल रात तारा को सहला रहा था, अब कॉफी मग पकड़े हुए था।
“तुम्हारे लिए,” उसने कॉफी देते हुए कहा।
“शुक्रिया,” तारा ने मुस्कुराते हुए कहा।
वो दोनों बालकनी में आ गए। मुंबई की हवा उनके चेहरों को छू रही थी। नीचे शहर की भागदौड़ थी, लेकिन यहां, इस पल, उनके लिए सिर्फ प्यार था।
“तारा,” अर्जुन ने कहा, “मैं तुमसे कुछ पूछना चाहता हूं।”
“क्या?”
“क्या तुम सच में मुझसे नफरत करती थीं? या वो सिर्फ एक बहाना था?”
तारा ने कॉफी का मग नीचे रख दिया। उसकी आंखों में पुरानी यादें घूम रही थीं।
“शुरुआत में तो सच में नफरत थी,” उसने कहा। “तुम्हारे पिता ने मेरे पापा को बर्बाद किया, मेरी मां को सड़क पर ला दिया। मैं तुमसे नफरत करती थी अर्जुन। बहुत नफरत।”
“और फिर?”
“और फिर…” तारा ने रुककर कहा, “फिर मैंने देखा कि तुम अलग हो। तुमने मेरे पापा के अस्पताल के बिल चुकाए, तुमने मेरी मां की दवाइयां भेजीं, तुमने मेरी पढ़ाई का खर्च उठाया। मैं समझ नहीं पा रही थी कि तुम क्यों कर रहे हो यह सब।”
“क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता था,” अर्जुन ने कहा। “हमेशा से।”
“मुझे पता था,” तारा ने कहा। “और इसीलिए मैं और नफरत करने लगी। मैं नहीं चाहती थी कि मैं तुमसे प्यार करूं। मैं नहीं चाहती थी कि मैं अपने दुश्मन से प्यार करूं।”
अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। “लेकिन अब? अब क्या चाहती हो तुम?”
तारा ने उसकी आंखों में देखा। “अब मैं चाहती हूं कि हम साथ हों। हमेशा के लिए।”
“हमेशा के लिए,” अर्जुन ने दोहराया। “मैं भी यही चाहता हूं।”
वो दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। ये चुंबन और गहरा था, और लंबा था। उनके हाथ एक दूसरे के शरीर पर घूम रहे थे, जैसे वो पहली बार एक दूसरे को छू रहे हों।
अर्जुन ने अपने हाथ उसकी शर्ट के नीचे डाल दिए। तारा ने कुछ नहीं कहा, उसने सिर्फ अपनी आंखें बंद कर लीं। अर्जुन के हाथ उसके स्तनों को ढूंढ रहे थे, उन्हें सहला रहे थे, उनके निप्पों को कड़ा कर रहे थे।
“यहां?” तारा ने पूछा, बालकनी की ओर इशारा करते हुए।
“किसे देखना है?” अर्जुन ने कहा। “हम बहुत ऊंचाई पर हैं। और मैं तुम्हें यहीं चाहता हूं।”
उसने उसे बालकनी की रेलिंग से सटा दिया। ठंडी हवा तारा के शरीर को छू रही थी, लेकिन अर्जुन की गर्मी उसे गर्म रख रही थी।
अर्जुन ने उसकी शर्ट उठाई और उसे पूरी तरह नंगा कर दिया। अब वो बालकनी में खड़ी थी, नंगी, खूबसूरत, और बेफिक्र।
“तुम बहुत बोल्ड हो गई हो,” अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा।
“तुम्हारी बदौलत,” तारा ने कहा।
अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में उठाया और उसकी जांघों के बीच आ गया। तारा ने अपने पैर उसकी कमर के चारों ओर लपेट लिए। अब वो दोनों एक दूसरे में समा रहे थे, खुले आसमान के नीचे, मुंबई की हवा में।
“मैं तुमसे प्यार करता हूं,” अर्जुन ने धक्के लगाते हुए कहा।
“मैं भी,” तारा ने कहा, उसकी सांसें तेज़ थीं।
वो दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, एक दूसरे की आंखों में खो रहे थे। ये प्यार था, सच्चा प्यार, जो नफरत से जन्मा था लेकिन अब पूरी तरह से प्यार बन चुका था।
अतीत की परछाइयां
शाम को जब तारा घर जाने की तैयारी कर रही थी, तो अर्जुन का फोन बजा। उसने देखा – उसके पिता का नंबर था।
“हां पापा,” उसने कहा।
“कहां हो तुम?” उसके पिता की आवाज़ गुस्से में थी।
“घर पर ही,” अर्जुन ने झूठ बोला।
“झूठ मत बोलो। मुझे पता है कि तुम उस लड़की के साथ हो। तारा शर्मा के साथ।”
अर्जुन का चेहरा पीला पड़ गया। “आपको कैसे पता?”
“मुझे सब पता है,” उसके पिता ने कहा। “और मैं तुम्हें चेतावनी दे रहा हूं – उस लड़की से दूर रहो। वो तुमसे बदला लेना चाहती है। उसने तुम्हें फंसाया है।”
अर्जुन ने तारा की ओर देखा। वो उसे देख रही थी, उसकी आंखों में सवाल थे।
“नहीं पापा,” अर्जुन ने कहा। “आप गलत समझ रहे हैं। तारा और मैं… हम एक दूसरे से प्यार करते हैं।”
“प्यार?” उसके पिता ने हंसते हुए कहा। “वो तुमसे नफरत करती है अर्जुन। उसने तुम्हें बर्बाद करने की कसम खाई है। और तुम… तुम बेवकूफ बन रहे हो।”
फोन कट गया। अर्जुन हक्का-बक्का खड़ा था।
“क्या हुआ?” तारा ने पूछा।
“कुछ नहीं,” अर्जुन ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ कांप रही थी।
“झूठ मत बोलो,” तारा ने कहा। “मैंने सुना। तुम्हारे पिता ने कहा कि मैं तुमसे बदला लेना चाहती हूं।”
अर्जुन ने उसकी ओर देखा। “क्या यह सच है? क्या तुम मुझसे बदला लेना चाहती थीं?”
तारा ने अपनी आंखें नीचे कर लीं। हां, वो सच था। वो यहां अर्जुन को बर्बाद करने की योजना के साथ आई थी। वो उसे प्यार में फंसाना चाहती थी, फिर उसे छोड़कर जाना चाहती थी, जैसे उसके पिता ने उसके पिता को छोड़ा था।
“मैं…” उसने कहा, लेकिन शब्द नहीं निकले।
“सच बताओ तारा,” अर्जुन ने कहा, उसकी आवाज़ में दर्द था। “क्या तुमने मुझसे प्यार किया है या ये सिर्फ एक खेल था?”
तारा ने उसकी ओर देखा। उसकी आंखों में आंसू थे। “शुरुआत में… शुरुआत में ये एक खेल था,” उसने कहा। “मैं तुम्हें फंसाना चाहती थी। मैं तुम्हें दिखाना चाहती थी कि दर्द क्या होता है।”
अर्जुन का दिल टूट गया। उसने कदम पीछे किए।
“लेकिन अब…” तारा ने कहा, “अब ये खेल नहीं रहा अर्जुन। अब मैं तुमसे सच में प्यार करती हूं। मैंने कल रात जो कहा, वो सच था। मैं तुमसे प्यार करती हूं। बहुत ज्यादा।”
“मुझे कैसे पता चलेगा कि तुम झूठ नहीं बोल रहीं?” अर्जुन ने पूछा।
“क्योंकि अगर मैं झूठ बोल रही होती,” तारा ने कहा, उसकी आवाज़ में वो दृढ़ता थी, “तो मैं अब तक तुम्हें छोड़कर जा चुकी होती। मैं तुम्हें दर्द दे चुकी होती। लेकिन मैं यहां हूं अर्जुन। मैं यहां इसलिए हूं क्योंकि मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।”
अर्जुन ने उसे देखा। उसकी आंखें सच बोल रही थीं। वो जानता था कि तारा अब झूठ नहीं बोल रही थी।
“मुझे माफ कर दो,” तारा ने कहा, रोते हुए। “मुझे माफ कर दो कि मैंने तुम्हें धोखा देने की कोशिश की। लेकिन प्यार… प्यार ने मेरी सारी योजनाएं बदल दीं।”
अर्जुन ने कदम बढ़ाए। उसने उसे अपनी बाहों में भर लिया। “मैं तुम्हें माफ करता हूं,” उसने कहा। “मैं तुम्हें इसलिए माफ करता हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि प्यार क्या होता है। प्यार में इंसान बदल जाता है तारा। और तुम… तुम बदल चुकी हो।”
तारा ने उसे कसकर पकड़ लिया। “मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूंगी,” उसने कहा। “कभी नहीं।”
नए रिश्ते की शुरुआत
एक हफ्ता बीत चुका था। तारा और अर्जुन अब एक साथ रह रहे थे। अर्जुन के पेंटहाउस में, मुंबई के आसमान के नीचे, वो दोनों अपनी दुनिया बसा रहे थे।
आज रात अर्जुन ने एक खास योजना बनाई थी। उसने पूरे पेंटहाउस को मोमबत्तियों से सजाया था। गुलाब की पंखुड़ियां बिस्तर पर बिछाई थीं। और एक खास डिनर तैयार किया था।
“यह सब क्या है?” तारा ने आते ही पूछा।
“सरप्राइज़,” अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा।
उसने उसे डाइनिंग टेबल तक ले गया। वहां शैंपेन थी, उसकी पसंदीदा डिश थी, और एक छोटा सा बॉक्स था।
“पहले यह खोलो,” अर्जुन ने कहा।
तारा ने बॉक्स खोला। अंदर एक हीरे की अंगूठी थी, चमकदार, खूबसूरत, और बेहद कीमती।
“अर्जुन…” उसने कहा, उसकी आंखें हैरान थीं।
“तारा शर्मा,” अर्जुन ने घुटने टेकते हुए कहा, “क्या तुम मुझसे शादी करोगी? क्या तुम मुझे अपना बनाओगी, हमेशा के लिए?”
तारा की आंखों से आंसू बहने लगे। ये वो पल था जिसके बारे में उसने कभी नहीं सोचा था। उसका दुश्मन, उसका प्यार, अब उसका होने वाला पति।
“हां,” उसने कहा, कांपते हुए। “हां, मैं तुमसे शादी करूंगी।”
अर्जुन ने उसे अंगूठी पहनाई। फिर वो उठा और उसे कसकर गले लगा लिया। “मैं तुम्हें खुश रखूंगा,” उसने कहा। “मैं तुम्हें वो सब कुछ दूंगा जो तुम्हें हक है।”
तारा ने उसे चूमा। ये चुंबन वादा था, वादा एक नए जीवन का, एक नए रिश्ते का।
डिनर के बाद, वो दोनों बेडरूम में गए। आज रात और भी खास थी। आज रात वो दोनों एक दूसरे को अपना बनाने वाले थे, पूरी तरह से, हमेशा के लिए।
अर्जुन ने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटाया। उसने उसके कपड़े उतारने शुरू किए, एक-एक करके, बहुत प्यार से। तारा भी उसकी मदद कर रही थी, उसकी शर्ट के बटन खोल रही थी, उसकी पैंट की जिप खोल रही थी।
जब वो दोनों नंगे थे, अर्जुन ने उसे देखा। “तुम मेरी होने वाली पत्नी हो,” उसने कहा। “मेरी।”
“हां,” तारा ने कहा। “मैं सिर्फ तुम्हारी हूं।”
अर्जुन ने इस बार और प्यार से, और धीरे से उसमें प्रवेश किया। तारा ने महसूस किया कि वो फिर से भर गई थी, लेकिन इस बार ये भरावट और गहरा था, और प्यार भरा था।
वो दोनों एक दूसरे में खो गए। उनके शरीर एक दूसरे से बोल रहे थे, बिना शब्दों के, सिर्फ स्पर्श से, सिर्फ सांसों से।
“मैं तुमसे प्यार करता हूं,” अर्जुन ने कहा, धक्के लगाते हुए।
“मैं भी,” तारा ने कहा।
वो दोनों एक साथ ऊंचाइयों पर पहुंचे। उनका प्यार, उनकी एकता, उनका वादा – सब कुछ इस एक पल में समा गया।
परिवारों का मिलन
शादी की तारीख तय हो चुकी थी। लेकिन एक बड़ी समस्या थी – उनके परिवार। अर्जुन के पिता अभी भी इस रिश्ते के खिलाफ थे, और तारा की मां को भी यकीन नहीं था कि यह सही था।
“हमें उनसे बात करनी होगी,” तारा ने कहा।
“मैं जानता हूं,” अर्जुन ने कहा। “लेकिन मेरे पिता मानेंगे नहीं।”
“तो हम उन्हें मजबूर करेंगे,” तारा ने कहा, उसकी आंखों में वो चमक थी जो अर्जुन को पहली बार मिली थी।
अगले दिन, अर्जुन ने अपने पिता को अपने ऑफिस में बुलाया। तारा भी वहां थी।
“पापा,” अर्जुन ने कहा, “मैं तारा से शादी कर रहा हूं। और आपकी आशीर्वाद चाहता हूं।”
उसके पिता ने गुस्से में कहा, “कभी नहीं। मैं इस लड़की को अपनी बहू के रूप में कभी नहीं स्वीकार करूंगा। उसके पिता ने मुझे धोखा दिया था।”
“आपने भी तो उन्हें धोखा दिया था,” तारा ने शांति से कहा। “आपने उनका बिजनेस छीन लिया था।”
“वो मेरे पैसे थे,” उसके पिता ने कहा।
“और अब मैं आपके बेटे से प्यार करती हूं,” तारा ने कहा। “क्या यह बदला पर्याप्त नहीं है? क्या हम दोनों की खुशी आपके पुराने गुस्से से ज्यादा मायने नहीं रखती?”
अर्जुन के पिता चुप हो गए। उन्होंने तारा को देखा। वो सच कह रही थी। उनका गुस्सा, उनकी नफरत, अब सिर्फ उनके बेटे की खुशी को नष्ट कर रही थी।
“मैं… मैं सोचूंगा,” उन्होंने कहा और चले गए।
उसी शाम, तारा की मां से बात हुई। वो एक साधारण सी महिला थीं, लेकिन समझदार थीं।
“बेटा,” उन्होंने कहा, “क्या तुम सच में खुश हो?”
“हां मां,” तारा ने कहा। “बहुत खुश।”
“और वो तुमसे प्यार करता है?”
“बहुत ज्यादा।”
तारा की मां ने सांस ली। “तो फिर मैं तुम्हारे पिता की आत्मा को खुशी से देखूंगी। वो भी चाहते थे कि तुम खुश रहो। और अगर यह लड़का तुम्हें खुश रख सकता है, तो मैं इस रिश्ते से खुश हूं।”
तारा ने अपनी मां को गले लगा लिया। “शुक्रिया मां।”
दो दिन बाद, अर्जुन के पिता ने भी हामी भर दी। उन्होंने देखा था कि उनके बेटे की आंखों में क्या खुशी थी। और वो खुशी तारा की वजह से थी।
“मैं तुम्हें माफ करता हूं,” उन्होंने तारा से कहा। “और मैं तुम्हें अपनी बहू के रूप में स्वीकार करता हूं।”
तारा की आंखों में आंसू आ गए। ये वो पल था जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था। उसका दुश्मन, उसका ससुर बन रहा था। और वो खुश थी।
शादी की रात – नए सफर की शुरुआत
शादी का दिन आ गया। तारा लाल रंग के लहंगे में थी, सजी-धजी, खूबसूरत। अर्जुन शेरवानी में था, हैंडसम, गौरवान्वित।
वो दोनों मंडप में बैठे थे, एक दूसरे के सामने। सात फेरे लिए जा रहे थे, सात वादे, सात जन्मों का बंधन।
“मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा,” अर्जुन ने फेरे के दौरान फुसफुसाते हुए कहा।
“और मैं तुम्हें हमेशा प्यार करूंगी,” तारा ने कहा।
सातवें फेरे के बाद, वो दोनों पति-पत्नी बन चुके थे। लेकिन उनके लिए ये सिर्फ एक कागज़ी रिश्ता नहीं था। ये तो उनके प्यार की पराकाष्ठा थी, उनकी नफरत का अंत था, उनकी नई शुरुआत थी।
शादी की रात, वो दोनों अपने नए घर में थे। एक बड़ा सा बेडरूम, गुलाबी रोशनी में नहाया हुआ, गुलाब की खुशबू से महकता हुआ।
“आज हमारी सुहागरात है,” अर्जुन ने कहा, उसकी आंखों में वो चमक थी।
“हां,” तारा ने शर्माते हुए कहा।
“लेकिन मैं तुम्हें जानता हूं,” अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा। “तुम शर्माने वाली नहीं हो।”
“आज शर्मा रही हूं,” तारा ने कहा। “क्योंकि आज मैं पूरी तरह से तुम्हारी हूं।”
अर्जुन ने उसे अपनी ओर खींचा। उसने उसके गहरे लाल दुपट्टे को हटाया। तारा का चेहरा रोशनी में चमक रहा था।
“कितनी खूबसूरत हो तुम,” अर्जुन ने कहा।
“सिर्फ आज?” तारा ने पूछा।
“हमेशा से,” अर्जुन ने कहा। “लेकिन आज और भी ज्यादा।”
उसने उसके लहंगे के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके, धीरे-धीरे। तारा ने अपनी आंखें बंद कर लीं, लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान थी।
जब लहंगा हट गया, तो तारा सिर्फ अपने ब्लाउज और पेटीकोट में थी। अर्जुन ने उसे घुमाया, उसकी पीठ को चूमा, उसकी गर्दन को चूमा।
“मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं,” उसने कहा।
“मैं भी,” तारा ने कहा।
अर्जुन ने उसका ब्लाउज खोला। इस बार कोई जल्दबाजी नहीं थी, कोई हड़बड़ी नहीं थी। ये उनकी पहली रात थी पति-पत्नी के रूप में, और वो इसे यादगार बनाना चाहते थे।
तारा ने अर्जुन की मदद की उसके कपड़े उतारने में। जब वो दोनों नंगे थे, वो बिस्तर पर गिर गए, एक दूसरे की बाहों में।
“आज मैं तुम्हें धीरे-धीरे प्यार करूंगा,” अर्जुन ने कहा। “आज मैं तुम्हें महसूस करना चाहता हूं, हर एक पल, हर एक सेकंड।”
उसने अपने होंठ उसके माथे पर रखे, फिर आंखों पर, फिर नाक पर, फिर गालों पर, और फिर… उसके होठों पर।
ये चुंबन और गहरा था, और लंबा था। उनकी जीभें एक दूसरे को चख रही थीं, एक दूसरे को अपना बना रही थीं।
अर्जुन ने धीरे से अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया। तारा पहले से ही गीली थी, तैयार थी। लेकिन अर्जुन ने जल्दबाजी नहीं की। उसने अपनी उंगलियों से उसे छुआ, उसे तड़पाया, उसे और ज्यादा प्यार किया।
“अर्जुन…” तारा ने कांपते हुए कहा।
“हां मेरी जान,” उसने कहा।
“अब और नहीं सह सकती,” उसने कहा। “अब अंदर आ जाओ।”
अर्जुन ने मुस्कुराते हुए अपना लिंग उसकी योनि पर रखा। धीरे से, बहुत धीरे से, उसने अंदर प्रवेश किया।
तारा ने एक लंबी सांस ली। वो फिर से भर गई थी, लेकिन इस बार ये भरावट और भी प्यार भरी थी, और भी गहरी थी।
“मैं तुम्हारा हूं,” अर्जुन ने धक्के लगाते हुए कहा।
“और मैं तुम्हारी,” तारा ने कहा।
वो दोनों एक दूसरे में खो गए। धीरे-धीरे, प्यार से, वो एक दूसरे को अपना बना रहे थे। ये सिर्फ शारीरिक मिलन नहीं था, ये दो आत्माओं का मिलन था, जो कभी दुश्मन थीं, अब प्यार में डूबी हुई थीं।
“मैं… मैं आ रही हूं,” तारा ने कहा।
“मैं भी,” अर्जुन ने कहा।
वो दोनों एक साथ ऊंचाइयों पर पहुंचे। उनका प्यार, उनकी एकता, उनकी शादी – सब कुछ इस एक पल में समा गया।
अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। “मेरी पत्नी,” उसने कहा।
“मेरे पति,” तारा ने कहा।
वो दोनों एक दूसरे को देखते रहे, एक दूसरे की आंखों में खोए रहे। ये था उनका प्यार, जो नफरत से शुरू हुआ था, लेकिन अब हमेशा के लिए था।
नई जिंदगी, नए सपने
एक साल बीत चुका था। तारा और अर्जुन की शादी को एक साल हो गया था, और उनका प्यार और भी गहरा हो गया था।
आज उनकी anniversary थी। अर्जुन ने एक surprise प्लान किया था। उसने तारा को उसी होटल में ले गया जहां वो पहली बार मिले थे, जहां उनकी दुश्मनी प्यार में बदली थी।
“याद है?” अर्जुन ने पूछा।
“कैसे भूल सकती हूं,” तारा ने मुस्कुराते हुए कहा। “यहीं पर तुमने मुझे पहली बार किस किया था।”
“और आज,” अर्जुन ने कहा, एक छोटा सा बॉक्स निकालते हुए, “आज मैं तुम्हें यह देना चाहता हूं।”
तारा ने बॉक्स खोला। अंदर एक छोटी सी चाबी थी, और एक ultrasound की तस्वीर।
“यह…” तारा ने हैरानी से पूछा।
“हां,” अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा। “हमारा घर, और हमारा बच्चा।”
तारा की आंखों से आंसू बहने लगे। “मैं… मैं मां बनने वाली हूं?”
“हां,” अर्जुन ने कहा, उसे गले लगाते हुए। “हमारा परिवार अब पूरा होने वाला है।”
तारा ने उसे कसकर पकड़ लिया। ये वो खुशी थी जिसके बारे में उसने कभी सोचा नहीं था। उसका दुश्मन, उसका प्यार, उसका पति, अब उसके बच्चे का बाप बनने वाला था।
“मैं तुमसे प्यार करती हूं अर्जुन,” उसने कहा।
“मैं भी तारा,” अर्जुन ने कहा। “हमेशा से, हमेशा के लिए।”
वो दोनों उसी कमरे में गए जहां सब कुछ शुरू हुआ था। लेकिन इस बार वो दोनों अलग थे। इस बार वो दोनों पति-पत्नी थे, माता-पिता बनने वाले थे, और सबसे बड़कर, वो दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे।
अर्जुन ने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटाया। “आज मैं तुम्हें और प्यार करूंगा,” उसने कहा। “क्योंकि आज तुम सिर्फ मेरी पत्नी नहीं, मेरे बच्चे की मां भी हो।”
तारा ने मुस्कुराते हुए उसे अपनी ओर खींचा। “आओ,” उसने कहा। “मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए।”
वो दोनों एक दूसरे में खो गए। ये प्यार और भी गहरा था, और भी पवित्र था। क्योंकि अब ये सिर्फ उन दोनों का नहीं, उनके आने वाले बच्चे का भी था।
जब वो एक साथ climax पर पहुंचे, तारा ने महसूस किया कि ये सबसे सुंदर पल था उसकी जिंदगी का। उसका दुश्मन, उसका प्यार, उसका सब कुछ – अर्जुन।
अध्याय 10: बदला या प्यार – अंतिम फैसला
पांच साल और बीत गए। तारा और अर्जुन की एक बेटी थी, आर्या। वो दोनों खुश थे, उनका परिवार पूरा था।
एक दिन, तारा के पुराने डायरी हाथ लगी। उसने उसे खोला और पढ़ना शुरू किया। वो उस समय की बातें थीं जब वो अर्जुन से नफरत करती थी, जब वो उसे बर्बाद करना चाहती थी।
“क्या पढ़ रही हो?” अर्जुन ने आते हुए पूछा।
“पुरानी यादें,” तारा ने कहा।
अर्जुन ने डायरी ली और पढ़ा। उसमें लिखा था कि तारा कैसे उसे फंसाने की योजना बना रही थी, कैसे उसे प्यार में पागल करके छोड़ने वाली थी।
“यह…” अर्जुन ने कहा।
“मैं माफी चाहती हूं,” तारा ने कहा। “मैंने तुम्हें धोखा देने की कोशिश की थी।”
अर्जुन ने मुस्कुराते हुए डायरी बंद कर दी। “लेकिन तुमने ऐसा किया नहीं,” उसने कहा। “तुमने मुझसे प्यार कर लिया।”
“हां,” तारा ने कहा। “क्योंकि तुम वो इंसान थे जिसे मैं हमेशा से चाहती थी। बस मेरी नफरत मुझे ये देखने नहीं दे रही थी।”
अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। “तो क्या हुआ? बदला या प्यार?”
तारा ने मुस्कुराते हुए कहा, “प्यार। हमेशा प्यार। क्योंकि बदला तो मैं लेने आई थी, लेकिन प्यार में खो गई। और यही मेरी सबसे बड़ी जीत है।”
अर्जुन ने उसे चूमा। “नहीं,” उसने कहा। “ये हमारी जीत है। हम दोनों की।”
वो दोनों एक दूसरे को देखते रहे। उनकी बेटी बगल में खेल रही थी, उनका घर खुशियों से भरा था, और उनका प्यार… उनका प्यार हमेशा के लिए था।
“कभी सोचा है,” तारा ने कहा, “कि अगर उस रात हम नहीं मिले होते तो क्या होता?”
“हम मिल ही जाते,” अर्जुन ने कहा। “क्योंकि हम दोनों एक दूसरे के लिए बने थे। नफरत हमें मिली, लेकिन प्यार ने हमें एक कर दिया।”
तारा ने उसे कसकर पकड़ लिया। “मैं तुमसे प्यार करती हूं अर्जुन मेहता।”
“और मैं तुमसे तारा मेहता,” उसने कहा, उसका नया नाम जो उसने शादी के बाद लिया था।
वो दोनों एक दूसरे में खो गए, फिर से, हमेशा की तरह।
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