मेरा नाम मोहित शर्मा है। मैं नोएडा के एक प्राइवेट मैनेजमेंट कॉलेज में प्रोफेसर हूं। मेरी उम्र ३२ साल है, और मैं पिछले पांच सालों से इसी कॉलेज में पढ़ा रहा हूं। मोहित टीचर स्टूडेंट हिंदी सेक्स कहानी
मेरा कद ६ फीट है, एथलेटिक बॉडी है, और मैंने अपने करियर में हमेशा ईमानदारी से काम किया है। लेकिन एक बात थी जिसने मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।
उसका नाम था ऋद्धि मेहता। वह बीबीए की छात्रा थी, और उसका एडमिशन दूसरे साल में हुआ था। जब मैंने उसे पहली बार देखा, तो मेरी सांसें थम सी गईं। वह करीब २१ साल की लड़की थी, लेकिन उसके शरीर की खूबसूरती किसी मॉडल से कम नहीं थी।
उसके बाल घने और लंबे थे, आंखें हिरणी जैसी चंचल, और होंठ गुलाबी। लेकिन सबसे खास बात था उसका फिगर – ३४-२६-३४। उसकी चूचियां उभरी हुई थीं, कमर बिल्कुल पतली, और गांड का गोल आकार किसी भी मर्द को दीवाना बना सकता था।
हमारी पहली मुलाकात कॉलेज के कॉरिडोर में हुई। वह मुझे “गुड मॉर्निंग सर” कहकर निकल जाती, और मैं उसकी तरफ देखता रह जाता। धीरे-धीरे यह “हैलो” “हाय” में बदल गया। वह अक्सर मेरे ऑफिस में आती, कभी असाइनमेंट के बहाने, तो कभी बस यूं ही बात करने के लिए।
वह हमेशा टाइट कपड़े पहनती थी। एक दिन मुझे याद है, उसने काले रंग की मिडी ड्रेस पहनी थी जो उसके शरीर पर बिल्कुल चिपकी हुई थी। उसका फिगर उस ड्रेस में बिल्कुल साफ दिख रहा था। जब वह चलती, तो उसकी गांड का हर एक हिलना मेरे दिल की धड़कन बढ़ा देता। मैंने उस दिन रात भर उसी के बारे में सोचा, और मेरा लंड कई बार खड़ा हो गया।
लेकिन मैं एक प्रोफेसर था, और वह मेरी छात्रा। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारी यह “हैलो-हाय” की दोस्ती कभी कुछ और बन सकती है। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
यह बात उस साल के फेस्टिवल की है। कॉलेज में सालाना फंक्शन हो रहा था, और पूरा कैंपस सजा हुआ था। छात्र नाच-गा रहे थे, और शाम के ७ बज चुके थे। मैं कॉलेज में कुछ काम से रुका हुआ था, जब मुझे कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई दीं।
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मैं आवाजों की तरफ बढ़ा। वह आवाजें पुराने बिल्डिंग के पीछे वाले क्लासरूम से आ रही थीं। जैसे ही मैं पास पहुंचा, मुझे कुछ हलचल महसूस हुई। मैंने दरवाजे की खिड़की से झांका, और मेरे होश उड़ गए।
ऋद्धि वहां खड़ी थी, और उसके साथ कोई लड़का था – शायद उसका बॉयफ्रेंड। वह लड़का उसके काफी करीब था, और उसके हाथ ऋद्धि के कपड़ों पर थे। ऋद्धि का चेहरा शर्म से लाल हो रहा था, लेकिन वह विरोध नहीं कर रही थी। वह लड़का उसके ब्लाउज के बटन खोल रहा था, और ऋद्धि की सांसें तेज हो रही थीं।
मैं वहीं फ्रीज हो गया। मेरे मन में कई ख्याल आ रहे थे – क्या मुझे जाकर रोकना चाहिए? क्या मुझे प्रिंसिपल को बुलाना चाहिए? लेकिन साथ ही, मेरे अंदर एक और भावना भी जाग रही थी – एक अजीब सी उत्तेजना, एक गुप्त इच्छा।
तभी अचानक, मेरा पैर दरवाजे से टकराया और आवाज हो गई। अंदर वह लड़का घबरा गया। उसने ऋद्धि को धक्का दिया, और अगले ही पल वह खिड़की से कूदकर भाग गया। ऋद्धि वहीं खड़ी रह गई, हक्की-बक्की, उसका ब्लाउज खुला हुआ, और ब्रा भी आधी उतरी हुई थी। उसकी चूचियां लगभग बाहर आने को थीं।
मैं दरवाजे से अंदर घुसा। ऋद्धि ने मुझे देखा और उसका चेहरा पीला पड़ गया। वह तुरंत अपने हाथों से अपने बूब्स छुपाने की कोशिश करने लगी, लेकिन उसकी ब्रा खुली हुई थी, इसलिए वह पूरी तरह से अपने आप को ढक नहीं पा रही थी।
“सर… सर प्लीज… यह…” वह कांपते हुए बोली, आंसू उसकी आंखों में भर आए।
मैंने दरवाजा बंद किया और उसकी तरफ बढ़ा। मेरे चेहरे पर गुस्सा था, लेकिन अंदर ही अंदर मैं उसे इस हालत में देखकर उत्तेजित हो रहा था। उसके हाथ अपनी चूचियों पर थे, लेकिन उसके उभरे हुए बूब्स उसके हाथों से झांक रहे थे। उसकी काली मिडी ड्रेस उसके शरीर पर चिपकी हुई थी, और उसकी कमर की पतलाहट साफ दिख रही थी।
“यह क्या कर रही हो तुम?” मैंने गुस्से में पूछा।
“सर… प्लीज… मुझे माफ कर दो…” वह रोने लगी, “मैं… मैं समझ नहीं पाई… वो… वो मुझे बहला-फुसला कर ले आया…”
“तुम्हें पता है इसका क्या नतीजा हो सकता है?” मैंने कहा, “मैं अभी प्रिंसिपल सर को बुलाता हूं, और तुम्हारे पेरेंट्स को भी बुला लेता हूं। तुम्हारी पढ़ाई खत्म, तुम्हारी इज्जत खत्म।”
“नहीं सर! प्लीज!” वह मेरे पैरों में गिर गई, “मेरे पेरेंट्स को मत बुलाओ! वो… वो मुझे मार डालेंगे! मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी! प्लीज सर… मुझे माफ कर दो…”
मैंने उसे नीचे से देखा। वह मेरे सामने घुटनों के बल बैठी थी, उसका ब्लाउज खुला हुआ था, और उसके गोल-गोल बूब्स उसके हाथों से झांक रहे थे। उसकी सफेद ब्रा आधी खुली हुई थी, और उसके निप्पल लगभग दिख रहे थे। मेरे अंदर एक शैतान जाग गया।
मैंने उसका चेहरा उठाया और कहा, “ठीक है, मैं तुम्हारे पेरेंट्स को नहीं बुलाऊंगा, लेकिन एक शर्त है।”
“कुछ भी सर… जो आप कहेंगे…” वह रोते हुए बोली।
“मुझे वो करना होगा जो तुम्हारा बॉयफ्रेंड करने वाला था,” मैंने कहा, “मुझे तुम्हें चोदना होगा।”
ऋद्धि का चेहरा सफेद पड़ गया। वह मुझे देखती रही, जैसे कुछ समझ नहीं पा रही हो।
“सर… आप… आप यह क्या कह रहे हैं?” वह कांपते हुए बोली।
“तुम सुन चुकी हो। या तो मैं अभी प्रिंसिपल को बुलाता हूं, या फिर तुम मेरी बात मानती हो। तुम्हारी मर्जी,” मैंने कहा।
वह फिर से रोने लगी। वह काफी देर तक रोती रही, और मैं उसे देखता रहा। फिर धीरे-धीरे, उसने अपने आंसू पोंछे और सिर हिलाया।
“ठीक है सर… लेकिन प्लीज… किसी को मत बताना…”
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मैंने उसे खड़ा किया। वह कांप रही थी। मैंने उसके हाथ धीरे से उसकी चूचियों से हटाए, और उसका ब्लाउज पूरी तरह खोल दिया। उसकी सफेद ब्रा में उसके गोल-गोल बूब्स कैद थे, और वह शर्म से मेरी तरफ देख नहीं पा रही थी।
“देखो मुझे,” मैंने कहा।
वह धीरे से अपनी आंखें उठाईं। मैंने उसकी ब्रा के हुक खोले और उसे नीचे गिरा दिया। उसकी चूचियां आजाद हो गईं – गोल, गुलाबी, और उभरी हुईं। उसके निप्पल गहरे गुलाबी रंग के थे, और थोड़े कड़क भी, शायद उत्तेजना के कारण।
“कितनी सुंदर हैं तुम्हारी चूचियां,” मैंने कहा और उन्हें अपने हाथों में भर लिया।
ऋद्धि ने एक हल्की सी आवाज निकाली, लेकिन विरोध नहीं किया। मैंने उसके बूब्स दबाने शुरू किए, उन्हें मसलना शुरू किया। वह मेरे सामने खड़ी थी, नंगी ऊपर से, और मैं उसकी चूचियों को पी रहा था।
मैंने उसकी मिडी ड्रेस का जिप खोला और उसे नीचे धकेल दिया। वह अब सिर्फ पैंटी में थी – सफेद रंग की लेस वाली पैंटी जो उसकी चूत की झलक दे रही थी।
“सर… प्लीज… धीरे…” वह कांपते हुए बोली।
“आज के बाद मुझे सर मत कहना,” मैंने कहा, “मोहित कहना।”
मैंने उसे बेंच पर बिठाया और उसकी टांगें खोलीं। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी – शायद उसके बॉयफ्रेंड के कारण, या शायद अब मेरे कारण। मैंने उसकी पैंटी एक तरफ की और उसकी चूत देखी।
वह बिल्कुल साफ शेव्ड थी, गुलाबी रंग की, और बिल्कुल कसी हुई। मैं समझ गया कि यह लड़की अभी तक कुंवारी है – उसका बॉयफ्रेंड उसे चोदने ही वाला था कि मैं आ गया।
“तुम अभी तक कुंवारी हो?” मैंने पूछा।
वह शर्म से सिर हिलायी।
“बहुत अच्छा,” मैंने कहा, “आज मैं तुम्हें औरत बनाऊंगा।”
मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पहले से ही कड़ा हो चुका था – ७ इंच लंबा और मोटा। ऋद्धि ने मेरे लंड को देखा और उसकी आंखें बड़ी हो गईं।
“यह… यह तो बहुत बड़ा है…” वह डरते हुए बोली।
“डरो मत,” मैंने कहा, “थोड़ा दर्द होगा, फिर मजा आएगा।”
मैंने उसकी चूत पर अपने लंड का सिरा रखा और धीरे से धक्का दिया। वह बहुत टाइट थी। मैंने जोर लगाया और मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया। ऋद्धि ने चीखने की कोशिश की, लेकिन मैंने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया।
“चुप! कोई सुन लेगा,” मैंने कहा।
मैंने उसे चोदना शुरू किया। धीरे-धीरे, फिर तेजी से। उसकी चूत बहुत टाइट थी, और मेरा लंड उसमें अंदर-बाहर हो रहा था। ऋद्धि के आंसू निकल रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे उसकी आवाजें बदलने लगीं – दर्द की जगह सुकून और मजे की आवाजें आने लगीं।
“ओह… मोहित… धीरे…” वह अब कहने लगी।
मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और गहरी चुदाई शुरू कर दी। मेरा लंड उसकी चूत की गहराई तक जा रहा था। हम दोनों की सांसें तेज हो गई थीं, और क्लासरूम में सिर्फ हमारी आवाजें गूंज रही थीं – चुदाई की आवाजें, ऋद्धि की मूंह से निकलती हल्की-हल्की कराहें, और मेरे जोर-जोर से सांस लेने की आवाजें।
“कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा।
“अच्छा… बहुत अच्छा…” वह कांपते हुए बोली, “और जोर से… चोदो मुझे…”
यह सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया। मैंने उसे घुमाया और डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। उसकी गांड बहुत गोल और टाइट थी। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे और जोर-जोर से उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा।
“आह… हां… और जोर से…” ऋद्धि अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, “चोदो मुझे मोहित… मैं तुम्हारी हूं…”
मैंने उसे करीब २० मिनट तक चोदा। फिर मैं झड़ने वाला था। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुंह में दे दिया।
“चूसो इसे,” मैंने कहा।
ऋद्धि ने पहले तो हिचकिचाया, फिर धीरे से मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया। मैंने उसके बाल पकड़े और उसका सिर आगे-पीछे करने लगा। कुछ ही पलों में, मैं उसके मुंह में झड़ गया। उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।
हम दोनों थककर बेंच पर गिर गए। ऋद्धि मेरी बाहों में थी, उसका सिर मेरे सीने पर था। हम दोनों पसीने से लथपथ थे।
“कैसा लगा?” मैंने पूछा।
“पहले दर्द हुआ, फिर बहुत मजा आया,” उसने कहा, “लेकिन मोहित… यह हमारे बीच ही रहेगा ना?”
“हां,” मैंने कहा, “लेकिन एक बात।”
“क्या?”
“अब मैं जब चाहूंगा तुम्हें चोदूंगा। तुम मना नहीं कर सकतीं।”
वह चुप रही, फिर धीरे से सिर हिलायी।
उस रात के बाद, ऋद्धि और मेरे बीच एक अजीब सा रिश्ता बन गया। वह मेरी छात्रा थी, लेकिन अब वह मेरी रखैल भी बन चुकी थी।
मैंने उसे कॉलेज में कभी भी कुछ नहीं कहा – वहां हम सिर्फ प्रोफेसर और छात्रा थे। लेकिन जब कोई नहीं होता, तो मैं उसे अपने ऑफिस में बुलाता, या फिर किसी खाली क्लासरूम में ले जाता।
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एक हफ्ते बाद, मैंने उसे शाम को अपने ऑफिस में बुलाया। सारे प्रोफेसर चले गए थे, और कॉलेज खाली हो चुका था। ऋद्धि आई तो उसने स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था।
“आज मैं तुम्हें एक नया मजा दूंगा,” मैंने कहा।
मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया और उसके होंठ चूमने लगा। वह पहले तरह झिझकी, फिर मेरा साथ देने लगी। हमारी जुबानें एक-दूसरे से लड़ रही थीं, और मैंने उसके टॉप के नीचे हाथ डालकर उसकी चूचियां दबानी शुरू कर दीं।
“आह… मोहित…” वह मेरे कान में फुसफुसाई।
मैंने उसे उठाया और टेबल पर बिठाया। उसकी स्कर्ट ऊपर उठा दी और उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चूत फिर से गीली हो चुकी थी। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और एक ही झटके में उसकी चूत में घुसा दिया।
“ओह गॉड!” वह चीखी।
मैंने उसकी टांगें अपनी कमर पर लपेटीं और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। टेबल हिल रहा था, और ऋद्धि की चूचियां उसके हर झटके के साथ हिल रही थीं। मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसकी ब्रा भी खोल दी। अब वह पूरी तरह नंगी थी, और मैं उसे पूरी तरह कपड़े पहने हुए चोद रहा था।
“स्टूडेंट और टीचर अपस में लिपटे हुए हैं,” मैंने उसके कान में कहा, “कितना मजा आ रहा है ना?”
“हां… बहुत मजा…” वह सांसें तेज करते हुए बोली, “और जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो…”
मैंने उसे घुमाया और टेबल पर घुटनों के बल कर दिया। अब उसकी गांड मेरी तरफ थी। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे और उसकी चूत में अपना लंड पेल दिया। डॉगी स्टाइल में वह और भी टाइट लग रही थी।
“आह… हां… मारो मेरी गांड…” वह चिल्लाने लगी, “तुम्हारा लंड बहुत मोटा है मोहित… मेरी चूत को चीर रहा है…”
मैंने करीब आधे घंटे तक उसे अलग-अलग पोजीशन में चोदा। फिर जब मैं झड़ने वाला था, तो मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और उसकी गांड के छेद पर रखा।
“नहीं… वहां मत डालो… वहां दर्द होगा…” वह डर गई।
“शांत रहो,” मैंने कहा, “मजा आएगा।”
मैंने थूक लगाया और धीरे से अपने लंड का सिरा उसकी गांड में डाला। वह चीखी, लेकिन मैंने उसका मुंह दबा दिया। धीरे-धीरे मेरा पूरा लंड उसकी गांड में चला गया। वह बहुत टाइट थी, और मुझे बहुत मजा आ रहा था।
मैंने उसकी गांड चोदनी शुरू कर दी। धीरे-धीरे, फिर तेजी से। ऋद्धि के आंसू निकल रहे थे, लेकिन साथ ही वह मूंह से भी मजे की आवाजें निकाल रही थी।
“कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा।
“अच्छा… बहुत अच्छा…” वह कांपते हुए बोली, “और जोर से… मेरी गांड फाड़ दो…”
मैंने उसकी गांड में ही झड़ दिया। गर्म वीर्य उसकी गांड में भर गया, और हम दोनों थककर एक-दूसरे में गिर गए।
कॉलेज में गुप्त मुलाकातें
इसके बाद यह सिलसिला चलता रहा। हम कॉलेज में हर जगह चुदाई करते – खाली क्लासरूम में, लाइब्रेरी के पीछे, पार्किंग में, और कभी-कभी मेरे ऑफिस में भी।
एक दिन मैंने उसे लाइब्रेरी के पीछे वाले कमरे में बुलाया। वह किताबें लेने के बहाने आई थी। जैसे ही वह अंदर आई, मैंने दरवाजा बंद कर दिया और उसे दीवार से सटा दिया।
“आज मैं तुम्हें यहीं चोदूंगा,” मैंने कहा।
मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसे नीचे गिरा दिया। उसकी काली पैंटी में उसकी चूत की झलक आ रही थी। मैंने उसकी कमीज भी ऊपर उठा दी और उसकी ब्रा में कैद चूचियों को आजाद कर दिया।
“कोई आ जाएगा…” वह डरते हुए बोली।
“कोई नहीं आएगा,” मैंने कहा, “अब चुपचाप मजा लो।”
मैंने उसकी एक टांग उठाई और अपने लंड को उसकी चूत पर रखा। एक ही झटके में मैं अंदर घुस गया। वह दीवार से सटी हुई थी, और मैं उसे खड़े-खड़े चोद रहा था।
“ओह… मोहित… यह पोजीशन…” वह कांप रही थी।
मैंने उसकी चूचियां दबाते हुए उसे जोर-जोर से चोदा। हमारी सांसें तेज हो रही थीं, और बाहर लाइब्रेरी में छात्र पढ़ रहे थे, लेकिन अंदर प्रोफेसर अपनी स्टूडेंट को चोद रहा था।
“टीचर ने स्टूडेंट को चोदा,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “कैसा लग रहा है?”
“बहुत मजा आ रहा है…” वह सांसें रोकते हुए बोली, “और जोर से… मेरी चूत को रगड़ो…”
मैंने उसे करीब १५ मिनट तक उसी पोजीशन में चोदा। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुंह में दे दिया। उसने मेरा वीर्य पी लिया।
घर पर चुदाई
कुछ महीनों बाद, मैंने अपनी पत्नी को उसके मायके भेज दिया (उसके पेरेंट्स बीमार थे)। मेरा घर एक हफ्ते के लिए खाली था। मैंने ऋद्धि को अपने घर बुलाया।
वह शाम को आई। उसने टाइट जींस और छोटी टी-शर्ट पहनी थी। मैंने उसे देखते ही पकड़ लिया और सोफे पर गिरा दिया।
“आज मैं तुम्हें पूरी रात चोदूंगा,” मैंने कहा।
मैंने उसके कपड़े उतारे। वह अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया और उसकी चूचियां चूसने लगा। उसके निप्पल कड़क हो चुके थे, और वह मेरे बालों में हाथ फेर रही थी।
“मोहित… मुझे बहुत मजा आ रहा है…” वह फुसफुसाई।
मैंने उसे बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर गिरा दिया। उसकी पैंटी उतारी तो उसकी चूत पूरी गीली थी। मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली और अंदर-बाहर करने लगा।
“आह… हां… और जोर से…” वह कांपने लगी।
मैंने उसे ६९ की पोजीशन में लेटाया। मैं उसकी चूत चाट रहा था, और वह मेरा लंड चूस रही थी। उसकी चूत का स्वाद बहुत मीठा था, और मैं उसे जीभ से चाट-चाटकर पागल कर रहा था।
“मोहित… मैं झड़ने वाली हूं…” वह चिल्लाई।
मैंने उसकी चूत में जीभ और अंदर डाल दी, और वह झड़ गई। उसका पूरा शरीर कांप उठा, और उसकी चूत से पानी निकलने लगा।
अब मेरी बारी थी। मैंने उसे घुमाया और डॉगी स्टाइल में उसकी चूत में अपना लंड घुसा दिया। वह चीखी, लेकिन मैंने रुकना नहीं चाहा। मैंने उसे जोर-जोर से चोदा, उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए।
“आह… हां… मारो मुझे…” वह चिल्लाने लगी, “मैं तुम्हारी रंडी हूं मोहित… चोदो मुझे…”
यह सुनकर मैं और पागल हो गया। मैंने उसे रात भर अलग-अलग पोजीशन में चोदा – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, और कई और तरीके। हर बार वह झड़ती, और मैं उसे फिर से चोदने लगता।
सुबह जब हम उठे, तो हम दोनों पूरी तरह थक चुके थे। लेकिन वह मुस्कुरा रही थी।
“कैसा लगा?” मैंने पूछा।
“बहुत मजा आया,” उसने कहा, “मैं तुमसे रोज चुदवाना चाहती हूं।”
कॉलेज फेस्ट में चुदाई
एक महीने बाद कॉलेज का सालाना फेस्ट आया। ऋद्धि डांस प्रोग्राम में हिस्सा ले रही थी। उसने स्टेज पर बहुत ही सेक्सी ड्रेस पहनी थी – घाघरा और छोटी चोली जिसमें उसकी कमर पूरी दिख रही थी।
प्रोग्राम के बाद, मैंने उसे बैकस्टेज बुलाया। वह अभी भी मेकअप में थी, और बहुत खूबसूरत लग रही थी।
“आज तुम बहुत सेक्सी लग रही हो,” मैंने कहा।
मैंने उसे पकड़ा और एक खाली ड्रेसिंग रूम में ले गया। वहां मैंने उसे दीवार से सटाया और उसका घाघरा उठा दिया। वह नीचे से कुछ नहीं पहने थी – उसकी चूत साफ दिख रही थी।
“तुमने पैंटी नहीं पहनी?” मैंने हैरान होकर पूछा।
“तुम्हें पता था कि तुम बुलाओगे,” उसने शरारत से कहा, “इसलिए मैं तैयार होकर आई थी।”
मैंने उसकी चोली के बटन खोले और उसकी चूचियां बाहर निकाल लीं। उसके निप्पल मेकअप की वजह से और भी गुलाबी लग रहे थे। मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया।
“मोहित… जल्दी करो… कोई आ सकता है…” वह कांप रही थी।
मैंने अपने पैंट की चेन खोली और अपना लंड बाहर निकाला। एक ही झटके में मैं उसकी चूत में घुस गया। वह दीवार से सटी हुई थी, और मैं उसे खड़े-खड़े चोद रहा था।
“ओह… हां… और जोर से…” वह सांसें तेज करते हुए बोली, “मेरी चूत में अपना लंड पेलो…”
मैंने उसे जोर-जोर से चोदा। बाहर फेस्ट की आवाजें आ रही थीं, लेकिन अंदर प्रोफेसर अपनी स्टूडेंट को चोद रहा था। यह सोचकर मैं और उत्तेजित हो गया।
“स्टूडेंट और टीचर अपस में लिपटे हुए हैं,” मैंने उसके कान में कहा, “कितना मजा आ रहा है ना?”
“बहुत मजा…” वह कांपते हुए बोली, “मैं झड़ने वाली हूं…”
मैंने और जोर लगाया, और वह झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया, और मैं भी उसी में झड़ गया।
हम दोनों थककर एक-दूसरे में गिर गए। वह मुस्कुरा रही थी।
“मोहित,” उसने कहा, “मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं।”
मैं चौंक गया। मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह सिर्फ शारीरिक रिश्ता प्यार में बदल जाएगा।
“लेकिन ऋद्धि,” मैंने कहा, “मैं शादीशुदा हूं।”
“मुझे पता है,” उसने कहा, “लेकिन मैं फिर भी तुमसे प्यार करती हूं। मुझे तुम्हारे साथ रहना है, चाहे कुछ भी हो।”
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। मुझे भी उससे कुछ खास लगाव हो गया था, लेकिन मैंने कभी इसे प्यार नहीं माना था।
छुट्टियों में मिलना
कॉलेज की छुट्टियां हो गईं। ऋद्धि अपने घर जा रही थी, और मुझे उसकी बहुत याद आ रही थी। हम रोज फोन पर बात करते, और कभी-कभी वीडियो कॉल पर सेक्स भी करते।
एक दिन उसने मुझे बताया कि उसके घर वाले एक हफ्ते के लिए बाहर जा रहे हैं। मैंने तुरंत अपनी पत्नी को कहीं भेजने का बहाना बनाया और उसके शहर चला गया।
उसके घर पर, हमने एक हफ्ते तक लगातार चुदाई की। दिन-रात, हर कमरे में, हर तरह से। हम दोनों पूरी तरह से एक-दूसरे में खो गए थे।
एक रात, हम छत पर लेटे हुए थे। तारे चमक रहे थे, और ऋद्धि मेरी बाहों में थी।
“मोहित,” उसने कहा, “क्या तुम मुझसे शादी करोगे?”
मैं चुप हो गया। मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा था।
“मैं जानती हूं तुम शादीशुदा हो,” उसने कहा, “लेकिन तुम अपनी पत्नी से तलाक ले सकते हो ना?”
“ऋद्धि,” मैंने कहा, “यह इतना आसान नहीं है। समाज, परिवार… सब कुछ।”
“तो फिर हम ऐसे ही मिलते रहेंगे?” उसने पूछा।
“हां,” मैंने कहा, “जब तक तुम चाहो।”
वह मुस्कुराई और मेरे कंधे पर सिर रख दिया।
आज भी, जब कॉलेज खत्म हो गया है और ऋद्धि नौकरी करने लगी है, हम मिलते हैं। हमारा रिश्ता अब भी वैसा ही है – गुप्त, पैशनेट, और पागलपन भरा।
हर हफ्ते, कभी होटल में, कभी मेरे घर पर, कभी उसके फ्लैट पर। हम अभी भी एक-दूसरे को वैसे ही चोदते हैं जैसे पहले चोदते थे – बिना रुके, बिना थके, पूरे जोश और पैशन के साथ।
वह अब भी मेरी “स्टूडेंट” है, और मैं उसका “प्रोफेसर”। यह रोल-प्ले हमारी चुदाई को और भी मजेदार बना देता है।
“टीचर ने स्टूडेंट को चोदा,” यह शब्द हम दोनों के लिए अब भी एक मैजिकल फ्रेज है जो हमें उत्तेजित कर देता है।
और हर बार जब मैं उसकी चूत में अपना लंड घुसाता हूं, या उसकी गांड मारता हूं, या उसके मुंह में झड़ता हूं, तो मुझे वह पहला दिन याद आता है – वह क्लासरूम, वह डरा हुआ चेहरा, और वह पहली चुदाई जिसने हम दोनों की जिंदगी बदल दी।
हमारा रिश्ता शायद समाज के नजरिए में गलत है, लेकिन हम दोनों के लिए यह सच्चा प्यार है – एक ऐसा प्यर जो शारीरिक आकर्षण से शुरू हुआ, और अब एक गहरे बंधन में बदल गया है।
और आज भी, जब भी मैं उसे देखता हूं, मेरा लंड खड़ा हो जाता है, और मैं उसे अपनी बाहों में भरकर चोदने लगता हूं। क्योंकि कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो कभी खत्म नहीं होते – वे बस और गहरे होते जाते हैं।
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mera bhi lund khada ho gya hai aisi sex stories padh kar ….koi aisi college girl hai kya