
देसी भाभी की चुदाई का परिचय
मेरा नाम अभिषेक है। मैं आज आपको वो कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसमें प्यार के साथ-साथ डर भी था, खौफ भी था, और पकड़े जाने का वो डर जो हर पल हमारे साथ रहता था। यह देसी भाभी की चोदाई की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसी दास्तान है जहाँ हर पल जान पर खेलकर प्यार किया गया।
मेरे भैया अमित की शादी को तीन साल हो चुके थे। भाभी अभिलाषा, उम्र 28 साल, रंग गोरा, आँखें हिरणी जैसी, और फिगर जो देखकर कोई भी दीवाना हो जाए – 36-30-38। वो एकदम हॉट सेक्सी भाभी लगती थीं। लेकिन इस खूबसूरती के पीछे एक खौफनाक सच छुपा था जो मुझे धीरे-धीरे पता चला।
हमारा घर पुराने जमाने का हवेली जैसा था – बड़ा, अंधेरा, और रहस्यमय। भैया बिजनेस में अक्सर विदेश जाते रहते थे। घर में मैं, मेरे माता-पिता, और भाभी रहते थे। पिताजी बीमार रहते थे और माँ उनकी देखभाल में रहती थीं। ऊपर वाले माले पर भाभी का कमरा था और नीचे मेरा। बीच में एक पुरानी सीढ़ियाँ जो हर रात आवाज़ करती थीं।
एक रात की बात है। मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। अचानक बिजली चली गई। पूरा घहरा अंधेरा हो गया। मैंने मोमबत्ती जलाई और सोचा कि भाभी के कमरे में चलकर देखूं कि वो ठीक हैं या नहीं। मैं सीढ़ियाँ चढ़ने लगा। वो सीढ़ियाँ हर कदम पर चरमराती थीं और आवाज़ कर रही थीं जैसे कोई मुझे चेतावनी दे रहा हो।
मैं भाभी के कमरे के दरवाज़े पर पहुँचा। दरवाज़ा हल्का सा खुला था। अंदर से कोई आवाज़ आ रही थी। मैंने झाँका तो देखा कि भाभी बिस्तर पर बैठी रो रही थीं। उन्होंने सफेद साड़ी पहनी हुई थी और उनके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था।
“भाभी…” मैंने धीमी आवाज़ में कहा।
वो चौंककर उठीं और मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में आँसू और डर दोनों थे। “अभिषेक? तुम यहाँ क्या कर रहे हो? जाओ यहाँ से!” उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा।
मैं अंदर आ गया। “क्या हुआ भाभी? आप क्यों रो रही हैं? और इतना डर क्यों रही हैं?”
भाभी ने मुझे घबराई हुई नज़रों से देखा। “अभिषेक, यह घर… यह घर ठीक नहीं है। मुझे लगता है यहाँ कोई है… कोई जो मुझे देखता है… मुझे सताता है।”
मैंने कहा, “क्या मतलब?”
“पिछले कुछ महीनों से, जब भी तुम्हारे भैया बाहर होते हैं, मुझे लगता है कोई मेरे कमरे में आता है… मेरे सामान को छूता है… मेरी नींद में मुझे छूता है…” भाभी कांप रही थीं।
मैंने उन्हें गले लगा लिया। वो मेरी बाहों में आ गईं और रोने लगीं। उनका शरीर काँप रहा था। मैं उन्हें सहला रहा था। उनकी खुशबू मुझे घेर रही थी। वो एकदम देसी भाभी की तरह सादगी में भी बेहद खूबसूरत लग रही थीं।
“डरो मत भाभी, मैं हूँ ना।” मैंने कहा।
वो मुझसे चिपट गईं। उनके सीने का स्पर्श मुझे महसूस हो रहा था। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। यह पहली बार था जब हम इतने करीब आए थे। लेकिन यह प्यार का करीबना था या डर का? शायद दोनों।
अचानक हमें बाहर से कदमों की आवाज़ सुनाई दी। कोई सीढ़ियाँ चढ़ रहा था। भाभी का चेहरा सफेद पड़ गया। “ओह गॉड! कोई आ रहा है!”
मैं घबरा गया। अगर माँ या पिताजी ने हमें इस हालत में देख लिया तो? मैंने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और कान लगाया। कदम करीब आ रहे थे… धीरे… धीरे…
फिर आवाज़ रुक गई। हम दोनों साँस रोककर खड़े थे। भाभी मेरी बाहों में थीं और मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि लग रहा था बाहर वाला सुन लेगा।
कुछ देर बाद कदम वापस जाते हुए सुने गए। हम दोनों ने राहत की साँस ली।
“शायद माँ थीं…” मैंने कहा।
भाभी ने सिर हिलाया। “नहीं, माँ के कदम इतने भारी नहीं होते। यह कोई और था…”
वो मुझसे और चिपट गईं। उनका डर मुझे भी होने लगा था, लेकिन साथ ही एक अजीब सा रोमांच भी था। हम दोनों अकेले, अंधेरे कमरे में, एक-दूसरे की बाहों में…
“अभिषेक, प्लीज़ आज रात यहीं रुक जाओ। मुझे अकेले डर लग रहा है।” भाभी ने कहा।
मैंने कहा, “लेकिन भाभी, अगर किसी ने देख लिया तो?”
“कौन देखेगा? सब सो रहे हैं। और अगर तुम नहीं रुके तो मैं मर जाऊँगी इस डर से।”
मैं मान गया। हम दोनों बिस्तर पर बैठे रहे। मोमबत्ती की रोशनी में भाभी का चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था। वो देसी भाभी की चोदाई की कहानियों वाली हीरोइन की तरह लग रही थीं जो मासूमियत और शोहरत का मिश्रण थीं।
“भाभी, मैं आपको बहुत पहले से…” मैंने कहना शुरू किया।
“क्या?” उन्होंने पूछा।
“कुछ नहीं…” मैंने रोक लिया।
“बोलो ना अभिषेक। मुझे पता है तुम क्या कहना चाहते हो।” उन्होंने मेरी आँखों में देखा।
मैंने हिम्मत की। “मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ भाभी… शायद इससे ज़्यादा…”
भाभी ने नज़रें झुका लीं। “मुझे भी तुमसे…” उन्होंने रुककर कहा, “मुझे भी तुम्हारी ज़रूरत है अभिषेक। तुम्हारे भैया ने तो मुझे कभी समझा ही नहीं। मैं अकेली हूँ… बहुत अकेली…”
यह सुनकर मेरा दिल भर आया। मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और धीरे से उनके माथे पर चूमा। वो कांप गईं लेकिन मना नहीं किया। मैंने उनके गालों पर चूमा… फिर उनकी गर्दन पर…
“अभिषेक… यह गलत है…” उन्होंने कहा लेकिन उनकी आवाज़ में वो मज़बूरी नहीं थी जो होनी चाहिए थी।
“मैं जानता हूँ भाभी, लेकिन मैं खुद को रोक नहीं पा रहा…” मैंने कहा।
मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। वो पहले तो झिझकी लेकिन फिर मेरे सीने से लग गईं। हम दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे। उनके शरीर की गर्माहट मुझे पागल बना रही थी। यह इंडियन देवर भाभी चुदाई फुल मस्ती का आगाज़ था जो धीरे-धीरे बढ़ रहा था।
अचानक हमें फिर से आवाज़ सुनाई दी। इस बार खिड़की से कोई आवाज़ आ रही थी जैसे कोई खिड़की खोल रहा हो।
“कौन है?” भाभी चीखीं।
मैंने खिड़की की तरफ देखा। अंधेरे में कुछ भी साफ नहीं दिख रहा था। मैंने खिड़की के पास जाकर झाँका तो कोई नहीं था। लेकिन हवा तेज़ चल रही थी और पेड़ की टहनियाँ खिड़की से टकरा रही थीं।
“बस पेड़ है भाभी, डरो मत।” मैंने कहा।
लेकिन भाभी का डर कम नहीं हो रहा था। वो मुझसे चिपटी हुई थीं। मैंने उन्हें बिस्तर पर बिठाया और उनके पास बैठ गया। हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। मोमबत्ती की लौ हवा में फड़फड़ा रही थी और हमारी छायाएँ दीवार पर नाच रही थीं।
“अभिषेक, क्या तुम मुझे चूमोगे?” भाभी ने अचानक पूछा।
मैं हैरान रह गया। “क्या?”
“मैं जानती हूँ यह गलत है, लेकिन मुझे महसूस करना है कि कोई मुझे चाहता है… मुझे प्यार करता है…” उनकी आँखों में आँसू थे।
मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और धीरे-धीरे उनके होंठों की तरफ बढ़ा। मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि लग रहा था बाहर तक सुनाई दे रहा होगा। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रखे…
वो पहला किस था – नरम, मीठा, और डर के साथ मिला हुआ एक अजीब सा एहसास। भाभी ने भी मेरा साथ दिया और हम दोनों एक-दूसरे में खोने लगे। मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और गहरा किस किया। उनके होंठों का स्वाद मुझे पागल बना रहा था।
हम करीब पाँच मिनट तक किस करते रहे। मेरे हाथ धीरे-धीरे उनके शरीर पर घूमने लगे। मैंने उनकी कमर को छुआ… फिर उनकी पीठ को… वो कांप रही थीं लेकिन मना नहीं कर रही थीं।
“भाभी…” मैंने उनके कान में फुसफुसाते हुए कहा।
“हाँ…” उन्होंने साँसें तेज़ करते हुए कहा।
मैंने उनकी साड़ी का पल्ला हटाया और उनके कंधे को चूमा। उन्होंने ब्लाउज पहना हुआ था जो हल्का सा खुला हुआ था। मैंने धीरे से अपना हाथ उनके ब्लाउज में डाला…
अचानक हमें बाहर से कोई आवाज़ सुनाई दी। कोई बोल रहा था – “अभिलाषा… अभिलाषा…”
यह माँ की आवाज़ थी!
हम दोनों जैसे बिजली से कटे। भाभी का चेहरा सफेद पड़ गया। “ओह माय गॉड! माँ जाग गईं!”
मैं घबरा गया। “क्या करूँ?”
“छिप जाओ! जल्दी! अलमारी में!” भाभी ने कहा।
मैं जल्दी से अलमारी में घुस गया। भाभी ने अपने कपड़े ठीक किए और दरवाज़ा खोला।
“क्या हुआ बहू? मैंने तुम्हारी आवाज़ सुनी…” माँ ने कहा।
“कुछ नहीं माँजी, बस एक बुरा सपना आया था। मैं चीख गई।” भाभी ने कहा।
“तुम ठीक तो हो?”
“हाँ माँजी, आप जाइए सोइए।”
“ठीक है, अगर कुछ चाहिए हो तो बता देना।”
माँ चली गईं। मैं अलमारी में साँस रोके खड़ा था। मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि लग रहा था सब सुन लेंगे। भाभी ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे अलमारी से बाहर निकाला।
“चले जाओ अभिषेक, अभी के अभी। अगर माँ फिर आ गईं तो…” भाभी घबराई हुई थीं।
मैंने कहा, “लेकिन भाभी…”
“प्लीज़ अभिषेक, कल बात करेंगे। अभी जाओ।”
मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और एक जल्दी सा किस किया। “मैं आपसे प्यार करता हूँ भाभी।”
वो मुस्कुराईं। “मुझे भी तुमसे… अब जाओ।”
मैंने खिड़की से झाँका और फिर धीरे से नीचे उतर गया। मेरे पैर कांप रहे थे और दिल अभी भी जोर-जोर से धड़क रहा था। यह रात मेरी जिंदगी की सबसे रोमांचक और खौफनाक रात थी।
अगले दिन मैं सुबह उठा तो भाभी नीचे आईं। उन्होंने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी और बाल खुले हुए थे। वो देसी भाभी सेक्स in साड़ी की तरह बेहद खूबसूरत लग रही थीं। हमारी नज़रें मिलीं और दोनों एक-दूसरे को देखकर शरमा गए।
“सुबह-सुबह कहाँ से आ रहे हो तुम दोनों?” माँ ने पूछा।
“कुछ नहीं माँ, बस…” मैंने कहा।
“अभिषेक अपने कमरे से आ रहा है माँजी।” भाभी ने बचाव किया।
माँ ने शक भरी नज़रों से देखा लेकिन कुछ नहीं कहा। मुझे लगा कि शायद माँ को कुछ शक हो गया है।
पूरे दिन मैं और भाभी एक-दूसरे से दूर रहे। हम डर रहे थे कि कहीं किसी को शक न हो जाए। लेकिन शाम को जब माँ पिताजी के कमरे में गईं तो भाभी ने मुझे इशारा किया।
“रात को आना, मैं इंतज़ार करूँगी।” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।
मैंने सिर हिलाया। मेरा दिल फिर से जोर-जोर से धड़कने लगा। देसी भाभी की चोदाई का यह खेल अब शुरू हो चुका था और अब पीछे लौटना मुश्किल था।
रात को जब सब सो गए, मैं फिर से सीढ़ियाँ चढ़ने लगा। इस बार मैंने चप्पल उतार दी थी ताकि आवाज़ न हो। धीरे-धीरे मैं ऊपर पहुँचा। भाभी का दरवाज़ा खुला था और अंदर मोमबत्ती जल रही थी।
मैं अंदर गया तो देखा कि भाभी बिस्तर पर लेटी हुई थीं। उन्होंने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी और उनके बाल बिखरे हुए थे। वो एकदम इंडियन भाभी सेक्स की फिल्मों वाली हीरोइन की तरह लग रही थीं।
“आ गए तुम?” उन्होंने उठकर कहा।
“हाँ भाभी…” मैंने कहा।
“बंद करो दरवाज़ा… और आओ मेरे पास…”
मैंने दरवाज़ा बंद किया और उनके पास गया। वो बैठ गईं और मुझे अपने पास बैठने के लिए कहा। हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। मोमबत्ती की रोशनी में उनका चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था।
“कल रात को जो हुआ… मैं उसे भूल नहीं पा रही…” भाभी ने कहा।
“मैं भी नहीं भाभी…” मैंने कहा।
वो मेरी तरफ झुकीं और मुझे किस करने लगीं। यह किस कल से ज़्यादा गहरा और ज़्यादा प्यार भरा था। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और कसकर पकड़ लिया। हम दोनों एक-दूसरे में खोने लगे।
मेरे हाथ उनके शरीर पर घूमने लगे। मैंने उनकी साड़ी का पल्ला खींचा और उनके कंधे को चूमा। वो सिसकारी लेने लगीं। मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए…
अचानक हमें फिर से कोई आवाज़ सुनाई दी। इस बार यह सीढ़ियों से आ रही थी। कोई ऊपर आ रहा था!
“छिपो!” भाभी ने धीमी आवाज़ में कहा।
मैं जल्दी से बिस्तर के नीचे घुस गया। भाभी ने तुरंत कंबल ओढ़ लिया और आँखें बंद कर लीं।
दरवाज़ा खुला और कोई अंदर आया। मैं बिस्तर के नीचे से देख रहा था। पैरों से लग रहा था कि यह कोई मर्द था… और वो जूतों में था…
“अभिलाषा…” एक आवाज़ आई।
यह मेरे भैया की आवाज़ थी!
मेरा दिल रुक सा गया। भैया यहाँ क्या कर रहे थे? वो तो बाहर गए हुए थे ना?
भाभी ने आँखें खोलीं। “अमित? तुम? तुम यहाँ कब आए?”
“अभी-अभी आया हूँ। मुझे तुमसे मिलने का मन किया इसलिए रात की फ्लाइट से आ गया।” भैया ने कहा।
“लेकिन… लेकिन मुझे बताया क्यों नहीं?” भाभी घबराई हुई थीं।
“सरप्राइज़ देना चाहता था।” भैया ने कहा और बिस्तर पर बैठ गए।
मैं बिस्तर के नीचे था और मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि लग रहा था सब सुन लेंगे। मैं साँस भी नहीं ले पा रहा था। देसी भाभी की चोदाई का यह खेल अब मेरी जान पर बन आया था।
“क्या हुआ? तुम घबराई हुई क्यों लग रही हो?” भैया ने पूछा।
“कुछ नहीं… बस अचानक देखकर…” भाभी ने कहा।
“चलो, मैंने इतनी दूर से आकर तुम्हें सरप्राइज़ दिया और तुम…” भैया ने कहा और भाभी को अपनी बाहों में लेने लगे।
मैं बिस्तर के नीचे से यह सब देख रहा था। मेरा दिल टूट रहा था और डर भी लग रहा था। अगर भैया को पता चल गया कि मैं यहाँ हूँ तो?
“अमित, मुझे नींद आ रही है… कल बात करेंगे…” भाभी ने कहा।
“अरे, अभी तो आया हूँ…” भैया ने कहा।
“प्लीज़ अमित, मैं थकी हुई हूँ…”
“ठीक है, सो जाओ। मैं भी सोता हूँ।”
भैया ने कपड़े उतारे और बिस्तर पर आ गए। अब मैं बिस्तर के नीचे था, भैया और भाभी बिस्तर पर थे, और मुझे यहाँ से निकलना था बिना किसी को पता चले…
यह असली हॉट देसी भाभी चोदाई का मौका था लेकिन अब यह जानलेवा हो गया था। मैं धीरे-धीरे बिस्तर के नीचे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था…
तभी मेरे हाथ से एक बोतल गिर गई जो बिस्तर के पास रखी थी!
टन…
बोतल गिरने की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज गई।
भैया अमित बिस्तर पर से उछलकर बैठ गए। उनकी आँखें अंधेरे में चमक रही थीं। “कौन है?!”
मैं बिस्तर के नीचे से बाहर निकलने ही वाला था कि भाभी ने तेज़ी से चादर खींच ली और जोर से खांसने लगीं। “अमित… रुको… मुझे खांसी आ गई… पानी की बोतल गिर गई…”
भैया ने लाइट जलाने की कोशिश की लेकिन बिजली अभी भी नहीं आई थी। मोमबत्ती की रोशनी में सिर्फ छायाएँ नाच रही थीं। मैं साँस रोककर बिस्तर के नीचे पड़ा था। मेरा लंड अभी भी सख्त था और भाभी के रस से चमक रहा था। दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि लगता था भैया सुन लेंगे।
“पानी की बोतल?” भैया ने शक से पूछा।
“हाँ… अंधेरे में गिर गई… तुम अचानक आ गए ना…” भाभी की आवाज़ काँप रही थी, लेकिन उन्होंने हिम्मत जुटाई।
भैया कुछ पल चुप रहे। फिर उन्होंने कहा, “ठीक है… सो जाओ। मैं भी थक गया हूँ।”
वो लेट गए। मैंने धीरे-धीरे साँस ली। भाभी ने चादर के अंदर से अपना पैर मेरे कंधे पर रखा और हल्के से दबाया—जैसे कह रही हों “अभी मत निकलो”।
करीब बीस मिनट तक मैं वहीं पड़ा रहा। भैया की साँसें गहरी हो गईं। वो सो गए थे। भाभी ने धीरे से चादर हटाई और मुझे इशारा किया। मैं चुपके से बिस्तर के नीचे से निकला। मेरा दिल अभी भी मुँह में था।
भाभी ने मुझे खींचकर खिड़की के पास ले गईं। बाहर अंधेरा था। उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाया, “जाओ… अभी… खिड़की से…”
मैंने उनके होंठों पर एक जल्दी सा किस किया। उनके स्तन अभी भी नंगे थे चादर के अंदर। मैंने एक बार फिर उन्हें मसला। “कल…”
“कल नहीं… परसों… भैया दो दिन रुकेंगे…” उन्होंने कहा।
मैं खिड़की से नीचे कूद गया। पैरों में दर्द हुआ लेकिन जान बच गई। उस रात मैं अपने कमरे में लेटा रहा और बार-बार सोचा—देसी भाभी की चोदाई कितनी खतरनाक हो चुकी थी। एक और सेकंड देर होती तो सब खत्म हो जाता।
अगले दो दिन घर में भैया रहे। हम दोनों एक-दूसरे से दूर रहे। नज़रें मिलतीं तो शरमा जाते। रात को मैं ऊपर जाने का सोचता लेकिन हिम्मत नहीं होती। भैया की मौजूदगी ने डर बढ़ा दिया था।
तीसरे दिन सुबह भैया फिर बिजनेस के लिए निकल गए। दो हफ्ते के लिए। घर फिर से खाली हो गया। माँ-पिताजी अपने कमरे में।
दोपहर में भाभी ने मुझे छत पर बुलाया। सूरज तेज़ था। वो हल्की पीली साड़ी में थीं। बाल खुले।
“कल रात… तुम कितने करीब थे पकड़े जाने के…” उन्होंने कहा।
“मुझे पता है भाभी। लेकिन मैं रुक नहीं सकता।”
वो पास आईं। “मैं भी नहीं रुक सकती। रात को इंतज़ार करना।”
मैंने उन्हें दीवार से लगा लिया। साड़ी के ऊपर से उनके स्तन मसले। निप्पल सख्त हो गए। “यहीं?”
“नहीं… रात को… पूरे घर में खामोशी होगी।”
रात के बारह बजे। पूरा घर सो चुका था। मैं फिर से बिना चप्पल के सीढ़ियाँ चढ़ा। दरवाज़ा खुला था। अंदर सिर्फ एक दीया जल रहा था।
भाभी बिस्तर पर नंगी लेटी थीं। सिर्फ एक पतली चादर ओढ़े हुए। जैसे ही मैं अंदर गया, उन्होंने चादर हटा दी। पूरा शरीर नंगा—भारी स्तन, पतली कमर, गोल नितंब, और मुंडी हुई चमकदार चूत।
“आओ अभिषेक… आज कोई नहीं रोकेगा हमें।”
मैंने कपड़े उतारे। लंड पहले से तन चुका था। भाभी उठकर बैठ गईं और उसे हाथ में ले लिया। “इतना सख्त… कल रात भी ऐसा ही था जब तुम नीचे छिपे थे…”
उन्होंने लंड को मुँह में ले लिया। गरम जीभ घुमाते हुए चूसने लगीं। मैंने उनके बाल पकड़ लिए। “और गहरा… हाँ… गले तक…”
भाभी ने पूरा लंड मुँह में ले लिया। आँखों से आँसू आ गए लेकिन वो रुक नहीं रही थीं। गैग साउंड आ रही थी। मैंने धीरे-धीरे उनके मुँह में धक्के लगाने शुरू किए। “Desi Bhabhi Ki chudai… आज पूरी करनी है…”
कुछ देर बाद मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया। पैर फैलाए। उनकी चूत पहले से गीली चमक रही थी। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया। क्लिट को चूसा, उँगलियाँ अंदर डालकर तेजी से चलायीं। भाभी की कमर उछलने लगी। “आह… अभिषेक… वहाँ… और जोर से चाटो…”
मैंने उनकी चूत को अच्छी तरह गीला किया। फिर लंड को ऊपर रखा। “डालूँ?”
“हाँ… एक झटके में पूरा डालो…”
मैंने जोर से धकेला। पूरा लंड अंदर तक चला गया। दोनों सिसक उठे। तंग दीवारें मुझे कस रही थीं। मैंने धीरे-धीरे चलाना शुरू किया, फिर रफ्तार बढ़ाई।
“आह… चोदो… अपनी भाभी को चोदो…” भाभी कराह रही थीं।
मैंने उनके पैर कंधों पर रख दिए और और गहराई तक जाने लगा। हर धक्के के साथ उनकी छातियाँ काँप रही थीं। मैंने दोनों स्तन मसलते हुए जोर-जोर से चुदाई की। बिस्तर चरमरा रहा था।
“तेज़… और तेज़…”
मैंने उन्हें घोड़ी बना दिया। पीछे से लंड अंदर डाला। एक हाथ से उनके बाल पकड़े, दूसरे से कमर। जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। उनकी गांड हिल रही थी। “आह… अभिषेक… इतना जोर से… लगता है कोई सुन लेगा…”
“सुनने दो… आज देसी भाभी की चोदाई पूरी होनी है…”
मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। पसीना बह रहा था। भाभी की कराहें दब रही थीं लेकिन रुक नहीं रही थीं। अचानक उनका शरीर काँप उठा। “मैं… आ रही हूँ… आह…”
उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से कस लिया। पानी छोड़ दिया। मैंने भी खुद को नहीं रोका। गहरे धक्के लगाते हुए अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य उनकी चूत में भर गया।
हम दोनों पसीने से लथपथ बिस्तर पर गिर गए। साँसें तेज़ चल रही थीं।
“यह… यह बहुत खतरनाक था…” भाभी ने कहा।
“लेकिन बहुत अच्छा भी…”
अगली रात फिर से।
इस बार हमने और हिम्मत दिखाई। मैं उनके कमरे में गया तो उन्होंने कहा, “आज नीचे चलो… तुम्हारे कमरे में… वहाँ कोई शक नहीं करेगा।”
हम चुपके से नीचे आए। मेरे कमरे में। दरवाज़ा बंद किया। भाभी ने साड़ी उतार दी। फिर से नंगी। मैंने उन्हें दीवार से लगा लिया और खड़े-खड़े चोदना शुरू किया। एक पैर उठाकर। लंड अंदर-बाहर। उनके स्तन मेरे मुँह में।
“आह… दीवार से… जोर से…”
फिर मैंने उन्हें कुर्सी पर बिठाया। खुद सामने खड़ा होकर उनकी जाँघों के बीच लंड ठोका। उनकी आँखें बंद थीं, मुँह खुला।
रात भर हमने कई बार किया। कभी बिस्तर पर, कभी फर्श पर, कभी खिड़की के पास जहाँ हल्की हवा आ रही थी। हर बार डर था कि कहीं माँ जाग न जाएँ, लेकिन हर बार वासना जीत गई।
एक बार जब मैं उनकी गांड में उँगली डाल रहा था और लंड चूत में था, तभी बाहर से माँ की आवाज़ आई—“अभिषेक… पानी ला देना…”
हम दोनों जम गए। लंड अभी भी अंदर था। भाभी ने आँखें फाड़ लीं। मैंने धीरे से लंड निकाला। “आ रहा हूँ माँ…”
मैंने जल्दी से पैंट पहन ली और पानी लेकर गया। माँ ने कुछ नहीं देखा। वापस आकर मैंने भाभी को फिर से चोदा—इस बार और गुस्से और भूख के साथ।
अगले एक हफ्ते तक लगभग हर रात देसी भाभी की चोदाई होती रही।
कभी सुबह जल्दी जब माँ-पिताजी अभी सो रहे होते, कभी दोपहर में जब घर खाली लगता। एक दिन किचन में—मैंने उन्हें सिंक पर बिठाया, साड़ी ऊपर की और खड़े-खड़े चुदाई की। उनके मुँह पर हाथ रखा ताकि आवाज़ न निकले।
एक दिन बाथरूम में। पानी चल रहा था। मैंने पीछे से उनकी गांड मसली, फिर लंड चूत में डाल दिया। पानी के शोर में उनकी कराहें दब गईं।
हर बार खतरा बढ़ रहा था, लेकिन मज़ा भी। भाभी अब खुद मुझे बुलातीं। “आज रात… आज कुछ नया…”
एक रात उन्होंने कहा, “आज मेरी गांड में डालो…”
मैंने पहले अच्छी तरह चाटा, उँगली से ढीला किया, फिर धीरे-धीरे लंड अंदर धकेला। बहुत तंग था। भाभी दर्द से सिसक रही थीं लेकिन “मत निकालो… धीरे-धीरे पूरा डालो…” कह रही थीं।
जब पूरा अंदर गया तो दोनों की साँसें रुक गईं। मैंने धीरे-धीरे चलाना शुरू किया। फिर रफ्तार बढ़ाई। उनकी गांड मेरे लंड को कस रही थी। “आह… अभिषेक… गांड फट जाएगी… लेकिन मत रोको…”
मैंने जोर-जोर से चुदाई की। आखिर में अंदर ही झड़ गया।
समय बीतता गया। भैया कभी-कभी आ जाते, तब हम दूर रहते। लेकिन जैसे ही वो जाते, फिर से शुरू।
एक रात जब भैया अचानक दो दिन पहले आ गए, हम लगभग पकड़े ही गए। मैं उनके कमरे से निकल रहा था कि सीढ़ियों पर उनकी आवाज़ आ गई। भाभी ने मुझे जल्दी से अलमारी में छुपा दिया। भैया अंदर आए, भाभी के साथ बातें कीं, फिर सो गए। मैं पूरी रात अलमारी में खड़ा रहा। सुबह जब भैया बाथरूम गए तब निकला।
डर के बावजूद रुकना नामुमकिन हो चुका था।
देसी भाभी की चोदाई अब सिर्फ सेक्स नहीं रह गई थी। यह एक लत बन चुकी थी। हर बार और गहरा, और खतरनाक, और मस्त।
एक रात भाभी ने कहा, “अभिषेक… अगर कभी पकड़े गए तो?”
मैंने उन्हें कसकर पकड़ा। “तो साथ में झेलेंगे। लेकिन मैं रुकने वाला नहीं।”
उस रात हमने फिर से पूरी रात चुदाई की—हर पोजीशन में, हर कोने में। जब सुबह हुई तो दोनों थक चुके थे, लेकिन संतुष्ट।
New Sex Story :- पड़ोसन भाभी और ननद की चुदाई
Comments (2)