मेरा नाम अनिल है, और मैं अपने दोस्त प्रिंस की शादी में शामिल होने के लिए जयपुर के एक पांच सितारा होटल में ठहरा हुआ था। प्रिंस और मेरी दोस्ती कॉलेज के दिनों से थी, और अब वो अपनी गर्लफ्रेंड नेहा से शादी कर रहा था।
शादी तीन दिन की थी, और होटल में सभी रिश्तेदार ठहरे हुए थे। मैंने रजिस्ट्रेशन कराया और अपने कमरे में गया—तीसरे फ्लोर का 302 नंबर कमरा। नहाने के बाद मैं नीचे लॉबी में आया जहाँ शादी की तैयारियाँ चल रही थीं।
तभी मेरी नजर एक औरत पर पड़ी जो लॉबी के सोफे पर बैठी थी। उसने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी, और उसका ब्लाउज थोड़ा लो कट था। उसके बूब्स—उफ, क्या बताऊँ—इतने बड़े और गोल थे कि साड़ी भी उनपर फिसल रही थी। उसकी उम्र करीब 32-33 साल की होगी, और उसके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी थी।
“यह कौन है?” मैंने पास खड़े वेटर से पूछा।
“सर, यह दुल्हन की बहन हैं—प्रिया भाभी। पति का कुछ साल पहले देहांत हो गया था, विधवा हैं,” वेटर ने बताया।
विधवा भाभी—यह शब्द सुनते ही मेरे मन में कुछ हिला। शायद यही वो चीज थी जो मुझे उनकी तरफ खींच रही थी। शादी के घर में विधवा भाभी की चुदाई की फैंटेसी मेरे दिमाग में आ गई।
मैं उनके पास गया और बोला, “नमस्ते भाभी, मैं अनिल हूँ—प्रिंस का दोस्त।”
प्रिया ने ऊपर देखा। उसकी आँखें हल्की लाल थीं—शायद रोई थीं। “नमस्ते अनिल जी, मैं प्रिया, नेहा की दीदी,” उसने धीमी आवाज में कहा।
“आप ठीक हैं?” मैंने पूछा, उनके पास बैठते हुए।
“हाँ, बस थोड़ी यादें आ रही थीं… शादी देखकर,” उसने कहा, और मेरी तरफ देखते हुए एक हल्की सी मुस्कान दी।
उसकी मुस्कान में कुछ ऐसा था जो मुझे पागल बना गया। शायद उसकी अकेली जिंदगी की प्यास, या फिर उसके बदन की गर्मागरम खुशबू।
हल्दी की रस्म और पहली नजदीकी
अगले दिन हल्दी की रस्म थी। मैंने पीले रंग का कुर्ता पहना और नीचे आया। प्रिंस की फैमिली और नेहा की फैमिली दोनों पूल साइड पर इकट्ठी थीं।
मैंने देखा कि प्रिया भाभी भी आई हुई हैं। उसने पीली साड़ी पहनी थी, और उसका ब्लाउज बैकलेस था—उसकी पीठ पूरी नंगी दिख रही थी, बस एक पतली सी डोरी बंधी थी। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
“भाभी, आप बहुत सुंदर लग रही हैं,” मैंने पास जाकर कहा।
“धन्यवाद अनिल जी,” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज में थोड़ी ठंडक थी।
हल्दी की रस्म शुरू हुई। दूल्हे-दुल्हन को हल्दी लगाई जा रही थी। प्रिया भी अपनी बहन को हल्दी लगा रही थी। मैं उसे देख रहा था—उसकी बांहें उठने पर उसकी कमर दिखती, और उसकी साड़ी की प्लीट्स उसकी गांड के आकार को साफ दिखा रही थीं।
तभी प्रिंस ने चिल्लाया, “अरे अनिल, तू भी आना—भाभी को भी हल्दी लगा!”
मैं गया और प्रिया के पास खड़ा हो गया। उसने अपनी बांह आगे बढ़ाई। मैंने हल्दी उंगली पर ली और उसकी बांह पर लगाने लगा।
जैसे ही मेरा हाथ उसकी त्वचा को छुआ, मुझे एक करंट सा लगा। उसकी त्वचा इतनी सॉफ्ट और गर्म थी। मैंने धीरे-धीरे हल्दी लगाई, उंगली से उसकी बांह को सहलाते हुए।
“अनिल जी…” प्रिया ने धीमी आवाज में कहा, “इतनी देर क्यों लगा रहे हैं?”
“मज़ा आ रहा है भाभी, आपकी त्वचा बहुत सॉफ्ट है,” मैंने हिम्मत करके कहा।
प्रिया ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी—शर्मिंदगी और चाहत का मिश्रण। उसने कुछ नहीं कहा, बस अपनी बांह हटा ली।
“नहीं, यह ठीक नहीं है,” उसने कहा, और वहाँ से चली गई।
मैं थोड़ा निराश हुआ, लेकिन मुझे पता था कि यह खेल अभी शुरू हुआ है।
सुबह का नाश्ता और दोबारा मुलाकात
अगली सुबह मैं होटल के रेस्टोरेंट में नाश्ते के लिए गया। बुफे लगा हुआ था, और मैंने अपनी प्लेट ली। तभी मैंने देखा कि प्रिया भाभी अकेली एक कोने वाली टेबल पर बैठी हैं।
मैं उनके पास गया, “भाभी, यहाँ बैठ सकता हूँ?”
उसने ऊपर देखा, और थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, “हाँ, बैठ जाइए।”
मैं उनके सामने बैठ गया। हम दोनों ने नाश्ता किया, और बीच-बीच में बातचीत होती रही।
“कल… कल के लिए सॉरी,” मैंने कहा, “मैंने कुछ ज्यादा ही बोल दिया।”
“कोई बात नहीं,” प्रिया ने कहा, और इस बार उसकी आवाज में थोड़ी नरमी थी। “आपकी गलती नहीं है… शायद मेरी भी इच्छा थी कि कोई मुझे छुए।”
यह सुनकर मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। शादी के घर में विधवा भाभी की चुदाई की कल्पना मेरे दिमाग में और भी साफ हो गई।
“भाभी, आप अकेली हैं… और मैं समझ सकता हूँ कि आपकी क्या जरूरत है,” मैंने धीरे से कहा, अपना पैर टेबल के नीचे उसके पैर से छूते हुए।
प्रिया ने अपना पैर हटाया, लेकिन फिर रुक गई। उसने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखें नम थीं।
“अनिल जी, प्लीज… मैं एक विधवा हूँ… लोग क्या कहेंगे?” उसने कहा।
“कोई नहीं जानेगा भाभी, यह हमारे बीच रहेगा,” मैंने कहा, अपना हाथ टेबल पर उसके हाथ के पास रखते हुए।
प्रिया ने अपना हाथ हटाया। “नहीं, यह गलत है,” उसने कहा, और उठकर चली गई।
मैंने उसे जाते हुए देखा। उसकी साड़ी की प्लीट्स हवा में हिल रही थीं, और उसकी गांड का आकार साफ दिख रहा था। मुझे पता था कि वो मना कर रही है, लेकिन उसकी आँखों में वो प्यास थी जो सिर्फ एक मर्द ही बुझा सकता था।
शाम की रस्म और बदलता मौसम
शाम को मेहंदी और संगीत की रस्म थी। मैंने ब्लैक कलर का शेरवानी पहना और नीचे आया। पूरा लॉन रोशनियों से जगमगा रहा था, और म्यूजिक बज रहा था।
मैंने देखा कि प्रिया भाभी भी आई हुई हैं। इस बार उसने मजेंटा रंग की लहंगा-साड़ी पहनी थी, और उसका ब्लाउज बहुत ही सेक्सी था—डीप नैक, बैकलेस, और स्लीवलेस। उसके बूब्स बाहर निकलने को तरस रहे थे।
मैं उसके पास गया। “भाभी, आप तो आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं।”
“धन्यवाद,” उसने कहा, और इस बार उसने मेरी तरफ देखकर एक लंबी मुस्कान दी।
संगीत शुरू हुआ और सब डांस करने लगे। मैंने प्रिया से हाथ बढ़ाया, “भाभी, एक डांस?”
उसने हिचकिचाते हुए हाँ कहा। हम डांस फ्लोर पर गए। मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर पर रखा और दूसरा हाथ उसके हाथ में लिया। धीमी-धीमी म्यूजिक बज रही थी।
हम दोनों एक दूसरे के करीब थे। मेरा लंड उसकी कमर से टच हो रहा था, और मुझे पता था कि उसे महसूस हो रहा है। उसने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आँखें नीचे कर लीं।
जैसे-जैसे डांस आगे बढ़ा, मैं उसे और करीब खींचता गया। अब हम दोनों पूरी तरह एक दूसरे से सटे हुए थे। उसके बूब्स मेरे सीने से दब रहे थे, और मैं उसकी सांसों को महसूस कर सकता था।
“अनिल जी…” उसने धीमी आवाज में कहा, “आपका… आपका कुछ मुझे चुभ रहा है…”
“माफी चाहता हूँ भाभी, लेकिन आप इतनी खूबसूरत हैं कि मैं खुद को रोक नहीं पाया,” मैंने कहा, उसके कान में फुसफुसाते हुए।
प्रिया ने कुछ नहीं कहा। डांस खत्म हुआ और वो मुझे छोड़कर चली गई। लेकिन इस बार उसने मुझसे पहले कहा, “रात को डिनर के बाद… लॉबी में मिलिए।”
मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। शादी के घर में विधवा भाभी की चुदाई का मौका आने वाला था।
रात का डिनर और अंतिम मुलाकात
रात का डिनर बुफे सिस्टम में था। मैंने अपनी प्लेट ली और एक कोने में बैठ गया। प्रिया भाभी भी आईं, लेकिन वो दूसरी टेबल पर बैठीं—अपनी फैमिली के साथ।
डिनर के बाद मैं लॉबी में इंतजार करने लगा। करीब आधे घंटे बाद प्रिया आईं। उसने अब भी वही मजेंटा लहंगा पहना हुआ था, लेकिन उसका दुपट्टा हटा दिया था। उसकी क्लीवेज पूरी तरह दिख रही थी—दो बड़े, गोल, उभरे हुए बूब्स।
“चलिए,” उसने कहा, और मेरा हाथ पकड़कर मुझे लिफ्ट की तरफ ले गई।
“कहाँ?” मैंने पूछा।
“मेरे कमरे में… 512 नंबर,” उसने कहा, लिफ्ट में आते हुए।
लिफ्ट में हम दोनों अकेले थे। प्रिया ने अचानक मेरा चेहरा पकड़ा और मुझे किस कर लिया। एक गहरा, पैशनेट किस। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई और मेरी जीभ से खेलने लगी।
“म्म्म… भाभी…” मैंने कहा, उसकी कमर पकड़ते हुए।
“आज रात… मुझे अपनी बनाओ… मैं तरस गई हूँ…” उसने कहा, मुझे किस करते हुए।
लिफ्ट खुली और हम उसके कमरे में गए। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, प्रिया ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
विधवा भाभी की चूत का मज़ा
कमरे में घुसते ही प्रिया ने मुझे अपनी तरफ खींचा और फिर से किस करने लगी। इस बार उसका किस और भी जोशीला था—वो पूरी तरह बेशर्म हो चुकी थी। शादी के घर में विधवा भाभी की चुदाई अब शुरू होने वाली थी।
“अनिल… मुझे… मुझे चोदो… मैं तीन साल से अकेली हूँ…” उसने कहते हुए अपने आंसू पोंछे।
“शांत हो जाओ भाभी, आज मैं तुम्हें वो सब दूँगा जो तुम्हें चाहिए,” मैंने कहा, उसके चेहरे को चूमते हुए।
मैंने उसका दुपट्टा हटाया। उसका लहंगा बहुत भारी था, लेकिन उसका ब्लाउज—उफ, वो तो एकदम टाइट था। मैंने उसके ब्लाउज के पीछे का हुक खोला और उसे नीचे गिरा दिया।
प्रिया की ब्रा सामने आ गई—गोल्डन कलर की, लेस वाली। मैंने ब्रा भी खोल दी और उसके बूब्स आज़ाद हो गए। इतने बड़े, गोल, और गुलाबी निप्पल वाले बूब्स मैंने आज तक नहीं देखे थे। तीन साल की प्यासी विधवा के बूब्स—क्या ही माल था।
“क्या बूब्स हैं तुम्हारे भाभी…” मैंने कहा, उन्हें दोनों हाथों से पकड़ते हुए।
“चूसो इन्हें… प्लीज…” प्रिया ने कहा, अपने सिर पीछे झुकाते हुए।
मैंने एक बूब का निप्पल अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। कितना मीठा और सॉफ्ट था। मेरी जीभ उस पर घूम रही थी, कभी काटता, कभी चूसता। दूसरे हाथ से मैं दूसरे बूब को दबा रहा था।
“आह्ह… अनिल… बहुत मज़ा आ रहा है… और जोर से…” प्रिया चीख रही थी।
मैंने उसके दोनों बूब्स को बारी-बारी से चूसा, दबाया, मसला। वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी, उसकी सांसें तेज हो गई थीं।
फिर मैं नीचे बैठ गया और उसका लहंगा खोलने लगा। लहंगे के नीचे वो एक पतली सी पैंटी पहने हुए थी—गुलाबी रंग की, और बीच में एक गीला धब्बा था।
“देखो तो, कितनी गीली हो गई हो,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
“चूसो मेरी चूत… प्लीज… मैं तरस गई हूँ…” प्रिया ने कहा, अपनी पैंटी उतारते हुए।
जैसे ही पैंटी उतरी, उसकी चूत सामने आ गई—गुलाबी, गीली, और थोड़ी बालों वाली। तीन साल से बिना लंड के, यह चूत तो पूरी तरह तरस रही थी।
मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी और चाटना शुरू कर दिया। कितनी मीठी थी उसकी चूत का स्वाद। मैंने चूत के होठों को चूमा, फिर जीभ से ऊपर नीचे किया।
“आह्ह… अनिल… माँ… बहुत मज़ा आ रहा है…” प्रिया चीख रही थी, अपने हाथ मेरे बालों में फेरते हुए।
मैंने उसकी क्लिटरिस को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। वो छोटी सी गुलाबी नोब बाहर निकली हुई थी, और मैं उसे जीभ से रगड़ रहा था।
“उई माँ… मैं पागल हो जाऊँगी… और जोर से…” प्रिया चीख रही थी।
मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। इतनी टाइट चूत थी, लेकिन इतनी गीली कि उंगली आराम से अंदर चली गई। मैं उंगली अंदर-बाहर करने लगा और साथ में क्लिट चूसता रहा।
“मैं झड़ गई… अनिल… मैं झड़ गई…” प्रिया ने चीखते हुए कहा, और उसकी चूत से एक गाढ़ा तरल निकल गया जो मैंने पी लिया।
अब मेरी बारी थी। मैं खड़ा हुआ और अपने कपड़े उतारने लगा। शर्ट खोली, पैंट खोली, और अंडरवियर नीचे किया। मेरा लंड बाहर आ गया—8 इंच लंबा, मोटा, और कड़ा।
“यह… यह बहुत बड़ा है…” प्रिया ने कहा, डरते हुए।
“डरो मत भाभी, तुम्हें बहुत मज़ा आएगा,” मैंने कहा, अपना लंड हिलाते हुए।
प्रिया घुटनों के बल बैठ गई। उसने मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे चाटना शुरू कर दिया। उसकी जीभ टोपे पर घूम रही थी, फिर नीचे की तरफ गई।
“म्म्म… हाह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है भाभी…” मैंने कहा।
प्रिया ने धीरे से लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। वो धीरे-धीरे और ज्यादा अंदर लेने लगी। उसके मुँह से आवाजें आ रही थीं—”घुघु… घुघु…”
मैंने उसका सर पकड़ा और अपना लंड उसके मुँह में तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। वो गले तक ले रही थी, बिना रुके।
“आह्ह… भाभी… मैं झड़ने वाला हूँ… तुम्हारे मुँह में…” मैंने कहा।
प्रिया ने कुछ नहीं कहा, बस चूसती रही। मेरा शरीर अकड़ा, और फिर एक जोरदार झटके के साथ मेरा गाढ़ा वीर्य उसके मुँह में भर गया।
प्रिया ने सारा वीर्य पी लिया, और फिर लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया। मेरा लंड अभी भी कड़ा था, वो थोड़ा झुका हुआ था लेकिन अभी भी तैयार था।
असली चुदाई – चूत में लंड का गेम
“अब असली मज़ा आएगा…” मैंने कहा, और प्रिया को बेड पर घोड़ी बना दिया।
उसकी गांड ऊपर थी, और चूत पूरी तरह दिख रही थी—गीली, गुलाबी, और चोदने के लिए तरस रही थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा।
“प्लीज अनिल… जल्दी करो… मैं तरस गई हूँ…” प्रिया ने कहा, अपनी गांड हिलाते हुए।
मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया।
“उई माँ… बहुत बड़ा है… मेरी चूत फट जाएगी…” प्रिया ने चीखते हुए कहा।
“बस थोड़ी देर… फिर मज़ा आएगा…” मैंने कहा, और धक्के लगाने शुरू कर दिए—तेज, गहरे, और जोरदार।
ठप… ठप… ठप… ठप…
आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरा लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था, और प्रिया की चूत उसे कसकर पकड़े हुए थी। चूत से पानी निकल रहा था, जो हम दोनों की जांघों पर बह रहा था।
“आह्ह… अनिल… और जोर से… चोदो मुझे… अपनी बना लो…” प्रिया चीख रही थी।
“तुम मेरी हो… मेरी रांड हो…” मैंने कहा, उसके बाल पकड़ते हुए।
मैं उसकी चूत और भी तेजी से चोद रहा था। प्रिया के मुँह से चीखें निकल रही थीं:
“आह्ह… हाह्ह… माँ… अनिल… मैं झड़ने वाली हूँ… और जोर से चोदो…”
मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। मेरा लंड उसकी चूत में पिस्टन की तरह अंदर-बाहर हो रहा था।
“मैं भी झड़ने वाला हूँ… अपना पानी निकालो…” मैंने कहा।
“हाँ… अनिल… अपना माल मेरी चूत में ही छोड़ दो… मैं गर्भवती होना चाहती हूँ तुमसे…” प्रिया ने कहा।
यह सुनकर मैं और भी जोश में आ गया। मैंने कुछ और जोरदार धक्के लगाए और फिर अपना लंड पूरी तरह अंदर डालकर रोक दिया।
“आह्ह…” मैंने कराहते हुए अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया।
गाढ़ा, गर्म वीर्य उसकी चूत में भर रहा था। मेरा लंड फूल-फूल कर माल निकाल रहा था, और प्रिया भी उसी वक्त झड़ गई।
“मैं भी झड़ गई… आह्ह…” उसने कहा, अपनी चूत को कसते हुए।
“एक बार और?” मैंने पूछा, उसके बूब्स दबाते हुए।
“लेकिन इस बार… मेरी गांड मारो…” प्रिया ने शर्माते हुए कहा।
मैंने उसे फिर से घोड़ी बनाया। उसने अपनी गांड ऊपर उठाई, और मैंने उस पर थूक लगाया। फिर अपने लंड को भी थूक से गीला किया।
“धीरे से डालना… पहली बार है…” उसने कहा।
मैंने अपने लंड का टोपा उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे से धक्का लगाया। थोड़ा अंदर गया।
“आह्ह… दर्द हो रहा है…”
“बस थोड़ी देर…” मैंने कहा, और धीरे-धीरे और अंदर डाल दिया।
पूरा लंड अंदर जाने के बाद, मैंने धक्के लगाने शुरू किए। शुरू में धीरे, फिर तेज।
“आह्ह… अनिल… अब मज़ा आ रहा है… और जोर से…” प्रिया ने कहा, अपनी गांड पीछे की तरफ धकेलते हुए।
ठप… ठप… ठप…
मेरा लंड उसकी टाइट गांड को चौड़ा कर रहा था। वो इतनी टाइट थी कि मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
“मैं झड़ने वाला हूँ… तुम्हारी गांड में…” मैंने कहा।
“हाँ… अनिल… अपना सारा माल मेरी गांड में छोड़ दो…”
मैंने कुछ और धक्के लगाए और फिर अपना लंड गहराई तक डालकर अपना वीर्य उसकी गांड में छोड़ दिया।
पिच… पिच… पिच…
गर्म वीर्य उसकी गांड में भर रहा था, और वो भी झड़ गई।
अगली सुबह हम दोनों एक दूसरे के बाहों में थे। प्रिंस की शादी आज थी, लेकिन हम दोनों थककर सो रहे थे।
“यह रात मैं कभी नहीं भूलूँगी…” प्रिया ने कहा, मेरे सीने से लगते हुए।
“मैं भी नहीं,” मैंने कहा, उसके बालों में हाथ फेरते हुए।
“मैं विधवा हूँ… लेकिन आज मुझे लगा कि मैं भी औरत हूँ…” उसने कहा, आंसू बहाते हुए।
“तुम हमेशा औरत थी… बस एक अच्छे मर्द की कमी थी,” मैंने कहा।
“हम फिर मिलेंगे?” उसने पूछा।
“जब भी तुम कहोगी… मैं तुम्हारा इंतजार करूँगा…” मैंने कहा, और हमने एक लंबा किस किया।
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