रात के सवा ग्यारह बज चुके थे। घर में सिर्फ तीन लोग थे — मैं अपने कमरे में, और बाहर हॉल-किचन में मेरी मामी और मेरा चचेरा भाई की चुदाई।
पापा और चाचा दोनों शहर गए हुए थे। घर में एक भारी-सी खामोशी फैली हुई थी। अनुराग पिछले दस दिनों से हमारे यहाँ रुका था। वो पच्चीस का हो चुका था — लंबा, मजबूत कंधे, चौड़ी छाती, और आँखों में एक ऐसी भूख जो वो छुपाने की कोशिश करता था। मेरी मामी बयालीस-तैंतालीस की थीं। उम्र ने उनके चेहरे पर हल्की रेखाएँ डाल दी थीं, लेकिन शरीर अभी भी भरा-भरा और आकर्षक था। पतली कमर, भारी स्तन, गोल कूल्हे। जब वो साड़ी में घर में घूमतीं तो हर कदम एक अजीब तनाव पैदा कर देता था।
उस रात मामी किचन में खड़ी पानी पी रही थीं। हल्का गुलाबी साड़ी पहना हुआ था, बाल खुले थे। अनुराग चुपके से उनके पीछे आया और दोनों हाथ उनकी कमर पर रख दिए।
मामी का शरीर सख्त हो गया।
“अनुराग… ये क्या कर रहा है तू?” उनकी आवाज़ में गुस्सा और घबराहट दोनों थे।
अनुराग ने जवाब नहीं दिया। उसने अपना माथा उनकी पीठ से सटा लिया। उसकी साँसें उनके बालों में उलझ रही थीं।
“मामी… मुझे माफ करना,” उसने धीमी आवाज़ में कहा। “मैं रोज़ आपको देखता हूँ। जब आप काम करती हो, जब आप मुस्कुराती हो, जब आप थककर बैठती हो… तो मेरे अंदर कुछ टूटता है। आप मेरे चाचा की पत्नी हो। मैं जानता हूँ ये गलत है। बहुत गलत है। लेकिन मैं रोक नहीं पा रहा खुद को।”
मामी मुड़ीं। उनकी आँखें तेज़ हो गई थीं। उन्होंने अनुराग का हाथ जोर से धकेल दिया।
“तू पागल हो गया है क्या? मैं तेरी मामी हूँ। तू ये कैसे सोच सकता है? अभी घर से निकल जा वरना मैं तेरे चाचा को बता दूँगी।”
अनुराग की आँखों में दर्द था, लेकिन उसने कदम नहीं हटाया।
“बता देना, मामी। लेकिन पहले ये सुन लो… मैं खुद से नफरत करता हूँ। हर रात खुद को कोसता हूँ। फिर भी जब आप पास होती हो तो मेरा शरीर नहीं मानता।”
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मामी ने फिर से धक्का दिया। “हट जा! मैंने कहा ना!”
अनुराग ने उनकी कलाई पकड़ ली। धीरे से, लेकिन मजबूती से। “एक बार देख लो मुझे। सिर्फ एक बार। अगर फिर भी मना किया तो मैं हमेशा के लिए चला जाऊँगा।”
मामी की साँसें तेज़ चल रही थीं। आँखों में गुस्सा था, लेकिन उसके नीचे कुछ और भी था — डर, अकेलापन, और वो थकान जो सालों से छिपी हुई थी। अनुराग ने धीरे से उनका पल्लू हटाया। मामी ने हाथ उठाया उसे रोकने के लिए, लेकिन हाथ बीच में रुक गया।
जब अनुराग ने उनकी ब्लाउज की ज़िप खोली तो मामी जोर से बोलीं, “नहीं… मत कर… ये पाप है!”
लेकिन उनका शरीर पीछे नहीं हटा। अनुराग ने ब्रा खोली। भारी स्तन बाहर आ गए। उसने एक निप्पल मुँह में ले लिया और धीरे से चूसने लगा। मामी की कमर काँप गई।
“अनुराग… छोड़… मैं तेरी मामी हूँ…” उनकी आवाज़ अब उतनी सख्त नहीं थी। उसमें एक कमज़ोरी आ चुकी थी।
अनुराग उन्हें उठाकर बेडरूम ले गया। दरवाज़ा बंद किया। मामी बिस्तर पर लेटीं तो उन्होंने चेहरा दूसरी तरफ फेर लिया। “मैंने कहा ना… मत कर…”
अनुराग ने उनके बाकी कपड़े उतारे। जब वो पूरी नंगी हो गईं तो अनुराग ने भी अपने कपड़े उतार दिए। उसका मोटा, कड़ा लंड बाहर था। मामी ने देखा और आँखें बंद कर लीं।
“नहीं… कृपया नहीं…”
अनुराग उनके स्तन चूसता रहा, पेट पर चुंबन लेता रहा, फिर नीचे गया। जब उसकी जीभ मामी की चूत पर लगी तो मामी की टाँगें अपने आप फैल गईं। उन्होंने तकिया पकड़ लिया।
“अनुराग… बंद कर… ये गलत है…” लेकिन उनकी आवाज़ अब कराह में बदल रही थी।
अनुराग ने दो उंगलियाँ अंदर डालीं। मामी गीली हो चुकी थीं। उसने क्लिटोरिस चूसा, चाटा, उंगलियाँ घुमाईं। मामी की कमर उठने लगी। आँसू बह रहे थे, लेकिन शरीर जवाब दे रहा था।
जब अनुराग ऊपर आया और अपना लंड उनकी चूत पर रखा तो मामी ने आँखें खोलीं।
“नहीं… मत डाल… मैं नहीं चाहती…”
अनुराग रुका। “सच में नहीं चाहतीं तो बोलो। मैं रुक जाऊँगा।”
मामी कुछ सेकंड चुप रहीं। उनकी साँसें तेज़ थीं। फिर उन्होंने बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “ instala… अभी… अभी नहीं…”
लेकिन अनुराग ने धीरे से सिर अंदर धकेला। मामी की साँस अटक गई। दर्द था। उन्होंने उसके कंधे नोच लिए।
“आह्ह… निकाल… दर्द हो रहा है…”
अनुराग रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा अंदर चला गया। रुक गया। दोनों की साँसें मिल रही थीं।
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फिर उसने हिलेना शुरू किया। धीमे धक्के। मामी की आँखें बंद थीं। आँसू बह रहे थे। लेकिन कुछ देर बाद उनके होंठ काँपे।
“थोड़ा… और धीरे…” उन्होंने फुसफुसाया।
अनुराग ने गति बढ़ाई। हर धक्के के साथ मामी की स्तन हिल रहे थे। अचानक मामी की उंगलियाँ उसकी पीठ पर दब गईं।
“हाँ… ऐसे ही… और गहरा…” पहली बार उनके मुँह से ‘हाँ’ निकला।
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अनुराग ने उनकी टाँगें अपनी कमर पर लपेट लीं। जोर-जोर से ठोकने लगा। मामी कराह रही थीं। “आह्ह… अनुराग… पाप है ये… लेकिन मत रुक…”
अनुराग उनके गले में चेहरा छुपाए हुए चोद रहा था। “मामी की चूत कितनी गरम और टाइट है… सालों बाद किसी और का होना…”
मामी ने उसका मुँह बंद कर दिया अपने होंठों से। चुंबन गंदी और भूखी थी।
डॉगी
अनुराग ने उन्हें पलटा। घुटनों के बल कर दिया। पीछे से लंड धँसा दिया। एक हाथ बालों में, एक हाथ कमर पर। जोर के धक्के। मामी की गांड चुदाई काँप रही थी।
“नहीं… इतना जोर से मत…” पहले विरोध किया, फिर “और जोर से… तोड़ दे…” कहने लगीं।
अनुराग ने एक उंगली उनकी गांड में डाली। मामी झटक उठीं लेकिन धक्का नहीं दिया। “आह्ह… दोनों जगह… पागल बना देगा तू…”
अनुराग लेट गया। मामी को ऊपर बिठाया। मामी ने खुद लंड पकड़कर अपनी चूत पर लगाया और बैठ गईं। पहले धीरे, फिर तेज़। उनके स्तन अनुराग के चेहरे पर झूल रहे थे। अनुराग निप्पल चूस रहा था।
“मामी खुद चोद रही हैं मुझे…” अनुराग ने कहा।
मामी ने उसके होंठ दबा दिए। “चुप रह… और पकड़ मेरी कमर…”
अनुराग ने उन्हें दीवार से सटाया। टाँगें कमर पर लपेट लीं। खड़े-खड़े चोदा। मामी की पीठ दीवार से रगड़ खा रही थी। “आह्ह… इतना गहरा… मुझे भर दे…”
मुँह में
जब अनुराग निकला तो मामी खुद घुटनों के बल बैठ गईं। लंड मुँह में लिया। गहरी तक। आँखों में आँसू थे लेकिन उन्होंने गला खोल दिया। अनुराग उनके बाल पकड़कर धीरे से मुँह चोदने लगा। मामी की लार बह रही थी।
आखिरी राउंड
अनुराग ने फिर बिस्तर पर लिटाया। इस बार आँखों में आँखें डालकर धीमे लेकिन गहरे धक्के। मामी रो रही थीं और साथ ही कराह रही थीं।
“आज रात… तुम्हारा कर लो मुझे पूरी तरह…” उन्होंने खुद कहा। “कल से ये कभी हुआ ही नहीं… लेकिन आज… हाँ… हाँ… अंदर डाल देना…”
अनुराग ने आखिरी जोरदार धक्के मारे और अपना पूरा वीर्य उनकी चूत में उड़ेल दिया। गर्म, गाढ़ा। मामी का शरीर काँप रहा था। दोनों चिपककर लेटे रहे।
बहुत देर बाद मामी ने धीरे से कहा, आवाज़ पूरी तरह टूटी हुई:
“अनुराग… ये रात याद नहीं रखना। न तू, न मैं। समझे?”
अनुराग ने उनके माथे पर चुंबन लिया। “समझ गया, मामी।”
लेकिन दोनों जानते थे — शरीर भूल भी जाए, दिल नहीं भूलता।
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