हमारे पुराने घर में मेरा और काव्या का कमरा बगल में थे। दोनों के बीच एक अटैच बाथरूम था – एक ही बाथरूम के दो दरवाजे, एक मेरे कमरे की दीवार में और एक काव्या के कमरे की दीवार में। बीच में सिर्फ एक पतली सी ईंट की दीवार, और ऊपर एक छोटी सी खिड़की जिससे हवा आती थी। कभी-कभी पानी की पाइपलाइन की आवाजें सुनाई देती थीं, और कभी-कभी दूसरे कमरे की हल्की सी आवाजें भी। भाई बहन की चुदाई कहानी ।
काव्या की उम्र उस वक्त 22 साल थी, मेरी 24 साल। वह देखने में इतनी सुंदर थी कि मैं अक्सर उसे देखकर सोचता था। लेकिन वह मेरी बहन थी, इसलिए मैं अपने विचारों को दबा लेता था।
वह गलती का दिन
एक दिन शाम को मैं अपने कमरे में बैठा हुआ था। मौसम गर्म था, मैंने सिर्फ एक हल्की शॉर्ट्स पहनी थी, ऊपर से नंगा था। तभी बाथरूम से आवाज आई – “भैया, मेरी तौलिया गिर गई है, पास कर दो ना प्लीज…”
काव्या की आवाज थी। मैं उठा और बाथरूम के दरवाजे की तरफ गया। दरवाजा थोड़ा सा खुला था, भाप निकल रही थी। उसने शायद गर्म पानी से नहाया था।
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“कहाँ है तौलिया?” मैंने पूछा।
“अंदर ही है, दरवाजा खोलकर देखो ना…” उसने कहा।
मैंने धीरे से दरवाजा खोला। भाप में सब कुछ धुंधला लग रहा था। लेकिन जैसे ही मेरी आंखें ठीक हुईं, मैं चौंक गया।
काव्या पूरी नंगी खड़ी थी। वह पीछे मुड़ी हुई थी, लेकिन शीशे में मुझे देख रही थी। उसका पूरा बदन गीला था, पानी की बूंदें उसके कंधों से होते हुए उसकी पीठ पर बह रही थीं। उसकी पीठ इतनी चिकनी, इतनी गोरी। और नीचे उसकी गांड – दो गोल, उभरे हुए गाल, पानी से चमकते हुए।
“तौलिया वहाँ कोने में है…” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज कांप रही थी।
मैं अंदर घुसा। मेरी आंखें उसके बदन पर थीं। वह पूरी नंगी थी, मैंने पहली बार उसे ऐसे देखा था। जब वह थोड़ा मुड़ी तो मैंने उसके चूचे देखे – इतने बड़े, इतने गोरे, पानी से भीगे हुए, निप्पल गुलाबी और कड़े हो रहे थे। उसकी चूत भी दिखी – थोड़ी झांटें थीं, लेकिन गुलाबी दानी साफ दिख रही थी।
“क्या देख रहे हो भैया…” उसने अपने हाथों से अपने चूचे और चूत छुपाने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ छोटे पड़ गए।
“सॉरी… मैं…” मैंने कहा, लेकिन मेरा लंड खड़ा हो गया था। मैंने सिर्फ शॉर्ट्स पहनी थी, और मेरा लंड उसमें से उभर रहा था। 7 इंच का मोटा लंड शॉर्ट्स में तड़प रहा था, और उसका आकार साफ दिख रहा था।
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काव्या ने नीचे देखा। मेरे लंड का उभार साफ दिख रहा था, और वह बड़ा होता जा रहा था। उसकी आंखें वहीं टिक गईं। वह शर्मा गई, लेकिन देखती रही। उसके चेहरे पर एक अजीब सी लाली आ गई।
“भैया… वो… क्या…” उसने कुछ कहना चाहा, लेकिन शब्द नहीं निकले।
मैंने हिम्मत करके अंदर एक और कदम रखा। अब हम दोनों बाथरूम में थे – वह पूरी नंगी, मैं शॉर्ट्स में। भाप में हमारी आंखें मिलीं। मेरा लंड और भी ज्यादा खड़ा हो गया, वह शॉर्ट्स को तोड़कर बाहर निकलने को बेताब था।
“मैं जा रही हूं…” उसने कहा और मेरे पास से गुजरने लगी।
लेकिन बाथरूम छोटा था, और फर्श गीला था। जैसे ही वह मेरे पास से गुजरी, गलती से उसका हाथ मेरे लंड पर लग गया। वह रुक गई। हम दोनों चुप हो गए। समय जैसे रुक गया हो।
“यह…” उसने अपना हाथ वहीं रखा। वह गर्मी महसूस कर रही थी, मेरे लंड की धड़कन उसके हाथ में महसूस हो रही थी।
“काव्या…” मैंने उसका नाम धीरे से लिया।
उसने धीरे से अपना हाथ मेरे लंड पर रखा। शॉर्ट्स के ऊपर से ही वह उसे सहलाने लगी। “इतना मोटा… इतना गर्म… कभी नहीं देखा…” उसने फुसफुसाया, आंखें नीचे की ओर।
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मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर दबाया। वह सिसकी, उसके होंठ कांपे। फिर मैंने अपनी शॉर्ट्स का नाड़ा खोला और धीरे से नीचे खींची। मेरा 7 इंच का मोटा, काला लंड बाहर आया। टोपा बैंगनी रंग का था, और पूरा लंड नसों से भरा हुआ, कांप रहा था।
काव्या की आंखें खुली रह गईं। “ऊह… इतना बड़ा… इतना मोटा…” उसने कहा, और अपने होंठ चाटे।
वह नंगी खड़ी थी और मेरा लंड उसके हाथ में था। उसने धीरे से उसे सहलाना शुरू किया, ऊपर से नीचे तक। “गर्म है… और कड़ा भी…” उसने कहा।
मैंने उसे पकड़ा और किस कर लिया। वह पहले तो हिचकिचाई, फिर रिस्पॉन्ड करने लगी। मेरा लंड उसकी नंगी चूत पर टच हो रहा था। गर्मी महसूस हो रही थी, उसकी चूत की गर्मी मेरे लंड के टोपे पर लग रही थी।
“भैया… यह गलत है…” उसने कहा, लेकिन मेरे लंड को छोड़ा नहीं, बल्कि और जोर से पकड़ लिया।
“मैं जानता हूं… लेकिन रुक नहीं पा रहा…” मैंने उसके कान में फुसफुसाया।
मैंने उसे दीवार से लगाया। मेरा लंड उसकी चूत पर रगड़ रहा था। उसकी चूत गीली हो चुकी थी, मैंने महसूस किया। “ऊह… यह क्या हो रहा है… मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा…” वह सिसकी, उसकी सांसें तेज चल रही थीं।
“चाहती हो…” मैंने पूछा, उसके होंठों पर किस करते हुए।
उसने सिर हिलाया – हां में। लेकिन फिर कहा – “नहीं… शादी होने वाली है मेरी… अगले महीने… यह सही नहीं है…”
“शादी से पहले… एक बार… बस एक बार…” मैंने उसके चूचे दबाते हुए कहा।
उसने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर रखा। “सिर्फ थोड़ा सा… बस टोपा…” उसने कहा, आंखें बंद कर लीं।
मैंने धीरे से अंदर डाला। टोपा अंदर गया – “ऊह… दर्द… रुको…” वह चीखी, अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए।
मैंने रुका। उसकी चूत इतनी टाइट थी, इतनी गर्म। टोपा अंदर था, और वह कसकर पकड़े हुए थी। फिर थोड़ा और अंदर किया। आधा लंड अंदर चला गया।
“और मत डालो… बस इतना ही… मेरी चूत फट जाएगी…” उसने कहा, आंखों में आंसू थे।
मैंने धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया। वह सिसकने लगी। “ऊह… अजीब सा लग रहा है… लेकिन अच्छा भी…” वह कहने लगी।
फिर उसने कहा – “रुको…”
मैंने रुका। उसने मुझे धक्का दिया और बाहर निकल गई। अपने कमरे में चली गई, लेकिन दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया। मैंने देखा कि उसने दरवाजा थोड़ा सा खुला छोड़ दिया था।
मैं अपने कमरे में आया। मेरा लंड अभी भी खड़ा था, और उस पर उसकी चूत का पानी लगा हुआ था। मैंने सोचा कि यह खत्म हो गया, लेकिन कुछ देर बाद मुझे लगा कि कोई मेरे कमरे में है।
मुड़कर देखा – काव्या थी। उसने एक छोटी सी सफेद नाइटी पहनी थी, नीचे कुछ नहीं। नाइटी इतनी पतली थी कि उसके चूचे और चूत साफ दिख रहे थे।
“वो… वो अधूरा रह गया था…” उसने कहा, आंखें नीचे की ओर, “मुझे और चाहिए… पूरा…”
मैंने उसे पकड़ा और बिस्तर पर लिटाया। उस रात हमने पहली बार पूरा मजा लिया। मैंने उसकी चूत पूरी तरह चोदी, और उसने मेरा माल अपनी चूत में लिया…
काव्या मेरे बिस्तर पर लेटी थी, सफेद नाइटी में उसका बदन चमक रहा था। मैंने उसके पास बैठा और धीरे से उसकी नाइटी ऊपर की। वह नीचे से पूरी नंगी थी, कोई पैंटी नहीं पहनी थी।
“भैया… मुझे डर लग रहा है…” उसने कहा, लेकिन मेरा हाथ अपने चूचे पर रख दिया।
“कुछ नहीं होगा… मैं हूं ना…” मैंने कहा और उसे किस कर लिया।
मैंने उसकी नाइटी पूरी उतार दी। अब वह पूरी नंगी लेटी थी। उसके चूचे इतने गोरे, इतने बड़े, निप्पल गुलाबी और खड़े थे। मैंने एक हाथ से एक चूचा पकड़ा और दबाया।
“ऊह… और जोर से…” वह सिसकी।
मैंने नीचे गया और उसकी चूत देखी। अभी भी थोड़ी लाल थी, मेरे लंड से चोदी हुई। मैंने उस पर उंगली रखी – गीली थी।
“तुम्हें मजा आया…” मैंने पूछा।
“हां… लेकिन अभी और चाहिए… पूरा…” उसने कहा।
मैंने उसके पैर फैलाए। इस बार मैंने पहले उसकी चूत चाटी। मेरी जीभ उसकी गुलाबी दानी पर घूमी। “ऊह माँ… यह क्या कर रहे हो… बहुत मजा आ रहा है…” वह अपनी गांड उठा-उठाकर मेरे मुँह पर दबा रही थी।
मैंने उसकी चूत की दानी को मुँह में लेकर चूसा। “ऊह… मर गई… और जोर से…” वह चिल्ला रही थी।
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फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। अभी भी पूरा खड़ा था, बैंगनी रंग का टोपा। काव्या ने उसे पकड़ा और अपनी चूत पर रखा।
“इस बार पूरा डालना…” उसने कहा।
मैंने एक जोर का धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया – “ऊह हाहाह…” वह चीखी, लेकिन इस बार दर्द कम था, मजा ज्यादा था।
मैंने धक्के मारने शुरू किए। पच-पच-पच की आवाजें आ रही थीं। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
“और तेज भैया… और जोर से…” काव्या पागल हो रही थी।
मैंने उसके चूचे पकड़े और जोर-जोर से चोदने लगा। बिस्तर हिल रहा था, आवाजें आ रही थीं। 30 मिनट तक मैंने उसकी चूत में लंड पेला।
फिर झड़ने वाला था – “कहाँ निकालूं…”
“अंदर ही… अपनी बहन की चूत में अपना माल भर दो…” उसने कहा।
मैंने एक आखिरी जोर का धक्का मारा और सारा गर्म, गाढ़ा माल उसकी चूत में छोड़ दिया। वह मुझे कसके पकड़े रही, मेरा लंड उसकी चूत में ही रहा जब तक पूरा माल अंदर नहीं चला गया।
रोज रात की चुदाई
उसके बाद हम रोज रात को मिलने लगे। माँ-पापा गहरी नींद में सोते थे और हम एक-दूसरे के कमरे में आते थे।
कभी मैं उसके कमरे में जाता, कभी वह मेरे कमरे में आती। हर रात नया खेल, नई पोजीशन।
एक रात उसने कहा – “आज मैं तुम्हें चोदूंगी…”
उसने मुझे कुर्सी पर बैठाया और खुद घुटनों पर बैठ गई। मेरा लंड बाहर निकाला और चूसने लगी। उसने पूरा लंड मुँह में ले लिया, थूक से चमकाने लगी।
“ऊह… काव्या… बहुत मजा आ रहा है…” मैं उसके बाल पकड़कर उसका मुँह अपने लंड पर दबा रहा था।
फिर वह ऊपर आई और मेरे ऊपर बैठ गई। अपने हाथ से लंड पकड़ा और अपनी चूत में डाल लिया। “ऊह… बहुत गहरा जा रहा है…” वह सिसकी।
वह ऊपर-नीचे होने लगी। उसके चूचे मेरे मुँह के सामने उछल रहे थे। मैंने एक चूचा मुँह में ले लिया और चूसने लगा। “ऊह हां… और जोर से…”
वह 20 मिनट तक मेरे ऊपर उछलती रही। फिर झड़ने वाली थी – “भैया… मैं झड़ने वाली हूं…”
“मैं भी…” मैंने कहा।
हम एक साथ झड़े। मैंने उसकी चूत में अपना माल भर दिया और वह मेरे लंड पर झड़ गई।
शादी से एक हफ्ते पहले
शादी से एक हफ्ते पहले काव्या मेरे कमरे में आई। आंखों में आंसू थे।
“सिर्फ एक हफ्ता बचा है…” उसने कहा, “उसके बाद मैं दूसरे की हो जाऊंगी…”
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मैंने उसे पकड़ा और बिस्तर पर लिटाया। उस रात हमने बहुत मजे किए। पहले उसकी चूत चोदी, फिर उसने मेरा लंड चूसा, फिर मैंने उसकी गांड में उंगली की।
“कल मेरी सुहागरात होगी… लेकिन मैं तुम्हारी ही रहूंगी…” उसने कहा।
मैंने उसे कुतिया बनाया और पीछे से चोदने लगा। “ऊह… भैया… और जोर से… आखिरी बार…” वह चिल्ला रही थी।
मैंने सारी रात उसकी चूत में लंड पेला। अलग-अलग पोजीशन में – कभी ऊपर, कभी नीचे, कभी कुत्ते की तरह, कभी खड़े होकर।
सुबह होते ही वह अपने कमरे में चली गई, लेकिन उसकी चूत में मेरा माल भरा हुआ था।
शादी के दिन जब वह दुल्हन बनकर बैठी थी, मैंने उसे देखा। लाल लहंगे में वह बहुत सुंदर लग रही थी।
वह मुस्कुराई और धीरे से अपना हाथ उस जगह पर रखा जहाँ मेरा माल अभी भी उसकी चूत में था।
“हमेशा तुम्हारी रहूंगी…” उसने बिना आवाज के कहा।
शादी की रात जब वह अपने पति के साथ गई, मैंने सोचा कि यह खत्म हो गया। लेकिन अगले दिन जब वह मायके आई, उसने मुझे कमरे में बुलाया।
“उसने कुछ नहीं किया… मेरी चूत सिर्फ तुम्हारी है…” उसने कहा और मुझे किस कर लिया।
अब भी जब वह आती है, हम चोदते हैं। उसका पति कुछ नहीं जानता, और न ही कभी जानेगा कि उसकी पत्नी की चूत उसके भाई की है…
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