
मालिक की हवस : परिचय
राजेश एक 45 वर्षीय सफल व्यवसायी था जो अपने बड़े से बंगले में अकेला रहता था। उसकी पत्नी की कुछ साल पहले ही मृत्यु हो गई थी और उसके कोई संतान नहीं थी। उसका बंगला शहर के सबसे posh इलाके में था और उसे घर की देखभाल के लिए एक नौकरानी की सख्त जरूरत थी। मालिक की हवस
राजेश ने अखबार में विज्ञापन दिया। कई औरतें आईं लेकिन कोई भी उसे पसंद नहीं आई। कुछ बहुत बूढ़ी थीं, कुछ काम नहीं जानती थीं। राजेश निराश हो रहा था।
एक दिन शाम को जब राजेश अपने बगीचे में बैठा था, तो गेट की घंटी बजी। उसने दरवाजा खोला तो एक औरत खड़ी थी। उसने साड़ी पहनी हुई थी और उसके चेहरे पर थकान के निशान थे। उसने कहा, “साहब, मैं साविता हूं। मैंने अखबार में आपका विज्ञापन देखा था। क्या अभी भी नौकरी खाली है?”
राजेश ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। साविता की उम्र लगभग 35 साल थी। वह गांव से आई हुई लग रही थी। उसकी हाइट करीब 5 फुट 4 इंच थी। उसने नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उसके गोरे बदन पर बहुत फब रही थी। उसके चूचे 36 इंच के भरे हुए थे जो ब्लाउज में फूले हुए लग रहे थे। कमर 30 इंच की संगीन थी और नीचे से उसकी गांड 38 इंच की भरी हुई थी जो साड़ी में साफ झलक रही थी। उसका चेहरा गोल था, आंखें बड़ी-बड़ी काली और होंठ मोटे-मोटे। उसकी गर्दन पर एक छोटा सा तिल था जो उसे और भी आकर्षक बना रहा था।
राजेश का दिल धड़क उठा। उसने तुरंत कहा, “हां, नौकरी खाली है। अंदर आओ।”
साविता अंदर आई। राजेश ने उसे सोफे पर बिठाया और खुद पास में बैठ गया। उसने पूछा, “तुम्हारे पति क्या करते हैं?”
साविता का चेहरा उतर गया। उसने कहा, “साहब, मेरे पति ने मुझे छोड़ दिया है। वह शराबी थे और मुझे और मेरी बेटी को गांव में छोड़कर कहीं चले गए। मुझे अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए काम करना है।”
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राजेश ने पूछा, “तुम्हारी बेटी कितनी बड़ी है?”
“साहब, उसका नाम ज्योति है। वह 19 साल की है और 12वीं पास कर चुकी है। मैं उसे कॉलेज में दाखिला दिलवाना चाहती हूं लेकिन पैसे नहीं हैं,” साविता ने आंखों में आंसू लिए हुए कहा।
राजेश सोचने लगा। उसे साविता बहुत पसंद आई थी। उसने तुरंत नौकरी दे दी। “ठीक है, तुम कल से आ सकती हो। तुम्हें यहां रहना होगा। मैं तुम्हें पिछले हिस्से में एक कमरा दे दूंगा। तुम्हारी बेटी भी रह सकती है।”
साविता बहुत खुश हुई। उसने राजेश के पैर छुए और अगले दिन आ गई।
साविता बहुत मेहनती थी। वह सुबह 5 बजे उठ जाती और पूरा घर साफ कर देती। फिर खाना बनाती और राजेश के ऑफिस जाने के बाद भी घर की सफाई करती। राजेश को उस पर बहुत मेहरबान था लेकिन उसकी नजरें साविता के जिस्म पर ही टिकी रहती थीं।
वह हर रोज साविता को घूरता। जब वह झुककर काम करती तो उसके चूचे बाहर झांकने लगते। जब वह पोछा लगाती तो उसकी गांड हिलती और राजेश का लंड खड़ा हो जाता। वह रात में अपने कमरे में साविता की याद में हिलाता और सोचता कि कैसे इसे पटाया जाए।
एक दिन राजेश ने साविता को बुलाया। वह रसोई में खाना बना रही थी। उसने साड़ी का पल्लू कमर में बांधा हुआ था और पसीने से उसकी कमीज भीगी हुई थी। उसके चूचों की आकृति साफ दिख रही थी।
राजेश आया और पीछे से उसके पास खड़ा हो गया। उसने कहा, “साविता, तुम बहुत मेहनत से काम करती हो।”
साविता मुड़ी और कहा, “धन्यवाद साहब।”
राजेश ने उसके कंधे पर हाथ रखा। साविता थोड़ा घबरा गई लेकिन वह रुकी। राजेश ने धीरे-धीरे अपना हाथ उसकी कमर पर ले गया। साविता कांपने लगी, “साहब, आप…”
“चुप रहो साविता,” राजेश ने कहा और उसे अपनी तरफ खींच लिया। साविता ने विरोध करने की कोशिश की लेकिन राजेश मजबूत था। उसने साविता के गाल पर हाथ फेरा और फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
साविता ने मुंह हिलाने की कोशिश की लेकिन राजेश ने उसे कसकर पकड़ लिया। वह उसके होंठों को चूसने लगा। साविता की सांसें तेज हो गईं। वह मजबूर थी। उसे पैसों की जरूरत थी और वह जानती थी कि अगर उसने विरोध किया तो नौकरी चली जाएगी।
राजेश ने उसे सांस लेने का मौका दिया और फिर उसके गले पर किस करने लगा। साविता की आंखें बंद हो गईं। उसे भी कुछ-कुछ होने लगा था। कई सालों से उसने किसी पुरुष को छुआ भी नहीं था।
राजेश ने उसका पल्लू खींचा और उसकी कमीज उतारने लगा। साविता ने हल्का विरोध किया लेकिन राजेश ने उसके हाथ हटा दिए। उसने उसकी कमीज उतार दी। अंदर सफेद रंग की पुरानी ब्रा थी जो उसके भरे हुए चूचों को बांधे हुए थी।
“वाह, क्या माल है तुम्हारा,” राजेश बोला और उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। दोनों चूचे आजाद होकर बाहर आ गए। वह गोरे-गोरे, बड़े-बड़े और गोल थे। निपल्स गुलाबी और कड़े थे। राजेश उनमें मुंह घुसाकर चूसने लगा।
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साविता सिसकियां लेने लगी, “आह… साहब… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…”
“पहली बार है इसलिए दर्द होगा,” राजेश ने कहा और उसे गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले गया।
उसने साविता को बेड पर लिटाया और उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। अंदर सफेद पैंटी थी जो उसकी चूत की आकृति साफ दिखा रही थी। राजेश ने पैंटी उतारी।
साविता की चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। वह गुलाबी और थोड़ी फटी हुई लग रही थी। राजेश ने उसमें उंगली डाली। साविता कराह उठी, “उई… साहब…”
“कितनी गीली हो गई हो तुम,” राजेश ने कहा। उसने अपने कपड़े उतारे। उसका लंड 8 इंच का काला और मोटा था। सुपाड़ा बड़ा और गुलाबी था।
साविता उसे देखकर डर गई, “साहब, यह तो बहुत बड़ा है… मुझे मत डालिए… मेरी चूत फट जाएगी…”
राजेश ने उसकी टांगें फैलाई और अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रखा। फिर एक जोरदार धक्का दिया। आधा लंड अंदर घुस गया। साविता चीख पड़ी, “माँ… बचाओ… बहुत दर्द हो रहा है…”
राजेश ने उसके मुंह पर हाथ रखा और दूसरा धक्का दिया। पूरा लंड अंदर समा गया। साविता की आंखों से आंसू निकलने लगे। उसकी चूत बहुत टाइट थी और राजेश का मोटा लंड उसे चीर रहा था।
राजेश धक्के देने लगा। धीरे-धीरे साविता को भी मजा आने लगा। उसकी सिसकियां बदल गईं, “आह… हां… अच्छा लग रहा है… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…”
राजेश ने उसे 30 मिनट तक चोदा। साविता की चूत से पानी निकलने लगा। फिर राजेश ने अपना वीर्य साविता की चूत में ही छोड़ दिया। गर्म वीर्य साविता की चूत में भर गया।
दोनों थककर सांस लेने लगे। साविता रो रही थी। राजेश ने उसे गले लगाया और कहा, “रो मत। अब से मैं तुम्हारी देखभाल करूंगा। तुम्हारी बेटी की पढ़ाई का खर्चा भी मैं उठाऊंगा।”
साविता ने उसे गले लगा लिया। उसे पता था कि अब वह इस आदमी की हो चुकी है।
इसके बाद राजेश रोज रात को साविता के कमरे में जाता और उसे चोदता। साविता भी अब खुलकर मजा लेती। वह राजेश का लंड चूसती, उसके नीचे लेटकर चुदवाती और हर तरह से उसकी खुशी का ख्याल रखती।
लेकिन राजेश की नजर अब साविता की बेटी ज्योति पर पड़ी थी। ज्योति 19 साल की जवान लड़की थी। वह अपनी मां से भी ज्यादा खूबसूरत थी। उसकी हाइट 5 फुट 6 इंच थी। उसने काले लंबे बाल खुले छोड़े हुए थे। उसका फिगर 34-26-36 का था। उसके चूचे उभरे हुए और तने हुए थे। गांड बिल्कुल सेब की तरह गोल और उभरी हुई थी। जांघें गोरी और मुलायम थीं। चेहरा बिल्कुल गुलाबी और बिना मेकअप के भी वह बहुत हसीन लगती थी।
राजेश सोचता था कि कैसे इस कली को तोड़ा जाए। उसे पता था कि साविता कभी इसके लिए राजी नहीं होगी। उसने एक योजना बनाई।
एक दिन उसने साविता को कुछ पैसे देकर गांव जाने के लिए कहा। साविता मजबूर होकर चली गई। घर में सिर्फ राजेश और ज्योति रह गए।
रात को राजेश ने ज्योति के लिए खाना बनवाया और उसमें नशीली दवा मिला दी। ज्योति खाना खाकर बेहोश हो गई। राजेश ने उसे अपने कमरे में ले जाकर बेड पर लिटा दिया।
ज्योति बेहोश थी। राजेश ने उसके कपड़े उतारने शुरू किए। पहले उसकी कमीज उतारी। अंदर गुलाबी रंग की ब्रा थी जो उसके उभरे हुए चूचों को ढंके हुए थी। राजेश ने ब्रा उतारी। ज्योति के चूचे देखकर उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। वह 34 इंच के गोल-गोर, बिल्कुल सख्त चूचे थे। निपल्स गहरे गुलाबी और कड़े थे।
राजेश ने उनमें मुंह लगाकर चूसना शुरू किया। फिर उसने ज्योति की सलवार उतारी। अंदर सफेद रंग की पैंटी थी जो उसकी गोरी जांघों पर बहुत सेक्सी लग रही थी।
राजेश ने पैंटी उतारी। ज्योति की चूत बिल्कुल साफ थी, बिल्कुल कम बाल थे। वह गुलाबी और टाइट दिख रही थी। राजेश ने उसे चूमना शुरू किया।
थोड़ी देर बाद ज्योति होश में आई। उसने खुद को नंगा देखा और पास राजेश को देखा। वह समझ गई कि क्या होने वाला है। वह रोने लगी, “साहब, यह क्या कर रहे हो… मैं आपकी बेटी की उम्र की हूं… मुझे छोड़ दो…”
राजेश ने कहा, “चुप रहो ज्योति। तुम्हारी मां ने तुम्हें मेरे हवाले कर दिया है। आज से तुम मेरी हो।”
ज्योति रोती रही, “नहीं… यह झूठ है… मेरी मां ऐसा कभी नहीं करेगी…”
राजेश ने उसे कसकर पकड़ लिया और किस करने लगा। ज्योति विरोध कर रही थी लेकिन राजेश बहुत ताकतवर था। उसने ज्योति के हाथ पकड़े और उसे किस करने लगा।
फिर राजेश ने ज्योति की टांगें फैलाई और अपना लंड उसकी चूत पर रखा। ज्योति चीखी, “नहीं… मत करो… मैं कुंवारी हूं… मुझे दर्द होगा…”
राजेश ने एक जोरदार धक्का दिया। उसका मोटा लंड ज्योति की टाइट चूत में घुस गया। ज्योति की चीख निकल गई, “माँ… बचाओ… बहुत दर्द हो रहा है… मर गई…”
राजेश ने उसके मुंह पर हाथ रखा और धक्के देना जारी रखा। ज्योति की चूत से खून निकलने लगा। वह रो रही थी और अपने हाथ-पैर हिला रही थी लेकिन राजेश ने उसे कसकर पकड़ रखा था।
साविता, चुदाई, हिंदी सेक्स कहानी, मां बेटी ग्रुप सेक्स, पहली बार सेक्स , घरेलू कामवाली की चुदाई, मालिक नौकरानी सेक्स, हिंदी अश्लील, परिवार की चुदाई, दो औरतें एक आदमी, मजबूरी में चुदाई, पैसों के लिए सेक्स, कामवाली की बेटी की चूत, मां की चूत, रात भर चुदाई
“कितनी टाइट चूत है तेरी,” राजेश बोल रहा था, “आज तो मजा आ गया नौकरानी की बेटी को चोदने में।”
ज्योति रोती रही, “छोड़ दो मुझे… मैं मर जाऊंगी…”
राजेश ने उसे 45 मिनट तक चोदा। ज्योति की चूत फट चुकी थी और खून से लाल हो गई थी। फिर राजेश ने अपना वीर्य ज्योति की चूत में ही छोड़ दिया।
ज्योति बेड पर बेहोश सी पड़ी रही। राजेश ने उसे धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो उसकी मां को नौकरी से निकाल देगा और उन्हें जेल भिजवा देगा।
अगले दिन जब साविता वापस आई तो उसने ज्योति को रोते हुए देखा। उसने पूछा, “क्या हुआ बेटी?”
ज्योति ने सब कुछ बता दिया। साविता सुनकर चौंक गई और राजेश के पास गई। उसने कहा, “साहब, आपने यह क्या किया मेरी बेटी के साथ? वह तो बच्ची है…”
राजेश ने कहा, “साविता, मैं तुम दोनों का ख्याल रखूंगा। तुम्हें पैसों की जरूरत है ना? मैं ज्योति की पढ़ाई का खर्चा उठाऊंगा और उसकी शादी भी करवाऊंगा। बस तुम दोनों मेरी खुशी का ख्याल रखो।”
साविता मजबूर थी। उसे पता था कि अब कुछ नहीं हो सकता। उसने ज्योति को समझाया और धीरे-धीहे ज्योति भी मान गई।
अब राजेश के पास दो औरतें थीं। वह रोज रात को पहले साविता को चोदता और फिर ज्योति को। कभी-कभी वह दोनों को एक साथ भी चोदता।
साविता के भरे हुए चूचे और ज्योति के उभरे हुए चूचे दोनों राजेश को बहुत पसंद आते थे। वह दोनों की चूतों को बारी-बारी से चोदता और दोनों उसका लंड चूसतीं।
एक दिन राजेश ने सोचा कि क्यों ना दोनों मां-बेटी को एक साथ चोदा जाए। उसने रात को दोनों को अपने कमरे में बुलाया।
साविता और ज्योति दोनों आईं। राजेश ने कहा, “आज मैं तुम दोनों को एक साथ चोदूंगा।”
दोनों ने हामी भर दी। राजेश ने पहले साविता को नंगा किया। उसके बड़े-बड़े चूचे लटक रहे थे। फिर ज्योति को नंगा किया। उसके उभरे हुए चूचे बिल्कुल तने हुए थे। दोनों मां-बेटी बेड पर लेटी हुई थीं।
राजेश पहले साविता की चूत चोदने लगा। साविता आहें भर रही थी, “आह… साहब… बहुत मजा आ रहा है…”
फिर वह ज्योति की चूत में लंड डालने लगा। ज्योति भी अब चुदाई की आदी हो चुकी थी, “हां… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…”
राजेश ने दोनों को बारी-बारी से चोदा। वह पहले साविता की चूत में झड़ता, फिर ज्योति की चूत में। दोनों की चूतें उसके वीर्य से भरी हुई थीं।
इस तरह राजेश, साविता और ज्योति का यह संबंध सालों तक चलता रहा। तीनों मिलकर सेक्स का खेल खेलते रहे और अपने जीवन का पूरा आनंद उठाया। साविता को पैसे मिले, ज्योति की पढ़ाई हुई और राजेश को दो सेक्सी औरतें मिलीं। सब खुश थे।