राजीव चौक मेट्रो में मुझसे टकराई लड़की चुद गई
दिल्ली की भरी दोपहर में राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं थी। गर्मी हद से ज्यादा थी, और भीड़ ऐसी जैसे पूरी दुनिया इसी एक स्टेशन पर उतर आई हो। राजीव चौक मेट्रो में मुझसे टकराई लड़की चुद गई
नेहा अपने ऑफिस बैग की ज़िप संभालते हुए भीड़ में धक्का-मुक्की सह रही थी। उसने आज सुबह ही नई सफेद कुर्ती पहनी थी, जिस पर हल्के गुलाबी फूल बने हुए थे। नीचे उसने नीली जींस पहनी थी जो उसके कूल्हों को बखूबी ढक रही थी, लेकिन फिर भी उसके शरीर की वक्रता को छिपा नहीं पा रही थी।
नेहा की उम्र 26 साल थी। वह मध्यम कद की लड़की थी, लगभग 5’4″ की हाइट। उसका रंग गेहुआं था – दिल्ली की धूप और प्रदूषण के बावजूद भी उसकी त्वचा पर एक खास चमक थी। उसके बाल कंधे तक आते थे, हल्के भूरे रंग के, जिन्हें उसने आज एक साधारण क्लच में बांध रखा था।
उसकी आंखें बड़ी और काली थीं – जब वह किसी से बात करती थी तो उनमें एक मासूमियत झलकती थी। उसकी नाक छोटी और सीधी थी, और होंठ – होंठ तो ऐसे जैसे किसी कलाकार ने ध्यान से बनाए हों। नीचे वाला होंठ थोड़ा मोटा था, जो उसे एक अलग ही सेक्स अपील देता था।
लेकिन नेहा की सबसे खास बात उसकी फिगर थी। उसकी छाती का आकार 34C था – पूरी तरह से प्राकृतिक, गोल और उभारदार। जब वह चलती थी तो उसके स्तन हल्के-हल्के उछलते थे, और यहां तक कि उसके ढीले कुर्ते में भी उनका आकार साफ झलकता था। उसकी कमर बहुत संकरी थी, लगभग 28 इंच, जो उसके कूल्हों के साथ एक आदर्श घंटी का आकार बनाती थी। उसके कूल्हे 36 इंच के थे – पूरी तरह से गोल और भरे हुए, जो उसकी जींस में भी साफ दिखाई देते थे।
उसकी गांड का आकार ऐसा था कि किसी भी लड़के का ध्यान वहां जरूर जाता था। जब वह सीढ़ियां चढ़ती थी या मेट्रो की भीड़ में आगे बढ़ती थी, तो उसके कूल्हों का हल्का-हल्का हिलना एक अनोखा नजारा होता था। उसके पैर भी खूबसूरत थे – छोटे और पतले, जिन्हें उसने आज सफेद सैंडल्स में रखा था।
नेहा की आवाज़ में एक खास बात थी। वह हल्की-हल्की हकलाती थी जब वह घबराती थी, लेकिन जब वह आराम से होती थी तो उसकी आवाज़ मधुर और मीठी लगती थी। वह अक्सर “हां जी” या “नहीं ना” कहती थी, और उसके बोलने का तरीका बहुत नरम था। वह ज्यादा बोलने वाली नहीं थी, लेकिन जब बोलती थी तो हर शब्द पर जोर देती थी।
तभी अचानक उसका एक टिफिन का डिब्बा बैग के साइड पॉकेट से फिसलकर नीचे जा गिरा और उसका ढक्कन खुलकर पूरी पाव भाजी फर्श पर बिखर गई।
“ओह नो…” नेहा की आवाज़ निकली, और उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया।
आस-पास के कुछ लोग देखकर आगे बढ़ गए, कुछ थोड़ा हंस दिए। नेहा का पूरा चेहरा शर्म और गुस्से से लाल हो गया। वह वैसे ही सुबह से काम के प्रेशर से परेशान थी। उसकी आंखों में आंसू आ गए, और वह घुटनों तक झुककर गिरी हुई सब्जी को देखने लगी।
“अरे ध्यान से…” कहते हुए अमन ने अपनी मेट्रो मिस कर दी।
अमन की उम्र 28 साल थी। वह एक साधारण दिखने वाला लड़का था, लेकिन उसकी आंखों में एक शरारती चमक थी। उसकी हाइट 5’10” थी और बॉडी औसत थी – ना ज्यादा दुबली, ना ज्यादा मोटी। उसके बाल थोड़े घुंघराले थे और चेहरे पर हल्की दाढ़ी रहती थी। उसने आज हल्की नीली शर्ट पहनी थी और काली पैंट।
उसने तुरंत अपनी जेब से टिश्यू पेपर निकाले और बिना झिझक नेहा के साथ झुककर फर्श साफ करने में मदद करने लगा।
“कोई बात नहीं, होता है। मंडे का दिन वैसे भी खराब ही होता है,” अमन ने डिब्बे का ढक्कन पोंछकर मुस्कुराते हुए नेहा को थमाया।
नेहा ने बस एक छोटी सी मुस्कान के साथ ‘थैंक यू’ कहा। उसकी आवाज़ इतनी मधुर थी कि अमन एक पल के लिए ठहर गया। उसने नेहा को पहली बार ठीक से देखा – उसके बड़ी-बड़ी आंखें, गुलाबी होंठ, और वो शर्म से लाल चेहरा।
“मैं… मैं नेहा हूं,” उसने हिचकिचाते हुए कहा।
“अमन,” उसने हाथ बढ़ाते हुए कहा। “आईटी सेक्टर 16 में काम करता हूं।”
“मैं… मैं भी पास में ही हूं, कनेॉट प्लेस में,” नेहा ने कहा।
दोनों अपनी-अपनी अगली मेट्रो में चढ़ गए। लेकिन दोनों के मन में एक अजीब सा एहसास था – जैसे कुछ शुरू हुआ हो।
बात वहीं खत्म हो सकती थी, लेकिन नियति को कुछ और मंज़ूर था। तीन दिन बाद, नेहा अपने ऑफिस के पास वाले छोटे से टपरी पर चाय पी रही थी। उसने नीली सलवार कमीज पहनी थी, और उसके बाल खुले थे। हल्की हवा में उसके बाल उड़ रहे थे, और वह अपने फोन में कुछ देख रही थी। राजीव चौक मेट्रो में मुझसे टकराई लड़की चुद गई
उसने देखा कि वही लड़का (अमन) भी वहाँ खड़ा होकर समोसा खा रहा है।
“आज कम से कम आपका टिफिन सुरक्षित है?” अमन ने उसे पहचानकर चिढ़ाते हुए पूछा।
नेहा हंस पड़ी। उसकी हंसी इतनी खूबसूरत थी कि अमन मंत्रमुग्ध हो गया। “हां, आज पैकेजिंग डबल की है।”
“मैं अमन, याद है?” उसने हाथ बढ़ाया।
“हां जी, याद है। वो… धन्यवाद फिर से,” नेहा ने शर्माते हुए कहा।
“चाय पीओगी? मेरी तरफ से,” अमन ने पूछा।
नेहा ने सोचा, फिर हां में सिर हिलाया। “ठीक है।”
उस दिन 10 मिनट की चाय पर बातों का सिलसिला शुरू हुआ। पता चला कि अमन एक आईटी कंपनी में कोडर है और नेहा पास ही में एक डिजिटल मार्केटिंग फर्म में काम करती है। दोनों रोज़ उसी मेट्रो से सफर करते थे, लेकिन कभी ध्यान नहीं दिया था।
“तुम… तुम रोज इसी समय आती हो?” अमन ने पूछा।
“हां, लगभग 9 बजे,” नेहा ने कहा।
“मैं भी,” अमन ने मुस्कुराते हुए कहा। “शायद… शायद कल मिलें?”
नेहा ने नीचे देखा, फिर हल्के से मुस्कुराई। “हां, शायद।”
अगले कुछ महीनों में उनकी दोस्ती बहुत व्यावहारिक और सहज होती चली गई। कोई बड़ी-बड़ी बातें नहीं, कोई महंगे गिफ्ट्स नहीं। उनकी डेट्स का मतलब था—संडे की शाम को किसी पार्क में टहलना, ऑफिस के स्ट्रेस की शिकायतें करना, या साथ बैठकर मोमोज़ खाना।
नेहा धीरे-धीरे अमन के सामने खुलने लगी। वह अपनी बातें शेयर करने लगी – अपनी पसंद, अपनी नापसंद, अपने सपने।
“मुझे बारिश बहुत पसंद है,” एक शाम नेहा ने कहा। वे लोधी गार्डन में बैठे थे। “बारिश की बूंदें जब चेहरे पर गिरती हैं… बस अलग ही एहसास होता है।”
“मुझे तुम्हारी मुस्कान पसंद है,” अमन ने अचानक कहा।
नेहा ने उसकी तरफ देखा, और उसका चेहरा लाल हो गया। “क्या… क्या कहा तुमने?”
“कुछ नहीं,” अमन ने नजरें हटाते हुए कहा। “बस… बस ऐसे ही।”
जब नेहा की माँ की तबीयत खराब हुई, तो अमन ने रात भर अस्पताल के चक्कर काटने में उसका साथ दिया। नेहा उस समय बहुत टूट गई थी, और अमन ने उसे सहारा दिया।
“चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा,” अमन ने उसे गले लगाते हुए कहा।
वह पहली बार था जब उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया था। नेहा ने अमन की बाहों में अपना सिर रखा, और उसे एक अजीब सा सुकून महसूस हुआ। अमन की सांसें उसके बालों में महसूस हो रही थीं, और उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। राजीव चौक मेट्रो में मुझसे टकराई लड़की चुद गई
और जब अमन का अप्रैज़ल (Appraisal) रुका और वह निराश था, तो नेहा ने उसके लिए घर से गरम चाय बनाकर भेजी।
“तुम… तुम बहुत अच्छी हो,” अमन ने उसे मैसेज किया था।
“तुम भी,” नेहा ने जवाब दिया था।
अक्टूबर की एक शाम थी। दिल्ली में मौसम सुहाना हो गया था – गर्मी कम हो गई थी और हल्की ठंडक महसूस होने लगी थी। अमन और नेहा उसी पार्क में बैठे थे जहां वे अक्सर मिलते थे – लोधी गार्डन के पास एक छोटा सा बेंच।
नेहा ने आज गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी – एक साधारण कॉटन की साड़ी, लेकिन उस पर बहुत खूबसूरत लग रही थी। उसने अपने बाल खुले छोड़े थे, और हल्का सा मेकअप किया था। उसकी बिंदी उसके चेहरे को और भी खूबसूरत बना रही थी।
अमन उसे देखता रहा। नेहा की साड़ी में वो अलग ही लग रही थी। उसकी कमर पतली थी, और साड़ी के पल्ले से उसकी पेट की त्वचा थोड़ी दिख रही थी। जब वह हाथ उठाती थी तो उसकी कमर की त्वचा साफ दिखती थी।
“क्या हुआ? इतना क्यों देख रहे हो?” नेहा ने शर्माते हुए पूछा।
“कुछ नहीं… बस तुम… तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो,” अमन ने कहा।
नेहा का चेहरा लाल हो गया। “पागल हो क्या?”
“नहीं, सच कह रहा हूं,” अमन ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।
नेहा ने हाथ खींचने की कोशिश की, लेकिन फिर रुक गई। अमन का हाथ गर्म था, और उसे अच्छा लग रहा था।
“नेहा… मैं… मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं,” अमन ने कहा।
“क्या?” नेहा ने नीचे देखते हुए पूछा।
“मैं… मुझे तुम बहुत पसंद हो,” अमन ने कहा। “मुझे नहीं पता यह प्यार है या क्या, लेकिन… लेकिन मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।”
नेहा ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में आंसू थे। “अमन…”
“मुझे मना मत करना,” अमन ने कहा। “प्लीज।”
नेहा ने अपना दूसरा हाथ उसके हाथ पर रखा। “मैं… मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं।”
अमन की आंखों में खुशी झलकी। “सचमुच?”
“हां,” नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा।
उस शाम, जब वे पार्क से निकले तो अमन ने नेहा का हाथ पकड़ रखा था। उसने उसे उसके घर तक छोड़ा, और दरवाजे पर खड़े होकर उसे देखता रहा।
“कल मिलें?” अमन ने पूछा।
“हां,” नेहा ने कहा, और अंदर चली गई।
अगले हफ्ते, अमन ने नेहा को डिनर पर बुलाया। उसने एक छोटा सा रेस्टोरेंट चुना था – ज्यादा महंगा नहीं, लेकिन आरामदायक। राजीव चौक मेट्रो में मुझसे टकराई लड़की चुद गई
नेहा ने आज लाल रंग की ड्रेस पहनी थी – एक साधारण सी फ्रॉक जो उसके घुटनों तक आती थी। उसने अपने बाल खुले छोड़े थे, और हल्की लिपस्टिक लगाई थी।
जब वह रेस्टोरेंट में आई तो अमन उसे देखता ही रह गया। उसकी ड्रेस में नेहा और भी खूबसूरत लग रही थी। उसके स्तनों का आकार ड्रेस में साफ झलक रहा था, और उसकी कमर इतनी पतली कि अमन का दिल धड़कने लगा।
“तुम… तुम बहुत सुंदर लग रही हो,” अमन ने कहा।
“शुक्रिया,” नेहा ने शर्माते हुए कहा।
डिनर के दौरान, दोनों ने बहुत बातें कीं। अमन ने नेहा के हाथ को अपने हाथों में लिया, और उसके अंगूठे को सहलाने लगा।
“नेहा… क्या मैं… क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूं?” अमन ने अचानक पूछा।
नेहा ने उसकी तरफ देखा, और उसका चेहरा लाल हो गया। “यहां… यहां नहीं।”
“तो फिर कहां?” अमन ने पूछा।
नेहा ने नीचे देखा। “मैं… मैं नहीं जानती।”
डिनर के बाद, अमन ने नेहा को उसके घर तक छोड़ा। वे उसके सोसाइटी के नीचे खड़े थे, और अंधेरा हो चुका था।
“नेहा…” अमन ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया।
नेहा ने उसकी आंखों में देखा। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। उसने कभी किसी लड़के को किस नहीं किया था – यह उसका पहला अनुभव था।
अमन ने धीरे से अपने होंठ उसके होंठों पर रखे। वह पहले तो हल्का सा चूमा, फिर थोड़ा जोर से। नेहा ने अपनी आंखें बंद कर लीं, और अपने हाथों से अमन की कमर पकड़ ली।
अमन ने अपनी जीभ से उसके होंठों को चाटना शुरू किया। नेहा ने थोड़ा मुंह खोला, और अमन की जीभ उसके मुंह में घुस गई। दोनों की जीभें आपस में मिलीं, और एक गहरा, रसीला चुंबन हुआ।
अमन ने अपने एक हाथ से नेहा की कमर को पकड़ा, और दूसरे हाथ से उसके गाल को सहलाया। नेहा ने अपने हाथों से अमन की पीठ को सहलाना शुरू किया।
करीब पांच मिनट तक वे एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर अमन ने अपने होंठ हटाए, और नेहा के माथे पर चूमा।
“मैं… मैं चलती हूं,” नेहा ने हांफते हुए कहा।
“ठीक है,” अमन ने कहा। “कल मिलें?”
“हां,” नेहा ने कहा, और अंदर चली गई।
अगले कुछ हफ्तों में, उनका रिश्ता और गहरा हो गया। वे अब अक्सर एक-दूसरे के घर आते-जाते थे। अमन ने नेहा के घर पर उसके रूममेट्स से भी मुलाकात की थी, और नेहा भी अमन के फ्लैट पर आती थी।
एक शनिवार की शाम, नेहा अमन के फ्लैट पर थी। वे सोफे पर बैठे एक मूवी देख रहे थे। नेहा ने आज एक पीली टी-शर्ट और नीली शॉर्ट्स पहनी थी। उसके पैर खुले थे, और अमन की नजरें बार-बार उसके पैरों पर जा रही थीं।
“क्या देख रहे हो?” नेहा ने पूछा।
“कुछ नहीं,” अमन ने कहा, और उसके करीब बैठ गया।
मूवी खत्म होने के बाद, अमन ने नेहा को अपनी बाहों में भर लिया। उसने उसके गाल पर चूमा, फिर उसके गले पर, फिर उसकी क्लीवेज के पास।
“अमन… यह… यह सही नहीं है,” नेहा ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ कमजोर थी।
“क्यों?” अमन ने पूछा, और उसके होंठों पर चूमा।
“मैं… मैं तैयार नहीं हूं,” नेहा ने कहा।
“मैं जानता हूं,” अमन ने कहा। “मैं तुम्हें फोर्स नहीं कर रहा। बस… बस थोड़ा सहलाना चाहता हूं।”
नेहा ने कुछ नहीं कहा। अमन ने धीरे से उसकी टी-शर्ट के ऊपर से उसके स्तनों को सहलाना शुरू किया। नेहा ने सांस रोक ली, और अपनी आंखें बंद कर लीं।
अमन ने उसकी टी-शर्ट को ऊपर उठाया, और उसके पेट पर चूमने लगा। नेहा की त्वचा गोरी और मुलायम थी। अमन ने अपनी जीभ से उसके नाभि के आसपास चक्कर लगाए।
“अमन… प्लीज…” नेहा ने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में विरोध नहीं था।
अमन ने धीरे से उसकी टी-शर्ट उतार दी। नेहा ने आज एक सफेद ब्रा पहनी थी, जो उसके गोल स्तनों को बखूबी ढक रही थी।
“तुम… तुम बहुत खूबसूरत हो,” अमन ने फुसफुसाते हुए कहा।
उसने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को दबाना शुरू किया। नेहा की सांसें तेज हो गईं। अमन ने उसे पीछे की तरफ झुकाया, और सोफे पर लेटा दिया। वह उसके ऊपर आ गया, और उसके होंठों पर चूमने लगा।
फिर वह नीचे गया, और उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल्स को चूसने लगा। नेहा ने अपने हाथों से उसके सिर को पकड़ लिया, और मजबूती से दबाने लगी।
“अमन… ओह… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है,” नेहा ने कहा।
अमन ने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, और उसके स्तन आजाद हो गए। वे गोल और उभारदार थे, और निप्पल गुलाबी रंग के थे। अमन ने एक स्तन को अपने हाथ में लिया, और दूसरे को अपने मुंह में भर लिया।
नेहा की आंखें बंद थीं, और वह इस एहसास का आनंद ले रही थी। अमन ने उसके निप्पल को अपनी जीभ से चाटा, फिर दांतों से हल्का सा काटा। नेहा ने एक हल्की सी आवाज़ निकाली।
“दर्द… दर्द हो रहा है,” उसने कहा।
“माफ करना,” अमन ने कहा, और धीरे से चूसने लगा।
करीब दस मिनट तक अमन ने उसके स्तनों का मजा लिया। फिर वह और नीचे गया, और उसकी शॉर्ट्स के ऊपर से उसकी जांघों पर चूमने लगा।
“अमन… प्लीज… अब रुको,” नेहा ने कहा।
अमन ने उसकी बात मान ली। उसने उसे उठाया, और अपनी बाहों में भर लिया।
“मैं… मैं सॉरी,” नेहा ने कहा।
“कोई बात नहीं,” अमन ने कहा। “जब तक तुम तैयार नहीं होती, मैं इंतजार करूंगा।”
कुछ दिनों तक नेहा सोचती रही। वह अमन से प्यार करती थी, और वह उसके साथ सब कुछ शेयर करना चाहती थी। लेकिन उसे डर भी लग रहा था – यह उसका पहला अनुभव था, और वह नहीं जानती थी कि कैसे रिएक्ट करेगी।
एक शुक्रवार की रात, नेहा ने अमन को मैसेज किया: “कल शाम 7 बजे मेरे घर आना। रूममेट्स वीकेंड पर अपने घर जा रही हैं।”
अमन ने जवाब दिया: “ठीक है।”
उस रात नेहा को नींद नहीं आई। वह सोचती रही कि कल क्या होगा। उसने इंटरनेट पर कुछ चीजें पढ़ीं, और अपने आप को तैयार करने की कोशिश की।
अगले दिन, नेहा ने पूरा दिन तैयारी में लगा दिया। उसने अपने कमरे को सजाया, नए बेडशीट्स बिछाए, और कैंडल्स रखीं। उसने एक नई लाल रंग की नाइटी खरीदी थी – हल्की सी, जो उसके शरीर के आकार को साफ दिखाती थी।
शाम को 7 बजे, अमन आ गया। उसने नेहा को देखा और हैरान रह गया। नेहा ने वो लाल नाइटी पहनी थी, और उसके बाल खुले थे। उसने हल्का मेकअप किया था, और उसके होंघ गुलाबी लिपस्टिक से चमक रहे थे।
“तुम… तुम…” अमन कुछ कह नहीं पाया।
“अंदर आओ,” नेहा ने कहा, और उसे अंदर बुलाया।
कमरे में कैंडल्स जल रही थीं, और हल्की सी खुशबू थी। अमन ने नेहा का हाथ पकड़ा, और उसे अपनी ओर खींचा।
“क्या… क्या तुम तैयार हो?” अमन ने पूछा।
“हां,” नेहा ने हल्के से कहा। “मैं… मैं तुमसे प्यार करती हूं, अमन। और मैं… मैं तुम्हें अपना सब कुछ देना चाहती हूं।”
अमन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया, और उसके होंठों पर एक गहरा चुंबन दिया। उसने उसे बिस्तर की ओर ले जाया, और धीरे से लेटा दिया।
“मैं… मैं धीरे-धीरे करूंगा,” अमन ने कहा। “अगर दर्द हो तो मुझे बताना।”
नेहा ने हां में सिर हिलाया।
अमन ने पहले उसके चेहरे पर चूमना शुरू किया – उसके माथे पर, फिर आंखों पर, फिर नाक पर, फिर होंठों पर। फिर वह नीचे गया, और उसके गले पर चूमने लगा।
नेहा ने अपनी आंखें बंद कर लीं, और इस एहसास का आनंद लेने लगी। अमन ने उसकी नाइटी के ऊपर से उसके स्तनों को सहलाया। वे गोल और नरम थे, और उसके हाथों में पूरी तरह से समा रहे थे।
फिर अमन ने उसकी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके, धीरे-धीरे। नेहा की सांसें तेज हो गईं। जब नाइटी खुली, तो अमन ने देखा कि नेहा ने नीचे कुछ भी नहीं पहना था।
“तुम… तुमने…” अमन हैरान हो गया।
“मैंने सोचा… आज रात के लिए,” नेहा ने शर्माते हुए कहा।
अमन ने उसकी नाइटी पूरी तरह से उतार दी। नेहा उसके सामने पूरी तरह से नंगी लेटी थी। उसका शरीर एक कलाकृति की तरह था – गोल स्तन, पतली कमर, और गोल कूल्हे। उसकी जांघें मुलायम थीं, और उनके बीच एक हल्की सी दाढ़ी थी।
“तुम… तुम परफेक्ट हो,” अमन ने फुसफुसाते हुए कहा।
उसने उसके स्तनों पर चूमना शुरू किया। उसके निप्पल अभी से कड़े हो चुके थे, और अमन ने उन्हें अपने मुंह में भर लिया। नेहा ने अपने हाथों से उसके सिर को दबाया, और मजबूती से पकड़ लिया।
“ओह… अमन… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है,” नेहा ने कहा।
अमन ने उसके एक स्तन को चूसते हुए, दूसरे को अपने हाथ से दबाना शुरू किया। वह उनके बीच-बीच में निप्पल को अपनी उंगलियों से घुमाता, जिससे नेहा की सांसें और तेज हो जातीं।
फिर वह और नीचे गया। उसने नेहा के पेट पर चूमे, फिर उसके नाभि में जीभ घुमाई। नेहा ने अपने पैर थोड़े फैला दिए, और अमन उसकी जांघों के बीच आ गया।
उसने उसकी जांघों पर चूमना शुरू किया – पहले ऊपर से, फिर धीरे-धीरे अंदर की तरफ। नेहा की जांघें कांप रही थीं, और वह अपने हाथों से चादर को मजबूती से पकड़े हुए थी।
“प्लीज… अमन… प्लीज…” नेहा ने कहा।
“क्या प्लीज?” अमन ने पूछा।
“मुझे… मुझे नहीं पता… बस… बस करो,” नेहा ने कहा।
अमन ने उसकी योनि के ऊपर चूमा। वह गुलाबी और खूबसूरत थी, और थोड़ी गीली भी हो चुकी थी। अमन ने अपनी जीभ से उसके क्लिटोरिस को चाटना शुरू किया।
“ओह माय गॉड… अमन… यह… यह…” नेहा की आवाज़ कांप रही थी।
अमन ने उसकी योनि को अपनी जीभ से चाटना जारी रखा। वह उसके क्लिटोरिस को चाटता, फिर अंदर की तरफ जीभ घुमाता। नेहा की कमर ऊपर उठने लगी, और वह अपने कूल्हों को उसके मुंह की तरफ दबाने लगी।
“अमन… मैं… मैं…” नेहा ने कहा, और फिर एक जोरदार झटके के साथ उसका शरीर कांपने लगा।
यह नेहा का पहला ऑर्गेज्म था। उसका पूरा शरीर कांप रहा था, और उसकी योनि से एक हल्का सा तरल निकला। अमन ने उसे चाट लिया, और ऊपर आकर उसके होंठों पर चूमा।
“कैसा लगा?” अमन ने पूछा।
“बहुत… बहुत अच्छा,” नेहा ने हांफते हुए कहा।
अमन ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए। नेहा ने उसे देखा – उसकी छाती पर हल्के बाल थे, और पेट सपाट था। जब उसने अपनी पैंट उतारी, तो नेहा ने देखा कि उसका लिंग पूरी तरह से खड़ा था।
यह नेहा के लिए पहली बार था कि वह किसी पुरुष के लिंग को इतने करीब से देख रही थी। वह लगभग 7 इंच का था, और काफी मोटा भी। उसका रंग गहरा था, और ऊपर की त्वचा थोड़ी पीछे हटी हुई थी।
“क्या… क्या यह अंदर जाएगा?” नेहा ने डरते हुए पूछा।
“हां, लेकिन मैं धीरे-धीरे करूंगा,” अमन ने कहा। “पहले थोड़ा तेल या कुछ लगाना होगा।”
नेहा ने अपने बगल में रखा बेबी ऑयल उसे दिया। अमन ने थोड़ा तेल अपने लिंग पर लगाया, और थोड़ा नेहा की योनि पर।
“तैयार हो?” अमन ने पूछा।
“हां,” नेहा ने कहा, और अपने पैर फैला दिए।
अमन ने अपने लिंग को उसकी योनि के मुंह पर रखा। वह गर्म और गीली थी। उसने धीरे से आगे बढ़ाया, और लिंग का सिरा अंदर घुस गया।
“ओह… दर्द… दर्द हो रहा है,” नेहा ने कहा।
“रुक जाऊं?” अमन ने पूछा।
“नहीं… नहीं… थोड़ा और करो,” नेहा ने कहा।
अमन ने धीरे से और आगे बढ़ाया। उसका लिंग आधा अंदर घुस चुका था, और नेहा की आंखों में आंसू आ गए थे। लेकिन साथ ही एक अजीब सा सुकून भी महसूस हो रहा था।
“और… और अंदर करो,” नेहा ने कहा।
अमन ने एक जोरदार धक्का दिया, और उसका पूरा लिंग अंदर घुस गया। नेहा ने एक चीख सी निकाली, और अपने नाखूनों से अमन की पीठ में गाड़ दिए।
“माफ करना… माफ करना,” अमन ने कहा, और उसके होंठों पर चूमा।
थोड़ी देर रुकने के बाद, अमन ने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। पहले तो नेहा को दर्द महसूस हुआ, लेकिन फिर धीरे-धीरे वह दर्द सुकून में बदलने लगा।
“ओह… अमन… यह… यह अच्छा लग रहा है,” नेहा ने कहा।
अमन ने अपनी गति तेज कर दी। वह अंदर-बाहर होने लगा, और हर बार उसका लिंग नेहा की योनि की दीवारों से टकराता। नेहा ने अपने पैरों से अमन की कमर को पकड़ लिया, और उसे और अंदर खींचने लगी।
“और जोर से… और जोर से,” नेहा ने कहा।
अमन ने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। बिस्तर की चादरें क्रंच होने लगीं, और कमरे में सिर्फ उनकी सांसों और आवाजों की गूंज होने लगी।
“नेहा… मैं… मैं आने वाला हूं,” अमन ने कहा।
“मेरे अंदर ही… प्लीज… मेरे अंदर ही,” नेहा ने कहा।
अमन ने एक आखिरी जोरदार धक्का दिया, और उसका शुक्राणु नेहा की योनि में निकलने लगा। वह गर्म और गाढ़ा था, और नेहा ने महसूस किया कि उसका शरीर फिर से कांपने लगा था।
दोनों एक-दूसरे में समाए पड़े रहे। अमन ने नेहा के बालों को सहलाया, और उसके माथे पर चूमा।
“मैं… मैं तुमसे प्यार करता हूं,” अमन ने कहा।
“मैं भी,” नेहा ने कहा, और उसे गले लगा लिया।
उस रात के बाद, उनका रिश्ता और भी गहरा हो गया। वे अब अक्सर एक-दूसरे के साथ समय बिताते थे, और शारीरिक संबंध भी बनाते थे।
नेहा धीरे-धीरे खुलने लगी। वह अब अमन के सामने अपने शरीर को लेकर ज्यादा आरामदायक महसूस करती थी। वह जानती थी कि अमन उसे किसी भी रूप में पसंद करता था।
एक रविवार की सुबह, नेहा अमन के फ्लैट पर थी। वे दोनों नंगे बिस्तर पर लेटे थे, और अमन नेहा की पीठ पर हाथ फेर रहा था।
“तुम्हें पता है, तुम्हारी गांड बहुत खूबसूरत है,” अमन ने अचानक कहा।
नेहा ने शर्माते हुए मुस्कुराया। “क्या… क्या बकवास कर रहे हो?”
“सच कह रहा हूं,” अमन ने कहा। “मैं… मैं उसे छूना चाहता हूं।”
नेहा ने उसकी तरफ देखा। “तुम… तुम पागल हो।”
“प्लीज,” अमन ने कहा।
नेहा ने कुछ देर सोचा, फिर हां में सिर हिलाया। “ठीक है, लेकिन धीरे से।”
अमन ने उसे पेट के बल लेटा दिया। उसने उसकी गांड को देखा – वे गोल और भरी हुई थीं, और पूरी तरह से मुलायम। उसने अपने हाथों से उन्हें सहलाना शुरू किया।
“कैसा लग रहा है?” अमन ने पूछा।
“अजीब… लेकिन अच्छा,” नेहा ने कहा।
अमन ने उसकी गांड के दरार में अपनी उंगली रखी, और हल्के से सहलाया। नेहा ने सांस रोक ली।
“वहां… वहां मत करो,” उसने कहा।
“क्यों? तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा?” अमन ने पूछा।
“नहीं… मतलब हां… लेकिन वह गंदी जगह है,” नेहा ने कहा।
“तुम्हारे शरीर का कोई भी हिस्सा गंदा नहीं है,” अमन ने कहा, और उसकी गांड के छेद पर चूमा।
“ओह… अमन…” नेहा ने कहा।
अमन ने अपनी जीभ से उसकी गांड के छेद को चाटना शुरू किया। नेहा ने अपने कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठाया, और अमन को और अच्छी पहुंच दी।
“यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है,” नेहा ने कहा।
अमन ने उसकी गांड को चाटते हुए, अपनी एक उंगली उसकी योनि में डाल दी। नेहा गीली थी, और उसकी उंगली आसानी से अंदर चली गई।
“ओह… हां… और करो,” नेहा ने कहा।
अमन ने उसकी योनि में उंगली करते हुए, उसकी गांड को चाटना जारी रखा। नेहा की सांसें तेज हो गईं, और वह अपने कूल्हों को आगे-पीछे हिलाने लगी।
फिर अमन ने अपनी उंगली को उसकी गांड के छेद पर रखा। “क्या मैं… क्या मैं अंदर करूं?”
“नहीं… नहीं, वह बहुत दर्द करेगा,” नेहा ने कहा।
“मैं धीरे से करूंगा, और बहुत तेल लगाऊंगा,” अमन ने कहा। “अगर दर्द हो तो मैं रुक जाऊंगा।”
नेहा ने सोचा, फिर हां में सिर हिलाया। “ठीक है, लेकिन बहुत धीरे से।”
अमन ने बेबी ऑयल लिया, और उसकी गांड के छेद पर लगाया। फिर उसने अपनी उंगली पर भी तेल लगाया, और धीरे से अंदर डालने की कोशिश की।
नेहा ने एक हल्की सी आवाज़ निकाली। “ओह… यह… यह अजीब लग रहा है।”
“दर्द हो रहा है?” अमन ने पूछा।
“थोड़ा… लेकिन ठीक है,” नेहा ने कहा।
अमन ने धीरे से अपनी उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की। पहले तो नेहा को अजीब लगा, लेकिन फिर उसे मजा आने लगा।
“ओह… यह… यह अच्छा लग रहा है,” नेहा ने कहा।
अमन ने अपनी उंगली को और अंदर डाला, और उसे घुमाना शुरू किया। नेहा ने अपने कूल्हों को और ऊपर उठाया, और मजे की आवाजें निकालने लगी।
“और… और अंदर करो,” उसने कहा।
अमन ने एक और उंगली डालने की कोशिश की। अब दो उंगलियां अंदर थीं, और नेहा को थोड़ा तनाव महसूस हुआ, लेकिन वह सहन कर गई।
“मैं… मैं तुम्हें और अंदर करना चाहता हूं,” अमन ने कहा। “अपना लिंग।”
नेहा ने उसकी तरफ देखा। “वह… वह बहुत मोटा है। दर्द होगा।”
“मैं बहुत धीरे से करूंगा, और अगर तुम कहो तो रुक जाऊंगा,” अमन ने कहा।
नेहा ने कुछ देर सोचा। उसे डर था, लेकिन साथ ही उत्सुकता भी थी। “ठीक है… लेकिन बहुत धीरे से।”
अमन ने बहुत सारा तेल लिया, और अपने लिंग पर लगाया। फिर उसने नेहा की गांड के छेद पर भी तेल लगाया। वह धीरे से उसके पीछे आया, और अपने लिंग को उसकी गांड पर रखा।
“तैयार हो?” उसने पूछा।
“हां,” नेहा ने कहा, और अपने दांतों से होठ काट लिए।
अमन ने धीरे से आगे बढ़ाया। उसके लिंग का सिरा अंदर घुसा, और नेहा ने एक तेज आवाज़ निकाली।
“ओह… रुको… रुको… बहुत दर्द हो रहा है,” उसने कहा।
अमन ने रुक गया। “क्या मैं बाहर निकलूं?”
“नहीं… नहीं, रुको थोड़ी देर,” नेहा ने कहा।
कुछ देर रुकने के बाद, नेहा ने कहा: “ठीक है, थोड़ा और अंदर करो।”
अमन ने धीरे से और आगे बढ़ाया। उसका आधा लिंग अंदर था, और नेहा की सांसें तेज हो गई थीं। लेकिन फिर धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा, और एक अजीब सा मजा महसूस होने लगा।
“और… और अंदर,” नेहा ने कहा।
अमन ने एक और धक्का दिया, और उसका पूरा लिंग अंदर घुस गया। नेहा ने अपने मुंह में तकिया दबा लिया, और एक लंबी सांस ली।
“मैं… मैं हिलूं?” अमन ने पूछा।
“हां… धीरे-धीरे,” नेहा ने कहा।
अमन ने धीरे-धीरे अंदर-बाहर होना शुरू किया। पहले तो नेहा को अजीब लगा, लेकिन फिर उसे बहुत मजा आने लगा। उसकी गांड गर्म और तंग थी, और अमन के लिंग को पूरी तरह से घेरे हुए थी।
“ओह… यह… यह बहुत अच्छा है,” नेहा ने कहा। “और जोर से… और जोर से।”
अमन ने गति तेज कर दी। वह जोर-जोर से नेहा की गांड मारने लगा, और नेहा अपने हाथों से चादर को मजबूती से पकड़े हुए थी।
“मैं… मैं आने वाली हूं,” नेहा ने कहा।
“मैं भी,” अमन ने कहा।
दोनों एक साथ झड़े। अमन ने अपना वीर्य नेहा की गांड में छोड़ दिया, और नेहा ने भी अपना सुख प्राप्त किया।
उसके बाद, दोनों थककर बिस्तर पर पड़े रहे। अमन ने नेहा को अपनी बाहों में भर लिया, और उसके बालों में चूमा।
“मैं… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं,” अमन ने कहा।
“मैं भी,” नेहा ने कहा, और उसके छाती पर सिर रखकर सो गई।
अगले कुछ महीनों में, नेहा और अमन का रिश्ता और भी मजबूत हो गया। वे अब एक-दूसरे के साथ रहने की सोच रहे थे।
नेहा के ऑफिस में सबको पता चल गया था कि उसका कोई बॉयफ्रेंड है। उसकी सहेलियां अक्सर पूछती थीं: “कब शादी कर रही है?”
“अभी तो समय है,” नेहा मुस्कुराकर कहती थी।
अमन भी अपने दोस्तों को नेहा से मिलवा चुका था। उसके दोस्त उसे चिढ़ाते थे: “भाई, तू तो फस गया। नेहा जैसी लड़की मिली है, अब छोड़ना मत।”
“कभी नहीं छोड़ूंगा,” अमन कहता था।
एक शाम, नेहा अपने ऑफिस से थकी हुई आई थी। उसने आज एक फॉर्मल सूट पहना था – काली पैंट और सफेद शर्ट। उसके बाल खुले थे, और उसने हल्का मेकअप किया था।
अमन उसके घर पर इंतजार कर रहा था। जब नेहा आई, तो उसने उसे देखा और मुस्कुराया।
“आज बहुत खूबसूरत लग रही हो,” अमन ने कहा।
“थक गई हूं,” नेहा ने कहा, और सोफे पर गिर गई।
अमन ने उसके पास बैठा, और उसके पैरों को अपनी गोद में रखा। उसने उसकी हील्स उतारी, और उसके पैरों को दबाना शुरू किया।
“ओह… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है,” नेहा ने कहा।
अमन ने उसके पैरों को दबाते हुए, धीरे से उसकी पैंट के बटन खोलने शुरू किए।
“अमन… अभी नहीं… मैं थकी हूं,” नेहा ने कहा।
“बस थोड़ा सा,” अमन ने कहा। “मैं तुम्हें आराम दिलाऊंगा।”
उसने उसकी पैंट उतार दी। नीचे नेहा ने एक काली लेस वाली पैंटी पहनी थी, जो बहुत सेक्सी लग रही थी।
“यह… यह नई है?” अमन ने पूछा।
“हां, तुम्हारे लिए,” नेहा ने शर्माते हुए कहा।
अमन ने उसकी पैंटी को भी उतार दिया। नेहा की योनि सामने थी, और वह थोड़ी गीली भी लग रही थी।
अमन ने उसके पैरों को फैलाया, और उसकी योनि पर चूमा। नेहा ने अपनी आंखें बंद कर लीं, और आराम से सोफे पर लेट गई।
“बस… बस ऐसे ही,” उसने कहा।
अमन ने उसकी योनि को चाटना शुरू किया। उसने अपनी जीभ से उसके क्लिटोरिस को चाटा, फिर अंदर की तरफ घुमाया। नेहा की सांसें तेज हो गईं, और वह अपने कूल्हों को उसके मुंह की तरफ दबाने लगी।
“ओह… हां… और जोर से,” उसने कहा।
अमन ने उसकी जांघों को पकड़ा, और उसकी योनि को और गहराई से चाटना शुरू किया। उसने अपनी उंगली उसके अंदर डाली, और उसे घुमाने लगा।
“मैं… मैं आने वाली हूं,” नेहा ने कहा।
“रुको मत… आ जाओ,” अमन ने कहा।
नेहा ने एक जोरदार झटका महसूस किया, और उसका पूरा शरीर कांपने लगा। अमन ने उसका सारा रस चाट लिया, और ऊपर आकर उसके होंठों पर चूमा।
“अब तो तुम्हारी थकान मिट गई होगी,” अमन ने मुस्कुराते हुए कहा।
“हां, लेकिन अब मैं तुम्हारा भी करना चाहती हूं,” नेहा ने कहा।
उसने अमन को सोफे पर बैठने के लिए कहा, फिर उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसने अमन की पैंट खोली, और उसका लिंग बाहर निकाला।
यह उसके लिए अब कोई नई बात नहीं थी। उसने अमन के लिंग को अपने हाथ में लिया, और उसे सहलाना शुरू किया। फिर उसने अपने होंठ उसके सिरे पर रखे, और चूसना शुरू किया।
“ओह… नेहा…” अमन ने कहा।
नेहा ने उसके लिंग को अपने मुंह में भर लिया, और ऊपर-नीचे करने लगी। वह अपनी जीभ से उसके सिरे को चाटती, फिर पूरे लिंग को अपने गले तक ले जाती।
“बहुत अच्छा लग रहा है… और करो,” अमन ने कहा।
नेहा ने अपनी गति तेज कर दी। वह जोर-जोर से उसका लिंग चूसने लगी, और अपने हाथों से उसकी टोपी को सहलाती रही।
“मैं… मैं आने वाला हूं,” अमन ने कहा।
नेहा ने उसका लिंग मुंह से बाहर निकाला, और अपने हाथों से उसे जल्दी-जल्दी सहलाने लगी। कुछ ही पलों में, अमन का वीर्य निकलने लगा, और नेहा ने उसे अपने हाथों में ही पकड़ लिया।
“मैं… मैं तुम्हें बाथरूम से कुछ लेकर आती हूं,” नेहा ने कहा।
“रुको,” अमन ने कहा, और उसे खींचकर अपने ऊपर बिठा लिया।
छह महीने बीत चुके थे। नेहा और अमन अब एक-दूसरे को अच्छी तरह से जान चुके थे। उन्होंने फैसला किया कि वे साथ रहेंगे।
अमन ने एक नया फ्लैट लिया – दो बेडरूम का, नेहरू प्लेस के पास। उसने नेहा से कहा: “अब हमारा अपना घर होगा।”
नेहा बहुत खुश थी। उसने अपने रूममेट्स को अलविदा कहा, और अमन के साथ नए घर में शिफ्ट हो गई।
पहली रात, जब वे नए घर में थे, अमन ने नेहा को गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया।
“यह… यह हमारा नया शुरुआत है,” अमन ने कहा।
“हां,” नेहा ने कहा, और उसे गले लगा लिया।
उस रात, उन्होंने बहुत प्यार किया। अमन ने नेहा को पूरी तरह से नंगा किया, और उसके शरीर के हर हिस्से को चूमा। उसने उसके स्तनों को चूसा, उसके पेट पर चूमा, उसकी जांघों को चाटा, और फिर उसकी योनि का मजा लिया।
नेहा भी पीछे नहीं रही। उसने अमन का लिंग चूसा, उसकी टोपी को अपनी जीभ से चाटा, और उसे पागल कर दिया।
फिर अमन ने नेहा को बिस्तर पर लेटाया, और उसके ऊपर आ गया। उसने अपना लिंग उसकी योनि में डाला, और धीरे-धीरे हिलने लगा।
“मैं… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं,” नेहा ने कहा।
“मैं भी,” अमन ने कहा, और उसे कसकर गले लगा लिया।
वे दोनों एक साथ झड़े, और फिर एक-दूसरे की बाहों में सो गए।
अब उनकी एक रुटीन बन गई थी। सुबह उठना, साथ नाश्ता करना, एक साथ ऑफिस जाना, शाम को वापस आकर एक-दूसरे से अपने दिन की बातें शेयर करना, और रात को एक-दूसरे में खो जाना।
नेहा अब और भी खूबसूरत लगने लगी थी। प्यार ने उसके चेहरे पर एक अलग चमक ला दी थी। वह अक्सर अमन के लिए नए-नए कपड़े खरीदती, और उसे पसंद आने पर खुश होती।
एक शाम, नेहा ने एक नई साड़ी पहनी थी – नीले रंग की, हल्की सी। उसने अपने बाल खुले छोड़े थे, और गले में एक साधारण सा हार पहना था।
अमन जब घर आया, तो उसे देखकर रुक गया।
“तुम… तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो,” उसने कहा।
“शुक्रिया,” नेहा ने शर्माते हुए कहा।
अमन ने उसे अपनी ओर खींचा, और उसके होंठों पर चूमा। उसने उसकी साड़ी को खोलना शुरू किया, और उसे बिस्तर की ओर ले गया।
“आज… आज मैं तुम्हें एक नया मजा देना चाहता हूं,” अमन ने कहा।
“क्या?” नेहा ने पूछा।
“69,” अमन ने कहा।
नेहा ने शर्माते हुए हां में सिर हिलाया। वे दोनों एक-दूसरे के उलटे सिर होकर लेट गए। अमन ने नेहा की योनि को चाटना शुरू किया, और नेहा ने उसका लिंग चूसना शुरू किया।
दोनों एक-दूसरे को मजा दे रहे थे। नेहा अपनी जीभ से अमन के लिंग को चाट रही थी, और अमन उसकी योनि को चाट रहा था। दोनों की सांसें तेज हो गई थीं, और वे दोनों जल्द ही झड़ने वाले थे।
“मैं… मैं आने वाला हूं,” अमन ने कहा।
“मैं भी,” नेहा ने कहा।
दोनों एक साथ झड़े। नेहा ने अमन का वीर्य अपने मुंह में ले लिया, और अमन ने उसका सारा रस चाट लिया।
एक साल बीत चुका था। नेहा और अमन अब शादी की बात कर रहे थे।
छह महीने बाद, नेहा और अमन की शादी हो गई। यह एक साधारण सी शादी थी, लेकिन बहुत खूबसूरत। नेहा ने लाल रंग की साड़ी पहनी थी, और अमन ने शेरवानी।
जब वे अपने होटल के कमरे में पहुंचे, अमन ने नेहा को गोद में उठाया।
“हां,” नेहा ने शर्माते हुए कहा।
अमन ने उसे बिस्तर पर लेटाया, और धीरे से उसकी साड़ी खोलने लगा। नेहा ने आज एक खूबसूरत लाल रंग की लैंगरी पहनी थी, जो अमन को पागल कर देने वाली थी।
“तुम… तुम बहुत खूबसूरत हो,” अमन ने कहा।
उसने उसकी लैंगरी उतारी, और उसे नंगा कर दिया। फिर उसने खुद भी अपने कपड़े उतारे, और नेहा के ऊपर आ गया।
“मैं… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं, नेहा,” अमन ने कहा।
“मैं भी,” नेहा ने कहा।
अमन ने अपना लिंग उसकी योनि में डाला, और धीरे-धीरे हिलने लगा। नेहा ने अपने पैरों से उसकी कमर को पकड़ लिया, और उसे और अंदर खींचने लगी।
“ओह… अमन… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है,” नेहा ने कहा।
“मुझे भी,” अमन ने कहा।
वे दोनों एक-दूसरे को कसकर गले लगाए हुए थे, और एक-दूसरे में खोए हुए थे। उनकी सांसें मिली हुई थीं, और उनके दिल एक साथ धड़क रहे थे।
“मैं… मैं आने वाला हूं,” अमन ने कहा।
“मेरे अंदर ही… प्लीज,” नेहा ने कहा।
अमन ने एक जोरदार धक्का दिया, और उसका वीर्य नेहा की योनि में निकलने लगा। नेहा ने भी ऑर्गेज्म महसूस किया, और वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में शांत हो गए।
और इस तरह, नेहा और अमन की कहानी एक नए मोड़ पर पहुंच गई। वे अब एक पूरे परिवार थे, और उनका प्यार हर दिन और भी गहरा होता जा रहा था।
उनकी मुलाकात एक मेट्रो स्टेशन पर हुई थी, लेकिन उनका प्यार उससे कहीं आगे गया। वे एक-दूसरे के लिए बने थे, और वे हमेशा साथ रहेंगे
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