बहन की चुदाई देख साली चोदी
मेरा नाम गुलशन है। मेरी शादी जानवी से हुई थी – एक हसीन लड़की जिसकी उम्र 24 साल थी। जानवी के घर में उसकी दो और बहनें थीं – सुधा और अकांक्षा। तीनों की उम्र लगभग बराबर थी, जैसे कि मां ने एक के बाद एक बिना रुके तीनों को जन्म दिया हो। बहन की चुदाई देख साली चोदी
जानवी सबसे बड़ी थी, फिर सुधा (22 साल), और सबसे छोटी अकांक्षा (20 साल)।
जानवी पतली-दुबली, गोरी और मादक थी। उसके स्तन मध्यम आकर के थे लेकिन कसे हुए, गोलाई में ऐसे जैसे दो आम रखे हों। उसकी योनि पर बाल हल्के थे, और जब वो गर्म होती तो उसकी चूत से निकलने वाली गर्मी और गीली नमी मुझे पागल कर देती।
लेकिन मेरी नजर जल्दी ही सुधा पर पड़ी। सुधा जानवी से थोड़ी मोटी थी, उसकी गांड बड़ी और मोटी थी – ऐसी कि जब वो चलती तो उसके नितंब ऐसे उछलते जैसे दो बड़े गुलाबी आम झूल रहे हों। उसके स्तन भी बड़े थे, लगभग 34 इंच के, और हमेशा उसकी कमीज में से उभरे हुए दिखाई देते।
सुधा की उम्र 22 साल थी, और वो अपनी बड़ी बहन की शादी के बाद से ही मुझे अजीब नजरों से देखती थी। उसकी आंखों में वो लालसा थी जो किसी भी मर्द को पहचानने में देर नहीं लगती।
फिर थी अकांक्षा – सबसे छोटी, 20 साल की। वो अभी कॉलेज में पढ़ती थी। उसका बदन अभी बचकाना था, लेकिन उसके स्तन तेजी से बड़े हो रहे थे। उसकी चूत पर अभी भी बाल कम थे, और वो शायद अभी कुछ ज्यादा ही मासूम थी इस मामले में।
पहली झलक – दरवाजे की दरार से
शादी के दो महीने बीत चुके थे। मैं और जानवी अब पूरी तरह से एक-दूसरे के शरीर से वाकिफ थे। मैं रोज रात को उसे चोदता, कभी-कभी तो दिन में भी जब सास-ससुर बाहर जाते।
उस दिन दोपहर थी। सास-ससुर किसी रिश्तेदारी में गए थे। घर में मैं, जानवी, और सुधा थीं। अकांक्षा कॉलेज गई थी।
मैंने जानवी को अपने कमरे में बुलाया। वो आई तो मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था, उसकी गांड की दरार में घुसने की कोशिश कर रहा था।
“अरे, दिन में क्या कर रहे हो… कोई आ जाएगा…” जानवी ने मुस्कुराते हुए विरोध किया, लेकिन उसकी आवाज में वो मादकता थी जो मुझे और उत्तेजित करती थी।
“आने दो किसी को… मुझे तो बस तेरी चूत चाहिए अभी…” मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा और उसकी कमीज ऊपर उठाने लगा।
जानवी ने हल्का सा विरोध किया, लेकिन जैसे ही मेरे हाथ उसके स्तनों पर पड़े, वो पिघल सी गई। मैंने उसे बिस्तर पर धक्का दिया। वो पीठ के बल लेट गई, उसकी सांसें तेज हो गईं।
मैंने उसकी सलवार खोली। उसकी सफेद चूत देखकर मेरा लंड और तन गया। वो पहले से ही गीली हो चुकी थी, उसकी योनि से नमी निकल रही थी, हल्के गुलाबी होंठ चमक रहे थे।
“आह… गुलशन… जल्दी करो…” जानवी ने अपनी आंखें बंद करते हुए कहा।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला। मेरा लंड लगभग 7 इंच का था, मोटा और कड़ा। उसके सुपाड़े पर पहले से ही पानी की बूंदें थीं। मैंने उसे जानवी की चूत के मुंह पर रगड़ा।
“उह्ह्ह… हां…” जानवी की सांस फूल गई।
मैंने एक जोरदार धक्का दिया। मेरा पूरा लंड उसकी गहरी चूत में समा गया। वो “आह्ह्ह्ह्ह… मर गई…” चीखी, लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उसके पैर अपने कंधों पर रखे और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।
“पच पच पच…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। जानवी की चूत से निकलने वाली नमी और मेरे लंड की रगड़ से वो आवाज और भी तेज हो रही थी। बहन की चुदाई देखे पकड़ा जीजा ने कर दी साली की चुदाई
“चोदो मुझे… और जोर से… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो…” जानवी चीख रही थी, उसके स्तन मेरे हर धक्के के साथ उपर-नीचे हो रहे थे।

मैंने उसकी कमीज उतार दी। उसके गोल स्तन बाहर आ गए, गुलाबी निप्पल खड़े हो गए थे। मैंने एक स्तन मुंह में ले लिया और चूसने लगा, दूसरे को मसलने लगा।
“उम्म्म्म… आह्ह्ह… गुलशन… बहुत मजा आ रहा है…” जानवी की सांसें फूल रही थीं, उसकी चूत मेरे लंड को कस-कस के पकड़ रही थी।
मैंने लगभग दस मिनट तक उसे इसी तरह चोदा। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया। वो अपने हाथों के बल झुकी, उसकी गांड मेरी तरफ उठी हुई थी। मैंने उसकी गांड के गालों को फैलाया और उसकी चूत में फिर से लंड घुसा दिया।
“घुस्स्स…” की आवाज आई।
“आह्ह्ह्ह… पीछे से और गहरा लग रहा है…” जानवी चीखी।
मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। मेरे अंडे उसकी चूत के नीचे की तरफ टकरा रहे थे। “थप थप थप…” की आवाजें गूंज रही थीं।
तभी मेरी नजर दरवाजे की दरार पर पड़ी। वहां से एक आंख झांक रही थी। सुधा! मेरी साली सुधा मुझे अपनी बहन को चोदते हुए देख रही थी।
मैंने जानबूझकर अपनी स्पीड और बढ़ा दी। मैं चाहता था कि सुधा और अच्छे से देखे कि मैं कैसे उसकी बहन की चूत मार रहा हूं। मैंने जानवी के बाल पकड़े और उसका सिर पीछे खींचा।
“देख… कैसी लग रही है मेरी चूत मरवाते हुए…” मैंने जानवी से कहा, लेकिन असल में मैं सुधा के लिए कह रहा था।
“आह्ह्ह… बहुत अच्छी लग रही हूं… और चोदो… मेरी चूत का भोसड़ा बना दो…” जानवी चीख रही थी।
सुधा की आंखें बड़ी-बड़ी हो गई थीं। मैंने देखा कि उसका हाथ अपनी सलवार के अंदर जा रहा था। वो अपनी चूत सहला रही थी, मुझे देखते हुए।
यह देखकर मेरा लंड और भी कड़ा हो गया। मैंने जानवी को और तेज चोदना शुरू किया। मेरे धक्के इतने जोरदार थे कि बिस्तर हिल रहा था।
“मैं आने वाला हूं… तेरी चूत में छोड़ूंगा…” मैंने गुर्राते हुए कहा।
“हां… हां… अंदर ही डाल दो… मेरी चूत को भर दो अपने पानी से…” जानवी चीखी।
मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। “थप थप थप…” की आवाजें तेज हो गईं। फिर मैंने एक जोरदार धक्का दिया और मेरा लंड जानवी की गहरी चूत में फंसा हुआ था। मेरा माल निकलने लगा – गरम, गाढ़ा, और बहुत सारा।
“उह्ह्ह्ह्ह… आह्ह्ह्ह…” मैंने कराहते हुए अपना सारा वीर्य जानवी की चूत में छोड़ दिया।
जानवी भी कांप रही थी, उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया था, वो भी झड़ने वाली थी।
“आह्ह्ह… मैं भी आ गई… मैं भी…” जानवी चीखी और उसकी चूत से पानी निकलने लगा, मेरे लंड के ऊपर, मेरी जांघों पर।
इस बीच मैंने देखा कि सुधा वहां से हट गई थी। लेकिन मैंने उसकी शक्ल देख ली थी – वो लाल हो रही थी, उसकी सांसें तेज थीं, और उसकी आंखों में वो लालसा थी जो मैं पहचानता था।
सुधा को अकेला पाना
मैंने जानवी को बिस्तर पर लेटा दिया। वो थकी हुई थी, उसकी चूत से मेरा पानी और उसका पानी मिलकर बाहर बह रहा था। उसके स्तनों पर पसीने की बूंदें थीं, उसकी सांसें धीमी हो रही थीं।
“मैं पानी पीकर आता हूं…” मैंने कहा और अपनी लंगोटी ठीक करते हुए कमरे से बाहर निकल आया।
मैं जानता था कि सुधा कहीं न कहीं छिपी होगी, मुझे देख रही होगी। मैंने जानबूझकर रसोई की तरफ कदम बढ़ाए।
वहां सुधा खड़ी थी, पानी का गिलास हाथ में लिए, लेकिन वो कांप रही थी। उसका चेहरा लाल था, उसकी आंखें नीचे झुकी हुई थीं। उसकी सलवार का नाड़ा ढीला था, और मैंने देखा कि उसकी जांघें गीली थीं – वो अपनी चूत सहलाते हुए गर्म हो चुकी थी।
मैंने पीछे से दरवाजा बंद किया और उसके पास गया। बहन की चुदाई देख साली चोदी
“क्या देख रही थी सुधा?” मैंने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा।
वो कांप गई, पानी का गिलास हाथ से छूटकर नीचे गिर गया।
“कुछ… कुछ नहीं… मैं… मैं…” वो घबरा गई और पीछे हटने लगी।
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। उसका हाथ गरम था, पसीने से तर था। उसकी उंगलियां अभी भी गीली थीं – शायद उसकी अपनी चूत की नमी से।
“डरो मत… मैंने देख लिया था तुम्हें… कैसे तुम अपनी बहन को चोदते हुए देख रही थीं…” मैंने धीरे से कहा, उसके करीब जाते हुए।
“नहीं… मैं… मैं नहीं…” वो मना करने लगी, लेकिन उसकी आवाज कांप रही थी। उसकी आंखें मेरे लंड की तरफ जा रही थीं जो अभी भी अधमरा था लेकिन उसे देखकर फिर से खड़ा होने लगा था। बहन की चुदाई देखे पकड़ा जीजा ने कर दी साली की चुदाई
मैंने उसे दीवार से सटा दिया। वो मेरे और दीवार के बीच फंस गई। मेरा लंड अभी भी अधमरा था, लेकिन सुधा को इतने करीब देखकर फिर से खड़ा होने लगा। मैंने जानबूझकर उसे अपनी तरफ खींचा ताकि वो मेरे लंड को महसूस कर सके।
“सच बताओ… अच्छा लगा ना देखकर?” मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए पूछा।
“प्लीज… छोड़ दो मुझे… कोई आ जाएगा…” वो कांप रही थी, लेकिन वो भाग नहीं रही थी। उसकी सांसें तेज हो गई थीं, उसके स्तन मेरे सीने पर दब रहे थे – इतने बड़े, इतने नरम।
मैंने उसका चेहरा ऊपर उठाया। उसकी आंखों में वो लालसा थी जो किसी भी मर्द को पागल कर दे। उसके होंठ सूखे हुए थे, वो उन्हें चाट रही थी। उसकी नाक पर पसीने की बूंदें थीं।
“बताओ… तुम्हें भी चाहिए ना यही?” मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा और उसे अपनी तरफ खींचा।
वो मेरे सीने से लग गई। उसके स्तन मेरे सीने पर दब रहे थे – इतने बड़े, इतने नरम। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया और उसकी पेट पर टिक गया।
“आह…” सुधा ने हल्की सी आवाज निकाली। उसकी आंखें बंद हो गईं, उसका बदन कांप उठा।
“चलो… तुम्हारे कमरे में…” मैंने कहा।
“नहीं… प्लीज… मेरी बहन…” वो डर रही थी, लेकिन उसका विरोध कमजोर था।
“वो सो रही है… आ जाओ…” मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे खींचकर उसके कमरे में ले गया।
सुधा की चूत में पहली बार
सुधा का कमरा छोटा था, एक छोटा सा बिस्तर था। मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और सुधा को बिस्तर पर धकेल दिया।
वो बैठ गई, उसकी सांसें तेज हो गईं। उसकी छाती उछल रही थी, उसके बड़े स्तन मुझे बुलाहा दे रहे थे। उसने अपने हाथों से अपनी सलवार ढकने की कोशिश की, लेकिन मैंने उसके हाथ हटा दिए।
“मत शर्माओ… मैं सब देख चुका हूं…” मैंने कहा और उसके सामने खड़े होकर अपनी लंगोटी खोली।
मेरा लंड बाहर निकल आया – अभी भी गीला था, जानवी की चूत का पानी अभी भी लगा हुआ था, और अब फिर से पूरी तरह खड़ा था, सुधा की तरफ इशारा कर रहा था। मेरा लंड 7 इंच का था, मोटा, नसों से भरा हुआ, और सुपाड़ा लाल हो चुका था।
सुधा की आंखें उस पर टिक गईं। वो इतना बड़ा लंड शायद पहली बार देख रही थी। उसने मुझे देखा, फिर लंड को देखा, फिर नीचे झुका लिया सिर। उसके गाल लाल हो गए थे, उसकी सांसें और तेज हो गईं।
“चूसो इसे…” मैंने आदेश दिया।
“नहीं… मैंने कभी नहीं…” वो शर्मा रही थी, उसकी आवाज कांप रही थी।
“मैं सिखाता हूं…” मैंने उसका चेहरा ऊपर उठाया और अपने लंड को उसके होंठों पर रगड़ा।
उसके होंठ नरम थे, गुलाबी थे। मैंने अपने लंड का सुपाड़ा उसके मुंह में डालने की कोशिश की। वो पीछे हटी, लेकिन मैंने उसके सिर पकड़ लिया।
“चूसो… जैसे आइसक्रीम चूसते हो…” मैंने कहा।
सुधा ने धीरे से अपने होंठ खोले और मेरे लंड का सुपाड़ा अपने मुंह में ले लिया। उसके मुंह की गर्मी मुझे पागल कर रही थी। वो अनाड़ी थी, लेकिन उसकी जीभ मेरे सुपाड़े पर घूम रही थी। उसने धीरे से चूसना शुरू किया, उसकी आंखें बंद थीं, उसके गाल अंदर की तरफ हो रहे थे।
“उम्म्म्म… हां… ऐसे ही…” मैंने उसके सिर को पकड़कर धक्के लगाने शुरू किए।
मेरा लंड उसके मुंह में अंदर-बाहर हो रहा था। वो घुटने लगी, उसकी आंखों में आंसू आ गए, लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उसे लगभग पांच मिनट तक अपना लंड चुसवाया। उसके थूक से मेरा लंड चिकना हो गया था, और वो अब आसानी से उसके मुंह में अंदर-बाहर हो रहा था।
“काफी है… अब लेट जाओ…” मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया।
वो लेट गई, उसकी सांसें तेज थीं, उसके होंठ लाल हो गए थे। मैंने उसकी सलवार खोली। उसकी सफेद पैंटी दिखाई दी, और उस पर एक बड़ा गीला धब्बा था – वो पहले से ही गरम हो चुकी थी, उसकी चूत से पानी निकल रहा था।
मैंने उसकी पैंटी नीचे की। उसकी चूत देखकर मेरा दिल धड़क उठा। वो गुलाबी थी, छोटी-छोटी झांटें थीं, और पूरी तरह गीली थी। उसकी योनि के होंठ फूले हुए थे, और बीच में से नमी निकल रही थी। उसकी चूत की खुशबू मेरे नाक में भर गई – एक मादक, गर्म खुशबू जो मुझे और पागल कर रही थी।
“कितनी गीली हो तुम…” मैंने उसकी चूत पर उंगली रगड़ी।
“आह्ह्ह… मत करो…” वो कांप उठी, लेकिन उसकी चूत ने मेरी उंगली को अंदर खींच लिया। बहन की चुदाई देख साली चोदी -1
मैंने एक उंगली अंदर डाली। उसकी चूत तंग थी, गरम थी, और इतनी नम थी कि उंगली आसानी से अंदर चली गई। उसकी चूत की दीवारें मेरी उंगली को कस रही थीं।
“उह्ह्ह…” सुधा ने कराही निकाली। उसकी आंखें बंद थीं, उसके होंठ कसे हुए थे।
“कसी हुई है तुम्हारी चूत…” मैंने उंगली अंदर-बाहर करते हुए कहा।
“प्लीज… अब डाल दो…” वो बोल नहीं पा रही थी, उसकी सांसें रुक रही थीं। उसने अपने स्तन पकड़ लिए और उन्हें मसलने लगी।
मैंने उसके पैर फैलाए और अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा। उसकी चूत छोटी थी, मेरा लंड मोटा था। मैंने धीरे से दबाव डाला।
“आह्ह्ह… दर्द हो रहा है…” सुधा चीखी। उसकी आंखें खुल गईं, उसके होंठ कांप रहे थे।
“शांत रहो… थोड़ी देर में मजा आएगा…” मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा और एक जोरदार धक्का दिया।
“चूईईईईई…” की आवाज आई और मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। बहन की चुदाई देखे पकड़ा जीजा ने कर दी साली की चुदाई
“आह्ह्ह्ह्ह… मर गई… बहुत दर्द हो रहा है…” सुधा रोने लगी, उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। उसने मेरे सीने पर हाथ रखे और धक्का देने की कोशिश की, लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए।
“रुको… अभी तो आधा ही गया है…” मैंने कहा और एक और धक्का दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… नहीं… बहुत मोटा है…” सुधा चीख रही थी, लेकिन मैंने पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
मेरा लंड उसकी गहरी चूत में फंसा हुआ था। उसकी चूत इतनी तंग थी कि मेरा लंड उसे फाड़ता हुआ लग रहा था। मैंने रुककर उसे थोड़ा आराम दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज।
“आह्ह्ह… हां… अब अच्छा लग रहा है…” सुधा की आवाज बदल गई। दर्द की जगह मजा आने लगा था। उसकी चूत ने मेरे लंड को पकड़ लिया था, और वो अब अपनी कमर उछाल-उछाल कर मेरा साथ दे रही थी।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। “थप थप थप…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। सुधा के स्तन मेरे हर धक्के के साथ उपर-नीचे हो रहे थे। मैंने एक स्तन पकड़ा और उसे मसलने लगा, निप्पल को कस-कस के दबाने लगा।
“आह्ह्ह… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” सुधा अब चीख रही थी, उसकी चूत ने मेरे लंड को पकड़ लिया था। उसने अपने पैर मेरी कमर के पीछे लपेट लिए और मुझे और अंदर खींचने लगी।
मैंने उसे घोड़ी बनाया। वो अपने हाथों के बल झुकी, उसकी गांड मेरी तरफ थी – वो मोटी, गोल, उभरी हुई गांड जिसे देखकर मेरा लंड और कड़ा हो गया। मैंने उसकी गांड के गालों को फैलाया – वो गोल, गुलाबी गांड की दरार थी, और बीच में उसकी चूत का छोटा सा छेद जो मेरे लंड को बुला रहा था।
मैंने उसकी चूत में फिर से लंड घुसा दिया। पीछे से और गहरा जा रहा था।
“घुस्स्स… आह्ह्ह्ह… पीछे से तो और भी गहरा लग रहा है…” सुधा चीखी। उसने अपना सिर बिस्तर पर टिका दिया और अपनी गांड और ऊंची उठा दी।
मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। मेरे अंडे उसकी चूत से टकरा रहे थे। उसकी गांड की दरार में मेरा पेट थपथपा रहा था।
“थप थप थप…” की आवाजें तेज हो गईं। पूरा कमरा हमारी चुदाई की आवाजों से गूंज रहा था।
“मैं आने वाली हूं… मैं आ गई…” सुधा चीखी और उसकी चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से कसा कि मैं भी रुक गया।
उसकी चूत से पानी निकलने लगा, गरम-गरम, मेरे लंड के ऊपर, मेरी जांघों पर। उसका पानी इतना ज्यादा था कि बिस्तर पर एक गीला धब्बा बन गया।
मैंने भी अपनी स्पीड और बढ़ा दी। “मैं भी आ रहा हूं… तेरी चूत में ही छोड़ूंगा…” मैंने गुर्राते हुए कहा।
“हां… हां… अंदर ही डाल दो… भर दो मेरी चूत…” सुधा चीखी।
मैंने तीन-चार जोरदार धक्के दिए और फिर अपना लंड उसकी गहरी चूत में फंसा दिया। मेरा माल निकलने लगा – गाढ़ा, गरम, और बहुत सारा। मैंने अपना सारा वीर्य सुधा की चूत में भर दिया।
“उह्ह्ह्ह्ह… आह्ह्ह्ह…” मैंने कराहते हुए अपना पानी उसमें छोड़ा।
हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था, और उसकी चूत मेरे पानी से भरी हुई थी, बाहर बह रही थी। उसकी चूत से मेरा वीर्य और उसका पानी मिलकर नीचे बिस्तर पर गिर रहा था।
ब्लैकमेल और छोटी साली की योजना
हम दोनों सांस फूलते हुए लेटे थे। मैंने सुधा को अपनी बांह में भर लिया। उसके स्तन मेरे सीने पर दबे हुए थे, उसकी सांसें धीमी हो रही थीं।
“कैसा लगा?” मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए पूछा।
“बहुत अच्छा…” वो शर्माते हुए बोली, उसने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया।
मैंने सोचा कि यही सही मौका है। मैंने अपना फोन निकाला जो बिस्तर के पास रखा था। सुधा थकी हुई थी, उसकी आंखें बंद थीं। मैंने उसके नंगे बदन की, मेरी चूत में लंड लिए हुए उसकी एक फोटो खींच ली। फिर एक और – इस बार उसकी चूत का क्लोज-अप जहां से मेरा लंड बाहर निकला हुआ था और मेरा वीर्य बाहर बह रहा था।
“यह क्या कर रहे हो?” सुधा घबरा गई जब उसने कैमरा देखा।
“अब तुम मेरी हो… और अगर तुमने किसी को बताया, तो ये फोटो सबको दिखा दूंगा… इंटरनेट पर डाल दूंगा…” मैंने कहा।
“प्लीज… यह मत करो… मैं कुछ नहीं कहूंगी…” वो रोने लगी, उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।
“अच्छा… अब मुझे तुम्हारी छोटी बहन अकांक्षा भी चाहिए… और तुम ही उसे यहां लाओगी…” मैंने उसे चेतावनी दी।
सुधा की आंखों में डर था, लेकिन वो मजबूर थी। वो सिर हिलाकर मान गई। बहन की चुदाई देखे पकड़ा जीजा ने कर दी साली की चुदाई
“लेकिन ध्यान रहे… जानवी को कुछ नहीं पता चलना चाहिए… वरना तुम्हारी फोटो…” मैंने धमकी दी।
“मैं… मैं कोशिश करूंगी… लेकिन अकांक्षा बहुत मासूम है… वो मानेगी नहीं…” सुधा कांप रही थी।
“तुम्हें उसे मनाना है… कैसे भी करके… नहीं तो तुम्हारी चूत की फोटो सब देखेंगे…” मैंने कहा।
सुधा रोती हुई मान गई। हम दोनों ने कपड़े पहने। मैंने उसे गले लगाया और उसके होंठों पर एक लंबा चुम्मा लिया। वो कांप रही थी, लेकिन उसने विरोध नहीं किया।
“जाओ… अब अकांक्षा को तैयार करो… मैं उसे भी चोदना चाहता हूं…” मैंने उसे धक्का देकर कमरे से बाहर निकाल दिया।
सुधा चली गई, उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन मैं जानता था कि वो मेरी बात मानेगी। वो अपनी छोटी बहन को मेरे लिए फंसाएगी।
मैं बिस्तर पर लेट गया और सोचने लगा – अकांक्षा… सबसे छोटी साली… उसकी मासूम चूत… कैसे होगी वो… कैसे चीखेगी जब मेरा बड़ा लंड उसकी छोटी चूत में घुसेगा…
मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने सोचा कि कल अकांक्षा को फंसाने की योजना बनेगी। सुधा उसे लेकर आएगी… और फिर…
जानिए इसका मजा अगली कहानी में आपके भाग -2 में बहुत रहस्य पता चलेगा
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