दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
मेरा नाम निशा है। उम्र इक्कीस साल, कॉलेज की आख़िरी साल में हूँ। कद पाँच फुट चार इंच, रंग गोरा, बाल सीधे और कमर तक, फिगर चौंतीस-अट्ठाईस-चौंतीस। दीदी कहती हैं कि मैं घर की सबसे सुंदर हूँ, और मम्मी कहती हैं कि सुंदरता से ज़्यादा मुझे अपनी शरारत पर घमंड होना चाहिए। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
पर जो बात दीदी और मम्मी दोनों नहीं जानती थीं, वो ये थी — कि मुझे उनके पति से, यानी मेरे जीजा से, पहली नज़र में ही कुछ हो गया था।
दीदी की शादी को चार साल हो चुके थे। शादी के दिन मैं सत्रह की थी। जब जीजा बारात लेकर आए थे और मंडप में बैठे थे, तो मैं दूर से उन्हें देख रही थी — लंबे, चौड़े कंधे, साफ़ चेहरा, और आँखों में एक ऐसी गर्मी जो सिर्फ मेरी तरफ़ हो, ऐसा मुझे लगा था। उस दिन मैंने खुद से कहा था — “अगर किसी आदमी से मुझे इश्क़ होगा, तो ऐसे ही होगा।” और उस वक़्त मुझे नहीं पता था कि वो आदमी मेरा जीजा ही है। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
जीजा की उम्र बत्तीस साल है। दिखने में वो असल उम्र से पाँच-छह साल छोटे लगते हैं। जिम जाते हैं, खाना-पीना सही रखते हैं, और उनके हाथ — कसम से, उनके हाथ देखकर ही इंसान भूल जाए कि वो शादीशुदा हैं।
दीदी की उम्र उनतीस है, और वो मुझे अपनी बेटी की तरह मानती है। हर हफ़्ते फोन करती, हर त्योहार पर बुलाती। और इस बार दिवाली पर उसने ज़िद कर दी — “निशा, इस बार तू हमारे घर पर दिवाली मनाएगी। मम्मी-पापा तो मामा के घर जा रहे हैं, तू अकेली क्यों रहेगी? चार दिन रुक जा।” दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
और मैं मन ही मन खुश हो गई।
जीजा-दीदी का घर शहर के बाहरी हिस्से में एक छोटे-से कोठी जैसा था। दो कमरे, एक बड़ा हॉल, और पीछे एक छोटा-सा बगीचा। दिवाली से पहले दीदी ने पूरा घर सजा दिया था — दरवाज़े पर गेंदे के फूलों का बंदनवार, आँगन में रंगोली, हर जगह मिट्टी के दीये। शाम को जब दीये जलते, तो पूरा घर सुनहरी रोशनी में नहा जाता।
मैं पहुँची तो दीदी ने मुझे गले लगाया। “कितनी बड़ी हो गई है तू!” — कहकर उसने मेरे गाल खींचे, जैसे बचपन में खींचती थी। और जीजा दरवाज़े पर खड़े थे, मुस्कुरा रहे थे। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“आओ निशा,” — उन्होंने मेरा बैग पकड़ा और अंदर रख दिया। जब उनका हाथ मेरे हाथ से टकराया, तो एक झटका-सा लगा। चार साल बाद भी वो झटका कम नहीं हुआ था।
पहले दो दिन सब कुछ सामान्य रहा — दीदी हमेशा आसपास रहती, हम तीनों मिलकर बाज़ार गए, मिठाइयाँ लाईं, पटाखे ख़रीदे। पर छोटी-छोटी बातें होने लगीं।
जब मैं रसोई में रोटी बनाती, तो जीजा पानी लेने आते और पीछे से ऐसे गुज़रते कि उनका हाथ मेरी कमर को हल्का छू जाए। जब हम टीवी देखते, तो वो मेरे बगल वाली सीट पर बैठते और दीदी सोफ़े के दूसरे छोर पर। बातचीत में भी अजीब-सा बदलाव आ रहा था। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
एक बार दीदी बाज़ार गई थी और घर में हम दोनों अकेले थे। मैं बालकनी में खड़ी थी, चाय पी रही थी। जीजा आए और बगल में खड़े हो गए।
“निशा, तुम्हें पता है, तुम दीदी जैसी दिखने लगी हो,” — उन्होंने कहा।
“अच्छा? अच्छा है या बुरा?” — मैंने मज़ाक किया।
“अच्छा है… पर दीदी से एक बात ज़्यादा है तुममें।”
“क्या?”
“दीदी जितनी सीधी है, तुम उतनी शरारती हो। और शरारत वाला चेहरा ज़्यादा खींचता है।” दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
मैंने नज़र उठाकर उन्हें देखा। वो भी मुझे देख रहे थे। बस दो सेकंड की बात थी, पर उन दो सेकंड में लगा कि हवा भारी हो गई। फिर दीदी का स्कूटर आने की आवाज़ हुई और हम दोनों अलग हो गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
दिवाली की रात आ गई।
दीदी ने पूरा घर दीयों से रोशन कर दिया, आँगन में रंगोली बनाई, और हम तीनों ने मिलकर पटाखे फोड़े। जीजा ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे फुलझड़ी जलाना सिखाया — बस उतनी देर के लिए उनका हाथ मेरे हाथ पर था, और मेरे दिल की धड़कन कानों तक सुनाई दे रही थी। दीदी फोन पर मम्मी से बात कर रही थी, इसलिए हमें उसका ध्यान भी नहीं था।
रात करीब नौ बजे हमने पूजा की, मिठाइयाँ बाँटीं, और खाना खाया। और फिर वो बात हुई जिसने सब बदल दिया।
दीदी का फोन बजा। उसकी सहेली का फोन था — उसके ससुराल में कोई इमरजेंसी हो गई थी और वो दीदी से मदद माँग रही थी। दीदी ने सुनते ही कहा —
“निशा, मुझे जाना पड़ेगा। रात भर रुकना पड़ सकता है। तू जीजा के साथ रह, कल सुबह आ जाऊँगी।” दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
और बस। दीदी अपनी सहेली के घर चली गई। घर में बस मैं और जीजा।
दीदी के जाने के बाद घर एक अजीब-सी खामोशी में डूब गया। बाहर दूर-दूर पटाखों की आवाज़ आ रही थी, पर अंदर बस दीयों की लौ की हल्की-हल्की फड़फड़ाहट सुनाई दे रही थी।
मैं बर्तन धोने रसोई में चली गई, ताकि कुछ करती रहूँ और ये खामोशी टूटे। जीजा हॉल में थे, टीवी चला रहे थे, पर उनका ध्यान टीवी पर नहीं था — ये मुझे पता था, क्योंकि कभी-कभी वो रसोई की तरफ़ देख रहे थे। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
कुछ देर बाद वो रसोई में आए।
“निशा, चाय बना दूँ?” — उन्होंने पूछा।
“हाँ, बना दो। ठंड लग रही है।”
उन्होंने चाय बनाई, और हम दोनों खिड़की के पास खड़े होकर पीने लगे। बाहर आसमान में पटाखों की चिंगारियाँ छूट रही थीं और हम दोनों बस चुपचाप देख रहे थे। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“निशा,” — जीजा ने चाय का कप रखते हुए कहा।
“हूँ?”
“तुम्हें याद है, शादी के दिन? तुम साड़ी में बहुत प्यारी लग रही थी।”
“अरे, मैं तो सिर्फ सत्रह की थी,” — मैं हँसी।
“हाँ, पर उस दिन मैंने सोचा था… कि ये लड़की बड़ी होकर कितनी सुंदर होगी। और आज देख रहा हूँ, तो लगता है जो सोचा था, उससे भी ज़्यादा सुंदर हो गई।” दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
मेरे अंदर कुछ पिघल-सा गया। चार साल का इंतज़ार, और आज वो शब्द उनके मुँह से निकले — जैसे मेरी ही सोच किसी ने बोल दी हो।
“और दीदी?” — मैंने पूछा, जैसे जवाब की उम्मीद हो कि वो कहें “दीदी तो दीदी है, तुम अलग हो।”
जीजा मुस्कुराए और मेरी तरफ़ मुड़े। “दीदी मेरी ज़िंदगी है। पर तुम… तुम कुछ और हो। तुमसे बात करने में एक अलग-सा सुकून है। जैसे अंदर कहीं जो बात किसी को नहीं बता पाता, वो तुम्हें बता दूँ।”
और फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। सिर्फ उँगलियाँ — इतनी हल्की पकड़ कि मैं चाहूँ तो छुड़ा सकूँ। पर मैंने नहीं छुड़ाया।
कुछ सेकंड बाद उन्होंने मुझे अपनी तरफ़ खींचा। और फिर उनके होंठ मेरे होंठों पर आ गए। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
आह! वो पहला चुम्मा — चार साल का इंतज़ार, और आज पूरा हुआ। उनके होंठ गरम थे, और मेरे होंठ काँप रहे थे। पहले हल्का चूमा, फिर गहरा। उनकी जीभ मेरे होंठों को खोलने की कोशिश कर रही थी और मैंने खुद होंठ खोल दिए। दीयों की पीली रोशनी में हम दोनों खिड़की के पास खड़े चूम रहे थे, जैसे दुनिया में कोई तीसरा ही न हो।
उन्होंने मेरा चेहरा दोनों हाथों से पकड़ रखा था और मेरी कमर खिड़की की चौखट से लगी थी। मैं उनके सीने से ऐसी चिपक गई थी कि उनकी धड़कनें मुझे महसूस हो रही थीं। उन्होंने मेरी गर्दन पर होंठ रखे — कान के नीचे, जहाँ संवेदना सबसे तेज़ होती है — और मेरे शरीर में एक झुरझुरी दौड़ गई। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“निशा… ठंड लग रही है, अंदर चलो,” — उन्होंने फुसफुसाया।
हम हाथ पकड़े हुए हॉल में आए। उन्होंने टीवी बंद कर दिया। अब बस दीयों की रोशनी और हम दोनों की साँसें। वो सोफ़े पर बैठे और मुझे अपने बगल में बिठाया। फिर मेरा चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया और फिर चूमने लगे।
इस बार चुम्मा और गहरा था। उनका एक हाथ मेरी पीठ पर आया, फिर कमर पर, फिर ऊपर होकर मेरे कंधे पर। दूसरा हाथ मेरे घुटने पर था। और मैं उनके सीने पर हाथ रखकर उन्हें महसूस कर रही थी — जिम वाली छाती, गरम, मज़बूत।
उनका हाथ मेरी साड़ी के ब्लाउज़ की तरफ़ बढ़ा और उँगलियों से मेरी पसलियों पर फिरने लगा। मैंने खुद उनका हाथ पकड़कर अपने सीने पर रख दिया। उन्होंने मुझे देखा — पूछने वाली नज़र से। मैंने सिर हिलाकर हाँ कहा। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
फिर उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू सरकाया और ब्लाउज़ के हुक खोलने लगे। उँगलियाँ काँप रही थीं, जैसे पहली बार किसी ने खोले हों। मैं हँस दी — “जीजा, आप तो एक्सपर्ट हो ना।”
“तेरे सामने एक्सपर्ट नहीं लग रहा,” — वो भी हँसे, और फिर मेरे ब्लाउज़ के आख़िरी हुक खुल गए।
मैंने ब्लाउज़ उतार दिया। अंदर सिर्फ़ लाल ब्रा थी। दीयों की रोशनी में मेरी गोरी देह सुनहरी लग रही थी। जीजा ने मुझे देखा, और फिर वो नज़र जो उन्होंने दी — जैसे कोई कीमती चीज़ पहली बार देख रहे हों — उसने मेरी सारी झिझक मिटा दी।
उन्होंने मेरी गर्दन पर होंठ रखे, फिर कॉलरबोन पर, फिर ब्रा के ऊपर से मेरे बूब्स को चूमा। ब्रा की लेस के ऊपर उनके होंठ फिर रहे थे और मैं “आह्ह…” करके सिर पीछे गिरा दे रही थी। फिर उन्होंने पीछे से ब्रा का हुक खोला। ब्रा खुलकर गिर गई और अब मेरे बूब्स उनके सामने खुले थे। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“कसम से, निशा…” — उनकी आवाज़ भारी थी। उन्होंने एक टॉपा मुँह में लिया और चूसने लगे — पहले हल्का, फिर दाँतों से हल्का काटते हुए, और उनकी जीभ टॉपे पर गोल घूम रही थी। दूसरे बूब्स को वो हाथ से दबा रहे थे। मेरी पीठ कमान की तरह मुड़ गई और मैंने उनका सिर अपने सीने से चिपका लिया।
“जीजा… बेड पर चलो,” — मैंने फुसफुसाया।
हम उठे। मेरी साड़ी लगभग खुल चुकी थी और जीजा ने उसे नीचे सरका दिया। अब मैं सिर्फ़ लाल पैंटी में थी। जीजा का हाथ मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत पर आया और उन्होंने हल्का दबाया। वहीं, पैंटी के कपड़े के ऊपर से, एक उँगली फिराने लगे। मेरी चूत गीली होने लगी थी और पैंटी का कपड़ा भीगने लगा था।
“तुम तैयार हो?” — उन्होंने पूछा।
“बहुत पहले से,” — मैंने सच कह दिया।
हम कमरे में आए। बेड पर सफ़ेद चादर थी और बगल के लैंप से हल्की पीली रोशनी। उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और अपने कपड़े उतारने लगे। जब उन्होंने शर्ट उतारी, तो उनकी छाती देखकर मेरा मुँह सूख गया — कसी हुई, मज़बूत, गरम। और फिर जब उन्होंने पैंट उतारी, तो मेरी नज़र नीचे चली गई और मैं रुक ही गई। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
उनका लंड बड़ा, मोटा और तना हुआ था, टॉपा गुलाबी। मैंने देखा और मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद दिया।
उन्होंने मेरी पैंटी खींचकर उतार दी। अब मैं पूरी नंगी थी — उनके सामने, उनके बेड पर। मैंने शरमाकर हाथों से अपना चेहरा ढक लिया। जीजा हँसे और मेरे हाथ हटाकर बोले — “छुपने की क्या बात है? तुम तो सबसे सुंदर लग रही हो।”
फिर वो मेरे ऊपर आए और मेरी गर्दन पर होंठ रखे। नीचे से ऊपर — गर्दन, कॉलरबोन, छाती, पेट, नाभि — हर जगह वो चूमते गए। मेरी नाभि पर वो काफ़ी देर रुके और जीभ घुमाते रहे, और मैं कमर उठाकर “आह्ह…” करने लगी। फिर जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर होंठ रखे — इतने करीब कि मैं बेचैन हो गई।
“जीजा… प्लीज़…” — मैंने गिड़गिड़ाकर कहा।
उन्होंने मेरी टाँगें धीरे से फैलाईं और सीधे चूत पर जीभ रख दी।
आह्ह्ह्ह! पहली बार कोई मुझे वहाँ चूम रहा था। उन्होंने पहले बाहर के होंठ चाटे, फिर अंदर की तरफ़ जीभ सरकाई, और फिर ऊपर वाले दाने पर जीभ रखकर गोल-गोल घुमाने लगे। मेरी पीठ बेड से उठ गई और मैंने दोनों हाथों से उनके बाल पकड़ लिए। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“ऐसे ही… ऐसे ही करते रहो…”
उन्होंने रफ़्तार बढ़ा दी — जीभ अंदर-बाहर, फिर अंदर डालकर ऊपर-नीचे। कभी हल्का चूसते, कभी दाने पर दाँत रखते। मेरी साँसें टूटने लगीं और कुछ ही मिनटों में मैं उनके मुँह में ही झड़ गई। मेरा पूरा शरीर काँप रहा था और वो मेरी चूत का सारा रस पी गए, जैसे कोई बूँद न छोड़ना हो।
“पहली बार?” — उन्होंने ऊपर आकर पूछा।
मैंने सिर हिलाया — हाँ।
उनकी आँखों में एक अजीब-सी कोमलता आ गई। उन्होंने मेरे माथे पर चुम्मा दिया, फिर होंठों पर, और फुसफुसाए — “दर्द हो तो बता देना। धीरे करूँगा।” दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
उन्होंने अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया और मेरी चूत के मुँह पर सेट किया। मेरी टाँगें उनके दोनों तरफ़ थीं और वो मेरे ऊपर आ गए। उन्होंने मेरी आँखों में देखा, और मैंने सिर हिलाकर इजाज़त दी।
और फिर वो पहला धक्का।
“आआआह्ह्ह्ह!… ओह्ह जीजा…”
पहले आधा अंदर गया और मैं सिसक पड़ी। थोड़ी जलन हुई, पर अच्छी जलन। जीजा रुक गए, मेरा चेहरा देखा, और जब मैंने “और करो” कहा, तो एक धीरे-से धक्के में पूरा अंदर उतार दिया। मेरी आँखों से एक आँसू निकल आया — दर्द का नहीं, बस पूरे भर जाने का। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“दर्द हो रहा है?” — वो घबरा गए।
“नहीं… अच्छा लग रहा है। सच में, अच्छा लग रहा है।”
वो मुस्कुराए और धीरे-धीरे चलने लगे। पहले हल्के धक्के, फिर जब मेरी चूत ने उन्हें जकड़ लिया और अंदर की नमी बढ़ गई, तो उन्होंने रफ़्तार बढ़ा दी। मेरे बूब्स उनके हर धक्के पर हिल रहे थे और वो उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर दबाते रहे।
“निशा… कसम से, तू बहुत टाइट है…”
“हाँ जीजा… और तुम… बहुत अच्छा लग रहा है…”
और फिर हम दोनों की झिझक टूट गई। अब बातें नहीं, बस साँसें और शरीर थे। उन्होंने करीब बीस मिनट तक मुझे चोदा — कभी धीरे-धीरे गहरे धक्के, कभी तेज़-तेज़ छोटे। मेरी कमर के नीचे उन्होंने तकिया लगा दिया था, जिससे हर धक्का अंदर तक पहुँचे। मैंने उनकी पीठ खरोंच दी और वो मेरी गर्दन पर होंठ रखकर सिसकते रहे। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
फिर उन्होंने मुझे करवट दी और पीछे से आए। उस पोज़िशन में वो और गहरा जा रहा था और मेरे बूब्स उनके हाथों में लटककर झूल रहे थे। मैंने तकिये में मुँह दबाकर चीखना शुरू कर दिया, क्योंकि रात थी और पड़ोसी सुन सकते थे। जीजा हँसे और मेरे कान में फुसफुसाए — “घर में कोई नहीं है, जितना चीखना है चीख।”
और मैं चीखी। उन्होंने तेज़ किया, मैंने उनके नाम पुकारे, और फिर एक बार और मैं झड़ गई — इस बार उनके लंड को अंदर महसूस करते हुए।
फिर वो भी आख़िरी मोड़ पर थे। उन्होंने रुककर पूछा — “अंदर करूँ या बाहर?”
“अंदर,” — मैंने कहा।
और वो मेरे अंदर ही झड़ गए। गरम-गरम, और इतना कि मुझे अंदर तक महसूस हुआ। कुछ सेकंड दोनों हाँफते हुए वहीं पड़े रहे, फिर वो मेरे ऊपर से हटे और मेरे बगल में लेट गए। उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और मेरे बाल सहलाने लगे।
कुछ देर चुप्पी रही। बस साँसें और दीयों की आवाज़। और फिर मैंने वो सवाल पूछा जो मेरे अंदर चार साल से था —
“जीजा… दीदी को कैसे बताएँगे?”
उन्होंने मेरे माथे पर चुम्मा दिया और हँसे। “कल सुबह देखते हैं। आज तो बस तू है और मैं।” दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
हम रात भर ऐसे ही पड़े रहे। बीच-बीच में वो उठकर चाय लाते, फिर हम फिर एक-दूसरे में खो जाते। उस रात उन्होंने मुझे दो बार और चोदा — एक बार जब मैं उनके ऊपर बैठी और खुद चलाई, और एक बार सुबह के करीब, जब हम आधी नींद में थे और उन्होंने मुझे पीछे से पकड़ लिया।
जब मैं उनके ऊपर बैठी थी, तो वो मुझे देखते रहे — दीये की रोशनी में, मेरे बाल खुले, मेरे बूब्स उनके हाथों में। उन्होंने कहा था — “निशा, तू दीदी से भी ज़्यादा सुंदर लग रही है इस वक़्त।” और मैं उस बात पर हँसी थी, पर अंदर से पिघल गई थी।
सुबह साढ़े छह बजे दीदी लौटी। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
उसने दरवाज़ा खोला, और हम दोनों को हॉल में चाय पीते हुए देखा — मैं जीजा की टी-शर्ट में, बाल बिखरे, और जीजा बस पजामे में। दीदी एक पल रुकी, हमें देखा, और फिर मुस्कुराकर बोली —
“अच्छा… तो ये तीन दिन में ही कुछ हो गया?”
जीजा और मैंने एक-दूसरे को देखा और दोनों हँस पड़े। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
दीदी ने चाय का कप रखा, मेरे बाल सहलाए और बोली — “चल, अब तेरी शादी में भी देखेंगे, कौन तुझे ऐसे चूमता है।”
और मैंने मन ही मन कहा — “दीदी, जो मुझे चूमता है, वो तो तेरा ही है।” दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
दिवाली की उस रात के बाद मेरी ज़िंदगी दो हिस्सों में बँट गई — एक जो दुनिया देखती थी, और एक जो सिर्फ़ मैं और जीजा जानते थे।
अगले कुछ दिन सब कुछ सामान्य दिख रहा था, पर दीदी की आँखें तेज़ थीं। उसे पहले दिन ही कुछ अजीब लगा — मैं सुबह हॉल में उसकी टी-शर्ट पहने थी, जो असल में जीजा की थी, और मैंने झट से बहाना बना दिया कि मेरी शर्ट में चाय गिर गई थी, और जीजा की पड़ी हुई मिल गई। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
दीदी ने “हूँ” कहकर बात तो मान ली, पर उसकी नज़र उस दिन जीजा पर बार-बार जा रही थी। जब जीजा चाय बनाने रसोई में गए, तो दीदी ने मुझसे पूछा —
“निशा, कल रात तू कब सोई?”
“देर से, दीदी। टीवी देख रही थी।” दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“अकेली?”
“जीजा भी थे… कुछ देर।”
“अच्छा,” — दीदी ने कहा, और उसका “अच्छा” इतना लंबा खिंचा कि मुझे लगा वो कुछ सोच रही है।
पर सबूत कहाँ था? कुछ नहीं। बस एक एहसास। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
और उसी दिन से शुरू हुआ हमारा खेल — एक ऐसा खेल जिसमें दीदी शक करती रही, हम चलते रहे, और कभी पकड़े नहीं गए।
करीब एक महीने बाद, दीदी ने फिर बुलाया। इस बार बहाना था — मम्मी-पापा किसी शादी में गए थे और मुझे अकेला नहीं छोड़ना चाहती थीं। मैं गई, और मन ही मन खुश थी। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
पर इस बार दीदी ज़्यादा चौकन्नी थी। वो अब बार-बार ये देखती कि जीजा कहाँ है, मैं कहाँ हूँ। एक बार हम तीनों बैठे टीवी देख रहे थे और मैं जान-बूझकर जीजा के पैर से पैर छू रही थी, पर चेहरे पर सबसे सीधा भाव था। दीदी ने हम दोनों को देखा और बोली —
“तुम दोनों आज बड़े शांत लग रहे हो।”
“क्यों, क्या हुआ?” — जीजा ने पूछा, बड़े भोलेपन से। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“कुछ नहीं, बस ऐसे ही,” — दीदी ने कहा, और उसकी नज़र मेरे चेहरे पर ठहर गई।
उस रात जब दीदी सो गई, तो जीजा धीरे से मेरे कमरे में आए। हमने बहुत धीमे से सब किया — आवाज़ तक नहीं, बस फुसफुसाहट। पर जब वो आख़िर में थे, तो उनसे एक ज़ोर की आह निकल गई — “आह्ह…”
और बस! दीदी की आवाज़ आई — “कौन?”
जीजा झट से चादर ओढ़कर मेरे बेड के किनारे पड़ गए, जैसे सो रहे हों। दीदी दरवाज़ा खोलकर अंदर आई। मैं आँखें बंद किए लेटी थी, साँसें रोककर। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“निशा? सो गई?” — दीदी ने फुसफुसाया।
मैंने करवट बदली, जैसे गहरी नींद में हूँ। दीदी ने कमरे में चारों तरफ़ देखा, फिर मेरे बेड पर पड़ी चादर पर नज़र डाली — और चली गई। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
जब दरवाज़ा बंद हुआ, तो जीजा चादर से निकले और हम दोनों मुँह दबाकर हँसने लगे। उस रात जीजा मेरे कमरे से निकलने ही वाले थे कि दीदी ने दरवाज़ा फिर खोल दिया — “जीजा, तुम यहाँ?”
“हाँ… पानी पीने आया था, यहीं बैठ गया,” — जीजा ने बहाना बनाया।
दीदी ने देखा — मैं बेड पर, जीजा कुर्सी पर। कुछ ऐसा गड़बड़ नहीं दिखा। वो “हम्म” करके चली गई।
उस रात हम बच गए, पर मुझे पता था कि दीदी के दिल में अब एक छोटा-सा शक बैठ चुका है। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
शक बढ़ता गया, पर कभी सबूत नहीं बना।
दीदी ने कई बार हल्के-हल्के जाल बिछाए। एक बार उसने जान-बूझकर मेरे कमरे में जीजा की घड़ी रख दी, और देखा कि वो जीजा को वापस देनी पड़ी या नहीं। जीजा ने घड़ी देखी, मुस्कुराए, और बिना कुछ कहे पहन ली — पर दीदी ने नोटिस कर लिया कि जीजा को पता था कि घड़ी कहाँ है। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
एक और बार दीदी ने पूछा — “निशा, तुझे जीजा का शेविंग क्रीम का ब्रांड पता है?”
“क्यों?”
“बस पूछ रही हूँ।”
और मैंने सही ब्रांड बता दिया। दीदी की भौंहें उठ गईं। असल में मुझे ब्रांड तब पता चला था जब उस रात मैंने उनके बाथरूम का शेल्फ़ देखा था। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
पर सबसे मज़ेदार वो दिन था जब हम दोनों बाथरूम में बच गए।
दोपहर का वक़्त था, दीदी बगीचे में फूलों को पानी दे रही थी। जीजा बाथरूम में नहाने गए थे और मैं अंदर आ गई, जैसे सिर्फ़ हाथ धोने। बस दो मिनट की बात थी — पर जब इंसान दो मिनट में किसी को दीवार से लगाकर चूम ले, तो बात बढ़ जाती है। हम दोनों भूल ही गए कि दीदी बाहर है। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
फिर दीदी की आवाज़ आई — “जीजा! निशा! कहाँ हो?”
हम दोनों झटके से अलग हुए। जीजा टॉवल ओढ़कर बाहर आए और मैं उनके पीछे-पीछे, बाल ठीक करती हुई। दीदी ने हमें देखा — जीजा गीले बालों में, और मैं उनके ठीक पीछे। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“अरे, तुम दोनों साथ नहा रहे थे क्या?” — दीदी ने पूछा।
“नहीं नहीं, मैं तो बस हाथ धोने गई थी,” — मैंने कहा।
“और जीजा?”
“मैं तो नहा रहा था,” — जीजा बोले।
दीदी ने हम दोनों को ऊपर से नीचे देखा, और बोली — “तुम दोनों के बाल गीले क्यों हैं?”
मैं और जीजा दोनों एक साथ आइने में देखे — और सच में, मेरे बालों के कुछ हिस्से भीगे हुए थे, क्योंकि जीजा के गीले हाथ मेरे बालों में फिरे थे। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
मैंने झट से कहा — “दीदी, मैंने सिर पर पानी डाला था, गरमी लग रही थी।”
दीदी ने “हूँ” कहकर सिर हिलाया, पर उसकी आँखों में वो चमक आ गई थी — जो कहती है, “मुझे पता है, बस साबित नहीं कर पा रही।”
होली आई और शक और गहरा हो गया। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
होली के दिन हम सब उनके घर इकट्ठे हुए। दीदी की सहेलियाँ आईं, खूब रंग खेला गया। शाम को सब थककर बैठे, और फिर सबने मिलकर खाना खाया। रात को सबको नींद आ गई, और दीदी भी अपने कमरे में चली गई।
होली की रात अजीब होती है — चटक रंग, थकान, और एक बेलगाम-सा मूड। जीजा ने मेरे कमरे में आकर फुसफुसाया — “दीदी सो गई।”
इस बार हम ज़्यादा देर तक रहे। रंग से रँगी मेरी देह, और जीजा के हाथ जो अब मेरी देह की हर बारीकी जानते थे। हमने इस बार अलग तरीका अपनाया — पहले बहुत धीरे, बहुत धैर्य से। जीजा ने मुझे बैठाकर अपनी गोद में लिया और मुँह से चूत चाटने के बाद धीरे-धीरे अंदर उतरे। मैं उनकी गोद में बैठकर ऊपर-नीचे हो रही थी और उनके कंधों पर मुँह छुपाकर सिसक रही थी। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
और तभी — दरवाज़े की चरमराहट!
दीदी दरवाज़े पर खड़ी थी।
जीजा झट से मेरे ऊपर से हटे, लेकिन देर हो चुकी थी — हम अब भी जुड़े हुए थे। दीदी अंधेरे में सिर्फ़ सिल्हूट देख पा रही थी।
“निशा? सोई नहीं?” — दीदी की आवाज़। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“अरे दीदी!… आप… उठ गईं?” — मेरी आवाज़ काँप रही थी।
“पानी पीने आई थी। और जीजा कहाँ है?”
जीजा अब भी मेरे अंदर थे, चादर के नीचे। उन्होंने धीरे से मेरे कान में फुसफुसाया — “कुछ मत कहना।”
“दीदी, जीजा तो अपने कमरे में होंगे ना,” — मैंने कहा, बड़े आराम से, जैसे जीजा वहाँ हैं ही नहीं।
दीदी ने कमरे में देखा, मेरे बेड पर देखा — बस मैं और चादर के ढेर। जीजा चादर के नीचे दबे थे, मेरे पीछे, और दीदी को सिर्फ़ एक आकृति दिख रही थी, जिसे उसने अपनी आँखों का भ्रम मान लिया।
दीदी दरवाज़ा बंद करके चली गई। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
जब दरवाज़ा बंद हुआ, तो जीजा चादर से निकले — हाँफते हुए, और हँसते हुए। उन्होंने मेरे कान में कहा — “अब तो दीदी को यक़ीन हो गया होगा कि उसके पति किसी और के साथ है।”
और फिर उस रात हमने वो चुदाई की जो आज तक सबसे रोमांचक थी — क्योंकि अब अंदर डर भी था। डर के साथ मज़ा दुगना हो जाता है, ये उस रात मैंने सीखा। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
पर दिलचस्प बात ये थी — दीदी ने कभी सीधा सवाल नहीं किया। वो सिर्फ़ शक करती रही, और हमें चलने देती रही।
एक बार उसने मुझे अकेले में बुलाया और पूछा — “निशा, सच बता, तू जीजा को पसंद करती है?”
मेरा दिल धक् से रह गया। पर मैंने चेहरे पर सबसे सीधा भाव लाकर कहा — “करती हूँ ना दीदी, वो मेरे जीजा हैं।” दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
“बस जीजा ही?”
“और क्या?”
दीदी हँसी और बोली — “कुछ नहीं। तू बड़ी चालाक हो गई है।”
और वो चली गई। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
मुझे लगा — यही तो सबसे बड़ा सच है। दीदी शक तो करती है, पर पकड़ नहीं पाती। हम गिरफ़्तार होते-होते हर बार बच जाते हैं। और मज़ा भी आता है, और शादी भी नहीं टूटती, और दोनों भाई-बहनों का रिश्ता भी वैसा ही रहता है।
पर सबसे बड़ा दिन तो वो आया जब दीदी ने एक तरह से हमें पकड़ ही लिया — पर साबित नहीं कर पाई।
उस दिन दीदी की सहेली की शादी थी। रात को सब लोग हलवाई के यहाँ खाने गए और हमें बहुत देर तक लौटना था। बीच में हम सब एक होटल में रुके थे। रात करीब डेढ़ बजे जब सब सोए, तो जीजा मेरे कमरे में आए। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
उस रात हमने बहुत कुछ किया — पहले धीरे, फिर तेज़। जीजा ने मुझे बाथरूम में ले जाकर सिंक के सामने खड़ा कर दिया, और वहीं, आइने के सामने, मेरी साड़ी उठाकर पीछे से अंदर उतरे। आइने में अपना चेहरा देखते हुए, जब जीजा मेरे अंदर धक्के मार रहे थे, मुझे लगा कि ये लम्हा हमेशा याद रहेगा।
और फिर सुबह दीदी ने मुझे अकेले में बुलाया और वो सवाल किया जिसका जवाब मैं हमेशा से बचाती आई थी —
“निशा, आज सच बता। तू और जीजा…”
“क्या?”
“कुछ है ना?”
मैंने जवाब देने से पहले सोचा — हाँ कहूँ या ना?
“दीदी… पता नहीं। कुछ है, पर कुछ नहीं भी,” — मैंने वो जवाब दिया जो सच्चा भी था और बचाव भी। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
दीदी ने मेरा चेहरा देखा, फिर जीजा की तरफ़ देखा जो दूर बैठे थे, और फिर मुस्कुराकर बोली —
“अच्छा। तो चल, मुझे ज़्यादा जानने की ज़रूरत नहीं। जब तुम दोनों को बताना हो, बता देना।”
और बस। दीदी को शक हो गया, पर वो पकड़ में कभी नहीं आया।
आज भी ये सिलसिला चल रहा है। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
जीजा आज भी दीदी के पीछे-पीछे मेरी तरफ़ देखते हैं। दीदी आज भी शक करती है, पर बात कहीं नहीं जाती। और मैं — मैं आज भी दीदी के घर जाती हूँ, दीदी के हाथ की चाय पीती हूँ, और जब दीदी सो जाती है, तो जीजा के हाथों में पिघल जाती हूँ।
दीदी कभी-कभी हँसकर कहती है — “निशा, तेरी शादी अब जल्दी करनी पड़ेगी, वरना तू यहीं रह जाएगी।”
और मैं मन ही मन सोचती हूँ — “दीदी, शादी तो हो जाएगी, पर जीजा वाले हिस्से का क्या? वो तो तुम्हारा है, पर थोड़ा-सा मेरा भी है।”
दीदी को शक है। हमें पता है कि उसे शक है। वो भी जानती है कि हमें पता है। पर कोई कुछ नहीं बोलता।
और यही इस कहानी का सबसे मज़ेदार हिस्सा है — जहाँ दीदी को पता है, जीजा को पता है, मुझे पता है, पर किसी को कुछ पता नहीं चलता। दिवाली में जीजू ने चुदाई कर दी 2026
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