vidhwa padosan bhabhi ke sath sex
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जिंदगी में ऐसा मोड़ आएगा जब मुझे विधवा पड़ोसन भाभी के साथ सेक्स करने का मौका मिलेगा। यह कहानी उसी अनुभव की है जो मुझे मेरे पड़ोस में रहने वाली एक विधवा भाभी के साथ हुआ। मेरा नाम राज है और मैं 28 साल का जवान लड़का हूं। मैं एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूं और अकेले रहता हूं। मेरे माता-पिता गांव में रहते हैं और मैं शहर में एक किराए के मकान में रहता हूं।
मेरे पड़ोस में एक सुंदर औरत रहती थी जिसका नाम सुमन था। वह लगभग 32-33 साल की थी और उसके पति की दो साल पहले एक एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। वह अपने सास-ससुर के साथ रहती थी लेकिन उनकी भी उम्र ज्यादा थी और वे ज्यादातर अपने कमरे में ही रहते थे। सुमन भाभी बहुत खूबसूरत थीं – उनका रंग गोरा, आंखें बड़ी-बड़ी, और फिगर बिल्कुल हीरोइनों जैसा था। उनके बदन की खुशबू अक्सर मेरे कमरे तक आती थी और मैं उन्हें देखकर कई बार कल्पनाएं कर लेता था।
विधवा भाभी की चुदाई / पड़ोसन की चुदाई
एक दिन की बात है, मैं अपने बालकनी में खड़ा था और सुबह की चाय पी रहा था। तभी मैंने देखा कि सुमन भाभी अपने बालकनी में आईं और कपड़े सुखाने के लिए डालने लगीं। उन्होंने हल्का सा सूट पहना हुआ था जो उनके बदन पर बिल्कुल फिट बैठा था। जब उन्होंने हाथ उठाए तो उनकी कमर का हिस्सा थोड़ा सा दिख गया और मेरी आंखें वहीं अटक गईं। मैंने उन्हें नमस्ते की और वह मुस्कुरा दीं। वह मुस्कान में कुछ अलग सी कशिश थी, जैसे वह भी मुझे कुछ कहना चाह रही हों।
कुछ दिनों बाद एक शाम को मैं जब घर आ रहा था तो देखा कि सुमन भाभी सामान लेकर आ रही थीं और उनके हाथ में बहुत सारे बैग थे। मैंने पूछा, “भाभी, क्या मैं मदद कर सकता हूं?” वह थोड़ा शर्माते हुए बोलीं, “हां राज, अगर तुम उठा लो तो बड़ी मेहरबानी होगी।” मैंने उनके सारे बैग उठा लिए और उनके घर तक छोड़ आया। उस दिन उन्होंने मुझे अंदर बुलाया और पानी पिलाया। हम थोड़ी देर बातें करने लगे और मुझे पता चला कि वह कितनी अकेली महसूस करती हैं। उनकी आंखों में एक अजीब सी उदासी थी जो मुझे उनकी तरफ खींच रही थी।
विधवा भाभी की चुदाई / पड़ोसन की चुदाई
धीरे-धीरे हमारी दोस्ती बढ़ने लगी। मैं अक्सर उनके घर जाता और वह भी कभी-कभी मेरे यहां आ जातीं। एक रात को लगभग 10 बजे अचानक मेरे दरवाजे पर दस्तक हुई। मैंने दरवाजा खोला तो सुमन भाभी खड़ी थीं और उनके चेहरे पर घबराहट साफ झलक रही थी। वह बोलीं, “राज, मेरे सास-ससुर गांव गए हैं और अचानक बिजली चली गई है, मुझे बहुत डर लग रहा है, क्या मैं थोड़ी देर तुम्हारे यहां बैठ सकती हूं?” मैंने तुरंत उन्हें अंदर बुलाया और मोमबत्ती जलाई।
उस अंधेरी रात में, मोमबत्ती की रोशनी में सुमन भाभी का चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था। हम सोफे पर बैठे और बातें करने लगे। धीरे-धीरे हमारी बातें व्यक्तिगत होती गईं और उन्होंने बताया कि उन्हें कितनी रातों से नींद नहीं आती और वह कितनी तनाव में रहती हैं। मैंने उनका हाथ पकड़कर सांत्वना दी और वह मेरे कंधे पर सिर रखकर रोने लगीं। उनके गर्म आंसू मेरी शर्ट पर गिर रहे थे और मैं उन्हें सहला रहा था।
अचानक उन्होंने अपना चेहरा उठाया और मेरी आंखों में देखने लगीं। उनकी सांसें तेज हो गई थीं और मैं भी उनकी खूबसूरती में खोया जा रहा था। धीरे से मैंने अपना हाथ उनके गाल पर रखा और उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उनके गाल को चूमा और वह आंखें बंद करके मेरे करीब आ गईं। फिर जो हुआ वह कुदरत का खेल था – हमारे होंठ एक दूसरे से मिल गए और एक लंबा और गहरा चुंबन शुरू हुआ।
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उनके होंठ बहुत नरम थे और उनकी सांसों में एक मदहoshि खुशबू थी। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और उनके बदन को अपने बदन से सटा लिया। वह मेरी बाहों में कांप रही थीं और मैं उन्हें चूमते हुए उनके गले पर उतर गया। उन्होंने हल्की सी आवाज निकाली और मेरे बालों में हाथ फेरने लगीं।
मैंने उन्हें धीरे से उठाया और अपने बेडरूम की तरफ ले जाने लगा। वह मुझे कसकर पकड़े हुए थीं और मेरे गले पर चूम रही थीं। जब मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया तो उनकी सांसें और भी तेज हो गई थीं। मैंने उनके ऊपर झुककर उनके होंठ फिर से चूमे और धीरे-धीरे उनके सूट के बटन खोलने लगा। उन्होंने भी मेरी शर्ट उतार दी और मेरे बदन को सहलाने लगीं।
जब मैंने उनका सूट उतारा तो मेरे सामने एक बेहद खूबसूरत औरत थी जो सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में थी। उनका बदन चांदनी की तरह चमक रहा था। मैंने उनके गले पर, उनकी क्लीवेज पर, और फिर उनके पेट पर चूमना शुरू किया। वह मचलने लगीं और मेरे सिर को अपने बदन पर दबाने लगीं। मैंने उनकी ब्रा के हुक खोले और उनके स्तन आजाद हो गए। वह गोल और कसे हुए थे और उनके निप्पल गुलाबी रंग के थे।
मैंने एक स्तन को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा। वह “आह… राज… धीरे…” कहने लगीं। मैं दूसरे स्तन को अपने हाथ से दबा रहा था और पहले को चूम रहा था। उनका बदन तड़प रहा था और वह मेरे नीचे कराह रही थीं। मैंने धीरे-धीरे नीचे की तरफ बढ़ना शुरू किया और उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनके योनि पर चूमा। वह पागल होकर मेरे सिर को दबाने लगीं।
मैंने उनकी पैंटी उतार दी और उनकी योनि को देखा। वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसमें से एक अलग सी खुशबू आ रही थी। मैंने अपनी जीभ उस पर फैलाई और चाटना शुरू किया। वह “ओह गॉड… ये क्या हो रहा है… मैं पागल हो जाऊंगी…” कहकर चीखने लगीं। मैंने उनकी क्लाइटoris को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू किया और उनकी जांघों को सहलाता रहा।
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लगभग दस मिनट तक मैंने उन्हें ऐसे ही चूमा और चाटा। वह दो बार झड़ चुकी थीं और उनका पूरा शरीर कांप रहा था। फिर मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना लिंग बाहर निकाला। वह मेरे लिंग को देखकर हैरान रह गईं – वह लगभग 7 इंच लंबा और काफी मोटा था। उन्होंने कहा, “राज, ये तो बहुत बड़ा है, धीरे से करना, मुझे दर्द होगा।”
मैंने उनके पैरों को फैलाया और अपने लिंग के सिरे को उनकी योनि के मुहाने पर रखा। वह गीली होने के कारण आसानी से अंदर जाने लगा। मैंने एक धक्का दिया और आधा लिंग अंदर चला गया। वह “आह… हल्का… धीरे…” कहने लगीं।
मैंने रुककर उनके होंठ चूमे और फिर दूसरा धक्का दिया। इस बार पूरा लिंग अंदर चला गया और हम दोनों एक दूसरे में समा गए।
वह बहुत टाइट थीं और मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। शुरुआत में धीरे-धीरे और फिर तेजी से। बिस्तर की आवाजें “चर-चर” की हो रही थीं और सुमन भाभी “आह… हां… और तेज… मजा आ रहा है…” कहकर मुझे उत्साहित कर रही थीं।
मैंने उनके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और और गहराई से धक्के लगाने लगा। वह बुरी तरह से मचल रही थीं और अपने नाखून मेरी पीठ पर गाड़ रही थीं। हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
मैंने उनको डॉगी स्टाइल में घुमाया और पीछे से उनमें अपना लिंग डाल दिया। इस पोजीशन में वह और भी ज्यादा मदहोश हो रही थीं और “राज… तुम बहुत अच्छे हो… मुझे बहुत मजा आ रहा है…” कह रही थीं।
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लगभग आधे घंटे तक हम इसी तरह सेक्स करते रहे। फिर मैंने उन्हें सीधा लिटाया और फिर से मिशनरी पोजीशन में उनके अंदर धक्के लगाने लगा। वह अपनी आंखें बंद करके आनंद ले रही थीं और मेरे कान में फुसफुसा रही थीं।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और अब मैं भी झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “भाभी, मैं कहां झड़ूं?” वह बोलीं, “अंदर ही कर दो, मैं गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करती हूं… बस तुम मुझे भर दो…”
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मैंने कुछ और तेज धक्के लगाए और फिर अपना सारा वीर्य उनकी योनि में छोड़ दिया। वह भी उसी समय झड़ी और हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर बिस्तर पर गिर पड़े। हम दोनों की सांसें तेज चल रही थीं और हम एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे।
उस रात के बाद हमारे रिश्ते में एक नई गहराई आ गई। अब हम अक्सर मिलते और विधवा पड़ोसन भाभी के साथ सेक्स करते। सुमन भाभी अब पहले से ज्यादा खुश रहने लगी थीं और उनके चेहरे पर एक अलग सी चमक थी। वह अक्सर कहती थीं कि मैंने उनकी जिंदगी में वो खुशियां भर दी हैं जो उन्हें बरसों से नसीब नहीं हो रही थीं।
एक हफ्ते बाद जब उनके सास-ससुर वापस आए तो भी हम मौके ढूंढकर मिलते रहे। दिन में जब वह अकेली होतीं तो मैं उनके घर चला जाता और हम घंटों तक एक दूसरे के बदन का आनंद लेते। कभी-कभी रात को जब उनके सास-ससुर सो जाते तो वह चुपचाप मेरे घर आ जातीं और सुबह वापस चली जातीं।
हमने कई तरह की पोजीशन ट्राई कीं – कभी बाथरूम में, कभी किचन में, कभी सोफे पर। एक बार तो हमने बालकनी में भी किया जब रात में सब सो रहे थे। वह हर बार नई-नई चीजें सीखना चाहती थीं और मैं उन्हें सब कुछ सिखाता था। उन्हें 69 पोजीशन बहुत पसंद आई जिसमें हम एक दूसरे को एक साथ चूमते और चाटते थे।
वह मुझे कहती थीं कि उनके पति कभी इतना समय नहीं देते थे और न ही उन्हें इतना संतुष्ट करते थे। मैं उनकी हर इच्छा का ख्याल रखता था – कभी धीरे-धीरे प्यार करता, तो कभी जंगली बनकर उन्हें चोदता। वह दोनों तरह से मजा लेती थीं।
विधवा भाभी की चुदाई / पड़ोसन की चुदाई
एक दिन उन्होंने मुझे अपने बेडरूम में बुलाया जहां उन्होंने खास तरह की लाल रंग की लैंजरी पहनी हुई थी। वह बिस्तर पर लेटी हुई थीं और उन्होंने अपने पैर फैला रखे थे। मैंने उन्हें वैसे ही चूमा और फिर उनके अंदर अपना लिंग डाल दिया।
उस दिन हमने बहुत लंबे समय तक सेक्स किया – लगभग दो घंटे तक। हम बीच-बीच में रुकते और फिर शुरू कर देते। वह कई बार झड़ी और मैं भी दो बार झड़ा।
उनके साथ बिताए हर पल यादगार थे। वह न सिर्फ शारीरिक तौर पर बल्कि भावनात्मक रूप से भी मुझसे जुड़ गई थीं। हम एक दूसरे से अपने दिल की बातें शेयर करते थे और एक दूसरे का साथ देते थे।
उन्होंने मुझे बताया कि कैसे वह अपने पति के जाने के बाद टूट सी गई थीं और कैसे मैंने उनकी जिंदगी में रोशनी भर दी थी।
हमारा यह रिश्ता लगभग छह महीने तक चला। फिर उनके सास-ससुर ने उनकी दूसरी शादी की बात चलाई और वह एक अच्छे घर में चली गईं।
जाने से पहले उन्होंने मुझे बहुत रोया और कहा कि मैंने उन्हें वो पल दिए जो वह कभी नहीं भूल पाएंगी। मैंने भी उन्हें धन्यवाद दिया और आशीर्वाद दिया कि वह अपनी नई जिंदगी में खुश रहें।
आज भी जब मैं उस पड़ोस से गुजरता हूं तो उनकी यादें ताजा हो जाती हैं। वह मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत याद बनकर रह गई हैं। विधवा पड़ोसन भाभी के साथ सेक्स का यह अनुभव मुझे हमेशा याद रहेगा क्योंकि इसमें सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं थे बल्कि दो अकेले दिलों की मुलाकात थी जो एक दूसरे को सांत्वना और सुख दे रहे थे।
यह कहानी सिर्फ एक कहानी नहीं है बल्कि मेरे जीवन का एक अहम हिस्सा है जिसने मुझे प्यार, देखभाल और संतुष्टि का असली मतलब समझाया। सुमन भाभी हमेशा मेरे दिल में रहेंगी और मैं उनके लिए हमेशा दुआ करता हूं कि वह जहां भी हों, खुश और स्वस्थ हों।
मैं अपने पाठकों और कहानी पढ़ने और उस पर प्रतिक्रिया देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ। यदि आप अपनी कहानियाँ या टिप्पणियाँ साझा करना चाहते हैं, तो कृपया vikasgoel4952@gmail.com पर ईमेल करें या मुझसे संपर्क करें । मैं हमेशा आपकी टिप्पणियों का इंतजार करता हूँ।
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