करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
सुरेश चार महीने बाद करवा चौथ के लिए लौट रहा था। करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
मैंने पूरे घर की सफाई की, नए चादर-तकिये लगाए, और पहना वही लाल साड़ी—जो उसे सबसे ज़्यादा पसंद थी। शाम को एयरपोर्ट से आते ही वो थका हुआ था, पर मुझे देखते ही उसकी आँखों में चमक आ गई।
“निशा!” उसने सूटकेस फेंककर मुझे गले लगा लिया, “चार महीने! तेरी याद में पागल हो रहा था।”
फिर करवाचौथ की रात आने से पहले उसने मुझे बिस्तार पर गिरा दिया करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
उसने मुझे उठाकर पलंग पर लिटा दिया और बिना एक मिनट गँवाए मेरी साड़ी खींचने लगा।
“रुक, खाना तो…”
“खाना बाद में। पहले तू,” उसने कहा।
उस रात सुरेश ने मुझे दो बार चोदा। पहली बार जल्दी—भूख से भरा हुआ, दूसरी बार धीरे-धीरे। पर मुझे कुछ अलग महसूस हुआ। करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
मैंने महसूस किया कि मैं पहले जैसी नहीं हूँ।
पहले मैं चुदाई में शर्माती थी। अब मैं कराहती थी, कमर घुमाती थी, सुरेश को निर्देश देती थी—”और ऊपर, और अंदर, वहीं रुक।”
सुरेश दूसरे राउंड के बाद मेरे पेट पर पसीना पोंछते हुए हँसा, “निशा, तू बदल गई है। पहले तो तू चुपचाप पड़ी रहती थी।”
मेरा दिल धक-धक करने लगा।
“कैसे बदल गई?” मैंने पूछा।
“जैसे किसी ने तुझे सिखा दिया हो,” उसने कहा और मेरी तरफ देखने लगा, “और तेरी चूत भी थोड़ी… अलग लग रही है।”
मैंने कुछ नहीं कहा। बस मुस्कुराकर उसके सीने पर सिर रख दिया। करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
रोहित का आना
अगले दिन सुरेश ने कहा, “रोहित को बुला ले, वो भी मिल ले। महीने भर से मिला नहीं।”
मेरी साँस रुक गई।
“हाँ… बुला लेते हैं,” मैंने बहुत सामान्य आवाज़ में कहा।
शाम को रोहित आया। दरवाज़े पर खड़ा—काली टीशर्ट, जींस, और वही उलझे बाल। उसने सुरेश से गले लगाया, फिर मेरी तरफ देखा। करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
बस एक सेकंड।
पर उस एक सेकंड में सब कुछ कह दिया गया।
“भाभी,” उसने नमस्ते की।
“आ जा रोहित,” मैंने कहा, “हाथ-मुँह धो ले।”
हम तीनों ने खाना खाया। सुरेश बीयर ले आया था। रोहित ने भी पी। मैंने सिर्फ एक घूँट ली—मुझे हल्की होशियारी चाहिए थी।
सुरेश खाने के बाद ज़ोर-ज़ोर से जम्हाई लेने लगा। फ्लाइट का जेटलैग।
“मैं सोने जा रहा हूँ निशा,” वो उठा, “तुम दोनों बैठो।”
फिर वो रुका और एक पल मेरी तरफ, फिर रोहित की तरफ देखा। मुस्कुराया।
“वैसे रोहित,” उसने कहा, “तेरी भाभी की खबर लेते रहना। अकेली रहती है।”
और वो अंदर चला गया।
दो मिनट
सुरेश के जाते ही कमरे में खामोशी छा गई। रोहित अपनी बियर के गिलास को घुमा रहा था।
“भाभी,” उसने धीरे से कहा, “भैया को पता है क्या?”
“नहीं,” मैंने कहा।
“तो बताना चाहिए?”
“अभी नहीं,” मैंने कहा और उठकर बर्तन उठाने लगी।
रोहित भी उठा। हम दोनों साथ-साथ रसोई में आ गए। वो मेरे बहुत पास था। इतना पास कि उसकी बाँह मेरी बाँह को छू रही थी।
“भाभी,” उसने फुसफुसाया, “आज रात…?”
“सुरेश सो रहा है,” मैंने कहा।
“तो?”
“तो कुछ नहीं,” मैंने कहा और प्लेट रखने के लिए झुकी।
और तभी रोहित ने मेरी कमर पकड़ ली।
बस दो मिनट। दो मिनट में उसने मेरी गर्दन पर होंठ रख दिए। मेरी साड़ी का पल्लू उसने कंधे से खिसका दिया और मेरे कंधे को चूमने लगा।
“आह्ह रोहित… सुरेश…”
“सो गया,” उसने कहा और मेरे कान को हल्का काट लिया।
और तभी पीछे से आवाज़ आई।
“हम्म! तो ये बात है।”
हम दोनों झटके से अलग हुए।
सुरेश दरवाज़े पर खड़ा था—हाथ बाँधे, मुँह पर बड़ी सी मुस्कान। वो सोया नहीं था। वो हमें देख रहा था।
मेरा चेहरा लाल हो गया।
सच
“सुरेश, वो…” मैंने शुरू किया।
“रुक,” सुरेश ने हाथ उठाया, “पहले ये बता—कब से?”
मैं चुप रही।
रोहित ने हिम्मत करके कहा, “भैया, होली से।”
“होली से?” सुरेश हँसा, “यानी छह महीने से?”
“हाँ,” रोहित ने सिर झुकाया, “भैया, गलती मेरी है। भाभी को अकेला देखा और…”
“गलती?” सुरेश ने कहा, “रोहित, ये तो किस्मत है।”करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
हम दोनों ने उसकी तरफ देखा।
सुरेश मेरे पास आया और मेरा चेहरा दोनों हाथों में लेकर ऊपर उठाया।
“निशा, सच बता—रोहित तुझे अच्छा लगता है?”
मैंने हाँ में सिर हिलाया।
“उससे मज़ा आता है?”
मैंने फिर सिर हिलाया।
“और तुझे, रोहित? भाभी पसंद है?”
“भैया, पसंद से ज़्यादा…” रोहित ने काँपती आवाज़ में कहा, “पूजा करता हूँ।”
सुरेश कुछ देर चुप रहा। फिर उसने बड़ी शांत आवाज़ में वो कहा जो मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी। करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
“तो आज बँटवारा कर लेते हैं।”
“मतलब?” मैंने पूछा।
“मतलब,” सुरेश ने मेरी कमर पकड़ी और रोहित की तरफ देखा, “आज तू अकेली दो जनों की रानी है।” करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
तीन जन
बेडरूम की लाइट धीमी कर दी गई। करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
सुरेश ने मुझे बीच में खड़ा किया। वो मेरे पीछे, रोहित मेरे सामने।
“साड़ी उतारने में दोनों मदद करेंगे,” सुरेश ने कहा।
रोहित ने मेरे कंधे से पल्लू खींचा और सुरेश ने मेरी कमर का नाड़ा खोला। साड़ी फर्श पर गिर गई। अब ब्लाउज़ और पेटीकोट।
फिर रोहित ने मेरे ब्लाउज़ के हुक खोले—एक-एक करके, बहुत धीरे, जैसे कोई तोहफा खोल रहा हो। मेरे दूध बाहर निकले।
सुरेश पीछे से मेरी गर्दन चूम रहा था और उसकी उँगलियाँ मेरी पीठ पर बह रही थीं। रोहित सामने से झुका और मेरे दूध मुँह में भर लिए। करवाचौथ पे चुदी मेरी बीवी देवर से
दो मुँह। दो जगह।
“आह्ह्ह…” मेरी आँखें बंद हो गईं।
एक दूध सुरेश के हाथ में और दूसरा रोहित के मुँह में। दोनों बारी-बारी से चूस रहे थे, जैसे शर्त लगी हो कि पहले कौन खत्म करेगा।
“निशा, तू कितनी खुशकिस्मत है,” सुरेश ने मेरे कान में कहा, “दो मर्द एक बिस्तर पर।”
“और तुम दोनों?” मैंने हाँफते हुए कहा।
“हम भी,” रोहित ने मुँह भरकर कहा।
सुरेश ने मेरी पेटीकोट और पैंटी एक साथ नीचे खींची। मैं पूरी नंगी हो गई। दोनों ने कपड़े उतारे।
मेरे सामने दो लंड खड़े थे। सुरेश का—मोटा, थोड़ा गहरा, और रोहित का—लंबा, सख्त, नसें तनी हुईं।
मैंने दोनों को एक-एक हाथ में लिया और दोनों को सहलाने लगी।
“आज तो दोनों पूरे होंगे,” मैंने कहा।
चूसना — दोनों को
सुरेश ने मुझे पलंग के किनारे बैठाया और अपना लंड मेरे मुँह के सामने कर दिया। रोहित मेरे पीछे खड़ा होकर मेरे दूध दबाने लगा।
मैंने सुरेश का लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। ऊपर से नीचे, गहरा तक। मेरी जीभ उसके सुपाड़े को घेर रही थी।
पीछे से रोहित ने मेरी गर्दन पर चूमा और धीरे से मेरी गांड पर हाथ रखा। उसकी उँगली मेरी बुर के मुहाने तक गई—और वो पहले से पूरी भीगी थी।
“भाभी, तो तैयार हो,” रोहित ने कहा और उँगली अंदर डाल दी।
अब एक ही वक्त में मेरे मुँह में सुरेश का लंड और बुर में रोहित की उँगलियाँ थीं। मैं कराह रही थी, पर मुँह भरा होने से आवाज़ गले में ही दब रही थी।
सुरेश ने मेरे बाल पकड़कर धीरे-धीरे आगे-पीछे किया। “निशा, तू चूसने में भी माहिर हो गई है,” उसने कहा।
“रोहित ने सिखाया,” रोहित ने मुस्कुराकर कहा।
“बेशर्म,” सुरेश हँसा।
फिर हमने जगह बदली। अब रोहित पलंग पर बैठा और सुरेश पीछे खड़ा। मैंने रोहित का लंबा लंड मुँह में लिया और सुरेश ने पीछे से मेरी गांड उठाकर चूमनी शुरू की।
उसकी जीभ सीधे मेरी बुर पर पड़ी और मेरी कमर झटके से उठ गई।
“आह्ह्ह सुरेश… वहीं…”
“वहीं क्या? यहाँ?” उसने और गहरा जीभ घुसाई।
मैं मुँह भरकर रोहित का लंड चूस रही थी और पीछे से सुरेश मेरी बुर चाट रहा था। दोनों तरफ से मज़ा और बीच में मैं—पागल हो रही थी।
सैंडविच
“अब असली खेल,” सुरेश ने कहा।
उसने मुझे पलंग पर घुटनों के बल बिठाया। पीछे से खुद आया और अपना लंड मेरी बुर में डाल दिया। सामने रोहित आकर खड़ा हो गया और अपना लंड मेरे मुँह के सामने कर दिया।
अब मैं सैंडविच में थी।
पीछे से सुरेश धक्के मार रहा था और सामने से रोहित मेरा मुँह चोद रहा था। हर धक्के के साथ मेरी देह आगे-पीछे झूल रही थी—जैसे मेरा शरीर दोनों के बीच एक झूले की तरह।
फच्च… फच्च… फच्च…
सुरेश की जाँघें मेरी गांड से टकरा रही थीं और रोहित का लंड मेरे गले को छू रहा था।
“निशा, कैसा लग रहा है?” सुरेश ने हाँफते हुए पूछा।
“आह्ह… दोनों… दोनों मज़ा दे रहे हो…” मैंने मुँह से लंड निकालकर कहा और फिर भर लिया।
रोहित ने मेरे बाल पकड़े और धीरे-धीरे मेरा सिर आगे-पीछे करने लगा। सुरेश ने मेरे दूध पकड़े और पीछे से खींचकर दबाने लगा।
मेरी बुर से पानी टपक रहा था और सुरेश के लंड पर लगातार “चप-चप” की आवाज़ आ रही थी।
“भाभी, तुम्हारी बुर आज कमाल कर रही है,” सुरेश ने कहा।
“भैया, हमेशा करती है,” रोहित ने कहा।
“तू तो जानता ही है,” सुरेश हँसा।
दोनों एक साथ
कुछ देर बाद सुरेश ने कहा, “रोहित, तेरी बारी।”
वो पीछे हटा और रोहित ने मुझे पलंग पर लिटाया। मेरी टाँगें फैलाईं और सीधे अंदर घुस गया।
उसका लंबा लंड मेरी कोख तक पहुँच रहा था। मैं चीख पड़ी।
“आह्ह्ह रोहित… सुरेश के सामने…”
“तो क्या हुआ भाभी, भैया तो जानते हैं,” रोहित ने कहा और तेज़ धक्के मारने लगा।
सुरेश बगल में बैठकर हमें देख रहा था और अपना लंड सहला रहा था। उसकी नज़र मेरी बुर पर थी—जहाँ रोहित का लंड अंदर-बाहर हो रहा था।
“रोहित, तू तो पूरा नाम निकाल रहा है,” सुरेश ने कहा।
“भैया, आपकी भाभी है, आप ही की सेवा कर रहा हूँ,” रोहित ने कहा।
सुरेश हँसा और फिर मेरे सिर की तरफ आ गया। उसने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया।
अब रोहित मेरी बुर चोद रहा था और सुरेश मेरा मुँह। दोनों की लय अलग थी—रोहित तेज़ और गहरा, सुरेश धीमा और लंबा।
मैं दोनों के बीच में पिघल रही थी।
“आह्ह… आह्ह…” मेरी आवाज़ दबी हुई थी।
रोहित ने मेरी टाँगें कंधों पर रख दीं और पूरी ताकत से धक्के मारने लगा। मेरे दूध उछलने लगे और सुरेश ने उन्हें हाथों में भर लिया।
फिर सुरेश ने मेरे निपल पर मुँह रखा और चूसने लगा।
अब तीन जगह। मुँह, बुर, दूध। तीनों पर एक ही वक्त।
“निशा, आज तू दो जनों की रानी है,” सुरेश ने कहा।
“और दोनों की जान,” रोहित ने कहा।
ऊपर वाली — दोनों के साथ
मैंने उन्हें रोका। “अब मेरी मर्ज़ी,” मैंने कहा।
सुरेश पलंग पर लेट गया और मैं उसके ऊपर बैठ गई। उसका लंड अंदर लेकर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। रोहित पीछे आया और खड़े-खड़े मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा।
फिर उसने अपना लंड मेरी गांड की दरार पर रखा और धीरे से दबाने लगा।
“आह्ह्ह रोहित… दोनों जगह?” मैं कराही।
“कोशिश करते हैं भाभी,” उसने कहा और लार लगाकर धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा।
शुरू में जलन हुई, फिर एक झटका और वो अंदर गया।
अब मेरे अंदर दो लंड थे। नीचे सुरेश का और पीछे रोहित का—सिर्फ एक पतली दीवार हमारे बीच।
मैं चीख पड़ी।
“हे भगवान… दोनों… दोनों अंदर हैं…”
सुरेश हँसा, “अब तो हम दोनों एक-दूसरे को भी महसूस कर सकते हैं।”
दोनों ने लय बनाई। जब सुरेश अंदर जाता, रोहित बाहर निकलता। जब रोहित अंदर, सुरेश बाहर। जैसे कोई मशीन।
फच्च-फच्च-फच्च-फच्च…
कमरे में चार शरीरों की आवाज़ थी। मेरी चीखें, दोनों की साँसें, और चुदाई की थप-थप।
मेरा शरीर काँपने लगा। कुछ ही पलों में मैं पहली बार झड़ गई—दोनों के बीच फँसी हुई, दोनों के लंड अंदर।
“आह्ह्ह्ह्ह…” मेरी आँखें पलट गईं और मेरी बुर ने दोनों को कसकर पकड़ लिया।
अंत
मेरे झड़ने के बाद भी दोनों रुके नहीं।
“निशा, हम भी आ रहे हैं,” सुरेश ने दाँत भींचकर कहा।
“कहाँ?” मैंने हाँफते हुए पूछा।
“जहाँ तू कहे,” सुरेश ने कहा।
“सुरेश, तू अंदर,” मैंने कहा और पीछे मुड़कर रोहित को देखा, “और तू भी अंदर।”
दोनों ने आखिरी धक्के मारे।
सुरेश पहले झड़ा—गरम पानी की धार मेरी दीवारों से टकराई। दो सेकंड बाद रोहित भी झड़ा और उसका पानी मेरी गांड में भर गया।
दोनों काँपते रहे। मैं तीनों के बीच फँसी थी—न हिल सकती थी, न बोल सकती थी।
फिर हम अलग हुए और पसीने से लथपथ पलंग पर गिर पड़े। मेरी जाँघों से पानी रिस रहा था।
कुछ देर सिर्फ साँसों की आवाज़ आती रही।
फिर सुरेश हँसा।
“निशा,” उसने कहा, “अब लगता है मुझे दुबई जाने में कोई तकलीफ नहीं होगी।”
“क्यों?” मैंने पूछा।
“क्योंकि अब तेरा ख्याल रखने वाला घर में है,” उसने रोहित की तरफ देखा, “है ना रोहित?”
रोहित ने हाँ में सिर हिलाया और मेरा हाथ पकड़ लिया।
“भैया,” उसने कहा, “आप जब भी जाइए, भाभी को अकेला नहीं रहने दूँगा।”
“और तू जब नहीं होगा,” सुरेश ने मेरी तरफ देखा, “तो ये तेरे पास रहेगी।”
उस रात के बाद हमारे रिश्ते में एक नया नियम जुड़ गया।
सुरेश जब घर पर होते हैं—तीनों साथ। सुरेश जब बाहर होते हैं—मैं और रोहित।
और सुरेश जब लौटते हैं, तो पहली रात हमेशा तीनों की होती है।
अब मैं संस्कारी भी हूँ और रानी भी। एक पति, एक देवर, और बीच में मैं।
और मुझे इसका ज़रा भी पछतावा नहीं है।
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