संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
मेरा नाम निशा है। मैं 28 साल की शादीशुदा औरत हूँ। मेरे पति सुरेश दुबई में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सुपरवाइज़र हैं और साल में सिर्फ दो बार घर आते हैं। हमारी शादी को चार साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
हमारा घर कस्बे के बाहर एक पुरानी कोठी में है। सास-ससुर शहर में रहते हैं, तो यहाँ मैं अकेली ही रहती हूँ। मेरा कद 5 फीट 5 इंच और नाप 36-26-38 है। सुरेश फोन पर हमेशा कहते हैं, “निशा, तू तो औरतों की रानी है। तेरे जैसा बदन किसी-किसी को मिलता है।” लेकिन रानी अकेली रहकर क्या करे?
पिछले साल की बात है। होली आने वाली थी और बाज़ार में रंगों की दुकानें सज गई थीं।
सुरेश ने फोन किया, “निशा, इस बार भी होली पर नहीं आ पाऊँगा। क्लाइंट मीटिंग है।”
“अकेले कैसे खेलूँ होली? रंग किस पर डालूँ?” मैंने उदास होकर कहा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
सुरेश हँसा, “रोहित को बुला ले। वो आएगा तो तेरा मन लगा रहेगा। और वैसे भी देवर-भाभी का रिश्ता होता ही है रंग खेलने का।”
रोहित! सुरेश का छोटा भाई। मेरा देवर। 24 साल का जवान लड़का। हरियाणा में जिम चलाता है और उसका बदन बिल्कुल पहलवान जैसा है। हमारी शादी के वक्त वो बीस साल का था, तब भी सुंदर था। अब तो पूरा मर्द बन गया है।
होली से एक दिन पहले रोहित आ गया। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
दरवाज़े पर खड़ा था—फिटेड टीशर्ट, जींस, और बालों में उलझी एक लट। उसकी बाँहें देखकर मेरी नज़र वहीं अटक गई।
“भाभी! कैसी हो?” उसने गले लगकर कहा।
गले लगते वक्त उसकी छाती मेरे दूधों से टकराई। दो सेकंड का स्पर्श, पर मेरी पूरी देह में झुरझुरी दौड़ गई।
“अच्छी हूँ रोहित। तू आ गया, अच्छा किया। अंदर आ।”
रात को हमने खाना खाया। रोहित बार-बार मेरी तरफ देख रहा था। मैंने उस दिन पहनी थी सफेद सूती सलवार—पतली सी, जिसमें मेरे दूधों की बनावट साफ झलक रही थी। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
“भाभी, तुम तो और भी निखर गई हो,” रोहित ने कहा, “भैया कितने लकी हैं।”
“लकी तो हैं, पर हमेशा दूर रहते हैं,” मैंने कहा और कुछ ज़्यादा ही देर तक उसकी आँखों में देखती रही।
होली का दिन
अगली सुबह आँगन में रंगों की टोकरियाँ सज गईं। रोहित ने सुबह ही पानी से भरी बाल्टियाँ भर दीं। मैंने पहना था एक पुरानी सफेद साड़ी और उसके नीचे गहरे रंग का ब्लाउज़—जिसका गला बहुत गहरा था। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
रोहित ने मुझे देखते ही सीटी बजाई, “भाभी, आज तो तुम रंग भी खेलो और रंग भी डालो।”
“चल, पहले तेरे मुँह पर गुलाल लगाऊँ,” मैंने कहा और अपनी हथेली भर लाल गुलाल लेकर उसके गालों पर मल दी।
रोहित ने भी मुट्ठी भर गुलाल उठाया और मेरे चेहरे से लेकर गर्दन तक मल दिया। फिर उसकी उँगलियाँ मेरे कॉलरबोन से थोड़ा नीचे खिसक गईं—सीधे मेरे दूधों की तरफ।
“हो गया ठीक?” उसने पूछा, पर हाथ वहीं रुका रहा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
“अभी तो पूरा खेल बाकी है,” मैंने कहा और पानी की बाल्टी उठाकर उस पर उलीच दी।
रोहित भीग गया। उसकी सफेद टीशर्ट पूरी देह से चिपक गई और उसकी मसल्स उभर आईं। वो भी बाल्टी उठाकर मेरी तरफ बढ़ा।
“अच्छा? अब देख तेरी भाभी को।”
ठंडे पानी का झोंका मेरे सिर से पैर तक गया। मेरी सफेद साड़ी पूरी भीग गई। भीगी साड़ी मेरे बदन से चिपक गई—दूधों की बनावट, पेट की गोलाई, सब कुछ साफ नज़र आ रहा था। मेरे निपल ठंडे पानी से सख्त हो गए और गहरे ब्लाउज़ से उनका उभार साफ दिखने लगा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
रोहित की नज़र वहीं अटक गई। वो घूरता रह गया।
“भाभी… तुम्हारी साड़ी…” उसने धीरे से कहा।
“भीग गई,” मैंने मुस्कुराकर कहा, “अब क्या करूँ?”
“ऐसे ही रहने दो,” उसने कहा, “अच्छी लग रही हो।”
हम कुछ देर आँगन में खेलते रहे। गुलाल से पूरे हो गए। फिर प्यास लगी तो मैंने ठंडाई बनाई—साथ में थोड़ा भांग का पाउडर भी डाल दिया, जैसे होली पर होता है। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
दो गिलास पीकर हम कमरे में बैठ गए। शरीर में हल्की गर्मी, आँखों में हल्का नशा, और बाहर दोपहर की तेज़ धूप।
रोहित दीवार से टिका बैठा था। उसकी भीगी टीशर्ट अब भी देह से चिपकी थी। मैं उसके सामने पलंग पर बैठी थी, भीगी साड़ी से टपकता पानी फर्श पर गिर रहा था।
“भाभी,” रोहित ने नज़रें नीची करके कहा, “पूछूँ एक बात?”
“पूछ।”
“भैया चार महीने से नहीं आए। तुम अकेली… तुम्हें बुरा नहीं लगता?”
“बुरा लगता है,” मैंने कहा, “पर क्या करूँ? इंतज़ार ही कर सकती हूँ।”
रोहित कुछ देर चुप रहा। फिर बोला, “भाभी, सच बताऊँ? मैं तुम्हें पहले भी देखता था… पर आज…”
“आज क्या?”
“आज तुम्हें इस भीगी साड़ी में देखकर मेरा दिमाग खराब हो रहा है।”
मेरे अंदर कुछ पिघल गया। मैंने हाथ बढ़ाकर उसकी भीगी टीशर्ट के कॉलर को पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
“तो इलाज कर दे,” मैंने फुसफुसाकर कहा।
पहला स्पर्श
रोहित ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने सीने से लगा लिया। उसकी गर्म छाती मेरे दूधों से सटी तो मेरी साँस भारी हो गई। भीगी साड़ी की दो परतें हमारे बीच बेमतलब बन गईं।
उसने मेरी ठुड्डी उठाई और सीधे होंठों पर हमला कर दिया।
वो चुंबन प्यासा था, भूखा था। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुसी और मेरी जीभ को चूसने लगी। मैंने भी उसके बालों में उँगलियाँ फँसा दीं और उसे और कसकर खींच लिया।
“आह्ह… रोहित…” मैं उसके होंठों में ही कराही।
उसने मेरी गर्दन पर चूमना शुरू किया—कान के नीचे, जहाँ सबसे ज़्यादा गुदगुदी होती है। उसकी जीभ मेरे गले से नीचे बहती गई और फिर उसके हाथ मेरी पीठ पर गए। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
उसने साड़ी का पल्लू खींचा। साड़ी धीरे-धीरे मेरे बदन से सरककर फर्श पर गिर गई। अब बस ब्लाउज़ और पेटीकोट बचा था।
रोहित ने एक कदम पीछे हटकर मुझे निहारा। भीगा शरीर, चिपका ब्लाउज़, गुलाल के लाल निशान, खुले बाल, और आँखों में नशा।
“भाभी,” उसने काँपती आवाज़ में कहा, “तुम तो किसी देवी जैसी लग रही हो।”
“तो देवी को गले लगा,” मैंने कहा।
उसने मेरा ब्लाउज़ खोला। हुक एक-एक करके खुले और मेरे मोटे दूध ब्रा से बाहर उछल आए। वो उन्हें देखकर पल भर के लिए रुक गया, जैसे किसी मंदिर में पहुँच गया हो। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
फिर उसने ब्रा भी खींचकर उतार दी।
“ओह्ह भाभी… इतने मोटे,” उसने धीरे से कहा और दोनों हाथों में मेरे दूध भर लिए।
उसका मुँह सीधे दाएँ निपल पर पड़ा। वो पूरी भूख से चूसने लगा—जोर-जोर से, जैसे बच्चा भूखा हो। उसके दाँत निपल पर हल्के से काटते और उसकी जीभ गोल-गोल घूमती।
“आह्ह… रोहित… धीरे… निपल फट जाएगा…” मैं चीखी।
पर वो रुका नहीं। उसने दूसरा दूध भी मुँह में भर लिया और दोनों को बारी-बारी से चूसने लगा। मेरे निपल सख्त होकर कड़े हो गए और मेरी बुर के अंदर ऐसी गर्मी उठी कि पेटीकोट भीगने लगा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
“कितने स्वादिष्ट हैं भाभी,” रोहित ने मुँह भरकर कहा, “भैया को पता भी है कि वो क्या छोड़कर गए हैं?”
नीचे का सफ़र
फिर उसने मुझे पलंग पर लिटा दिया। उसकी उँगलियाँ मेरी नाभि से नीचे सरकीं और पेटीकोट के नाड़े खोल दिए।
मेरी पैंटी अब तक पूरी भीग चुकी थी—बाहर से पानी से और अंदर से अपने आप। रोहित ने पैंटी धीरे से खींची और मेरी टाँगों के बीच से उतार दी।
अब मैं पूरी नंगी थी। हवा ने मेरी बुर को छुआ तो मैं सिहर उठी।
रोहित मेरी टाँगों के बीच बैठ गया और मेरी बुर को घूरने लगा, जैसे पहली बार देख रहा हो।
“भाभी… साफ है, गुलाबी है,” उसने कहा।
“अब चाट भी ले,” मैंने कहा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
उसने अपनी जीभ मेरी बुर के मुहाने पर रखी। पहला स्पर्श—और मेरी कमर अपने आप उठ गई।
“आह्ह्ह… रोहित…”
वो धीरे-धीरे चाटने लगा। ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर। फिर उसकी जीभ अंदर घुसने लगी। अंदर-बाहर, अंदर-बाहर। उसकी नाक मेरे बालों में गड़ी थी और उसकी जीभ मेरी दीवारों को चाट रही थी।
“आह्ह… और अंदर… जीभ घुसाओ ना…” मैं कराह रही थी और उसके बाल पकड़कर उसका मुँह अपनी बुर पर दबा रही थी।
रोहित ने मेरी क्लिटोरिस पकड़ी और होंठों में भरकर चूसने लगा। ऊपर से उसकी जीभ और नीचे से उसकी उँगली, दोनों एक साथ चल रहे थे। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
मेरी बुर से रस बहने लगा और वो सब चाटता रहा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
“झड़ने वाली हूँ…” मैं चीखी।
“तो झड़ जाओ भाभी, मेरे मुँह में,” उसने कहा और और तेज़ी से चाटने लगा।
कुछ ही पलों में मेरी कमर थरथरा उठी और मैं उसके मुँह में झड़ गई। उसने एक बूँद भी नहीं छोड़ी, सब चाट लिया। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
अब मेरी बारी
“अब खड़ा हो,” मैंने हाँफते हुए कहा, “मेरी बारी।”
रोहित खड़ा हुआ और अपनी भीगी टीशर्ट उतार दी। उसका सीना, पेट की मसल्स—सब सामने था। फिर उसने जींस खोली और नीचे खींच दी।
उसका लंड बॉक्सर से बाहर निकला—मोटा, सख्त, गहरे रंग का, और लंबा। करीब 9 इंच। मैंने देखते ही होंठ भर लिए। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
“हे भगवान… इतना बड़ा?” मैंने कहा।
“भाभी, तुम्हारे लिए ही बना है,” वो मुस्कुराया।
मैंने उसे पलंग पर बिठाया और घुटनों के बल उसके सामने बैठ गई। उसका लंड अपने हाथ में लिया—गरम, सख्त, नसें तनी हुईं। उसका सुपाड़ा चमक रहा था।
मैंने जीभ से उसके सुपाड़े को चाटा, चारों तरफ घुमाया। रोहित की साँस भारी हो गई।
“आह्ह भाभी…”
फिर मैंने उसे मुँह में ले लिया।
“उम्म्म…” वो कराह उठा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
मैं धीरे-धीरे उसे अंदर-बाहर करने लगी। हर बार जब वो अंदर जाता, उसका सुपाड़ा मेरे गले को छू जाता। मैं जीभ से उसके लंड को लपेटती और चूसती रही।
“भाभी… बहुत मस्त चूस रही हो… भैया की किस्मत अच्छी है…” रोहित हाँफ रहा था।
उसने मेरे बालों में हाथ डालकर मेरा सिर पकड़ा और धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा। अब वो लय मैंने नहीं, उसने बनाई थी—गहरी, तेज़, बेरहम।
लार मेरी ठुड्डी से टपक रही थी और उसका लंड चमक रहा था। मैं बीच-बीच में रुककर उसके बॉल्स भी चूसती थी।
“अब और नहीं,” रोहित ने काँपते हुए कहा, “वरना मुँह में ही झड़ जाऊँगा। अंदर जाना है।”
चुदाई — पहला राउंड
रोहित ने मुझे पलंग पर लिटाया। मेरी दोनों टाँगें फैलाकर उन्हें अपनी कमर पर लपेट लिया। फिर उसने अपने मोटे लंड का सुपाड़ा मेरी बुर के मुहाने पर रखा और रगड़ने लगा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
“भाभी, आज तुम्हारा सब्र तोड़ दूँगा,” उसने कहा।
“हाँ रोहित… आज मुझे अपनी बना ले। सुरेश की जगह तू ले ले,” मैंने कहा।
उसने एक जोरदार धक्का मारा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
उसका लंड मेरी बुर में घुसा और मैं चीख पड़ी। वो इतना मोटा था कि मेरी दीवारें फैल गईं।
“आह्ह्ह… धीरे… फट जाऊँगी…” मैंने कराहते हुए कहा।
“भाभी, चार साल से तुम सिर्फ भैया के लिए फैली थी। आज मेरा नाप भी ले लो,” उसने कहा और धीरे-धीरे धक्के मारने लगा।
पहले तो हर धक्का दर्द भरा था। पर जैसे-जैसे मेरी बुर उसके लंड की आदी हुई, दर्द की जगह गज़ब का सुख लेने लगा।
फच्च… फच्च… फच्च…
कमरे में सिर्फ यही आवाज़ गूँज रही थी। मेरी बुर उसके हर धक्के पर पानी छोड़ रही थी और “चप-चप” की आवाज़ भी आ रही थी। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
“आह्ह… और चोदो… ज़ोर से… मेरी बुर फाड़ डालो…” मैं चीख रही थी।
रोहित अब तेज़ हो गया। उसने मेरी टाँगें और ऊपर कर दीं—इतनी ऊपर कि मेरी बुर पूरी खुल गई और उसका लंड सीधे गर्भद्वार तक पहुँचने लगा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
मेरे मोटे दूध उसके हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे। रोहित झुककर उन्हें मुँह में भर लेता, चूसता, फिर धक्के मारता।
“भाभी, तुम्हारी बुर कितनी गरम है… जैसे आग,” वो हाँफ रहा था।
“तेरे लिए ही गरम है,” मैंने उसकी गर्दन पकड़कर उसे चूम लिया।
हम चूमते हुए चुदाई कर रहे थे। उसकी जीभ मेरे मुँह में और उसका लंड मेरी बुर में—दोनों जगह एक ही लय।
दूसरा राउंड — कुत्ते वाली पोज़ीशन
कुछ देर बाद रोहित रुका। उसने मुझे करवट दिलाई और घुटनों के बल बिठाया।
“अब गांड उठाओ भाभी,” उसने कहा और मेरी कमर पकड़कर नीचे दबा दिया।
मैंने अपनी गांड ऊपर उठाई और चेहरा तकिये में छिपा दिया। इस पोज़ीशन में बुर पूरी खुल जाती है और मैं जानती थी कि अब उसका लंड और गहरा जाएगा।
रोहित ने पीछे से अपना लंड रखा और एक ही झटके में अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह रोहित…!” मैंने तकिये में चीखा।
“इस बार भाभी, तुम्हारी बुर से बात करूँगा,” उसने कहा और धक्के मारने लगा।
अबकी बार धक्के लंबे थे और गहरे। हर धक्का मेरी कोख तक पहुँच रहा था। उसकी जाँघें मेरी गांड से टकरा रही थीं।
थप्प… थप्प… थप्प…
उसने एक हाथ मेरी गांड पर रखा और फिर ज़ोरदार चांटा मार दिया।
“आह्ह… और मारो…” मैं चीखी।
रोहित ने बारी-बारी से मेरी दोनों गालों पर चांटे मारे। मेरी गांड लाल हो गई, पर दर्द में भी मज़ा था। वो चांटा मारता और फिर वहीं चूम लेता।
फिर उसने मेरे दूध पकड़े और पीछे से खींचकर दबाने लगा। अब मेरी पूरी कमर झुकी थी और गांड उसके लंड पर टिकी थी।
“भाभी, इस पोज़ में तो तुम औरत नहीं, आग लग रही हो,” वो हाँफा।
“तो आग बुझा,” मैंने कहा।
वो तेज़ हो गया। हर धक्के के साथ “फच्च-फच्च-फच्च” की आवाज़ और मेरी चीखें मिलकर एक आवाज़ बन गईं। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
तीसरा राउंड — ऊपर वाली
मैंने उसे पलंग पर लिटाया और खुद उसके ऊपर बैठ गई।
“अब मेरी बारी चोदने की,” मैंने कहा।
उसका लंड खड़ा था, चमक रहा था, मेरे रस से भीगा हुआ। मैंने उसे पकड़ा और अपनी बुर के मुहाने पर रखकर धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी।
एक इंच… दो इंच… और फिर पूरा अंदर।
“ओह्ह्ह…” दोनों ने एक साथ कराहा।
अब मैं उसके ऊपर थी। उसका लंड पूरी तरह मेरे अंदर था और मेरे दूध उसके मुँह के सामने झूल रहे थे।
मैंने कमर घुमानी शुरू की—गोल-गोल, फिर ऊपर-नीचे। हर बार जब मैं नीचे बैठती, उसका सुपाड़ा मेरी गर्भद्वार को छूता और मेरी आँखें पलट जातीं।
रोहित ने मेरी कमर पकड़कर मुझे अपने ऊपर और कसकर दबा दिया और नीचे से धक्के मारने लगा।
“आह्ह… रोहित… इस पोज़ में और गहरा…” मैं कराह रही थी और उसके सीने पर झुककर उसे चूम रही थी।
उसने मेरे दोनों दूध हाथों में भरे और चूसने लगा। मैं ऊपर-नीचे हो रही थी, वो नीचे से धक्के मार रहा था—हम दोनों एक ही लय में।
“भाभी… तुम्हारी कमर… कमाल है,” वो हाँफा।
“तेरी कमर भी,” मैंने उसकी नाभि पर चूमते हुए कहा।
चौथा राउंड — चम्मच वाली और 69
थकान हो रही थी, पर नशा कम नहीं हो रहा था। रोहित ने मुझे करवट लिटाया और मेरे पीछे लेट गया। एक टाँग उठाकर उसने लंड डाल दिया।
ये पोज़ीशन बहुत गहरी थी और बहुत अपनेपन वाली। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
वो मेरी गर्दन पर चूमता, मेरे दूध दबाता और धीरे-धीरे धक्के मारता। उसकी साँसें मेरे कान में गरम हवा छोड़ रही थीं।
“भाभी, ऐसे लगता है जैसे हम दोनों एक ही शरीर हैं,” उसने फुसफुसाया। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
“ऐसे ही लगता है,” मैंने आँखें बंद करके कहा।
फिर हम 69 में आए। मैं नीचे लेटी और रोहित मेरे ऊपर उल्टा बैठ गया। उसका लंड मेरे मुँह के सामने और मेरी बुर उसके मुँह के सामने।
मैंने उसका लंड मुँह में भर लिया और वो मेरी बुर चाटने लगा। दोनों एक-दूसरे को भूख से चूस रहे थे।
“उम्म्म… भाभी… क्या चूसती हो…” वो मेरी बुर में मुँह भरकर बोला।
“आपकी बुर भी कम नहीं,” मैंने उसके लंड को मुँह से निकालकर कहा और फिर भर लिया।
अंत — अंदर ही झड़ना
आखिर में रोहित ने मुझे साइड में लिटाया। हम आमने-सामने थे। उसने मेरी एक टाँग उठाई और लंड अंदर डाल दिया। हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
अब कोई जल्दी नहीं थी। धीरे-धीरे, गहरे धक्के।
“निशा,” उसने पहली बार नाम लेकर पुकारा, “आज बहुत मज़ा आया।”
“मुझे भी,” मैंने कहा, “अब आ जाओ।”
“कहाँ?”
“अंदर ही। आज पूरा अंदर।”
रोहित की आँखें चमक उठीं। उसने मेरी कमर पकड़ी और तेज़ धक्के मारने लगा।
फच्च-फच्च-फच्च-फच्च…
“आह्ह… रोहित… और… और…” मैं चीख रही थी और मेरी टाँगें उसकी कमर पर कस रही थीं।
“निशा… झड़ रहा हूँ…” वो दाँत भींचकर बोला।
उसने आखिरी धक्का मारा और मेरी बुर में अपना पूरा पानी छोड़ दिया। गरम पानी की धार मेरी दीवारों से टकराई और मैं भी उसके साथ झड़ गई। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
हम दोनों काँपते रहे। उसका लंड अंदर ही था और मेरी बुर उसे कसकर पकड़े हुए थी।
फिर हम अलग हुए और थके हुए एक-दूसरे से लिपट गए। उसका पानी मेरी जाँघों से रिस रहा था। बाहर शाम ढल रही थी और रंगों की खुशबू अब भी कमरे में थी।
“आज तुमने मेरी होली पूरी कर दी,” मैंने उसके सीने पर सिर रखकर कहा।
“और भाभी, तुमने मेरी जवानी,” रोहित ने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
उसके बाद
उस होली के बाद से सब कुछ बदल गया।
जब भी सुरेश बाहर होते हैं, रोहित किसी न किसी बहाने आ जाता है—कभी “भाभी, दूध लेने आया था”, कभी “भाभी, बल्ब बदलना है”, कभी “भाभी, जिम बंद था तो यहीं ट्रेनिंग कर लूँ।”
और हर बार वो दूध, बल्ब और ट्रेनिंग सब पूरी हो जाती है। संस्कारी भाभी और देवर की चुदाई
अब हमारे कई ठिकाने बन गए हैं—रसोई की मेज़, बाथरूम की दीवार, बरामदे की झूला, और कभी-कभी तो सोफे पर बैठे-बैठे ही।
सुरेश जब आते हैं, तो मैं पूरी पत्नी बन जाती हूँ। पर सुरेश के जाने के बाद का पहला दिन अब मेरा सबसे पसंदीदा दिन है।
मैं संस्कारी हूँ, ये सच है। पर सच ये भी है कि संस्कारी औरतें भी जवानी में एक बार जीना चाहती हैं।
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