करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
भाग 1
पहला अध्याय — वो चाची जिसने नींद छीन ली
मेरा नाम रवि शर्मा है। उम्र बीस साल, और बनारस का एक गली-मोहल्ला मेरा घर। हमारा मकान पुराना था, दो मंज़िला, ऊपर की छत पर तुलसी का चौरा और नीचे आँगन — ठेठ बनारसी अंदाज़। घर में बाबा, माँ-पापा, और मेरे चाचा-चाची का परिवार। चाचा सरकारी नौकरी में हैं, तैनाती दूसरे शहर में, इसलिए साल में सिर्फ़ दो-तीन बार ही घर आ पाते हैं। चाची अकेली ऊपर के कमरे में रहती हैं। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
चाची की उम्र छब्बीस साल, और शादी को दो साल पूरे हो चुके थे। लेकिन जवानी ऐसी कि देखते ही आँखें अटक जाएँ। गोरी, ऊँचाई ठीक-ठाक, और बदन का बनावट — 34-30-34। उनके होंठ ऐसे चमकीले गुलाबी, कि बार-बार लगता अभी झुक कर चूस लूँ। उनकी चूचियाँ तो कमाल की थीं — कसी हुई, भारी, ब्लाउज़ में तन कर उभरी हुई। और उनकी गहरी गोल नाभि… वो तो मेरा पहला प्यार थी।
मैं उन दिनों हर वक़्त उन्हीं के बारे में सोचता रहता। टीवी देखते-देखते भी जैसे ही चाची की चप्पलों की आवाज़ आती, मेरी नज़र दरवाज़े की तरफ़ खिंच जाती। वो बस पौंछा लगाने आ जातीं — झुकतीं, तो गहरे गले वाले ब्लाउज़ से उनकी झूलती चूचियाँ और पेट की नाभि दिखती। और मेरा लंड चुपचाप खड़ा हो जाता। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
दूसरा अध्याय — झिरी से झाँकते हुए
एक दिन की बात है। चाची नहा कर ऊपर अपने कमरे में कपड़े बदल रही थीं। मैं सीढ़ियों से चुपचाप ऊपर गया और दरवाज़े की झिरी से झाँकने लगा।
उन्होंने पहले बदन से तौलिया हटाया। पूरा गोरा शरीर सामने — गीली चोटी, भीगी पीठ, और कूल्हों पर तौलिये की लाल लकीर। फिर उन्होंने क्रीम की ट्यूब उठाई और अपनी बगलों में लगाने लगीं — हाथ ऊपर करके। उनकी बगलों के बाल बहुत छोटे-छोटे, साफ़। मेरा लंड में खलबली मच गई। मैंने दबे पाँव और झाँका। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
फिर उन्होंने कप वाली ब्रा पहनी — काली, कसी हुई — और बाद में पेंटी। तभी अचानक उन्हें लगा कि कोई देख रहा है। उन्होंने जल्दी से पलट कर झिरी की तरफ़ देखा, और मुझे झाँकते पकड़ लिया। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
मैं दौड़ कर सीढ़ियाँ उतर गया — पर अब वो जान चुकी थीं कि मैं वहाँ था।
तीसरा अध्याय — रसोई की पसीनी दोपहरें
फिर शुरू हुआ वो सिलसिला जो हर दिन बढ़ता गया।
चाची जब सब्ज़ी काटतीं या रोटी बनातीं, तो मैं पेपर पढ़ने के बहाने वहीं बैठ जाता। गर्मी में उनका कुर्ता पसीने से भीगा होता, कांख के कपड़े गीले, और गले से पसीना धीरे-धीरे चूचियों की तरफ़ सरकता। मेरा ध्यान बस वहीं अटका रहता। एक बार अचानक उन्होंने मुड़कर मुझे घूरा, और मैं बाथरूम में जाकर उन्हीं के नाम की दो बार मुठ मार कर माल निकाल आया।
दिन बीतने के साथ मुझे लगने लगा कि मामला सिर्फ़ मेरी तरफ़ से नहीं है। चाची भी मेरी तरफ़ खिंच रही थीं। जब भी मैं सामने जाता, वो जानबूझ कर झुक कर कुछ उठातीं, या ब्लाउज़ ठीक करने के बहाने अपनी चूचियाँ दिखा देतीं। और मज़ाक-मज़ाक में हमारे बीच छूने-पकड़ने का सिलसिला शुरू हो गया। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
चाची रसोई में खाना बनातीं, और मैं पीछे से उन्हें पकड़ लेता — कमर में हाथ डाल कर पेट मसलता, कभी उनके बाल सूँघता। चाची झिड़कती नहीं थीं, बल्कि ठहर जातीं, जैसे इंतज़ार कर रही हों कि हाथ और ऊपर बढ़े। शायद उनके जिस्म को भी किसी का छूना चाहिए था — चाचा तो साल में दो-तीन बार ही आते। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
जब वो नहा कर कमरे में कपड़े बदलतीं, तो मैं चोरी-छिपे देखता, और वो समझ चुकी थीं — पर खुल कर कुछ नहीं कहतीं। कभी जब वो ऊपर अकेली लेट कर कुछ पढ़ रही होतीं, तो मैं दौड़ कर जाता और सीधा उनके ऊपर सीने से सीना मिला कर लेट जाता। उनकी चूचियाँ मेरे सीने से दब जातीं। हम दोनों हाँफने लगते, साँसें आपस में मिल जातीं। वो हटने को कहतीं, पर आँखें एक-दूसरे को देखती रहतीं। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
चौथा अध्याय — करवा चौथ की सुबह
फिर आया वो दिन — करवा चौथ। चाची का ये दूसरा करवा चौथ था, और चाचा घर पर नहीं थे, सो उन्होंने उनकी फ़ोटो रखकर व्रत रखा था।
सुबह से ही घर में हलचल थी। माँ-दादी पूजा की थाली सजा रही थीं, छलनी, चाँद, दीया, बायना — सब तैयार हो रहा था। दोपहर तक सबने व्रत रख लिया। और शाम को सब औरतें अपने-अपने कमरों में कपड़े बदलने चली गईं। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
मैं चाची के कमरे के बाहर खड़ा था, झिरी से झाँक रहा था। उन्होंने मुझे देख लिया और इस बार हँस कर अंदर बुला लिया — “अब कब तक बाहर खड़े रहोगे? अंदर आ जाओ।”
अंदर आया तो चाची उस वक़्त ब्रा पहन रही थीं। मुझे देख कर उन्होंने जल्दी से चूचियाँ ढक लीं और पलट गईं। बोलीं, “बाहर जाइए, तैयार होने दीजिए।”
मैंने बिना हिले कहा, “चाची, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ।”
इतना कह कर मैं पीछे से उनकी कमर में हाथ डाल दिया — पेट से ऊपर, धीरे-धीरे सहलाते हुए चूचियों की तरफ़ बढ़ने लगा। चाची ने कोई विरोध नहीं किया। बस ठिठक कर खड़ी रहीं। मैं समझ गया — आज चाची की चूत चोदने को मिलेगी।
मैंने उन्हें अपनी तरफ़ घुमाया और सीधा उनके होंठों पर होंठ रख दिए। चाची की आँखें बंद हो गईं। बस चूम ही रहे थे कि नीचे से आवाज़ आई — “ओ बहू, पूजा का समय हो गया है!” करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
मैं झट से बाहर निकल गया। और चाची तैयार होने लगीं।
पाँचवा अध्याय — छत पर, चाँद के नीचे
सब लोग छत पर पूजा करने पहुँचे। मैं भी छत पर था — किसी कोने में खड़ा। और फिर चाची तैयार हो कर आईं।
मैं देखता ही रह गया। गुलाबी रंग की सा॒ड़ी, और कसा हुआ ब्लाउज़ — जिसके अंदर से उनकी काली ब्रा साफ़ झाँक रही थी। ब्लाउज़ इतना टाइट कि चूचियाँ दोनों तरफ़ तन कर उभरी हुईं। गहरी लाल लिपस्टिक, बालों में सफ़ेद गजरा, माथे पर बिंदी। चाची उस पल किसी कयामत से कम नहीं लग रही थीं। मेरा लंड वहीं खड़ा हो गया। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
सबने पूजा की। चाची ने चाचा की फ़ोटो सामने रख कर आरती की। लोग एक-एक करके नीचे उतरने लगे — कोई छलनी लेकर, कोई थाली। पर चाची थोड़ा देर से आई थीं, इसलिए वो सबसे आख़िर में बचीं।
छत पर बस मैं और चाची रह गए। चाची पूजा कर रही थीं, और मैं चाचा की फ़ोटो के सामने खड़ा हो गया।
चाची समझ गईं। उन्होंने पहले छलनी से चाँद देखा — और फिर उसी छलनी से मेरी तरफ़ देखा, जैसे मैं ही उनका चाँद हूँ। मेरा दम रुक गया। फिर मैंने उन्हें पानी पिलाया, और उनका व्रत खुलवाया। इसके बाद मैंने उन्हें सीधा अपने गले से लगा लिया। चाची ने भी अपना माथा मेरे कंधे पर टिका दिया। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
नीचे से आवाज़ आई, “बहू, अब नीचे आओ, खाना खा लो।”
हम दोनों हड़बड़ा कर अलग हुए और नीचे उतर आए, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
छठा अध्याय — खाना, और फिर रात
रात का खाना सबने साथ खाया। खाने के बाद सब अपने-अपने कमरों में जाने लगे। चाची ऊपर सोने चली गईं, और मैंने पढ़ने का बहाना बनाया और ऊपर चला आया। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
ऊपर अब सिर्फ़ मैं और चाची थे। मैं उनके कमरे में घुस गया। चाची ने बिना कुछ कहे पीछे से दरवाज़ा बंद कर दिया — चटक की आवाज़ के साथ।
अब चाची कपड़े उतारने जा रही थीं। मैं उनके करीब गया और कहा, “चाची, आपने आज मेरी पूजा की है। आज से मैं आपका पति हुआ और आप मेरी पत्नी।”
चाची शरमा कर नज़र झुका लीं। मैंने उन्हें बिस्तर पर बैठाया, और खुद उनके सामने बैठ गया। चाची दुल्हन की तरह सिकुड़ कर बैठी थीं, हाथ गोद में।
सबसे पहले मैंने उनके सारे गहने उतारे — कानों की बाली, माथे की बिंदी, हाथों की चूड़ियाँ, कमर की करधनी। एक-एक करके। फिर उनकी छाती से पल्लू हटाया और उन्हें सीधा बिस्तर पर लिटा दिया। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
चाची आँखें बंद किए पड़ी थीं। उनकी कसी चूचियाँ ब्लाउज़ में तनी हुईं। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने उनकी चूचियों की घाटी में अपना मुँह लगाया और उन्हें रगड़ते, सूँघते हुए चूमने लगा। चाची की साँस तेज़ हो गई, पर वो कुछ बोलीं नहीं।
सातवाँ अध्याय — पहला चुंबन, पहली बार
करीब आठ-दस मिनट तक मैं चाची के होंठ चूसता रहा। उनके नरम, गीले होंठों का स्वाद ऐसा था कि मन ही नहीं भरता था। चूमते-चूमते मेरा एक हाथ रेंगता हुआ उनकी चूची पर पहुँचा और मसलने लगा। चाची ने पहली बार कराह दी — “उम्म्ह… हय…”
कुछ मिनट बाद हम अलग हुए और एक-दूसरे को वासना से देखने लगे। फिर मैंने उनके शरीर से सा॒ड़ी खींच कर उतार दी। वो खुद ब्लाउज़ खोलने लगीं, तो मैंने कहा, “रुको — मैं आपकी बगलें देखना चाहता हूँ।” करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
चाची ने शरमा कर हाथ ऊपर किए। उनकी बगलें साफ़, बाल बिल्कुल छोटे। मैंने उनके ब्लाउज़ के हुक खोले और उतार दिया। काली ब्रा में उनकी चूचियाँ भरी हुईं, और ब्रा के ऊपर से निपल्स की गोलाइयाँ साफ़ उभरी थीं। मैंने ब्रा भी खोल दी। भारी चूचियाँ झूल कर नीचे आ गईं।
मैंने उनकी एक चूची मुँह में ले ली और पूरे एक मिनट तक चूसता रहा — जीभ से निप्पल पर गोल घुमाते हुए। चाची मेरे सिर के बालों में हाथ फेरने लगीं, और मुँह से बेकाबू आवाज़ें निकलने लगीं — “सी.. सी.. उम्म्ह… अहह… हय… याह…”
फिर मैंने उनकी पेटीकोट का नाड़ा खोला और खींच कर उतार दिया। अब उनके जिस्म पर सिर्फ़ पेंटी रह गई थी — जो उनकी गुलाबी चूत को ढके हुए थी। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
मैंने देर नहीं की। पेंटी भी खींच कर उतार दी और उनकी फूली हुई फुद्दी पर नज़र टिका दी। चाची ने शरमा कर जाँघें सिकोड़ लीं, पर मैंने ज़ोर से खोल दीं। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
फिर मैं उनकी जाँघों से नीचे, धीरे-धीरे जीभ फेरते हुए चूत तक पहुँचा। जैसे ही मेरी जीभ ने उनकी चूत के दाने को छुआ, चाची तिलमिला उठीं — “सी.. सी.. सी.. आह.. आह..” — और दोनों हाथों से तकिया पकड़ कर मचलने लगीं।
मैं पूरी शिद्दत से उनकी चूत चाटने लगा। होंठों से फाँकों को दबाता, काटता, और फिर चूसता। चाची ज़ोर-ज़ोर से अपनी कमर उचकातीं और अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ने लगीं। मैं भी बड़े प्यार से जीभ से उनकी चूत चोदने लगा। थोड़ी देर में उनकी चूत पानी छोड़ने लगी — नमकीन-नमकीन स्वाद, जो मुझे और नशा दे रहा था। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
चाची हाँफते हुए बेड पर गिर पड़ीं। मैं भी उनके बगल में लेट गया। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
फिर चाची मेरे ऊपर आ गईं, मेरे होंठ चूमे और हाँफते हुए बोलीं, “रवि… ज़िंदगी में पहली बार किसी ने मेरी चूत चाटी… तुम्हारे चाचा साल में दो-तीन बार ही चुदाई करते हैं… इसलिए मैं प्यासी रहती हूँ…”
फिर चाची नीचे सरकीं और सीधा मेरे लंड पर मुँह रख दिया। गप्प से पूरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं — जैसे खाने के मूड में हों। वो लंड की चमड़ी खींचतीं और टोपे को जीभ से बड़े स्वाद से चाटतीं। लग रहा था जैसे कोई लॉलीपॉप चूस रहा हो। थोड़ी देर में मैंने लंड का रस उनके मुँह में छोड़ दिया, और वो गटक गईं। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
हम दोनों शिथिल पड़े रहे। पर जवानी कहाँ रुकती है? कुछ देर बाद चाची फिर मेरा लंड सहलाने लगीं। मैंने उनकी बेकरारी समझी और लंड उठा कर उनकी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। चाची और मचल गईं — “रवि… अब करो… डालो…”
मैंने उनकी टाँगें चौड़ी कीं और लंड को उनकी चूत के मुँह पर टिका कर एक ज़ोर का धक्का दे दिया। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
एक मधुर आवाज़ के साथ मेरा लंड चाची की चूत के अंदर घुस गया। चाची बहुत दिनों बाद चुदवा रही थीं, सो दर्द से उनके मुँह से चीख निकल गई। शुक्र था कि उस वक़्त नीचे सब सो रहे थे। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
मैंने थोड़ी देर उनकी चूचियाँ सहलाईं, उन्हें चूमा। जब उनका दर्द कम हुआ, तो दूसरे धक्के में मैंने लंड पूरा अंदर उतार दिया — इस बार चाची ने अपना मुँह भींच लिया। फिर मैं अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर में चाची भी कमर उचकाने लगीं, और पूरा लंड अंदर लेने लगीं।
अब मैं बड़े आराम से चाची की चूत चोद रहा था, और वो मस्ती में चुदवाते हुए कराह रही थीं — “उह्ह.. उह्ह.. आह… मेरे रवि चोद.. चोद.. और ज़ोर से चोद.. बहुत आग लगा रखी थी इसने.. आह.. उई मेरी माँ.. मर गई..”
ऐसा कहते हुए वो एक बार झड़ गईं। उनकी चूत से फच्च-फच्च की आवाज़ें होने लगीं, पर मैं चोदे जा रहा था। चाची भी बराबर अपनी कमर उचका कर हर धक्के का जवाब दे रही थीं। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
फिर मैंने लंड बाहर निकाला और चाची को बिस्तर के किनारे झुका दिया। आगे हाथ करके उनकी दोनों चूचियाँ मसलने लगा, और नीचे से लंड उनकी चूत चोदता रहा। चाची तान छेड़ रही थीं — “ह्ह.. हाय.. हाय.. आह.. आह.. और चोदो.. आह.. आह.. आह..”
अब मैं भी आख़िरी मुकाम पर था। मैंने हाँफते हुए पूछा, “चाची, मेरा पानी छूटने वाला है… अंदर छोड़ूँ या बाहर?”
चाची ने बिना रुके कहा, “रवि, अंदर ही छोड़ो।”
मैंने उन्हें सीधा किया, लंड चूत में डाला और ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारने लगा। लगभग पाँच मिनट बाद मेरे लंड ने अंदर ही पानी छोड़ दिया। चाची की कमर झटके खाती रही, और वो मेरी बाँहों में चिपक गईं। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
हम दोनों पसीने से लथपथ, एक-दूसरे से चिपके, हाँफते रहे — जैसे कई किलोमीटर दौड़ लगा कर आए हों। पूरे पाँच मिनट ऐसे ही पड़े रहे। फिर मेरा लंड खुद सिकुड़ कर बाहर आ गया — उस पर सफ़ेद माल लगा था।
कुछ देर बाद हम बातें करने लगे। मैंने चाची के बालों को पीछे किया और कहा, “चाची, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ।”
चाची ने मेरे होंठ चूमे और बोलीं, “मैं भी… रवि, मैं भी।”
“आज से आपका अकेलापन मैं दूर करूँगा।” करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
चाची मुस्कुराईं और फिर से मेरे होंठ चूसने लगीं, नीचे हाथ बढ़ा कर लंड सहलाने लगीं। उस रात हमने तीन बार चुदाई की — और सुबह होते-होते दोनों की हालत ऐसी थी कि चलने की ताकत नहीं बची थी। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
उसके बाद वो रात एक आदत बन गई।
चाची जब रसोई में खाना बनातीं, तो मैं अंदर जाकर मौका देख कर उनसे ओरल सेक्स करता — कभी उन्हें चाटता, कभी अपना लंड चुसवाता। कभी सा॒ड़ी उठा कर पीछे से ही चोद देता। ऊपर की छत, पिछली कोठरी, सीढ़ियों का कोना — हर जगह हमारी चुदाई का गवाह बन गई। करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
फिर तो मैं रात को सीधा चाची के कमरे में ही सोने लगा। जब भी मन करता, दोनों बेहिचक संभोग करते। कई बार मैंने चाची को मोबाइल पर सेक्सी वीडियो दिखा कर चोदा, और वो शरमाते हुए भी मज़े लेतीं।
चाचा जब घर आते, तो हम दोनों संभल कर रहते — पर चाचा के सो जाने के बाद रात में फिर वही सिलसिला चलता।
और इस सबके बीच चाची ने एक दिन फुसफुसा कर कहा, “रवि, अगली छुट्टी में तुम्हें मेरे मायके ले चलूँगी… वहाँ मेरी सौतेली माँ है… बहुत जवान है… बाबा तो बूढ़े हैं, उनका शरीर कहाँ पहुँचता है…” करवा चौथ पर चाची की चूत की चुदाई की कहानी
मैंने पूछा, “तो?”
चाची मुस्कुराई। “तो तुम देख लेना।”
और उस एक मुस्कान ने अगले भाग की नींव रख दी।
इसका भाग -2 में रवि की मांग है और सौतेली मां के साथ सब कुछ करता है आपको जल्दी लिखुगा अगर आपका प्यार मिला तो जरूर लिखुगा
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