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वासना का असली मज़ा, सिर्फ 'हिंदी सेक्स स्टोरी' के साथ।

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वासना का असली मज़ा, सिर्फ 'हिंदी सेक्स स्टोरी' के साथ।

गायत्री भाभी और नौकरानी बरखा का सीक्रेट सेक्स प्लान

Hindi sex stories, June 1, 2026June 14, 2026

मेरा नाम वैभव है और मैं 26 साल का जवान लड़का हूं। मैं एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूं। मेरे बड़े भैया अनिल की शादी हो चुकी है और वह अपनी पत्नी गायत्री भाभी के साथ एक बड़े बंगले में रहते हैं। भैया का बिजनेस है और वह अक्सर टूर पर रहते हैं। मुझे कॉलेज खत्म होने के बाद नौकरी मिली तो भैया ने कहा कि मैं उनके घर रह लूं। गायत्री भाभी और नौकरानी बरखा का सीक्रेट सेक्स प्लान

मैंने हामी भर ली। जब मैं पहली बार उनके घर गया तो मैं देखकर हैरान रह गया। बहुत बड़ा बंगला था, तीन मंजिला। गायत्री भाभी बहुत खूबसूरत थीं। उनकी उम्र 32 साल थी और फिगर 36-28-38 का था।

वह हमेशा साड़ी पहनती थीं और उनकी पीठ पर एक बड़ा तिल था जो बहुत सेक्सी लगता था। घर में एक नौकरानी भी थी जिसका नाम बरखा था।

वह 24 साल की थी और गांव से आई हुई थी। उसका फिगर 34-30-36 का था। वह थोड़ी मोटी थी लेकिन बहुत गोरी और सुंदर। उसके गाल पर एक गड़ा था जो जब वह हंसती तो और भी प्यारा लगता था।

मैंने भैया से पूछा, “भैया, यह घर तो बहुत बड़ा है। अकेले भाभी कैसे संभालती हैं?” भैया ने मुस्कुराते हुए कहा, “इसीलिए तो बरखा को रखा है। वह भाभी की मदद करती है। और अब तू भी आ गया है, तो मुझे चिंता नहीं रहेगी।”

मैं समझ गया कि भैया मुझे घर की देखभाल के लिए बुला रहे हैं। लेकिन मैं नहीं जानता था कि इस घर में एक सीक्रेट प्लान चल रहा था जिसका मुझे जल्द ही पता चलने वाला था। भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

पहली रात जब मैं अपने कमरे में सो रहा था, तो मुझे कुछ आवाजें सुनाई दीं। मैं उठकर देखने गया तो देखा कि रसोई से रोशनी आ रही थी। मैं चुपचे गया और झांक कर देखा।

गायत्री भाभी और बरखा रसोई में बैठी थीं और कुछ बात कर रही थीं। भाभी ने हल्की नीली रंग की साड़ी पहनी हुई थी और बरखा ने सलवार सूट। दोनों हंस रही थीं। “बरखा, तुम्हें पता है, अनिल जी महीने में सिर्फ 10 दिन ही घर रहते हैं। बाकी के 20 दिन मैं अकेली रहती हूं,” भाभी ने कहा। “हां मैम, मैं जानती हूं।

आपको बहुत अकेलापन महसूस होता होगा,” बरखा ने कहा। “अकेलापन तो होता ही है, लेकिन एक और समस्या है,” भाभी ने कहा और अपनी आवाज़ धीमी कर दी। मैं कान लगाकर सुनने लगा।

“क्या समस्या है मैम?” बरखा ने पूछा। “वो… रात की जरूरतें… समझ रही हो ना?” भाभी ने शर्माते हुए कहा। बरखा ने मुस्कुराते हुए कहा, “समझ गई मैम।

आपको चाहिए कोई जवान लड़का जो आपकी रातों की प्यास बुझाए।” “शह्तान लड़की, तुझे सब पता है,” भाभी ने हंसते हुए कहा। “मैम, मैं एक प्लान बनाया है। वैभव साहब को घर में रहने के लिए बुलाया गया है। भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

वह जवान हैं, हैंडसम हैं, और अभी सिंगल हैं,” बरखा ने कहा। मेरे कान खड़े हो गए। ये क्या? मेरे बारे में बात हो रही थी? “हां, वैभव तो ठीक है, लेकिन वह मानेगा क्या?” भाभी ने पूछा। “मैम, आपको थोड़ा इशारा देना होगा।

लड़के समझ जाते हैं,” बरखा ने कहा। “और तू?” भाभी ने पूछा। “मैम, मैं भी तो अकेली हूं। मुझे भी चाहिए कोई।

अगर वैभव साहब राजी हो जाएं तो हम दोनों का फायदा होगा,” बरखा ने शरारती अंदाज में कहा। मैं समझ गया कि यह सीक्रेट प्लान क्या था। भाभी और बरखा दोनों मुझे अपना बनाना चाहती थीं। मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा और मेरा लंड खड़ा हो गया।

अगले दिन से मैंने देखना शुरू किया कि भाभी और बरखा का व्यवहार बदल गया था। भाभी मुझसे बात करते समय अक्सर अपने बालों से खेलती थीं और अपनी साड़ी का पल्लू गिरा देती थीं। उनके ब्लाउज से उनके गोरे मम्मे झाँकते थे।

बरखा भी कम नहीं थी। वह जब भी मेरे सामने झुकती तो अपने सूट से उसके मोटे मम्मे दिखाती। एक दिन तो उसने जानबूझकर पानी गिरा दिया और अपने कपड़े गीले कर लिए। “अरे बरखा, तुम्हारे कपड़े गीले हो गए,” मैंने कहा।

“हां साहब, अब क्या करूं? मुझे तो बदलने भी नहीं देती यह भाभी जी,” बरखा ने कहा। गायत्री भाभी आईं और बोलीं, “अरे बेचारी बरखा, चल मेरे कमरे में आकर बदल ले। वैभव, तुम भी आओ, मदद करना।” मैं समझ गया कि यह प्लान का हिस्सा था। मैं उनके पीछे-पीछे गया।

भाभी के कमरे में गए तो भाभी ने बरखा को कपड़े दिए। “वैभव, तुम बाहर मत जाओ, यहीं रहो। बरखा को कुछ पहनाने में मदद चाहिए होगी,” भाभी ने कहा। बरखा ने अपना गीला सूट उतारना शुरू किया। उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था। उसकी गोरी चूत देखकर मेरा लंड पागल हो गया।

उसके मम्मे बड़े-बड़े थे और निप्पल गुलाबी रंग के। “साहब, शर्मा क्यों रहे हो? देखो ना,” बरखा ने कहा। मैंने हिम्मत करके कहा, “बरखा, तुम बहुत सुंदर हो।” “साहब, सिर्फ देखोगे या कुछ करोगे भी?” बरखा ने शरारती अंदाज में कहा। मैंने उसके पास जाकर उसके मम्मे हाथ में ले लिए। वह गरम और भारी थे।

मैंने उन्हें दबाना शुरू किया। “आह… साहब… हल्के से…,” बरखा सिसकी। तभी गायत्री भाभी ने कहा, “अरे वाह, तुम दोनों तो शुरू हो गए। मुझे भूल तो नहीं गए?” भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

मैंने घूमकर देखा तो भाभी ने अपनी साड़ी खोल दी थी।

वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। उनके मम्मे ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब थे।

“भाभी, आप…,” मैंने कहा। “वैभव, मैं जानती हूं तुमने कल रात हमारी बात सुन ली थी।

अब बताओ, तुम्हें हमारा प्लान पसंद आया?” भाभी ने पूछा। “भाभी, यह तो बेहतरीन प्लान है,” मैंने कहा।

“तो फिर आओ,” भाभी ने कहा और मुझे अपनी ओर खींच लिया।

मैं बीच में था, एक तरफ गायत्री भाभी और दूसरी तरफ बरखा। दोनों मुझे किस कर रही थीं। भाभी के होठ नरम थे और बरखा के होठ मोटे और रसीले।

मैंने पहले भाभी को किस किया फिर बरखा को। दोनों मेरे कपड़े खोल रही थीं। जल्दी ही मैं पूरी तरह नंगा हो गया। मेरा लंड 7 इंच का था और पूरी तरह खड़ा था। “वाह वैभव, तुम्हारा तो बहुत बड़ा है,” भाभी ने कहा।

“हां मैम, साहब का लंड तो बहुत मोटा भी है,” बरखा ने कहा और उसे हाथ में ले लिया। बरखा ने मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। उसके गरम होठ मेरे लंड को चूस रहे थे। भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

भाभी भी पीछे नहीं रहीं, उन्होंने मेरे मम्मे चूसने शुरू कर दिए। “ओह… भाभी… बरखा… बहुत मजा आ रहा है…,” मैं मोaning कर रहा था। बरखा मेरे लंड को गले तक ले रही थी। उसने मेरी टोपी भी चाटी। फिर भाभी ने कहा, “बरखा, थोड़ा मुझे भी मौका दो।”

बरखा ने मेरा लंड बाहर निकाला और भाभी ने अपने मुंह में ले लिया। भाभी तो एक्सपर्ट थीं। उन्होंने जीभ से मेरे लंड को चाटना शुरू किया और फिर पूरा अंदर ले लिया।

“आह… भाभी… हां… ऐसे ही… और जोर से…,” मैं चीख रहा था।

कुछ देर बाद भाभी ने मेरा लंड मुंह से बाहर निकाला और बेड पर लेट गईं। उन्होंने अपना पेटीकोट उठाया और मैंने देखा कि उन्होंने कुछ भी नहीं पहना था नीचे।

उनकी चूत गुलाबी थी और थोड़ी बाल वाली।

“वैभव, आओ अपनी भाभी की चूत चोदो। बहुत दिनों से तरस गई हूं,” भाभी ने कहा।

मैं उनके ऊपर आया और अपने लंड को उनकी चूत के मुंह पर रखा। फिर धीरे से एक धक्का दिया। मेरा लंड आधा अंदर चला गया।

“आह… वैभव… थोड़ा धीरे… बड़ा है तुम्हारा…,” भाभी ने कहा। मैं थोड़ा रुका फिर दूसरा धक्का दिया। पूरा लंड अंदर चला गया। भाभी की चूत बहुत टाइट थी लेकिन गीली भी।

“ओह… भाभी… आपकी चूत तो बहुत टाइट है…,” मैंने कहा।

“हां वैभव, अनिल जी का छोटा है… तुम्हारा बड़ा है ना… इसीलिए… अब चोदो मुझे… जोर-जोर से…,”

भाभी चीख रही थीं। मैंने धक्के देने शुरू किए। पहले धीरे-धीरे फिर तेज-तेज।

भाभी की चूत से आवाजें आ रही थीं “फच… फच… फच…” “ओह… वैभव… हां… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो…

हां…,” भाभी चिल्ला रही थीं। बरखा एक तरफ बैठी अपनी चूत सहला रही थी। भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

वह देख रही थी कि मैं कैसे भाभी को चोद रहा हूं। करीब 20 मिनट तक चोदने के बाद भाभी झड़ गईं। उनकी चूत से पानी निकलने लगा। मैंने अपना लंड बाहर निकाला। अब बरखा की बारी थी।

वह बेड पर आई और अपना सलवार उतार दिया। उसकी चूत बिल्कुल साफ थी, एक भी बाल नहीं था। “साहब, मेरी चूत भी चोद लो। मैं भी बहुत दिनों से तरसी हूं,” बरखा ने कहा।

मैंने उसे घुटनों के बल झुकाया और पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। “आह… साहब… हां… ऐसे ही… और तेज…,” बरखा चीख रही थी। उसकी चूत भाभी से ज्यादा टाइट थी।

मैं जोर-जोर से उसे चोद रहा था। उसकी गांड बहुत मोटी थी और मैं उस पर थप्पड़ भी मार रहा था। “फच… फच… फच…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

“ओह… साहब… मारो और… मेरी गांड लाल कर दो… हां…,” बरखा चिल्ला रही थी। भाभी एक तरफ बैठी मुझे देख रही थीं और अपनी चूत सहला रही थीं। करीब 15 मिनट बाद बरखा भी झड़ गई।

अब मैंने सोचा कि क्यों ना दोनों को एक साथ चोदा जाए। मैंने भाभी को बेड पर लिटाया और बरखा को उनके ऊपर चढ़ाया। अब दोनों की चूतें एक के ऊपर एक थीं।

मैंने पहले भाभी की चूत में लंड डाला और कुछ धक्के दिए फिर बाहर निकालकर बरखा की चूत में डाल दिया।

“आह… वैभव… यह तो बहुत मजेदार है…,” भाभी ने कहा। “हां साहब… और तेज… दोनों को बराबर चोदो…,” बरखा चीख रही थी।

मैं बारी-बारी से दोनों की चूतें चोद रहा था। कभी भाभी की तो कभी बरखा की।

दोनों बहुत मजा ले रही थीं। कुछ देर बाद मैंने कहा, “भाभी, क्या मैं आपकी गांड मार सकता हूं?” “वैभव, मैंने कभी गांड नहीं मरवाई।

लेकिन तुम्हारे लिए तैयार हूं,” भाभी ने कहा। मैंने बरखा से तेल मांगा। उसने कहा, “साहब, मेरी गांड भी मार लो। मैं तो रोज मरवाती हूं।”

मैंने पहले भाभी की गांड पर तेल लगाया। उन्होंने घुटनों के बल झुक गईं। मैंने अपने लंड का सिरा उनकी गांड के छेद पर रखा और धीरे से धक्का दिया। “आह… वैभव… बहुत दर्द हो रहा है… थोड़ा रुको…,” भाभी ने कहा। भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

मैं रुका और फिर धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया। “ओह… भाभी… आपकी गांड बहुत टाइट है…,” मैंने कहा।

“हां वैभव… धीरे-धीरे करो… फिर तेज…,” भाभी ने कहा।

मैंने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए। फिर जब भाभी को मजा आने लगा तो मैंने तेज कर दिया।

“फच… फच… फच…” की आवाजें आ रही थीं। फिर मैंने बरखा की गांड मारी।

उसकी गांड थोड़ी ढीली थी क्योंकि वह अक्सर मरवाती थी। “साहब… और तेज… मेरी गांड फाड़ दो… हां…,” बरखा चिल्ला रही थी।

दोनों की गांड मारने के बाद मैं थक गया था। लेकिन मजा अभी बाकी था। हमने 69 की पोजीशन बनाई। भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

मैं नीचे लेटा, बरखा मेरे ऊपर और भाभी बरखा के ऊपर। मैं बरखा की चूत चाट रहा था, बरखा भाभी की चूत चाट रही थी और भाभी मेरा लंड चूस रही थीं।

“ओह… यह तो बहुत मजेदार है…,” हम तीनों एक साथ बोले। यह एक त्रिकोणीय सेक्स था।

हम तीनों एक-दूसरे को मजा दे रहे थे। भाभी मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थीं।

उन्होंने मेरी टोपी को जीभ से चाटा और फिर पूरा लंड गले तक ले लिया। “आह… भाभी… हां… ऐसे ही… और जोर से…,” मैं चीख रहा था। बरखा की चूत से पानी निकल रहा था जो मैं चाट रहा था। वह भी भाभी की चूत को जोर-जोर से चाट रही थी। अचानक दरवाजे की घंटी बजी। हम तीनों चौंक गए। भाभी ने कहा, “अरे, अनिल जी आ गए। वो तो कल आने वाले थे।”

हम जल्दी से कपड़े पहनने लगे। मैंने अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया। थोड़ी देर बाद मैं बाहर आया तो देखा कि अनिल भैया आ गए थे। वह मुस्कुरा रहे थे। “वैभव, कैसा लग रहा है घर में?” भैया ने पूछा। “बहुत अच्छा लग रहा है भैया,” मैंने कहा और भाभी की तरफ देखा। भाभी मुस्कुरा रही थीं और उन्होंने आंख मारी।

मैं समझ गया कि यह सीक्रेट प्लान अभी जारी रहेगा। रात को खाना खाते समय अनिल भैया ने कहा, “वैभव, तुम्हें पता है, मुझे कल फिर बाहर जाना है। एक हफ्ते के लिए।” मैंने भाभी की तरफ देखा। उनकी आंखों में एक चमक थी।

“भैया, आप चिंता मत करो। मैं हूं ना,” मैंने कहा। “हां, इसीलिए तो मैंने तुम्हें बुलाया है। गायत्री को और बरखा को देखभाल की जरूरत है,” भैया ने कहा। मैंने बरखा की तरफ देखा। वह भी मुस्कुरा रही थी।

रात को जब भैया सो गए तो भाभी मेरे कमरे में आईं। “वैभव, एक हफ्ते के लिए भैया जा रहे हैं। हम तीनों की मस्ती होगी,” भाभी ने कहा। “हां भाभी, लेकिन भैया के सामने तो कुछ नहीं कर सकते,” मैंने कहा।

“अरे पगले, इसीलिए तो प्लान बनाया है।

देखो क्या करते हैं,” भाभी ने कहा।

रात को भैया अपने कमरे में सो रहे थे। भाभी, बरखा और मैं हॉल में बैठे थे। भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

हमने एक मूवी लगाई। भाभी मेरे बगल में बैठी थीं और बरखा दूसरी तरफ।

भाभी ने अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और धीरे-धीरे ऊपर बढ़ाया। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।

बरखा ने भी अपना हाथ मेरे पैरों पर रख दिया। “वैभव, मूवी देखो,” भाभी ने कहा और मेरे कान में फुसफुसाई, “और मेरा हाथ भी महसूस करो।”

मैंने देखा कि भैया का कमरा बंद था। मैंने हिम्मत करके भाभी के मम्मे दबाने शुरू कर दिए। “आह… वैभव… धीरे…,” भाभी सिसकी। बरखा ने मेरा लंड बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी।

हम तीनों सोफे पर बैठे एक-दूसरे को मजा दे रहे थे और मूवी देखने का नाटक कर रहे थे। अगले दिन सुबह भैया चले गए। अब हम तीनों आजाद थे। मैं रसोई में गया तो देखा कि बरखा सब्जी काट रही थी।

उसने पीछे से सलवार नहीं पहनी थी और उसकी गोरी गांड दिख रही थी। मैं पीछे से गया और अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ने लगा। “साहब… अभी सुबह-सुबह…,” बरखा ने कहा।

“तो क्या हुआ, भैया तो चले गए,” मैंने कहा और उसकी चूत में लंड डाल दिया। “आह… साहब… हां… और तेज…,” बरखा चीख रही थी। तभी गायत्री भाभी आईं। उन्होंने देखा कि मैं बरखा को चोद रहा हूं तो वह भी उत्साहित हो गईं। “वैभव, मुझे भी चोदो,” भाभी ने कहा और अपनी साड़ी उठा ली। मैंने बरखा को वहीं छोड़ा और भाभी को चोदने लगा। बरखा एक तरफ अपनी चूत सहला रही थी।

“ओह… वैभव… रसोई में चुदाई का अलग ही मजा है… हां… और तेज…,” भाभी चिल्ला रही थीं। दोपहर को हम तीनों ने साथ में नहाने का फैसला किया। बाथरूम में हम सब नंगे थे। भाभी ने मेरे लंड पर साबुन लगाया और हिलाने लगीं। बरखा ने मेरे पीछे से अपने मम्मे मेरे पीठ पर रगड़े।

“वैभव, शावर के नीचे चोदो मुझे,” भाभी ने कहा। मैंने भाभी को दीवार से सटाया और पानी के नीचे उनकी चूत में लंड डाल दिया। “आह… वैभव… पानी के नीचे और मजा आ रहा है… हां… और तेज…,” भाभी चीख रही थीं।

बरखा एक तरफ खड़ी होकर देख रही थी और अपनी चूत में उंगली कर रही थी। फिर मैंने बरखा को भी घुटनों के बल झुकाया और पीछे से उसकी चूत मारी। भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

“साहब… पानी के नीचे बहुत अच्छा लग रहा है… हां…,” बरखा चिल्ला रही थी। रात को हम तीनों भैया-भाभी के बेडरूम में गए। वहां एक बड़ा बेड था। हम तीनों बेड पर लेट गए। मैं बीच में था, भाभी एक तरफ और बरखा दूसरी तरफ।

पहले मैंने भाभी को किस किया फिर बरखा को। दोनों मेरे लंड को बारी-बारी से चूस रही थीं। “वैभव, आज मुझे डॉगी स्टाइल में चोदो,” भाभी ने कहा। भाभी घुटनों के बल झुक गईं। मैंने पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया और जोर-जोर से धक्के देने लगा।

“आह… वैभव… हां… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो… हां…,” भाभी चिल्ला रही थीं। बरखा नीचे लेटी उनकी चूत चाट रही थी। मैं जब धक्का देता तो भाभी की चूत बरखा के मुंह पर आती।

फिर मैंने बरखा को भी घुटनों के बल झुकाया और उसकी भी चूत मारी। “साहब… मेरी भी गांड मारो… प्लीज…,” बरखा ने कहा। मैंने बरखा की गांड में लंड डाला और भाभी की चूत चोदता रहा। दोनों को एक साथ मजा दे रहा था। अगले दिन सुबह भाभी बालकनी में कपड़े सुखा रही थीं।

उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी लेकिन अंदर कुछ भी नहीं पहना था। मैं पीछे से गया और अपना लंड उनकी गांड पर रगड़ने लगा। “वैभव, कोई देख लेगा,” भाभी ने कहा। “कोई नहीं है भाभी, सब सो रहे हैं,” मैंने कहा। भाभी चुदाई, नौकरानी बरखा सेक्स, भाभी और नौकरानी, घर में चुदाई, भाभी की गांड मारी

मैंने उनकी साड़ी उठाई और पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया। भाभी और नौकरानी की चुदाई / भाभी की चुदाई और नौकरानी को रगड़ा

“आह… वैभव… बालकनी में… हां… और तेज…,” भाभी चीख रही थीं। बाहर सड़क से लोग गुजर रहे थे लेकिन वह नहीं देख पा रहे थे।

यह एक अलग ही रोमांच था। शाम को हम तीनों लिविंग रूम में बैठे थे। भाभी ने वाइन का इंतजाम किया था। हम तीनों ने वाइन पी और फिर सेक्स करने लगे। इस बार भाभी ने कहा कि वह बरखा को लेस्बियन सेक्स करना चाहती हैं।

मैं एक तरफ बैठा देख रहा था। भाभी और बरखा एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं। भाभी बरखा की चूत में उंगली कर रही थीं और बरखा भाभी की चूत चाट रही थी। “ओह… बरखा… हां… और जोर से…,” भाभी मोaning कर रही थीं। “मैम… आपकी चूत तो बहुत मीठी है…,” बरखा कह रही थी। मैं देखते-देखते उत्तेजित हो गया और अपना लंड हिलाने लगा। भाभी ने कहा, “वैभव, आओ हम तीनों साथ में करते हैं।”

भाभी बेड पर लेटीं। मैं उनके ऊपर आया और उनकी चूत में लंड डाल दिया। फिर बरखा ने स्ट्रैप-ऑन पहना और भाभी की गांड में डाल दिया। “आह… दोनों तरफ से… बहुत मजा आ रहा है… हां… और तेज…,” भाभी चिल्ला रही थीं। मैं नीचे से धक्के दे रहा था और बरखा ऊपर से। भाभी दोनों तरफ से मजा ले रही थीं।

“ओह… वैभव… बरखा… मैं झड़ने वाली हूं… और तेज… हां…,” भाभी चीखीं और झड़ गईं। हफ्ता भर हम तीनों ने बहुत सेक्स किया। हर जगह – बेडरूम, बाथरूम, रसोई, बालकनी, लिविंग रूम, यहां तक कि गैरेज में भी। हमने हर पोजीशन में सेक्स किया – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, रिवर्स काउगर्ल, स्पूनिंग, स्टैंडिंग। भाभी की चूत और गांड दोनों मैंने मारी।

बरखा की भी चूत और गांड दोनों मारी। कभी-कभी मैं एक साथ दोनों को चोदता। कभी पहले भाभी को फिर बरखा को। कभी पहले बरखा को फिर भाभी को। एक दिन तो हमने पूरे दिन सेक्स किया। सुबह उठते ही शुरू किया और रात को सोने तक। हम तीनों बेड पर लेटे थे।

भाभी मेरे लंड को चूस रही थीं और बरखा मेरे मम्मे चूस रही थी। फिर मैंने भाभी को चोदा जबकि बरखा उनकी चूत चाट रही थी। फिर मैंने बरखा को चोदा जबकि भाभी उसकी चूत चाट रही थीं। फिर हमने 69 की पोजीशन बनाई जिसमें मैं भाभी की चूत चाट रहा था, भाभी बरखा की चूत चाट रही थीं और बरखा मेरा लंड चूस रही थी।

यह एक त्रिकोणीय सेक्स था जिसमें हम तीनों एक-दूसरे को मजा दे रहे थे। एक और दिन हमने बाथरूम में सेक्स किया। शावर चल रहा था और हम तीनों नंगे थे। भाभी ने मेरे लंड पर साबुन लगाया और हिलाने लगीं। बरखा ने मेरे पीछे से अपने मम्मे मेरे पीठ पर रगड़े। फिर मैंने भाभी को दीवार से सटाया और पानी के नीचे उनकी चूत में लंड डाल दिया।

“आह… वैभव… पानी के नीचे और मजा आ रहा है… हां… और तेज…,” भाभी चीख रही थीं। फिर मैंने बरखा को भी घुटनों के बल झुकाया और पीछे से उसकी चूत मारी। “साहब… पानी के नीचे बहुत अच्छा लग रहा है… हां…,” बरखा चिल्ला रही थी। एक दिन हमने रसोई में सेक्स किया। बरखा खाना बना रही थी। भाभी चुदाई, नौकरानी बरखा सेक्स, भाभी और नौकरानी, घर में चुदाई, भाभी की गांड मारी

मैं पीछे से गया और उसकी सलवार उतार दी। उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था। मैंने तुरंत अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। “साहब… अभी खाना बना रही हूं…,” बरखा ने कहा। “तो बनाने दो, मैं तो बस चोद रहा हूं,”

मैंने कहा और जोर-जोर से धक्के देने लगा। तभी भाभी आईं। उन्होंने देखा कि मैं बरखा को चोद रहा हूं तो वह भी उत्साहित हो गईं।

“वैभव, मुझे भी चोदो,” भाभी ने कहा और अपनी साड़ी उठा ली। मैंने बरखा को वहीं छोड़ा और भाभी को चोदने लगा। बरखा एक तरफ अपनी चूत सहला रही थी। “ओह… वैभव… रसोई में चुदाई का अलग ही मजा है… हां… और तेज…,” भाभी चिल्ला रही थीं। एक दिन हमने बालकनी में सेक्स किया। शाम का समय था।

भाभी बालकनी में खड़ी थीं। मैं पीछे से गया और उनकी साड़ी उठा दी। उन्होंने नीचे कुछ भी नहीं पहना था। मैंने तुरंत अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया। “वैभव, कोई देख लेगा,” भाभी ने कहा। “कोई नहीं है भाभी, सब काम पर गए हैं,”

मैंने कहा और जोर-जोर से धक्के देने लगा। “आह… वैभव… बालकनी में… हां… और तेज…,” भाभी चीख रही थीं। बाहर सड़क से लोग गुजर रहे थे लेकिन वह नहीं देख पा रहे थे। यह एक अलग ही रोमांच था। एक दिन हमने सोफे पर सेक्स किया। लिविंग रूम में बड़ा सा सोफा था। हम तीनों नंगे थे।

भाभी मेरे ऊपर चढ़ी हुई थीं और अपनी चूत में मेरा लंड डाले हुए थीं। वह ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनके बड़े मम्मे मेरे चेहरे के ऊपर थे। मैंने उन्हें पकड़ा और चूसने लगा। बरखा एक तरफ बैठी मेरे मम्मे चूस रही थी। “ओह… वैभव… तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है… हां… और तेज…,” भाभी चिल्ला रही थीं। भाभी चुदाई, नौकरानी बरखा सेक्स, भाभी और नौकरानी, घर में चुदाई, भाभी की गांड मारी

फिर हमने पोजीशन बदली। अब बरखा मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी और भाभी एक तरफ बैठी मेरे मम्मे चूस रही थीं। “साहब… मैं झड़ने वाली हूं… और तेज… हां…,” बरखा चीखी और झड़ गई। एक दिन हमने डबल पेनिट्रेशन किया। भाभी बेड पर लेटीं। मैं उनके ऊपर आया और उनकी चूत में लंड डाल दिया। फिर बरखा ने स्ट्रैप-ऑन पहना और भाभी की गांड में डाल दिया।

“आह… दोनों तरफ से… बहुत मजा आ रहा है… हां… और तेज…,” भाभी चिल्ला रही थीं। मैं नीचे से धक्के दे रहा था और बरखा ऊपर से। भाभी दोनों तरफ से मजा ले रही थीं। “ओह… वैभव… बरखा… मैं झड़ने वाली हूं… और तेज… हां…,” भाभी चीखीं और झड़ गईं। हफ्ता भर हम तीनों ने बहुत सेक्स किया।

हर जगह – बेडरूम, बाथरूम, रसोई, बालकनी, लिविंग रूम, यहां तक कि गैरेज में भी। हमने हर पोजीशन में सेक्स किया। भाभी की चूत और गांड दोनों मैंने मारी। बरखा की भी चूत और गांड दोनों मारी। कभी-कभी मैं एक साथ दोनों को चोदता। कभी पहले भाभी को फिर बरखा को। कभी पहले बरखा को फिर भाभी को।

अनिल भैया वापस आने वाले थे। आखिरी रात हमने बहुत मस्ती की। हम तीनों बेड पर लेटे थे। पहले मैंने भाभी को चोदा। वह मिशनरी पोजीशन में थीं। मैं उनके ऊपर था और जोर-जोर से धक्के दे रहा था। उनके मम्मे उपर-नीचे हो रहे थे। “ओह… वैभव… हां… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो… हां…,” भाभी चिल्ला रही थीं। भाभी चुदाई, नौकरानी बरखा सेक्स, भाभी और नौकरानी, घर में चुदाई, भाभी की गांड मारी

फिर मैंने बरखा को चोदा। वह डॉगी स्टाइल में थी। मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाला और जोर-जोर से धक्के दिए। “साहब… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो… हां…,” बरखा चिल्ला रही थी। फिर हमने 69 की पोजीशन बनाई।

मैं नीचे लेटा, बरखा मेरे ऊपर और भाभी बरखा के ऊपर। मैं बरखा की चूत चाट रहा था, बरखा भाभी की चूत चाट रही थी और भाभी मेरा लंड चूस रही थीं। “ओह… यह तो बहुत मजेदार है…,” हम तीनों एक साथ बोले।

फिर मैंने भाभी को डॉगी स्टाइल में चोदा जबकि बरखा उनकी चूत चाट रही थी। फिर मैंने बरखा को चोदा जबकि भाभी उसकी चूत चाट रही थीं।

हम तीनों एक-दूसरे को मजा दे रहे थे। रात भर हमने सेक्स किया। सुबह तक हम तीनों थक गए थे। लेकिन मजा बहुत आया। अगले दिन अनिल भैया आ गए। वह थके हुए लग रहे थे। भाभी चुदाई, नौकरानी बरखा सेक्स, भाभी और नौकरानी, घर में चुदाई, भाभी की गांड मारी

“वैभव, इस बार तुम्हें भी साथ चलना होगा बिजनेस ट्रिप पर,” भैया ने कहा। मैंने भाभी की तरफ देखा। उनकी आंखों में निराशा थी। “लेकिन भैया, मेरी नौकरी?” मैंने कहा। “वो मैं देख लूंगा। तुम मेरे साथ काम करोगे,” भैया ने कहा।

रात को भाभी मेरे कमरे में आईं। उनकी आंखों में आंसू थे। “वैभव, तुम चले जाओगे तो मैं अकेली रह जाऊंगी,” भाभी ने कहा। “भाभी, मैं हमेशा आता रहूंगा। और फोन पर भी बात कर सकते हैं,” मैंने कहा। “लेकिन यह सीक्रेट प्लान?” भाभी ने पूछा।

“भाभी, हम एक नया प्लान बनाएंगे। जब भी मैं आऊंगा, हम तीनों मिलकर मस्ती करेंगे,” मैंने कहा। भाभी ने मुझे कसके पकड़ लिया और किस कर लिया। “वैभव, मैं तुमसे प्यार करती हूं,” भाभी ने कहा।

“मैं भी आपसे प्यार करता हूं भाभी,” मैंने कहा। अगले दिन जब मैं जाने लगा तो बरखा भी रो रही थी। “साहब, आप जल्दी आना,” बरखा ने कहा।

“हां बरखा, मैं जरूर आऊंगा,” मैंने कहा और उसके मम्मे दबा दिए। भैया ने देखा नहीं, वह गाड़ी में बैठे थे। मैंने भाभी को भी गले लगाया और उनकी गांड दबाई। “अलविदा भाभी,” मैंने कहा। “अलविदा वैभव, जल्दी आना,” भाभी ने कहा। मैं गाड़ी में बैठा और चल दिया।

लेकिन मैं जानता था कि यह सीक्रेट प्लान जारी रहेगा। जब भी मैं आऊंगा, भाभी और बरखा मिलकर मुझे अपना लेंगी। यह घर की चाबी मेरे पास ही रहेगी और हम तीनों का यह रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा। भाभी चुदाई, नौकरानी बरखा सेक्स, भाभी और नौकरानी, घर में चुदाई, भाभी की गांड मारी

मैं अपने पाठकों और कहानी पढ़ने और उस पर प्रतिक्रिया देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ। यदि आप अपनी कहानियाँ या टिप्पणियाँ साझा करना चाहते हैं, तो कृपया vikasgoel4952@gmail.com पर ईमेल करें या मुझसे संपर्क करें । मैं हमेशा आपकी टिप्पणियों का इंतजार करता हूँ।

New Story :- विधवा पड़ोसन भाभी के साथ सेक्स

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