वो जुलाई का महीना था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और हवा में महक थी मिट्टी की। मानसून दिल्ली में अपनी पूरी तरह से दस्तक दे चुका था। रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे और बारिश तेजी से गिर रही थी। बारिश की वो रात: इनवर्टर डाउन होने के बाद । मैं अपने कमरे में बैठा लैपटॉप पर काम कर रहा था।
मेरा नाम रोहन है और मैं 28 साल का एक हैंडसम लड़का हूं। मेरी हाइट 6 फीट है और बॉडी एथलेटिक बिल्ड की है। मैंने जिम बहुत रेग्युलर किया है इसलिए मेरी बॉडी पर अच्छी मसल्स हैं।
मेरे घर में मेरे माता-पिता, मेरी बड़ी भाभी और मेरा बड़ा भैया रहते हैं। मेरा बड़ा भैया राहुल एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है और अक्सर टूर पर बाहर रहता है। इस समय वो बैंगलोर गया हुआ है दो हफ्ते के लिए। घर में मेरे माता-पिता अपने कमरे में सो रहे हैं और भाभी अपने कमरे में अकेली हैं।
मेरी भाभी का नाम प्रिया है। उनकी उम्र 30 साल है और वो बेहद खूबसूरत हैं। उनकी हाइट 5 फीट 6 इंच है और फिगर 34-28-36 है। उनकी स्किन इतनी गोरी और सॉफ्ट है कि देखते ही बनती है।
उनके बाल कंधे तक हैं और हमेशा खुले रहते हैं। उनकी आंखें बड़ी-बड़ी और काली हैं जिनमें काजल लगाने के बाद वो और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हैं। उनके होंठ गुलाबी और मोटे हैं। जब वो मुस्कुराती हैं तो उनके गालों पर दो गड्ढे पड़ जाते हैं।
मैं हमेशा से ही अपनी भाभी को देखकर अट्रैक्ट होता था लेकिन कभी हिम्मत नहीं जुटा पाया कि उनसे अपनी फीलिंग्स शेयर करूं। लेकिन आज रात कुछ अलग थी। बारिश की वजह से मौसम बेहद रोमांटिक हो गया था और मेरा मन बेचैन हो रहा था।
अचानक बिजली चली गई। मैंने सोचा इनवर्टर ऑन हो जाएगा लेकिन कुछ देर इंतजार करने के बाद भी कमरे में अंधेरा ही रहा। मैंने बाहर आकर देखा तो पता चला कि इनवर्टर भी डाउन हो गया है। शायद बैटरी खत्म हो गई है या कोई तकनीकी खराबी आ गई है। पूरे घर में अंधेरा छा गया था। सिर्फ बाहर से बिजली की कौंध कभी-कभी आ रही थी जिससे थोड़ा उजाला हो रहा था।
मैंने अपने फोन की टॉर्च ऑन की और सोचा कि भाभी के कमरे में जाकर देखूं कि वो ठीक हैं या नहीं। वो अकेली हैं और अंधेरे में डर भी सकती हैं। मैंने हल्के कदम उठाए और भाभी के कमरे की तरफ बढ़ गया। उनका कमरा दरवाजे के पास ही था। मैंने दरवाजा खटखटाया।
“भाभी, आप जाग रही हैं?” मैंने धीमी आवाज में पूछा।
“हां रोहन, आओ, दरवाजा खुला है,” भाभी की आवाज आई।
मैंने दरवाजा धक्का दिया और अंदर गया। कमरे में पूरी तरह अंधेरा था। बाहर बिजली कौंधी और मैंने देखा कि भाभी बिस्तर पर बैठी हुई हैं। उन्होंने हल्का सा सूती नाइटी पहना हुआ था जो उनके बदन पर बेहद खूबसूरत लग रहा था। बिजली की रोशनी में उनका चेहरा चमक रहा था।
“भाभी, इनवर्टर डाउन हो गया है। शायद सुबह तक ठीक होगा,” मैंने कहा।
“पता है मुझे, इस अंधेरे में मुझे बहुत डर लग रहा है रोहन,” भाभी की आवाज में घबराहट थी।
“डरो मत भाभी, मैं हूं ना,” मैंने कहा और उनके बिस्तर के पास जाकर बैठ गया।
“तुम यहीं रुको रोहन, प्लीज। मुझे अकेले में डर लग रहा है। बारिश की आवाज और ये अंधेरा… बहुत डरावना लग रहा है,” भाभी ने कहा और मेरा हाथ पकड़ लिया।
उनका हाथ बेहद नरम और ठंडा था। मैंने उनका हाथ अपने दोनों हाथों में ले लिया और सहलाने लगा। “डरो मत प्रिया भाभी, मैं हूं ना तुम्हारे साथ। कुछ नहीं होगा,” मैंने उन्हें दिलासा दिया।
भाभी ने मेरा हाथ और जोर से पकड़ लिया। “रोहन, मुझे पता है तुम हमेशा मेरे साथ हो। तुम्हारे भैया तो हमेशा बाहर रहते हैं। इस घर में मेरा साथ देने वाला सिर्फ तुम ही हो,” भाभी की आवाज में एक अजीब सी भावना थी।
मैं समझ नहीं पा रहा था कि ये भावना क्या है। क्या भाभी भी मुझे… नहीं नहीं, ये मेरा वहम हो सकता है। लेकिन जब भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा था तो मुझे कुछ अलग सा महसूस हुआ था।
“भाभी, मैं यहीं बैठा हूं तुम्हारे साथ। सो जाओ, मैं देख रहा हूं,” मैंने कहा।
“नहीं रोहन, मैं सो नहीं पा रही हूं। बैठो मेरे पास,” भाभी ने कहा और पलंग पर थोड़ा साइड हो गईं।
मैं झिझकते हुए उनके पास बैठ गया। अंधेरे में हम दोनों की सांसें सुनाई दे रही थीं। बाहर बारिश तेजी से गिर रही थी और कभी-कभी बिजली कौंध रही थी। हर बिजली की कौंध में मैं भाभी के चेहरे को देख पा रहा था। वो बेहद खूबसूरत लग रही थीं।
अंधेरे में बढ़ती नजदीकियां
“रोहन, मुझे ठंड लग रही है,” भा�भी ने कहा और कांपने लगीं।
मैंने उनकी कंबल ओढ़ाई हुई देखी। “भाभी, कंबल ओढ़ लो,” मैंने कहा।
“नहीं, वो कंबल गीली हो गई है। छत से पानी टपक रहा था और कंबल भीग गया,” भाभी ने कहा।
मैंने महसूस किया कि सच में कमरे में नमी थी। बारिश की वजह से छत से पानी टपक रहा था। “भाभी, मैं अपना कंबल ले आता हूं,” मैंने कहा और उठने लगा।
“नहीं रोहन, प्लीज मत जाओ। मुझे अकेला मत छोड़ो,” भाभी ने मेरा हाथ खींच लिया।
मैं फिर से बैठ गया। “तो फिर?” मैंने पूछा।
“तुम भी मेरे साथ कंबल में आ जाओ। वैसे भी हम दोनों को ठंड लग रही है,” भाभी ने कहा और मेरा चेहरा देखने लगीं।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। क्या भाभी सच में ये कह रही हैं? क्या मुझे उनके साथ कंबल में जाना चाहिए? मेरे मन में हजार सवाल उठ रहे थे लेकिन मेरा दिल कह रहा था कि ये मौका बार-बार नहीं मिलेगा।
“भाभी, लेकिन…” मैंने हिचकिचाते हुए कहा।
“कोई लेकिन-वेकिन नहीं रोहन। मैं तुम्हारी भाभी हूं और तुम मेरे देवर। हम परिवार हैं। इस अंधेरे में कोई नहीं जानेगा। बस ठंड से बचने के लिए एक साथ सो रहे हैं। और वैसे भी, तुम्हें मुझसे कुछ गलत नहीं लगता ना?” भाभी ने पूछा।
“नहीं भाभी, आप तो मेरी भाभी हो। मैं आपका सम्मान करता हूं,” मैंने कहा।
“तो फिर आओ,” भाभी ने कहा और कंबल उठा ली।
मैंने हिम्मत करके उनके साथ कंबल में घुस गया। कंबल छोटी थी इसलिए हम दोनों को काफी करीब आना पड़ा। भाभी का बदन मेरे बदन से सट गया। उनकी नाइटी बेहद पतली थी और मैं उनके बदन की गर्मी महसूस कर पा रहा था। उनकी सांसें मेरे गालों पर पड़ रही थीं।
“रोहन, तुम्हारे बदन से बहुत गर्मी निकल रही है,” भाभी ने धीमी आवाज में कहा।
“सॉरी भाभी,” मैंने कहा और थोड़ा पीछे हटने की कोशिश की।
“अरे नहीं, ये तो अच्छी बात है। मुझे ठंड लग रही थी, तुम्हारी गर्मी से मुझे सुकून मिल रहा है,” भाभी ने कहा और मेरे और करीब आ गईं।
अब हम दोनों का बदन पूरी तरह एक-दूसरे से सटा हुआ था। मैं भाभी की खुशबू से मदहोश हो रहा था। उन्होंने कोई परफ्यूम लगाया हुआ था जो बेहद सुगंधित था। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था और मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूं।
“रोहन, क्या तुमने कभी किसी लड़की को प्यार किया है?” भाभी ने अचानक पूछा।
“हां भाभी, कॉलेज में एक लड़की थी लेकिन फिर ब्रेकअप हो गया,” मैंने कहा।
“अब कोई गर्लफ्रेंड नहीं है?” भाभी ने पूछा।
“नहीं भाभी, कोई नहीं है,” मैंने कहा।
“तो फिर तुम्हारी जरूरतें कैसे पूरी होती हैं?” भाभी ने सीधे सवाल पूछा।
मैं शर्मा गया। “भाभी, ये कैसा सवाल है?” मैंने हिचकिचाते हुए कहा।
“अरे बोलो ना रोहन। हम दोनों के बीच क्या छुपाना। मैं तुम्हारी भाभी हूं, मुझसे शर्माओ मत,” भाभी ने कहा और मेरे सीने पर हाथ रख दिया।
मेरा दिल मुंह में आ गया। भाभी का हाथ मेरे सीने पर था और वो मेरी आंखों में देख रही थीं। अंधेरे में भी मुझे उनकी आंखों की चमक दिखाई दे रही थी।
“भाभी, मैं… मैं अकेला ही…” मैंने कहा।
“समझ गई। तुम्हें बहुत तकलीफ होती होगी ना?” भाभी ने सहानुभूति से पूछा।
“हां, कभी-कभी,” मैंने कहा।
“रोहन, मैं जानती हूं कि तुम मुझे देखकर क्या सोचते हो। मैंने कई बार तुम्हें मुझे घूरते हुए देखा है। जब मैं साड़ी पहनती हूं या कोई और पोशाक, तुम्हारी नजरें मुझ पर ही टिकी रहती हैं,” भाभी ने कहा।
मैं चौंक गया। क्या भाभी को सब पता था? “भाभी, मैं… मुझे माफ कर दो,” मैंने कहा।
“अरे पागल, माफी किस बात की। मैं तो खुश हूं कि तुम मुझे पसंद करते हो। तुम्हारे भैया तो मुझे समय ही नहीं देते। वो हमेशा बाहर रहते हैं और जब आते हैं तो थके हुए रहते हैं। मेरी जरूरतें अधूरी रह जाती हैं,” भाभी ने अपने दिल की बात कही।
मैं समझ गया कि भाभी क्या कहना चाह रही हैं। उनकी शादी को चार साल हो चुके थे लेकिन वो अभी भी बच्चे नहीं हो पाए थे। शायद भैया की बिजी शेड्यूल की वजह से उनके बीच की दूरी बढ़ गई थी।
“भाभी, आप मुझे अपना दोस्त समझो। जो भी दिल में है बेझिझक बताओ,” मैंने हिम्मत करके कहा।
“रोहन, मैं तुमसे कुछ पूछूं, सच-सच बताना। क्या तुम मुझे पसंद करते हो? मतलब… उस तरह से?” भाभी ने पूछा।
मैंने हिम्मत जुटाई और कहा, “हां भाभी, मैं आपको बहुत पसंद करता हूं। आप बेहद खूबसूरत हैं और जब भी मैं आपको देखता हूं, मेरा दिल धड़कने लगता है।”
भाभी ने मेरा चेहरा अपने हाथों में ले लिया। “थैंक यू रोहन। तुम्हें पता है, मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं। जब से तुम इस घर में आए हो, मैंने नोटिस किया है कि तुम मुझे कैसे देखते हो। मुझे अच्छा लगता है जब तुम मुझे घूरते हो।”
ये सुनकर मैं हैरान रह गया। भाभी भी मुझे पसंद करती थीं? ये मेरे लिए सपने जैसा था।
“रोहन, क्या तुम मुझे किस करोगे?” भाभी ने अचानक पूछा।
मैं उनकी आंखों में देख रहा था। उनकी आंखों में वो चमक थी जो प्यार की होती है। “हां भाभी,” मैंने धीमी आवाज में कहा।
भाभी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपने होंठ आगे कर दिए। मैंने हिम्मत जुटाई और धीरे से उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहली बार जब मैंने भाभी को किस किया तो मुझे बिजली सी कौंध गई। उनके होंठ बेहद नरम और मीठे थे। मैंने धीरे-धीरे उनके होंठों को चूसना शुरू किया।
भाभी भी मेरा साथ दे रही थीं। उन्होंने अपने हाथ मेरे बालों में फेर दिए और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। हम दोनों एक-दूसरे को पागलों की तरह किस कर रहे थे। अंधेरे कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज और बाहर बारिश की आवाज सुनाई दे रही थी।
करीब पांच मिनट तक हम एक-दूसरे को किस करते रहे। फिर भाभी ने मुझे थोड़ा दूर किया और मेरी आंखों में देखने लगीं।
“रोहन, ये गलत है लेकिन फिर भी मुझे अच्छा लग रहा है। तुम्हें कैसा लग रहा है?” भाभी ने पूछा।
“भाभी, ये गलत नहीं है। हम दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं। प्यार में कुछ गलत नहीं होता,” मैंने कहा।
“प्यार? क्या तुम मुझसे प्यार करते हो रोहन?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं। पहले दिन से ही जब मैंने आपको देखा था, मैं आपके प्यार में पड़ गया था,” मैंने अपने दिल की बात कही।
भाभी की आंखों में आंसू आ गए। “मैं भी तुमसे प्यार करती हूं रोहन। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं अपने देवर से प्यार करूंगी लेकिन तुम अलग हो। तुम मुझे समझते हो, मेरी केयर करते हो।”
मैंने उनके आंसू पोंछे और फिर से उन्हें किस कर लिया। इस बार हमारा किस और भी ज्यादा पैशनेट था। मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी और उनकी जीभ से खेलने लगा। भाभी भी पूरी तरह से मेरे साथ थीं। वो मेरी जीभ को अपनी जीभ से चूस रही थीं।
मेरे हाथ उनकी कमर पर थे और मैं उन्हें अपनी तरफ खींच रहा था। हम दोनों का बदन एक-दूसरे से सटा हुआ था और मैं उनके बदन की नरमाई महसूस कर पा रहा था।
“रोहन, मुझे और चाहिए। मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए,” भाभी ने कहा।
“भाभी, मैं भी आपको पूरा प्यार देना चाहता हूं। लेकिन क्या ये सही होगा?” मैंने पूछा।
“रोहन, इस अंधेरे में कोई नहीं देख रहा। सिर्फ हम दोनों हैं। और ये बारिश… ये बारिश हमारी गवाह है। प्लीज रोहन, मुझे अधूरा मत छोड़ो,” भाभी ने विनती की।
मैंने उन्हें फिर से किस किया और इस बार मेरे हाथ उनकी नाइटी पर चलने लगे। मैंने धीरे से उनकी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके मैंने सारे बटन खोल दिए और उनकी नाइटी खोल दी।
भाभी ने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी। जैसे ही नाइटी खुली, उनके गोल-गोल स्तन मेरे सामने आ गए। बिजली की कौंध में मैंने उनके स्तन देखे और मेरा दिल धड़कने लगा। उनके स्तन बेहद सुडौल और गोल थे। निप्प्स गुलाबी और खड़े हुए थे।
“क्या देख रहे हो रोहन? पसंद आए?” भाभी ने शर्माते हुए पूछा।
“भाभी, आप बेहद खूबसूरत हैं। आपके स्तन बेहद सुंदर हैं,” मैंने कहा।
“तो फिर छूओ ना, महसूस करो,” भाभी ने कहा।
मैंने अपने हाथ उनके स्तनों पर रख दिए। वो बेहद नरम थे, जैसे कोई गद्दा हो। मैंने धीरे से उन्हें दबाना शुरू किया और सहलाने लगा। भाभी की सांसें तेज हो गईं और वो मुझे कस के पकड़ने लगीं।
“आह्ह्ह… रोहन… बहुत मजा आ रहा है,” भाभी ने आह भरी।
मैंने एक स्तन को अपने हाथ में लिया और दूसरे को अपने मुंह में ले लिया। मैंने उनके निप्पल को जीभ से चाटना शुरू किया और चूसने लगा। भाभी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं।
“ऊह्ह्ह… हां रोहन… और चूसो… बहुत अच्छा लग रहा है,” भाभी ने कहा।
मैं एक स्तन को मुंह में लेकर चूस रहा था और दूसरे को हाथ से दबा रहा था। भाभी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थीं। उन्होंने अपने हाथ मेरे सिर पर रख दिए और मुझे अपने स्तनों पर दबाने लगीं।
करीब दस मिनट तक मैंने उनके स्तनों का आनंद लिया। फिर मेरा हाथ नीचे की तरफ बढ़ा। मैंने उनकी नाइटी पूरी तरह ऊपर उठा दी और उनकी पैंटी को भी नीचे कर दिया। भाभी ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि वो पूरी तरह से मेरे साथ थीं।
अब भाभी पूरी तरह से नंगी थीं। मैंने अपना हाथ उनकी जांघों पर फेरा। उनकी जांघें बेहद नरम और गोल थीं। मैं धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रहा था।
“रोहन, प्लीज… मुझे और नहीं रुक सकती,” भाभी ने कहा।
मैंने उनकी योनि को छुआ। वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी एक उंगली अंदर डाल दी और भाभी के मुंह से एक लंबी सिसकी निकली।
“ओह्ह्ह… रोहन… ये क्या कर रहे हो?” भाभी ने पूछा।
“आपको प्यार दे रहा हूं भाभी,” मैंने कहा और उनके होंठों पर किस कर दिया।
मैंने अपनी उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया। भाभी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थीं। उनका शरीर कांप रहा था और वो मेरे हाथ को अपनी योनि पर दबा रही थीं।
“और तेज रोहन… और तेज करो,” भाभी ने कहा।
मैंने अपनी उंगली की स्पीड बढ़ा दी। साथ ही मैं उनके होंठों को भी किस कर रहा था। भाभी के मुंह से अजीब-अजीब आवाजें निकल रही थीं और वो बेकाबू हो रही थीं।
अचानक भाभी ने मुझे धक्का दिया और मुझे पलंग पर लिटा दिया। “अब मेरी बारी,” भाभी ने कहा और मेरे ऊपर आ गईं।
उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए। पहले उन्होंने मेरी टी-शर्ट उतारी और फिर मेरी पैंट। मैंने अंदर अंडरवियर पहना हुआ था जिसमें मेरा लिंग पूरी तरह से खड़ा था।
“वाह रोहन, तुम तो बड़े तैयार हो,” भाभी ने मेरे लिंग को देखकर कहा।
“आपके लिए हमेशा तैयार भाभी,” मैंने कहा।
भाभी ने मेरी अंडरवियर नीचे की और मेरा लिंग बाहर आ गया। वो करीब 7 इंच का था और पूरी तरह से कड़क। भाभी ने उसे अपने हाथ में लिया और सहलाने लगीं।
“कितना मोटा और बड़ा है रोहन। तुम्हारे भैया का तो आधा ही है,” भाभी ने कहा।
“क्या आपने भैया का देखा है?” मैंने पूछा।
“हां, कभी-कभी देख लेती हूं। लेकिन तुम्हारा तो बहुत बड़ा है,” भाभी ने कहा और मेरे लिंग को चूम लिया।
मुझे बिजली सी कौंध गई। भाभी ने मेरे लिंग के सुपाड़े पर अपनी जीभ फेरी और फिर उसे अपने मुंह में ले लिया। वो मेरे लिंग को चूसने लगीं और मैं स्वर्ग में पहुंच गया।
“ओह्ह्ह भाभी… बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
भाभी मेरे लिंग को बड़े मजे से चूस रही थीं। वो कभी ऊपर से नीचे तक चूसतीं, तो कभी सिर्फ सुपाड़े को अपनी जीभ से चाटतीं। मैं उनके बालों को सहला रहा था और उन्हें और जोर से अपने लिंग पर दबा रहा था।
करीब पंद्रह मिनट तक भाभी ने मेरे लिंग का आनंद लिया। फिर वो ऊपर आईं और मेरे कान में फुसफुसाईं, “रोहन, अब और नहीं रुक सकती। प्लीज अब डाल दो।”
मैंने भाभी को पलंग पर लिटा दिया और उनके पैरों को फैला दिया। अंधेरे में भी मैं उनकी योनि देख पा रहा था। वो पूरी तरह से गीली थी और उनके योनि से पानी निकल रहा था।
मैंने अपने लिंग को उनकी योनि के मुंह पर रखा और धीरे से धक्का दिया। वो आधा अंदर चला गया और भाभी के मुंह से दर्द भरी चीख निकली।
“आह्ह्ह… रोहन… धीरे… थोड़ा धीरे,” भाभी ने कहा।
“सॉरी भाभी, लेकिन आप बहुत टाइट हो,” मैंने कहा।
“हां, बहुत दिनों से कुछ नहीं हुआ इसलिए,” भाभी ने कहा।
मैंने थोड़ा रुककर उनके होंठों पर किस किया और फिर से धीरे से धक्का दिया। इस बार मेरा पूरा लिंग अंदर चला गया। भाभी ने मुझे कस के पकड़ लिया और अपने नाखून मेरी पीठ में गाड़ दिए।
“ओह्ह्ह… रोहन… बहुत बड़ा है तुम्हारा,” भाभी ने कहा।
मैंने धीरे-धीरे अपने लिंग को अंदर-बाहर करना शुरू किया। पहले-पहले धीरे-धीरे और फिर तेजी से। भाभी के मुंह से सिसकियां निकल रही थीं और वो मेरे साथ तालमेल बिठा रही थीं।
“और तेज रोहन… और तेज… मुझे पूरा दो अपना प्यार,” भाभी चिल्ला रही थीं।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब मैं पूरी तेजी से उन्हें चोद रहा था। पलंग की चरचराहट की आवाज और हमारी सांसों की आवाज कमरे में गूंज रही थी। बाहर बारिश भी तेजी से गिर रही थी जो हमारे जुनून को और बढ़ा रही थी।
“आह्ह्ह… हां… हां रोहन… बस वहीं… और तेज… मैं आने वाली हूं,” भाभी चिल्लाईं।
मैंने और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। भाभी पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थीं। उनका शरीर कांप रहा था और वो मुझे अपनी बाहों में कस के पकड़े हुए थीं।
अचानक भाभी ने एक लंबी सिसकी ली और उनका शरीर ऐंठ गया। वो झड़ चुकी थीं। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और कुछ ही देर में मैं भी झड़ गया। मैंने अपना सारा वीर्य भाभी की योनि में ही छोड़ दिया।
हम दोनों थक कर एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। मैंने भाभी को अपनी बाहों में भर लिया और उनके होंठों पर किस कर दिया।
“रोहन, ये बेहतरीन था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि इतना मजा आ सकता है,” भाभी ने कहा।
“भाभी, मैं भी ये पल कभी नहीं भूलूंगा। आप बेहद खूबसूरत हैं और मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं,” मैंने कहा।
“मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं रोहन। तुमने मेरी जिंदगी में खुशियां भर दी हैं,” भाभी ने कहा।
हम दोनों एक-दूसरे के बाहों में लेटे रहे। बाहर बारिश अभी भी हो रही थी और कभी-कभी बिजली कौंध रही थी। लेकिन अब हमें अंधेरे से कोई डर नहीं था। हमारे प्यार ने हमें रोशन कर दिया था।
करीब आधे घंटे बाद हम दोनों फिर से तैयार थे। भाभी ने मेरे लिंग को सहलाया और वो फिर से खड़ा हो गया।
“रोहन, एक बार और करोगे?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी, आपके लिए तो कितनी भी बार,” मैंने कहा।
इस बार भाभी ने मुझे पलंग पर लिटाया और मेरे ऊपर आ गईं। उन्होंने मेरे लिंग को अपने हाथ में लिया और अपनी योनि में डाल लिया। अब वो मेरे ऊपर उछल-उछल कर चुदाई कर रही थीं।
मैं उनके स्तनों को दबा रहा था और वो मेरे लिंग पर बैठकर नाच रही थीं। ये दृश्य बेहद सेक्सी था। भाभी के बाल उनके चेहरे पर गिरे हुए थे और वो पूरी तरह से नंगी मेरे ऊपर बैठी थीं।
“आह्ह्ह… रोहन… बहुत मजा आ रहा है,” भाभी चिल्ला रही थीं।
मैंने उनकी कमर पकड़ ली और नीचे से धक्के लगाने लगा। अब हम दोनों एक-दूसरे को पूरी तरह से दे रहे थे। भाभी की योनि मेरे लिंग को कस के पकड़े हुए थी और मुझे बेहद मजा आ रहा था।
“और तेज रोहन… और तेज… मुझे फाड़ दो,” भाभी अश्लील बातें कर रही थीं।
ये सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया। मैंने उन्हें पलट दिया और पीछे से उनकी चूत में अपना लिंग डाल दिया। अब मैं डॉगी स्टाइल में उन्हें चोद रहा था।
“आह्ह्ह… हां… बस यहीं… और जोर से,” भाभी चिल्ला रही थीं।
मैंने उनके बाल पकड़ लिए और पीछे की तरफ खींचते हुए उन्हें चोदने लगा। भाभी का चेहरा पीछे की तरफ था और मैं उनके होंठों को चूस रहा था।
करीब बीस मिनट तक इसी पोजीशन में चुदाई करने के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए। इस बार भी मैंने अपना सारा माल भाभी की योनि में ही छोड़ा।
हम दोनों थक कर पलंग पर गिर गए। भाभी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे सीने पर सिर रख दिया।
“रोहन, मैं तुम्हारी हो गई हूं। अब मैं सिर्फ तुम्हारी हूं,” भाभी ने कहा।
“भाभी, मैं भी सिर्फ आपका हूं। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं,” मैंने कहा।
हम दोनों एक-दूसरे के बाहों में सो गए। बाहर बारिश सुबह तक होती रही और हम दोनों रात भर एक-दूसरे का प्यार लेते रहे।
सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि भाभी मेरे बगल में सो रही हैं। उनका चेहरा बेहद खूबसूरत लग रहा था। मैंने धीरे से उनके माथे पर किस किया।
भाभी की आंख खुली और उन्होंने मुझे देखकर मुस्कुरा दिया। “गुड मॉर्निंग रोहन,” उन्होंने कहा।
“गुड मॉर्निंग भाभी,” मैंने कहा।
“कैसी रही रात?” भाभी ने पूछा।
“बेहतरीन भाभी, जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात,” मैंने कहा।
“मेरे लिए भी,” भाभी ने कहा और मेरे होंठों पर किस कर दिया।
हम दोनों एक-दूसरे के बाहों में थे। बाहर बारिश अभी भी हल्की-हल्की हो रही थी और मौसम बेहद सुहाना था।
“रोहन, क्या हम ये रिश्ता जारी रख सकते हैं?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी, क्यों नहीं। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं और मैं चाहता हूं कि हम हमेशा एक-दूसरे के पास रहें,” मैंने कहा।
“लेकिन तुम्हारे भैया का क्या? अगर उन्हें पता चल गया तो?” भाभी चिंतित होकर बोलीं।
“डरो मत भाभी, हम सावधानी से रहेंगे। कोई नहीं जानेगा हमारे बारे में। ये हमारा सीक्रेट रहेगा,” मैंने कहा।
भाभी ने राहत की सांस ली। “ठीक है रोहन, जैसा तुम कहो। मैं तुम्हारी हूं और हमेशा रहूंगी।”
मैंने उन्हें फिर से अपनी बाहों में भर लिया। हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे और फिर से प्यार करने लगे। इस बार सुबह की रोशनी में हम एक-दूसरे को देखते हुए प्यार कर रहे थे।
भाभी का बदन बेहद खूबसूरत लग रहा था। मैंने उनके हर हिस्से को चूमा और उन्हें पूरा संतुष्ट किया। भाभी भी मेरे लिंग को बड़े प्यार से चूसीं और मुझे मजा दिया।
हम दोनों ने सुबह फिर से दो बार प्यार किया। फिर हमने फैसला किया कि मैं अपने कमरे में चला जाऊं ताकि कोई शक न हो।
मैंने अपने कपड़े पहने और भाभी को एक लंबा किस करके अपने कमरे में आ गया। मेरे माता-पिता अभी भी सो रहे थे। मैंने अपने बेड पर लेटकर सोचा कि कल रात क्या हुआ।
मैं बेहद खुश था। मुझे अपनी मनपसंद भाभी का प्यार मिल गया था। वो भी मुझे पसंद करती थीं और हम दोनों ने अपने प्यार को एक नया रूप दे दिया था।
कुछ देर बाद मैं उठा और बाथरूम में गया। नहाने के बाद मैं बाहर आया तो देखा कि भाभी रसोई में चाय बना रही हैं। उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी और वो बेहद खूबसूरत लग रही थीं।
“गुड मॉर्निंग रोहन,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
“गुड मॉर्निंग भाभी,” मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा।
हम दोनों के बीच एक अलग सी समझ थी। कोई और नहीं समझ सकता था ये बात। हमारी आंखें एक-दूसरे से बात कर रही थीं।
“चाय पीओगे?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी,” मैंने कहा।
भाभी ने मेरे लिए चाय बनाई और मेरे हाथ में देते हुए उन्होंने धीरे से मेरे हाथ को छुआ। मुझे बिजली सी लगी।
“रात को फिर आओगे?” भाभी ने धीमी आवाज में पूछा।
“हां भाभी, जरूर आऊंगा,” मैंने कहा।
भाभी ने मुस्कुरा दिया और वापस अपने काम में लग गईं। मैंने चाय पी और ऑफिस के लिए तैयार होने लगा।
उस दिन ऑफिस में मैं काम पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। मेरे दिमाग में सिर्फ भाभी का ख्याल आ रहा था। उनकी खूबसूरती, उनकी मुस्कान, उनका बदन… सब कुछ मुझे मदहोश किए जा रहा था।
शाम को जब मैं घर आया तो भाभी ने मेरे लिए खाना बनाया था। हम दोनों ने साथ में खाना खाया और फिर मेरे माता-पिता सोने चले गए।
रात को फिर से मैं भाभी के कमरे में गया। इस बार इनवर्टर ठीक था लेकिन हमने लाइट बंद करके ही प्यार किया। वो रात भी बेहद यादगार रही।
रात को भाभी वो जुलाई का महीना था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और हवा में महक थी मिट्टी की। मानसून दिल्ली में अपनी पूरी तरह से दस्तक दे चुका था। रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे और बारिश तेजी से गिर रही थी। बारिश की वो रात: इनवर्टर डाउन होने के बाद । मैं अपने कमरे में बैठा लैपटॉप पर काम कर रहा था।
मेरा नाम रोहन है और मैं 28 साल का एक हैंडसम लड़का हूं। मेरी हाइट 6 फीट है और बॉडी एथलेटिक बिल्ड की है। मैंने जिम बहुत रेग्युलर किया है इसलिए मेरी बॉडी पर अच्छी मसल्स हैं।
मेरे घर में मेरे माता-पिता, मेरी बड़ी भाभी और मेरा बड़ा भैया रहते हैं। मेरा बड़ा भैया राहुल एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है और अक्सर टूर पर बाहर रहता है। इस समय वो बैंगलोर गया हुआ है दो हफ्ते के लिए। घर में मेरे माता-पिता अपने कमरे में सो रहे हैं और भाभी अपने कमरे में अकेली हैं।
मेरी भाभी का नाम प्रिया है। उनकी उम्र 30 साल है और वो बेहद खूबसूरत हैं। उनकी हाइट 5 फीट 6 इंच है और फिगर 34-28-36 है। उनकी स्किन इतनी गोरी और सॉफ्ट है कि देखते ही बनती है।
उनके बाल कंधे तक हैं और हमेशा खुले रहते हैं। उनकी आंखें बड़ी-बड़ी और काली हैं जिनमें काजल लगाने के बाद वो और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हैं। उनके होंठ गुलाबी और मोटे हैं। जब वो मुस्कुराती हैं तो उनके गालों पर दो गड्ढे पड़ जाते हैं।
मैं हमेशा से ही अपनी भाभी को देखकर अट्रैक्ट होता था लेकिन कभी हिम्मत नहीं जुटा पाया कि उनसे अपनी फीलिंग्स शेयर करूं। लेकिन आज रात कुछ अलग थी। बारिश की वजह से मौसम बेहद रोमांटिक हो गया था और मेरा मन बेचैन हो रहा था।
अचानक बिजली चली गई। मैंने सोचा इनवर्टर ऑन हो जाएगा लेकिन कुछ देर इंतजार करने के बाद भी कमरे में अंधेरा ही रहा। मैंने बाहर आकर देखा तो पता चला कि इनवर्टर भी डाउन हो गया है। शायद बैटरी खत्म हो गई है या कोई तकनीकी खराबी आ गई है। पूरे घर में अंधेरा छा गया था। सिर्फ बाहर से बिजली की कौंध कभी-कभी आ रही थी जिससे थोड़ा उजाला हो रहा था।
मैंने अपने फोन की टॉर्च ऑन की और सोचा कि भाभी के कमरे में जाकर देखूं कि वो ठीक हैं या नहीं। वो अकेली हैं और अंधेरे में डर भी सकती हैं। मैंने हल्के कदम उठाए और भाभी के कमरे की तरफ बढ़ गया। उनका कमरा दरवाजे के पास ही था। मैंने दरवाजा खटखटाया।
“भाभी, आप जाग रही हैं?” मैंने धीमी आवाज में पूछा।
“हां रोहन, आओ, दरवाजा खुला है,” भाभी की आवाज आई।
मैंने दरवाजा धक्का दिया और अंदर गया। कमरे में पूरी तरह अंधेरा था। बाहर बिजली कौंधी और मैंने देखा कि भाभी बिस्तर पर बैठी हुई हैं। उन्होंने हल्का सा सूती नाइटी पहना हुआ था जो उनके बदन पर बेहद खूबसूरत लग रहा था। बिजली की रोशनी में उनका चेहरा चमक रहा था।
“भाभी, इनवर्टर डाउन हो गया है। शायद सुबह तक ठीक होगा,” मैंने कहा।
“पता है मुझे, इस अंधेरे में मुझे बहुत डर लग रहा है रोहन,” भाभी की आवाज में घबराहट थी।
“डरो मत भाभी, मैं हूं ना,” मैंने कहा और उनके बिस्तर के पास जाकर बैठ गया।
“तुम यहीं रुको रोहन, प्लीज। मुझे अकेले में डर लग रहा है। बारिश की आवाज और ये अंधेरा… बहुत डरावना लग रहा है,” भाभी ने कहा और मेरा हाथ पकड़ लिया।
उनका हाथ बेहद नरम और ठंडा था। मैंने उनका हाथ अपने दोनों हाथों में ले लिया और सहलाने लगा। “डरो मत प्रिया भाभी, मैं हूं ना तुम्हारे साथ। कुछ नहीं होगा,” मैंने उन्हें दिलासा दिया।
भाभी ने मेरा हाथ और जोर से पकड़ लिया। “रोहन, मुझे पता है तुम हमेशा मेरे साथ हो। तुम्हारे भैया तो हमेशा बाहर रहते हैं। इस घर में मेरा साथ देने वाला सिर्फ तुम ही हो,” भाभी की आवाज में एक अजीब सी भावना थी।
मैं समझ नहीं पा रहा था कि ये भावना क्या है। क्या भाभी भी मुझे… नहीं नहीं, ये मेरा वहम हो सकता है। लेकिन जब भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा था तो मुझे कुछ अलग सा महसूस हुआ था।
“भाभी, मैं यहीं बैठा हूं तुम्हारे साथ। सो जाओ, मैं देख रहा हूं,” मैंने कहा।
“नहीं रोहन, मैं सो नहीं पा रही हूं। बैठो मेरे पास,” भाभी ने कहा और पलंग पर थोड़ा साइड हो गईं।
मैं झिझकते हुए उनके पास बैठ गया। अंधेरे में हम दोनों की सांसें सुनाई दे रही थीं। बाहर बारिश तेजी से गिर रही थी और कभी-कभी बिजली कौंध रही थी। हर बिजली की कौंध में मैं भाभी के चेहरे को देख पा रहा था। वो बेहद खूबसूरत लग रही थीं।
अंधेरे में बढ़ती नजदीकियां
“रोहन, मुझे ठंड लग रही है,” भा�भी ने कहा और कांपने लगीं।
मैंने उनकी कंबल ओढ़ाई हुई देखी। “भाभी, कंबल ओढ़ लो,” मैंने कहा।
“नहीं, वो कंबल गीली हो गई है। छत से पानी टपक रहा था और कंबल भीग गया,” भाभी ने कहा।
मैंने महसूस किया कि सच में कमरे में नमी थी। बारिश की वजह से छत से पानी टपक रहा था। “भाभी, मैं अपना कंबल ले आता हूं,” मैंने कहा और उठने लगा।
“नहीं रोहन, प्लीज मत जाओ। मुझे अकेला मत छोड़ो,” भाभी ने मेरा हाथ खींच लिया।
मैं फिर से बैठ गया। “तो फिर?” मैंने पूछा।
“तुम भी मेरे साथ कंबल में आ जाओ। वैसे भी हम दोनों को ठंड लग रही है,” भाभी ने कहा और मेरा चेहरा देखने लगीं।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। क्या भाभी सच में ये कह रही हैं? क्या मुझे उनके साथ कंबल में जाना चाहिए? मेरे मन में हजार सवाल उठ रहे थे लेकिन मेरा दिल कह रहा था कि ये मौका बार-बार नहीं मिलेगा।
“भाभी, लेकिन…” मैंने हिचकिचाते हुए कहा।
“कोई लेकिन-वेकिन नहीं रोहन। मैं तुम्हारी भाभी हूं और तुम मेरे देवर। हम परिवार हैं। इस अंधेरे में कोई नहीं जानेगा। बस ठंड से बचने के लिए एक साथ सो रहे हैं। और वैसे भी, तुम्हें मुझसे कुछ गलत नहीं लगता ना?” भाभी ने पूछा।
“नहीं भाभी, आप तो मेरी भाभी हो। मैं आपका सम्मान करता हूं,” मैंने कहा।
“तो फिर आओ,” भाभी ने कहा और कंबल उठा ली।
मैंने हिम्मत करके उनके साथ कंबल में घुस गया। कंबल छोटी थी इसलिए हम दोनों को काफी करीब आना पड़ा। भाभी का बदन मेरे बदन से सट गया। उनकी नाइटी बेहद पतली थी और मैं उनके बदन की गर्मी महसूस कर पा रहा था। उनकी सांसें मेरे गालों पर पड़ रही थीं।
“रोहन, तुम्हारे बदन से बहुत गर्मी निकल रही है,” भाभी ने धीमी आवाज में कहा।
“सॉरी भाभी,” मैंने कहा और थोड़ा पीछे हटने की कोशिश की।
“अरे नहीं, ये तो अच्छी बात है। मुझे ठंड लग रही थी, तुम्हारी गर्मी से मुझे सुकून मिल रहा है,” भाभी ने कहा और मेरे और करीब आ गईं।
अब हम दोनों का बदन पूरी तरह एक-दूसरे से सटा हुआ था। मैं भाभी की खुशबू से मदहोश हो रहा था। उन्होंने कोई परफ्यूम लगाया हुआ था जो बेहद सुगंधित था। मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था और मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूं।
“रोहन, क्या तुमने कभी किसी लड़की को प्यार किया है?” भाभी ने अचानक पूछा।
“हां भाभी, कॉलेज में एक लड़की थी लेकिन फिर ब्रेकअप हो गया,” मैंने कहा।
“अब कोई गर्लफ्रेंड नहीं है?” भाभी ने पूछा।
“नहीं भाभी, कोई नहीं है,” मैंने कहा।
“तो फिर तुम्हारी जरूरतें कैसे पूरी होती हैं?” भाभी ने सीधे सवाल पूछा।
मैं शर्मा गया। “भाभी, ये कैसा सवाल है?” मैंने हिचकिचाते हुए कहा।
“अरे बोलो ना रोहन। हम दोनों के बीच क्या छुपाना। मैं तुम्हारी भाभी हूं, मुझसे शर्माओ मत,” भाभी ने कहा और मेरे सीने पर हाथ रख दिया।
मेरा दिल मुंह में आ गया। भाभी का हाथ मेरे सीने पर था और वो मेरी आंखों में देख रही थीं। अंधेरे में भी मुझे उनकी आंखों की चमक दिखाई दे रही थी।
“भाभी, मैं… मैं अकेला ही…” मैंने कहा।
“समझ गई। तुम्हें बहुत तकलीफ होती होगी ना?” भाभी ने सहानुभूति से पूछा।
“हां, कभी-कभी,” मैंने कहा।
“रोहन, मैं जानती हूं कि तुम मुझे देखकर क्या सोचते हो। मैंने कई बार तुम्हें मुझे घूरते हुए देखा है। जब मैं साड़ी पहनती हूं या कोई और पोशाक, तुम्हारी नजरें मुझ पर ही टिकी रहती हैं,” भाभी ने कहा।
मैं चौंक गया। क्या भाभी को सब पता था? “भाभी, मैं… मुझे माफ कर दो,” मैंने कहा।
“अरे पागल, माफी किस बात की। मैं तो खुश हूं कि तुम मुझे पसंद करते हो। तुम्हारे भैया तो मुझे समय ही नहीं देते। वो हमेशा बाहर रहते हैं और जब आते हैं तो थके हुए रहते हैं। मेरी जरूरतें अधूरी रह जाती हैं,” भाभी ने अपने दिल की बात कही।
मैं समझ गया कि भाभी क्या कहना चाह रही हैं। उनकी शादी को चार साल हो चुके थे लेकिन वो अभी भी बच्चे नहीं हो पाए थे। शायद भैया की बिजी शेड्यूल की वजह से उनके बीच की दूरी बढ़ गई थी।
“भाभी, आप मुझे अपना दोस्त समझो। जो भी दिल में है बेझिझक बताओ,” मैंने हिम्मत करके कहा।
“रोहन, मैं तुमसे कुछ पूछूं, सच-सच बताना। क्या तुम मुझे पसंद करते हो? मतलब… उस तरह से?” भाभी ने पूछा।
मैंने हिम्मत जुटाई और कहा, “हां भाभी, मैं आपको बहुत पसंद करता हूं। आप बेहद खूबसूरत हैं और जब भी मैं आपको देखता हूं, मेरा दिल धड़कने लगता है।”
भाभी ने मेरा चेहरा अपने हाथों में ले लिया। “थैंक यू रोहन। तुम्हें पता है, मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं। जब से तुम इस घर में आए हो, मैंने नोटिस किया है कि तुम मुझे कैसे देखते हो। मुझे अच्छा लगता है जब तुम मुझे घूरते हो।”
ये सुनकर मैं हैरान रह गया। भाभी भी मुझे पसंद करती थीं? ये मेरे लिए सपने जैसा था।
“रोहन, क्या तुम मुझे किस करोगे?” भाभी ने अचानक पूछा।
मैं उनकी आंखों में देख रहा था। उनकी आंखों में वो चमक थी जो प्यार की होती है। “हां भाभी,” मैंने धीमी आवाज में कहा।
भाभी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपने होंठ आगे कर दिए। मैंने हिम्मत जुटाई और धीरे से उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहली बार जब मैंने भाभी को किस किया तो मुझे बिजली सी कौंध गई। उनके होंठ बेहद नरम और मीठे थे। मैंने धीरे-धीरे उनके होंठों को चूसना शुरू किया।
भाभी भी मेरा साथ दे रही थीं। उन्होंने अपने हाथ मेरे बालों में फेर दिए और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। हम दोनों एक-दूसरे को पागलों की तरह किस कर रहे थे। अंधेरे कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज और बाहर बारिश की आवाज सुनाई दे रही थी।
करीब पांच मिनट तक हम एक-दूसरे को किस करते रहे। फिर भाभी ने मुझे थोड़ा दूर किया और मेरी आंखों में देखने लगीं।
“रोहन, ये गलत है लेकिन फिर भी मुझे अच्छा लग रहा है। तुम्हें कैसा लग रहा है?” भाभी ने पूछा।
“भाभी, ये गलत नहीं है। हम दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं। प्यार में कुछ गलत नहीं होता,” मैंने कहा।
“प्यार? क्या तुम मुझसे प्यार करते हो रोहन?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं। पहले दिन से ही जब मैंने आपको देखा था, मैं आपके प्यार में पड़ गया था,” मैंने अपने दिल की बात कही।
भाभी की आंखों में आंसू आ गए। “मैं भी तुमसे प्यार करती हूं रोहन। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं अपने देवर से प्यार करूंगी लेकिन तुम अलग हो। तुम मुझे समझते हो, मेरी केयर करते हो।”
मैंने उनके आंसू पोंछे और फिर से उन्हें किस कर लिया। इस बार हमारा किस और भी ज्यादा पैशनेट था। मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी और उनकी जीभ से खेलने लगा। भाभी भी पूरी तरह से मेरे साथ थीं। वो मेरी जीभ को अपनी जीभ से चूस रही थीं।
मेरे हाथ उनकी कमर पर थे और मैं उन्हें अपनी तरफ खींच रहा था। हम दोनों का बदन एक-दूसरे से सटा हुआ था और मैं उनके बदन की नरमाई महसूस कर पा रहा था।
“रोहन, मुझे और चाहिए। मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए,” भाभी ने कहा।
“भाभी, मैं भी आपको पूरा प्यार देना चाहता हूं। लेकिन क्या ये सही होगा?” मैंने पूछा।
“रोहन, इस अंधेरे में कोई नहीं देख रहा। सिर्फ हम दोनों हैं। और ये बारिश… ये बारिश हमारी गवाह है। प्लीज रोहन, मुझे अधूरा मत छोड़ो,” भाभी ने विनती की।
मैंने उन्हें फिर से किस किया और इस बार मेरे हाथ उनकी नाइटी पर चलने लगे। मैंने धीरे से उनकी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके मैंने सारे बटन खोल दिए और उनकी नाइटी खोल दी।
भाभी ने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी। जैसे ही नाइटी खुली, उनके गोल-गोल स्तन मेरे सामने आ गए। बिजली की कौंध में मैंने उनके स्तन देखे और मेरा दिल धड़कने लगा। उनके स्तन बेहद सुडौल और गोल थे। निप्प्स गुलाबी और खड़े हुए थे।
“क्या देख रहे हो रोहन? पसंद आए?” भाभी ने शर्माते हुए पूछा।
“भाभी, आप बेहद खूबसूरत हैं। आपके स्तन बेहद सुंदर हैं,” मैंने कहा।
“तो फिर छूओ ना, महसूस करो,” भाभी ने कहा।
मैंने अपने हाथ उनके स्तनों पर रख दिए। वो बेहद नरम थे, जैसे कोई गद्दा हो। मैंने धीरे से उन्हें दबाना शुरू किया और सहलाने लगा। भाभी की सांसें तेज हो गईं और वो मुझे कस के पकड़ने लगीं।
“आह्ह्ह… रोहन… बहुत मजा आ रहा है,” भाभी ने आह भरी।
मैंने एक स्तन को अपने हाथ में लिया और दूसरे को अपने मुंह में ले लिया। मैंने उनके निप्पल को जीभ से चाटना शुरू किया और चूसने लगा। भाभी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं।
“ऊह्ह्ह… हां रोहन… और चूसो… बहुत अच्छा लग रहा है,” भाभी ने कहा।
मैं एक स्तन को मुंह में लेकर चूस रहा था और दूसरे को हाथ से दबा रहा था। भाभी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थीं। उन्होंने अपने हाथ मेरे सिर पर रख दिए और मुझे अपने स्तनों पर दबाने लगीं।
करीब दस मिनट तक मैंने उनके स्तनों का आनंद लिया। फिर मेरा हाथ नीचे की तरफ बढ़ा। मैंने उनकी नाइटी पूरी तरह ऊपर उठा दी और उनकी पैंटी को भी नीचे कर दिया। भाभी ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि वो पूरी तरह से मेरे साथ थीं।
अब भाभी पूरी तरह से नंगी थीं। मैंने अपना हाथ उनकी जांघों पर फेरा। उनकी जांघें बेहद नरम और गोल थीं। मैं धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रहा था।
“रोहन, प्लीज… मुझे और नहीं रुक सकती,” भाभी ने कहा।
मैंने उनकी योनि को छुआ। वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी एक उंगली अंदर डाल दी और भाभी के मुंह से एक लंबी सिसकी निकली।
“ओह्ह्ह… रोहन… ये क्या कर रहे हो?” भाभी ने पूछा।
“आपको प्यार दे रहा हूं भाभी,” मैंने कहा और उनके होंठों पर किस कर दिया।
मैंने अपनी उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया। भाभी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थीं। उनका शरीर कांप रहा था और वो मेरे हाथ को अपनी योनि पर दबा रही थीं।
“और तेज रोहन… और तेज करो,” भाभी ने कहा।
मैंने अपनी उंगली की स्पीड बढ़ा दी। साथ ही मैं उनके होंठों को भी किस कर रहा था। भाभी के मुंह से अजीब-अजीब आवाजें निकल रही थीं और वो बेकाबू हो रही थीं।
अचानक भाभी ने मुझे धक्का दिया और मुझे पलंग पर लिटा दिया। “अब मेरी बारी,” भाभी ने कहा और मेरे ऊपर आ गईं।
उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए। पहले उन्होंने मेरी टी-शर्ट उतारी और फिर मेरी पैंट। मैंने अंदर अंडरवियर पहना हुआ था जिसमें मेरा लिंग पूरी तरह से खड़ा था।
“वाह रोहन, तुम तो बड़े तैयार हो,” भाभी ने मेरे लिंग को देखकर कहा।
“आपके लिए हमेशा तैयार भाभी,” मैंने कहा।
भाभी ने मेरी अंडरवियर नीचे की और मेरा लिंग बाहर आ गया। वो करीब 7 इंच का था और पूरी तरह से कड़क। भाभी ने उसे अपने हाथ में लिया और सहलाने लगीं।
“कितना मोटा और बड़ा है रोहन। तुम्हारे भैया का तो आधा ही है,” भाभी ने कहा।
“क्या आपने भैया का देखा है?” मैंने पूछा।
“हां, कभी-कभी देख लेती हूं। लेकिन तुम्हारा तो बहुत बड़ा है,” भाभी ने कहा और मेरे लिंग को चूम लिया।
मुझे बिजली सी कौंध गई। भाभी ने मेरे लिंग के सुपाड़े पर अपनी जीभ फेरी और फिर उसे अपने मुंह में ले लिया। वो मेरे लिंग को चूसने लगीं और मैं स्वर्ग में पहुंच गया।
“ओह्ह्ह भाभी… बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
भाभी मेरे लिंग को बड़े मजे से चूस रही थीं। वो कभी ऊपर से नीचे तक चूसतीं, तो कभी सिर्फ सुपाड़े को अपनी जीभ से चाटतीं। मैं उनके बालों को सहला रहा था और उन्हें और जोर से अपने लिंग पर दबा रहा था।
करीब पंद्रह मिनट तक भाभी ने मेरे लिंग का आनंद लिया। फिर वो ऊपर आईं और मेरे कान में फुसफुसाईं, “रोहन, अब और नहीं रुक सकती। प्लीज अब डाल दो।”
मैंने भाभी को पलंग पर लिटा दिया और उनके पैरों को फैला दिया। अंधेरे में भी मैं उनकी योनि देख पा रहा था। वो पूरी तरह से गीली थी और उनके योनि से पानी निकल रहा था।
मैंने अपने लिंग को उनकी योनि के मुंह पर रखा और धीरे से धक्का दिया। वो आधा अंदर चला गया और भाभी के मुंह से दर्द भरी चीख निकली।
“आह्ह्ह… रोहन… धीरे… थोड़ा धीरे,” भाभी ने कहा।
“सॉरी भाभी, लेकिन आप बहुत टाइट हो,” मैंने कहा।
“हां, बहुत दिनों से कुछ नहीं हुआ इसलिए,” भाभी ने कहा।
मैंने थोड़ा रुककर उनके होंठों पर किस किया और फिर से धीरे से धक्का दिया। इस बार मेरा पूरा लिंग अंदर चला गया। भाभी ने मुझे कस के पकड़ लिया और अपने नाखून मेरी पीठ में गाड़ दिए।
“ओह्ह्ह… रोहन… बहुत बड़ा है तुम्हारा,” भाभी ने कहा।
मैंने धीरे-धीरे अपने लिंग को अंदर-बाहर करना शुरू किया। पहले-पहले धीरे-धीरे और फिर तेजी से। भाभी के मुंह से सिसकियां निकल रही थीं और वो मेरे साथ तालमेल बिठा रही थीं।
“और तेज रोहन… और तेज… मुझे पूरा दो अपना प्यार,” भाभी चिल्ला रही थीं।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब मैं पूरी तेजी से उन्हें चोद रहा था। पलंग की चरचराहट की आवाज और हमारी सांसों की आवाज कमरे में गूंज रही थी। बाहर बारिश भी तेजी से गिर रही थी जो हमारे जुनून को और बढ़ा रही थी।
“आह्ह्ह… हां… हां रोहन… बस वहीं… और तेज… मैं आने वाली हूं,” भाभी चिल्लाईं।
मैंने और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। भाभी पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थीं। उनका शरीर कांप रहा था और वो मुझे अपनी बाहों में कस के पकड़े हुए थीं।
अचानक भाभी ने एक लंबी सिसकी ली और उनका शरीर ऐंठ गया। वो झड़ चुकी थीं। मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और कुछ ही देर में मैं भी झड़ गया। मैंने अपना सारा वीर्य भाभी की योनि में ही छोड़ दिया।
हम दोनों थक कर एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। मैंने भाभी को अपनी बाहों में भर लिया और उनके होंठों पर किस कर दिया।
“रोहन, ये बेहतरीन था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि इतना मजा आ सकता है,” भाभी ने कहा।
“भाभी, मैं भी ये पल कभी नहीं भूलूंगा। आप बेहद खूबसूरत हैं और मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं,” मैंने कहा।
“मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं रोहन। तुमने मेरी जिंदगी में खुशियां भर दी हैं,” भाभी ने कहा।
हम दोनों एक-दूसरे के बाहों में लेटे रहे। बाहर बारिश अभी भी हो रही थी और कभी-कभी बिजली कौंध रही थी। लेकिन अब हमें अंधेरे से कोई डर नहीं था। हमारे प्यार ने हमें रोशन कर दिया था।
रात भर का प्यार
करीब आधे घंटे बाद हम दोनों फिर से तैयार थे। भाभी ने मेरे लिंग को सहलाया और वो फिर से खड़ा हो गया।
“रोहन, एक बार और करोगे?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी, आपके लिए तो कितनी भी बार,” मैंने कहा।
इस बार भाभी ने मुझे पलंग पर लिटाया और मेरे ऊपर आ गईं। उन्होंने मेरे लिंग को अपने हाथ में लिया और अपनी योनि में डाल लिया। अब वो मेरे ऊपर उछल-उछल कर चुदाई कर रही थीं।
मैं उनके स्तनों को दबा रहा था और वो मेरे लिंग पर बैठकर नाच रही थीं। ये दृश्य बेहद सेक्सी था। भाभी के बाल उनके चेहरे पर गिरे हुए थे और वो पूरी तरह से नंगी मेरे ऊपर बैठी थीं।
“आह्ह्ह… रोहन… बहुत मजा आ रहा है,” भाभी चिल्ला रही थीं।
मैंने उनकी कमर पकड़ ली और नीचे से धक्के लगाने लगा। अब हम दोनों एक-दूसरे को पूरी तरह से दे रहे थे। भाभी की योनि मेरे लिंग को कस के पकड़े हुए थी और मुझे बेहद मजा आ रहा था।
“और तेज रोहन… और तेज… मुझे फाड़ दो,” भाभी अश्लील बातें कर रही थीं।
ये सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया। मैंने उन्हें पलट दिया और पीछे से उनकी चूत में अपना लिंग डाल दिया। अब मैं डॉगी स्टाइल में उन्हें चोद रहा था।
“आह्ह्ह… हां… बस यहीं… और जोर से,” भाभी चिल्ला रही थीं।
मैंने उनके बाल पकड़ लिए और पीछे की तरफ खींचते हुए उन्हें चोदने लगा। भाभी का चेहरा पीछे की तरफ था और मैं उनके होंठों को चूस रहा था।
करीब बीस मिनट तक इसी पोजीशन में चुदाई करने के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए। इस बार भी मैंने अपना सारा माल भाभी की योनि में ही छोड़ा।
हम दोनों थक कर पलंग पर गिर गए। भाभी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे सीने पर सिर रख दिया।
“रोहन, मैं तुम्हारी हो गई हूं। अब मैं सिर्फ तुम्हारी हूं,” भाभी ने कहा।
“भाभी, मैं भी सिर्फ आपका हूं। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं,” मैंने कहा।
हम दोनों एक-दूसरे के बाहों में सो गए। बाहर बारिश सुबह तक होती रही और हम दोनों रात भर एक-दूसरे का प्यार लेते रहे।
सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि भाभी मेरे बगल में सो रही हैं। उनका चेहरा बेहद खूबसूरत लग रहा था। मैंने धीरे से उनके माथे पर किस किया।
भाभी की आंख खुली और उन्होंने मुझे देखकर मुस्कुरा दिया। “गुड मॉर्निंग रोहन,” उन्होंने कहा।
“गुड मॉर्निंग भाभी,” मैंने कहा।
“कैसी रही रात?” भाभी ने पूछा।
“बेहतरीन भाभी, जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात,” मैंने कहा।
“मेरे लिए भी,” भाभी ने कहा और मेरे होंठों पर किस कर दिया।
हम दोनों एक-दूसरे के बाहों में थे। बाहर बारिश अभी भी हल्की-हल्की हो रही थी और मौसम बेहद सुहाना था।
“रोहन, क्या हम ये रिश्ता जारी रख सकते हैं?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी, क्यों नहीं। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं और मैं चाहता हूं कि हम हमेशा एक-दूसरे के पास रहें,” मैंने कहा।
“लेकिन तुम्हारे भैया का क्या? अगर उन्हें पता चल गया तो?” भाभी चिंतित होकर बोलीं।
“डरो मत भाभी, हम सावधानी से रहेंगे। कोई नहीं जानेगा हमारे बारे में। ये हमारा सीक्रेट रहेगा,” मैंने कहा।
भाभी ने राहत की सांस ली। “ठीक है रोहन, जैसा तुम कहो। मैं तुम्हारी हूं और हमेशा रहूंगी।”
मैंने उन्हें फिर से अपनी बाहों में भर लिया। हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे और फिर से प्यार करने लगे। इस बार सुबह की रोशनी में हम एक-दूसरे को देखते हुए प्यार कर रहे थे।
भाभी का बदन बेहद खूबसूरत लग रहा था। मैंने उनके हर हिस्से को चूमा और उन्हें पूरा संतुष्ट किया। भाभी भी मेरे लिंग को बड़े प्यार से चूसीं और मुझे मजा दिया।
हम दोनों ने सुबह फिर से दो बार प्यार किया। फिर हमने फैसला किया कि मैं अपने कमरे में चला जाऊं ताकि कोई शक न हो।
नए रिश्ते की शुरुआत
मैंने अपने कपड़े पहने और भाभी को एक लंबा किस करके अपने कमरे में आ गया। मेरे माता-पिता अभी भी सो रहे थे। मैंने अपने बेड पर लेटकर सोचा कि कल रात क्या हुआ।
मैं बेहद खुश था। मुझे अपनी मनपसंद भाभी का प्यार मिल गया था। वो भी मुझे पसंद करती थीं और हम दोनों ने अपने प्यार को एक नया रूप दे दिया था।
कुछ देर बाद मैं उठा और बाथरूम में गया। नहाने के बाद मैं बाहर आया तो देखा कि भाभी रसोई में चाय बना रही हैं। उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी और वो बेहद खूबसूरत लग रही थीं।
“गुड मॉर्निंग रोहन,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
“गुड मॉर्निंग भाभी,” मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा।
हम दोनों के बीच एक अलग सी समझ थी। कोई और नहीं समझ सकता था ये बात। हमारी आंखें एक-दूसरे से बात कर रही थीं।
“चाय पीओगे?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी,” मैंने कहा।
भाभी ने मेरे लिए चाय बनाई और मेरे हाथ में देते हुए उन्होंने धीरे से मेरे हाथ को छुआ। मुझे बिजली सी लगी।
“रात को फिर आओगे?” भाभी ने धीमी आवाज में पूछा।
“हां भाभी, जरूर आऊंगा,” मैंने कहा।
भाभी ने मुस्कुरा दिया और वापस अपने काम में लग गईं। मैंने चाय पी और ऑफिस के लिए तैयार होने लगा।
उस दिन ऑफिस में मैं काम पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। मेरे दिमाग में सिर्फ भाभी का ख्याल आ रहा था। उनकी खूबसूरती, उनकी मुस्कान, उनका बदन… सब कुछ मुझे मदहोश किए जा रहा था।
शाम को जब मैं घर आया तो भाभी ने मेरे लिए खाना बनाया था। हम दोनों ने साथ में खाना खाया और फिर मेरे माता-पिता सोने चले गए।
रात को फिर से मैं भाभी के कमरे में गया। इस बार इनवर्टर ठीक था लेकिन हमने लाइट बंद करके ही प्यार किया। वो रात भी बेहद यादगार रही।
रात को भाभी के सेक्स : रोजाना की मुलाकातें
उसके बाद से हम दोनों रोजाना रात को एक-दूसरे के साथ होते। जब भी मेरे माता-पिता सो जाते, मैं चुपके से भाभी सेक्स कमरे में चला जाता। हम दोनों रात भर प्यार करते और सुबह अपने-अपने कमरे में चले जाते।
ये सिलसिला कई महीनों तक चला। हम दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करने लगे थे। भाभी मेरे लिए सिर्फ एक सेक्स पार्टनर नहीं, बल्कि मेरी सब कुछ बन चुकी थीं।
एक दिन भाभी ने मुझे बताया कि वो प्रेग्नेंट हो सकती हैं। मैं थोड़ा घबरा गया लेकिन भाभी ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं, वो दवाई ले लेंगी।
“रोहन, अगर मुझे बच्चा हुआ तो वो तुम्हारा ही होगा। तुम्हारे भैया तो महीनों से मेरे पास नहीं आए,” भाभी ने कहा।
“भाभी, मैं तैयार हूं। अगर बच्चा हुआ तो मैं उसे अपना मानूंगा,” मैंने कहा।
भाभी की आंखों में आंसू आ गए। “तुम सच में मुझसे बहुत प्यार करते हो रोहन। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे तुम जैसा प्यार करने वाला मिला,” उन्होंने कहा।
मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। “भाभी, मैं हमेशा आपके साथ हूं। चाहे कुछ भी हो जाए, मैं आपको कभी छोड़कर नहीं जाऊंगा,” मैंने वादा किया।
भैया की वापसी
कुछ हफ्तों बाद मेरे भैया बैंगलोर से वापस आ गए। अब हमारे लिए मुश्किल हो गया था एक-दूसरे के साथ समय बिताना। लेकिन हम दोनों फिर भी मौका देखकर मिल ही लेते।
जब भैया ऑफिस जाते, तो मैं घर पर ही रहता और हम दोनों दिन में भी प्यार करते। भाभी ने मुझे सिखाया कि कैसे चुपके से रिश्ता निभाया जाता है।
“रोहन, हमें सावधान रहना होगा। तुम्हारे भैया को कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए,” भाभी हमेशा कहतीं।
“डरो मत भाभी, मैं सब संभाल लूंगा,” मैंने कहा।
हम दोनों का प्यार और भी गहरा हो गया था। हम एक-दूसरे को समझते थे और एक-दूसरे की जरूरतों का ख्याल रखते थे।
एक दिन भैया ने कहा कि उन्हें फिर से बाहर जाना है कुछ महीनों के लिए। हम दोनों खुश हो गए लेकिन अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने दिया।
भैया के जाते ही हम दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब आ गए। अब तो हम रात भर एक-दूसरे के साथ सोते थे और सुबह भी साथ उठते थे।
बारिश की यादें
कई महीने बीत गए और फिर से बारिश का मौसम आया। एक रात फिर से तेज बारिश हो रही थी और बिजली चली गई। इनवर्टर भी डाउन हो गया।
मैं और भाभी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए। ये वही माहौल था जिसमें हमारा प्यार शुरू हुआ था।
“रोहन, याद है वो पहली रात?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी, कैसे भूल सकता हूं। वो रात मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात थी,” मैंने कहा।
“चलो फिर से वो रात जीते हैं,” भाभी ने कहा और मेरा हाथ पकड़ लिया।
हम दोनों उनके कमरे में गए और अंधेरे में एक-दूसरे को गले लगा लिया। वो रात भी बेहद यादगार रही। हमने पूरी रात प्यार किया और एक-दूसरे को खूब संतुष्ट किया।
अब हमारा रिश्ता और भी मजबूत हो गया था। हम दोनों जानते थे कि हम एक-दूसरे के लिए बने हैं। भले ही दुनिया इस रिश्ते को न समझे, लेकिन हमारे लिए ये रिश्ता पवित्र था।
समय बीतता गया और हमारा प्यार और भी गहरा होता गया। भाभी ने मुझसे कभी नहीं कहा कि मैं शादी कर लूं या किसी और लड़की के साथ रिश्ता बनाऊं। वो जानती थीं कि मैं सिर्फ उनका हूं।
“रोहन, मैं चाहती हूं कि तुम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो। लेकिन मैं हमेशा तुम्हारी रहूंगी,” भाभी एक दिन बोलीं।
“भाभी, मेरी जिंदगी तो आपके साथ ही है। मैं कहीं नहीं जाऊंगा,” मैंने कहा।
हम दोनों ने फैसला किया कि हम इस रिश्ते को हमेशा संजोए रखेंगे। चाहे जो भी हो, हम एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।
और इस तरह, बारिश की उस रात ने हमारी जिंदगी बदल दी। वो अंधेरी रात जब इनवर्टर डाउन हुआ था, हमारे प्यार की शुरुआत बनी। आज भी जब भी बारिश होती है और बिजली जाती है, हम दोनों एक-दूसरे को याद करते हैं और मुस्कुराते हैं।
क्योंकि अंधेरे में भी प्यार की रोशनी होती है, बस दिल को देखने की जरूरत होती है। सेक्स : रोजाना की मुलाकातें
उसके बाद से हम दोनों रोजाना रात को एक-दूसरे के साथ होते। जब भी मेरे माता-पिता सो जाते, मैं चुपके से भाभी के कमरे में चला जाता। हम दोनों रात भर प्यार करते और सुबह अपने-अपने कमरे में चले जाते।
ये सिलसिला कई महीनों तक चला। हम दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करने लगे थे। भाभी मेरे लिए सिर्फ एक सेक्स पार्टनर नहीं, बल्कि मेरी सब कुछ बन चुकी थीं।
एक दिन भाभी ने मुझे बताया कि वो प्रेग्नेंट हो सकती हैं। मैं थोड़ा घबरा गया लेकिन भाभी ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं, वो दवाई ले लेंगी।
“रोहन, अगर मुझे बच्चा हुआ तो वो तुम्हारा ही होगा। तुम्हारे भैया तो महीनों से मेरे पास नहीं आए,” भाभी ने कहा।
“भाभी, मैं तैयार हूं। अगर बच्चा हुआ तो मैं उसे अपना मानूंगा,” मैंने कहा।
भाभी की आंखों में आंसू आ गए। “तुम सच में मुझसे बहुत प्यार करते हो रोहन। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे तुम जैसा प्यार करने वाला मिला,” उन्होंने कहा।
मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। “भाभी, मैं हमेशा आपके साथ हूं। चाहे कुछ भी हो जाए, मैं आपको कभी छोड़कर नहीं जाऊंगा,” मैंने वादा किया।
भैया की वापसी
कुछ हफ्तों बाद मेरे भैया बैंगलोर से वापस आ गए। अब हमारे लिए मुश्किल हो गया था एक-दूसरे के साथ समय बिताना। लेकिन हम दोनों फिर भी मौका देखकर मिल ही लेते।
जब भैया ऑफिस जाते, तो मैं घर पर ही रहता और हम दोनों दिन में भी प्यार करते। भाभी ने मुझे सिखाया कि कैसे चुपके से रिश्ता निभाया जाता है।
“रोहन, हमें सावधान रहना होगा। तुम्हारे भैया को कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए,” भाभी हमेशा कहतीं।
“डरो मत भाभी, मैं सब संभाल लूंगा,” मैंने कहा।
हम दोनों का प्यार और भी गहरा हो गया था। हम एक-दूसरे को समझते थे और एक-दूसरे की जरूरतों का ख्याल रखते थे।
एक दिन भैया ने कहा कि उन्हें फिर से बाहर जाना है कुछ महीनों के लिए। हम दोनों खुश हो गए लेकिन अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने दिया।
भैया के जाते ही हम दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब आ गए। अब तो हम रात भर एक-दूसरे के साथ सोते थे और सुबह भी साथ उठते थे।
बारिश की यादें
कई महीने बीत गए और फिर से बारिश का मौसम आया। एक रात फिर से तेज बारिश हो रही थी और बिजली चली गई। इनवर्टर भी डाउन हो गया।
मैं और भाभी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए। ये वही माहौल था जिसमें हमारा प्यार शुरू हुआ था।
“रोहन, याद है वो पहली रात?” भाभी ने पूछा।
“हां भाभी, कैसे भूल सकता हूं। वो रात मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात थी,” मैंने कहा।
“चलो फिर से वो रात जीते हैं,” भाभी ने कहा और मेरा हाथ पकड़ लिया।
हम दोनों उनके कमरे में गए और अंधेरे में एक-दूसरे को गले लगा लिया। वो रात भी बेहद यादगार रही। हमने पूरी रात प्यार किया और एक-दूसरे को खूब संतुष्ट किया।
अब हमारा रिश्ता और भी मजबूत हो गया था। हम दोनों जानते थे कि हम एक-दूसरे के लिए बने हैं। भले ही दुनिया इस रिश्ते को न समझे, लेकिन हमारे लिए ये रिश्ता पवित्र था।
समय बीतता गया और हमारा प्यार और भी गहरा होता गया। भाभी ने मुझसे कभी नहीं कहा कि मैं शादी कर लूं या किसी और लड़की के साथ रिश्ता बनाऊं। वो जानती थीं कि मैं सिर्फ उनका हूं।
“रोहन, मैं चाहती हूं कि तुम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो। लेकिन मैं हमेशा तुम्हारी रहूंगी,” भाभी एक दिन बोलीं।
“भाभी, मेरी जिंदगी तो आपके साथ ही है। मैं कहीं नहीं जाऊंगा,” मैंने कहा।
हम दोनों ने फैसला किया कि हम इस रिश्ते को हमेशा संजोए रखेंगे। चाहे जो भी हो, हम एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।
और इस तरह, बारिश की उस रात ने हमारी जिंदगी बदल दी। वो अंधेरी रात जब इनवर्टर डाउन हुआ था, हमारे प्यार की शुरुआत बनी। आज भी जब भी बारिश होती है और बिजली जाती है, हम दोनों एक-दूसरे को याद करते हैं और मुस्कुराते हैं।
क्योंकि अंधेरे में भी प्यार की रोशनी होती है, बस दिल को देखने की जरूरत होती है।
Main apni diary aur kahani padhta hun aur us par pratikriya dene wale sabhi logon ko dhanyvad dena chahta hun. yadi aap apni kahaniyan ya tippaniyan sajha karna chahte han, to kripya vikasgoel4952@gmail.com par email karen ya sampark karen. main hamesha aapke mail ka intjaar karta hun.
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