शाम के पांच बज चुके थे। अक्टूबर की हल्की ठंडी हवा चल रही थी। सिखर अपनी साइकिल से घर की ओर जा रहा था, उसके बैग में आज का होमवर्क और कुछ नोट्स थे। वह प्रीति मैम की ट्यूशन में पढ़ता था – एक खूबसूरत, 28 साल की युवा महिला जो अंग्रेजी की शिक्षिका थीं। शिक्षिका और छात्र की रोमांचक सेक्स कहानी ।
सिखर रास्ते में ही रुक गया। उसे अचानक याद आया कि उसकी मैथ्स की किताब वहीं ट्यूशन सेंटर पर रह गई थी। वह मुड़ा और वापस जाने लगा। दस मिनट बाद वह वहां पहुंचा। गेट खुला था, जो अजीब था क्योंकि आमतौर पर शाम को गेट बंद कर दिया जाता था।
सिखर अंदर आया। हॉल खाली था, लेकिन अंदर से कुछ आवाजें आ रही थीं। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा। प्रीति मैम का कमरा आखिरी में था। दरवाजा हल्का सा खुला था, और अंदर से रोशनी झाँक रही थी।
सिखर ने झाँका। उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं।
प्रीति मैम सोफे पर बैठी थीं, लेकिन वह अकेली नहीं थीं। एक आदमी – शायद उनका बॉयफ्रेंड – उनके बगल में था। दोनों एक-दूसरे में लिपटे हुए थे। प्रीति का कुर्ता ढीला हो चुका था और वह आदमी उनकी गर्दन पर किस कर रहा था। प्रीति की आंखें बंद थीं और वह धीरे-धीरे सिसक रही थीं।
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सिखर का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने सोचा कि वह चला जाए, लेकिन फिर उसके दिमाग में एक और विचार आया। वह अपने फोन को निकालने लगा। हाथ कांप रहे थे, लेकिन उसने वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन कर दी। वह दो मिनट तक उन्हें रिकॉर्ड करता रहा – प्रीति और उस आदमी को एक-दूसरे को छूते, चूमते, और एक-दूसरे के शरीर को सहलाते हुए।
फिर वह धीरे से पीछे हटा, अपनी किताब उठाई जो बाहर टेबल पर रखी थी, और बिना आवाज किए निकल गया।
शिक्षिका और छात्र की रोमांचक सेक्स कहानी : दो दिन का इंतजार
अगले दो दिन सिखर के लिए बहुत लंबे थे। वह स्कूल जाता, ट्यूशन आता, लेकिन प्रीति मैम को देखते ही उसका दिल तेजी से धड़कने लगता। वह वीडियो बार-बार देखता – प्रीति की आंखें, उनके होंठ, उनका गुलाबी कुर्ता जो उस आदमी के हाथों में फैल रहा था।
प्रीति मैम को कुछ भी पता नहीं था। वह उसी तरह पढ़ातीं, मुस्कुरातीं, और कभी-कभी सिखर के सिर पर हाथ फेरतीं। लेकिन अब सिखर की नजर में वह बदल चुकी थीं। वह अब सिर्फ एक शिक्षिका नहीं थीं, बल्कि एक औरत थीं – एक वासना से भरी, खूबसूरत औरत जिसका एक रहस्य अब उसके हाथ में था।
तीसरे दिन, सिखर ने फैसला किया। वह सबसे आखिरी में रुका। जब सभी बच्चे चले गए, तो वह बहाने से रुक गया – कहा कि उसे एक सवाल पूछना है।
“हां सिखर, बोलो,” प्रीति मैम ने पूछा, अपनी कुर्सी पर बैठे हुए।
“मैम, मैं आपको कुछ दिखाना चाहता हूं,” सिखर ने कहा, उसका दिल धड़क रहा था।
“क्या है?” प्रीति ने स्कूल बैग को किनारे रखते हुए पूछा।
सिखर ने अपना फोन निकाला और वह वीडियो खोला। वह स्क्रीन प्रीति की ओर करके उनके सामने रख दिया।
प्रीति ने स्क्रीन देखी। पहले तो उनकी समझ में नहीं आया, लेकिन जैसे ही उन्होंने खुद को उस आदमी के साथ देखा, उनका चेहरा पीला पड़ गया। उनके हाथ कांपने लगे।
“यह… यह कहां से…” प्रीति की आवाज रुंध गई।
“दो दिन पहले, मैम। मैं अपनी किताब लेने आया था। आप और वो अंकल… मैंने सब देख लिया,” सिखर ने शांति से कहा।
प्रीति की आंखों में आंसू आ गए। वह समझ गईं कि यह कितना गंभीर था। अगर यह वीडियो कहीं लीक हो गया, तो उनकी नौकरी चली जाएगी, उनकी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी, उनका रिश्ता टूट जाएगा।
“सिखर, प्लीज… मैं तुम्हारी मैम हूं… मैंने तुम्हें पढ़ाया है… यह मत करो,” प्रीति ने हाथ जोड़ते हुए कहा।
“मैम, मैंने कुछ नहीं किया है। बस रिकॉर्ड किया है। अब यह मेरे हाथ में है कि मैं इसे क्या करूं,” सिखर ने कहा, उसकी आवाज में एक अजीब सा आत्मविश्वास था।
“तुम्हें क्या चाहिए? पैसे? मैं तुम्हें पैसे दे सकती हूं,” प्रीति ने घबराहट में कहा।
“मुझे पैसे नहीं चाहिए, मैम,” सिखर ने कहा, उसकी आंखें प्रीति के चेहरे से उनके शरीर की ओर गईं।
“तो फिर क्या चाहिए तुम्हें?” प्रीति ने पूछा, उनकी आवाज कांप रही थी।
सिखर ने गहरी सांस ली। “मैं चाहता हूं कि आप वही करें जो उस दिन उस अंकल के साथ कर रही थीं… लेकिन मेरे साथ।”
प्रीति जैसे जमीन पर गिर गईं। उनके कानों में गूंज रहा था – “मेरे साथ।”
“तुम पागल हो गए हो! मैं तुम्हारी टीचर हूं! यह गलत है!” प्रीति चिल्लाईं।
“तो फिर मैं यह वीडियो स्कूल के WhatsApp ग्रुप में डाल दूंगा। सभी टीचर्स को, सभी बच्चों के पेरेंट्स को, और उस अंकल को भी भेज दूंगा जो शायद आपके बॉयफ्रेंड हैं,” सिखर ने धमकी दी।
प्रीति का दिमाग घूम रहा था। वह एक कोने में जाकर बैठ गईं और रोने लगीं। सिखर उन्हें देखता रहा। उसे थोड़ी दया भी आ रही थी, लेकिन उसकी इच्छा ज्यादा तेज थी।
“मैं तुम्हें दो दिन का वक्त देता हूं, मैम। सोच लो। या तो मेरे साथ, या पूरे शहर के साथ,” सिखर ने कहा और वहां से चला गया।
मजबूरी में मिलन
दो दिन प्रीति के लिए नरक जैसे थे। वह खाना नहीं खा पा रही थीं, सो नहीं पा रही थीं। हर समय उनके सामने वही वीडियो चलता रहता – सिखर का चेहरा, उसकी ब्लैकमेल, और वह शर्मनाक वीडियो।
तीसरे दिन, प्रीति ने सिखर को मैसेज किया: “आ जाओ। शाम को 6 बजे। कोई नहीं होगा।”
सिखर के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आई। वह शाम को तैयार होकर गया। उसने अपना सबसे अच्छा परफ्यूम लगाया था।
जब वह पहुंचा, प्रीति ने उसे अंदर बुलाया। वह साड़ी में थीं – एक साधारण क्रीम रंग की साड़ी, लेकिन उन पर बहुत खूबसूरत लग रही थी। उनके बाल खुले थे, और आंखें लाल थीं – शायद रोने से।
“तुम जीत गए सिखर,” प्रीति ने कहा, उनकी आवाज में हार थी।
“मैम, मैं आपसे प्यार करता हूं… मैंने हमेशा से आपको देखा है… आपकी मुस्कान, आपकी आंखें…” सिखर ने कहा।
“चुप! बस करो ये नाटक!” प्रीति ने गुस्से में कहा। “तुम्हें जो चाहिए था, वो मिल गया। आओ।”
वह उसे अपने बेडरूम में ले गईं। कमरा अंधेरा था, सिर्फ एक लैंप जल रहा था।
“पहले वो वीडियो डिलीट करो,” प्रीति ने कहा।
“पहले आप मेरे साथ वो करो जो मैं कहूं, फिर मैं डिलीट कर दूंगा,” सिखर ने कहा।
प्रीति ने घबराहट में सिखर को देखा। वह एक लड़का था, लेकिन उसकी आंखों में वही वासना थी जो उस दिन उस आदमी की आंखों में थी।
“क्या करना है तुम्हें?” प्रीति ने पूछा।
सिखर ने अपनी शर्ट उतारी। “आप मुझे वैसे ही छुओ जैसे उस दिन उस अंकल को छू रही थीं।”
प्रीति ने अपने हाथ उठाए। उनके हाथ कांप रहे थे। उन्होंने सिखर के चेहरे को छुआ, फिर उसके कंधे, फिर उसकी छाती।
सिखर ने प्रीति का हाथ पकड़ा और अपने पेट पर रख दिया। “नीचे,” उसने फुसफुसाया।
प्रीति समझ गईं। उनकी आंखें बंद हो गईं। उन्होंने अपने हाथ नीचे किए, सिखर की बेल्ट को छुआ, फिर उसके पैंट के ऊपर से उसकी कठोरता को महसूस किया।
“उतारो इसे,” सिखर ने कहा।
प्रीति ने उसकी बेल्ट खोली, बटन खोले, और पैंट नीचे की। सिखर का लिंग बाहर आ गया – कठोर, गरम, और उत्तेजित।
प्रीति ने उसे हाथ में लिया। उनका दिल तेजी से धड़क रहा था। वह एक शिक्षिका थीं, और अब वह अपने छात्र को हाथ से संतुष्ट कर रही थीं।
“मुंह में लो,” सिखर ने कहा।
“नहीं, प्लीज… यह बहुत गलत है,” प्रीति ने कहा।
“मैम, अगर आपने नहीं किया तो मैं वीडियो…” सिखर ने धमकी दी।
प्रीति ने रोते हुए अपने घुटने टेक दिए। वह सिखर के सामने घुटनों पर बैठ गईं। उन्होंने उसका लिंग अपने होंठों के पास लाया और धीरे से चूसना शुरू किया।
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सिखर ने अपना सिर पीछे किया और आंखें बंद कर लीं। प्रीति के मुंह की गर्माहट, उनकी जीभ की चाल, उनके होंठों का दबाव – यह सब उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
“जोर से,” उसने कहा।
प्रीति ने जोर से चूसना शुरू किया। उनका सिर आगे-पीछे हो रहा था। सिखर ने उनके बालों में हाथ डाला और उनका सिर पकड़ लिया। वह अपने कूल्हे हिलाने लगा, प्रीति के मुंह में अपना लिंग घुसा रहा था।
“आह… मैम… बहुत अच्छा लग रहा है,” सिखर कराहा।
कुछ मिनटों बाद, सिखर ने प्रीति को उठाया और बिस्तर पर धकेल दिया। वह उनके ऊपर चढ़ गया।
“अब आपकी बारी, मैम। साड़ी उतारो,” उसने कहा।
प्रीति रो रही थीं, लेकिन उन्होंने अपनी साड़ी खोलनी शुरू की। सिखर ने उनकी मदद की – पल्लू हटाया, ब्लाउज के बटन खोले। जल्द ही प्रीति सिर्फ अपने पेटीकोट और ब्रा में थीं।
“ये भी उतारो,” सिखर ने कहा।
प्रीति ने अपनी ब्रा खोली। उनके स्तन बाहर आए – गोल, भरे हुए, और गुलाबी अग्र भागों के साथ। सिखर ने उन्हें देखा और फिर उन्हें अपने हाथों में भर लिया।
“कितने सॉफ्ट हैं,” उसने कहा और उन्हें दबाने लगा।
प्रीति ने अपनी आंखें बंद कर लीं। सिखर ने उनके स्तन चूसने शुरू किए – पहले एक, फिर दूसरा। उसकी जीभ उनके निप्पलों पर घूम रही थी, जो कठोर होते जा रहे थे।
“आह… नहीं…” प्रीति ने धीरे से कहा, लेकिन उसकी सांसें तेज हो रही थीं।
सिखर ने नीचे हाथ बढ़ाया और प्रीति के पेटीकोट के अंदर हाथ डाल दिया। उसे वहां गर्माहट और गीलापन महसूस हुआ।
“मैम, आप गीली हो रही हैं,” उसने कहा।
“चुप करो! बस करो!” प्रीति ने शर्मिंदगी में कहा।
लेकिन सिखर ने रुकना नहीं चाहा। उसने प्रीति के पेटीकोट और पैंटी दोनों नीचे खींच दिए। प्रीति की योनि सामने थी – थोड़ी घनी झांओं से ढकी, लेकिन सुंदर।
सिखर ने अपने कपड़े पूरी तरह उतार दिए। वह अब पूरी तरह नंगा था, और उसका लिंग प्रीति की योनि की ओर इशारा कर रहा था।
“प्लीज, कंडोम लगा लो,” प्रीति ने कहा।
“नहीं, मैं सीधा करूंगा,” सिखर ने कहा।
उसने प्रीति के पैर फैलाए और उनके ऊपर लेट गया। उसने अपने लिंग को प्रीति की योनि के मुंह पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया।
“आह! दर्द हो रहा है!” प्रीति चीखीं।
सिखर ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। प्रीति की योनि बहुत तंग थी, और बहुत गीली भी। हर धक्के के साथ सिखर की गति तेज होती जा रही थी।
“मैम… आप बहुत अच्छी हैं,” सिखर ने कहा, उसकी सांसें फूल रही थीं।
प्रीति ने अपनी आंखें बंद रखीं। वह इस पल को खत्म होते देखना चाहती थीं। लेकिन उनका शरीर धोखा दे रहा था – उनकी कमर उठने लगी थी, उनकी सांसें तेज हो गई थीं, और उनके मुंह से अनायास ही आवाजें निकल रही थीं।
“आह… हां… धीरे…” प्रीति ने कहा।
सिखर ने उनके होंठ चूमे। प्रीति ने पहले तो मना किया, लेकिन फिर वह भी उसके साथ देने लगीं। उनकी जीभ एक-दूसरे से मिल रही थीं, और नीचे उनके शरीर एक-दूसरे में मिल रहे थे।
सिखर ने प्रीति के पैर अपने कंधों पर रखे और और गहराई से धक्के लगाने लगा। बिस्तर की चरपराहट और उनकी सांसों की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
“मैम, मैं आने वाला हूं,” सिखर ने कहा।
“बाहर निकालो… प्लीज,” प्रीति ने कहा।
लेकिन सिखर ने उसे अपने अंदर ही रखा और एक आखिरी जोरदार धक्का दिया। उसका वीर्य प्रीति की योनि में भर गया।
दोनों थककर बिस्तर पर पड़े रहे। सिखर ने प्रीति को अपनी बाहों में भर लिया।
“मैंने वीडियो डिलीट कर दिया, मैम,” सिखर ने कहा।
प्रीति ने उसे देखा। उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन कुछ और भी था – एक अजीब सी शांति।
“यह कभी फिर मत करना,” प्रीति ने कहा।
“अगर आप चाहें तो मैं रोज आ सकता हूं,” सिखर ने शरारत से कहा।
प्रीति ने उसे मारा, फिर हल्की सी मुस्कुराईं।
मैं इस कहानी को आगे बढ़ाता हूं और फिर एक समाप्ति देता हूं।
उस रात के बाद कुछ बदल गया था। सिखर अगले दिन ट्यूशन गया तो प्रीति मैम ने उसे देखा, लेकिन इस बार उनकी आंखों में गुस्सा नहीं, बल्कि एक अजीब सी शर्म थी। वह अपनी कुर्सी पर बैठी थीं और साड़ी का पल्लू बार-बार संभाल रही थीं।
जब सभी बच्चे चले गए, सिखर रुक गया। वह प्रीति के पास गया और उनके कंधे पर हाथ रखा।
“मैम, क्या आप मुझसे नाराज हैं?” उसने पूछा।
प्रीति ने उसे देखा। “सिखर, जो हो गया सो हो गया। लेकिन यह सिर्फ एक बार था। आगे से ऐसा नहीं होगा।”
“लेकिन मैम, मैंने वीडियो तो डिलीट कर दिया,” सिखर ने कहा।
“मुझे पता है। लेकिन यह गलत है। मैं तुमसे उम्र में बड़ी हूं, तुम्हारी टीचर हूं,” प्रीति ने समझाने की कोशिश की।
सिखर ने उनका हाथ पकड़ा। “मैम, मुझे आपसे सच्चा प्यार है। मैंने हमेशा से आपको पसंद किया है। वो वीडियो सिर्फ एक बहाना था।”
प्रीति ने उसका हाथ छोड़ा। “नहीं सिखर, यह प्यार नहीं है। यह… यह कुछ और है। तुम जाओ अब।”
सिखर ने उनकी आंखों में देखा। “ठीक है मैम। लेकिन अगर आपको कभी मेरी जरूरत हो, तो मैं हमेशा यहीं हूं।”
वह चला गया, लेकिन प्रीति का दिमाग उसी के साथ लगा रहा। रात को जब वह सोने गईं, तो उन्हें वो सब याद आने लगा – सिखर का स्पर्श, उसकी गर्माहट, उसकी जोश। उनका शरीर फिर से उत्तेजित होने लगा।
“नहीं, यह गलत है,” उन्होंने खुद को डांटा।
लेकिन अगले दिन, जब सिखर ट्यूशन नहीं आया, प्रीति को अजीब सा लगा। वह बेचैन हो रही थीं। शाम को उन्होंने सिखर को फोन किया।
“कहां हो तुम? आज क्यों नहीं आए?” उन्होंने पूछा।
“मैम, आपने ही तो मना किया था,” सिखर ने कहा।
“आ… आओ कल। तुम्हारी क्लास जरूरी है,” प्रीति ने कहा, लेकिन उनकी आवाज में कुछ और भी था।
अगले दिन सिखर आया। वह आखिरी में रुका। प्रीति ने दरवाजा बंद किया और उसे अपने कमरे में ले गईं।
“मैंने सोचा है सिखर। अगर यह सच में प्यार है, तो हमें समझदारी से काम लेना होगा। कोई जान नहीं पाना चाहिए,” प्रीति ने कहा।
“मैम, मैं किसी को नहीं बताऊंगा। यह हमारा राज है,” सिखर ने वादा किया।
प्रीति ने उसे अपनी ओर खींचा। “तो फिर आओ।”
इस बार कोई जबरदस्ती नहीं थी, कोई धमकी नहीं थी। यह दोनों की सहमति थी। प्रीति ने खुद सिखर को चूमा, उसकी शर्ट उतारी, और उसे बिस्तर पर लेटा दिया।
“आज मैं तुम्हें सिखाऊंगी कि प्यार क्या होता है,” प्रीति ने कहा, उनकी आंखों में एक शरारती चमक थी।
उन्होंने धीरे-धीरे सिखर के कपड़े उतारे। उसका शरीर युवा और मजबूत था। प्रीति ने उसके चेहरे पर, छाती पर, पेट पर चूमना शुरू किया। वह नीचे बढ़ती गईं।
जब उन्होंने सिखर का लिंग अपने मुंह में लिया, तो सिखर ने आंखें बंद कर लीं। प्रीति बहुत अनुभवी थीं। उन्होंने अपनी जीभ से उसके लिंग को चाटा, चूसा, और अपने गले तक लिया।
“मैम… आह… बहुत मजा आ रहा है,” सिखर कराहा।
प्रीति ने उसे और मजा दिया। वह उसके अंडकोश भी चाट रही थीं, फिर ऊपर आकर लिंग को फिर से मुंह में भर लेतीं।
कुछ देर बाद, प्रीति ने अपने कपड़े उतारे। वह पूरी तरह नंगी हो गईं। उनका शरीर परिपक्व था – भरे हुए स्तन, संकरा कमर, और गोल-गोल कूल्हे।
“अब मेरी बारी,” प्रीति ने कहा।
वह सिखर के ऊपर बैठ गईं और उसके लिंग को अपने हाथ से पकड़कर अपनी योनि पर रखा। धीरे-धीरे वह नीचे बैठीं और सिखर का पूरा लिंग अपने अंदर समा लिया।
“आह… हां…” दोनों ने एक साथ आवाज निकाली।
प्रीति ने अपनी कमर हिलानी शुरू की। वह आगे-पीछे, ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनके स्तन उछल रहे थे, और सिखर उन्हें देखता रहा।
सिखर ने उनकी कमर पकड़ी और नीचे से धक्के लगाने लगा। दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए थे, एक ताल में हिल रहे थे।
“सिखर… तुम बहुत अच्छे हो,” प्रीति ने कहा, उनका चेहरा लाल था।
“मैम, आप तो जन्नत हो,” सिखर ने जवाब दिया।
वह लगभग आधे घंटे तक एक साथ रहे। अलग-अलग पोजीशन में – कभी प्रीति ऊपर, कभी सिखर ऊपर, कभी पीछे से, कभी सामने से।
आखिर में, जब दोनों थक गए, तो प्रीति ने सिखर को अपनी बाहों में भर लिया।
“मुझे डर है सिखर। अगर किसी को पता चल गया तो?” प्रीति ने चिंता से कहा।
“मैम, मैं हूं ना। मैं किसी को नहीं बताऊंगा। और हम सावधान रहेंगे,” सिखर ने कहा।
सिखर से उनका रिश्ता भी बदल गया। वह अब सिर्फ उनका छात्र नहीं, बल्कि एक करीबी दोस्त बन गया था।
एक साल बीत गया। सिखर अब कॉलेज में था।
पर अब हम स्टूडेंट टीचर नहीं जीएफ-बीएफ बन गए और मैं उन्हें आज भी चोदता रहता हूं
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