हॉट देसी भाभी की चुदाई
दिल्ली की धूप तेज थी। मैं, लकी, एक साधारण लड़का जो रोहिणी में रहता था, उस दिन अपने दोस्त से मिलकर वापस लौट रहा था। मेट्रो स्टेशन जाने के लिए मैंने एक ई-रिक्शा में बैठा। वहां पहले से ही एक औरत बैठी थी, उसकी गोद में एक छोटी सी बच्ची थी। हॉट देसी भाभी की चुदाई का सफर ।
“भैया, राजीव चौक जाएंगे?” उसने ड्राइवर से पूछा।
“हां जी, बैठ जाइए,” ड्राइवर ने कहा।
मैंने उसे देखा। वह करीब 25 साल की होगी, गोरा रंग, भरे हुए गाल, और आंखें… ओह उसकी आंखें! काली और बड़ी-बड़ी। उसने सलवार कमीज पहनी थी, लेकिन उस पर वो सादगी थी जो किसी भी आदमी को मोह ले।
“आपकी बेटी बहुत प्यारी है,” मैंने कहा, बस बातचीत शुरू करने के लिए।
वह मुस्कुराई। “शुक्रिया। यह रिहाना है, मेरी बेटी।”
“मैं लकी हूं,” मैंने अपना परिचय दिया।
“मैं हिमांशी,” उसने कहा।
उसकी आवाज में एक अजीब सी मिठास थी। हम बात करने लगे। पता चला कि वह भी उसी मेट्रो स्टेशन पर उतरेगी जहां मुझे जाना था। बातचीत में पता चला कि उसके पति एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और वह ज्यादातर घर पर अकेली रहती हैं।
“आप बहुत क्यूट लग रही हैं,” मैंने हिम्मत करके कहा जब हम मेट्रो स्टेशन के पास पहुंचे।
वह शर्मा गई, उसके गाल लाल हो गए। “थैंक यू,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
नंबर मांगने का मन था, लेकिन मैंने सोचा जल्दबाजी ठीक नहीं। “आपका इंस्टाग्राम है?” मैंने पूछा।
“नहीं, मेरे पास फेसबुक है,” उसने कहा।
मैंने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी। “हाय, कैसी हो?” मैंने मैसेज किया।
उसका जवाब देर से आया। “हाय, मैं ठीक हूं। आप कब बात कर सकते हैं?”
मैं समझ गया कि वह भी इंतजार कर रही थी।
फेसबुक पर हमारी बातचीत शुरू हुई, लेकिन वो आसान नहीं थी। जब मैं मैसेज करता, “हाय हिमांशी, कैसी हो?” तो उसका जवाब घंटों बाद आता, “सॉरी, अभी फ्री नहीं थी, रिहाना जग गई थी।”
और जब वो मुझे मैसेज करती, “हाय, अभी बात कर सकते हो?” तो मैं काम में फंसा रहता, “सॉरी, थोड़ी देर में।”
यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा। एक खिचड़ी सी बन गई थी। मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो कब फ्री होती है, और वो शायद मेरे बारे में यही सोच रही होगी।
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कुछ दिन बाद मैंने हिम्मत करके पूछ ही लिया, “एक बात पूछूं? तुम फ्री कब होती हो? मतलब सही समय क्या है तुम्हारा?”
उसने थोड़ी देर सोचा, फिर लिखा, “दिन में। सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक। रिहाना सो जाती है तब।”
अब बात बनने लगी। हम दिन में बात करने लगे, फेसबुक पर ही। वो अपनी जिंदगी के बारे में बताती, मैं अपनी। लेकिन वो नंबर देने से कतरा रही थी।
“इंस्टाग्राम पे आ जाओ,” मैंने कहा एक दिन।
“नहीं, मेरे पास नहीं है,” उसने जवाब दिया।
“तो नंबर दो ना, यहां मैसेज करने में दिक्कत होती है,” मैंने कहा।
“नहीं… अभी नहीं… पता नहीं,” वो टाल रही थी।
ऐसे ही कुछ दिन और निकले। फिर एक दिन मैंने फैसला किया, “यह लो मेरा नंबर – 98XXXXXXXX। जब मन करे कॉल कर लेना।”
मैंने अपना नंबर भेज दिया। उसने पढ़ा, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। मुझे लगा शायद उसे मंजूर नहीं।
लेकिन अगले दिन, दोपहर को, मेरे फोन पर एक अनजान नंबर आया। मैंने उठाया।
“हैलो… लकी?” उसकी आवाज थी, हल्की सी, कांपती हुई।
“हिमांशी! तुमने कॉल की!” मैं खुश हो गया।
“हां… वो… फेसबुक पे अच्छी बात नहीं हो पा रही थी,” उसने कहा।
और फिर शुरू हुई हमारी असली बातचीत। अब हम रोज कॉल पर बात करने लगे। दिन में, जब उसकी बेटी सो जाती, हम बातें करते।
“मेरे पति मुझे बाहर जाने से मना करते हैं,” उसने एक दिन बताया, आवाज में उदासी थी।
“क्यों?” मैंने पूछा।
“पता नहीं, शक करते हैं हमेशा। मैं घर में ही कैद रहती हूं।”
“तुम अकेली हो,” मैंने कहा।
“बहुत अकेली,” उसने फुसफुसाया।
धीरे-धीरे हमारी बातें बदलने लगीं। शुरू में तो बस दोस्ती थी, लेकिन फिर… फिर वो कुछ और हो गया।
“तुम्हारी आवाज बहुत प्यारी है,” मैंने एक दिन कहा।
“सच?” वो शर्मा गई।
“हां, और तुम्हारी हंसी… मैं सोचता हूं तुम्हें देखकर कैसी लगती होगी।”
“लकी…” उसने मेरा नाम धीरे से लिया, और वो लहजा कुछ और ही कह रहा था।
“क्या तुम्हें पता नहीं चलेगा तो?” मैंने पूछा।
“नहीं, वह सुबह 8 बजे निकलते हैं और रात 10 बजे आते हैं,” उसने बताया।
हमने मिलने का प्लान बनाया। गुड़गांव, एक होटल जहां कोई हमें नहीं जानता।
होटल में हॉट देसी भाभी से मुलाकात
वो दिन आ गया। मैं पहले ही होटल के कमरे में था, नर्वस, उत्साहित। दरवाजे की घंटी बजी।
मैंने दरवाजा खोला और मेरे होश उड़ गए।
वह साड़ी में थी। एक गुलाबी रंग की साड़ी, और ब्लाउज… ओह माय गॉड! वो पीछे से डोरी वाला ब्लाउज था। उसकी पीठ खुली थी, गोरी, चिकनी, और वो डोरियां जो उसकी पीठ के बीच में बंधी थीं… मेरा दिल धड़कने लगा।
“कैसी लग रही हूं?” उसने पूछा, शर्माते हुए।
“तुम… तुम बहुत खूबसूरत हो,” मैंने कहा, मुंह खुला रह गया।
वह अंदर आई। उसकी साड़ी का पल्लू उसके सिर पर था, मुस्लिम औरत की तरह। लेकिन वो साड़ी उसके शरीर पर इस तरह लिपटी थी कि उसकी फिगर 34-26-34 साफ झलक रही थी। उसकी कमर इतनी पतली, और हिप्स इतने भरे हुए।
मैंने दरवाजा बंद किया।
“तुम्हें पता है, मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं यह सब करूंगी,” उसने कहा, अपनी बेटी की तस्वीर देखते हुए जो उसने फोन में दिखाई।
“तुम अकेली हो,” मैंने कहा, उसके करीब आते हुए। “तुम्हें प्यार चाहिए, इज्जत चाहिए।”
“मेरे पति को पता चल गया तो?” उसकी आंखों में डर था।
“कुछ नहीं पता चलेगा,” मैंने उसके हाथ पकड़े।
उसके हाथ ठंडे थे, कांप रहे थे। मैंने उसके हाथों को अपने हाथों में लिया, चूमा।
“लकी…” उसने मेरा नाम लिया, उसकी आवाज कांप रही थी।
मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया। वह इतनी गोरी थी, इतनी नाजुक। मैंने धीरे से उसके गाल पर चूमा।
उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके गाल से अपने होंठ उसके कानों तक ले गया, फिर गर्दन पर।
“आह…” एक हल्की सी आवाज निकली उसके मुंह से।
वो आवाज मुझे और पागल कर गई। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसकी साड़ी का पल्लू हट गया, उसके बाल खुले हो गए। वह एकदम देसी हॉट भाभी लग रही थी, जैसे कोई अंतर्वासना की कहानी की हीरोइन।
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मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा, साड़ी के ऊपर से ही। वह कांप उठी।
“डरो मत,” मैंने कहा।
“मैं… मैं पहली बार…” उसने शर्माते हुए कहा।
“मैं जानता हूं,” मैंने उसके माथे पर चूमा।
मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को पकड़ा और धीरे से खींचा। वह खड़ी रही, शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया। साड़ी का पल्लू हटा, अब उसका पेट दिख रहा था, गोरा, चिकना, नाभि गहरी।
मैंने उसकी नाभि पर उंगली रखी, घुमाई।
“ऊह…” उसने मुझे पकड़ लिया।
मैंने उसे घुमाया। अब उसकी पीठ मेरे सामने थी। वो डोरी वाला ब्लाउज… मैंने उसकी पीठ पर अपने होंठ रखे, चूमा।
उसकी पीठ इतनी मुलायम थी। मैंने धीरे से उस ब्लाउज की डोरी को खींचना शुरू किया। एक डोरी खुली, फिर दूसरी।
ब्लाउज ढीला हो गया। मैंने उसे फिर घुमाया। अब ब्लाउज उसके शरीर से लटक रहा था, अंदर ब्रा नहीं थी। उसके 34 साइज के स्तन ऊपर को उभरे हुए थे, गोल, भरे हुए, गुलाबी निप्पल।
“कितनी सुंदर हो तुम,” मैंने फुसफुसाया।
मैंने उसके स्तनों को अपने हाथों में लिया, दबाया। वह सिसकी, उसका सिर पीछे गिर गया।
“लकी… प्लीज…” वह कांप रही थी।
“क्या प्लीज?” मैंने पूछा, उसके गाल चूमते हुए।
“मुझे… मुझे अच्छा लग रहा है,” उसने कहा।
मैंने उसे बिस्तर पर बैठने के लिए कहा। वह बैठ गई, साड़ी पेटिकोट समेत ऊपर को उठी हुई थी, उसके गोरे पैर दिख रहे थे।
मैंने उसके पैरों के पास बैठा, उसके पैरों को सहलाया। फिर धीरे-धीरे ऊपर बढ़ा, घुटनों पर, फिर जांघों पर।
“आह… हा…” वह कराह रही थी।
मैंने उसकी साड़ी को पूरी तरह खोल दिया। अब वह सिर्फ पेटिकोट और ढीले ब्लाउज में थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया।
“तुम्हें पता है, मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोई मुझे इतना प्यार करेगा,” उसने कहा, आंखों में आंसू लिए।
“तुम्हें प्यार मिलना चाहिए,” मैंने कहा, उसके होठों पर अपने होठ रखे।
पहली बार हमारे होठ मिले। वह मीठी थी, बहुत मीठी। मैंने उसके होठों को चूसा, उसकी जीभ को अपनी जीभ से छुआ। वह पागल हो रही थी, मेरे बालों में हाथ फेर रही थी।
मैंने उसके ब्लाउज को पूरी तरह हटा दिया। अब वह ऊपर से नंगी थी। उसके स्तन मेरे सामने थे, इतने सुंदर, इतने भरे हुए। मैंने एक स्तन को मुंह में लिया, चूसा, निप्पल को काटा हल्के से।
“ऊह माँ… आह…” वह चिल्लाई, मेरे सिर को अपने स्तनों पर दबा रही थी।
मैंने दूसरे स्तन को हाथ से दबाया, सहलाया। वह नीचे से कांप रही थी, उसकी जांघें मेरे पेट को सहला रही थीं।
“और… और करो…” उसने कहा।
मैंने उसके पेटिकोट की नाड़ी खोलनी शुरू की। वह मेरी तरफ देख रही थी, शर्म से उसका चेहरा लाल, लेकिन वो आंखें… वो आंखें मुझे बुला रही थीं।
पेटिकोट खुला, मैंने उसे नीचे खींचा। अब वह सिर्फ अंडरवियर में थी, सफेद रंग का, छोटा सा।
मैंने उसके पेट पर चूमना शुरू किया, नाभि में जीभ घुमाई, फिर नीचे बढ़ा। उसकी जांघें मुलायम थीं, गोरी, एकदम चिकनी।
मैंने उसके अंडरवियर को पकड़ा, धीरे से खींचा।
“लकी…” उसने शर्माते हुए कहा।
“शह… बस मजे लो,” मैंने कहा।
अंडरवियर हटा दिया। अब वह पूरी तरह नंगी थी, एक 25 साल की मुस्लिम औरत, गोरी, जवान, भरी हुई फिगर के साथ। उसकी योनि साफ थी, गुलाबी, गीली।
मैंने उसकी जांघों को चूमा, अंदर की तरफ बढ़ा। उसकी सांसें तेज हो गईं, वह मेरे सिर को अपनी जांघों के बीच दबाने लगी।
मैंने उसकी योनि पर अपनी जीभ रखी, चाटना शुरू किया। वह पागल हो गई, बिस्तर पर अपनी कमर उठा-उठा कर मेरे मुंह पर रगड़ रही थी।
“आह… हाँ… और… और अंदर…” वह चीख रही थी।
मैंने उसकी क्लिटोरिस को मुंह में लिया, चूसा, जीभ से घुमाया। उसका पूरा शरीर कांप रहा था, उसके हाथ बिस्तर की चादर को पकड़े हुए थे।
कुछ ही मिनटों में वह झड़ गई, मेरे मुंह में ही, उसका रस निकल आया, गरम, मीठा।
“ऊह… माँ…” वह थक कर बिस्तर पर गिर गई।
मैंने अपने कपड़े उतारे। वह मुझे देख रही थी, मेरी छाती, मेरे पेट, और नीचे… मेरा लिंग खड़ा था, उसे देखकर और भी ज्यादा कड़क।
“इतना बड़ा…” उसने आंखें बड़ी-बड़ी करके कहा।
“तुम्हारे लिए,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
मैंने उसके पैरों को फैलाया, अपने लिंग को उसकी योनि के मुंह पर रखा। वह गीली थी, बहुत ज्यादा।
“धीरे से…” उसने कहा, डर के मारे।
“डरो मत,” मैंने कहा, उसके होठों पर चूमा।
मैंने धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया। वह तंग थी, बहुत तंग। उसके मुंह से दर्द की आवाज निकली।
“आह… धीरे…”
मैंने रुका, उसके स्तनों को सहलाया, फिर धीरे-धीरे अंदर बढ़ा। आधा अंदर गया, फिर थोड़ा और।
“बस… बस अब…” उसने कहा।
मैंने अपनी कमर हिलानी शुरू की, धीरे-धीरे। वह दर्द में थी, लेकिन मजे भी आ रहे थे। उसके चेहरे पर दर्द और सुकून दोनों के भाव थे।
“अच्छा लग रहा है?” मैंने पूछा।
“हाँ… अब अच्छा लग रहा है…” उसने कहा, आंखें बंद करके।
मैंने स्पीड बढ़ाई, अंदर-बाहर, अंदर-बाहर। वह मेरे साथ ताल मिलाने लगी, अपनी कमर उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी।
देसी हॉट भाभी का जलवा
“और तेज… और तेज करो…” उसने कहा, अब पूरी तरह मजे में आ गई थी।
मैंने उसे घुमाया, अब वह ऊपर आ गई, मैं नीचे। वह मेरे ऊपर बैठ गई, अपने हाथों से मेरे लिंग को पकड़ा, अपनी योनि पर रखा, और बैठ गई।
“ऊह…” हम दोनों एक साथ कराह उठे।
वह ऊपर-नीचे होने लगी, उसके स्तन उछल रहे थे, उसकी कमर इतनी पतली, और हिप्स इतने भरे हुए कि देखते ही बनता था। वह एकदम देसी हॉट भाभी लग रही थी, जो पूरी तरह मजे में थी।
“तुम बहुत अच्छे हो लकी…” उसने कहा, मेरे सीने पर हाथ रखे।
“तुम भी…” मैंने कहा, उसकी कमर पकड़कर और तेज हिलाया।
वह झुक गई, उसके स्तन मेरे मुंह के सामने थे। मैंने एक स्तन को मुंह में लिया, चूसा, दूसरे को हाथ से दबाया।
“आह… मैं… मैं फिर से…” वह कांपने लगी।
वह मेरे ऊपर ही झड़ गई, उसका पूरा शरीर कांप रहा था, उसकी योनि ने मेरे लिंग को कस लिया, जोर-जोर से सिकुड़ रही थी।
मैं भी अपनी लिमिट पर था। मैंने उसे नीचे किया, ऊपर आया, और उसके स्तनों के बीच अपना वीर्य छोड़ दिया, गरम, गाढ़ा, सफेद।
“ऊह…” मैंने कराहते हुए कहा।
वह मुझे देख रही थी, मुस्कुरा रही थी, उसके चेहरे पर संतुष्टि थी।
“यह… यह बहुत अच्छा था,” उसने कहा।
मैंने उसके बगल में लेट गया, उसे अपनी बाहों में भर लिया।
आधे घंटे बाद हम फिर से तैयार थे। इस बार वह और भी ज्यादा उत्साहित थी।
“इस बार पीछे से…” उसने शर्माते हुए कहा।
“क्या?” मैंने हैरान होकर पूछा।
“मतलब… डॉगी स्टाइल में…” उसने कहा, चेहरा लाल करके।
मैंने उसे घुमाया, वह घुटनों और हाथों के बल हो गई, उसकी पीठ मेरे सामने, उसकी गोरी गांड उभरी हुई।
“कितनी सुंदर गांड है तुम्हारी,” मैंने कहा, उसकी गांड पर थप्पड़ मारा।
“आह…” वह सिसकी।
मैंने अपना लिंग उसकी योनि पर रखा, और एक ही धक्के में अंदर कर दिया।
“ऊह… माँ…” वह चीखी।
मैंने उसकी कमर पकड़ी, और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। उसके स्तन हिल रहे थे, उसकी सांसें तेज हो गईं।
“और तेज… और तेज…” वह चिल्ला रही थी।
मैंने पूरी स्पीड से उसे चोदना शुरू किया, थप-थप-थप की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूं…” उसने कहा, कांपते हुए।
“मैं भी…” मैंने कहा।
हम एक साथ झड़े, इस बार मैंने अपना वीर्य उसकी योनि में ही छोड़ दिया, गरम, गाढ़ा।
वह बिस्तर पर गिर गई, मैं उसके ऊपर ही लेट गया।
“यह… यह बहुत अच्छा था,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
मैंने उसके बालों को सहलाया, उसके माथे पर चूमा।
“तुम्हें पता है, मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं किसी और मर्द के साथ ऐसा करूंगी,” उसने कहा।
“तुम्हें मजा आया?” मैंने पूछा।
“बहुत ज्यादा,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
शाम हो रही थी। हमने कपड़े पहने, वह फिर से वो साड़ी और डोरी वाला ब्लाउज पहनने लगी।
“इस बार जब मिलेंगे?” मैंने पूछा।
“जल्द ही,” उसने कहा, मेरे गाल पर चूमते हुए।
“तुम्हारे पति को पता नहीं चलेगा?”
“नहीं, वह कभी पता नहीं लगाएंगे,” उसने कहा, दरवाजा खोलते हुए।
वह चली गई, लेकिन वो यादें, वो पल, वो हिमांशी की गोरी बदन, उसकी 34-26-34 फिगर, उसकी मुस्कान… सब कुछ मेरे दिमाग में बस गया।
यह थी मेरी और हिमांशी भाभी की कहानी, एक अंतर्वासना की कहानी, एक देसी हॉट भाभी की कहानी जो मुझे एक ई-रिक्शा में मिली थी।
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