
मेरा नाम अनूप है। मैं 26 साल का एक सामान्य लड़का हूं जो अपने शहर में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूं। मेरी जिंदगी बिल्कुल साधारण थी, रोज़ की दौड़धूप और घर से दफ्तर, दफ्तर से घर का सिलसिला। लेकिन एक शादी ने मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।
वो मेरे चचेरे भाई की शादी थी। पूरा घर गुलजार था, महमानों की आवाजाही लगी हुई थी और मैं शाम को ऑफिस से आकर सीधे शादी वाले घर पर पहुंच गया था। मैंने काले रंग का सूट पहना था और थकावट के कारण मैं सीधे बरात में शामिल होने वाले पंडाल की तरफ बढ़ा।
शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई वाली यह कहानी उसी रात शुरू हुई जब मेरी नजर उन पर पड़ी। वो लाल रंग की साड़ी में थीं, गालों पर हल्की सी मुस्कान और आंखों में एक अजीब सी चमक। वो मेरी पड़ोसन भाभी प्रतिभा थीं, जिनसे मेरी पहली बार मुलाकात हो रही थी।
मैं उन्हें देखता ही रह गया। उनकी साड़ी का पल्लू हल्का सा कंधे पर टिका था और गले में सुंदर सा हार चमक रहा था। मेरी मां ने मुझे आवाज दी, “अनूप, इधर आ, यह है पड़ोस की प्रतिभा भाभी, इनके पति अक्सर बाहर रहते हैं।”
मैंने हाथ जोड़े, “प्रणाम भाभी जी।”
उन्होंने मुस्कुराते हुए हाथ उठाया, “नमस्ते अनूप जी, बड़े हो गए हो।”
उनकी आवाज में एक अजीब सी मिठास थी। मैंने महसूस किया कि मेरा दिल कुछ तेज़ धड़कने लगा था। यह पड़ोसन भाभी सेक्स स्टोरी की शुरुआत थी, जो मुझे अभी पता नहीं था।
आंखों ही आंखों में इशारे
शादी का माहौल गरमा रहा था। बरात आने वाली थी और मैं व्यस्त था, लेकिन मेरा ध्यान बार-बार प्रतिभा भाभी की तरफ जा रहा था। वो शादी के घर में भाभी के रूप में मेरे लिए एक नया आकर्षण बन चुकी थीं।
रात के करीब 9 बजे थे जब मैं फोटोग्राफर को कुछ कहने के लिए पंडाल के पीछे गया। वहां मेरी नजर प्रतिभा भाभी से टकराई। वो अकेली खड़ी थीं, फोन पर किसी से बात कर रही थीं। मैंने देखा कि उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं।
जब उन्होंने फोन रखा, मैंने पूछा, “क्या हुआ भाभी जी, सब ठीक तो है?”
वो मेरी आवाज सुनकर चौंकी, फिर मुस्कुराई, “अरे अनूप जी, आप यहां? कुछ नहीं, बस घर का थोड़ा काम याद आ गया।”
मैंने कहा, “अगर कोई मदद चाहिए हो तो बताइएगा।”
उन्होंने मेरी तरफ देखा, उनकी आंखों में कुछ पल के लिए एक अजीब सी चमक दिखी, “आप बड़े समझदार हो गए हो अनूप जी।”
यह शादी में देसी भाभी से मुलाकात मेरे लिए यादगार बन रही थी। हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे और मुझे लगा कि हवा में कुछ तो है जो अलग है।
नाच-गाने में नजदीकियां
बरात आ चुकी थी और डीजे पर म्यूजिक बज रहा था। मैं अपने दोस्तों के साथ खड़ा था जब प्रतिभा भाभी मेरे पास आईं। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, “चलो अनूप, नाचो थोड़ा।” मैं हैरान था लेकिन मना नहीं कर सका। हम डांस फ्लोर पर गए। गाना बज रहा था, “तेरी आंख्या का यो काजल…” और मैं प्रतिभा भाभी के साथ हल्का सा नाचने लगा।
शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई की कल्पना तो मैंने कभी नहीं की थी, लेकिन उस रात जो हो रहा था वो किसी सपने से कम नहीं था। भाभी का हाथ मेरे हाथ में था और हम एक-दूसरे के करीब आते जा रहे थे।
नाचते समय उनका शरीर मेरे शरीर से कई बार टकराया। मुझे उनकी खुशबू महसूस हो रही थी, एक मिश्रित सी महक जो मेरे सिर में चढ़ रही थी। मैंने देखा कि उनकी सांसें भी तेज़ चल रही थीं।
“अनूप जी, आप अच्छा नाचते हो,” उन्होंने कहा।
“आपके साथ नाचने में अलग ही मजा आ रहा है भाभी जी,” मैंने जवाब दिया।
यह देसी भाभी सेक्स स्टोरी का पहला अध्याय था जहां दो दिल एक-दूसरे की ओर बढ़ रहे थे।

रात की गहराइयों में बातचीत
रात के 11 बजे थे और शादी के रस्में जारी थीं। मैं एक कोने में बैठा था, थका हुआ, जब प्रतिभा भाभी मेरे पास आकर बैठ गईं। उन्होंने अब एक हल्की गुलाबी साड़ी पहनी हुई थी।
“थक गए क्या?” उन्होंने पूछा।
“थोड़ा सा,” मैंने कहा।
हम दोनों चुपचाप बैठे, मेहमानों की भीड़ को देख रहे थे। फिर अचानक उन्होंने कहा, “अनूप जी, आपके घर में सब कैसे हैं?”
“सब ठीक हैं भाभी जी, आप बताइए, अकेली रहती हैं, अच्छा लगता है?”
उनके चेहरे पर एक उदासी छा गई, “क्या करूं, पति बाहर रहते हैं, महीने में एक बार आते हैं।”
मुझे उनकी बात समझ आई। यह अकेली भाभी की कहानी थी जो कई औरतों की तरह अपने पति की कमी महसूस कर रही थी।
“समझ सकता हूं भाभी जी,” मैंने कहा।
उन्होंने मेरी तरफ देखा, उनकी आंखों में कुछ अलग था, “आप समझदार हो अनूप, मुझे अच्छा लगा आपसे मिलकर।”
शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई की यह शुरुआत एक साधारण बातचीत से हुई थी, लेकिन दोनों के दिलों में कुछ चल रहा था जो शब्दों में नहीं कहा जा सकता था।
शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई वाली मुलाकात: पहली छूट
रात के साढ़े ग्यारह बजे थे जब मैं पंडाल के बाहर फ्रेश हवा लेने गया। प्रतिभा भाभी भी वहीं थीं, चांदनी रात में अकेली खड़ी थीं।
“भाभी जी, आप यहां?” मैंने पीछे से आवाज दी।
वो मुड़ीं, “अनूप जी, आप भी आ गए? अंदर बहुत गर्मी लग रही थी ना।”
मैं उनके पास गया। हम दोनों चुपचाप आसमान के तारों को देख रहे थे। फिर अचानक उनका हाथ मेरे हाथ से छू गया। दोनों ने एक-दूसरे को देखा, लेकिन कोई हाथ नहीं हटाया।
“अनूप जी…” उन्होंने धीरे से कहा।
“जी भाभी जी?”
“आप अच्छे लड़के हो,” उन्होंने कहा और अपना हाथ मेरे हाथ में दे दिया।
मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। यह रोमांटिक हिंदी सेक्स स्टोरी का वो मोड़ था जहां दो दिल एक-दूसरे के करीब आ रहे थे।
“भाभी जी, मैं…” मैं कुछ कहना चाहता था लेकिन शब्द नहीं मिल रहे थे।
“कुछ मत कहो अनूप, बस यूं ही रहो,” उन्होंने कहा।
हम दोनों वहां खड़े रहे, हाथों में हाथ डाले। यह शादी वाली भाभी के साथ सुहागरात की कहानी का पहला अध्याय था, जो एक शादी में शुरू हो रही थी।
पहला किस
आधी रात हो चुकी थी और शादी की रस्में जारी थीं। मैं और प्रतिभा भाभी एक-दूसरे से अलग हो गए थे लेकिन मेरा मन उनके पास ही था।
फेरे होने वाले थे जब मैंने भाभी को एक कोने में अकेला देखा। मैं उनके पास गया। उन्होंने मुझे देखा और मुस्कुराईं।
“कहां थे इतनी देर?” उन्होंने पूछा।
“आपके पास आने की कोशिश में,” मैंने हिम्मत करके कहा।
उनकी आंखों में एक चमक आई। उन्होंने इधर-उधर देखा, कोई नहीं था। फिर उन्होंने अचानक मेरा हाथ पकड़ा और मुझे पंडाल के पीछे ले गईं।
वहां अंधेरा था। हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था।
“अनूप…” उन्होंने धीरे से कहा।
“जी भाभी…”
उन्होंने अपने हाथ मेरे चेहरे पर रखे, “आप मुझे पसंद आए हो।”
मैं कुछ कहने वाला था कि उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। यह हमारा पहला किस था। मैं स्तब्ध रह गया लेकिन फिर मैंने भी उन्हें कसकर पकड़ लिया।
हम दोनों एक-दूसरे को चूम रहे थे। उनके होंठ नरम थे, मीठे थे। मैंने अपने हाथ उनकी कमर पर रखे और उन्हें अपनी ओर खींचा। शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई की यह शुरुआत एक चुंबन से हुई थी।
करीब दो मिनट तक हम एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर हम अलग हुए, दोनों के सांस तेज़ चल रहे थे।
“अनूप, मैं…” उन्होंने कहना चाहा।
“शांत रहिए भाभी, सब समझता हूं,” मैंने कहा।
हम वापस पंडाल में आ गए। यह देसी भाभी हिंदी कहानी का एक यादगार पल था।
बिस्तर तक का सफर
शादी समाप्त हो चुकी थी, दुल्हा-दुल्हन विदा हो गए थे। अब घर में सफाई और व्यवस्था का काम चल रहा था। मैं रात को ही अपने घर आ गया था लेकिन मेरा मन प्रतिभा भाभी के पास ही था।
अगले दिन सुबह, जब मैं अपने घर के बाहर खड़ा था, प्रतिभा भाभी अपने घर से बाहर निकलीं। उन्होंने मुझे देखा और मुस्कुराईं।
“सुबह-सुबह क्या कर रहे हो अनूप?” उन्होंने पूछा।
“कुछ नहीं भाभी जी, आप बताइए?”
“मैं तो सब्जी लेने जा रही हूं,” उन्होंने कहा।
मैंने हिम्मत की, “मैं भी चलूं?”
उन्होंने मेरी तरफ देखा, आंखों में एक शरारती मुस्कान थी, “आओ, चलो।”
हम दोनों सब्जी मंडी की तरफ चल पड़े। रास्ते में हम बातें कर रहे थे। उन्होंने मुझे बताया कि उनके पति दो महीने बाद आएंगे।
“अकेली रहना कैसा लगता है भाभी जी?” मैंने पूछा।
“अच्छा तो नहीं लगता अनूप, लेकिन क्या करूं,” उन्होंने उदास होकर कहा।
मैंने उनका हाथ पकड़ लिया, “मैं हूं ना भाभी।”
उन्होंने मेरी तरफ देखा, उनकी आंखों में आंसू थे, “तुम बड़े प्यारे हो अनूप।”
यह देसी भाभी का प्यार था जो मुझे मिल रहा था। हम दोनों एक-दूसरे के करीब आ रहे थे।
शाम को मैं उनके घर गया। उन्होंने मुझे अंदर बुलाया। उनका घर सुंदर था, सजा हुआ था।
“बैठो अनूप, चाय पाओगे?” उन्होंने पूछा।
“हां भाभी जी,” मैंने कहा।
वो रसोई में गईं और मैं उनके कमरे में बैठा। उनका बेडरूम साफ-सुथरा था, बिस्तर पर सुंदर चादर बिछी हुई थी। मैं सोच रहा था कि शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई का सपना अब सच होने वाला है।
पहली कोशिश और असफलता
चाय पीने के बाद हम दोनों बैठे बातें कर रहे थे। रात हो चुकी थी और घर में कोई नहीं था।
“अनूप, रात हो गई है, तुम जाओगे कब?” उन्होंने पूछा।
“अगर आप कहें तो जा लूं,” मैंने कहा।
उन्होंने मेरी तरफ देखा, उनकी आंखों में वही चमक थी जो शादी में थी, “नहीं, रुक जाओ थोड़ी देर।”
मैं समझ गया कि कुछ होने वाला है। हम दोनों एक-दूसरे के करीब आए। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। वो मेरे सीने से लग गईं।
“अनूप, मुझे अच्छा लगता है तुम्हारे पास,” उन्होंने धीरे से कहा।
मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया और उनके होंठों पर चूमने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थीं। हम एक-दूसरे को चूम रहे थे, एक-दूसरे को सहला रहे थे।
मैंने उनकी साड़ी का पल्लू हटाया और उनके गले पर किस करने लगा। वो सिसकियां लेने लगीं।
“अनूप… धीरे… अहहह…” वो कह रही थीं।
मैं उनके कपड़े उतारने लगा लेकिन तभी दरवाजे की घंटी बजी। हम दोनों चौंक गए।
“कौन हो सकता है?” उन्होंने घबराते हुए कहा।
मैंने जल्दी से अपने कपड़े ठीक किए। उन्होंने दरवाजा खोला तो पता चला कि उनकी एक सहेली आई थीं।
मुझे वहां से चुपचाप निकलना पड़ा। शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई का यह पहला प्रयास असफल रहा, लेकिन मन में आशा थी कि अगली बार जरूर होगा।
दूसरी मुलाकात और करीबियां
तीन दिन बाद मैं फिर प्रतिभा भाभी के घर गया। इस बार उन्होंने मुझे फोन करके बुलाया था।
“अनूप, आ जाओ, घर में कोई नहीं है,” उन्होंने फोन पर कहा था।
मैं तुरंत तैयार होकर उनके घर पहुंचा। उन्होंने गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था और बाल खुले थे।
“आओ अनूप,” उन्होंने मुझे अंदर बुलाया।
हम बैठे बातें करने लगे। वो मुझे अपने बारे में बता रही थीं, अपनी शादीशुदा जिंदगी के बारे में।
“मेरे पति मुझे समय नहीं दे पाते अनूप, वो हमेशा काम में व्यस्त रहते हैं,” उन्होंने उदासी से कहा। मैंने उनका हाथ पकड़ा, “भाभी जी, मैं हमेशा आपके साथ हूं।”
उन्होंने मेरी तरफ देखा, उनकी आंखों में प्यार था, “पता है अनूप, तुमसे मिलकर मुझे वो प्यार मिलता है जो मुझे चाहिए।”
हम दोनों एक-दूसरे के करीब आए। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। वो मेरे सीने से लग गईं। मैंने उनके बालों को सहलाया, उनकी खुशबू सूंघी।
“अनूप, मुझे चूमो,” उन्होंने कहा।
मैंने उनका चेहरा ऊपर उठाया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। हम एक-दूसरे को चूम रहे थे। यह पड़ोस वाली भाभी के साथ मेरी दूसरी मुलाकात थी जो और भी गहरी हो रही थी। मैंने उनके सूट के बटन खोलने शुरू किए। वो मेरा साथ दे रही थीं। शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई का यह दूसरा प्रयास था।
पहली बार का आनंद
मैंने प्रतिभा भाभी के कपड़े उतारने शुरू किए। वो शर्मा रही थीं लेकिन मना नहीं कर रही थीं।
“अनूप, धीरे… पहली बार है…” उन्होंने शर्माते हुए कहा।
“डरो मत भाभी, मैं हूं ना,” मैंने उन्हें सांत्वना दी।
थोड़ी ही देर में वो केवल अपनी ब्रा और पैंटी में थीं। उनका शरीर बहुत सुंदर था, गोरा और मुलायम। मैं उन्हें देखता ही रह गया।
“क्या देख रहे हो?” उन्होंने शर्माते हुए पूछा।
“आपको भाभी, आप बहुत खूबसूरत हैं,” मैंने कहा।
मैंने उन्हें गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। वो मेरे लिए खुद को तैयार कर रही थीं। मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए।
अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने नंगे थे। मैंने उनके शरीर को चूमना शुरू किया। उनके गालों से लेकर उनके पैरों तक, मैंने हर जगह किस किए।
“अहहह… अनूप… बहुत अच्छा लग रहा है…” वो कराह रही थीं।
मैंने उनकी ब्रा उतार दी। उनके स्तन बहुत सुंदर थे, गोल-मटोल। मैंने उन्हें चूसना शुरू किया।
“ऊहहह… हां अनूप… और जोर से…” वो कह रही थीं।
मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगी थीं। मैंने उनकी जांघों को चूमा, उनकी योनि के पास गया।
“अनूप, वहां मत… गंदा है…” वो शर्मा रही थीं।
“कुछ नहीं भाभी, यह प्यार है,” मैंने कहा और उनकी योनि को चूमना शुरू कर दिया।
“अहहह… हां… बहुत मजा आ रहा है…” वो चिल्ला रही थीं।
मैंने अपनी जीभ उनकी योनि में डाली और चाटने लगा। वो पागल हो रही थीं, अपने हाथों से मेरे सिर को दबा रही थीं।
“अनूप, अब और मत तड़पाओ… आ जाओ अंदर…” वो बोलीं।
मैंने अपना लिंग उनकी योनि के मुंह पर रखा और धीरे से अंदर डालने की कोशिश की।
“धीरे अनूप… दर्द हो रहा है…” वो चीखीं।
मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लिंग उनके अंदर डाल दिया। वो मेरी बाहों में कसकर पकड़ गईं।
“अहहह… बहुत बड़ा है तुम्हारा…” वो कह रही थीं।
मैंने धीरे-धीरे अपने हिलना शुरू किया। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़-तेज़।
“ऊहहह… हां अनूप… और तेज़… बहुत मजा आ रहा है…” वो चिल्ला रही थीं।
हम दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे। यह शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई का वो पल था जो मैं कभी नहीं भूल सकता।
हम दोनों करीब आधे घंटे तक एक-दूसरे के साथ रहे। फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए। वो मेरी बाहों में थीं, मैं उनके ऊपर लेटा हुआ था।
“अनूप, यह बहुत अच्छा था,” उन्होंने धीरे से कहा।
“मुझे भी बहुत अच्छा लगा भाभी,” मैंने कहा।
हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। उनकी आंखों में प्यार था, एक गहरा एहसास था।
“अनूप, क्या तुम मुझे प्यार करते हो?” उन्होंने पूछा।
“हां भाभी, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं,” मैंने सच्चे दिल से कहा।
उन्होंने मुझे कसकर गले लगा लिया, “मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं अनूप।”
यह हिंदी रोमांटिक सेक्स स्टोरी का वो मोड़ था जहां शारीरिक संबंध के साथ-साथ दिल भी मिल गए थे।
हम दोनों बिस्तर पर लेटे रहे, एक-दूसरे को चूमते रहे, एक-दूसरे से बातें करते रहे। उन्होंने मुझे अपनी जिंदगी की हर बात बताई, अपने सपने, अपनी उम्मीदें।
“अनूप, मैं चाहती हूं कि तुम हमेशा मेरे साथ रहो,” उन्होंने कहा।
“मैं हमेशा आपके साथ हूं भाभी,” मैंने कहा।
हम दोनों फिर से एक-दूसरे के करीब आए। इस बार और भी प्यार से, और भी गहराई से। शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई का यह दूसरा दौर था जो और भी सुंदर था।
उस रात के बाद मेरी और प्रतिभा भाभी की जिंदगी बदल गई। हम दोनों अक्सर एक-दूसरे के घर मिलते, एक-दूसरे के साथ समय बिताते।
शादी के घर में पड़ोसन भाभी से चुदाई की यह कहानी सिर्फ शारीरिक संबंधों की नहीं थी, यह दो दिलों के मिलने की कहानी थी। हम दोनों एक-दूसरे को समझते थे, एक-दूसरे का ख्याल रखते थे। एक दिन प्रतिभा भाभी ने मुझे कहा, “अनूप, क्या तुम मुझसे शादी करोगे अगर मौका मिले तो?”
मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया, “भाभी, अगर यह संभव होता तो मैं अभी इसी पल आपसे शादी कर लेता।” उनकी आंखों में आंसू आ गए, “पता है अनूप, मुझे तुमसे सच्चा प्यार मिला है।”
आज भी हमारी ऐसी मुलाकात जारी है और हम अभी भी रोज सेक्स करते हैं अगर पसंद आए तो तुम कमेंट करना ना भूले ।
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