रोहन अपनी साली सिमरन को पहली बार तब देखा था जब वह अपनी पत्नी प्रिया के साथ उसके मायके आया था। तब सिमरन सिर्फ 18 साल की थी, लेकिन उसकी खूबसूरती ने रोहन को तुरंत आकर्षित कर लिया था। अब चार साल बीत चुके थे और सिमरन 22 साल की हो चुकी थी, उसकी शादी तय हो गई थी। जीजा-साली की गुप्त सुहागरात ।
सिमरन का फिगर बेहद खूबसूरत था – लगभग 5’4″ की हाइट, गोरा रंग, 34-28-36 का परफेक्ट फिगर। उसके चूचे पूरी तरह से तराशे हुए थे, गोल-गोल और कसे हुए, जो किसी भी लड़के को पागल बना सकते थे। उसकी कमर इतनी पतली थी कि एक हाथ से पकड़ी जा सकती थी, और उसकी गांड उभरी हुई, गोल और कसी हुई थी जो चलते वक्त इधर-उधर हिलती थी। उसके होंठ मोटे और गुलाबी थे, आंखें बड़ी-बड़ी और कातिलाना।
शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। रोहन पूरी मदद के लिए पत्नी के साथ ससुराल आया हुआ था। घर में महमानों की भीड़ थी, लेकिन रोहन की नजरें बार-बार सिमरन पर ही टिक जाती थीं।
पहली रात, जब सब सो गए, रोहन बाथरूम जा रहा था तो उसने देखा कि सिमरन का कमरा थोड़ा खुला था। अंदर से हल्की सी रोशनी आ रही थी। वह रुक गया और झांकने लगा। सिमरन आईने के सामने खड़ी थी, वह अपनी नाइटी उतार रही थी। रोहन का दिल तेजी से धड़कने लगा।
सिमरन ने अपनी नाइटी उतार दी। अंदर वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। उसकी ब्रा भी हल्की गुलाबी रंग की थी जो उसके गोरे बदन पर बेहद खूबसूरत लग रही थी। उसके चूचे ब्रा से थोड़े बाहर निकलने को बेताब लग रहे थे। रोहन का लंड तुरंत खड़ा हो गया। वह देखता रहा कि सिमरन कैसे अपने हाथों से अपने शरीर को सहला रही थी, शायद वह अपनी शादी के बारे में सोच रही थी।
अगले दिन हल्दी का फंक्शन था। सिमरन ने पीले रंग का लहंगा पहना था जो उसकी कमर पर बेहद कसा हुआ था और उसकी गांड की गोलाई साफ दिखा रहा था। उसका ब्लाउज भी काफी कटा हुआ था, उसकी पीठ का काफी हिस्सा खुला था। रोहन उसे देखता रहा, उसका लंड पैंट में तड़प रहा था।
हल्दी लगने के दौरान, जब सिमरन बैठी थी, रोहन ने मौके का फायदा उठाया। वह उसके पीछे बैठ गया और हल्दी लगाने के बहाने उसकी पीठ पर अपने हाथ फेरने लगा। उसकी त्वचा इतनी मुलायम थी कि रोहन का मन कर रहा था कि वहीं उसे पकड़ ले।
“जीजू, ऊपर भी लगा दो ना,” सिमरन ने कहा, पीछे मुड़कर मुस्कुराते हुए।
रोहन ने अपने हाथ आगे बढ़ाए और उसकी गर्दन से होते हुए उसकी बांहों पर हल्दी लगाने लगा। उसकी बांहें इतनी मुलायम थीं। फिर उसने हल्के से अपने हाथ उसके गले पर फेरे, उसकी क्लीवेज के पास ले जाकर रुक गया।
“जीजू, क्या कर रहे हो?” सिमरन ने शरारत से पूछा, लेकिन उसकी आवाज में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक अजीब सी excitement थी।
“तुम्हें पीला कर रहा हूं, मेरी प्यारी साली,” रोहन ने कान में फुसफुसाते हुए कहा।
सिमरन ने शरमाते हुए अपनी आंखें झुका लीं, लेकिन उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी। रोहन समझ गया कि यह लड़की भी तैयार है, बस इंतजार है सही मौके का।
मेहंदी की रात को सिमरन ने हल्के हरे रंग का लहंगा पहना था जो उस पर बेहद जंच रहा था। उसके बाल खुले थे, गीले और बिखरे हुए। उसकी सुंदरता देखकर रोहन का दिल कर रहा था कि वहीं उसे उठाकर किसी कोने में ले जाए।
रात को जब मेहंदी लग रही थी, रोहन उसके पास बैठा था। सिमरन ने अपना पैर रोहन की गोद में रख दिया।
“जीजू, पैर दबा दो ना, बहुत दर्द हो रहा है,” उसने मासूमियत से कहा।
रोहन ने उसका पैर अपने हाथों में लिया। उसके पैर इतने सुंदर थे, पंजे गोल और मुलायम। रोहन ने धीरे-धीरे उसके पैर दबाने शुरू किए, फिर टखनों से होते हुए उसकी जांघों की ओर बढ़ गया।
“जीजू, ऊपर भी दर्द है,” सिमरन ने अपनी आंखें बंद करते हुए कहा।
रोहन समझ गया। उसने अपने हाथ उसकी जांघों पर रखे और धीरे-धीरे मसाज करने लगा। उसकी जांघें इतनी मुलायम और गोल थीं। रोहन का लंड पूरी तरह तन चुका था और उसकी पैंट में एक तम्बू बन गया था।
“कहां दर्द है मेरी जान?” रोहन ने पूछा।
“और ऊपर,” सिमरन ने फुसफुसाते हुए कहा।
रोहन का हाथ उसकी जांघों के अंदर की तरफ बढ़ गया। उसने महसूस किया कि सिमरन की सांसें तेज हो गई थीं। उसका हाथ अब उसकी पैंटी के बहुत करीब था, वह हल्के से उसके अंदरूनी हिस्से को छूने लगा।
“जीजू, कोई आ जाएगा,” सिमरन ने कहा, लेकिन उसने अपना पैर नहीं हटाया।
“डरो मत, मैं हूं ना,” रोहन ने कहा और उसके पैर को और पास खींच लिया, जिससे उसका हाथ उसकी पैंटी पर लग गया।
सिमरन ने हल्की सी आह भरी। रोहन ने महसूस किया कि उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। उसने उंगली से उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।
“उम्म्म… जीजू…” सिमरन ने आंखें बंद करते हुए कहा।
तभी किसी के आने की आहट हुई और रोहन ने तुरंत अपना हाथ हटा लिया। लेकिन उस रात दोनों को पता चल गया था कि दोनों एक-दूसरे के लिए तड़प रहे हैं।
जीजा-साली की गुप्त सुहागरात: पहली बार चूचे छुए
संगीत की रात को घर में जश्न का माहौल था। सिमरन ने गुलाबी रंग की heavy lehenga पहनी थी जिसका ब्लाउज बेहद कटा हुआ था। उसके चूचे आधे से ज्यादा बाहर निकले हुए थे और क्लीवेज इतना गहरा था कि रोहन का मन कर रहा था कि वहीं झुककर चूस ले।
रात को जब सब नाच रहे थे, रोहन ने सिमरन को किनारे ले जाकर कहा, “आज तुम बेहद खूबसूरत लग रही हो, मेरी साली।”
“सचमें जीजू?” सिमरन ने शरारत से पूछा, अपने होंठ काटते हुए।
“हां, मेरा मन कर रहा है कि तुम्हें यहीं उठाकर ले जाऊं,” रोहन ने कान में फुसफुसाते हुए कहा।
“कहां ले जाओगे?” सिमरन ने पूछा, उसकी सांसें तेज हो रही थीं।
“जहां तुम्हें अपनी बना सकूं,” रोहन ने कहा और उसकी कमर पर हाथ रख दिया।
सिमरन ने कोई विरोध नहीं किया। रोहन ने उसे सीढ़ियों की ओर ले जाने का इशारा किया। ऊपर एक खाली कमरा था। दोनों चुपचाप ऊपर चले गए।
कमरे में जाते ही रोहन ने दरवाजा बंद कर दिया और सिमरन को दीवार से लगा दिया। उसने उसका चेहरा अपने हाथों में पकड़ा और उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
“उम्म्म… जीजू…” सिमरन ने मुंह से कहा, लेकिन रोहन के होंठ उसके मुंह पर थे।
रोहन ने उसे पागलों की तरह चूमना शुरू कर दिया। उसका एक हाथ सिमरन की कमर पर था और दूसरा उसके सिर के पीछे, उसके बालों में फंसा हुआ था। वह उसके होंठ चूस रहा था, काट रहा था, उसकी जीभ को अपने मुंह में खींच रहा था।
सिमरन भी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। उसने अपने हाथ रोहन की पीठ पर रख दिए और उसे अपनी तरफ खींचने लगी। रोहन का लंड उसकी पेट पर अटक रहा था, जो पूरी तरह से कठोर था।
कुछ देर तक चूमने के बाद, रोहन ने अपने होंठ हटाए और सिमरन की गर्दन पर चूमने लगा। उसने उसके गले को काटा, चूमा, चाटा। सिमरन की सांसें तेज हो गई थीं और वह “आह… उम्म… जीजू…” की आवाजें निकाल रही थी।
फिर रोहन नीचे झुका और उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसके चूचों को काटने लगा। उसने अपने दांतों से उसके ब्लाउज को पकड़ा और खींचा, जिससे सिमरन की आह निकल गई।
“जीजू, अंदर से… सीधे…” सिमरन ने कहा।
रोहन ने उसके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। जैसे ही ब्लाउज खुला, सिमरन के गोल-गोल, गुलाबी चूचे बाहर निकल आए। उसके निप्पles छोटे-छोटे और गुलाबी थे, जो excitement में कड़े हो चुके थे।
“वाह, क्या माल है तू,” रोहन ने कहा और एक चूचे को अपने मुंह में भर लिया।
“आहhhhh… जीजू…” सिमरन ने सिर पीछे झुकाते हुए कहा।
रोहन उसके चूचे को पागलों की तरह चूस रहा था, काट रहा था, जीभ से लोल रहा था। उसने दूसरे हाथ से दूसरे चूचे को मसलना शुरू कर दिया। सिमरन की आंखें बंद थीं और वह इस पल का पूरा मजा ले रही थी।
“और जोर से… काटो…” उसने कहा।
रोहन ने उसके निप्पle को दांतों से काट लिया, जिससे सिमरन की चीख निकल गई, लेकिन वह मना नहीं कर रही थी। वह और चाहती थी।
कुछ देर बाद रोहन ने दूसरा चूचा भी चूसा और फिर नीचे झुक गया। उसने सिमरन की lehenga उठाई और उसकी जांघों को चूमना शुरू कर दिया। उसकी जांघें इतनी मुलायम थीं, रोहन का मन कर रहा था कि उन्हें काट ले।
“जीजू, नीचे… वहां…” सिमरन ने कहा, अपनी चूत की ओर इशारा करते हुए।
रोहन ने उसकी पैंटी को सूंघा, वह पूरी तरह से गीली थी और उसमें से एक अजीब सी खुशबू आ रही थी – एक ऐसी खुशबू जो किसी भी मर्द को पागल बना सकती थी।
उसने उसकी पैंटी नीचे खींची और सिमरन की चूत को देखा। वह बिल्कुल साफ शेव थी, गुलाबी और बेहद खूबसूरत। उसकी चूत के होठ मोटे थे और बीच से थोड़ी सी चमकती हुई नमी निकल रही थी।
रोहन ने अपनी जीभ बाहर निकाली और सिमरन की चूत पर लगा दी।
“ओह माय गॉड… जीजू…” सिमरन ने अपने हाथों से दीवार पकड़ते हुए कहा।
रोहन उसकी चूत को पागलों की तरह चाट रहा था। उसने अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर डाली और चाटने लगा। सिमरन की टांगें कांप रही थीं, वह इस सेक्स का पूरा आनंद ले रही थी।
“जीजू, प्लीज… अब और मत तड़पाओ… मुझे चोद दो…” सिमरन ने कहा।
रोहन खड़ा हो गया और अपनी पैंट खोलने लगा। उसका लंड 7 इंच का था, मोटा और कठोर। जैसे ही सिमरन ने उसे देखा, उसकी आंखें चौड़ी हो गईं।
“इतना बड़ा… मर जाऊंगी…” उसने कहा।
“डरो मत, मजा आएगा,” रोहन ने कहा और उसके मुंह पर फिर से होंठ रख दिए।
तभी नीचे से आवाज आई, “सिमरन, कहां हो तुम?”
दोनों चौंक गए। यह सिमरन की मां की आवाज थी। रोहन ने तुरंत अपनी पैंट ठीक की और सिमरन ने अपने कपड़े ठीक किए।
“आ रही हूं मम्मी,” सिमरन ने कहा और रोहन की ओर देखकर शरारत से मुस्कुराई, “बच गए जीजू, लेकिन शादी वाली रात…”
रोहन समझ गया। उसने उसके गाल पर चूमा और कहा, “शादी वाली रात तू मेरी होगी, पूरी तरह से।”
शादी का दिन – वर्माला और फेरों के बीच की चुदाई
शादी का दिन आ गया था। घर में खुशी का माहौल था, लेकिन रोहन और सिमरन के बीच एक अलग ही तनाव था – एक sexual तनाव जो दोनों को बेकरार कर रहा था।
सिमरन दुल्हन के जोड़े में तैयार हो रही थी। उसने लाल रंग का heavy lehenga पहना था जो उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था। उसका dupatta सिर पर था, लेकिन उसके चूचे फिर भी साफ दिख रहे थे। उसकी कमर पर heavy कमरबंद था जो उसकी कमर को और पतला दिखा रहा था और गांड को और उभार रहा था।
रोहन उसे तैयार होते देख रहा था। उसका लंड पैंट में अकड़ा हुआ था, वह बस शादी की रात का इंतजार कर रहा था।
शाम को बारात आ गई। सिमरन का होने वाला पति, राहुल, एक अच्छा लड़का था, लेकिन रोहन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। वह जानता था कि आज रात सिमरन उसकी होगी, न कि राहुल की।
मंडप में वर्माला की रस्म शुरू हुई। सिमरन और राहुल एक-दूसरे को माला पहना रहे थे। रोहन साइड में खड़ा था और सिमरन को देख रहा था। सिमरन भी बार-बार उसकी ओर देख रही थी, उसके होठों पर एक शरारती मुस्कान थी।
वर्माला के बाद, पंडित जी ने कहा, “दुल्हन को कमरे में ले जाइए, फेरों की तैयारी करनी है। दुल्हन को कुछ देर आराम करना चाहिए और फिर फेरे होंगे।”
यह सुनकर रोहन के दिमाग में एक आइडिया आया। वह चुपचाप पीछे हट गया और सीढ़ियों की ओर चल पड़ा जहां सिमरन का कमरा था।
सिमरन को भी यही इरादा था। वह अपनी मां से कहकर ऊपर अपने कमरे में “आराम” करने चली गई। वह जानती थी कि रोहन उसे फॉलो करेगा।
सिमरन अपने कमरे में आई और दरवाजा थोड़ा सा खुला छोड़ दिया। वह अपने बिस्तर पर बैठी और इंतजार करने लगी। कुछ ही देर में रोहन चुपचाप कमरे में घुसा और दरवाजा बंद करके लॉक कर दिया।
“आ गए मेरे प्यारे जीजू?” सिमरन ने कहा, बिस्तर से उठते हुए। उसने अपना heavy dupatta हटा दिया था और उसके चूचे साफ दिख रहे थे।
“हां, मेरी दुल्हन,” रोहन ने कहा और उसे अपनी बाहों में भर लिया, “आज तुम दूसरे की दुल्हन बनने जा रही हो, लेकिन उससे पहले मुझे तुम्हें अपनी बनाना है।”
“मैं पहले से ही आपकी हूं जीजू,” सिमरन ने कहा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
यह किस और भी ज्यादा पैशनेट था। दोनों एक-दूसरे को पागलों की तरह चूम रहे थे। रोहन ने अपने हाथ सिमरन की पीठ पर फेरे और उसके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए।
“जीजू, जल्दी करो… फेरे शुरू होने में सिर्फ आधा घंटा है…” सिमरन ने कहा, सांसें तेज करते हुए।
“बस पंद्रह मिनट में काम हो जाएगा,” रोहन ने कहा और उसके ब्लाउज को खोल दिया।
सिमरन के गोल-गोल, गोरे चूचे बाहर निकल आए। रोहन ने एक चूचे को मुंह में ले लिया और पागलों की तरह चूसने लगा।
“आहhhhh… जीजू… हां… और जोर से…” सिमरन चीखी।
रोहन उसके चूचों को बारी-बारी से चूस रहा था, काट रहा था। उसने दूसरे हाथ से उसकी lehenga उठाई और उसकी जांघों को सहलाने लगा।
“पैंटी उतारो…” रोहन ने कहा।
सिमरन ने अपनी पैंटी नीचे खींची और पैरों से निकाल दी। अब वह नीचे से पूरी तरह से नंगी थी। रोहन ने अपने हाथ उसकी चूत पर लगाए – वह पूरी तरह से गीली थी।
“क्या गजब की चूत है तेरी,” रोहन ने कहा और उसकी चूत में उंगली डाल दी।
“उम्म्म… जीजू…” सिमरन ने कहा, अपनी आंखें बंद करते हुए।
रोहन उसकी चूत में उंगली अंदर-बाहर कर रहा था और साथ में उसके चूचे भी चूस रहा था। सिमरन पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी।
“अब डाल दो जीजू… मुझे चोद दो… फेरों से पहले मुझे अपनी बना लो…” सिमरन ने कहा।
रोहन ने अपनी पैंट और underwear खोली और उसका 7 इंच का मोटा लंड बाहर निकल आया। सिमरन ने उसे देखा और कहा, “इतना बड़ा… जल्दी से अंदर डालो…”
रोहन ने उसे बिस्तर पर बिठाया और खुद उसके सामने खड़ा हो गया। उसने सिमरन का सिर अपने हाथों में पकड़ा और अपना लंड उसके मुंह के पास ले आया।
“पहले इसे चूसो…”
सिमरन ने अपने होंठ खोले और रोहन का लंड अपने मुंह में ले लिया। वह उसे चूसने लगी, जीभ से लोलने लगी, और अंदर-बाहर करने लगी।
“उम्म्म… क्या मजा आ रहा है…” रोहन ने कहा, उसका सिर पकड़कर।
सिमरन पूरी तरह से लगन से उसका लंड चूस रही थी। वह उसके सुपाड़े को जीभ से चाटती, फिर पूरे लंड को मुंह में ले लेती। रोहन का लंड पूरा लार से भीग गया था।
“बस… अब और नहीं… चूत में डालना है…” रोहन ने कहा और अपना लंड बाहर निकाला।
उसने सिमरन को बिस्तर पर लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। उसकी चूत पूरी तरह से खुली थी, गीली और चमकती हुई। रोहन ने अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रखा और एक ही धक्के में अंदर डाल दिया।
“आहhhhh… जीजू…” सिमरन चीखी, उसकी आंखों में आंसू आ गए।
रोहन ने धक्के देने शुरू किए, तेजी से। बिस्तर की चरपराहट गूंज रही थी। सिमरन के चूचे उछल रहे थे और रोहन उन्हें मसल रहा था।
“और तेज… चोदो मुझे… मैं राहुल की नहीं, सिर्फ आपकी हूं…” सिमरन चीख रही थी।
“हां… तू सिर्फ मेरी है… राहुल को सिर्फ बची हुई चूत मिलेगी…” रोहन ने कहा और और जोर से धक्के दिए।
“आहhhhh… जीजू… मैं झड़ने वाली हूं…”
“मैं भी… अंदर ही निकालूं?”
“हां… भर दो मेरी चूत… मुझे अपने पानी से भर दो…”
रोहन ने कुछ और तेज धक्के दिए और फिर अपना लंड अंदर ही रोक दिया। उसका गर्म पानी सिमरन की चूत में निकल गया और सिमरन भी झड़ गई।
“उम्म्म… क्या मजा आया…” सिमरन ने कहा।
“अभी खत्म नहीं हुआ…” रोहन ने कहा और अपना लंड बाहर निकाला। वह अभी भी कठोर था।
उसने सिमरन को उल्टा लिटाया और उसकी गांड के छेद पर अपना लंड रखा।
“नहीं जीजू… गांड में… बहुत दर्द होगा…” सिमरन ने कहा।
“बस दो मिनट… फिर मजा आएगा…” रोहन ने कहा और एक धक्के में आधा लंड उसकी गांड में डाल दिया।
“आहhhhh… मर गई…” सिमरन चीखी।
रोहन ने कुछ तेज धक्के दिए और फिर अपना पानी उसकी गांड में ही निकाल दिया।
इसके बाद दोनों ने जल्दी से अपने कपड़े ठीक किए। सिमरन ने अपनी चूत को एक तौलिये से साफ किया, जिस पर रोहन का सफेद पानी और उसका खून लगा था – यह सबूत था कि वह अब रोहन की हो चुकी थी।
“जीजू, अब मुझे जाना होगा… फेरे शुरू होने वाले हैं…” सिमरन ने कहा।
“जाओ… और याद रखना, तुम मेरी हो…” रोहन ने कहा।
“हमेशा…” सिमरन ने कहा और उसके होंठों पर एक लंबा किस किया।
सिमरन ने अपना dupatta ठीक किया और नीचे चली गई। कुछ ही देर में फेरे शुरू हो गए। रोहन भी नीचे आया और देखने लगा कि कैसे सिमरन और राहुल फेरे ले रहे थे।
रोहन मुस्कुरा रहा था। उसे पता था कि अभी कुछ ही देर पहले सिमरन उसकी थी, और अब राहुल उसके बचे हुए अवशेषों से संतुष्ट होगा।
रात को जब सब सो गए, रोहन फिर से सिमरन के कमरे में घुसा। इस बार सिमरन पूरी तरह से तैयार थी, उसने अपनी शादी की heavy lehenga उतार दी थी और सिर्फ एक हल्की सी nighty पहनी हुई थी।
“आ गए मेरे प्यारे जीजू?” सिमरन ने कहा, “आज रात तो मेरी असली सुहागरात है… राहुल तो बस नाम का पति है… असली हकदार तो आप हैं…”
“हां, मेरी रानी,” रोहन ने कहा और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
इस बार दोनों ने पूरी रात भरपूर चुदाई की। अलग-अलग पोजीशन में – कभी सिमरन ऊपर थी, कभी रोहन, कभी doggy style, कभी standing, कभी sideways। सुबह होने तक सिमरन की चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं और रोहन का लंड दर्द कर रहा था, लेकिन दोनों पूरी तरह से संतुष्ट थे।
सुबह जब सूरज निकला, सिमरन रोहन की बाहों में थी। दोनों थके हुए थे, लेकिन खुश थे।
“जीजू, यह रात मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगी,” सिमरन ने कहा।
“मैं भी,” रोहन ने कहा और उसके माथे पर चूमा।
“अब मुझे जाना होगा… राहुल उठने वाला होगा,” सिमरन ने कहा।
“हां, जाओ… लेकिन याद रखना, तुम मेरी हो,” रोहन ने कहा।
“हमेशा,” सिमरन ने कहा और उसके होंठों पर एक लंबा किस किया।
सिमरन ने अपने कपड़े पहने और चली गई। रोहन भी अपने कमरे में आ गया जहां उसकी पत्नी प्रिया सो रही थी।
कुछ देर बाद जब सब उठे, राहुल और सिमरन की विदाई की तैयारी होने लगी। सिमरन ने रोहन की ओर देखा और उसकी आंखों में आंसू थे – शायद खुशी के, शायद उस रात की याद के।
रोहन ने भी उसे देखा और मुस्कुराया। उसे पता था कि यह रात उसकी जिंदगी की सबसे यादगार रात थी, जब उसने अपनी साली के साथ उसकी सुहागरात मनाई थी, और वर्माला-फेरों के बीच भी उसे अपना बना लिया था।
विदाई के वक्त सिमरन ने रोहन को गले लगाया और कान में फुसफुसाते हुए कहा, “जीजू, जब भी आओगे… मैं हमेशा तैयार रहूंगी… और याद रखना, राहुल को कभी मेरी असली चूत नहीं मिली… वह तो आपकी बची हुई चूत में ही झड़ गया था…”
रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं भी, मेरी प्यारी साली… और हां, मैं जानता हूं… तुम हमेशा मेरी रहोगी…”
और इस तरह, रोहन और सिमरन की गुप्त कहानी एक यादगार रात के साथ खत्म हुई, लेकिन उनके दिलों में यह आग हमेशा के लिए जलती रही…
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