करवाचौथ की शाम ढल चुकी थी। पूरे आसमान में बादलों की हल्की सी परत थी जो धीरे-धीरे छंट रही थी। सोसाइटी की छत पर रंगीन लाइटें लगी हुई थीं जो रात के अंधेरे में एक अजीब सा नूर बिखेर रही थीं। अंकित सीढ़ियों से ऊपर आ रहा था। उसके कदम…
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