बाहर आसमान गरज रहा था। काली घटाएँ पूरे आकाश को अपनी चादर में लपेटे हुए थीं और बारिश की बूंदें खिड़की के शीशों पर अपना नृत्य कर रही थीं। यह जुलाई की एक शाम थी, जब मॉनसून अपने पूरे जोश में होता है और हर तरफ हरियाली और नमी का…
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