आखिरी ट्रेन में अनजान लड़की की हवस
रात के बारह बज चुके थे। शहर की लाइट्स धीमी पड़ रही थीं और स्टेशन लगभग खाली था। आखिरी लोकल ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी थी। डिब्बे के अंदर सिर्फ दो ही यात्री थे—एक लड़की और एक लड़का। आखिरी ट्रेन में अनजान लड़की की हवस
लड़की का नाम अनन्या था। उसने काली टाइट स्कर्ट और सफ़ेद शिफॉन की टॉप पहनी हुई थी। स्कर्ट घुटनों से थोड़ा ऊपर थी। वह खिड़की की तरफ मुँह करके बैठी थी, लेकिन उसकी नज़र बार-बार सामने वाली सीट पर बैठे लड़के पर जा रही थी।
लड़का लंबा था, कंधे चौड़े, चेहरा गंभीर। उसने फॉर्मल शर्ट और पैंट पहनी हुई थी। लैपटॉप बैग उसके बगल में रखा था। वह फोन में कुछ देख रहा था, जैसे दुनिया से कटा हुआ हो। अनन्या ने देखा कि उसकी उंगलियाँ फोन की स्क्रीन पर धीरे-धीरे चल रही थीं। वह व्यस्त लग रहा था। या शायद जानबूझकर व्यस्त दिखना चाहता था।
अनन्या ने पैर क्रॉस किए। स्कर्ट थोड़ी और ऊपर चढ़ गई। उसने धीरे से पैर खोलकर फिर क्रॉस किए, इस बार और ऊँचा। उसकी जाँघें साफ दिखने लगीं। उसने सोचा कि अब तो वह देखेगा। लेकिन लड़के ने सिर तक नहीं उठाया।
अनन्या का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वह चाहती थी कि वह उसे देखे। सिर्फ देखे नहीं, चाहे। उसने और हिम्मत जुटाई। इस बार उसने पैर पूरी तरह खोल दिए। स्कर्ट कमर तक चढ़ गई। उसके नीचे कुछ नहीं था। ठंडी हवा ने उसकी नंगी त्वचा को छू लिया। उसने अपनी जाँघों को थोड़ा और फैलाया, ताकि साफ दिखे कि वह तैयार है। आखिरी ट्रेन में अनजान लड़की की हवस
लड़के ने आखिरकार सिर उठाया। उसकी नज़र अनन्या की जाँघों पर पड़ी… और फिर तुरंत हट गई। उसने फोन की तरफ मुँह कर लिया, जैसे कुछ देखा ही न हो। अनन्या के चेहरे पर निराशा छा गई। इतना साफ इशारा… और फिर भी नज़रें फेर लीं?
ट्रेन चल पड़ी। पहिए पटरियों पर दौड़ने लगे। अनन्या ने तय कर लिया—आज वह हार नहीं मानेगी। वह उठकर उसके बगल वाली सीट पर जा बैठी। इतनी करीब कि उनकी जाँघें लगभग छू रही थीं।
“रात हो गई है,” अनन्या ने धीरे से कहा। उसकी आवाज़ में जानबूझकर नमी थी।
लड़के ने सिर हिलाया, लेकिन जवाब नहीं दिया। वह अभी भी फोन देख रहा था।
अनन्या ने अपना हाथ धीरे से उसकी जाँघ पर रख दिया। गर्म, मजबूत जाँघ। उसने उंगलियों से हल्का दबाव डाला। लड़के का शरीर थोड़ा तन गया, लेकिन उसने हाथ नहीं हटाया। अनन्या ने और आगे बढ़ाया। उसका हाथ पैंट की फोल्ड तक पहुँच गया। वहाँ सख्ती साफ महसूस हो रही थी।
“तुम मुझे देख रहे हो,” अनन्या ने फुसफुसाते हुए कहा। “मैं जानती हूँ।”
लड़के ने आखिरकार फोन नीचे रखा। उसकी आँखें अनन्या की आँखों से मिलीं। उनमें गुस्सा नहीं था, बल्कि एक अजीब सा संघर्ष था। आखिरी ट्रेन में अनजान लड़की की हवस
“तुम नहीं समझती,” उसने कम आवाज़ में कहा। “यह सही नहीं है।”
अनन्या मुस्कुराई। उसने अपना हाथ और ऊपर बढ़ाया। पैंट के ऊपर से ही उसने उसकी सख्ती को थाम लिया। उंगलियों से धीरे-धीरे दबाया, रगड़ा।
“सही-गलत बाद में सोचेंगे,” उसने कहा। “अभी तो बस… मुझे छूओ।”
लड़के ने उसकी कलाई पकड़ ली। पकड़ मजबूत थी। “बस करो।”
अनन्या का दिल बैठ गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने दूसरी तरफ से अपना दूसरा हाथ बढ़ाया और उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। एक… दो… तीन। उसकी छाती की त्वचा दिखाई देने लगी। अनन्या ने झुककर वहाँ होंठ रख दिए। जीभ से चाटा।
आरव की नजर वहाँ जाकर अटक गई। अनन्या ने देखा कि उसकी पैंट में सख्ती उभर आई है। उसने हिम्मत की और उसके बगल में जा बैठी। अपना हाथ उसकी जाँघ पर रखा, फिर धीरे-धीरे ऊपर सरकाया। पैंट के ऊपर से ही मोटी, गरम लंड को थाम लिया। उंगलियों से दबाया तो महसूस हुआ कि वह पूरी तरह खड़ी हो चुकी है—नसें फूली हुई, गरम, और धड़क रही है।
अनन्या ने जिपर खोला। लंड बाहर निकल आई। मोटी, लंबी, सिरे पर पहले से ही एक बूंद चिकनाई चमक रही थी। अनन्या ने अपनी हथेली से उसे ऊपर से नीचे तक धीरे-धीरे सहलाया। त्वचा इतनी गरम और चिकनी थी कि उसकी हथेली चिपक रही थी। फिर वह झुकी और जीभ निकालकर सिरे पर चाटा। नमकीन-मीठा स्वाद। उसने पूरे सिरे को मुँह में ले लिया, गालों को अंदर की तरफ खींचकर चूसा। “उम्मम्म…” उसकी गले से आवाज निकली। आखिरी ट्रेन में अनजान लड़की की हवस
आरव की साँसें तेज हो गईं। उसने अनन्या के बालों में उंगलियाँ फँसा लीं। अनन्या ने और गहरा लिया—इतना कि लंड का सिरा उसके गले से टकराने लगा। उसकी आँखों से पानी आने लगा, लेकिन वह रुकी नहीं। ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे… थूक की आवाज “स्लर्प-स्लर्प” साफ सुनाई दे रही थी। लार उसके मुँह से बहकर लंड पर और फिर अंडकोष तक पहुँच रही थी।
“आाह्ह… धीरे…” आरव की गली आवाज निकली।
अनन्या ने लंड को मुँह से निकाला। लंबी लार का धागा अभी भी जुड़ा हुआ था। उसने कहा, “अब मुझे चोदो… यहीं।”
वह आरव की गोद में बैठ गई। स्कर्ट कमर तक। अपनी गीली चुत को उसकी लंड पर रगड़ने लगी। चिकना, गरम मांस लंड के सिरे पर फिसल रहा था। हर रगड़ के साथ “चप-चप” की हल्की आवाज आ रही थी। अनन्या की चुत पहले से ही इतनी गीली थी कि पानी उसकी जाँघों पर बह रहा था।
उसने कमर दबाई। लंड का सिरा अंदर घुसने लगा। पहले सिर्फ सिर। अनन्या की आँखें बंद हो गईं। “आआह्ह्ह… कितना मोटा…” उसने दबी आवाज में कहा। फिर और नीचे बैठी। आधा अंदर। फिर पूरा। “उउउम्मम्मम… पूरी अंदर चली गई…” उसकी चुत ने लंड को कसकर जकड़ लिया। दीवारें धड़क रही थीं।
आरव के हाथ उसकी कमर पर थे। अनन्या ऊपर-नीचे होने लगी। हर बार जब वह नीचे बैठती, लंड उसकी चुत की गहराई तक चली जाती और “थप-थप” की आवाज होती। पानी की आवाज तेज हो रही थी—चुप-चुप, चप-चप। अनन्या की स्तन उसके टॉप के अंदर उछल रहे थे। उसने टॉप ऊपर कर दी। दोनों स्तन बाहर। आरव ने झुककर एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। दाँत से हल्का काटा।
“आाह्ह्ह… काटो… और काटो…” अनन्या चीखी।
आरव ने उसे उठाया और सीट पर लिटा दिया। उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रख दिए। फिर जोर का धक्का दिया। लंड एकदम गहराई तक घुस गई। अनन्या की पीठ सीट से लग गई। “आआआह्ह्ह्ह!!! इतना गहरा… आरव्व्व…” उसकी आवाज गूँज उठी।
अब आरव बिना रुके चोदने लगा। जोर-जोर से। हर धक्के के साथ अनन्या की पूरी बॉडी आगे की तरफ झटका खा रही थी। उसकी चुत से पानी निकल-निकल कर आरव की जाँघों पर और सीट पर गिर रहा था। आवाज तेज हो गई थी—पैक-पैक-पैक-पैक। अनन्या दोनों हाथों से सीट का हैंडल पकड़े हुए थी। उसकी आँखें पलटी जा रही थीं। आखिरी ट्रेन में अनजान लड़की की हवस
“और जोर से… और तेज… मुझे तोड़ दो…” वह चीख-चीख कर कह रही थी।
आरव ने गति बढ़ा दी। अब वह बेरहमी से पेल रहा था। लंड पूरी बाहर निकलती और फिर एक झटके में अंत तक चली जाती। अनन्या की चुत लाल हो चुकी थी, सूजी हुई। हर धक्के के साथ उसकी चीख निकल रही थी—“आाह्ह… आाह्ह… उउउम्म… आआआह्ह्ह!!”
अचानक आरव रुका। लंड बाहर निकाली। अनन्या हाँफ रही थी, चुत अभी भी खुली हुई और काँप रही थी। आरव ने उसे पलट दिया—घुटनों और हाथों के बल। अनन्या की गांड हवा में उठ गई। आरव ने दोनों हाथों से उसकी गांड के लोथड़े फैलाए। बीच में उसकी खुली, गीली, लाल चुत साफ दिख रही थी। पानी टपक रहा था।
उसने लंड का सिरा फिर से लगाया और एक ही धक्के में पूरा अंदर धकेल दिया। “आआआआह्ह्ह्ह्हह!!! मर गई… इतना जोर से…” अनन्या जोर से चिल्लाई। उसकी आवाज डिब्बे में गूँज गई।
अब आरव ने बाल पकड़ लिए। एक हाथ से बाल खींचकर उसका सिर पीछे किया, दूसरे हाथ से कमर दबाई। और फिर पागलों की तरह पेलने लगा। इतनी तेजी से कि अनन्या की साँस उखड़ने लगी। हर धक्के के साथ उसकी गांड पर आरव की जाँघें जोर से पट रही थीं—“थप्प thrप्प thrप्प thrप्प”। अनन्या लगातार चीख रही थी—
“आाह्ह… आाह्ह… और… और… तोड़ दो मेरी चुत… आआआह्ह्ह!!
जोर से… और जोर से… हाँ… वहीं… वहीं मारो… आआआह्ह्हह!!”
उसकी चुत से पानी की धार जैसी निकल रही थी। हर धक्के के साथ छींटे उड़ रहे थे। आरव की लंड पूरी तरह चमक रही थी—अनन्या के पानी और उसकी लार से। अनन्या की जाँघें काँप रही थीं। अचानक उसका शरीर ऐंठ गया।
“आआआआआह्ह्ह्हहह!!! आ रही हूँ… आ रही हूँ… आरव्व्व्व… मर गई… आआआह्ह्ह!!!”
उसकी चुत जोर-जोर से ऐंठने लगी। दीवारें आरव की लंड को इतनी जोर से जकड़ रही थीं कि आरव को भी कराहना पड़ा। अनन्या का शरीर काँप रहा था, पैर थरथर काँप रहे थे, मुँह से लार बह रही थी। चरम सुख इतना तेज था कि उसकी आँखों के आगे अंधेरा छा गया।
आरव रुका नहीं। वह और तेज पेलने लगा। अनन्या अभी भी काँप रही थी, लेकिन अब उसकी आवाजें और तेज हो गई थीं—“आाह्ह… नहीं… और नहीं सह सकता… बहुत जोर से… आआआह्ह्ह!!”
आरव ने अचानक लंड बाहर निकाली। अनन्या की खुली चुत से सफेद झाग जैसा पानी निकल रहा था। आरव ने उसे फिर से पलटा। इस बार अनन्या की पीठ सीट पर थी। उसने दोनों पैर फैला दिए। आरव ने लंड फिर से अंदर डाली और अब और भी गहराई तक पेलने लगा। एक हाथ से उसने अनन्या की गर्दन हल्के से दबाई, दूसरे से उसके स्तन को मसलने लगा। आखिरी ट्रेन में अनजान लड़की की हवस
“आाह्ह… गला… दबा… और दबा…” अनन्या की आँखें पलटी जा रही थीं।
आरव की गति पागलों जैसी हो गई। पैक-पैक-पैक-पैक की आवाज पूरे डिब्बे में गूँज रही थी। अनन्या की दूसरी रिलीज आने वाली थी। उसकी चुत फिर से जोर से ऐंठने लगी।
“आआआआह्ह्ह्हह!!! दूसरी बार… आ रही हूँ… बचाओ… आआआह्ह्हहह!!!”
इस बार उसका पानी इतनी जोर से निकला कि आरव की जाँघों और पेट पर छींटे पड़ गए। अनन्या का पूरा शरीर थरथरा रहा था। वह रोने जैसी आवाज में कराह रही थी।
आरव अब खुद कंट्रोल खो चुका था। उसने कुछ और जोरदार धक्के दिए और फिर गहरी, जानवर जैसी आवाज निकाली—“उउउम्मम्मम… ले… सब अंदर ले…”
गरम, गाढ़ा वीर्य जोर-जोर से अनन्या की चुत में छूटने लगा। एक… दो… तीन… चार धार। इतना ज्यादा कि वह बाहर भी निकलने लगा और अनन्या की गांड और जाँघों पर बहने लगा। आरव अभी भी अंदर धक्के दे रहा था, सारा वीर्य गहराई तक धकेल रहा था। अनन्या महसूस कर रही थी कि उसका अंदर पूरी तरह भर चुका है—गरम, चिपचिपा, और बहुत ज्यादा।
दोनों लंबे समय तक वैसे ही रहे। आरव की लंड अभी भी अनन्या के अंदर थी, धीरे-धीरे धड़क रही थी। अनन्या की चुत अभी भी कभी-कभी ऐंठ रही थी, बाकी का वीर्य निचोड़ रही थी। उनकी साँसें उखड़ी हुई थीं। पसीना दोनों के शरीर पर चमक रहा था। अनन्या की जाँघों के बीच सफेद, गाढ़ा वीर्य और उसका अपना पानी मिलाकर बह रहा था। सीट गीली हो चुकी थी।
आरव ने धीरे से लंड बाहर निकाली। निकलते समय “चप” की आवाज हुई। अनन्या की चुत खुली रह गई—लाल, सूजी हुई, और उसमें से सफेद वीर्य की मोटी धार धीरे-धीरे बाहर आ रही थी। अनन्या ने उंगली से वहाँ छुआ। वीर्य उसकी उंगली पर चिपक गया। उसने उंगली मुँह में ले ली और चाट लिया।
“इतना गाढ़ा… और गरम…” उसने हाँफते हुए कहा।
ट्रेन आखिरी स्टेशन के करीब थी। दोनों ने धीरे-धीरे कपड़े ठीक किए। अनन्या की चुत अभी भी हल्के-हल्के ऐंठ रही थी। हर कदम पर उसे आरव का वीर्य अपनी जाँघों के बीच फिसलता महसूस हो रहा था।
ट्रेन आखिरी स्टेशन के करीब पहुँच रही थी। आरव ने धीरे से लंड बाहर निकाली। अनन्या अभी भी काँप रही थी। उसने मुड़कर आरव को देखा। उसकी आँखों में अब मुस्कान थी।
“तुमने कहा था शादीशुदा हो,” अनन्या ने धीरे से कहा।
आरव ने अपनी शर्ट के बटन बंद करते हुए जवाब दिया, “हाँ… लेकिन तलाक की प्रक्रिया चल रही है। तीन महीने से अलग हूँ।”
अनन्या हैरान रह गई। यह आखिरी ट्विस्ट था। आरव ने फोन निकाला और अनन्या को अपना नंबर दिया।
“अगली बार… किसी और जगह,” उसने कहा। “जहाँ कोई ट्रेन न हो।”
अनन्या ने नंबर सेव कर लिया। ट्रेन रुक गई। दोनों ने कपड़े ठीक किए। दरवाजा खुला। वे एक साथ उतरे। रात की ठंडी हवा में अनन्या मुस्कुरा रही थी। इतनी मेहनत के बाद… आखिरकार वह उसे पा ही गई थी। और अब खेल अभी शुरू ही हुआ था।
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