जन्माष्टमी की कुँवारी चूत का उद्घाटन
नीरज – 28 साल का जवान मर्द, कद छह फीट एक इंच, मजबूत बदन, चौड़ी छाती, गहरे भूरे आंखें और एक शरारती मुस्कान जो किसी भी लड़की का दिल पिघला सकती थी। वह पिछले डेढ़ साल से इसी मोहल्ले में रह रहा था, एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। उसकी पड़ोस में रहती थी हिमानी – 23 साल की खूबसूरत लड़की, गोरा रंग, लंबे काले बाल, मध्यम आकार की उभरी हुई चूचियाँ और एक पतली कमर जो हर पुरुष का ध्यान खींच लेती थी। वह एक प्राइवेट स्कूल में प्राइमरी टीचर थी, अभी तक पूरी तरह कुँवारी थी, और अपने माता-पिता के साथ रहती थी। जन्माष्टमी की कुँवारी चूत का उद्घाटन
दोनों के बीच अक्सर नजरें मिलती थीं, हल्की सी मुस्कान आदान-प्रदान होती थी, लेकिन कभी ज्यादा बातचीत नहीं हुई थी। नीरज उसे देखकर हमेशा सोचता था कि कैसे इस कुँवारी चूत का भेदन करेगा, लेकिन मौका नहीं मिल पा रहा था।
भाग 1: जन्माष्टमी की रात और प्रसाद का वादा
जन्माष्टमी की रात, मंदिर में प्रसाद बांटा जा रहा था। रात के बारह बज चुके थे। नीरज लाइन में खड़ा था, छठे नंबर पर। भीड़ भरी हुई थी, गर्मी अत्यधिक थी, अगरबत्ती की खुशबू और पसीने की गंध मिलकर एक अजीब सा माहौल बना रही थी।
तभी उसने देखा कि हिमानी गुलाबी सलवार कमीज में आई। उसके बाल खुले हुए थे, माथे पर छोटी सी बिंदी चमक रही थी। वह उसके पास आई।
“अरे, तुम भी यहाँ?” हिमानी ने नीरज को देखकर कहा।
“हां, प्रसाद लेने आया हूं। तुम्हें भी चाहिए?” नीरज ने पूछा।
“हां यार, लेकिन ये लाइन तो बहुत लंबी है। मैं तो सोच रही थी कि…” वह रुक गई।
“क्या?” नीरज ने पूछा।
“क्या तुम मेरे लिए भी ले लोगे? मैं घर जाकर आराम करती हूं, कल सुबह जल्दी उठना है। मेरे मम्मी-पापा गांव गए हैं, मैं अकेली हूं,” वह मासूमियत से बोली।
नीरज ने मौके का फायदा उठाने का फैसला किया। वह उसके करीब गया, इतने करीब कि उसके गुलाबी गालों पर उसकी सांसें महसूस हो रही हों।
“मैं ले लूंगा, लेकिन मुझे क्या मिलेगा?” नीरज ने धीरे से कहा।
“क्या चाहिए तुम्हें?” उसने पूछा, आंखों में शरारत।
नीरज ने उसके कान में झुककर फुसफुसाया, “किस…”
“कहाँ?” हिमानी ने पूछा, शर्माते हुए।
“गालों पर…” नीरज ने कहा।
“ठीक है… लेकिन पहले प्रसाद तो ले आओ…” हिमानी ने कहा और वहां से चली गई।
नीरज मुस्कुराया। उसे पता था कि यह रात कुछ खास होने वाली थी।
भाग 2: घर के अंदर जबरदस्ती का चुंबन
करीब एक घंटे बाद, नीरज दो थालियां प्रसाद की लेकर हिमानी के घर पहुंचा। उसने दरवाजा खटखटाया। हिमानी ने दरवाजा खोला, वह अब भी वही गुलाबी सलवार कमीज में थी।
“आओ अंदर…” हिमानी ने कहा।
नीरज अंदर आया। उसने प्रसाद की थाली टेबल पर रखी। हिमानी का घर साफ-सुथरा था, बिस्तर पर गुलाबी चादर बिछी हुई थी। कमरे में अगरबत्ती की खुशबू थी।
“अब दो मेरा प्रसाद…” नीरज ने कहा और उसके करीब आया।
“क्या मतलब?” हिमानी ने पूछा।
“वो जो वादा किया था…” नीरज ने कहा और उसके गाल की ओर झुका।
हिमानी ने अपने गाल आगे कर दिए, आंखें बंद कर लीं। वह सोच रही थी कि वह उसके गालों पर हल्का सा चुंबन करेगा।
लेकिन नीरज का इरादा कुछ और ही था।
जैसे ही वह उसके करीब आया, उसने अचानक हिमानी का चेहरा अपने दोनों हाथों में पकड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठ जोर से दबा दिए। यह कोई प्यार भरा चुंबन नहीं था, यह जबरदस्ती थी, एक हमला था।
“मmmm… नहीं… यह क्या…” हिमानी छटपटाने लगी।
नीरज ने उसे कसकर पकड़ रखा था। उसने उसके निचले होंठ को अपने दांतों से काटा, और अपनी जीभ जबरदस्ती उसके मुंह में घुसाने की कोशिश की। उसने उसके होंठों को अपने दांतों से कसकर पकड़ा, चूसा, काटा। उसकी जीभ ने उसके मुंह की दीवारों को चाटा, उसकी जीभ को अपनी जीभ से दबाया, खींचा।
हिमानी के हाथ उसके सीने पर धक्का दे रहे थे, लेकिन वह रुकने वाला नहीं था। उसने एक हाथ उसकी कमर पर रखा और उसे अपनी ओर खींचा, उसका शरीर अब उसके शरीर से चिपक गया था।
करीब दो मिनट तक उसने उसे जबरदस्ती चूमा, उसके होंठों को चूसा, उसके मुंह को अपने मुंह में भरा। फिर अचानक छोड़ दिया।
हिमानी पीछे हटी, उसके होंठ सूज गए थे, लाल हो गए थे, आंखों में आंसू थे, और चेहरे पर गुस्सा और शर्मिंदगी का भाव था।
“तुम… तुम बहुत बुरे हो… मैंने गालों पर कहा था… और तुमने… होंठों पर…” उसकी आवाज कांप रही थी।
“मैंने वही किया जो तुम चाहती थी… गालों पर किस करने से क्या होता… असली मजा तो होंठों पर है…” नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा।
“तुमने मेरी इजाजत के बिना… जबरदस्ती… यह गलत है…” हिमानी गुस्से में बोली, उसका चेहरा लाल हो गया था।
“तुम्हें अच्छा नहीं लगा?” नीरज ने पूछा।
“मुझे जाओ यहां से… और अब कभी मेरे घर मत आना…” हिमानी ने गुस्से में कहा और दरवाजा खोल दिया।
नीरज ने उसे जाते हुए देखा, उसकी गांड हिल रही थी, और वह मुस्कुराया। उसने प्रसाद की थाली वहीं छोड़ दी और चला गया।
भाग 3: हिमानी का बदलता नजरिया
हिमानी ने दरवाजा बंद किया और सीधे अपने कमरे में गई। वह आईने के सामने खड़ी हुई और अपने होंठों को देखने लगी। वह सूजे हुए थे, लाल हो गए थे, और अभी भी उसे नीरज की जीभ का एहसास हो रहा था।
“कितना बुरा लड़का है… किसी की इजाजत के बिना ऐसे कौन करता है… और वो भी होंठों पर… मैंने तो गालों पर कहा था…” वह बड़बड़ा रही थी, गुस्से में थी।
लेकिन फिर उसने अपने आप को आईने में देखा। उसके गाल लाल थे, आंखें चमक रही थीं, और उसे एक अजीब सा एहसास हो रहा था। उसका दिल तेज धड़क रहा था, और उसके शरीर में एक गर्माहट फैल रही थी। उसके निप्पल कड़े हो गए थे, और उसकी चूट में एक अजीब सी खुजली हो रही थी।
वह सोफे पर बैठ गई और अपने होंठों को छुआ। वह याद करने लगी कि कैसे नीरज ने उसे पकड़ा था, कैसे उसके होंठों पर अपने होंठ दबाए थे, कैसे उसकी जीभ ने उसके मुंह को खोला था, कैसे उसका शरीर उसके शरीर से चिपका हुआ था।
“नहीं नहीं… मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए… वह तो बहुत बुरा है… उसने जबरदस्ती की…” वह खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी।
लेकिन रात भर उसे नीरज का चेहरा याद आता रहा। उसकी मजबूत बाहें, उसकी गहरी आंखें, उसके होंठ… ओह उसके होंठ। वह सो नहीं पाई। बार-बार वह उस क्षण को याद करती जब उसने उसे जबरदस्ती चूमा था। और हर बार उसके शरीर में एक अजीब सा झनझनाहट होती।
अगली सुबह जब वह उठी तो उसे खुद पर शर्म आ रही थी। वह लाल हो रही थी यह सोचकर कि कैसे उसे वह जबरदस्ती वाला चुंबन पसंद आया। वह सोच रही थी कि क्या वह पागल हो रही है? लेकिन धीरे-धीरे, उसका नजरिया बदलने लगा। वह नीरज को देखकर अब गुस्सा नहीं करती थी, बल्कि शर्मा जाती थी। वह उससे बात करने का मौका ढूंढती, उसके सामने आने के बहाने बनाती।
एक दिन वह बालकनी में कपड़े सुखा रही थी जब नीरज नीचे से गुजरा। उसने उसे देखा और शर्म से नीचे देखने लगी।
“हाय हिमानी…” नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा।
“हाय…” उसने धीरे से जवाब दिया, आंखें झुकाए हुए।
“उस रात के लिए सॉरी… मैं थोड़ा ज्यादा ही उत्साहित हो गया था…” नीरज ने कहा।
“कोई बात नहीं…” हिमानी ने कहा, और अंदर ही अंदर वह चाहती थी कि वह फिर से वैसा ही करे।
“तुम्हें अच्छा लगा?” नीरज ने पूछा, उसकी आंखों में शरारत।
“क्या?” हिमानी ने हैरान होकर पूछा।
“मतलब… प्रसाद…” नीरज ने कहा और चला गया।
हिमानी वहीं खड़ी रही, उसका दिल तेज धड़क रहा था। वह जानती थी कि वह उससे क्या पूछ रहा था।
भाग 4: करीब आने की ख्वाहिश
अगले कुछ हफ्तों में, हिमानी खुद नीरज के करीब जाना चाहती थी। वह जानबूझकर बालकनी में उस समय जाती जब वह ऑफिस से आता था। वह उससे छोटी-छोटी बातें करती, कभी चाय पूछती, कभी कोई सामान मांगती।
एक शाम, नीरज अपने दरवाजे पर खड़ा था जब हिमानी आई।
“अरे, तुम यहाँ?” नीरज ने पूछा।
“हां, वो… मेरे घर में साबुन खत्म हो गया है… क्या तुम्हारे पास है?” उसने बहाना बनाया।
“आओ, अंदर से ले लो…” नीरज ने कहा और दरवाजा खोला।
हिमानी अंदर गई। वह नीरज के कमरे को देखने लगी, उसकी व्यक्तिगत चीजें, उसकी गंध। नीरज ने साबुन दिया, लेकिन जब हिमानी ने लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो उसने साबुन पकड़े हुए हाथ को पीछे खींच लिया।
“पहले कुछ तो दो…” नीरज ने कहा।
“क्या?” हिमानी ने पूछा, जानते हुए भी कि वह क्या चाहता है।
“एक चुंबन… वैसा ही जैसा उस रात…” नीरज ने कहा।
हिमानी शर्मा गई, उसके गाल लाल हो गए। वह चाहती थी कि वह उसे फिर से चुमे, लेकिन वह खुद कैसे कह सकती थी?
“मैं… मैं नहीं…” उसने कहा, लेकिन उसकी आंखें कुछ और ही कह रही थीं।
नीरज ने उसका हाथ पकड़ा और अपनी ओर खींचा। हिमानी ने विरोध नहीं किया, वह चुपचाप उसके करीब आ गई। उसने अपने होंठ हल्के से खोले, उसकी आंखें बंद हो गईं।
नीरज ने धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रखे। इस बार यह धीमा था, प्यार भरा था। उसने उसके होंठों को चूसा, उसकी जीभ को अपनी जीभ से छुआ। हिमानी ने भी जवाब दिया, उसने अपने हाथ उसकी कमर पर रख दिए। वह उस चुंबन का आनंद ले रही थी।
लेकिन उसके मन में यह बात थी कि यह सिर्फ चुंबन है, इससे आगे कुछ नहीं होगा। उसे नहीं पता था कि नीरज का इरादा कुछ और ही है। वह सोचती थी कि उसकी कुँवारी चूट में कभी लंड नहीं जाएगा, यह सिर्फ चुंबन और छुअन तक ही सीमित रहेगा।
भाग 5: धोखे से बुलाना और पीछे से डराना
कुछ दिन बीत गए। हिमानी और नीरज के बीच अब अक्सर चुंबन और छुअन होने लगी थी। नीरज उसकी चूचियों को सहलाता, उसकी कमर को चूमता, लेकिन हिमानी हमेशा रुक जाती थी जब वह आगे बढ़ने की कोशिश करता।
“नीरज, बस… यहीं तक…” वह कहती।
“क्यों? तुम्हें अच्छा नहीं लगता?” नीरज पूछता।
“अच्छा लगता है… लेकिन… मैं कुँवारी हूं… और मुझे नहीं लगता कि तुम… मतलब… हम शादीशुदा नहीं हैं… और मेरी चूट… वहां कुछ नहीं जाएगा…” हिमानी कहती।
नीरज समझ गया कि हिमानी अभी भी सोचती है कि उसकी कुँवारी चूत में लंड नहीं जाएगा। वह सिर्फ चुंबन और छुअन तक सीमित रहना चाहती है। लेकिन नीरज का लक्ष्य कुछ और था।
एक शाम, नीरज ने हिमानी को फोन किया।
“हिमानी, क्या तुम मेरी मदद कर सकती हो? मेरे घर में एक दस्तावेज है जो मुझे तुरंत चाहिए, लेकिन मैं ऑफिस से नहीं निकल सकता। क्या तुम मेरे घर जाकर मेरी अलमारी से वह फाइल निकाल सकती हो और मुझे दे सकती हो? मैं रास्ते में हूं, तुम्हारे घर के पास से निकलूंगा।”
“ठीक है, मैं देखती हूं…” हिमानी ने कहा।
हिमानी नीरज के घर गई। दरवाजा खुला था, वह अंदर गई। अलमारी खुली थी, वह फाइल ढूंढने लगी। तभी उसे पीछे से किसी के कदमों की आहट सुनी। वह मुड़ी तो नीरज वहां खड़ा था, लेकिन वह अकेला नहीं था।
“तुम… तुम तो ऑफिस में थे…” हिमानी ने कहा।
“मैं झूठ बोल रहा था…” नीरज ने कहा और दरवाजा बंद कर दिया।
“यह क्या… मुझे जाने दो…” हिमानी घबरा गई।
“अभी नहीं… आज वह दिन है जिसका मैं इंतजार कर रहा था…” नीरज ने कहा और उसके करीब आया।
“नीरज, प्लीज… मैंने कहा ना… मैं तैयार नहीं हूं… मेरी चूट…” हिमानी ने कहा, पीछे हटते हुए।
“तुम तैयार हो… बस तुम्हें पता नहीं…” नीरज ने कहा और अचानक उसके पीछे चला गया।
हिमानी समझ नहीं पाई कि क्या हुआ। नीरज उसके पीछे था, और उसने उसकी कमीज के पीछे के बटन खोलने शुरू कर दिए। उसकी उंगलियां उसकी पीठ पर चल रही थीं, बटन खोल रही थीं।
“क्या कर रहे हो… नहीं… मत करो…” हिमानी चिल्लाई और आगे भागने की कोशिश की, लेकिन नीरज ने उसे पीछे से पकड़ लिया।
“शांत हो जाओ… मैं तुम्हें दर्द नहीं दूंगा… बस आज तुम मेरी हो जाओगी…” नीरज ने कान में फुसफुसाया।
उसने उसकी कमीज के सारे बटन खोल दिए, और फिर उसे ऊपर से उतार दिया। हिमानी शर्म से लाल हो गई, उसने अपने हाथों से अपनी ब्रा ढकने की कोश्छी की।
“नीरज, प्लीज… मत करो… मैं कुँवारी हूं… मेरी चूट… ओह्ह… मुझे डर लग रहा है…” वह रोने लगी।
“डरो मत… मैं हूं ना…” नीरज ने कहा और उसकी ब्रा के हुक खोलने लगा…
भाग 6: ब्रा का उतरना और शर्मिंदगी
“नीरज, प्लीज… मत करो… मैं कुँवारी हूं… मेरी चूट… ओह्ह… मुझे डर लग रहा है…” हिमानी रोने लगी, उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।
“डरो मत… मैं हूं ना… आज तुम पूरी तरह मेरी बन जाओगी…” नीरज ने कान में फुसफुसाया और उसकी ब्रा के हुक एक-एक करके खोलने लगा।
“नहीं… यह गलत है… मैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम… मेरी चूट में…” हिमानी कांप रही थी, उसका पूरा शरीर कांप रहा था।
नीरज ने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। ब्रा ढीली हो गई, लेकिन हिमानी ने अपने हाथों से अपने स्तनों को ढक लिया। उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया था, आंखें नीचे झुकी हुई थीं।
“हाथ हटाओ… मुझे देखने दो…” नीरज ने कहा।
“नहीं… प्लीज… मत देखो…” हिमानी रो रही थी।
नीरज ने उसके हाथ पकड़े और धीरे से हटाए। ब्रा नीचे गिर गई। उसके स्तन सामने आ गए – गोल, मध्यम आकार के, गुलाबी निप्पल जो डर और उत्तेजना से कड़े हो गए थे।
“कितने सुंदर हैं…” नीरज ने कहा और पीछे से ही उसके स्तनों को पकड़ लिया।
“आहhh… नहीं… छोड़ो…” हिमानी चिल्लाई, लेकिन नीरज ने उसे कसकर पकड़ रखा था।
उसने उसके स्तनों को सहलाना शुरू किया, धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। उसके हाथ उसकी मुलायम चूचियों को मसल रहे थे, निप्पलों को उंगलियों से कसकर दबा रहे थे।
“दर्द हो रहा है… मत करो…” हिमानी रो रही थी, लेकिन उसके शरीर में एक अजीब सी गर्माहट फैल रही थी।
“थोड़ी देर में मजा आएगा…” नीरज ने कहा और उसके गर्दन पर चुंबन करने लगा।
उसने उसके कानों को चूमा, उसकी गर्दन को चाटा, नीचे की ओर बढ़ा। हिमानी का सिर पीछे की ओर झुक गया, उसकी सांसें तेज हो गईं।
भाग 7: सलवार और पैंटी का उतरना
नीरज ने एक हाथ से उसके स्तनों को पकड़े रखा और दूसरे हाथ से उसकी सलवार का नाड़ा खोलना शुरू किया।
“नहीं… वहां मत… प्लीज…” हिमानी घबरा गई, लेकिन नीरज ने उसकी बात नहीं सुनी।
उसने सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार नीचे खींची। सलवार उसके पैरों में फंस गई। नीरज ने उसे एक पैर उठाने के लिए कहा, फिर दूसरा पैर। सलवार पूरी उतर गई।
अब हिमानी सिर्फ सफेद पैंटी में थी, उसकी गांड का उभार साफ दिख रहा था। नीरज ने उसकी गांड को सहलाया, उसे दबाया।
“कितनी मुलायम है…” नीरज ने कहा।
“प्लीज… अब बस करो… मुझे जाने दो…” हिमानी रो रही थी, लेकिन नीरज रुकने वाला नहीं था।
उसने उसकी पैंटी को नीचे खींचने की कोशिश की। हिमानी ने अपने हाथों से पैंटी पकड़ ली।
“नहीं… वहां मत… मेरी चूट… नहीं…” वह रो रही थी।
“हाथ हटाओ… आज मैं तुम्हारी कुँवारी चूट देखूंगा…” नीरज ने कहा और उसके हाथ हटाए।
उसने उसकी पैंटी नीचे खींची। हिमानी ने पैर बंद कर लिए, लेकिन नीरज ने धीरे से उन्हें खोला। पैंटी उतर गई।
हिमानी पूरी तरह नंगी थी। उसने अपने हाथों से अपनी चूट को ढकने की कोशिश की, लेकिन नीरज ने उसके हाथ हटा दिए।
“मत छुपाओ… मुझे देखने दो…” नीरज ने कहा।
उसने उसे घुमाया। अब हिमानी उसके सामने खड़ी थी, पूरी तरह नंगी, उसके हाथ ढकने की कोशिश में लगे हुए थे। उसकी चूट साफ थी, बिना बालों की, गुलाबी, कुँवारी।
“कितनी सुंदर है तुम्हारी चूट…” नीरज ने कहा और उसकी चूट को देखने लगा।
भाग 8: चूट को चूमना और उंगली का प्रवेश
नीरज ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया। हिमानी गिरी, उसके पैर फैल गए। नीरज उसके पैरों के बीच बैठ गया।
“प्लीज… मत करो… मैं कुँवारी हूं… मेरी चूट में कुछ मत डालो…” हिमानी रो रही थी, लेकिन नीरज ने उसकी बात नहीं सुनी।
उसने उसकी जांघों को चूमना शुरू किया, धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा। उसकी जांघें कांप रही थीं। उसने उसकी चूट के पास पहुंचकर हल्के से चूमा।
“ऊhhh… नहीं… गंदा है…” हिमानी की एक लंबी सांस निकली।
“तुम्हारी चूट बहुत स्वादिष्ट है…” नीरज ने कहा और उसकी चूट को चाटना शुरू किया।
उसने अपनी जीभ उसकी चूट के होंठों पर फेरनी शुरू की, ऊपर से नीचे तक। हिमानी तड़पने लगी, उसके हाथ बिस्तर की चादर को कसकर पकड़े हुए थे।
“आहhh… मर गई… क्या कर रहे हो…” वह चिल्लाई।
नीरज ने उसकी चूट को खोला और अंदर की गुलाबी दीवारों को चाटा। उसने उसकी क्लिटोरिस ढूंढी, वह छोटी सी गुलाबी गांठ जो उत्तेजना से फूली हुई थी। उसने उसे चूसा, जीभ से चटकाया।
“आहhh… बस करो… प्लीज…” हिमानी चिल्ला रही थी, उसकी कमर ऊपर उठने लगी थी।
नीरज ने एक उंगली उसकी चूट में डालने की कोशिश की। वह बहुत टाइट थी। हिमानी ने दर्द से चीखने की कोशिश की।
“दर्द हो रहा है… बाहर निकालो…” वह रो रही थी।
“थोड़ी देर में मजा आएगा…” नीरज ने कहा और उंगली को अंदर-बाहर करने लगा।
धीरे-धीरे उसका दर्द कम होने लगा और वह आवाजें निकालने लगी। “आहhh… ऊhhh… हांhh…”
नीरज ने दूसरी उंगली भी डाल दी। अब उसकी चूट थोड़ी ढीली हो गई थी। उसने उंगलियों से उसकी चूट को फैलाया, अंदर का गुलाबी हिस्सा देखा। वह पूरी तरह गीली थी, उसका रस उसकी उंगलियों पर लग रहा था।
भाग 9: लंड का प्रदर्शन और डर
नीरज ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए। उसने अपनी शर्ट उतारी, फिर पैंट की बेल्ट खोली। हिमानी उसे देख रही थी, उसकी आंखों में डर था।
जब नीरज ने अपनी अंडरवियर उतारी, उसका लंड सामने आ गया। वह पूरी तरह खड़ा था, करीब 7 इंच लंबा और मोटा, नसों से भरा हुआ, लाल हो गया था।
हिमानी उसे देखकर डर गई। उसकी आंखें बड़ी हो गईं, उसका मुंह खुला रह गया।
“यह… यह तो बहुत बड़ा है… नहीं जाएगा… मेरी चूट फट जाएगी…” वह रोने लगी, पीछे हटने की कोशिश की।
“टेंशन मत लो… थोड़ा दर्द होगा फिर मजा आएगा…” नीरज ने कहा और उसके ऊपर आ गया।
“नहीं… प्लीज… मैं कुँवारी हूं… मेरी चूट में यह नहीं जाएगा… मुझे डर लग रहा है…” हिमानी रो रही थी, उसके हाथ उसके सीने पर धक्का दे रहे थे।
“आज जाएगा… आज तुम्हारी कुँवारी चूट का भेदन होगा…” नीरज ने कहा और उसके पैरों को फैलाया।
भाग 10: पहला प्रवेश और दर्द भरी चीख
नीरज ने अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी चूट पर रगड़ा। फिर उसने अपने लंड का सिरा उसकी चूट के मुहाने पर रखा।
“प्लीज… मत करो… दर्द होगा…” हिमानी रो रही थी, उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।
“थोड़ा सहन करो…” नीरज ने कहा और धीरे से दबाव डाला।
लंड का सिरा अंदर घुसा। हिमानी ने दर्द से चीखने की कोशिश की, लेकिन नीरज ने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया।
“शhh… चुप… कोई सुन लेगा…” नीरज ने कहा।
“मmmm… दर्द हो रहा है… बहुत दर्द…” हिमानी रो रही थी, उसका मुंह नीरज के हाथ में दबा हुआ था।
नीरज ने एक जोरदार धक्का दिया। उसका लंड आधा अंदर घुस गया। हिमानी की चीख निकलने वाली थी, लेकिन नीरज के हाथ ने उसे दबा दिया। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे, उसका चेहरा लाल हो गया था।
“आहhh… मेरी चूट फट गई… बाहर निकालो…” वह फुसफुसाते हुए रो रही थी।
नीरज ने रुककर उसे सांत्वना दी, उसके स्तन सहलाए, गाल चूमे। लेकिन उसका लंड आधा अंदर ही था।
“बस थोड़ा सा और…” नीरज ने कहा और एक और जोरदार धक्का दिया।
पूरा लंड अंदर समा गया। हिमानी का दर्द बढ़ गया, उसने नीरज की पीठ पर नाखुन गाड़ दिए।
“आहhh… मर गई… बाहर निकालो…” वह रो रही थी।
भाग 11: धक्के शुरू और दर्द से मजा
नीरज ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। बाहर-अंदर, बाहर-अंदर। हिमानी का दर्ध धीरे-धीरे कम होने लगा और उसे एक अजीब सा मजा आने लगा।
“अब कैसा लग रहा है?” नीरज ने पूछा।
“थोड़ा… थोड़ा अच्छा…” हिमानी ने कहा, उसकी आंखें अभी भी आंसुओं से भरी थीं।
नीरज ने गति बढ़ा दी। अब वह पूरी ताकत से उसे चोद रहा था। बिस्तर की कड़कड़ाहट, हमारी सांसों की आवाज, थप-थप की आवाज – सब मिलकर एक संगीत बन रहा था।
“आहhh… ऊhhh… हांhh… और तेजhh…” हिमानी चिल्लाने लगी।
नीरज ने उसके पैर अपने कंधों पर रखे और और गहराई से चोदने लगा। उसका लंड उसकी चूट की दीवारों से रगड़ खा रहा था, जिससे उसे अत्यधिक आनंद मिल रहा था।
“तुम्हारी चूट बहुत टाइट है… मजा आ रहा है…” नीरज ने कहा।
“आहhh… मेरी चूट… फाड़ दी तुमने…” हिमानी चिल्ला रही थी।
भाग 12: झड़ना और अंतिम क्षण
“मैं झड़ने वाली हूं… कुछ हो रहा है अंदर…” हिमानी ने कहा।
“छोड़ दो… अपने आप को…” नीरज ने कहा और धक्के तेज कर दिए।
अचानक हिमानी का शरीर कांपने लगा, उसकी चूट ने नीरज के लंड को कसकर पकड़ लिया, उसकी कमर ऊपर उठ गई और वह एक लंबी सिसकी के साथ झड़ गई।
“आहhh… ऊhhh… हांhh…” वह चिल्लाई।
नीरज ने भी गति तेज कर दी। उसे लगा कि वह भी झड़ने वाला है।
“मैं भी झड़ने वाला हूं… कहां छोड़ूं?” नीरज ने पूछा।
“बाहर… मेरी चूट में मत छोड़ो…” हिमानी ने कहा।
नीरज ने तेजी से अपना लंड बाहर निकाला और उसकी पेट पर अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। धाराएं निकलीं, गर्म, सफेद, गाढ़ा तरल उसकी पेट पर फैल गया।
नीरज थककर उसके ऊपर गिर पड़ा। हम दोनों पसीने में लथपथ थे, सांसें तेज चल रही थीं।
भाग 13: बाद का समय और पहली बार की याद
कुछ देर बाद नीरज उठा और हिमानी को देखने लगा। उसकी चूट से खून निकल रहा था, उसकी कुँवारी चूट का पर्दा फट चुका था।
“देखो… तुम अब औरत बन गई हो…” नीरज ने कहा।
हिमानी ने नीचे देखा, खून देखकर वह घबरा गई।
“यह क्या… खून…” वह डर गई।
“यह तुम्हारी कुँवारी थी… अब तुम मेरी हो…” नीरज ने कहा और उसके होंठों पर चुंबन किया।
हिमानी ने कुछ नहीं कहा, वह सिर्फ उसे देखती रही। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह गुस्सा करे या खुश हो। उसकी चूट में दर्द हो रहा था, लेकिन साथ ही एक अजीब सी तृप्ति भी थी।
“पहली बार था इसलिए दर्द हुआ… अगली बार और मजा आएगा…” नीरज ने कहा।
“अगली बार? तुम फिर से करोगे?” हिमानी ने पूछा।
“हां… बार-बार… तुम्हारी चूट अब मेरी है…” नीरज ने कहा।
हिमानी शर्मा गई, उसने अपना चेहरा छुपा लिया। लेकिन अंदर ही अंदर वह भी यही चाहती थी।
भाग 14: अगली सुबह और शर्मिंदगी
अगली सुबह जब हिमानी उठी तो उसके शरीर में दर्द था। उसकी चूट में जलन हो रही थी, उसके स्तनों पर नीरज के नाखुनों के निशान थे, उसके होंठ अभी भी सूजे हुए थे। वह आईने में देखने लगी, उसके शरीर पर नीरज के चुंबनों के निशान थे।
“मैंने क्या कर लिया…” वह सोचने लगी, “मेरी कुँवारी चूट… वो ले गया…”
लेकिन फिर उसे वह रात याद आई – कैसे नीरज ने उसे चूमा, कैसे उसने उसकी चूट को चाटा, कैसे उसका लंड अंदर गया, कैसे वह झड़ी। उसके गाल लाल हो गए, उसकी चूट फिर से गीली होने लगी।
तभी उसका फोन बजा। नीरज का मैसेज था: “कैसी हो? रात मजा आया? आज शाम फिर से आऊं?”
हिमानी ने मैसेज देखा, उसका दिल तेज धड़कने लगा। वह जवाब देना चाहती थी “नहीं”, लेकिन उसकी उंगलियों ने लिखा “हां… लेकिन इस बार धीरे से…”
“और भी खूबसूरत… जैसे पूरी औरत बन गई हो…” नीरज ने कहा और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
इस बार हिमानी ने विरोध नहीं किया। वह खुद उसके होंठों पर अपने होंठ रखने लगी। उसने उसे चूमना शुरू किया, उसकी जीभ उसके मुंह में घुसी, उसकी जीभ से खेलने लगी।
“ओह… आज तो तुम खुद आगे बढ़ रही हो…” नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा।
“मुझे… मुझे अच्छा लगता है तुम्हारे साथ…” हिमानी ने शर्माते हुए कहा।
नीरज ने उसकी नाइटी उठाई, उसके नीचे कुछ नहीं था। वह पूरी तरह नंगी थी, उसकी चूट साफ थी, थोड़ी सूजी हुई लग रही थी।
अब उसकी चुत मेरी प्राइवेट प्रॉपर्टी बैन हो गई है और अब जब मन क्रता है उसकी चुत चुदाई क्रता हू हिमानी मेरी प्राइवेट रंडी बन गई है