बहन की चुदाई देख साली चोदी -2
हेलो दोस्तो, कैसे हो सब आपको भी चुदाई करने की प्रेरणा मेरी कहानी से मिले और आप चुदाई का भारपुर मजा ले सको कि कैसे एक जीजा अपनी साली को चोद सकता है मुझे पता है बहुत जीजा की तमन्ना रहती है कि वो अपनी साली को चोदे आपको मैंने अपनी कहानी बहन की चुदाई देख साली चोदी -1 हाँ सुनै थी आपको मेरा पहला पार्ट बहुत पसंद आया है इसलिए आज में इसका दूसरा पार्ट लेके आया हूँ बहन की चुदाई देख साली चोदी -2 तो चलो शुरू करते हैं
सुधा को चोदे हुए एक हफ्ता बीत चुका था। वो अकांक्षा को मेरे लिए तैयार कर रही थी, लेकिन उसे समय लग रहा था। अकांक्षा बहुत मासूम और डरी हुई थी, वो आसानी से नहीं मानने वाली थी।
उसी बीच अनिका आई। वो जानवी की सबसे अच्छी दोस्त थी, और हमारे घर के पास ही रहती थी। उसके पिता की मौत हो चुकी थी और घर की हालत ठीक नहीं थी। वो अक्सर हमारे यहां आती-जाती रहती।
अनिका की खूबसूरती अलग तरह की थी – वो एकदम गोरी, लंबे बालों वाली, और उसके स्तन इतने बड़े थे कि वो हमेशा झुकी हुई लगती थी। उसकी गांड भी मोटी और उभरी हुई थी, और जब वो साड़ी पहनती तो उसकी कमर का घेरा और नितंबों की गोलाई देखकर कोई भी मर्द पागल हो जाता।
उस दिन अनिका रोती हुई आई। उसकी आंखें लाल थीं, उसके गालों पर आंसुओं के निशान थे।
“क्या हुआ अनिका?” मैंने पूछा। जानवी घर पर नहीं थी, वो अपनी मां के साथ बाजार गई थी। घर में सिर्फ मैं, सुधा और अकांक्षा थे।
“जीजू… मुझे आपकी बहुत जरूरत है…” अनिका ने रोते हुए कहा।
“बताओ… क्या हुआ?” मैंने उसे सोफे पर बैठाया। मेरी नजर उसके स्तनों पर गई जो उसके कपड़ों में से उभरे हुए थे। वो इतने बड़े थे कि उसकी सांसों के साथ उपर-नीचे हो रहे थे।
“मेरी मम्मी की तबीयत बहुत खराब है… डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए कहा है… एक लाख रुपये चाहिए…” उसने रोते हुए कहा। उसके होंठ कांप रहे थे, उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।
मैंने सोचा – यही सही मौका है। मैंने उसे देखा, उसके बड़े स्तनों को देखा, उसकी मोटी गांड को देखा। मेरा लंड खड़ा होने लगा।
“एक लाख रुपये… यह तो बहुत बड़ी रकम है…” मैंने कहा।
“प्लीज जीजू… मैं आपके सारे पैसे वापस कर दूंगी… किस्तों में… लेकिन अभी चाहिए… वरना मेरी मम्मी…” वो रो रही थी, उसका बदन कांप रहा था।
“पैसे वापस करने की बात छोड़ो… मुझे इसके बदले कुछ और चाहिए…” मैंने उसके करीब बैठते हुए कहा। मेरा हाथ उसके कंधे पर गया, फिर धीरे से उसकी कमर की तरफ बढ़ा।
“क्या? जो चाहिए मैं करूंगी… बस पैसे दे दीजिए…” उसने कहा, उसकी आंखों में उम्मीद थी।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रखा। वो कांप गई, उसकी आंखें बड़ी हो गईं। वो जोर से हाथ खींचने लगी, लेकिन मैंने पकड़े रखा।
“यह… यह क्या कर रहे हैं…” वो घबरा गई, उसके गाल लाल हो गए।
“एक लाख के बदले मुझे तुम्हारी चूत चाहिए…” मैंने सीधे कहा। मेरा लंड उसके हाथ में कड़ा हो रहा था।
अनिका ने मुझे थप्पड़ मारा। “शर्म नहीं आती… मेरी मदद के लिए यह…” वो गुस्से में उठी और दरवाजे की तरफ बढ़ी।
“ठीक है जाओ… फिर अपनी मम्मी को मरते देखो… मैं पैसे नहीं दूंगा…” मैंने कहा।
अनिका रुकी, उसकी पीठ कांप रही थी। वो रो रही थी, उसके कंधे उछल रहे थे। वो मजबूर थी।
तीन दिन बाद वो फिर आई। इस बार उसकी मां की हालत और खराब हो गई थी। वो बिल्कुल मजबूर थी।
“ठीक है… मानती हूं… लेकिन एक बार… सिर्फ एक बार…” उसने कहा, उसकी आवाज कांप रही थी।
“एक बार के लिए एक लाख? यह तो महंगा सौदा है…” मैंने कहा।
“प्लीज… मैं और क्या कर सकती हूं…” वो रो रही थी, उसके आंसू उसके गालों पर बह रहे थे।
“ठीक है… लेकिन मेरी शर्तें माननी होंगी… जब तक मैं कहूं, तब तक… जैसे मैं कहूं, वैसे… और एक और बात… मुझे तुम्हारी बहन भी चाहिए…” मैंने कहा।
अनिका की आंखें बड़ी हो गईं। “मेरी बहन? नीता? वो तो सिर्फ 18 साल की है… अभी पढ़ती है…” वो घबरा गई।
“तो? मुझे वो भी चाहिए… नहीं तो कोई पैसे नहीं…” मैंने कहा।
अनिका रोती हुई मान गई। वो सिर हिलाकर राजी हो गई।
अनिका की चूत का स्वाद
मैंने उसे अपने कमरे में ले गया। वो कांप रही थी, उसकी सांसें तेज थीं। उसके बड़े स्तन उसके कपड़ों में से उभरे हुए थे, और वो कांपने की वजह से और भी ज्यादा हिल रहे थे।
मैंने उसके कपड़े उतारे। उसने हल्का सा विरोध किया, लेकिन फिर हार मान ली। जल्दी ही वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।
उसका बदन देखकर मेरा दिल धड़क उठा – वो इतनी गोरी, इतनी सुंदर, और उसके स्तन… वो इतने बड़े थे कि मैं उन्हें देखकर पागल हो गया। उसकी ब्रा भी उनके भार से नीचे खिंच रही थी।
मैंने उसके पीछे गया और उसकी ब्रा खोल दी। उसके स्तन बाहर आ गए – इतने बड़े, गोल, गुलाबी निप्पल वाले। वो दो गोल गुब्बारों की तरह लटक रहे थे, लेकिन कसे हुए थे।
“कितने बड़े हैं तुम्हारे चूचे…” मैंने उसके स्तन पकड़े और उन्हें मसलने लगा। मैंने उसके निप्पल कसे, उन्हें खींचा।
“आह्ह्ह… दर्द हो रहा है…” उसने कराही निकाली, लेकिन उसने विरोध नहीं किया।
मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसकी पैंटी खोल दी। उसकी चूत देखकर मेरा लंड और कड़ा हो गया – वो गुलाबी थी, चिकनी थी, और पूरी तरह साफ थी। उसकी योनि के होंठ छोटे थे, और बीच में से हल्की नमी दिखाई दे रही थी।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला। अनिका ने उसे देखा और घबरा गई – इतना बड़ा लंड उसने शायद पहले कभी नहीं देखा था। वो 7 इंच का था, मोटा, नसों से भरा हुआ, और सुपाड़ा लाल हो चुका था।
“यह… यह कैसे जाएगा…” वो कांप रही थी, उसकी आंखों में डर था।
“तुम बस लेटी रहो…” मैंने उसके पैर फैलाए और अपने लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा।
मैंने धीरे से दबाव डाला।
“आह्ह्ह… दर्द…” अनिका चीखी, उसके होंठ कांप रहे थे।
मैंने एक जोरदार धक्का दिया और मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया।
“आह्ह्ह्ह्ह… मर गई… बहुत मोटा है…” वो चीखी, उसके आंसू बह रहे थे। उसने मेरे सीने पर हाथ रखे और धक्का देने की कोशिश की, लेकिन मैंने उसके हाथ हटा दिए।
“रुको… अभी तो आधा ही गया है…” मैंने कहा और एक और धक्का दिया।
“आह्ह्ह्ह्ह… नहीं… बहुत गहरा है…” अनिका चीख रही थी, लेकिन मैंने पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
मेरा लंड उसकी गहरी चूत में फंसा हुआ था। उसकी चूत इतनी तंग थी कि मेरा लंड उसे फाड़ता हुआ लग रहा था। मैंने रुककर उसे थोड़ा आराम दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।
“आह्ह्ह… हल्के… प्लीज…” वो रो रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसे मजा आने लगा।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। “थप थप थप…” की आवाजें गूंज रही थीं। उसके बड़े स्तन मेरे हर धक्के के साथ उपर-नीचे हो रहे थे, उन्हें देखकर मेरा लंड और कड़ा हो गया।
“आह्ह्ह… अब अच्छा लग रहा है…” अनिका की आवाज बदल गई। रोना बंद हो गया था।
मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत मारने लगा। उसकी गांड मोटी थी, उसे देखकर मेरा लंड और कड़ा हो गया। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे।
“आह्ह्ह… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” अनिका अब चीख रही थी, उसकी चूत ने मेरे लंड को कस लिया था।
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। “थप थप थप…” की आवाजें तेज हो गईं।
“मैं आने वाली हूं…” अनिका चीखी।
“रुको… मैं भी आ रहा हूं…” मैंने कहा और अपनी स्पीड और बढ़ा दी।
फिर मैंने अपना लंड उसकी गहरी चूत में फंसाया और अपना सारा माल उसमें छोड़ दिया।
“उह्ह्ह्ह्ह… आह्ह्ह्ह…” हम दोनों एक साथ कराहे।
मैंने उसे एक लाख रुपये दिए। लेकिन मैंने उसकी भी एक वीडियो बना ली थी। अब वो भी मेरी हो गई थी।
नीता को फंसाना – 18 साल की मासूम चूत
अगले दिन अनिका अपनी बहन नीता को लेकर आई। नीता सिर्फ 18 साल की थी, अभी 12वीं में पढ़ती थी। वो अनिका से भी ज्यादा गोरी थी, और उसके स्तन अभी बड़े हो रहे थे – छोटे, गोल, और कसे हुए। उसकी गांड छोटी थी, लेकिन गोल और उभरी हुई।
“यह मेरी बहन नीता… प्लीज इसे हल्के से…” अनिका ने कहा, उसकी आंखों में आंसू थे।
नीता कांप रही थी, उसके हाथ कांप रहे थे। “दीदी… मुझे डर लग रहा है…” उसने कहा।
“चुप… बस एक बार… फिर मम्मी ठीक हो जाएंगी…” अनिका ने कहा।
मैंने नीता को अपने कमरे में ले गया। वो इतनी छोटी थी, इतनी मासूम। मैंने उसके कपड़े उतारे। वो रो रही थी, लेकिन मजबूर थी।
जल्दी ही वो नंगी थी। उसका बदन अभी बचकाना था – छोटे स्तन, चिकनी चूत पर हल्के-हल्के बाल, और छोटी सी गांड।
मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया। वो कांप रही थी, उसकी आंखें बंद थीं, आंसू बह रहे थे।
“प्लीज… मत करो… मुझे बहुत डर लग रहा है…” वो फुसफुसा रही थी।
“शांत रहो… थोड़ी देर में मजा आएगा…” मैंने उसके पैर फैलाए।
मैंने अपने लंड को उसकी छोटी चूत पर रखा। वो इतनी छोटी थी कि मेरा लंड उसके मुंह पर पूरा फैल गया था।
मैंने धीरे से दबाव डाला।
“आह्ह्ह… दर्द… बहुत दर्द…” नीता चीखी, उसके आंसू बह रहे थे।
मैंने एक जोरदार धक्का दिया।
“चूईईईई…” की आवाज आई और मेरा लंड उसकी कुंवारी चूत में घुस गया। खून निकला, उसकी चूत फट रही थी।
“आह्ह्ह्ह्ह… मर गई… बहुत दर्द हो रहा है…” नीता रो रही थी, उसका बदन कांप रहा था।
मैंने रुककर उसे थोड़ा आराम दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।
“आह्ह्ह… हल्के… प्लीज…” वो रो रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसे मजा आने लगा।
मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत मारी। फिर मैंने उसकी गांड में उंगली डाली।
“नहीं… वहां मत…” वो घबरा गई।
“शांत रहो…” मैंने उसकी गांड में थूका और अपने लंड को उसकी गांड के छेद पर रखा।
“आह्ह्ह… बहुत दर्द…” नीता चीखी जब मेरा लंड उसकी गांड में घुसा।
मैंने उसकी गांड मारी जब तक कि वो नहीं झड़ी। फिर मैंने अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया।
जानवी को सब पता चलना
मैंने सोचा कि सब कुछ ठीक चल रहा है। लेकिन मैंने एक गलती की – मैंने अपने फोन पर सुधा, अनिका और नीता की वीडियो एक ही फोल्डर में रखी थीं।
एक दिन जानवी ने मेरा फोन चेक किया। वो मेरी वीडियो देखकर रोने लगी, गुस्से में आ गई।
“तुमने मेरी बहन को भी… और मेरी दोस्त को… और उसकी छोटी बहन को…” वो चीख रही थी, उसके आंसू बह रहे थे।
“जानवी… सुनो… मैं…” मैंने समझाने की कोशिश की।
“चुप… मैं सब कुछ जानती हूं… तुमने सुधा को ब्लैकमेल किया… अकांक्षा को भी फंसाने वाले थे…” वो रो रही थी, उसका बदन कांप रहा था।
“प्लीज… मुझे माफ कर दो…” मैंने कहा।
“माफी? तुमने मेरी बहनों की इज्जत लूटी… मेरी दोस्त की…” वो चीख रही थी।
तभी सुधा, अकांक्षा, अनिका और नीता सब आ गईं। वो सब रो रही थीं, सब मेरी बलात्कारी नजरों से बचने की कोशिश कर रही थीं।
“दीदी… हमें माफ कर दो… हम मजबूर थीं…” सुधा रो रही थी।
“हां… हमें ब्लैकमेल किया था…” अकांक्षा ने कहा।
जानवी ने सबको देखा, फिर मुझे देखा। उसकी आंखों में गुस्सा था, लेकिन कुछ और भी था – एक अजीब सी लालसा?
“ठीक है… अगर यह सब होना ही था… तो अब मैं भी शामिल हूं…” जानवी ने अचानक कहा।
सब हैरान रह गए।
“क्या?” मैंने पूछा।
“मैंने कभी सोचा नहीं था… लेकिन अब जब सब कुछ खुल गया है… तो हम सब एक साथ…” जानवी ने कहा, उसकी आंखों में एक अलग चमक थी।
New Sex story :- जीजा साली की चुदाई
New Sex story :- मेरी साली की चुदाई