पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
कालका से शिमला जाने वाली छोटी ट्रेन उस शाम अपने तय वक्त से दो घंटे लेट थी। पहाड़ियों पर अचानक शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे स्टेशन को अपनी आगोश में ले लिया था। समीर प्लेटफॉर्म की बेंच पर बैठा चाय पी रहा था। तीस साल का समीर, पेशे से एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर था। उसका लंबा कद, रंग गेहुआं, और आँखों में एक अजीब सी गहराई थी जो किसी भी औरत को अपनी ओर खींच सकती थी। उसने काले रंग की लेदर जैकेट पहनी हुई थी और नीचे डार्क जींस। उसके कंधे पर एक भारी सा कैमरा बैग लटका हुआ था जिसमें उसकी महंगी लेंस और कैमरे बंद थे। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
तभी स्टेशन के वेटिंग रूम का दरवाजा खुला और भीगे हुए कपड़ों में अनन्या बाहर आई। अनन्या का वजूद किसी ताज़ा हवा के झोंके जैसा था—बिखरी हुई लटें और आँखों में एक बेबाक चमक। उसने एक गहरे मैरून रंग का वूलन बॉडीकॉन ड्रेस पहना हुआ था, जो बारिश में भीगकर उसके सुगठित शरीर से चिपका हुआ था। ड्रेस की लंबाई घुटनों के ठीक ऊपर थी, और गीले होने के बाद वह उसके शरीर की हर लकीर को बयां कर रही थी। उसकी गोल-गोल छातियाँ ड्रेस में कसी हुई थीं, और उनके निपल्स भीगे कपड़े के कारण साफ दिख रहे थे। उसकी कमर बेहद पतली थी जो नीचे की ओर फैलती हुई उसके चौड़े कूल्हों को और भी आकर्षक बना रही थी। उसकी जांघें मोटी और गोल थीं, और पानी की बूंदें उसके गोरे बदन पर लुढ़क रही थीं जैसे कोई मोती बिखेर रहा हो। उसके पैरों में ब्लैक हील्स थीं जो उसकी लंबाई और भी बढ़ा रही थीं। उसके बाल घींगे रंग के थे, गीले होने के बाद और भी घने लग रहे थे, और उसके चेहरे पर पानी की बूंदें चमक रही थीं।
“क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ?” अनन्या ने पूछा, उसकी आवाज़ में थोड़ी कंपकंपी थी ठंड के कारण।
समीर ने मुस्कुराकर बैग खिसका दिया, “बिल्कुल। बैठिए।”
दोनों के बीच शुरुआत में बस चाय की चुस्कियां थीं, लेकिन धीरे-धीरे बातों का सिलसिला शुरू हुआ। समीर ने अपनी जैकेट उतारी और अनन्या को ओढ़ा दी। जैकेट पहनते समय उसके हाथ अनन्या के कंधों से टकराए और दोनों के बीच एक अजीब सी बिजली दौड़ गई। अनन्या ने समीर को अपने बारे में बताया—वह दिल्ली से थी, एक फैशन डिजाइनर थी, और शिमला एक फोटोशूट के लिए जा रही थी। समीर ने अपने बारे में बताया कि वह पहाड़ों में रहकर जंगली जानवरों की फोटोग्राफी करता था, और उसका एक छोटा सा कॉटेज पास में ही था।
दो घंटे कब बीत गए, पता ही नहीं चला। उनकी बातें शुरू से ही गहरी और मजाकिया दोनों थीं। अनन्या की हँसी बार-बार समीर के दिल को छू रही थी, और समीर की बातें अनन्या को मंत्रमुग्ध कर रही थीं। जब स्टेशन मास्टर ने ऐलान किया कि लैंडस्लाइड की वजह से ट्रेन रात भर आगे नहीं जाएगी, तो अनन्या के चेहरे पर चिंता के भाव आ गए। स्टेशन के आसपास कोई होटल नहीं था, और बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी।
तभी समीर ने अनन्या को पास ही बने अपने लकड़ी के कॉटेज में रुकने का सुझाव दिया। अनन्या थोड़ी हिचकिचाई, लेकिन समीर की आँखों में उसे कोई बुराई नज़र नहीं आई। वह एक अजीब सा भरोसा महसूस कर रही थी, या शायद वह उसकी मस्क्युलर बॉडी और चेहरे की मासूमियत से प्रभावित हो गई थी। उसने हामी भर दी। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
समीर का कॉटेज चीड़ के पेड़ों के बीच एक खूबसूरत आशियाना था। पत्थर और लकड़ी से बना यह कॉटेज देखने में जैसे किसी फेयरी टेल से निकला लगता था। अंदर जाने पर अनन्या ने देखा कि कॉटेज बेहद साफ-सुथरा और आरामदायक था। एक बड़ा लिविंग एरिया, एक छोटी सी किचन, और ऊपर एक लॉफ्ट जहाँ बेडरूम था। समीर ने सबसे पहले अंगीठी में सूखी लकड़ियाँ जलाईं। कमरे में नारंगी रोशनी और सोंधी खुशबू फैल गई। दोनों अंगीठी के पास मखमली कालीन पर बैठ गए।
अंगीठी की गर्माहट में अनन्या ने अपना कोट उतारा। समीर की नज़रें जब अनन्या की सुराहीदार गर्दन से होती हुई उसकी पतली कमर पर टिकीं, तो अनन्या के गालों पर हया की सुरखी दौड़ गई। वह जानती थी कि भीगे कपड़ों में उसका शरीर कितना खूबसूरत और आकर्षक लग रहा होगा। उसके ब्रा का रंग भीगे टॉप से झलक रहा था—काला लेस, जो उसकी गोरी त्वचा पर बेहद सेक्सी लग रहा था।
“तुम मुझे ऐसे देख रहे हो जैसे पहली बार कोई लड़की देखी हो,” अनन्या ने अपनी पलकें झुकाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक चुलबुली शरारत थी।
“लड़कियाँ तो बहुत देखी हैं अनन्या… पर ऐसा मादक जादू पहली बार देखा है,” समीर की आवाज़ भारी हो गई, उसकी आँखें अब भी अनन्या के शरीर पर ही टिकी थीं।
अनन्या ने अपने बालों को झटकते हुए पानी की बूंदें उड़ाईं। उसका यह हरकत इतना सेक्सी था कि समीर का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। वह उठा और किचन में गया, वहाँ से दो मग गर्म कॉफी लेकर आया। कॉफी पीते समय उनकी उंगलियाँ बार-बार एक-दूसरे से छू रही थीं, और दोनों के बीच एक अनकही तनावपूर्ण बिजली महसूस हो रही थी।
रात गहराती जा रही थी। समीर ने अनन्या को ऊपर के बेडरूम में सोने के लिए कहा, और खुद नीचे सोफे पर सोने का फैसला किया। लेकिन जब अनन्या ऊपर गई और बाथरूम में बदलने के लिए रुकी, तो उसे एहसास हुआ कि उसके पास कोई और कपड़े नहीं थे। उसने नीचे से समीर को आवाज़ दी। समीर ऊपर आया और उसे अपनी एक बड़ी सी टी-शर्ट दी जो उसके घुटनों तक आ रही थी।
“यही पहन लो, तुम्हारे कपड़े सूखने में वक्त लगेगा,” समीर ने कहा और नीचे चला गया।
अनन्या ने बाथरूम में जाकर भीगे कपड़े उतारे। वह आईने में अपने नंगे शरीर को देखने लगी। उसकी उम्र 26 साल की थी, और उसका शरीर बिल्कुल परफेक्ट था—गोल छातियाँ जिनका साइज़ 34C था, पतली कमर जो सिर्फ 26 इंच की थी, और फैलते हुए कूल्हे जो 36 इंच के थे। उसकी जांघें मुलायम और गोल थीं, और उसकी चूत पर हल्के बाल थे जो एक स्ट्रिप की तरह कटे हुए थे। उसने समीर की टी-शर्ट पहनी और आईने में देखा—टी-शर्ट उसके कूल्हों को ढक रही थी लेकिन उसकी टोंड जांघें बाहर नज़र आ रही थीं। बिना ब्रा के उसके निपल्स टी-शर्ट के नीचे साफ उभरे हुए थे।
नीचे समीर सोफे पर लेटा हुआ था लेकिन उसकी नींद बिल्कुल उड़ी हुई थी। उसके दिमाग में सिर्फ अनन्या का वो भीगा हुआ शरीर घूम रहा था। वह सोच रहा था कि कैसे वह उसे पा सकता है, कैसे उसकी जिस्म की खुशबू को महसूस कर सकता है, कैसे उसकी चूत में अपना लौड़ा घुसा सकता है। उसका लंड पैंट में तनकर खड़ा हो गया था, और वह अपने हाथ से उसे सहला रहा था।
अगली सुबह जब अनन्या उठी, तो बारिश थम चुकी थी लेकिन धुंध छाई हुई थी। समीर किचन में नाश्ता बना रहा था—पहाड़ी पराठे, दही, और अचार। अनन्या नीचे आई, अभी भी वही टी-शर्ट पहने हुए। समीर की नज़रें उसके नंगे पैरों से होती हुई ऊपर की ओर बढ़ीं—उसकी जांघें, फिर टी-शर्ट के नीचे उभरे हुए निपल्स, और फिर उसका चेहरा जो बिना मेकअप के भी बेहद खूबसूरत लग रहा था।
“गुड मॉर्निंग,” अनन्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
“गुड मॉर्निंग, सो गई थी?” समीर ने पूछा, उसकी आवाज़ में एक गहरापन था।
“हाँ, बेहतरीन नींद आई। तुम्हारा कॉटेज बहुत आरामदायक है,” अनन्या ने कहा और टेबल पर बैठ गई।
नाश्ते के दौरान दोनों ने बहुत सारी बातें कीं। अनन्या ने बताया कि उसका बॉयफ्रेंड उसे धोखा देकर किसी और के साथ भाग गया था, और वह अब अकेली थी। समीर ने बताया कि उसने कभी कोई गंभीर रिलेशनशिप नहीं रखी क्योंकि उसे आज़ादी पसंद थी। लेकिन दोनों यह जानते थे कि उनके बीच जो कुछ भी हो रहा था, वह सिर्फ दोस्ती से ज्यादा था। उनकी आँखें बार-बार एक-दूसरे को ताक रही थीं, और उनकी बातों में एक अलग ही तरह की नज़दीकी थी। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
नाश्ते के बाद समीर ने अनन्या को आसपास की जगहें दिखाने का प्रस्ताव दिया। अनन्या ने हामी भर दी। समीर ने उसे अपनी एक पुरानी जैकेट और एक जोड़ी ट्रैक पैंट दी जो उस पर थोड़ी ढीली थी लेकिन काम चलाने लायक थी। दोनों पहाड़ी पर चलने निकले। रास्ते में समीर बार-बार अनन्या की मदद करने का बहाना बनाकर उसका हाथ पकड़ लेता, या उसकी कमर पर हाथ रख देता। अनन्या भी इन छुअनों से बुरा नहीं मान रही थी, बल्कि वह भी समीर के करीब आने की कोशिश कर रही थी।

दोपहर को वे एक छोटी सी झरने वाली जगह पर पहुँचे। वहाँ कोई नहीं था। अनन्या पत्थरों पर बैठी और अपने जूते उतारकर पानी में पैर डाल दिए। समीर ने अपना कैमरा निकाला और अनन्या की फोटो लेने लगा। अनन्या शुरू में शरमा रही थी लेकिन फिर वह पोज़ देने लगी। समीर उसे अलग-अलग एंगल से फोटो ले रहा था—उसकी मुस्कुराती हुई आँखें, उसके गीले बाल, उसकी जांघें जो ट्रैक पैंट से बाहर निकल रही थीं।
“तुम बेहद खूबसूरत हो, अनन्या,” समीर ने कैमरा नीचे करते हुए कहा।
“तुम भी बुरे नहीं हो, समीर,” अनन्या ने शरारती अंदाज़ में कहा।
समीर उसके पास आया और उसके बगल में बैठ गया। दोनों चुपचाप झरने की आवाज़ सुनने लगे। अचानक अनन्या फिसलकर पानी में गिरने वाली थी कि समीर ने उसकी कमर पकड़कर खींच लिया। अनन्या समीर की गोद में आ गई। दोनों की आँखें मिलीं, और फिर दोनों एक-दूसरे की ओर झुक गए। उनके होंठ मिले, और एक हल्का सा चुंबन शुरू हुआ जो धीरे-धीरे गहरा होता गया। समीर ने अनन्या को अपनी बाहों में भर लिया और उसे कसकर चूमने लगा। अनन्या भी पूरी तरह से समीर में खो गई थी। उसके हाथ समीर के बालों में फिर रहे थे और वह उसके मुँह का स्वाद ले रही थी।
करीब दस मिनट तक वे वहीं एक-दूसरे को चूमते रहे। समीर का हाथ अनन्या की जांघों पर था और वह धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा था। अनन्या भी गर्म हो चुकी थी और वह समीर की छाती से चिपकी हुई थी। लेकिन तभी समीर ने खुद को रोका। उसे एहसास हुआ कि अगर वह अभी कुछ करेगा तो शायद अनन्या उसे एक औरत के रूप में याद रखेगी जो आसानी से मिल गई, और वह चाहता था कि वह उसे याद रखे एक ऐसे मर्द के रूप में जिसने उसे पूरी तरह से पागल कर दिया था।
वे वापस कॉटेज आए। शाम को समीर ने खाना बनाया—मशरूम की सब्जी, दाल, और चावल। खाने के बाद दोनों अंगीठी के पास बैठे। अनन्या ने समीर से उसकी फोटोग्राफी के बारे में पूछा और समीर ने अपने लैपटॉप पर उसे अपनी खींची हुई तस्वीरें दिखाईं—बर्फीले तेंदुए, हिमालयन मोनाल, और पहाड़ी परिदृश्य। अनन्या बेहद प्रभावित हुई। फिर समीर ने उसे वो तस्वीरें दिखाईं जो उसने उस दिन खींची थीं। अनन्या को अपनी तस्वीरें देखकर अच्छा लगा, खासकर वो शॉट्स जहाँ वह अनजाने में बेहद सेक्सी लग रही थी।
रात को जब अनन्या सोने के लिए ऊपर गई, तो समीर ने उसे गुड नाइट किस दी—उसके माथे पर, फिर गालों पर, और फिर होंठों पर एक हल्की सी चुभन। अनन्या ने भी जवाब में उसके गाल पर एक चुंबन दिया और ऊपर चली गई। समीर नीचे सोफे पर लेटा रहा और सोचता रहा कि कैसे वह इस औरत को अपना बनाएगा। उसे अनन्या चाहिए थी, और वह चाहता था कि वह खुद उसके पास आए, भीख माँगे उसके लौड़े के लिए।
अगले दिन समीर ने अनन्या को एक और जगह दिखाने का प्रस्ताव दिया—एक पुराना मंदिर जो एक चोटी पर था। रास्ता मुश्किल था लेकिन अनन्या तैयार हो गई। समीर ने उसे अपनी पुरानी जींस और एक स्वेटशर्ट दी। अनन्या ने कपड़े बदले और समीर उसे देखता रहा। जींस उसकी जांघों पर कसी हुई थी और उसकी गांड का आकार साफ दिख रहा था। स्वेटशर्ट भी काफी टाइट थी जिसमें उसकी छातियाँ उभरी हुई थीं।
रास्ते में समीर जान-बूझकर अनन्या की मदद करता रहा। जब वे एक संकरे रास्ते से गुज़रे तो समीर पीछे चला और अपने हाथों से अनन्या की कमर पकड़ ली। उसके हाथ उसकी कमर से नीचे सरकते हुए उसकी गांड के ऊपर रुके। अनन्या ने कुछ नहीं कहा, बस आगे बढ़ती रही। समीर समझ गया कि अनन्या भी चाहती है, बस वह इंतज़ार कर रही है कि वह पहला कदम उठाए। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
मंदिर पहुँचकर दोनों ने आराम किया। वहाँ से पूरा पहाड़ी इलाका दिखता था। समीर ने अनन्या को अपनी बाहों में ले लिया और वे दोनों धूप सेंकने लगे। समीर का हाथ अनन्या की जांघों पर था और वह धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा था। अनन्या ने अपनी आँखें बंद कर लीं और समीर के स्पर्श का आनंद लेने लगी।
“क्या तुम मुझे चाहते हो?” अनन्या ने धीरे से पूछा।
“बहुत ज़्यादा,” समीर ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा।
“तो फिर रुके क्यों हो?” अनन्या ने पूछा, उसकी आवाज़ में एक कामुकता थी।
समीर ने उसे अपनी ओर घुमाया और उसके होंठों पर एक गहरा चुंबन दिया। इस बार का चुंबन पहले से ज्यादा ज़ोरदार और भूखा था। समीर ने अपनी जीभ अनन्या के मुँह में घुसा दी और उसकी जीभ से खेलने लगा। अनन्या भी पूरी तरह से जवाब दे रही थी। उसके हाथ समीर की पीठ पर थे और वह उसे अपनी ओर खींच रही थी।
समीर ने अपना हाथ अनन्या की स्वेटशर्ट के नीचे डाल दिया और उसकी नरम पेट को सहलाने लगा। फिर उसका हाथ ऊपर बढ़ा और उसने अनन्या की ब्रा के ऊपर से ही उसकी छाती को दबाना शुरू कर दिया। अनन्या की साँसें तेज़ हो गईं और उसने समीर को और पास खींच लिया। समीर ने अनन्या की ब्रा का हुक खोला और उसकी नंगी छातियों को अपने हाथों में भर लिया। वह उन्हें दबा रहा था, मसल रहा था, और उसके निपल्स को अपनी उंगलियों से कसकर पकड़ रहा था। अनन्या की आवाज़ निकलने लगी—हल्की-हल्की कराहें जो समीर को और भी उत्तेजित कर रही थीं।
“आह… समीर… धीरे…” अनन्या ने कहा।
“क्या हुआ, मज़ा नहीं आ रहा?” समीर ने शरारती ढंग से पूछा।
“बहुत मज़ा आ रहा है… बस… और करो…” अनन्या ने कहा।
समीर ने उसे जमीन पर लिटा दिया और उसकी स्वेटशर्ट उतार दी। अनन्या की नंगी छातियाँ सूरज की रोशनी में चमक रही थीं। समीर ने उन पर अपना मुँह रख दिया और एक निपल को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा। दूसरे हाथ से वह दूसरी छाती को दबा रहा था। अनन्या पागल हो रही थी। उसने समीर का सिर अपने सीने पर दबा दिया और उसे और ज़ोर से चूसने के लिए कहने लगी।
समीर ने अपना एक हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और अनन्या की जींस के बटन खोलने लगा। उसने उसकी जींस नीचे खींची और उसकी पैंटी देखी—एक लाल रंग की लेस पैंटी जो बेहद सेक्सी लग रही थी। समीर ने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। अनन्या की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी और पैंटी गीली हो रही थी।
“कितनी गीली हो गई हो तुम,” समीर ने मुस्कुराते हुए कहा।
“तुम्हारी वजह से…” अनन्या ने शर्माते हुए कहा।
समीर ने उसकी पैंटी नीचे खींची और उसकी चूत को देखा। वह बिल्कुल गुलाबी थी, चिकनी, और पहले से ही चिकनाहट से लथपथ। समीर ने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाली। अनन्या की आवाज़ निकल पड़ी—एक मीठी सी चीख।
“ओह गॉड… समीर…” अनन्या ने कहा।
समीर ने उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। फिर उसने एक और उंगली डाल दी। अनन्या की चूत बहुत टाइट थी लेकिन गीली होने के कारण उंगलियाँ आसानी से अंदर जा रही थीं। समीर ने उंगलियों से उसकी चूत की दीवारों को सहलाना शुरू कर दिया, खासकर ऊपर की ओर जहाँ जी-स्पॉट होता है।
अनन्या पागल हो रही थी। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं और उसका शरीर कांप रहा था। समीर ने अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया और अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू कर दिया। अनन्या ने समीर का सिर अपनी जांघों के बीच दबा लिया और उसे और ज़ोर से चाटने के लिए कहने लगी।
“चाटो मेरी चूत… जीभ डालो अंदर… आह…” अनन्या चीख रही थी।
समीर ने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा दी और अंदर-बाहर करने लगा। फिर वह ऊपर की ओर बढ़ा और उसकी क्लिटोरिस को अपने होठों में भरकर चूसने लगा। अनन्या का शरीर कांपने लगा और उसने समीर के बालों को खींचते हुए उसे और पास खींच लिया।
कुछ ही मिनटों में अनन्या ने अपना पानी छोड़ दिया। उसकी चूत से पानी की धार निकली और समीर के मुँह पर गिरी। समीर ने उसे चाट लिया और अनन्या के ऊपर आ गया। उसने अपनी जींस खोली और अपना लंड बाहर निकाला। वह करीब 8 इंच का था, मोटा, और कटा हुआ। अनन्या ने उसे देखकर डर भी महसूस किया और खुशी भी। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
“यह तो बहुत बड़ा है,” अनन्या ने कहा।
“डरो मत, मज़ा आएगा,” समीर ने कहा और उसके होठों पर चुंबन दिया।
समीर ने अपने लंड का सुपाड़ा अनन्या की चूत के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का लगाया। अनन्या की चूत बहुत टाइट थी और लंड अंदर जाने में मुश्किल हो रही थी। लेकिन समीर ने धीरे-धीरे धक्के लगाए और आधा लंड अंदर घुसा दिया। अनन्या की आवाज़ निकल पड़ी—दर्द और मज़ा दोनों मिला हुआ।
“दर्द हो रहा है…” अनन्या ने कहा।
“थोड़ा सब्र करो, अभी मज़ा आएगा,” समीर ने कहा और रुक गया।
कुछ देर बाद जब अनन्या का दर्द कम हुआ, तो समीर ने फिर से धक्के लगाने शुरू किए। इस बार उसने पूरा लंड अंदर घुसा दिया। अनन्या की चीख निकल पड़ी लेकिन फिर वह शांत हो गई। समीर ने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ अनन्या की साँसें तेज़ हो रही थीं और वह समीर को और ज़ोर से धक्के लगाने के लिए कह रही थी।
“और ज़ोर से… चोदो मुझे… हाँ… ऐसे ही…” अनन्या चिल्ला रही थी।
समीर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वह अनन्या की चूत में अपना लंड पूरी तरह से घुसा रहा था और फिर बाहर खींच रहा था। हर धक्के के साथ अनन्या की चूत से आवाज़ें आ रही थीं—चपचप की आवाज़ जो और भी उत्तेजक थी।
लगभग दस मिनट तक चोदने के बाद समीर ने अपना लंड बाहर निकाल लिया। अनन्या हैरान हुई कि वह क्यों रुका।
“अभी तो शुरुआत है, मेरी जान,” समीर ने मुस्कुराते हुए कहा।
उसने अनन्या को घुटनों के बल बैठने के लिए कहा। अनन्या समझ गई कि वह क्या चाहता है। उसने अपनी गांड ऊपर उठा दी। समीर ने उसकी गांड को देखा—वह गोल, मुलायम, और बेहद सेक्सी थी। उसने अपने थूक से अनन्या की गांड को गीला किया और फिर अपनी एक उंगली अंदर डालने की कोशिश की।
अनन्या थोड़ा डरी क्योंकि उसने कभी गांड नहीं मरवाई थी, लेकिन समीर ने उसे आश्वस्त किया कि वह धीरे-धीरे करेगा। उसने पहले एक उंगली डाली, फिर दो उंगलियाँ, और अनन्या की गांड को थोड़ा ढीला किया। फिर उसने अपने लंड पर थूक लगाया और अनन्या की गांड के मुँह पर रखा।
“अराम से करना,” अनन्या ने कहा।
“तुम बस मज़े लो,” समीर ने कहा और धीरे से धक्का लगाया।
सुपाड़ा अंदर घुसा और अनन्या की चीख निकल पड़ी। लेकिन समीर ने रुककर उसे सहलाया और फिर थोड़ा और अंदर किया। धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर चला गया। अनन्या को पहले तो दर्द हुआ लेकिन फिर वह दर्द मज़े में बदल गया। समीर ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए और फिर स्पीड बढ़ा दी। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
“कैसा लग रहा है?” समीर ने पूछा।
“बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से करो…” अनन्या ने कहा।
समीर ने पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए। उसका लंड अनन्या की गांड की गहराइयों में जा रहा था और अनन्या की चीखें पहाड़ियों में गूंज रही थीं। वह अपनी गांड पीछे की ओर धकेल रही थी ताकि समीर का लंड और गहरा जाए।
“मेरी गांड फाड़ दो… हाँ… ऐसे ही… और ज़ोर से…” अनन्या चिल्ला रही थी।
समीर ने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। उसका लंड अनन्या की गांड में पूरी तरह से घुस रहा था और बाहर आ रहा था। दोनों के शरीर पसीने से तर हो गए थे और उनकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
लगभग पंद्रह मिनट तक गांड मारने के बाद समीर ने अनन्या को पलटा दिया और फिर से उसकी चूत में लंड डाल दिया। इस बार वह उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठ चूमने लगा। अनन्या ने अपने पैर उसकी कमर के चारों ओर लपेट लिए और उसे और पास खींच लिया।
“मैं झड़ने वाला हूँ,” समीर ने कहा।
“अंदर ही छोड़ दो… मैं गोलियाँ खाती हूँ…” अनन्या ने कहा।
समीर ने कुछ और ज़ोरदार धक्के लगाए और फिर अपना गाढ़ा वीर्य अनन्या की चूत में छोड़ दिया। अनन्या भी उसी वक्त झड़ गई और दोनों एक-दूसरे में लिपटकर पड़े रहे।
कुछ देर बाद जब दोनों सांत हुए, तो समीर ने अनन्या को अपनी बाहों में भर लिया। अनन्या उसके सीने पर सिर रखकर लेटी हुई थी और उसकी उंगलियाँ उसकी छाती पर चल रही थीं।
“यह बेहतरीन था,” अनन्या ने धीरे से कहा।
“बस शुरुआत थी, मेरी जान,” समीर ने मुस्कुराते हुए कहा।
वे वहाँ करीब एक घंटे तक पड़े रहे, एक-दूसरे को चूमते रहे, और बातें करते रहे। फिर वे कपड़े पहनकर वापस कॉटेज आए। रास्ते में दोनों का हाथ एक-दूसरे के हाथ में था और दोनों मुस्कुरा रहे थे।
कॉटेज पहुँचकर दोनों ने साथ में नहाया। बाथरूम में भी समीर ने अनन्या को नहीं छोड़ा। उसने उसे साबुन लगाया, उसकी छातियों को मला, और फिर उसकी चूत में फिर से उंगली की। अनन्या ने भी उसके लंड को साबुन लगाकर सहलाया और फिर उसे अपने मुँह में लेकर चूसा। समीर का लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने अनन्या को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े ही चोद दिया।
रात को दोनों ने साथ में खाना खाया और फिर बेडरूम में गए। समीर ने अनन्या को अपनी बाहों में भरकर सुलाया और उसके बालों में उंगलियाँ फेरते हुए उसे किस करता रहा। अनन्या बेहद खुश थी—उसे एक ऐसा मर्द मिला था जो उसे चाहता था, उसकी इज्ज़त करता था, और उसे बेड में भी पूरी तरह से संतुष्ट करता था।
अगली सुबह जब अनन्या उठी, तो समीर पहले ही जाग चुका था और उसके लिए नाश्ता बना रहा था। अनन्या नीचे आई और उसने पीछे से समीर को गले लगा लिया। समीर ने मुड़कर उसे किस किया और फिर नाश्ते पर बैठे। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
“आज क्या प्लान है?” अनन्या ने पूछा।
“आज मैं तुम्हें एक खास जगह ले जाना चाहता हूँ,” समीर ने कहा।
“कहाँ?”
“एक ऐसी जगह जहाँ से पूरा हिमालय दिखता है। वहाँ कोई नहीं आता, और हम अकेले होंगे।”
अनन्या समझ गई कि समीर का क्या मतलब था। उसने मुस्कुराते हुए हामी भर दी।
नाश्ते के बाद दोनों निकल पड़े। रास्ता लंबा था और मुश्किल भी, लेकिन अनन्या समीर के साथ खुश थी। रास्ते में समीर बार-बार रुककर उसे किस करता, उसकी गांड पर थप्पड़ मारता, और उसकी छातियों को दबाता। अनन्या भी शरमा नहीं रही थी, बल्कि वह भी समीर के करीब आने की कोशिश कर रही थी।
दोपहर को वे उस जगह पहुँचे। यह एक समतल चट्टान थी जहाँ से पूरा पहाड़ी इलाका दिखता था। चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़ थे और नीचे हरियाली थी। समीर ने एक बड़ा सा तिरपाल बिछाया और दोनों उस पर बैठ गए।
समीर ने अपने बैग से दो बोतल शराब निकाली और दोनों ने पीना शुरू किया। शराब के नशे में अनन्या और भी बेबाक हो गई। उसने समीर को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर एक गहरा चुंबन दिया। समीर ने उसकी जैकेट उतारी और फिर उसकी टी-शर्ट। अनन्या ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी और उसकी छातियाँ तिरपाल पर लेटे हुए एक तरफ को झुक गईं।
समीर ने उन्हें अपने हाथों में भरा और दबाने लगा। फिर उसने अपना मुँह उन पर रख दिया और चूसने लगा। अनन्या ने अपनी आँखें बंद कर लीं और मज़े लेने लगी। समीर ने एक हाथ से उसकी जींस का बटन खोला और उसकी चूत को सहलाने लगा। अनन्या पहले से ही गीली थी।
समीर ने उसकी जींस और पैंटी उतार दी और अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया। वह उसे चाटने लगा और अनन्या की कराहें फिर से शुरू हो गईं। समीर ने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा दी और अंदर-बाहर करने लगा। अनन्या ने अपने हाथों से समीर का सिर दबाया और उसे और ज़ोर से चाटने के लिए कहने लगी।
“चाटो… हाँ… और ज़ोर से… मेरी चूत खा जाओ…” अनन्या चिल्ला रही थी।
समीर ने उसकी चूत को अच्छी तरह से चाटा और फिर ऊपर उठकर अपना लंड बाहर निकाला। उसने अनन्या के पैर फैलाए और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। इस बार कोई दर्द नहीं था, सिर्फ मज़ा था। अनन्या ने तुरंत ही अपनी कमर उठाई और समीर के धक्कों का जवाब देने लगी।
“चोदो मुझे… हाँ… और ज़ोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” अनन्या चिल्ला रही थी।
समीर ने पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए। उसका लंड अनन्या की चूत में पूरी तरह से घुस रहा था और बाहर आ रहा था। दोनों के शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे और आवाज़ें आ रही थीं—चपचप की आवाज़ जो और भी उत्तेजक थी।
लगभग बीस मिनट तक चोदने के बाद समीर ने अपना लंड बाहर निकाला और अनन्या के मुँह के पास ले आया। अनन्या ने उसे अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। वह उसके वीर्य का स्वाद लेना चाहती थी। समीर ने कुछ ही मिनटों में अपना वीर्य अनन्या के मुँह में छोड़ दिया और अनन्या ने उसे पी लिया।
उस दिन वे वहाँ कई बार चुदाई करते रहे। कभी समीर ऊपर रहता, कभी अनन्या। कभी वे खड़े होकर चोदते, कभी घुटनों के बल। हर पोज़िशन में दोनों को मज़ा आया और दोनों एक-दूसरे को संतुष्ट करते रहे।
शाम को जब वे वापस कॉटेज आए, तो दोनों बेहद थके हुए थे लेकिन खुश भी। उन्होंने साथ में नहाया, खाना खाया, और फिर बेड पर आ गए। समीर ने अनन्या को अपनी बाहों में भरकर सुलाया और उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, “मैं तुमसे प्यार करता हूँ, अनन्या।”
अनन्या ने उसकी ओर देखा और उसके होठों पर एक हल्का सा चुंबन दिया, “मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ, समीर।”
लेकिन दोनों यह जानते थे कि उनके बीच जो कुछ भी था, वह सिर्फ प्यार नहीं था। वह एक गहरी हवस थी, एक जिस्मानी खिंचाव जो उन्हें एक-दूसरे की ओर खींच रहा था। वे दोनों एक-दूसरे के शरीर के भूखे थे और वे इस भूख को मिटाना चाहते थे।
अगले कुछ दिनों तक दोनों कॉटेज में ही रहे। दिन भर वे एक-दूसरे को चोदते रहते, और रात को एक-दूसरे की बाहों में सोते। समीर ने अनन्या की हर तरह से चुदाई की—उसकी चूत मारी, उसकी गांड मारी, उसके मुँह में लिया, और उसकी छातियों के बीच भी अपना लंड फिसलाया। अनन्या भी पूरी तरह से समीर की हो चुकी थी और वह उसकी हर इच्छा पूरी करती थी। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
एक दिन समीर ने अनन्या को एक और खास जगह ले जाने का फैसला किया—एक गुफा जो पहाड़ी के अंदर थी और वहाँ से एक छोटा झरना बहता था। वे दोनों गुफा में गए और समीर ने एक मोमबत्ती जलाई। गुफा की दीवारों पर पानी की बूंदें चमक रही थीं और मोमबत्ती की रोशनी में अनन्या और भी खूबसूरत लग रही थी।
समीर ने अनन्या को दीवार से सटाया और उसके कपड़े उतारने शुरू किए। अनन्या भी समीर के कपड़े उतार रही थी। कुछ ही देर में दोनों नंगे थे और एक-दूसरे को चूम रहे थे। समीर ने अनन्या को उठाया और उसकी टांगें अपनी कमर के चारों ओर लपेट दीं। फिर उसने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और उसे दीवार से सटाकर चोदने लगा।
“ओह गॉड… यह तो बहुत गहरा जा रहा है…” अनन्या चीख रही थी।
“मज़ा आ रहा है ना?” समीर ने पूछा।
“बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से करो…” अनन्या ने कहा।
समीर ने पूरी ताकत से धक्के लगाए। उसका लंड अनन्या की चूत की सबसे गहरी जगह तक जा रहा था और अनन्या की चीखें गुफा में गूंज रही थीं। पानी की बूंदें उनके शरीरों पर गिर रही थीं और उन्हें और भी सेक्सी बना रही थीं।
लगभग आधे घंटे तक चोदने के बाद समीर ने अनन्या को नीचे उतारा और उसे घुटनों के बल बैठने के लिए कहा। इस बार वह उसकी गांड मारना चाहता था। उसने अपने लंड पर पानी लगाया और अनन्या की गांड के मुँह पर रख दिया। फिर धीरे से धक्का लगाया।
अनन्या की गांड पहले से ही थोड़ी ढीली हो चुकी थी क्योंकि समीर ने उसे कई बार मारा था, लेकिन फिर भी उसे थोड़ा दर्द हुआ। लेकिन समीर ने उसे सहलाया और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। जल्द ही दर्द मज़े में बदल गया और अनन्या फिर से चिल्लाने लगी।
“मारो मेरी गांड… हाँ… और ज़ोर से… मेरी गांड फाड़ दो…” अनन्या चिल्ला रही थी।
समीर ने पूरी ताकत से धक्के लगाए। उसका लंड अनन्या की गांड में पूरी तरह से घुस रहा था और बाहर आ रहा था। दोनों के शरीर पसीने से तर हो गए थे और उनकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
अंत में समीर ने अपना वीर्य अनन्या की गांड में ही छोड़ दिया। वह थककर अनन्या के ऊपर गिर गया और दोनों कुछ देर तक वहीं पड़े रहे।
वे कई दिनों तक उस कॉटेज में रहे और रोज़ नई-नई जगहों पर चुदाई करते रहे। कभी वे जंगल में चोदते, कभी झरने के पास, कभी चट्टानों पर, और कभी ट्रेन के डिब्बे में भी। उनकी हवस कभी कम नहीं हुई, बल्कि दिन-ब-दिन और बढ़ती गई।
अंत में जब अनन्या को वापस दिल्ली जाना था, तो दोनों बेहद उदास थे। स्टेशन पर समीर ने अनन्या को एक लंबा चुंबन दिया और उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, “मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूँगा, अनन्या। तुम मेरी हो और हमेशा मेरी रहोगी।”
अनन्या ने आँसू पोंछते हुए कहा, “मैं भी तुम्हें कभी नहीं भूलूँगी, समीर। तुम मेरे पहले असली प्यार हो, मेरे पहले असली मर्द हो।”
ट्रेन चल पड़ी और समीर प्लेटफॉर्म पर खड़ा रहा। अनन्या खिड़की से उसे हाथ हिलाती रही और फिर ट्रेन दूर चली गई। लेकिन दोनों जानते थे कि यह अंत नहीं था, बल्कि एक नई शुरुआत थी। वे फिर मिलेंगे, फिर से एक-दूसरे को चोदेंगे, और फिर से वो हवस को महसूस करेंगे जो उन्हें पहाड़ों की वादियों में मिली थी।
और इस तरह, पहाड़ों की वादियों में एक अनसुलझा प्यार, या यूँ कहें कि एक गहरी हवस, दो जिस्मों के बीच पनप उठी जो कभी खत्म नहीं होगी। समीर और अनन्या की कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि यहीं से शुरू होती है एक नई दास्तान जिसमें दो जिस्म एक-दूसरे के लिए तरसते हैं, एक-दूसरे को पाने के लिए बेताब रहते हैं, और जब मिलते हैं तो आग बरसाते हैं। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
उनकी मुलाकात एक संयोग थी, उनकी दोस्ती एक मजबूरी थी, लेकिन उनकी हवस एक हकीकत थी जो उन्हें हमेशा एक-दूसरे की ओर खींचती रहेगी। समीर ने अनन्या को न सिर्फ एक औरत के रूप में पाया, बल्कि एक ऐसी शैतान के रूप में जो उसके ख्वाबों में आती है और उसे पागल कर देती है। और अनन्या ने समीर को एक ऐसे मर्द के रूप में पाया जो उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता है, जो उसकी हर इच्छा को समझता है, और जो उसे चोदने में कोई कसर नहीं छोड़ता।
उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यह तो बस शुरुआत है एक लंबे सफर की जिसमें दो जिस्म एक-दूसरे के लिए तरसेंगे, एक-दूसरे को पाने के लिए बेताब रहेंगे, और जब मिलेंगे तो आग लगा देंगे। पहाड़ों की वादियों में उनकी lust की गूंज हमेशा सुनाई देती रहेगी, और उनकी यादें हमेशा ताज़ा रहेंगी।
समीर वापस अपने कॉटेज आया और अनन्या की खुशबू अभी भी वहाँ महसूस हो रही थी। उसने अनन्या की टी-शर्ट उठाई जो उसने भूलकर वहीं छोड़ दी थी और उसे अपने चेहरे पर रखकर सूंघा। उसकी खुशबू उसे पागल कर रही थी और उसका लंड फिर से खड़ा हो गया। उसने अपना लंड हाथ में लिया और अनन्या की यादों में उसे सहलाने लगा। वह सोच रहा था कि कैसे उसने उसकी चूत मारी थी, कैसे उसकी गांड मारी थी, और कैसे वह उसके मुँह में झड़ा था। ये यादें उसे हमेशा उत्तेजित करती रहेंगी और वह जल्द ही फिर से अनन्या से मिलने की योजना बनाने लगा।
उधर ट्रेन में अनन्या भी समीर की यादों में खोई हुई थी। उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रखा और महसूस किया कि वह अभी भी गीली थी। उसने अपनी आँखें बंद की और समीर के लंड को याद करने लगी—उसका आकार, उसकी मोटाई, और वो तरीका जिससे वह उसकी चूत और गांड में घुसता था। ये यादें उसे हमेशा उत्तेजित करती रहेंगी और वह भी जल्द ही फिर से समीर से मिलने की योजना बनाने लगी।
और इस तरह, दो जिस्मों की lust की कहानी हमेशा के लिए जारी रहती है, पहाड़ों की वादियों में, जहाँ हवा में भी मोहकता है और पानी में भी चाहत। समीर और अनन्या, दो नाम जो अब एक-दूसरे के लिए बने हैं, दो जिस्म जो अब एक-दूसरे के लिए तरसते हैं, और दो रूहें जो अब एक-दूसरे के बिना अधूरी हैं। उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि यहीं से शुरू होती है एक नई दुनिया जहाँ सिर्फ lust है, सिर्फ चाहत है, और सिर्फ दो जिस्मों का मिलन है जो एक-दूसरे को पूरी तरह से संतुष्ट करते हैं।
समीर ने अपने कैमरे में अनन्या की तस्वीरें देखीं—वह भीगी हुई, वह मुस्कुराती हुई, वह नंगी, और वह चुदते हुए। हर तस्वीर में उसकी आँखों में वो चमक थी जो सिर्फ समीर के लिए थी। और अनन्या ने अपने फोन में समीर की तस्वीरें देखीं—वह उसे चूमते हुए, वह उसे चोदते हुए, और वह उसे अपनी बाहों में भरे हुए। हर तस्वीर में उसकी आँखों में वो प्यार था जो सिर्फ अनन्या के लिए था।
दोनों एक-दूसरे को याद करते रहे, एक-दूसरे के लिए तरसते रहे, और एक दिन फिर से मिले। लेकिन वह एक और कहानी है, एक और दास्तान जो पहाड़ों की वादियों में लिखी जाएगी, जहाँ दो जिस्म फिर से एक होंगे और आग बरसाएंगे। तब तक, समीर और अनन्या की यादें हमेशा ताज़ा रहेंगी, उनकी lust हमेशा जारी रहेगी, और उनकी चाहत हमेशा बढ़ती रहेगी। क्योंकि यह कोई मामूली प्यार नहीं था, यह तो एक गहरी, ज्वलंत, और बेकाबू lust थी जो दो जिस्मों को एक-दूसरे के लिए पागल कर देती थी। और ऐसी lust कभी खत्म नहीं होती, बल्कि दिन-ब-दिन और बढ़ती है, और दो जिस्मों को हमेशा एक-दूसरे की ओर खींचती रहती है।
समीर ने अपनी डायरी खोली और उसमें लिखा, “आज अनन्या चली गई, लेकिन वह मेरी हमेशा के लिए रह गई। उसकी यादें, उसकी खुशबू, उसकी चूत का स्वाद, और उसकी गांड की गर्माहट—यह सब मेरे साथ है और हमेशा रहेगा। मैं उसे फिर से मिलूँगा, और फिर से उसे चोदूँगा, और फिर से उसे अपना बनाऊँगा। क्योंकि वह मेरी है, सिर्फ मेरी, और हमेशा मेरी रहेगी।”
उधर अनन्या ने भी अपनी डायरी में लिखा, “आज मैं समीर को छोड़कर आई, लेकिन वह मेरे दिल में हमेशा के लिए बस गया। उसका लंड, उसके चुंबन, उसके धक्के—यह सब मुझे हमेशा याद रहेगा। मैं उससे फिर से मिलूँगी, और फिर से उसे अपना बनाऊँगी, और फिर से उसके लौड़े को अपनी चूत और गांड में महसूस करूँगी। क्योंकि वह मेरा है, सिर्फ मेरा, और हमेशा मेरा रहेगा।”
और इस तरह, दो डायरियों में दो जिस्मों की lust की कहानी लिखी गई, जो हमेशा के लिए जारी रहेगी। पहाड़ों की वादियों में, जहाँ हवा में मोहकता है और पानी में चाहत, वहाँ दो जिस्म हमेशा एक-दूसरे को याद करेंगे और एक दिन फिर से मिलेंगे। तब तक, उनकी lust की आग हमेशा जलती रहेगी, उनकी चाहत हमेशा बढ़ती रहेगी, और उनकी यादें हमेशा ताज़ा रहेंगी। क्योंकि यह कोई मामूली मुलाकात नहीं थी, यह तो दो जिस्मों का मिलन था जो एक-दूसरे के लिए बने थे, और एक-दूसरे के लिए हमेशा तरसते रहेंगे। पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार
समीर और अनन्या की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यह तो बस शुरुआत है एक लंबे और मोहक सफर की जिसमें दो जिस्म एक-दूसरे को पाने के लिए बेताब रहेंगे, एक-दूसरे को चोदने के लिए तरसेंगे, और जब मिलेंगे तो आग लगा देंगे। उनकी lust की गूंज हमेशा पहाड़ों की वादियों में सुनाई देती रहेगी, और उनकी यादें हमेशा ताज़ा रहेंगी। क्योंकि यह कोई मामूली प्यार नहीं था, यह तो एक गहरी, ज्वलंत, और बेकाबू lust थी जो दो जिस्मों को एक-दूसरे के लिए पागल कर देती थी। और ऐसी lust कभी खत्म नहीं होती, बल्कि दिन-ब-दिन और बढ़ती है, और दो जिस्मों को हमेशा एक-दूसरे की ओर खींचती रहती है।
उनकी मुलाकात एक संयोग थी, उनकी दोस्ती एक मजबूरी थी, लेकिन उनकी lust एक हकीकत थी जो उन्हें हमेशा एक-दूसरे की ओर खींचती रहेगी। समीर ने अनन्या को न सिर्फ एक औरत के रूप में पाया, बल्कि एक ऐसी शैतान के रूप में जो उसके ख्वाबों में आती है और उसे पागल कर देती है। और अनन्या ने समीर को एक ऐसे मर्द के रूप में पाया जो उसे पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता है, जो उसकी हर इच्छा को समझता है, और जो उसे चोदने में कोई कसर नहीं छोड़ता। उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि यहीं से शुरू होती है एक नई दुनिया जहाँ सिर्फ lust है, सिर्फ चाहत है, और सिर्फ दो जिस्मों का मिलन है जो एक-दूसरे को पूरी तरह से संतुष्ट करते हैं।
और इस तरह, पहाड़ों की वादियों में अनसुलझा प्यार, या यूँ कहें कि एक गहरी lust, दो जिस्मों के बीच पनप उठी जो कभी खत्म नहीं होगी। समीर और अनन्या, दो नाम जो अब एक-दूसरे के लिए बने हैं, दो जिस्म जो अब एक-दूसरे के लिए तरसते हैं, और दो रूहें जो अब एक-दूसरे के बिना अधूरी हैं। उनकी कहानी हमेशा जारी रहेगी, उनकी lust हमेशा बढ़ती रहेगी, और उनकी चाहत हमेशा ताज़ा रहेगी। क्योंकि यह कोई मामूली मुलाकात नहीं थी, यह तो दो जिस्मों का मिलन था जो एक-दूसरे के लिए बने थे, और एक-दूसरे के लिए हमेशा तरसते रहेंगे। पहाड़ों की वादियों में उनकी यादें हमेशा ताज़ा रहेंगी, और उनकी lust की आग हमेशा जलती रहेगी। और इस तरह, दो जिस्मों की कहानी हमेशा के लिए जारी रहती है, पहाड़ों की वादियों में, जहाँ हवा में भी मोहकता है और पानी में भी चाहत।
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