पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
भाग 1: आलसी टैंगो की दौड़
सार्थक 28 साल का था, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, अकेला रहता था। उसका एकमात्र साथी था उसका गोल्डन रिट्रीवर, टैंगो। हर शाम 6 बजे, सार्थक उसे पार्क ले जाता था। पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
टैंगो का रूटीन था – जाओ, एक जगह बैठो, सो जाओ। किसी कुत्ते से बात नहीं, किसी से दोस्ती नहीं। बस सोना।
लेकिन एक शाम कुछ अलग हुआ।
सार्थक ने टैंगो को खुला छोड़ा, जैसे हमेशा करता था। लेकिन इस बार टैंगो ने सोने की बजाय कुछ और किया। उसने नाक हवा में उठाई, फिर अचानक दौड़ पड़ा।
“टैंगो! रुक!” सार्थक ने चिल्लाया।
लेकिन टैंगो रुका नहीं। वह दौड़ता रहा, पार्क के उस छोर पर जहाँ एक सफेद पूडल खड़ी थी। उसके पास एक लड़की थी – लंबे बाल, गुलाबी टॉप, नीली जींस।
टैंगो उस पूडल के पास पहुंचा, उसे सूंघा, फिर उसके चारों ओर घूमने लगा, पूंछ हिलाने लगा।
“अरे!” लड़की ने हंसते हुए कहा, “कौन आ गया!”
सार्थक दौड़कर वहां पहुंचा। “माफ़ कीजिए, माफ़ कीजिए! यह आमतौर पर ऐसा नहीं करता।”
लड़की ने ऊपर देखा। उसकी आंखें – हल्की भूरी, मुस्कुराते हुए। “कोई बात नहीं। लीली को भी कोई दोस्त नहीं है।”
“लीली?” सार्थक ने पूछा।
“हाँ, मेरी पूडल,” लड़की ने कहा, “और आपका?”
“टैंगो,” सार्थक ने कहा, “मैं सार्थक हूँ।”
“मैं दिव्या,” उसने हाथ आगे बढ़ाया।
सार्थक ने हाथ मिलाया। दिव्या का हाथ नरम था, गर्म। हाथ मिलाते ही सार्थक को एक अजीब सी झनझनाहट महसूस हुई।
“आप यहां रोज़ आते हैं?” दिव्या ने पूछा।
“हाँ, 6 बजे,” सार्थक ने कहा।
“मैं भी,” दिव्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “कल फिर मिलेंगे?”
“हाँ,” सार्थक ने कहा, और उसे लगा कि शायद पार्क जाना अब और आसान हो जाएगा। पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
भाग 2: रोज़ की मुलाकात
अगले हफ्ते। हर शाम 6 बजे। टैंगो अब सोता नहीं था, वह बेताब होकर इंतज़ार करता था। और सार्थक भी।
वो एक-दूसरे से बातें करने लगे थे। नौकरी, शहर, खाना, फिल्में। धीरे-धीरे निजी बातें।
“आप अकेले रहते हैं?” एक दिन दिव्या ने पूछा।
“हाँ,” सार्थक ने कहा, “आप?”
“मैं भी,” दिव्या ने कहा, “मेरे पैरेंट्स दूसरे शहर में हैं।”
“बॉयफ्रेंड?” सार्थक ने हिम्मत करके पूछा।
“नहीं,” दिव्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “आप?”
“नहीं,” सार्थक ने कहा।
खामोशी। फिर दिव्या ने कहा, “क्या आप कभी… क्या आप मुझे कॉफी के लिए…”
“हाँ!” सार्थक ने तुरंत कहा, फिर शर्माते हुए, “मतलब, हाँ, क्यों नहीं?”
“कल शाम?” दिव्या ने पूछा।
“ठीक है,” सार्थक ने कहा। पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
टैंगो और लीली एक-दूसरे के साथ खेल रहे थे। सार्थक और दिव्या एक-दूसरे को देख रहे थे।
भाग 3: पहली डेट और पहला चुंबन
कल शाम। पार्क के पास एक छोटा कैफे। सार्थक पहले से वहां था। सफेद शर्ट, नीली जींस।
दिव्या आई – पीली ड्रेस, बाल खुले, हल्का मेकअप।
“आप… आप बहुत सुंदर लग रही हैं,” सार्थक ने खड़े होकर कहा।
“शुक्रिया,” दिव्या ने मुस्कुराते हुए कहा।
कॉफी आई। बातें हुईं। फिर दिव्या ने कहा, “मुझे पता है कि टैंगो उस दिन क्यों दौड़ा था।”
“क्यों?” सार्थक ने पूछा।
“क्योंकि उसे लीली पसंद आ गई थी,” दिव्या ने कहा, “और शायद… शायद उसे पता था कि मुझे भी आप पसंद आ जाएंगे।”
सार्थक ने उसे देखा। दिव्या की आंखों में कुछ था। एक चमक, एक इंतज़ार।
“दिव्या… मैं…”
“हाँ?” दिव्या ने पूछा।
“क्या मैं आपको चूम सकता हूँ?”
दिव्या ने जवाब नहीं दिया। बस थोड़ा आगे झुकी।
सार्थक ने अपने हाथ उसके चेहरे पर रखे और धीरे से उसके होंठों पर चुंबन किया। हल्का, पहला, शर्मीला। फिर दूसरा – गहरा, लंबा।
“उम्म्ह…” दिव्या ने हल्की सी आवाज़ निकाली। पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
“क्या हुआ?” सार्थक ने पूछा।
“कुछ नहीं,” दिव्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “बस… बहुत अच्छा लग रहा है।”
भाग 4: सार्थक के अपार्टमेंट में
अगली शाम। इस बार सार्थक ने कहा, “क्या आप मेरे घर आना चाहेंगी? मैं खाना बनाता हूँ।”
दिव्या आई। सार्थक का अपार्टमेंट छोटा था लेकिन साफ-सुथरा। टैंगो और लीली बालकनी में खेल रहे थे।
खाना खाया। वाइन पी। फिर सोफे पर बैठे।
“दिव्या,” सार्थक ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूँ… मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया।”
“क्या?” दिव्या ने पूछा।
“यह… यह जल्दी हुआ है। लेकिन मैं… मैं आपसे प्यार करने लगा हूँ।”
दिव्या ने उसे देखा। फिर उठी, और उसकी गोद में बैठ गई। पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
“मैं भी,” दिव्या ने कहा, “मैं भी पागल हो रही हूँ आपके लिए।”
सार्थक ने उसे कसकर पकड़ा। उसके हाथ उसकी पीठ पर थे, फिर नीचे सरके। दिव्या ने पीली ड्रेस पहनी थी, पतली सी।
“मैं… मैं आपको छू सकता हूँ?” सार्थक ने पूछा।
“हाँ,” दिव्या ने कहा, “मैं चाहती हूँ।”
सार्थक ने अपने हाथ उसकी ड्रेस के नीचे डाले। उसकी पीठ चिकनी थी, गर्म। हाथ ऊपर बढ़ा। दिव्या ने सांस रोक ली।
“आह…” दिव्या ने कहा जब उसका हाथ उसकी ब्रा के हुक पर पड़ा।
“क्या… क्या यह ठीक है?”
“हाँ… बस… धीरे से…”
सार्थक ने हुक खोला। ब्रा खुली। उसने अपने हाथ आगे ले जाकर उसके स्तनों को छुआ।
“ओह माय गॉड…” सार्थक ने कहा, “कितने नरम हैं…”
“आपके हाथ… ठंडे हैं…” दिव्या ने कहा।
“माफ़ कीजिए…”
“नहीं… अच्छा लग रहा है…”
सार्थक ने उसे उठाया और बेडरूम में ले गया।
भाग 5: कपड़े उतरते हैं
बेडरूम में। सार्थक ने लाइट डिम कर दी। पीली रोशनी।
दिव्या खड़ी थी। सार्थक ने उसके सामने खड़े होकर उसकी ड्रेस के कंधे से पट्टी नीचे की। एक, फिर दूसरा। ड्रेस नीचे सरकी। दिव्या ने थोड़ा हिलकर उसे पैरों से निकाला। पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
अब वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। सफेद रंग की।
“आप… आप बहुत सुंदर हैं,” सार्थक ने कहा।
“आप भी…” दिव्या ने शरमाते हुए कहा।
सार्थक ने अपनी शर्ट उतारी। उसकी छाती, उसका पेट। दिव्या ने अपने हाथ उस पर फेरे।
“आपके बाल…” दिव्या ने उसकी छाती के बालों को छुआ।
सार्थक ने दिव्या की ब्रा उतारी। उसके स्तन बाहर आए – गोल, भरे हुए, गुलाबी निप्पल।
“सुंदर…” सार्थक ने कहा।
उसने एक स्तन को हाथ में लिया, दूसरे को मुंह में लेकर चूसने लगा।
“आह… हाँ… ऐसे ही…” दिव्या ने सिर पीछे किया।
सार्थक ने नीचे हाथ बढ़ाया। दिव्या की पैंटी के ऊपर से उसकी योनी को छुआ। गीली थी।
“आप… आप पहले से ही…” सार्थक ने कहा।
“हाँ,” दिव्या ने शरमाते हुए कहा, “मैं बहुत उत्तेजित हूँ…”
सार्थक ने उसकी पैंटी नीचे की। दिव्या की योनी सामने आई – थोड़ी घनी झांटें, गुलाबी, गीली।
“खूबसूरत…” सार्थक ने कहा।
दिव्या ने उसकी जींस खोली। अंडरवियर के ऊपर से उसका लिंड कठोर था, बड़ा।
“वाह…” दिव्या ने कहा।
भाग 6: पहली चुदाई
सार्थक ने दिव्या को बिस्तर पर लिटाया। वह उसके पैरों के बीच आया। उसने अपना अंडरवियर उतारा। लिंड बाहर आया – लंबा, मोटा, नसों से भरा हुआ। पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
“क्या… क्या यह दर्द देगा?” दिव्या ने पूछा।
“मैं धीरे से करूंगा,” सार्थक ने कहा।
उसने लिंड को उसकी योनी पर रखा। गीला, गर्म।
“धीरे…” दिव्या ने कहा।
सार्थक ने धीरे से दबाया। टॉप अंदर गया।
“उह्ह…” दोनों ने एक साथ कहा।
थोड़ा और… और अंदर… दिव्या की योनी बहुत तंग थी।
“आह… बड़ा है…” दिव्या ने कहा।
थोड़ा और… पूरा अंदर।
“भर गई…” दिव्या ने कहा, “पूरी…”
सार्थक ने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे।
“आह… हाँ… ऐसे ही…” दिव्या ने कहा।
“आप… आप इतनी तंग हैं…” सार्थक ने कहा।
“आपका… आपका लिंड… बहुत अच्छा है…” दिव्या ने कहा।
सार्थक की गति बढ़ गई। वह अब तेज़ी से धक्के लगा रहा था।
“और तेज़… और तेज़…” दिव्या ने कहा, “उई… आह… ओह माय गॉड…”
“आप… आप बहुत अच्छी हैं…” सार्थक ने कहा।
“फक मी… तेज़ फक मी…” दिव्या ने कहा, “मेरी चूत… मेरी चूत को फाड़ दो…”
सार्थक ने पूरी ताकत लगा दी। बिस्तर की चरपराहट, उनकी आवाज़ें।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” दिव्या ने कहा।
“मैं भी…” सार्थक ने कहा।
“अंदर… अंदर ही… प्लीज़…”
दोनों एक साथ झड़ गए। सार्थक की गर्म तरल दिव्या की योनी में भर गई।
भाग 7: दूसरा दौर – दिव्या की गांड
कुछ देर बाद। दोनों एक-दूसरे में लिपटे हुए थे।
“सार्थक,” दिव्या ने कहा।
“हाँ?”
“मैं… मैं कुछ और चाहती हूँ,” दिव्या ने शरमाते हुए कहा। पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
“क्या?”
“मैंने कभी… पीछे से नहीं किया,” दिव्या ने कहा, “लेकिन आपके साथ… मैं चाहती हूँ…”
सार्थक ने उसे देखा। “क्या… क्या यह दर्द नहीं देगा?”
“थोड़ा… लेकिन आप धीरे से करिएगा…”
दिव्या ने पेट के बल लेट गई। सार्थक ने उसकी गांड पर थूक लगाया, फिर उंगली से फैलाया।
“उह्ह…” दिव्या ने कहा।
सार्थक ने अपने लिंड पर तेल लगाया। फिर टॉप को उसकी गांड पर रखा।
“धीरे…” दिव्या ने कहा।
सार्थक ने धीरे से दबाया। टॉप अंदर गया।
“आह्ह… बड़ा है…” दिव्या ने कहा।
थोड़ा-थोड़ा करके, पूरा अंदर।
“भर गई…” दिव्या ने कहा।
सार्थक ने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। फिर तेज़।
“ओह्ह… यह… यह अलग है…” दिव्या ने कहा, “और तेज़… मेरी गांड मारो… तेज़…”
“उई… आह… ओह माय गॉड…” दिव्या ने कहा।
“मैं… मैं झड़ने वाला हूँ…”
“अंदर… मेरी गांड में ही…”
सार्थक ने एक ज़ोरदार धक्का लगाया और झड़ गया।
भाग 8: हर शाम की वासना
अब हर शाम। पहले पार्क – टैंगो और लीली मिलते। फिर सार्थक और दिव्या – कभी उसके घर, कभी उसके घर।
वो हर जगह चुदते – सोफे पर, बाथरूम में, रसोई में, बालकनी में। पार्क में पटायी लड़की की चुदाई
दिव्या की आवाज़ें – “उई… आह… ओह माय गॉड… तेज़… और तेज़… फक मी… मेरी चूत फाड़ दो…”
और सार्थक – “आप… आप इतनी अच्छी हैं… मैं आपसे प्यार करता हूँ…”
एक महीने बाद दिव्या ने कहा, “सार्थक, क्या हम… क्या हम एक साथ रह सकते हैं?”
“हाँ,” सार्थक ने कहा, “मैं भी यही चाहता था।”
अब वो एक साथ रहते हैं। टैंगो और लीली भी। और हर शाम, जब वो पार्क जाते हैं, वो मुस्कुराते हैं – क्योंकि उन्हें पता है कि रात क्या लाएगी।
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