मेरा नाम राजवीर है और मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ। मेरी हाइट 6 फुट है और मैं दिखने में आकर्षक हूँ। मैं एक फैशन फोटोग्राफर के रूप में काम करता हूँ। मेरी फेसबुक फ्रेंड बनी चुडक्क भाभी और मिले मुझे मजे ।
यह कहानी तब की है जब मैंने एक सोशल नेटवर्किंग ऐप पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी। उस पर मुझे कई मैसेज मिले, लेकिन एक महिला का मैसेज मेरा ध्यान आकर्षित करने में सफल रहा।
उसकी उम्र 32 साल थी। उसका नाम (बदला हुआ) अनन्या था। अनन्या से मेरी बात शुरू हुई तो पता चला कि वह एक अनुभवी महिला है जो अपने जीवन में कुछ रोमांच ढूंढ रही है। उसका पति व्यस्त रहता था और वह अकेलेपन का अनुभव कर रही थी।
फेसबुक फ्रेंड बनी चुदक्कड़ भाभी / हिंदी सेक्स स्टोरी
मैं उससे और भी इधर-उधर की बातें करने लगा। हमारी बातें गहरी होती गईं और हम एक-दूसरे के करीब आते गए। आखिरकार हमने मिलने का फैसला किया।
हमारी मुलाकात तीन दिन बाद तय हुई। मैं तय समय पर उसके घर पहुंच गया।
मैंने दरवाजा खटखटाया तो उसने मुझे अंदर बुलाया और कहा- “कृपया पहले अपनी आंखों पर पट्टी बांध लें, मैं आपका स्वागत करना चाहती हूँ एक खास तरीके से।”
मुझे यह थोड़ा अजीब लगा, लेकिन मैंने उसकी बात मानी और आंखों पर पट्टी बांध ली।
कुछ देर बाद उसने दरवाजा खोला और मेरा हाथ पकड़कर अंदर ले गई। फिर उसने मुझे आराम कुर्सी पर बिठाया और कहा- “आप यहां बैठिए, मैं दो मिनट में आ रही हूँ।”
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मैं अपनी आंखों पर पट्टी बांधे वहां बैठा रहा। कुछ देर बाद वह आई।
उसके आते ही एक मनमोहक खुशबू पूरे कमरे में फैल गई। इतनी सुंदर खुशबू थी कि मैं आज तक उसे नहीं भूल पाया।
उसकी आवाज इतनी मधुर थी कि मानो कोई स्वर्ग की अप्सरा बोल रही हो।
वह मेरे पास आई और मेरे हाथों को अपने हाथों में लेकर कहा- “आप यह पट्टी तब तक न खोलें, जब तक मैं न कहूँ।”
इतनी प्यारी आवाज और खुशबू से मैं उसे मना नहीं कर पाया। वह मेरे ऊपर झुककर मुझे गले से लगाने लगी।
कभी होंठों पर तो कभी गर्दन पर। उसके स्पर्श से मुझे एक अलग ही अनुभूति हो रही थी।
फिर उसने धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मैं बस उसकी पतली कमर को पकड़े रहा। अब तक मेरे शरीर में एक अलग ही उत्साह भर गया था।
फिर उसने मेरे शरीर पर चॉकलेट सॉस लगाया और उसे चाटने लगी।
उसकी जीभ की गर्मी से मेरा शरीर एकदम से ऐसा उत्तेजित हो गया मानो अभी ही विस्फोट हो जाए।
पकड़कर अपनी स्तनों पर रखवाए, तब मुझे पता चला कि वह पहले से ही बिना कपड़ों के थी। उसके स्तनों का साइज़ 36 इंच का होगा। एकदम नर्म और मुलायम स्तन थे।
मेरे हाथों में जितना दम था, उतनी ताकत से मैं उसके स्तनों को दबाने लगा। उसके मुँह से मादक आवाजें आने लगीं।
वह जोर-जोर से मुझे चूमने लगी। फिर उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे दोनों हाथों को बिस्तर से बांध दिया। उसके बाद उसने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी।
उसकी चूत मेरे मुँह पर आते ही मैं पागल सा हो गया। चूत से मस्त खुशबू के साथ-साथ रस भी निकल रहा था।
मैंने पूरी जीभ अन्दर डालकर चाटना शुरू कर दिया। जिससे वह एकदम पागलों की तरह अपनी चूत मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी।
करीब 15 मिनट चूत चाटने के बाद उसका पूरा रस मेरे मुँह पर आ गया।
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फिर वह वापस मेरे लंड को पागलों की तरह चूसने लगी। वह इतनी तेजी से चूस रही थी मानो मेरा लंड खा ही जाएगी।
दस मिनट लंड चूसने के बाद वह मेरे लंड पर बैठ गई। मेरे लंड ने चूत में घुसने में एक मिनट की भी देरी नहीं की और सीधा जड़ तक घुसता चला गया।
उसकी आह निकल गई और वह उठने को हुई मगर तभी मैंने उसकी कमर पकड़कर उसे अपने लंड पर दबाए रखा।
उसकी चूत एकदम तंग थी और वह पहले तो दर्द से तड़प रही थी। पर कुछ देर में ही लंड से उसकी चूत की दोस्ती हो गई और अब वह पागलों की तरह मेरे लंड पर कूद रही थी। उसकी मादक आवाजों से पूरा कमरा गूंज रहा था।
करीब 15 मिनट के संभोग के बाद मेरा वीर्य उसकी चूत में निकल गया।
वह मेरे ऊपर लेट गई और बोली- “अभी आंख की पट्टी मत खोलना, अभी आगे की रोमांच बाकी है।”
कुछ देर बाद वह लंड से उठी और एक शराब की बोतल ले आई।
उसने मुझसे पूछा- “आप शराब पीते हैं?” मैंने ‘हां’ बोल दिया। तो उसने मुझे एक मजबूत ड्रिंक का पैग बनाकर अपने हाथों से मुझे पिलाया।
अब उसने सिगरेट जलाई और पीने लगी, उसका धुआं मेरे मुँह पर देने लगी। मुझे एकदम नशा होने लगा।
फिर वह बोली- “आज तक आपने इस तरीके से शराब नहीं पी होगी!” मैंने कहा- “किस तरीके से?”
मेरे इतना बोलते ही वह मेरे ऊपर आ गई और अपनी चूत मेरे मुँह पर रखकर बोली- “लो इस तरीके से … चाटो मेरे राजा।”
मैं उसकी चूत चाटने लगा और वह हल्के हल्के से शराब की धार बनाकर अपनी चूत पर गिराने लगी, जिससे चूत को चाटने में और मजा आने लगा।
दोस्तो, इस तरह चूत चाटने में जो मजा है … वह मजा सीधे शराब में नहीं है … और न ही बिना शराब की चूत चाटने में है।
सच कह रहा हूँ … उस वक्त मैं अपने होश में नहीं था।
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करीब 20 मिनट तक उसकी चूत चाटने के बाद मैंने मुँह हटाया तो वह उठी और मेरे लंड को पकड़कर उस पर शराब गिरा-गिराकर चूसने लगी। मेरा लंड जल्दी ही खड़ा होने लगा।
करीब 15 मिनट लंड चूसने के बाद वह मेरे करीब लेट गई और बोली- “राजा, तेरे लंड में तो दम बहुत है!”
मैं यहां पागल हो रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि वह तो मेरे पूरे मजे ले रही है और मैं बस लेटा हुआ हूँ!
यही बात मैंने उससे कही। तो उसने मेरे ऊपर आकर अपने पैरों से मेरे लंड को रगड़ना शुरू कर दिया।
वह लंड से खेलने के साथ-साथ मुझे चूम भी रही थी; कभी चूमती, तो कभी शराब टपका कर उठती और लंड चूसने लगती। फिर वह मुँह में शराब डालकर मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर पागलों की तरह चूसने लगी।
वह इतनी मस्त चूस रही थी कि मुझसे रुका ही नहीं जा रहा था। वह मेरे पूरे लंड को अपने गले तक आराम से ले रही थी।
काफी देर तक लंड चूसने के बाद मेरा लंड वीर्य छोड़ने वाला था।
मैं बोला- “मेरा वीर्य निकलने वाला है!” यह सुनकर तो वह और जोर-जोर से चूसने लगी।
तभी मेरा पूरा वीर्य उसके मुँह में निकल गया। वह पूरा वीर्य पी गई और उसने लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया।
अब वह उठकर अलग हुई और वापस से एक और सिगरेट जलाकर मेरे ऊपर आ गई। उसने चूत मुँह पर रख दी।
मैं उसकी चूत चाटने लगा।
कुछ देर बाद उसने मेरे मुँह में ही मूत्र कर दिया। मैंने उसका पूरा मूत्र पी लिया।
इससे वह बहुत खुश हुई और बोली- “आज तक किसी ने मेरा मूत्र नहीं पिया था। आपने पिया, इसका आपको इनाम मिलेगा!”
इतना बोलते ही उसने मेरा हाथ खोल दिए। मैंने उसे जोर से पकड़कर बिस्तर पर लिटाया और चूमने लगा।
उसके बड़े-बड़े स्तन दबाने और चूसने लगा।
तभी मैंने उसकी चूत में अपनी उंगली डाली और जोर-जोर से हिलाने लगा। वह पागलों की तरह मुझे चूमने लगी। मैं भी उससे चूमने लगा और जोर-जोर से उंगली करने लगा।
वह मेरा लंड पकड़कर हिलाने लगी, जिससे मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा।
तभी मैं अपनी उंगली निकालकर उसकी गांड की तरफ ले गया। उसकी गांड करीब 40 इंच की रही होगी।
तभी उसने मेरे कान में धीरे से कहा- “अपनी उंगली मेरी गांड में डालो!” मैंने झट से उंगली गांड में घुसेड़ दी।
वह आह करके मीठी आवाज में बोली- “मेरी गांड अब तक कुंवारी है और आज मेरा मूत्र पीने के इनाम में मैं तुमको अपनी गांड का छेद चोदने दे रही हूँ। पर तुम आराम से करना … फाड़ न देना।” मैंने कहा- “जान, यदि आप मेरी आंखों से पट्टी नहीं खोलोगी तो आपको भी मजा नहीं आएगा।”
वह हंस कर बोली- “ओके खोल लो, तुम्हारे हाथ खुले तो हैं!” तब मुझे याद आया और मैंने अपने हाथों से अपनी पट्टी खोल दी।
आह … मेरे सामने वह मस्त अंगड़ाई लेती हुई अपने स्तन हिला कर मुझे मादक नजरों से देख रही थी।
उसके होंठों में सिगरेट दबी थी। मेरी कल्पना के अनुरूप वह मेरे ऊपर बैठी थी।
मैंने उसके स्तन दबाए और उसको अपने लंड पर सरका लिया। वह भी आराम से लंड पर आ गई लेकिन उसने लंड को चूत में नहीं लिया।
मैंने उसके हाथ से सिगरेट लेकर कश भरा और मस्ती से उसे निहारने लगा। अब वह झुक कर मुझे चूमने लगी।
मैंने एक हाथ की उंगली से उसकी गांड में थूक लगाना शुरू किया और उंगली से गांड को ढीली करने लगा।
वह बोली- “सच में तुम मस्त पुरुष हो!” मैंने कहा- “गांड मारूँगा तब कहना कि मैं कैसा हूँ!”
वह हंस दी- “मुझे मालूम है कि गांड में दर्द होगा, इसलिए मैंने दवा लगाई हुई है।” मैंने पूछा- “कैसी दवा!”
वह बोली- “डॉक्टरों वाली .. जब वे किसी मरीज की गांड में उंगली करते हैं न तो मरीज को दर्द न हो … ऐसी दवा लगाते हैं। वही दवा मैंने लगाई हुई है।”
यह सुनते ही मैंने दो उंगलियां उसकी गांड में सरका दीं।
उसे अहसास तो हुआ कि गांड में दो उंगलियां घुस गई हैं लेकिन दर्द नहीं हुआ।
कुछ देर दो उंगलियों से गांड ढीली करने के बाद मैंने उसे अपने लंड पर गांड सैट करने के लिए कहा।
वह हल्की सी उठी और उसने अपनी गांड का छेद मेरे लंड पर लगा दिया।
उसी पल मैंने उसे अपने लंड पर दबा दिया तो लंड का सुपारा गांड के पहले छल्ले को फैला कर अन्दर घुस गया।
वह चीख पड़ी, पर जैसे ही मैंने उसे चूमा, वह शांत हो गई। मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड उसकी गांड में घुसा दिया।
अब मैंने उसे अपने ऊपर से हटाया और उसे कुतिया की तरह घोड़ी बना दिया। फिर मैंने पीछे से उसकी गांड में लंड डालकर धक्के मारने शुरू कर दिए।
वह पूरे जोश में चिल्ला रही थी- “और जोर से… और तेज… फाड़ दे मेरी गांड… आज तुमने मेरी हर इच्छा पूरी कर दी।”
मैं भी पूरे जोश में उसकी गांड मार रहा था। करीब 20 मिनट तक उसकी गांड मारने के बाद मेरा वीर्य उसकी गांड में ही निकल गया
हम दोनों पसीने से तर-ब-तर हो चुके थे। वह मेरे ऊपर गिर पड़ी और हांफने लगी।
कुछ देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे। फिर वह उठी और बाथरूम से एक गीला तौलिया लेकर आई। उसने मेरे शरीर को धीरे-धीरे साफ किया और फिर खुद को भी साफ किया।
जब वह वापस आई तो मैंने उसे अपनी बांहों में खींच लिया और उसके होंठों पर जोरदार चुंबन लिया।
“यह तुम्हारा इनाम है,” मैंने कहा।
वह मुस्कुराई और बोली, “मुझे तो बहुत मजा आया। क्या हम फिर कभी मिल सकते हैं?”
मैंने उसके बालों में उंगलियां फेरते हुए कहा, “ज़रूर। यह तो बस शुरुआत थी।”
उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और बोली, “मुझे तुम्हारा यह बहुत पसंद है। यह तो मुझे रोज़ चाहिए।”
मैं हंस पड़ा और उसे अपने सीने से लगा लिया।
फिर हमने एक-दूसरे को कपड़े पहनाए और बैठकर बातें करने लगे। वह बताने लगी कि उसका पति हमेशा व्यस्त रहता है और उसे शारीरिक संतुष्टि नहीं मिल पाती।
मैंने उसे समझाया कि वह खुद को अकेला न समझे और मैं हमेशा उसके लिए उपलब्ध रहूँगा।
फिर हमने एक-दूसरे को अलविदा कहा और मैं वहाँ से चला आया।
उस दिन के बाद, हम अक्सर मिलते रहे। हमने कई जगहों पर सेक्स किया – होटल, उसकी दोस्त के घर, और यहाँ तक कि मेरे स्टूडियो में भी।
हमारे रिश्ते में रोमांस और जुनून दोनों थे। वह मुझे अपनी हर इच्छा बताती थी और मैं उसे पूरा करता था।
एक दिन उसने मुझसे कहा कि वह मेरे बच्चे की माँ बनना चाहती है। मैंने उसकी इच्छा पूरी की और उसे गर्भवती कर दिया।
आज हमारा एक खूबसूरत बेटा है और हम एक सुखी परिवार की तरह रहते हैं।
यह कहानी मेरी और अनन्या की सच्ची प्रेम कहानी है जिसने मुझे जीवन का असली मतलब सिखाया।
Bhabhi ki aur chudai padhne k liye :- पड़ोसन भाभी के साथ सेक्स