देवर-भाभी की सुहागरात : गर्म रातें
मेरा नाम रोहित है और मैं 24 साल का जवान लड़का हूं। मेरे बड़े भैया अमित की शादी हो चुकी थी। तुम्हें बताना चाहूंगा देवर भाभी की सुहागरात कैसी मानी । भाभी का नाम प्रिया था, उम्र 22 साल, रंग गोरा, आंखें काजल की तरह काली, और बदन ऐसा कि कोई भी देखकर मचल जाए। उनकी हाइट 5’6″ थी, फिगर 36-28-38 का। जब वो चलती थीं तो कमर मटकाती थीं, ऐसे जैसे कोई हिरण चल रहा हो।
भैया की शादी के बाद वो दोनों अलग कमरे में रहने लगे। मैं, मेरे माता-पिता और दादी नीचे वाले हिस्से में रहते थे। ऊपर वाला हिस्सा भैया-भाभी के लिए था। लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिखा था।
शादी के ठीक एक महीने बाद भैया को कोलकाता में नौकरी का ऑफर आया। वो 6 महीने के लिए वहीं चले गए। अब घर में मैं, माता-पिता, दादी और भाभी थीं। भाभी अकेली ऊपर वाले कमरे में रहती थीं।
देवर भाभी की चुदाई और हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम
मैं कॉलेज का छात्र था। दिन भर कॉलेज जाता, शाम को घर आता। भाभी से मेरी बातचीत कम ही होती थी। लेकिन जब भी वो साड़ी पहनकर घर में घूमती, मेरी नजरें उन पर ही टिकी रहतीं। उनके गोरे गोरे पैर, कमर से साड़ी का पल्लू गिरता हुआ, और वो गहरे गले वाले ब्लाउज जिनसे उनका क्लीवेज झलकता था… मेरी सांसें उखड़ जातीं।
एक दिन की बात है। मैं कॉलेज से आया तो देखा कि मां और दादी किसी रिश्तेदारी में गए थे। पापा ऑफिस गए थे। घर में सिर्फ भाभी थीं। मैं सीधे ऊपर अपने कमरे में गया। थोड़ी देर बाद नहाने के लिए बाथरूम गया। बाथरूम का दरवाज़ा हल्का सा खुला था। मैंने धक्का दिया तो मेरे होश उड़ गए।
भाभी नहा रही थीं। शावर चालू था और वो अपने कपड़े उतार रही थीं। उनकी पीठ मेरी तरफ थी। साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट… एक-एक करके सब उतर रहे थे। फिर वो ब्रा और पैंटी भी उतार दीं। मैं सांस भी नहीं ले पा रहा था। उनकी गोरी पीठ, कमर का वो गोलापन, और नीचे से उनकी गांड का आकार… मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।
मैं वहीं खड़ा-खड़ा उन्हें देखता रहा। भाभी शावर के नीचे खड़ी हो गईं। पानी उनके बदन पर बह रहा था। उन्होंने अपने हाथों से अपने बदन पर साबुन लगाना शुरू किया। उनके हाथ उनके बूब्स पर घूम रहे थे। मैं दीवार से सटकर खड़ा था, मेरा लंड जींस में तड़प रहा था।
देवर भाभी की चुदाई और हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम
अचानक भाभी ने पीछे मुड़कर देखा। हम दोनों की आंखें मिलीं। वो चीखने ही वाली थीं कि मैंने तुरंत मुड़कर वहां से भाग लिया। मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई थी। मैं अपने कमरे में जाकर बैठ गया। क्या होगा अब? भाभी मुझे बताएंगी सबको? मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था।
आधे घंटे बाद भाभी मेरे कमरे में आईं। उन्होंने सलवार-कमीज पहनी थी। गीले बाल खुले थे। मैं उठकर खड़ा हो गया, सिर झुकाए।
“रोहित, तुमने वो देख लिया?” भाभी की आवाज़ थोड़ी सख्त थी।
“भाभी, मुझे माफ कर दो… मैं… मैं…” मैं कांपते हुए बोला।
भाभी ने मेरा चेहरा उठाया। उनकी आंखों में गुस्सा नहीं, बल्कि एक अजीब सी शर्म थी।
“कोई बात नहीं। लेकिन अगली बार दरवाज़ा खटखटाना।” वो मुस्कुराईं।
मैं हैरान था। वो इतनी कूल कैसे हो सकती हैं? लेकिन उस दिन के बाद मेरे और भाभी के बीच की दूरी कम होने लगी। वो मुझसे ज़्यादा बात करने लगीं, मेरे लिए खाना बनाने लगीं, मेरे कॉलेज के बारे में पूछने लगीं।
एक हफ्ते बाद मेरे माता-पिता और दादी एक माता-पिता के यहां शादी में जाने वाले थे। वो तीन दिन के लिए बाहर जा रहे थे। घर में सिर्फ मैं और भाभी रहने वाले थे।
देवर भाभी की चुदाई और हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम
“रोहित, तुम्हारी देखभाल करने के लिए मैं हूं। कोई चिंता मत करो,” भाभी ने मुझसे कहा।
मैंने सोचा, तीन दिन अकेले घर में भाभी के साथ… मेरा दिल बेसब्र हो उठा।
रात की शुरुआत
पहला दिन शांति से बीत गया। रात को मैं अपने कमरे में था। लगभग 11 बजे थे। मैं पढ़ाई कर रहा था तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई।
“रोहित, सो गए?” भाभी की आवाज़ आई।
“नहीं भाभी, आइए।”
भाभी अंदर आईं। उन्होंने नाइटी पहनी थी। हल्की गुलाबी रंग की। वो मेरे बगल में बैठ गईं।
“अकेले अकेले पढ़ाई कर रहे हो? आज मुझे नींद नहीं आ रही। तुमसे बात करने आई,” भाभी ने कहा।
“हां भाभी, मैं भी अकेला बोर हो रहा था,” मैंने कहा।
हम दोनों बातें करने लगे। पहले तो सामान्य बातें हुईं – कॉलेज, दोस्त, फिल्में। फिर बात धीरे-धीरे व्यक्तिगत होने लगी।
“रोहित, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?” भाभी ने पूछा।
“नहीं भाभी, अभी तक कोई नहीं मिली,” मैंने शर्माते हुए कहा।
“क्यों? इतने हैंडसम हो तुम। कोई लड़की तुम्हें पसंद नहीं करती?”
“पता नहीं भाभी… शायद मुझे लड़कियों से बात करना नहीं आता,” मैंने सच बताया।
भाभी ने मेरे सिर पर हाथ फेरा। “अरे पगले, तुम बहुत अच्छे हो। कोई भी लड़की तुम्हें पसंद करेगी।”
उनका हाथ मेरे सिर पर था, मैं उनकी आंखों में देख रहा था। वो भी मुझे देख रही थीं। अचानक वो शर्मा गईं और नजरें झुका लीं।
“रोहित, वो… जब तुमने मुझे नहाते हुए देखा था… तुम्हें कैसा लगा?” भाभी ने धीरे से पूछा।
मेरे कानों में जैसे बम फट गया। मैं क्या बोलूं? सच बोलूं या झूठ?
“भाभी, मुझे… बहुत अच्छा लगा। आप बहुत खूबसूरत हैं,” मैंने हिम्मत करके कहा।
देवर भाभी की चुदाई और हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम
भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। “सचमुच?”
“हां भाभी, मैं सच कह रहा हूं। आप बहुत सेक्सी हैं,” मैंने हिम्मत बटोरी।
भाभी ने अपना हाथ मेरे चेहरे पर रखा। “तुम्हें मेरी बॉडी पसंद आई?”
“हां भाभी,” मैंने कहा।
“क्या पसंद आया सबसे ज़्यादा?” भाभी ने पूछा।
मैं घबरा गया। ये सवाब क्या था? “भाभी… आपकी… आपकी पूरी बॉडी ही…”
भाभी मुस्कुराईं। “रोहित, मैं तुमसे एक बात कहूं? तुम मुझे अपनी भाभी मत समझो। आज मैं तुम्हारी दोस्त हूं। और दोस्तों के बीच सब कुछ बांटा जा सकता है।”
मैं समझ नहीं पा रहा था कि ये क्या हो रहा है। भाभी ने अपनी नाइटी का बटन खोलना शुरू किया। एक, दो, तीन… मेरी सांसें थम गईं। नाइटी के अंदर वो ब्रा नहीं पहने थीं। उनके बूब्स का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा। गोरे, मुलायम, और बड़े-बड़े।
देवर भाभी की चुदाई और हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम
“रोहित, मैं अकेली रहती हूं। तुम्हारे भैया 6 महीने से बाहर हैं। मेरी बॉडी तड़प रही है। क्या तुम मेरी मदद करोगे?” भाभी ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।
मैं कांप रहा था। ये सपना तो नहीं था? “भाभी, आप… आप ये क्या कह रही हैं?”
“मैं ये कह रही हूं कि आज रात… हम दोनों एक-दूसरे की प्यास बुझाएंगे। ये हमारा राज़ रहेगा। कोई नहीं जानेगा,” भाभी ने कहा और पूरी नाइटी उतार दी।
मेरे सामने भाभी सिर्फ पैंटी में खड़ी थीं। उनके बूब्स बिल्कुल साफ दिख रहे थे। गोरे, गोल, और निप्पल गुलाबी रंग के। मेरा लंड जींस फाड़ने को तैयार था।
“भाभी…” मैं कुछ बोल नहीं पाया।
भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने बूब्स पर रख दिया। “छुओ मुझे, रोहित। मुझे महसूस करो।”
मैंने धीरे से उनके बूब्स को सहलाया। क्या मुलायम थे! जैसे रूई के गोले हों। भाभी की आंखें बंद हो गईं और वो आहें भरने लगीं।
“और ज़ोर से दबाओ… हां… ऐसे ही…” भाभी कराहीं।
मैं उनके बूब्स दबाने लगा। फिर मैंने उनके निप्पलों को मसलना शुरू किया। वो कांप उठीं।
“रोहित, मेरे पैंटी भी उतार दो,” भाभी ने कहा।
मैंने नीचे झुककर उनकी पैंटी खींची। वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थीं। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे। गुलाबी चूत की दरार मुझे मादक नजर आ रही थी।
“अब तुम्हारी बारी,” भाभी ने कहा और मेरे कपड़े उतारने लगीं।
मेरा शर्ट, फिर जींस, फिर अंडरवियर… जब मेरा 8 इंच का लंड बाहर आया तो भाभी की आंखें चौड़ी हो गईं।
“वाह! तुम्हारा तो बहुत बड़ा है। तुम्हारे भैया से भी बड़ा लग रहा है,” भाभी ने कहा और मेरे लंड को हाथ में ले लिया।
देवर भाभी की चुदाई और हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम
उनके हाथ की स्पर्श से मैं सिहर उठा। उन्होंने मेरे लंड को सहलाना शुरू किया। ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे…
“भाभी…” मैं मस्ती में कराहा।
“आज रात मैं तुम्हारी हूं, रोहित। पूरी रात,” भाभी ने कहा और मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया।
देवर-भाभी की सुहागरात
भाभी ने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। क्या गर्मी थी उनके मुंह में! उनकी जीभ मेरे लंड की नसों पर घूम रही थी। मैं उनके सिर को पकड़कर अपना लंड उनके मुंह में आगे-पीछे करने लगा।
देवर भाभी की चुदाई और हिंदी सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम
“चूसो भाभी… और ज़ोर से चूसो…” मैं कराह रहा था।
भाभी पूरी मेहनत से मेरा लंड चूस रही थीं। उनका एक हाथ मेरे अंडकोषों को सहला रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग में हूं।
5 मिनट बाद भाभी ने मेरा लंड मुंह से बाहर निकाला। “अब मेरी बारी। मेरी चूत चाटो, रोहित।”
वो बिस्तर पर लेट गईं और पैर फैला दिए। मैं उनके पैरों के बीच बैठ गया। उनकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उनकी चूत पर फेरने लगा।
“ऊह्ह्ह… हां… ऐसे ही…” भाभी कराह उठीं।
मैं उनकी चूत के अंदर-बाहर जीभ करने लगा। उनका क्लिटोरिस मुझे दिखा। मैंने उसे अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू किया।
“अह्ह्ह… रोहित… बहुत मज़ा आ रहा है… हां… और ज़ोर से…” भाभी पागल हो रही थीं।
मैं 10 मिनट तक उनकी चूत चाटता रहा। वो दो बार झड़ चुकी थीं। उनकी चूत से पानी की धार बह रही थी।
“अब डालो अपना लंड… मुझे चोदो, रोहित… मैं तड़प रही हूं,” भाभी ने कहा।
मैंने उनके पैरों को अपने कंधों पर रखा और अपने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के मुहाने पर रखा। एक ज़ोर का धक्का दिया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
“उई मां… कितना मोटा है… अह्ह्ह…” भाभी चीखीं।
मैं रुक गया। “दर्द हो रहा है भाभी?”
देवर-भाभी की सुहागरात और हिंदी भाभी की सेक्स कहानी
“हां… थोड़ा… लेकिन रुको मत… धीरे-धीरे करो…” भाभी ने कहा।
मैंने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया। भाभी की चूत बहुत टाइट थी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
“अब तेज़ करो… हां… ऐसे ही… चोदो मुझे… अपनी भाभी को चोदो…” भाभी कह रही थीं।
मैंने स्पीड बढ़ा दी। तेज़-तेज़ धक्के लगाने लगा। चपाक-चपाक की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थीं।
“भाभी… आपकी चूत बहुत टाइट है…” मैंने कहा।
“तुम्हारा लंड भी बहुत मोटा है… तुम्हारे भैया का इतना मोटा नहीं है…” भाभी ने कहा।
ये सुनकर मैं और जोश में आ गया। मैंने उनके बूब्स पकड़े और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।
“ओह्ह्ह… हां… और तेज़… मारो… मेरी चूत फाड़ दो…” भाभी चिल्ला रही थीं।
मैं 15 मिनट तक उन्हें चोदता रहा। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उन्हें घुटनों के बल खड़ा होने को कहा।
“कुत्ती बन जाओ भाभी,” मैंने कहा।
देवर-भाभी की सुहागरात और हिंदी भाभी की सेक्स कहानी
भाभी मुस्कुराईं और डॉगी स्टाइल में हो गईं। उनकी गांड बहुत बड़ी और गोल थी। मैंने पीछे से अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया।
“अह्ह्ह… पीछे से और गहरा जा रहा है…” भाभी कराहीं।
मैंने उनकी कमर पकड़ी और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू किए। मेरे थाइ उनकी गांड से टकरा रहे थे। तप-तप की आवाज़ें आ रही थीं।
“चोदो… चोदो… और ज़ोर से… मैं झड़ने वाली हूं…” भाभी चीखीं।
मैंने स्पीड और बढ़ा दी। 2 मिनट बाद भाभी झड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया। मुझे भी झड़ने का मन हो रहा था।
“भाभी, मैं भी झड़ने वाला हूं…” मैंने कहा।
“अंदर ही छोड़ दो… मैं आज सेफ हूं…” भाभी ने कहा।
मैंने दो तेज़ धक्के मारे और अपना गरम वीर्य उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया। वो पूरी भर गई। मैं उनके ऊपर गिर गया।
देवर-भाभी की सुहागरात और हिंदी भाभी की सेक्स कहानी
हम दोनों 10 मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। फिर भाभी ने मुझे चूमा।
“रोहित, आज की रात हमारी सुहागरात थी। तुम्हारे भैया से मेरी सुहागरात इतनी मज़ेदार नहीं थी। तुमने मुझे असली मज़ा दिया,” भाभी ने कहा।
“भाभी, मैं भी यही सोच रहा था। ये रात मैं कभी नहीं भूलूंगा,” मैंने कहा।
“अभी तो रात बाकी है, मेरे देवर। तीन दिन हम अकेले हैं। और भी बहुत कुछ करना है,” भाभी ने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा।
मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था।
तीन दिन की मस्ती
पहली रात हमने तीन बार सेक्स किया। सुबह जब मेरी आंख खुली तो भाभी मेरे बगल में नंगी सो रही थीं। मैंने उनके बूब्स चूसे तो वो जाग गईं।
“सुबह-सुबह शैतानी?” भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा।
“भाभी, आप इतनी खूबसूरत हैं कि मैं रुक नहीं पाता,” मैंने कहा।
“नहाने चलें फिर नाश्ता करेंगे,” भाभी ने कहा।
हम दोनों बाथरूम में गए। शावर के नीचे हमने फिर से सेक्स किया। भाभी ने मुझे अपनी गांड मारने को कहा। मैंने उनकी गांड में अपना लंड डाला। वो पहले तो दर्द से चीखीं लेकिन फिर मज़े लेने लगीं।
“ओह्ह्ह… गांड में और गहरा… हां… मज़ा आ रहा है…” भाभी कराह रही थीं।
देवर-भाभी की सुहागरात और हिंदी भाभी की सेक्स कहानी
दूसरे दिन हमने घर की हर जगह सेक्स किया – किचन में, लिविंग रूम में, सीढ़ियों पर, और बालकनी में। रात को हमने रोल प्ले किया। भाभी ने नर्स की यूनिफॉर्म पहनी और मैं डॉक्टर बना। फिर भाभी टीचर बनीं और मैं स्टूडेंट।
“रोहित, तुमने होमवर्क क्यों नहीं किया?” भाभी ने सख्त अवाज़ में पूछा।
“सॉरी मैम, मैं बीमार था,” मैंने कहा।
“तो अब मैं तुम्हें सज़ा देती हूं,” भाभी ने कहा और मुझे अपनी चूत चटवाई।
तीसरे दिन हमने सबसे ज़्यादा मस्ती की। भाभी ने मुझे अपने सारे कपड़े उतारने को कहे और फिर खुद भी नंगी हो गईं। हमने पूरे घर में नंगे घूमना शुरू किया। दोपहर को हम छत पर गए। वहां हमने खुले आसमान के नीचे सेक्स किया।
“रोहित, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे हमारी दूसरी शादी हुई है,” भाभी ने कहा।
देवर-भाभी की सुहागरात और हिंदी भाभी की सेक्स कहानी
“हां भाभी, ये हमारी असली सुहागरात है,” मैंने कहा।
तीन दिन में मैंने भाभी को कम से कम 15 बार चोदा। हर पोज़िशन में – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, रिवर्स काउगर्ल, स्टैंडिंग, सिटिंग। हमने सब कुछ किया।
राज़ की रातें
माता-पिता के आने के बाद भी हमारा सिलसिला जारी रहा। जब भी मौका मिलता, हम एक-दूसरे को चोदते। भैया के आने से पहले हमने 50 से ज़्यादा बार सेक्स किया।
भैया आने के बाद भाभी उनके साथ रहने लगीं लेकिन वो मुझसे चुपके मिलती रहीं। जब भैया ऑफिस जाते तो हम दोनों घर में मस्ती करते।
देवर-भाभी की सुहागरात और हिंदी भाभी की सेक्स कहानी
एक दिन भाभी ने मुझे बताया कि वो प्रेग्नेंट हैं। मुझे समझ नहीं आया कि ये भैया का बच्चा है या मेरा।
“रोहित, डीएनए टेस्ट से पता चलेगा। लेकिन मैं चाहती हूं कि ये तुम्हारा बच्चा हो,” भाभी ने कहा।
मैं भी यही चाहता था। 9 महीने बाद जब बच्चा हुआ तो वो मेरे जैसा दिखता था। भैया को कुछ पता नहीं चला। उन्हें लगा कि ये उनका बेटा है।
आज भी, 5 साल बाद, मैं और भाभी चुपके मिलते हैं। हमारा राज़ आज भी कायम है। जब भी भैया बाहर जाते हैं, हम अपनी सुहागरात की यादें ताज़ा करते हैं।
मैं अपने पाठकों और कहानी पढ़ने और उस पर प्रतिक्रिया देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ। यदि आप अपनी कहानियाँ या टिप्पणियाँ साझा करना चाहते हैं, तो कृपया vikasgoel4952@gmail.com पर ईमेल करें या मुझसे संपर्क करें । मैं हमेशा आपकी टिप्पणियों का इंतजार करता हूँ।