रात के करीब ग्यारह बजे थे जब अर्जुन शर्मा उस शहर में पहुंचे। मानसून की बारिश जोरों पर थी, और हर तरफ अंधेरा छाया हुआ था। यह होटल में कुंवारी लड़की की चूत की कहानी उस रात से शुरू होती है जब एक अनजान मुसाफिर को ठहरने के लिए जगह चाहिए थी, और उसकी मुलाकात एक ऐसी कुंवारी लड़की से हुई जिसकी जिंदगी बदलने वाली थी। उस रात जो हुआ, वह एक युवा होटल में मिली कुंवारी लड़की की चूत का वर्णन करता है जो उसके जीवन की सबसे यादगार रात बन गई।
उनकी कार की हेडलाइट्स सड़क पर पड़ती बारिश की बूंदों को चांदी की तरह चमकाती हुई आगे बढ़ रही थीं। वे एक व्यापारिक यात्रा पर थे, और इस अज्ञात शहर में उन्हें होटल का कमरा नंबर 304 मिलने वाला था, जो उनकी किस्मत और जीवन को हमेशा के लिए बदल देगा।
शहर के बाहरी इलाके में उन्हें “रॉयल पैलेस होटल” दिखाई दिया। यह एक पुरानी इमारत थी, जो कभी शायद शानदार रही होगी, लेकिन अब समय की मार झेल रही थी।
होटल का बाहरी हिस्सा गहरे भूरे रंग का था, और उस पर सदियों पुरानी गंदगी की परत चढ़ी हुई थी। फिर भी, बारिश से बचने के लिए यही एकमात्र विकल्प था।
यह होटल में कुंवारी लड़की की चूत की कहानी उसी पुराने होटल से जुड़ी है जहां अनेकों रहस्य दबे हुए थे।
अर्जुन ने कार पार्किंग में खड़ी की। पार्किंग खाली थी, केवल एक पुरानी स्कूटर और एक मोटरसाइकिल खड़ी थी। बारिश की वजह से हर चीज गीली और चमकदार दिख रही थी। वे अपना सूटकेस उठाए और होटल की ओर बढ़े।
होटल का मुख्य दरवाजा लकड़ी का था, जिस पर भारी-भरकम पीतल के हैंडल लगे थे। दरवाजा खोलते ही एक पुरानी सी खुशबू आई – गीली लकड़ी, पुरानी चादरें, और कुछ अजीब सी सुगंध जो शायद सदियों पुराने इत्र की थी।
रिसेप्शन एक छोटा सा काउंटर था, जिसके पीछे एक बुजुर्ग आदमी बैठा था। उसकी उम्र लगभग साठ साल की होगी, बाल सफेद थे, और आंखों में एक अजीब सी चमक थी। उसने अर्जुन को देखा और धीरे से मुस्कुराया।
“नमस्ते साहब, रात को इतनी देर से?” बुजुर्ग ने पूछा।
“हां, बारिश में रास्ता भटक गया था। क्या कोई कमरा खाली है?” अर्जुन ने पूछा। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
बुजुर्ग ने रजिस्टर खोला और उंगली से एक नाम ढूंढते हुए कहा, “हां, एक कमरा खाली है। तीसरे मंजिल पर, होटल का कमरा नंबर 304।”
अर्जुन ने रजिस्टर में अपना नाम लिखा – अर्जुन शर्मा, दिल्ली। बुजुर्ग ने चाबी उठाई और उसे अर्जुन को सौंपते हुए कहा, “लिफ्ट खराब है, सीढ़ियों से जाना होगा। कोई परेशानी हो तो रिसेप्शन पर फोन कर दीजिएगा।”
अर्जुन ने चाबी ली और सीढ़ियों की ओर बढ़ गए। सीढ़ियां लकड़ी की थीं, जिन पर पुराना लाल कालीन बिछा हुआ था। हर कदम पर सीढ़ियां चरमरातीं, मानो किसी की कराह सुनाई दे रही हो।
दीवारों पर पुरानी तस्वीरें लगी थीं – कुछ राजा-महाराजाओं की, कुछ प्राचीन इमारतों की। रोशनी कमजोर थी, जिससे एक रहस्यमयी माहौल बना हुआ था।
तीसरी मंजिल पर पहुंचते ही अर्जुन ने देखा कि गलियारा लंबा और संकीर्ण था। दोनों ओर दरवाजे थे, हर दरवाजे पर एक नंबर लिखा हुआ था। 301, 302, 303… और फिर सामने होटल का कमरा नंबर 304। दरवाजा गहरे भूरे रंग का था, और उस पर पीतल की कुंडी लगी थी। अर्जुन ने चाबी घुमाई और दरवाजा खोला। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
कमरा अंधेरा था। अंदर घुसते ही एक पुरानी सी खुशबू आई – नमी, पुरानी लकड़ी, और कुछ और जो बयान नहीं किया जा सकता था। अर्जुन ने लाइट का स्विच दबाया। एक पीली रोशनी ने कमरे को रोशन किया। कमरा बड़ा था, शायद इस होटल का सबसे बड़ा कमरा।
बीच में एक विशाल बेड था, जिस पर सफेद चादरें बिछी हुई थीं। एक तरफ खिड़की थी, जिस पर भारी पर्दे लगे थे। दूसरी तरफ एक अलमारी, एक ड्रेसिंग टेबल, और एक पुराना सोफा रखा था।
अर्जुन ने अपना सूटकेस बेड पर रखा और खिड़की की ओर गए। पर्दे हटाते ही बारिश का दृश्य दिखाई दिया। बारिश की बूंदें खिड़की पर टकरा रही थीं, और बाहर अंधेरा था। दूर कहीं एक पुरानी इमारत की छत पर एक बिल्ली बैठी दिखाई दी, जो उनकी ओर देख रही थी।
अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई। अर्जुन ने दरवाजा खोला। बाहर एक लड़की खड़ी थी। उसकी उम्र लगभग बीस-बाईस साल की होगी। वह होटल की वर्दी में थी – सफेद शर्ट और काली स्कर्ट। उसके बाल लंबे थे, काले, और गीले बारिश की वजह से चेहरे पर चिपके हुए थे। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी थीं, काली, और गहरी। उसका चेहरा गोल था, और रंग गेहरा। वह सुंदर थी, बेहद सुंदर, लेकिन उसकी सुंदरता में एक अजीब सी उदासी थी।
“साहब, चाय या कॉफी?” उसने धीरे से पूछा।
अर्जुन ने उसे देखा। उसकी आवाज मधुर थी, लेकिन उसमें एक कंपन था, जैसे वह डरी हुई हो। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
“कॉफी, प्लीज,” अर्जुन ने कहा।
“अभी लाती हूं,” लड़की ने कहा और वहां से चली गई।
अर्जुन ने दरवाजा बंद किया और सोफे पर बैठ गए। उनके मन में अजीब सी बेचैनी थी। कुछ तो था इस कमरे में, कुछ ऐसा जो समझ से परे था। दस मिनट बाद फिर दरवाजे पर दस्तक हुई। अर्जुन ने दरवाजा खोला। वही लड़की थी, हाथ में कॉफी का ट्रे लिए।
“अंदर आ जाओ,” अर्जुन ने कहा।
लड़की अंदर आई। उसने ट्रे टेबल पर रखी। कॉफी का कप रखते समय उसका हाथ कांप रहा था।
“तुम्हारा नाम क्या है?” अर्जुन ने पूछा।
“प्रिया,” उसने धीरे से कहा।
“कितने साल से यहां काम कर रही हो?”
“तीन महीने हुए हैं,” प्रिया ने कहा।
“क्या तुम यहीं रहती हो?”
“हां, होटल के पिछले हिस्से में मेरा कमरा है,” प्रिया ने कहा और फिर अचानक रुक गई। उसकी आंखों में आंसू आ गए।
“क्या हुआ?” अर्जुन ने पूछा।
प्रिया ने कुछ नहीं कहा। वह रोने लगी। अर्जुन उठे और उसके पास गए। उन्होंने उसे सांत्वना दी। प्रिया ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से थी। उसके माता-पिता नहीं थे। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
इस होटल में काम करके वह अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी। लेकिन होटल का मालिक, एक बुजुर्ग आदमी जिसका नाम ठाकुर था, उसे परेशान करता था। वह उससे अजीब अजीब मांगे करता, उसे अकेले में आने को कहता।
अर्जुन ने प्रिया की कहानी सुनी और उनका दिल दुखी हो गया। उन्होंने प्रिया से कहा कि वह चिंता न करे, वह उसकी मदद करेंगे। प्रिया ने उनकी ओर देखा। उसकी आंखों में कृतज्ञता और कुछ और भी था – एक अजीब सी चाहत, एक अनजानी ख्वाहिश।
“साहब, आप बहुत अच्छे हैं,” प्रिया ने धीरे से कहा।
“तुम भी बहुत अच्छी हो,” अर्जुन ने कहा।
उनकी आंखें मिलीं। कमरे में एक अजीब सी खामोशी छा गई। बाहर बारिश तेज हो गई थी। बिजली चमकी और गरजने की आवाज आई। प्रिया डरकर अर्जुन से लिपट गई। उसका शरीर कांप रहा था।
“डरो मत, मैं हूं न,” अर्जुन ने कहा और उसे अपनी बाहों में भर लिया। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
प्रिया का शरीर नरम था, गर्म। उसकी सांसें तेज चल रही थीं। अर्जुन ने महसूस किया कि उनका दिल तेजी से धड़क रहा था। कुछ ऐसा हो रहा था जो उन्होंने नहीं सोचा था। प्रिया ने धीरे से अपना सिर उठाया। उनकी आंखें फिर मिलीं। इस बार वह चाहत साफ दिखाई दे रही थी।
“साहब…” प्रिया ने धीरे से कहा।
“अर्जुन, मुझे अर्जुन कहो,” उन्होंने कहा।
“अर्जुन…” प्रिया ने उनका नाम लिया और फिर उनके होठों पर अपने होठ रख दिए।
यह चुंबन धीमा था, पहला था, और अनजाना था। प्रिया कुंवारी थी, उसने कभी किसी को चूमा नहीं था। अर्जुन ने उसे महसूस किया – उसकी निर्दोषता, उसकी मासूमियत, और उसकी प्यास। उन्होंने धीरे से उसे जवाब दिया। चुंबन गहरा होता गया। प्रिया की सांसें तेज हो गईं। उसका शरीर अर्जुन से सट गया।
कुछ देर बाद वे अलग हुए। प्रिया की आंखें नीची थीं, उसका चेहरा लाल था।
“मुझे माफ कर दो, मैंने…” प्रिया ने कहा।
“शhh…” अर्जुन ने उसके होठों पर उंगली रखी। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
उन्होंने उसका हाथ पकड़ा और उसे बेड की ओर ले गए। प्रिया ने कुछ नहीं कहा, वह चुपचाप उनके साथ चली। बेड के पास आकर अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। प्रिया ने अपने हाथ उनकी पीठ पर रखे। उसका शरीर कांप रहा था, लेकिन अब डर से नहीं, बल्कि उत्साह से, अनजाने उत्साह से।
“क्या तुम्हें पता है क्या होने वाला है?” अर्जुन ने धीरे से पूछा।
प्रिया ने सिर हिलाया। “मुझे नहीं पता, लेकिन मैं चाहती हूं… आपके साथ,” उसने शर्माते हुए कहा।
यह होटल में कुंवारी लड़की की चूत की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था होटल में मिली कुंवारी लड़की की चूत, जहां एक कुंवारी लड़की अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला करने जा रही थी।
अर्जुन ने उसे धीरे से बेड पर बिठाया। प्रिया ने अपने हाथ अपनी गोद में रखे, उसकी उंगलियां एक-दूसरे से उलझी हुई थीं। अर्जुन उसके सामने घुटनों के बल बैठ गए।
“तुम सच में यह चाहती हो?” अर्जुन ने पूछा।
प्रिया ने सिर हिलाया। “हां, मैं आपको पसंद करती हूं। आप अलग हैं, अच्छे हैं। मैं नहीं चाहती कि मेरी पहली बार किसी गंदे आदमी के साथ हो। मैं चाहती हूं कि यह यादगार हो, खूबसूरत हो,” उसने कहा।
अर्जुन ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। उसकी त्वचा मुलायम थी, कोमल। उन्होंने उसके माथे पर चूमा। फिर आंखों पर, फिर गालों पर, और फिर उसके होठों पर। प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं और उस क्षण का आनंद लेने लगी।
अर्जुन ने धीरे से उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए। प्रिया ने कुछ नहीं कहा, वह चुपचाम लेटी रही। एक-एक करके बटन खुले। शर्ट के अंदर एक सफेद रंग की ब्रा थी। अर्जुन ने शर्ट उतारी। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
प्रिया का ऊपरी शरीर अब उनके सामने था – गोरा, कोमल, और खूबसूरत। उन्होंने उसकी ब्रा के हुक खोले। प्रिया ने धीरे से अपने हाथ हटाए और ब्रा सरक गई।
उसके स्तन छोटे थे, लेकिन सुडौल। गोलाकार, गोरे, और निप्पल गुलाबी रंग के। अर्जुन ने उन्हें देखा, उनकी खूबसूरती की प्रशंसा की। फिर उन्होंने धीरे से एक स्तन को अपने हाथ में लिया। प्रिया की सांसें तेज हो गईं। अर्जुन ने उसे सहलाया, दबाया, और फिर निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगे।
“आह…” प्रिया की मुंह से एक हल्की सी आवाज निकली।
यह उसके लिए नया था, अनजाना था, लेकिन सुखद था। अर्जुन ने दूसरे स्तन को भी वैसे ही चूसा। प्रिया का शरीर कांपने लगा। उसने अर्जुन के बालों में अपने हाथ फेरे। अर्जुन ने धीरे से उसकी स्कर्ट खोलनी शुरू की।
स्कर्ट का जिप नीचे सरका। प्रिया ने अपनी कमर उठाई ताकि स्कर्ट निकल सके। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
अब प्रिया केवल अंडरवियर में थी। उसकी जांघें गोरी, चिकनी, और सुडौल थीं। अर्जुन ने उन जांघों को चूमा। प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं। अर्जुन का चुंबन ऊपर की ओर बढ़ा – घुटनों से जांघों की ओर, और फिर अंडरवियर के ऊपर से उसकी योनि पर।
प्रिया का शरीर कांप उठा। उसने अपने पैर थोड़ा फैलाए। अर्जुन ने उसके अंडरवियर को नीचे खींचा। प्रिया ने अपनी कमर उठाई और अंडरवियर निकल गया। अब वह पूरी तरह नंगी थी, उसका शरीर अर्जुन के सामने खुला था।
उसकी योनि पर हल्के-हल्के बाल थे, काले और कोमल। अर्जुन ने उसे देखा, उसकी खूबसूरती का आनंद लिया। फिर उन्होंने धीरे से अपने होंठ उस पर रखे। प्रिया की कमर ऊपर उठी। अर्जुन ने अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू किया। प्रिया की सांसें तेज-तेज होने लगीं। उसने बेड की चादर को मजबूती से पकड़ लिया।
“ओह… यह क्या हो रहा है… मुझे अजीब सा लग रहा है…” प्रिया ने कहा।
“डरो मत, यह सुख है, इसे महसूस करो,” अर्जुन ने कहा और अपना काम जारी रखा।
प्रिया की योनि गीली होने लगी थी। अर्जुन ने अपनी उंगली उसमें डालने की कोशिश की। प्रिया तड़प उठी। उसके लिए यह दर्दनाक था, लेकिन अर्जुन धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करने लगे। कुछ देर में प्रिया को मजा आने लगा। उसकी आवाजें निकलने लगीं – हल्की, मदहोश करने वाली। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
अर्जुन ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए। उन्होंने अपनी शर्ट उतारी, फिर पैंट। प्रिया ने अपनी आंखें खोली और उन्हें देखा। उनका शरीर मजबूत था, छाती पर हल्के बाल थे। प्रिया ने उनकी छाती को छुआ।
उसका हाथ कांप रहा था। अर्जुन ने उसका हाथ पकड़ा और अपने पेट पर ले गया, फिर नीचे की ओर।
प्रिया ने उनके अंडरवियर को छुआ। अर्जुन ने उसे नीचे खींचा। उनका लिंग बाहर आ गया – मोटा, लंबा, और कड़ा। प्रिया ने उसे देखा। उसकी आंखें बड़ी हो गईं। वह इतना बड़ा कभी नहीं देखी थी, हालांकि उसने कभी किसी को नंगा नहीं देखा था।
“क्या यह अंदर जाएगा?” प्रिया ने डरते हुए पूछा।
“हां, लेकिन धीरे-धीरे, तुम्हें दर्द नहीं होगा,” अर्जुन ने कहा।
वह उसके ऊपर आ गए। प्रिया ने अपने पैर फैलाए। अर्जुन ने अपने लिंग को उसकी योनि के मुंह पर रखा। प्रिया की सांसें रुक सी गईं। अर्जुन ने धीरे से आगे बढ़ाया। प्रिया के मुंह से एक दर्द भरी आवाज निकली।
“आह! दर्द हो रहा है…” उसने कहा।
“थोड़ा सहन करो, अभी ठीक हो जाएगा,” अर्जुन ने कहा और धीरे-धीरे आगे बढ़ते रहे।
प्रिया की योनि बहुत टाइट थी। अर्जुन को भी मजा आ रहा था, लेकिन वह प्रिया का दर्द समझते थे। उन्होंने धीरे-धीरे अपना पूरा लिंग अंदर डाल दिया। प्रिया की आंखों से आंसू निकले। यह उसके लिए नया अनुभव था, एक मिश्रित अनुभव – दर्द भी था और अजीब सा सुख भी।
अर्जुन रुक गए। उन्होंने प्रिया को चूमा, उसके गालों पर आंसू पोंछे। कुछ देर बाद प्रिया ने कहा, “अब ठीक है, आगे बढ़ो।”
यह होटल में मिली कुंवारी लड़की की चूत का क्षण था, जो प्रिया के जीवन में हमेशा याद रखने वाला था। अर्जुन ने धीरे-धीरे अपना लिंग अंदर-बाहर करना शुरू किया। प्रिया को शुरू में दर्द महसूस हुआ, लेकिन धीरे-धीरे वह दर्द कम होता गया और सुख बढ़ता गया।
“ओह… अच्छा लग रहा है…” प्रिया ने कहा।
अर्जुन की गति तेज होने लगी। प्रिया ने अपने पैर उनकी कमर के चारों ओर लपेट लिए। उसकी सांसें तेज हो गईं। उसका शरीर गर्म हो रहा था, एक अजीब सी गर्मी जो पेट से शुरू होकर पूरे शरीर में फैल रही थी। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
“और तेज… प्लीज…” प्रिया ने कहा।
अर्जुन ने गति तेज कर दी। बेड की चरमराहट तेज हो गई। प्रिया के मुंह से आवाजें निकल रही थीं – कभी हल्की, कभी तेज। उसने अपने नाखून अर्जुन की पीठ में गड़ा दिए। अर्जुन को भी मजा आ रहा था। प्रिया की योनि उनके लिंग को कस रही थी, जिससे उन्हें अधिक सुख मिल रहा था।
करीब दस मिनट तक यह सिलसिला चला। प्रिया का शरीर कांपने लगा। उसे लगा कि कुछ होने वाला है, कुछ बड़ा, कुछ अनजाना। अर्जुन ने गति और तेज कर दी।
“आह… मुझे कुछ हो रहा है… मुझे डर लग रहा है…” प्रिया ने कहा।
“छोड़ दो खुद को, महसूस करो,” अर्जुन ने कहा।
प्रिया ने अपने आप को छोड़ दिया। उसके शरीर में एक जोरदार झटका लगा। उसकी योनि ने अर्जुन के लिंग को कसकर पकड़ लिया। उसके मुंह से एक लंबी, मदहोश करने वाली आवाज निकली। वह झड़ गई थी। उसका पूरा शरीर कांप रहा था, उसकी सांसें तेज चल रही थीं। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
अर्जुन भी रुक नहीं सके। प्रिया के झड़ने के कुछ ही देर बाद उनका भी निकलने वाला था। उन्होंने अपना लिंग बाहर निकाला और प्रिया के पेट पर अपना वीर्य छोड़ दिया। वे थककर उसके बगल में गिर पड़े।
दोनों हांफ रहे थे। प्रिया ने अर्जुन की ओर देखा। उसके चेहरे पर एक संतुष्टि की मुस्कान थी। अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया।
“कैसा लगा?” अर्जुन ने पूछा।
“बहुत अच्छा… शुरू में दर्द हुआ, लेकिन फिर… शब्द नहीं हैं बयान करने के लिए,” प्रिया ने कहा।
“क्या पछतावा है?” अर्जुन ने पूछा।
“बिल्कुल नहीं। मैं खुश हूं कि मेरी पहली बार आपके साथ हुई,” प्रिया ने कहा।
वे कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। बाहर बारिश अभी भी हो रही थी। बिजली कभी-कभी चमकती और गरजती। लेकिन अब प्रिया को डर नहीं लग रहा था। अर्जुन की बाहों में वह सुरक्षित महसूस कर रही थी।
करीब आधे घंटे बाद अर्जुन फिर उत्तेजित हो गए। उन्होंने प्रिया को फिर चूमना शुरू किया। प्रिया भी तैयार थी। इस बार उन्होंने प्रिया को घोड़ी बनने के लिए कहा। प्रिया ने वैसा ही किया। वह अपने हाथ और घुटनों के बल बेड पर आ गई। उसकी पीठ अर्जुन की ओर थी, और उसकी योनि पूरी तरह उनके सामने थी। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
अर्जुन ने उसकी पीठ को चूमा, फिर नीचे की ओर बढ़े। उन्होंने उसकी योनि को चाटा। प्रिया ने अपनी कमर पीछे की ओर धकेल दी। अर्जुन ने अपना लिंग पकड़ा और उसकी योनि में डाल दिया।
इस बार दर्द कम था क्योंकि प्रिया पहले ही एक बार झड़ चुकी थी। अर्जुन ने धीरे-धीरे अपना लिंग अंदर-बाहर करना शुरू किया। इस पोजीशन में उनका लिंग गहराई तक जा रहा था, जिससे प्रिया को और ज्यादा मजा आ रहा था।
“ओह… यह तो पहले से भी अच्छा है…” प्रिया ने कहा।
अर्जुन ने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने लगे। प्रिया के मुंह से आवाजें निकल रही थीं। उसके स्तन नीचे की ओर लटक रहे थे, हिल रहे थे। अर्जुन ने एक हाथ आगे बढ़ाया और उसके स्तनों को पकड़ लिया। वह उन्हें दबाते हुए अपना काम जारी रखे। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
यह होटल में कुंवारी लड़की की चूत की कहानी का दूसरा अध्याय था, जहां प्रिया अपने सुख की नई ऊंचाइयों को छू रही थी। लगभग पंद्रह मिनट तक यह चला। प्रिया फिर से झड़ने वाली थी। उसने अर्जुन से कहा, “रुको मत… बस ऐसे ही करते रहो… मैं फिर से…”
अर्जुन ने गति और तेज कर दी। प्रिया का शरीर कांपा, उसकी योनि ने फिर से कसकर पकड़ा, और वह झड़ गई। इस बार का झड़ना और भी जोरदार था। उसके शरीर में एक के बाद एक झटके लगे। वह थककर बेड पर गिर पड़ी।
अर्जुन ने अपना लिंग बाहर निकाला। वह अभी भी कड़ा था। उन्होंने प्रिया को पीठ के बल लेटाया और उसके ऊपर आ गए। इस बार वे मिशनरी पोजीशन में थे। अर्जुन ने अपना लिंग फिर से अंदर डाला और धक्के लगाने लगे।
प्रिया के लिए यह तीसरी बार था, और उसका शरीर अब पूरी तरह उत्तेजित था। उसने अपने पैर ऊंचे उठाए और अर्जुन की कमर के चारों ओर लपेट लिए। अर्जुन गहराई तक जा रहे थे। प्रिया के मुंह से बार-बार आवाजें निकल रही थीं।
“मुझे लग रहा है… मैं फिर से…” प्रिया ने कहा।
“मैं भी…” अर्जुन ने कहा।
दोनों एक साथ झड़े। प्रिया की योनि ने अर्जुन के लिंग को कसकर पकड़ा और उसे खींचा। अर्जुन का वीर्य प्रिया की योनि में ही निकल गया। वे दोनों एक-दूसरे में समाए हुए थे, हांफ रहे थे, पसीने से लथपथ थे। कुंवारी लड़की की चूत / vidhwa bhabhi ki chudai
कुछ देर बाद वे अलग हुए। प्रिया ने अर्जुन की ओर देखा। उसकी आंखों में प्यार और कृतज्ञता थी।
“धन्यवाद,” उसने धीरे से कहा।
“किस लिए?” अर्जुन ने पूछा।
“इस खूबसूरत अनुभव के लिए। मैं इसे जीवन भर याद रखूंगी,” प्रिया ने कहा।
“मैं भी,” अर्जुन ने कहा और उसे अपनी बाहों में भर लिया।
वे कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। फिर प्रिया उठी और अपने कपड़े पहनने लगी।
“कहां जा रही हो?” अर्जुन ने पूछा।
“मुझे जाना होगा। सुबह होने वाली है, और मुझे काम पर भी जाना है,” प्रिया ने कहा।
“क्या मैं तुमसे फिर मिल सकता हूं?” अर्जुन ने पूछा।
प्रिया ने रुककर उनकी ओर देखा। उसकी आंखों में आंसू थे। “मैं यहीं हूं, इसी होटल कुंवारी लड़की की चूत की कहानी में, हमेशा,” उसने रहस्यमयी ढंग से कहा।
अर्जुन ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रिया जल्दी से कमरे से बाहर निकल गई। अर्जुन ने उसके पीछे देखा, लेकिन गलियारा खाली था। वह अजीब सा महसूस कर रहे थे।
सुबह हुई। अर्जुन उठे और नीचे रिसेप्शन पर गए। वही बुजुर्ग बैठा था।
“कैसा रहा आपका ठहरना?” बुजुर्ग ने पूछा।
“अच्छा था,” अर्जुन ने कहा। “वैसे, प्रिया कहां है?”
बुजुर्ग ने उनकी ओर अजीब से देखा। “प्रिया? कौन प्रिया?”
“वो लड़की जो यहां काम करती है, रात को मेरी सेवा में आई थी,” अर्जुन ने कहा।
बुजुर्ग का चेहरा पीला पड़ गया। “साहब, यहां कोई प्रिया नाम की लड़की नहीं काम करती। और रात को तो कोई भी लड़की ऊपर नहीं जाती।”
अर्जुन हैरान रह गए। “लेकिन कल रात…”
“साहब, होटल का कमरा नंबर 304… वह कमरा रहस्यमय है। पांच साल पहले एक लड़की वहां रहती थी, प्रिया नाम की। उसकी मौत हो गई थी, दुर्घटना में,” बुजुर्ग ने कहा।
अर्जुन के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह समझ गए कि कल रात क्या हुआ था। वह होटल में मिली कुंवारी लड़की की चूत एक भूतनी के साथ हुई थी, लेकिन वह अनुभव इतना असली था, इतना सच्चा।
वह वहां से निकले। बाहर धूप खिली हुई थी, रात की बारिश अब बंद हो चुकी थी। अर्जुन ने पीछे मुड़कर होटल को देखा। तीसरी मंजिल की खिड़की से एक लड़की उन्हें देख रही थी। प्रिया। उसने हाथ हिलाया और मुस्कुराई। अर्जुन ने भी हाथ हिलाया।
वह जानते थे कि यह होटल में कुंवारी लड़की की चूत की कहानी उनके दिल में हमेशा के लिए बस जाएगी। और कभी-कभी, जब वह अकेले होते, तो प्रिया की याद आती, और वह मुस्कुराते, क्योंकि उन्हें पता था कि कहीं, किसी दूसरी दुनिया में, प्रिया भी उन्हें याद कर रही होगी।
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