मैंने मेट्रो में उसे पहली बार देखा था। सुबह 8:30 की भीड़ भरी मेट्रो में, जब हर कोई अपनी मंजिल की तरफ दौड़ रहा था, मेरी नज़रें उस पर ठहर गईं। वो प्लेटफॉर्म के किनारे खड़ी थी, हल्की गुलाबी रंग की साड़ी में, जिसका पल्लू उकी कमर पर कसकर बंधा हुआ था। मेट्रो में मिली खूबसूरत भाभी की सेक्सी कहानी । 32-33 साल की उम्र लग रही थी, गोरा रंग, लंबे काले बाल जो कंधे पर थे, और वो आंखें… हिरणी जैसी बड़ी-बड़ी आंखें जिनमें एक अजीब सी उदासी थी।
मेट्रो आई और भीड़ ने हमें एक-दूसरे की तरफ धकेल दिया। मैं उसके ठीक पीछे खड़ा हो गया। हर झटके पर उकी गोल चूचियाँ मेरी छाती से टकरा रही थीं। मैंने जानबूझकर थोड़ा और पीछे सरका, ताकि मेरा खड़ा होता लंड उकी कमर की दरार में महसूस हो।
“ऊह…” उसने हल्की सी सिसकी निकाली, पर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मैंने हिम्मत की। “माफ़ कीजिएगा, भीड़ है…”
वो घूमी। उकी आंखें मेरी आंखों में मिलीं। एक अजीब सा करंट सा लगा। “कोई बात नहीं,” उसने कहा, और उकी सांसें तेज हो गईं। मैंने देखा उकी नाक के पास एक छोटी सी तिल थी, जो उसे और भी खूबसूरत बना रही थी।
“मैं रोहित हूं,” मैंने हाथ आगे बढ़ाया, “राजीव चौक से चढ़ा हूं।”
“प्रिया,” उसने हाथ मिलाया, मेरी उंगलियों को थोड़ी देर और दबाए रखा, “मैं… मैं भाभी हूं, शादीशुदा।”
“प्रिया भाभी,” मैंने जानबूझकर शब्द जोड़े, “आपका नाम भी उतना ही खूबसूरत है जितनी आप।”
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उसने नीचे देखा, शरमा गई। पर मैंने देखा उकी निप्पल साड़ी के पतले कपड़े से उभर रहे थे। शायद वो एक्साइट हो रही थी। मेरा लंड पैंट में तनकर उकी कमर को छू रहा था।
“कहां उतरती हैं आप?” मैंने पूछा।
“कनॉट प्लेस… मेरे पति का ऑफिस है वहां।”
“मैं भी वहीं जा रहा हूं। इंटरव्यू है।”
वो मेरी तरफ देखी। “किस कंपनी में?”
“शर्मा एंटरप्राइजेज।”
उकी आंखें चौड़ी हो गईं। “वो… वो तो मेरे पति की कंपनी है।”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “तो भाभी, आज मेरी किस्मत खुलने वाली है।”
मेट्रो ने ब्रेक लगाया। भीड़ ने हमें और करीब धकेल दिया। अब मेरा पूरा बदन उसके पीछे चिपक गया था। मैंने महसूस किया उकी गांड कितनी गोल और टाइट थी। मेरे लंड ने उकी गांद की दरार में अपनी जगह बना ली थी।
“रोहित…” उसने मेरी तरफ मुड़कर फुसफुसाया, “तुम्हारा… तुम्हारा वो… मुझे लग रहा है।”
“क्या करूं भाभी, आप इतनी खूबसूरत हैं।”
उसने कुछ नहीं कहा। बस अपने फोन में देखने लगी। मैंने देखा वो इंस्टाग्राम खोल रही थी। मैंने भी अपना फोन निकाला।
“इंस्टाग्राम?” मैंने पूछा।
वो थोड़ी देर सोचती रही। फिर बोली, “@priya_metroooo_queen… पर रोहित, मैं शादीशुदा हूं। प्लीज़… गलत मत समझना।”
“कभी नहीं भाभी। आप मेरी सम्मानित बड़ी बहन हैं।”
ये सुनकर वो हंस पड़ी। “छोटे, तुम्हारी आंखें कुछ और ही कह रही हैं।”
रात को 11 बजे मैंने उसे फॉलो किया। उकी प्रोफाइल देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। समुद्र किनारे बिकिनी में तस्वीरें – गोल चूचियाँ, गहरी नाभि, मोटी जांघें। जिम में टाइट्स में – उकी गांद का शेप साफ़ दिख रहा था। और पति के साथ फोटोज़ – एक 55 साल का बुजुर्ग आदमी, बैंगनी बाल, चश्मा, मोटा पेट।
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“क्या चाहते हो तुम?” उसने रात को 12:30 मैसेज किया।
“आपका साथ, भाभी। बस इतना ही।”
“छोटे, मैं शादीशुदा हूं। समझते नहीं हो?”
“समझता हूं। पर आपकी आंखों में वो तड़प देखी है मैंने। वो भूख।”
“क्या भूख?”
“प्यार की, छूने की, चुदाई की…”
“रोहित!” उसने टाइप किया, “ये क्या बोल रहे हो!”
“सच बोल रहा हूं भाभी। आपके पति 55 के हैं ना? 5 साल से आपको छुआ तक नहीं होगा।”
कई मिनट तक कोई जवाब नहीं आया। फिर एक वॉइस नोट आया। उकी आवाज़ रो रही थी।
“कैसे जानते हो तुम? कैसे?”
“आपकी आंखें बोलती हैं भाभी।”
“मैं बहुत अकेली हूं रोहित। बहुत…”
“मैं हूं ना।”
“तुम छोटे हो मुझसे…”
“उम्र से क्या फर्क पड़ता है? मैं आपको खुश कर सकता हूं।”
“कैसे?”
“हर तरह से।”
अगले दो हफ्ते हम रात-रात भर चैट करते रहे। वो अपनी जिंदगी बताती – कैसे 22 साल की उम्र में 45 साल के पति से शादी हुई, पैसे के लिए। कैसे वो अब बेडरूम में एक लाश बन गए हैं। कैसे उसे हर रात अपने बदन को झेलना पड़ता है।
“मुझे चाहिए एक जॉब,” मैंने एक दिन कहा, “आपके पति के ऑफिस में।”
“तुम्हें क्वालिफिकेशन नहीं है उतना,” उसने कहा।
“है भाभी। बीकॉम हूं। पर चाहिए तो आपकी सिफारिश।”
“क्यों?”
“ताकि रोज़ आपको देख सकूं।”
“और फिर?”
“और फिर… जो आप चाहेंगी।”
तीन दिन बाद उसने कहा, “कल इंटरव्यू है। 10 बजे। और हां… फॉर्मल कपड़े पहनना। मैं देखना चाहती हूं तुम्हें अच्छे कपड़ों में।”
मैं उसके पति के ऑफिस पहुंचा। 10वीं मंजिल, पूरा फ्लोर उनका था। रिसेप्शन पर एक लड़की ने कहा, “मैम प्रिया आपका इंतज़ार कर रही हैं। कॉन्फ्रेंस रूम में जाइए।”
मैं अंदर गया। प्रिया भाभी एक कुर्सी पर बैठी थीं। काले रंग की साड़ी, गहरे गले का ब्लाउज, और वो लिपस्टिक… गाढ़ी लाल। उकी चूचियाँ ब्लाउज से उभरी हुई थीं।
“बैठो रोहित,” उसने कहा, आवाज़ में एक अजीब सी हुकुमत थी।
मैं बैठा। वो उठी, मेरे पास आई। उकी साड़ी का पल्लू जानबूझकर गिरा। वो झुकी, उकी चूचियाँ मेरे चेहरे के सामने थीं। मैंने सांस ली, उकी खुशबू मदहोश कर रही थी।
“तुम्हें पता है मैंने तुम्हें क्यों बुलाया?” उसने पल्लू ठीक करते हुए पूछा।
“क्योंकि मैं काबिल हूं?”
“नहीं,” उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा, “क्योंकि मैं तुम्हें चाहती हूं। यहां। अभी।”
मेरा दिल धड़कने लगा। “भाभी… यहां?”
“यहां कौन है? सिर्फ़ हम दोनों।” वो मेरे कान में फुसफुसाई, “मैंने कैमरे बंद कर दिए हैं।”
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उसने मेरे गले का बटन खोला। फिर दूसरा। मैंने उसे खींचा, उकी चूचियाँ मेरे मुँह में थीं। मैंने ब्लाउज के ऊपर से ही काटा, चूसा।
“आह… रोहित… पागल…”
“आज मैं आपको पूरा चोदूंगा भाभी।”
“नहीं… अभी नहीं… शाम को… मेरे घर… पति दिल्ली गए हैं… 3 दिन…”
मैंने उसे छोड़ा। उकी आंखें लाल हो गई थीं। “तो ये इंटरव्यू…?”
“पास हो,” उसने मेरी पैंट पर हाथ रखा, मेरे लंड को महसूस किया, “अब से तुम मेरे असिस्टेंट हो। रोज़ मेरे साथ रहोगे।”
शाम को 7 बजे मैं उसके घर पहुंचा। ग्रेटर कैलाश का बड़ा बंगला। उसने गेट खोला। लाल रंग की ट्रांसपेरेंट नाइटी में थी। अंदर कुछ नहीं पहना था। निप्पल साफ़ दिख रहे थे, चूत के बाल भी।
“आ गए जॉब वाले?” उसने शरारत से कहा, “अंदर आओ।”
घर बड़ा था, पर अकेला। “बच्चे?”
“कोई नहीं। पति को नहीं चाहिए थे। मैं सिर्फ़ शोभा की वस्तु हूं उनके लिए।”
मैंने उसे पीछे से पकड़ा। उकी गांद मेरे लंड पर थी। “आज मैं आपको मां बनाऊंगा भाभी।”
“हरामी… चलो बेडरूम में…”
बेडरूम बड़ा था, बीच में किंग साइज़ बेड। उसने मुझे धक्का दिया, मैं गिरा। वो मेरे ऊपर आ गई। नाइटी उतारी। उकी चूचियाँ मेरे मुँह में थीं। मैंने चूसा, काटा, खींचा।
“ऊह… हां… और ज़ोर से…”
मैंने उसे नीचे गिराया। अब मैं ऊपर था। उकी टांगें फैलाईं। चूत देखी – गुलाबी, गीली, खुली हुई। मैंने उंगली डाली। वो चीखी।
“कितने साल हो गए भाभी?”
“5… 5 साल…”
“आज पूरे करूंगा।”
मैंने उकी चूत चाटनी शुरू की। क्लिटोरिस पर जीभ फिराई। वो पागल हो रही थी।
“रोहित… रुको… मैं…”
“झड़ जाओ भाभी…”
वो झड़ गई। पानी निकला उकी चूत से। मैंने पी लिया। फिर खड़ा हुआ। अपने कपड़े उतारे। 7 इंच का मोटा लंड बाहर आया।
“ये… ये तो…”
“डरो मत,” मैंने उकी टांगें कंधों पर रखीं, “धीरे-धीरे लूंगा।”
लंड का सुपाड़ा चूत पर रखा। धीरे से अंदर डाला। वो चीखी, नाखून मेरी पीठ में गड़ाए।
“दर्द… बहुत दर्द…”
“सहन करो भाभी… थोड़ी देर में मज़ा आएगा।”
मैंने आधा लंड अंदर किया। फिर रुका। उकी सांसें तेज थीं। फिर एक झटका दिया, पूरा लंड अंदर।
“आह… मर गई…”
मैंने रुककर उकी होंठ चूमे। फिर धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। 2 मिनट में ही वो मज़े में आ गई।
“हां… और ज़ोर से… चोदो मुझे… रंडी बना दो…”
मैंने स्पीड बढ़ाई। चपाक-चपाक की आवाज़ें। उकी चूचियाँ उछल रही थीं। मैंने एक को पकड़ा, कसकर दबाया।
“कैसा लग रहा है भाभी?”
“बहुत अच्छा… बहुत… और ज़ोर से… चोदो… चोदो…”
मैंने 15 मिनट तक चोदा। डॉगी स्टाइल में किया, उकी गांद देखी। फिर उसे उल्टा लिटाया, पीछे से डाला।
“ये… ये क्या कर रहे हो?”
“आपकी गांद मार रहा हूं भाभी…”
“नहीं… वहां नहीं… पहली बार है…”
“आज सब कुछ पहली बार होगा।”
मैंने थूक लगाया, और एक ही झटके में गांद में लंड डाल दिया। वो चीखी, रोई, पर मैंने नहीं रुका। 10 मिनट बाद वो मज़े में आ गई।
“ओह… गांद में भी मज़ा आता है… और ज़ोर से…”
मैंने दोनों छेद बारी-बारी से चोदे। फिर जब झड़ने वाला था, उकी चूत में ही झड़ गया। गाढ़ा माल अंदर गया। वो थककर सो गई, मेरे बांह में।
सुबह जब उठी, तो मैंने फिर से चोदा। फिर शाम को, फिर रात को। 3 दिन तक, हर कमरे में, हर तरह से। जब उसके पति वापस आए, तो मैं उसका असिस्टेंट बन चुका था। रोज़ ऑफिस में चोदता था, कभी कॉन्फ्रेंस रूम में, कभी बाथरूम में, कभी कार में।
प्रिया भाभी अब मेरी थी। मेट्रो वाली मुलाकात ने मेरी जिंदगी बदल दी थी। और अब, हर रात, वो मेरी बाहों में सोती थी, जब तक उसके पति सो रहे होते थे।
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