नमस्कार दोस्तों, आज मैं आपको एक पूरी तरह से विस्तृत और रोमांचक कहानी सुनाने जा रहा हूँ। यह कहानी है बरेली शहर की एक खूबसूरत, जवान और कामुक भाभी अमृता की, जिनकी भूखी जवानी को एक साधारण दूधवाले राजू ने अपनी मर्दानगी से पूरी तरह संतुष्ट कर दिया। यह कहानी प्यार, वासना, छुपी हुई इच्छाओं और देसी चुदाई की है। तैयार हो जाइए, क्योंकि यह काफी लंबी और गर्मागर्म होने वाली है।
अमृता 25 साल की एक शादीशुदा महिला थीं। उनकी शादी को सिर्फ दो साल हुए थे। उनका फिगर बिल्कुल फिल्मी हीरोइनों जैसा था — 36-28-36। उनके स्तन 36 साइज के थे, जो पूरे गोल, भरे हुए और उभरे हुए थे। उनकी कमर 28 इंच की पतली और मोहक थी, जो देखते ही किसी भी मर्द का ध्यान खींच लेती। और उनके नितंब 36 इंच के थे — मोटे, गोल और इतने आकर्षक कि चलते वक्त हिलते हुए हर किसी की नजर वहाँ अटक जाती।
उनके पति अनिल एक ट्रेडिंग कंपनी के मैनेजर थे। उनका काम ऐसा था कि महीने में 15 से 20 दिन वे बाहर ही रहते। जब भी घर आते, थकान के मारे अमृता को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाते। अमृता पूरी तरह जवान और उबलती हुई जवानी वाली महिला थीं। रातों को अकेले बिस्तर पर लेटकर वे अक्सर करवटें बदलती रहतीं। उनकी चूत अक्सर तड़प उठती, लेकिन पति के न होने पर उन्हें सिर्फ अपनी उंगलियों का सहारा लेना पड़ता। वह संतुष्टि नहीं मिलती जो एक मोटे, सख्त लंड से मिलती है।
उनके इलाके में दूध वाला राजू आता था। राजू 32 साल का था, लंबा-चौड़ा, गबरू जवान। उसकी हाइट करीब 6 फीट थी। रोज सुबह दूध बांटने की मेहनत ने उसके शरीर को लोहे जैसा मजबूत बना दिया था। चौड़ी छाती, मोटी-मोटी बाहें, पेट पर हल्की लकीरें और कमर पर लुंगी बांधे रहने की वजह से उसका मोटा लंड हमेशा उभरा नजर आता। ऊपर बनियान पहनता था, जिससे उसकी छाती के घने काले बाल झांकते रहते।
जब भी राजू दूध देने आता, अमृता की नजरें उसके शरीर पर टिक जातीं। वे जानबूझकर दरवाजे पर ऐसे खड़ी होतीं कि उनका पल्लू थोड़ा सरक जाए और गहरी क्लीवेज दिखे। राजू भी अब अमृता को पहले से अलग नजरों से देखने लगा था। वह उनके मोटे चूतड़ों को घूरता, उनके उभरे बूब्स को देखता और कभी-कभी लार तक टपका देता।
अमृता को पता चल गया था कि राजू की बीवी सीमा अक्सर बीमार रहती है और उनके बीच शारीरिक संबंध लगभग बंद हो चुके हैं। यह सुनकर अमृता की चूत में सनसनी दौड़ जाती। उन्होंने सोचा — क्यों न इस मौके का फायदा उठाया जाए।
धीरे-धीरे अमृता ने हॉट भाभी बनना शुरू कर दिया। कभी दूध लेते समय झुककर क्लीवेज दिखातीं, कभी पल्लू गिरा देतीं, कभी जानबूझकर राजू के हाथ को अपने नरम बूब्स से टकरा देतीं। राजू समझ तो जाता था, लेकिन हिम्मत नहीं कर पाता था। लेकिन अंदर ही अंदर उसका लंड भी अमृता के लिए तड़पने लगा था।
वो निर्णायक सुबह
अक्टूबर का महीना था। मौसम सुहाना और ठंडा हो चुका था। सुबह के चार बजे अंधेरा अभी भी छाया हुआ था। अमृता के पति दो दिन पहले दिल्ली चले गए थे और सास भी अपनी बहन के घर गई हुई थीं। घर में अमृता पूरी तरह अकेली थीं।
उन्होंने फैसला कर लिया था कि आज राजू को किसी भी कीमत पर अपने बिस्तर तक ले जाना है। उन्होंने लाल रंग की बेहद पतली साड़ी पहनी, जो उनके गोरे बदन पर बिल्कुल फब रही थी। अंदर डीप नेक वाला ब्लाउज था, जिसमें से उनके आधे से ज्यादा बूब्स बाहर झांक रहे थे। ब्रा बिल्कुल नहीं पहनी थी, ताकि उनके गुलाबी निप्पल साड़ी के ऊपर से साफ नजर आएं। पेटीकोट कसकर बांधा था, जिससे उनकी कमर और भी पतली और आकर्षक दिख रही थी।
घंटी बजी। अमृता का दिल जोरों से धड़क रहा था। उन्होंने दरवाजा थोड़ा-सा खोला। राजू सामने खड़ा था। जैसे ही उसकी नजर अमृता पर पड़ी, वह स्तब्ध रह गया। उसकी आँखें अमृता के बूब्स से लेकर उनके मोटे चूतड़ों तक घूम गईं। लुंगी के अंदर उसका लंड तुरंत फनकारने लगा।
“भाभी जी… आप… इतनी सुबह… और यह लाल साड़ी…” राजू की आवाज काँप रही थी।
अमृता मुस्कुराईं और मीठे स्वर में बोलीं, “अंदर आ जाओ राजू।”
जैसे ही राजू अंदर आया, अमृता ने दरवाजा बंद कर कुंडी लगा दी। राजू चौंककर पलटा। अमृता ने धीरे-धीरे उसके पास कदम बढ़ाए। उनके बूब्स लगभग उसकी छाती से टकरा रहे थे।
“राजू, मैं सब जानती हूँ। तेरी बीवी तुझे संतुष्ट नहीं कर पाती। मेरा पति भी हमेशा बाहर रहता है। मेरी चूत रात-रात भर तड़पती रहती है। आज तू मुझे चोद ले। मेरी प्यास बुझा दे,” अमृता ने सीधे कह दिया।
राजू का चेहरा लाल हो गया। लेकिन उसकी आँखों में भूख साफ दिख रही थी। अमृता ने अपना हाथ बढ़ाकर उसकी लुंगी के ऊपर से उसके खड़े लंड को सहलाया।
“यह तो कह रहा है कि तुझे भी मेरी जरूरत है,” अमृता ने मुस्कुराते हुए कहा।
राजू का सब्र टूट गया। उसने अमृता को अपनी मजबूत बाहों में कसकर जकड़ लिया। उसके होंठ अमृता के होंठों पर टूट पड़े। गहरा, लंबा और जुनूनी किस। दोनों की जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। राजू की गर्म सांसें अमृता के गालों को भिगो रही थीं।
उसने अमृता की गर्दन चूमनी शुरू की, फिर नीचे उतरकर उनके क्लीवेज में मुंह डाल दिया। ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोल दिए। जैसे ही ब्लाउज खुला, अमृता के दो बड़े, गोरे बूब्स आजाद हो गए। राजू ने एक बूब को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरे बूब को हाथ से मसल रहा था। अमृता कराह रही थीं — “आह्ह्ह… राजू… और चूसो… बहुत दिनों से कोई नहीं चूसा…”
राजू दोनों बूब्स को बारी-बारी चूसता रहा, काटता रहा, जीभ से चाटता रहा। अमृता की चूत से पानी बहने लगा था।
अमृता ने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया। राजू ने खुद नीचे बैठकर उनका पेटीकोट उतारा। लाल पैंटी पूरी तरह भीगी हुई थी। राजू ने उसे सूंघा और फिर चूम लिया। पैंटी एक तरफ करके उसने अमृता की साफ, गुलाबी चूत को जीभ से चाटना शुरू कर दिया।
“ऊह्ह्ह… राजू… बहुत अच्छा लग रहा है…” अमृता ने उसके बाल पकड़कर उसका मुंह अपनी चूत पर दबाया।
राजू की जीभ अमृता की चूत की दरार में घूम रही थी — क्लिट पर, छेद पर, अंदर-बाहर। फिर उसने उंगली भी डाल दी। अमृता झड़ गईं। उनका रस राजू के मुंह में चला गया। राजू ने चाट-चाटकर साफ कर दिया।
पहली चुदाई
राजू ने अपनी लुंगी और बनियान उतार दी। उसका 8 इंच लंबा, मोटा, काला लंड लोहे की तरह खड़ा था। नसें उभरी हुईं, सुपाड़ा चमक रहा था। अमृता डर भी गईं और उत्सुक भी।
राजू ने अमृता को बिस्तर पर लिटाया, उनके पैरों को फैलाया और लंड का सुपाड़ा चूत के मुंह पर रखा। धीरे-धीरे दबाया।
“आह्ह्ह… धीरे राजू… बहुत मोटा है… दर्द हो रहा है…” अमृता चीखीं।
राजू रुका, बूब्स चूसा, फिर एक जोरदार धक्का। आधा लंड अंदर चला गया। फिर दूसरा धक्का — पूरा लंड अमृता की चूत में समा गया।
“अब चोदो मुझे… अपनी भाभी की चूत फाड़ दो…” अमृता चीखीं।
राजू ने रफ्तार बढ़ाई। तेज-तेज धक्के। कमरा चपचप, थपथप की आवाजों से भर गया। बिस्तर हिल रहा था। अमृता के नाखून राजू की पीठ पर गड़ रहे थे।
“हां… और तेज… मैं झड़ने वाली हूँ…”
अमृता पहली बार चुदाई में झड़ गईं। लेकिन राजू नहीं रुका। उसने अमृता को घोड़ी बनाया। पीछे से लंड डाला और चूतड़ों पर थप्पड़ मारते हुए जोर-जोर से चोदा।
“क्या मस्त गांड है भाभी जी…”
राजू ने अमृता की चूत में अपना गर्म वीर्य उंडेल दिया। अमृता ने चूत कसकर सिकोड़ ली।
दूसरी राउंड और गांड चुदाई
थोड़ी देर आराम के बाद राजू फिर तैयार हो गया। इस बार अमृता ऊपर बैठीं। उन्होंने राजू के लंड को अपनी चूत में डाला और उछल-उछलकर चुदाई शुरू की। उनके बूब्स उछल रहे थे। राजू उन्हें पकड़कर दबा रहा था। दोनों नीचे-ऊपर धक्के दे रहे थे।
फिर राजू ने कहा, “भाभी जी, अब आपकी गांड मारनी है।”
अमृता हिचकिचाईं, लेकिन राजू ने उन्हें मनाया। घोड़ी बनाया गया। राजू ने गांड पर थूक लगाया और धीरे-धीरे लंड घुसाया।
“ऊह्ह्ह… दर्द हो रहा है… धीरे…”
धीरे-धीरे दर्द कम हुआ और मजा बढ़ा। राजू तेजी से गांड मारने लगा। अमृता चिल्ला रही थीं — “हां… मेरी गांड चोदो राजू… और तेज…”
राजू ने गांड में भी अपना माल भर दिया।
तीसरी राउंड और विदाई
सुबह होने वाली थी। लेकिन दोनों की भूख अभी बाकी थी। राजू ने अमृता को दीवार से सटाकर खड़े-खड़े उठाकर चोदा। अमृता की टांगें उसकी कमर पर थीं। आखिरी बार दोनों साथ ही झड़े।
राजू जाने लगा तो अमृता ने उसे गले लगाया।
“अब रोज आना राजू। मेरी चूत अब तेरी हो गई है।”
“हां भाभी जी, रोज आऊंगा। आपकी चूत के बिना मेरा दिन अधूरा है,” राजू ने कहा।
उस दिन के बाद राजू रोज सुबह चार बजे आता। अमृता लाल साड़ी पहनकर तैयार रहतीं। दोनों घंटों तक चुदाई करते। कभी किचन में, कभी बाथरूम में, कभी बेडरूम में। अमृता की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। वे अब संतुष्ट, तरोताजा और खुश रहतीं। पति को कुछ पता नहीं चलता।
अमृता की चूत अब राजू के मोटे लंड की दीवानी बन चुकी थी। यह थी एक भाभी और दूधवाले की अनकही वासना की पूरी कहानी।
NeXt story :- हॉट देसी भाभी की चुदाई