जब वो मेरे कपड़े उतारने लगी
मेरा नाम जतिन शर्मा है। मैं दिल्ली के एक अप्स्केल कॉलोनी में अपने माता-पिता के साथ रहता हूँ। मेरी उम्र 24 साल है, हाइट 6 फीट, और बॉडी जिम-ट्रेंड एथलेटिक बिल्ड है। मैंने अपनी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी कर ली है और अब एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी कर रहा हूँ। जब वो मेरे कपड़े उतारने लगी
मेरे घर के ठीक बगल में शर्मा परिवार रहता है – अंकल, आंटी, और उनकी बेटी वंशिका। वंशिका से मेरी पहली मुलाकात तब हुई जब मैं 20 साल का था और वो 18 साल की थी। उस समय वो अपने माता-पिता के साथ लखनऊ से दिल्ली आई थी क्योंकि उसके पिता का तबादला यहाँ हो गया था।
वंशिका… नाम ही काफी है उसकी खूबसूरती का अंदाजा लगाने के लिए। 22 साल की एक हसीना जिसकी हाइट 5’6″ है, फिगर 34-28-36 का परफेक्ट आवर ग्लास आकार। गोरी त्वचा जैसे दूध में हल्दी मिलाई हो, लंबे काले बाल जो कमर तक आते हैं, और भूरी आँखें जिनमें कajal लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उसके होंठ मोटे और गुलाबी, नाक छोटी सी upturned, और गालों पर एक किला जो हँसने पर और भी गहरा हो जाता है।
हमारी दोस्ती की शुरुआत कॉलेज से हुई। दोनों एक ही यूनिवर्सिटी में थे – मैं एम.कॉम में था और वो बी.कॉम की पहले साल की स्टूडेंट थी। पड़ोस होने के कारण हम अक्सर साथ में कॉलेज जाते थे, साथ में वापस आते थे। धीरे-धीरे यह दोस्ती गहरी होती गई। जब वो मेरे कपड़े उतारने लगी
वंशिका एक अलग तरह की लड़की थी। ज्यादातर लड़कियाँ मुझे मेरे हैंडसम लुक्स और अच्छी जॉब के कारण पसंद करती थीं, लेकिन वंशिका मेरे व्यक्तित्व से जुड़ी। वो मेरी बातों को समझती थी, मेरे सपनों का सम्मान करती थी। हमारी केमिस्ट्री इतनी अच्छी थी कि कॉलेज में सब हमें कपल समझने लगे थे, लेकिन हम दोनों ने कभी इस रिश्ते को आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटाई।
तीन साल की दोस्ती में हम एक-दूसरे के सबसे करीबी दोस्त बन गए थे। मैं उसकी हर प्रॉब्लम सॉल्व करता था, वो मेरी हर मुश्किल में साथ देती थी। लेकिन दोनों के दिलों में कुछ और ही चल रहा था – एक अनकही कामना, एक छुपा हुआ आकर्षण जो हम दोनों डरते थे कहीं दोस्ती न बिगड़ जाए।
जतिन शर्मा अपने घर के लिविंग रूम में बैठा हुआ था। रात के करीब ग्यारह बज चुके थे और उसके माता-पिता दो दिन के लिए अपने रिश्तेदार के यहाँ गए हुए थे। वो पूरी तरह से अकेला था। जतिन की उम्र चौबीस साल थी, हाइट छह फीट, और बदन एकदम फिट जिम से। उसने एक लूज टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे।
तभी दरवाजे की घंटी बजी। जतिन ने सोचा शायद कोई डिलीवरी वाला होगा। उसने दरवाजा खोला तो सामने वंशिका खड़ी थी। वो उसकी पड़ोसन थी, उम्र बाईस साल, और उसका फिगर ती चौंतीस अठाइस छत्तीस का परफेक्ट आवर ग्लास शेप था। गोरी त्वचा जैसे दूध, लंबे काले बाल कमर तक, और आज उसने एक बहुत ही छोटी सी काले रंग की नाइटी पहनी हुई थी जो बहुत पतली और ट्रांसपेरेंट थी। नाइटी इतनी छोटी थी कि उसकी गोरी जांघें पूरी दिख रही थीं और ऊपर से उसका ब्लैक ब्रा साफ झलक रहा था। उसके बाल गीले थे, शायद अभी नहा कर आई थी।
“क्या हुआ वंशिका?” जतिन ने पूछा।
“मेरे घर में लाइट चली गई है, थोड़ी देर यहीं बैठूँ?” वंशिका ने कहा और बिना इजाजत के अंदर घुस गई।
जतिन थोड़ा चौंका लेकिन कुछ नहीं बोला। वंशिका अंदर आकर उसके बगल में सोफे पर बैठ गई। उसने अपने पैर क्रॉस किए और जतिन को देखकर एक अजीब सी मुस्कान दी। उसकी मुस्कान में कुछ अलग था, कुछ शरारती और कुछ खतरनाक।
“तुम्हारे माता-पिता नहीं हैं?” वंशिका ने पूछा।
“नहीं, दो दिन के लिए बाहर गए हैं,” जतिन ने कहा।
“अच्छा,” वंशिका ने कहा और अपना हाथ जतिन के जांघ पर रख दिया।
जतिन एकदम से चौंक गया। “वंशिका, ये क्या कर रही हो?”
“कुछ नहीं, बस ऐसे ही,” वंशिका ने कहा और उसका हाथ जतिन की जांघ पर सहलाने लगा।
जतिन उठकर दूसरी तरफ बैठ गया। “तुम ठीक तो हो?”
वंशिका उठी और जतिन के पास आकर बैठ गई। इस बार और भी करीब। “मैं बहुत ठीक हूँ, जतिन। तुम्हें पता है, मैं तुम्हें कब से देख रही हूँ। तुम्हारा फिट बदन, तुम्हारी मस्कुलर बॉडी, और वो जो तुम्हारे शॉर्ट्स में छुपा है,” वंशिका ने जतिन के शॉर्ट्स की ओर इशारा किया।
जतिन का चेहरा लाल हो गया। “वंशिका, प्लीज, ये सब…”
“क्या ये सब?” वंशिका ने कहा और जतिन के कंधों पर अपने हाथ रख दिए। “मैं तुम्हें चाहती हूँ, जतिन। और आज मैं तुम्हें पाऊँगी।”
“नहीं, ये सही नहीं है,” जतिन ने कहा और उठने की कोशिश की।
वंशिका ने उसे धक्का दिया और जतिन सोफे पर गिर गया। वंशिका तुरंत उसके ऊपर चढ़ गई। उसने अपने दोनों पैर जतिन की कमर के दोनों तरफ कर लिए और उसके ऊपर बैठ गई। जतिन पूरी तरह से शॉक्ड था। वो कुछ समझ नहीं पा रहा था कि ये क्या हो रहा है।
“वंशिका, उतर जाओ,” जतिन ने कहा।
“नहीं,” वंशिका ने कहा और अपने हाथ जतिन की छाती पर फेरने लगी। “मैंने बहुत दिनों से प्लान किया है ये। आज तुम मेरे हो।”
वंशिका ने अपनी नाइटी के स्ट्रैप्स नीचे खिसकाने शुरू किए। एक स्ट्रैप उतरा, फिर दूसरा। उसकी नाइटी ढीली हो गई और उसके कंधे बाहर आ गए। फिर उसने अपनी नाइटी को धीरे से नीचे खींचा। नाइटी उतरती गई और उसके ब्लैक लेस ब्रा में कसे हुए गोल मोटे स्तन सामने आ गए। वो दो पहाड़ जैसे थे जो ब्रा से बाहर निकलने को बेकरार थे।
जतिन की आँखें बड़ी हो गईं। वो देखता रहा। वंशिका ने अपने पीछे हाथ ले जाकर ब्रा का हुक खोला और वो भी उतार दी। उसके स्तन आजाद हो गए। गोल, गुलाबी निप्पल्स वाले, पूरी तरह से नंगे स्तन जो थोड़े ऊपर की ओर उठे हुए थे। निप्पल्स कड़े हो चुके थे।
“कैसे लगे मेरे दूध?” वंशिका ने शरारत से पूछा और अपने हाथों से अपने स्तन दबाने लगी।
जतिन हिल नहीं पा रहा था। वो पूरी तरह से जम चुका था। वंशिका ने उसका हाथ पकड़ा और अपने स्तन पर रख दिया। “दबाओ इन्हें। बहुत मजा आएगा तुम्हें।”
जतिन का हाथ उसके स्तन की गर्मी महसूस कर रहा था। वो इतने नरम थे, इतने गोल। वंशिका ने अपना हाथ जतिन के सिर के पीछे से ले गई और उसे अपने स्तन की ओर धकेल दी। “चूसो इन्हें। मेरे निप्पल कड़े हो गए हैं तुम्हें देखकर।”
जतिन ने कुछ नहीं किया। वंशिका ने जबरदस्ती उसका मुँह अपने स्तन पर दबा दिया। “चूसो, मैंने कहा।”
जतिन अनइच्छा से भी उसके निप्पल को मुँह में ले लिया। वो गर्म था, नरम था। वंशिका आहें भरने लगी। “हाँ, ऐसे ही। और जोर से चूसो।”
जतिन ने दूसरा स्तन भी चूसा। वंशिका उसके ऊपर बैठी हुई थी और अपनी कमर हिला रही थी। उसकी नाइटी अभी भी कमर तक थी लेकिन नीचे से वो पूरी तरह से नंगी थी क्योंकि उसने अंदर कुछ नहीं पहना था।
वंशिका उठी और खड़ी हो गई। उसने अपनी नाइटी को पूरी तरह से उतार दिया। अब वो पूरी तरह से नंगी खड़ी थी जतिन के सामने। उसकी चूत पर हल्के बाल थे, एक सुंदर ट्रिम किया हुआ लुक। उसकी चूत की फाँकें गुलाबी थीं और थोड़ी नमी से चमक रही थीं। उसकी गांड दो गोल गोल गालों में बंटी हुई थी जो बहुत सुंदर आकार में थी।
“अब तुम्हारी बारी,” वंशिका ने कहा और जतिन की टी-शर्ट पकड़कर खींचने लगी।
“नहीं, प्लीज,” जतिन ने कहा।
“चुप,” वंशिका ने कहा और उसकी टी-शर्ट उतार दी। फिर उसने जतिन के शॉर्ट्स का नाड़ा खोला और शॉर्ट्स नीचे खींच दिए। जतिन का अंडरवियर सामने आया जिसमें उसका लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था।
“देखो, तुम्हारा लंड भी मुझे चाहता है,” वंशिका ने हँसते हुए कहा और जतिन का अंडरवियर भी उतार दिया।
जतिन का सात इंच का लंड सामने आ गया। मोटा, लाल, और कड़ा। वंशिका की आँखें लालच से चमक उठीं। “कितना बड़ा लंड है तुम्हारा। आज मैं इसे पूरी तरह से लूँगी।”
वंशिका घुटनों के बल बैठ गई और जतिन के लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया। वो गर्म था, कड़ा था। उसने उसे सहलाया और फिर अपने मुँह में ले लिया। जतिन एकदम से कांप गया। वंशिका ने उसका पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और गले तक लगा दिया। फिर वो ऊपर नीचे करने लगी।
“ऊह,” जतिन से आवाज निकल गई।
वंशिका ने लंड को मुँह से बाहर निकाला और जतिन को देखकर मुस्कुराई। “मजा आ रहा है ना? अभी तो शुरुआत है।”
वंशिका उठी और फिर जतिन के ऊपर चढ़ गई। इस बार उसने अपनी चूत को जतिन के लंड के ठीक ऊपर रखा। “मैं तुम्हें अपने अंदर लूँगी, जतिन। तुम्हारा ये मोटा लंड मेरी चूत में जाएगा।”
“वंशिका, प्लीज, मत करो,” जतिन ने कहा।
“बस करो,” वंशिका ने कहा और एक ही बार में नीचे बैठ गई। जतिन का लंड उसकी चूत में पूरा का पूरा घुस गया।
“आह,” दोनों की मुँह से आवाज निकली।
वंशिका की चूत बहुत टाइट थी, गर्म थी, और गीली थी। जतिन का लंड उसे पूरी तरह से भर रहा था। वंशिका ने अपने हाथ जतिन की छाती पर रखे और ऊपर नीचे उछलने लगी।
“कितना अच्छा लग रहा है,” वंशिका ने कहा और अपनी गति तेज कर दी। वो जतिन के ऊपर एक पागल घोड़ी की तरह उछल रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे, उसकी चूत जतिन के लंड को कसकर पकड़े हुए थी।
जतिन भी अब कंट्रोल खो चुका था। उसने अपने हाथ वंशिका की कमर पर रखे और नीचे से धक्के देना शुरू कर दिया। वंशिका चिल्लाने लगी।
“हाँ, चोदो मुझे। और जोर से चोदो। मेरी चूत फाड़ दो अपने इस मोटे लंड से,” वंशिका चिल्ला रही थी।
जतिन ने उसे पलट दिया। अब वंशिका नीचे लेटी हुई थी और जतिन ऊपर था। उसने वंशिका के पैर अपने कंधों पर रखे और जोर जोर से धक्के लगाने शुरू किए। वंशिका की चूत से पच पच की आवाजें आ रही थीं।
“आह, माँ, बहुत गहरा जा रहा है,” वंशिका कराह रही थी।
जतिन ने पंदह मिनट तक उसकी चूत चोदी। फिर वो झड़ने वाला था। “मैं झड़ने वाला हूँ,” उसने कहा।
“अंदर ही झाड़ना,” वंशिका ने कहा।
जतिन ने कुछ और जोर से धक्के लगाए और फिर अपना गर्म वीर्य वंशिका की चूत में छोड़ दिया। वंशिका भी झड़ गई। दोनों थककर एक दूसरे से लिपट गए।
कुछ देर बाद वंशिका उठी और जतिन को देखकर मुस्कुराई। “अभी तो खत्म नहीं हुआ है। अब मेरी गांड की बारी है।”
“क्या?” जतिन चौंका।
“हाँ, मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी गांड भी चोदो,” वंशिका ने कहा और घोड़ी बन गई।
उसने अपनी गांड हवा में उठा दी। दोनों गोल गाल एकदम साफ दिख रहे थे। बीच में उसका गांड का छोटा सा छेद था। वंशिका ने पीछे मुड़कर देखा। “आओ, डालो अपना लंड मेरी गांड में।”
जतिन ने अपने लंड पर थूक लगाया और वंशिका की गांड के छेद पर रखा। एक धक्का दिया लेकिन अंदर नहीं गया। वंशिका ने अपना हाथ पीछे ले जाकर अपनी गांड के गाल फैलाए। “डालो, मैं सहन कर लूँगी।”
जतिन ने फिर से धक्का दिया और इस बार उसका लंड का सिरा अंदर घुस गया। वंशिका दर्द से चीखी लेकिन कहने लगी। “और अंदर करो, पूरा डाल दो।”
जतिन ने एक जोर का धक्का दिया और पूरा लंड उसकी गांड में घुसा दिया। वंशिका की साँसें तेज हो गईं। “कितना मोटा है तुम्हारा लंड। मेरी गांड फट रही है।”
जतिन ने धक्के लगाने शुरू किए। पहले धीरे धीरे, फिर तेजी से। वंशिका की गांड बहुत टाइट थी और उसे बहुत मजा आ रहा था। वो चिल्ला रही थी।
“चोदो मेरी गांड। और तेज चोदो। मैं तुम्हारी रंडी हूँ आज। मेरी गांड फाड़ दो,” वंशिका पागल होकर चिल्ला रही थी।
जतिन ने उसके बाल पकड़े और पीछे की ओर खींचा। वंशिका का सिर ऊपर उठ गया। जतिन ने जोर जोर से धक्के लगाए। दस मिनट बाद वो फिर से झड़ने वाला था। उसने लंड बाहर निकाला और वंशिका की गांड पर ही अपना वीर्य छोड़ दिया।
वंशिका थककर बिस्तर पर गिर गई। जतिन भी उसके बगल में लेट गया। दोनों पसीने से लथपथ थे।
“तुम बहुत अच्छे चोदे हो,” वंशिका ने कहा और जतिन के लंड को सहलाने लगी।
“तुमने ये सब क्यों किया?” जतिन ने पूछा।
“क्योंकि मैं तुम्हें चाहती थी। और जो चीज मैं चाहती हूँ, मैं उसे पा लेती हूँ,” वंशिका ने कहा और जतिन के होठों पर किस कर दी।
रात भर वंशिका ने जतिन से तीन बार और चुदवाया। कभी वो ऊपर बैठकर चुदती, कभी पीछे से चुदवाती, कभी जतिन के मुँह पर बैठकर अपनी चूत चटवाती। सुबह होने तक दोनों पूरी तरह से थक चुके थे।
वंशिका उठी और अपने कपड़े पहनने लगी। “मैं जा रही हूँ। लेकिन याद रखना, अब मैं रोज आऊँगी। और तुम मुझे रोज चोदोगे। अगर मना किया तो मैं सबको बता दूँगी कि तुमने मुझे जबरदस्ती चोदा।”
जतिन चौंककर उसे देखता रहा। वंशिका ने अपनी नाइटी ठीक की और दरवाजे की ओर बढ़ी। रुककर उसने पीछे मुड़कर देखा और मुस्कुराई। “कल रात फिर मिलेंगे। तब तक अपना लंड तैयार रखना। मैं और ज्यादा चाहूँगी।”
कहकर वंशिका चली गई। जतिन बिस्तर पर लेटा हुआ उसे देखता रहा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि ये क्या हुआ था। लेकिन एक बात तय थी, अब उसकी जिंदगी बदल चुकी थी। वंशिका उसकी थी, और वो रोज उसे चोदेगी, चाहे जतिन चाहे या ना चाहे।
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